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शादीशुदा विवाद: पत्नी का खुलासा – “सुहागरात के लिए कई बार कहा, लेकिन पति नाकाम”

कानपुर .कानपुर के किशोर नगर की रहने वाली एक युवती ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. युवती का कहना है कि उसकी शादी 25 अप्रैल 2025 को हमीरपुर निवासी युवक से पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम के साथ हुई थी. उसके पिता ने होटल, जेवर, कैटरिंग और अन्य इंतजाम मिलाकर करीब 38 लाख रुपये खर्च किए थे. परिवार को उम्मीद थी कि बेटी की नई जिंदगी खुशहाल होगी, लेकिन शादी के बाद हालात बिल्कुल उलट निकले. पत्नी ने कहा, 'मैंने पति से सुहागरात के लिए कई बार कहा लेकिन वो हमेशा टालता रहा. बाद में मुझे पता चला कि वो नपुंसक है. मेरे साथ फ्रॉड हुआ है.'  पति ने दूरी बनाए रखी पीड़िता के मुताबिक, 26 अप्रैल को वह विदा होकर ससुराल पहुंची. शादी के बाद के शुरुआती चार दिनों में ही उसे पति के व्यवहार पर संदेह होने लगा. उसका आरोप है कि पति ने उससे दूरी बनाए रखी और सुहागरात तक नहीं मनाई. उसने कई बार इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन हर बार पति ने टालमटोल कर दी. कुछ दिनों बाद वह मायके आ गई. फिर पति उसे नोएडा ले गया, जहां उसे अपने बड़े चाचा के फ्लैट में रखा गया. युवती का कहना है कि वहां करीब एक महीने तक साथ रहने के बावजूद पति ने उससे शारीरिक संबंध नहीं बनाए. इसी दौरान उसे शक हुआ कि पति शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है. धमकियां देने का आरोप जब उसने इस बारे में ससुर और उनके बड़े भाई से बात की तो, उसके मुताबिक, पहले उसे समझाने और इलाज कराने का भरोसा दिया गया. आरोप है कि उससे कहा गया कि वह बेटे के साथ पत्नी की तरह रहे, इलाज करवा दिया जाएगा और पूरा खर्च उठाया जाएगा. लेकिन जब उसने अपनी आपत्ति जताई तो उसे कथित तौर पर धमकियां दी जाने लगीं. पांच लाख लाने को कहा गया पीड़िता का यह भी आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये और लाने को कहा गया ताकि इलाज कराया जा सके. मना करने पर उसे बदनाम करने और परिवार की इज्जत खराब करने की धमकी दी गई. युवती का कहना है कि ससुराल पक्ष ने न सिर्फ बेटे की सच्चाई छिपाई, बल्कि शादी में खर्च हुआ पैसा भी व्यर्थ कर दिया और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. मामला दर्ज हुआ आखिरकार परेशान होकर युवती अपने पिता के घर लौट आई और कानपुर के रावतपुर थाने में पति, ससुर और ताऊ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. थाना प्रभारी कमलेश राय के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और एक टीम हमीरपुर भेजी जाएगी. वहीं, लड़की के परिवार का कहना है कि वे फिलहाल ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन उन्हें न्याय की उम्मीद है. इस पूरे मामले ने एक बार फिर शादी से पहले जरूरी जानकारियां छिपाने और पारिवारिक दबाव के मुद्दे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

2025 में AI ऐप्स के सबसे बड़े यूज़र बने भारतीय, फिर भी इस एक चीज़ में रह गए पीछे

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने के मामले में भारत सबसे आगे निकल रहा है। भारत में सबसे ज्यादा जेनरेटिव AI ऐप डाउनलोड किए जा रहे हैं। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टावर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में साल-दर-साल 207 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत जेनरेटिव AI ऐप डाउनलोड करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। देश में सबसे ज्यादा एआई ऐप और चैटबॉट डाउनलोड किए गए हैं। इससे देश को जेन-AI इस्तेमाल करने के मामले में अमेरिका से आगे निकलने में मदद मिली। भारत में डाउनलोड हुए सबसे ज्यादा एआई ऐप मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टावर की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जेनरेटिव एआई ऐप सबसे ज्यादा भारत में डाउनलोड किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में लगभग 20 प्रतिशत या हर 5 में से 1 जेनरेटिव AI ऐप भारत में डाउनलोड हुआ है। हालांकि, यह बड़ा यूजर बेस रेवेन्यू में नहीं बदलता है। 2025 में इन ऐप खरीदारी में भारतीय यूजर्स का हिस्सा सिर्फ लगभग 1 प्रतिशत रहा था। रेवन्यू में रह गया पीछे यह अंतर उन कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताता है जो तेजी से अपनाए जाने को लंबे सम तक बने रहने वाले रेवेन्यू में बदलने की कोशिश कर रही हैं। ऐप डाउनलोड की ग्रोथ भले ही साल-दर-साल 320 प्रतिशत बढ़ी हो, लेकिन रेवेन्यू की ग्रोथ अभी काफी पीछे है। नवंबर में इन-ऐप खरीदारी में 22 प्रतिशत और दिसंबर में 18 प्रतिशत की गिरावट आई है। फ्री ऑफर का दिखा असर डाउनलोड में यह उछाल प्रमोशनल पुश और DeepSeek, Grok, और Meta AI जैसे नए AI प्लेटफॉर्म के आने से आया है। साथ ही, इसका एक बड़ी कारण भारत में, Google द्वारा अपने AI Pro प्लान का एक साल का फ्री एक्सेस देने भी है। इतना ही नहीं, Perplexity ने Airtel के साथ मिलकर अपना Pro प्लान भारतीय यूजर्स के लिए फ्री किया था। OpenAI ने भी कुछ समय के लिए ChatGPT Go का एक साल का फ्री एक्सेस दिया है। कंपनियों द्वारा दिया जा रहा फ्री ऑफर्स का असर दिख रहा है। नवंबर में फ्री ChatGPT Go एक्सेस के लॉन्च के बाद, भारत में ChatGPT से होने वाला रेवेन्यू 33 प्रतिशत और दिसंबर में 32 प्रतिशत कम हो गया। हालांकि, OpenAI प्लेटफॉर्म ने अपना दबदबा बनाए रखा और भारत में जेनरेटिव AI इन-ऐप रेवेन्यू का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अपने पास रखा। पिछले हफ्ते भारत में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया गया। इसके दौरान भी AI पर काफी चर्चा हुई। कुछ समय पहले ही OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने बताया था कि भारत में चैटजीपीटी के हर हफ्ते 100 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर हैं। इससे भी साफ पता चलता है कि भारत में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यूजर्स एआई ऐप्स और चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भोपाल में बड़ा बदलाव: पुराने सतपुड़ा-विंध्याचल भवन हटेंगे, अरेरा हिल्स पर तैयार होगा आधुनिक परिसर

भोपाल भोपाल के अरेरा हिल्स पर वल्लभ भवन के सामने 40 साल से ज्यादा पुराने सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को तोड़ने  की प्लानिंग पूरी हो गई है। पुराने भवन को तोड़कर यहां कोर्टयार्ड एनेक्सी बिल्डिंग तैयार की जाएगी जो आपस में ट्विन टावर की तर्ज पर कनेक्ट होंगी। इस भवन में मल्टी लेवल पार्किंग और मल्टी लेवल फ्लोर एक साथ निर्मित किए जाएंगे। शुरुआत के चार से पांच फ्लोर तक आप अपने दो पहिया और चार पहिया वाहन में बैठकर ही संबंधित कार्यालय पहुंच सकेंगे। मल्टी लेवल पार्किंग मॉडल में अधिक चौड़ाई वाले घुमावदार रास्तों को इस प्रकार तैयार किया जाएगा जो संबंधित कार्यालय के फ्लोर पर जाकर लैंड होंगे। शहर में यह व्यवस्था फिलहाल प्राइवेट मॉल में मौजूद है। सरकारी खर्च कम से कम सरकार सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए जीरो फाइनेंस मॉडल लागू करने का प्रयास भी कर रही है। कंस्ट्रक्शन पर बगैर सरकारी खर्च के यह निर्माण हाउसिंग बोर्ड नोडल एजेंसी की निगरानी में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में काम करने वाली बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों के माध्यम से करवाया जा सकता है। मंत्रालय में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन सभी मुद्दों पर जिला प्रशासन, हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम के अधिकारियों के साथ चर्चा में ये बातें तय हुई हैं।   शहर का ब्यू पाइंट बनेगा अरेरा हिल्स पहाड़ी पर बनने वाने मिनी सेंट्रल विस्टा को दिल्ली के नए संसद भवन की तर्ज पर आकार दिया जाएगा। नागरिक यहां अपने परिजनों के साथ आकर व्यू पाइंट की सैर कर सकेंगे। सरकारी भवन की थीम की बजाए इसे व्यू पाइंट बनाया जाएगा।     तीन चरण में बनेगा प्रोजेक्ट     सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को एक साथ नहीं तोड़ा जाएगा     सतपुड़ा भवन का एक हिस्सा टूटेगा। उतना फिर से बनाया जाएगा। उसके बाद बचा हुआ हिस्सा तोड़कर बनाएंगे     इसी तरह विंध्याचल भवन का भी निर्माण होगा।     दोनों के बीच ग्रीन पॉकेट कोर्टयाट के तर्ज पर विकसित होगा।     भवनों की डिजाइन इस तरह रखी जाएगी कि दीवारों से बंद हो और खुले आसमान के नीचे भी हो।     यहां इस तरह एक दूसरे को जोड़ा जाएगा कि गाड़ी के साथ ही लोग संबंधित भवन के संबंधित फ्लोर तक पहुंच जाएं।     दोनों भवनों के साथ ही कोर्टयार्ड से पूरी कनेक्टिविटी होगी। लिफ्ट की जरूरत नहीं होगी।

उच्च शिक्षा में बढ़ी जेब की मार: डिग्री, टीसी और माइग्रेशन सर्टिफिकेट की फीस तीन गुना

सागर सागर के डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सत्र-2025-26 के लिए डिग्री, टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र), माइग्रेशन सर्टिफिकेट समेत अन्य सुविधाओं के शुल्क में इजाफा किया गया है। बीते माह जारी हुए आदेश में उक्त तीनों प्रमुख प्रमाण पत्रों के शुल्क में तीन गुना तक का इजाफा किया गया है। अचानक फीस बढ़ने से विद्यार्थी परेशान है। एक साथ 50 से तीन गुना तक फीस बढ़ने से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। तीन गुना बढ़े दाम, छात्रों की बढ़ी परेशानी अब तक विश्वविद्यालय में डिग्री के लिए 250 रुपए ही शुल्क लिया जाता है, लेकिन अब वही डिग्री 500 रुपए में दी जा रही है। इसके साथ स्थानांतरण प्रमाण पत्र में 100 रुपए खर्च आता है, जो अब बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया है। इसके अलावा डुप्लीकेट उपाधि, प्रमाण पत्र, डुप्लीकेट अंकसूची और नाम सुधार (अंकसूची एवं टीआर में सुधार) आदि में भी फीस वृद्धि की गई। इन सभी करीब 50 प्रतिशत ज्यादा फीस बढ़ाने से विद्यार्थियों की आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।   विवि प्रशासन की ओर से दलील दी गई है कि पिछले 12 वर्षों से विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं में किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं बढ़ाया गया था। विवि प्रशासन ने इसके लिए एक समिति का गठन किया था, जिसने देश के अन्य विश्वविद्यालयों की फीस स्ट्रक्बर का अध्ययन किया और फिर उसी आधार पर समिति ने अनुशंसा की थी। नहीं मिल रहीं सुविधाएं विद्यार्थियों का कहना है कि मार्कशीट, टीसी और अन्य दस्तावेजों में विभिन्न प्रकार की गलतियां मिलती हैं। परीक्षा समय पर आयोजित नहीं होती है। विश्वविद्यालय के हॉस्टल, लाइब्रेरी सहित विभिन्न विभागों में हमें सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। लाइब्रेरी के कंप्यूटर बंद हैं। डिग्री और अंकसूची निकलवाने के लिए कई बार विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में विवि प्रशासन की ओर से फीस वृद्धि करने का निर्णय गलत है।   समिति की अनुशंसा पर निर्णय हुआ है में बढ़ोतरी के लिए समय-समय पर हर तरह के शुल्क आदि में उचित वृद्धि 12 वर्षों बाद इस तरह के शुल्क को रिवाइज करते हुए वृद्धि की गई है। केंद्र सरकार से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त होते हैं कि आंतरिक राजस्व की जानी चाहिए। इसी क्रम में सक्षम प्राधिकारी द्वारा गठित समिति ने देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगने वाले इस तरह के शुल्क को दृष्टिगत रखते हुए अनुशंसा की, जिसके आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने स्वीकृति के बाद शुल्क में वृद्धि की गई है। विवेक जायसवाल, मीडिया प्रभारी इनका भी बढ़ा शुल्क     डुप्लीकेट उपाधि (डिग्री) -1000 रुपए     डुप्लीकेट प्रवजन प्रमाण पत्र (माइग्रेशन सर्टिफिकेट)- 500 रुपए     डुप्लीकेट अंकसूची (मार्कशीट)- 500 रुपए     नाम सुधार (मार्कशीट एवं टीआर में)- 200 रुपए     प्रावधिक उपाधि प्रमाण पत्र (प्रोविशनल डिग्री सर्टिफिकेट)- 300 रुपए     नाम/सरनेम परिवर्तन शुल्क -750 रुपए     परीक्षा केंद्र परिवर्तन शुल्क – 1000 रुपए     नामांकन विलंब शुल्क- 150 रुपए

ग्रामीण विकास को नई रफ्तार: हरियाणा के 111 गांवों में बनेंगी स्मार्ट गलियां

चंडीगढ़ हरियाणा के 111 गांवों में स्मार्ट गलियों का विकास किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 1 करोड़ 19 लाख 39 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में दी। पंवार ने बताया कि जिन गांवों में मतदाताओं की संख्या 10 हजार है, वहां एक गली को स्मार्ट गली के रूप में विकसित किया जाएगा। बादली विधानसभा क्षेत्र के बादली गांव को भी इस योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का दृष्टिकोण है कि जिस प्रकार शहरों में साफ-सुथरी और व्यवस्थित गलियां होती हैं, उसी तर्ज पर गांवों में भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मार्ट गलियां विकसित की जाएं। शून्यकाल के दौरान विधायक कपूर वाल्मीकि द्वारा मिट्टी उठाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि यदि ग्राम पंचायत प्रस्ताव भेजती है तो खनन विभाग के अधिकारियों को परमिट जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे। पंचायत भूमि पर मालिकाना हक के लिए विशेष कैंप कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाल ने पंचायत भूमि पर बने मकानों को वैध करने का मुद्दा उठाया। पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार जहां पंचायत की फिरनी, पौंड या तालाब हैं, वहां बने मकानों को मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले सत्र में पेश किए गए विधेयक के तहत ग्राम पंचायत की कृषि भूमि या फिरनी पर मकान नहीं होने चाहिए। हालांकि, यदि मकान ग्राम पंचायत की भूमि पर है तो 500 गज तक के क्षेत्रफल पर मालिकाना हक दिया जा रहा है।

कच्चे से पक्के आशियाने का सफर, जनमन योजना ने रनिया बाई को दिया सम्मानभरा जीवन

रायपुर कभी भिक्षाटन और दिहाड़ी मजदूरी से जीवन यापन करने वाली श्रीमती रनिया बाई के परिवार के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था। कोरिया जिला के बैकुण्ठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़तर में रहने वाला यह परिवार कच्ची झोपड़ी में मौसम की मार झेलते हुए जीवन गुजार रहा था। पति अवतार साय के साथ रनिया बाई को जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत अकुशल श्रम में रोजगार मिलने लगा, तब कुछ राहत मिली, लेकिन स्थायी आवास का सपना अब भी दूर था। परिस्थितियां तब बदलीं जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी पहल पर संचालित ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना‘ के अंतर्गत उन्हें पक्के मकान के लिए सहायता स्वीकृत हुई। ग्राम पंचायत के सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने नया पक्का घर बनाया। अब उनके पास सुरक्षित आवास और शौचालय की सुविधा है। रनिया बाई बताती हैं कि बरसात की रातें अब चिंता में नहीं, सुकून में गुजरती हैं। बच्चों के भविष्य को लेकर भी मन में विश्वास जागा है। सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि अंत्योदय राशन कार्ड से नियमित खाद्यान्न और आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा ने उनके जीवन को स्थिरता दी है। साथ ही राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ भी मिल रहा है।   शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिलने से एक निराश्रित परिवार की जिंदगी में आशा, सुरक्षा और आत्मविश्वास का नया अध्याय जुड़ गया है।

एम्स में नई सुविधा: QR Code स्कैन करें और सीधे पहुंचें अपनी OPD तक

भोपाल एम्स की भूलभुलैया से अब मरीजों और परिजनों को राहत मिलने वाली है। यहां मोबाइल ऐप और क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली शुरू होगी जिससे मरीजों को डॉक्टर के केबिन और पर्चा बनवाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। ऐप खोलते या क्यूआरकोड स्कैन करते ही मोबाइल के स्क्रीन पर मरीजों को सीधा विभाग और वार्ड तक पहुंचने का सही रास्ते दिखने लगेंगे। एम्स भोपाल ने आइआइटी इंदौर की दृष्टि टीम से मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। यह प्रणाली तकनीक के जरिए अस्पताल परिसर की जटिलता को सरल बनाएगी। क्यूआर कोड स्कैन करते ही खुलेगा नक्शा स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली का पहला स्वरूप वेब आधारित होगा। प्रमुख प्रवेश द्वारों और अहम स्थानों पर क्यूआर कोड लगेंगे। क्यूआर कोड स्कैन करते ही इंटरैक्टिव मानचित्र खुलेगा। यह मानचित्र चरण-दर- चरण सही दिशा बताएगा। मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। भवनों के बीच जाने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर होता है, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। इससे दिशा-निर्देशन और अधिक सटीक होगा। पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू एम्स प्रवक्ता डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि आइआइटी इंदौर के साथ मिलकर सिस्टम को विकसित कर रहा है। इसे अप्रेल के अंत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे अहम बात, बड़े अस्पताल को लेकर जो झिझक होती है, वह कम होगी।

आईपीएल 2026 का शेड्यूल जारी: 28 मार्च से शुरुआत, 31 मई को फाइनल

मुंबई आईपीएल ने पिछली नीलामी से एक दिन पहले, 15 दिसंबर 2025 को फ्रेंचाइजी को बताया था कि 2026 एडिशन 26 मार्च से शुरू होगा, लेकिन ईएसपीएन क्रिकइंफो को पता चला है कि आईपीएल ने अंदरूनी तौर पर शुरू होने की तारीख बदलकर 28 मार्च करने और फाइनल 31 मई को कराने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि आईपीएल गवर्निंग काउंसिल अगले हफ्ते शेड्यूल जारी करने के प्लान को फाइनल करने के लिए मीटिंग करेगी, जिसमें देरी हुई है क्योंकि असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। कोलकाता (पश्चिम बंगाल में) और चेन्नई (तमिलनाडु में) क्रमशः कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के होम बेस हैं, जबकि असम की राजधानी गुवाहाटी राजस्थान रॉयल्स (आरआर) का दूसरा वेन्यू है। जब से आईपीएल 2008 में शुरू हुआ है, जब देश में आम चुनाव हुए हैं – 2009, 2014, 2019 और 2024 में – या किसी राज्य में विधानसभा चुनाव हुए हैं, शेड्यूल दो हिस्सों में अनाउंस किया गया है। उम्मीद है कि जीसी यह तय करेगा कि इस बार भी वही प्लान रखा जाए, या पहले तीन राज्यों के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करने के लिए इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया का इंतज़ार किया जाए। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल इस बात पर भी चर्चा कर सकती है कि टूर्नामेंट का ओपनिंग मैच कहाँ खेला जाएगा, क्योंकि इसमें डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) शामिल होगी। पिछले जून में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी के जीत के जश्न के दौरान भगदड़ मचने के बाद, जिसमें 11 फैंस की मौत हो गई थी, आरसीबी कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के साथ इस बात पर चर्चा कर रहा है कि टीम के सात होम मैच उसी जगह पर खेले जाएंगे या कहीं और शिफ्ट किए जाएंगे। आरसीबी ने नवी मुंबई, रायपुर और पुणे सहित कुछ दूसरे वेन्यू शॉर्टलिस्ट किए थे।  

मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति लागू, शराब दुकानों के विस्तार पर रोक

भोपाल मध्य प्रदेश में अब नई आबकारी नीति लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने साल 2026-27 के लिए आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जारी की गई नई नीति के तहत कहा गया कि, प्रदेश में कोई भी नई शराब दुकान नहीं खुलेगी। अहाते पहले की तरह अब भी बंद ही रहेंगे। वहीं, एक समूह को पांच से ज्यादा दुकानें आवंटित नहीं की जाएंगी। वहीं, कोई भी पुरानी शराब दुकान का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ये शर्तें माननी होंगी नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर की दूरी के प्रतिबंध यथावत रहेगा। -मदिरा दुकानों की दूरी: मदिरा दुकानों को नर्मदा के तट से 5 किलोमीटर की दूरी के प्रतिबंध के साथ यथावत रखा गया है -पवित्र नगरों में प्रतिबंध: पवित्र नगरों में मदिरा दुकानों के प्रबंधन को यथावत रखा गया है -नई दुकानें नहीं: कोई भी नवीन मदिरा दुकान नहीं खोले जाने का निर्णय लिया गया है -अहाते बंद: मदिरा दुकानों के अहाते नहीं खोले जाएंगे, उन्हें पूर्ववत बंद रखा जाएगा -नवीनीकरण बंद: मदिरा दुकानों के नवीनीकरण का विकल्प समाप्त कर दिया गया है -ई-टेंडर और ई-ऑक्शन: समस्त 3553 मदिरा दुकानों का निष्पादन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा -आरक्षित मूल्य: ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों का आरक्षित मूल्य, वर्तमान वर्ष के मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर निर्धारित किया जाएगा -समूह बनाना: ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों के समूह बनाये जाएंगे। अधिकतम 5 मदिरा दुकानों का एक समूह बनाया जा सकेगा -वर्गीकरण: आरक्षित मूल्य के आधार पर, जिले के समूह को तीन-चार बैच में वर्गीकृत किया जाएगा। -बैच आधारित कार्यवाही: बैच के आधार पर तीन-चार चरण में ई-टेंडर और ई-ऑक्शन की कार्यवाही की जाएगी। -जालसाजी रोकथाम: जालसाजी की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान/ई-बैंक गारंटी ही मान्य की जाएगी। साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा (FD) मान्य नहीं होगी।   दस्तावेज़ में निम्नलिखित मुख्य बिंदु हैं -मदिरा की ड्यूटी दरें: विनिर्माण इकाई, बार आदि की लाइसेंस फीस यथावत रखी गई है। -निर्यात प्रोत्साहन: ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को दृष्टिगत रखते हुए निम्नानुसार प्रावधान किए गए हैं- मदिरा के विनिर्माताओं को अपने उत्पाद की कीमत के अनुमोदन की -आवश्यकता नहीं है; विनिर्माता पोर्टल पर निर्धारित व्यवस्था अनुसार अपने उत्पाद की कीमत घोषित कर सकेंगे। -देश के बाहर मदिरा के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए फीस में संशोधन, लेबल पंजीयन में सरलीकरण आदि प्रावधानित किया गया है। -प्रदेश के आदिवासियों स्वसहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने के लिए उनके राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री करने के प्रावधान किया गया।

बढ़ती गर्मी से किसान चिंतित: हरियाणा में समय से पहले बढ़ा तापमान, फसलों को नुकसान की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में मौसम का मिजाज इस बार गड़बड़ाया हुआ है जिसका सीधा असर फसलों पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है। 2012 से लेकर अब तक वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 को छोड़कर मानसून प्रभावी नहीं रहा है। हालांकि 2022 में मानसून में औसत 426 मिलीमीटर की तुलना में 464 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई जबकि 2023 में मानसून में 512.7 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। इस बार मौसम में आए एकाएक बदलाव के बाद फरवरी में ही अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है। 5 मार्च तक अधिकतम तापमान 34 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इकोनॉमिक एंड स्टैटिकल अफेयर्स हरियाणा की वार्षिक रिपोर्ट-2025 के अनुसार 2019 में फरवरी में औसतन अधिकतम तापमान 20.8, 2020 में 22.2, 2021 में 24.7, 2022 में 22.1, 2023 में 25.7 और 2024 में 23.2 रहा जबकि इस बार यह 30 डिग्री तक पहुंच गया है। इस बार सर्दी के मौसम में अभी तक औसत से 57 फीसदी कम बरसात हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल 1 जनवरी से 26 फरवरी तक सिरसा में 6.7 मिलीमीटर, फतेहाबाद में 27.6, हिसार में 17.1, जींद में 24.8, कैथल में 26.6, करनाल में 29.4, पानीपत में 37.5, सोनीपत में 13.9, भिवानी में 23.2, चरखी दादरी में 15.5, झज्जर में 18.5, महेंद्रगढ़ में 12, रेवाड़ी में 15.2, गुरुग्राम में 21.7, नूंह में 12.4, पलवल में 16, फरीदाबाद में 3.2, कुरुक्षेत्र में 56.2, अंबाला में 60.4, यमुनानगर में 43.2 एवं पंचकूला में 48.4 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। वैसे मौसम विभाग का मानना है कि इस बार प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक अच्छी बरसात हो सकती है। मानसून में जुलाई और अगस्त में होती है सबसे अधिक बरसात हरियाणा में 1 जून से 30 सितम्बर तक औसतन 426 मिलीमीटर बरसात दर्ज की जाती है। जुलाई और अगस्त के महीनों में सबसे अधिक बरसात होती है। जून में औसतन 54, जुलाई में 149, अगस्त में 146 और सितम्बर में 76 मिलीमीटर बरसात आमतौर पर होती है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा में सर्द मौसम में 32.4, प्री-मानसून सीजन में 33.6, मानसून सीजन में 426 मिलीमीटर एवं पोस्ट मानसून सीजन में 28.9 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए। हर साल हरियाणा में 554.7 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए, पर 2012 के बाद 2022, 2023 और 2025 को छोड़कर यह आंकड़ा 460 मिलीमीटर को भी पार नहीं कर पा रहा है। 2012 में हरियाणा में महज 307 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत बरसात से 45 फीसदी कम। इसी तरह से 2013 में 452 मिलीमीटर बरसात हुई। 2013 में देश में अंडमान-निकोबार में सबसे अधिक 3757 मिलीमीटर बरसात हुई थी जबकि सबसे कम बरसात का चिंताजनक रिकॉर्ड हरियाणा के नाम रहा था। 2014 में तो पूरे साल 301.3 मिलीमीटर बरसात ही हुई। 2014 में मानसून में 197.3 मिलीमीटर बरसात हुई जबकि होनी चाहिए थी 42 मिलीमीटर। 2015 में पूरे देश में हरियाणा में सबसे कम 437.8 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत से करीब 23 फीसदी कम। 2016 में सर्द ऋतु में महज 1.2 मिलीमीटर जबकि पूरे साल में कुल 392.9 मिलीमीटर ही बरसात हुई। 2017 में मानसून सीजन में 418.8, 2018 में 416.3, 2019 में 418, 2020 में 419.9, 2021 में 423, 2022 में 417.3, 2023 में 512.7, 2024 में 409 मिलीमीटर बरसात हुई थी। 2025 में तो प्रदेश में मानसून में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। इस बार भी मानसून काफी अच्छा बताया जा रहा है। गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब व राजस्थान के बाद हरियाणा देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है। इस रबी सीजन में प्रदेश में करीब 26 लाख हैक्टेयर में गेहूं की फसल है। इस बार दिसम्बर, जनवरी एवं फरवरी माह में औसत से कम सर्दी पड़ी है। तापमान भी अधिक रहा है और कोहरा भी नहीं पड़ा। ऐसे में गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि औसत से करीब 5 से 6 डिग्री अधिक तापमान के चलते गेहूं के अलावा सरसों की फसल पर भी असर पड़ सकता है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमैंटेशन की ओर से जारी एन्वायरनमैंट स्टैटिक 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में कुल भौगोलिक क्षेत्र 44212 वर्ग किलोमीटर में से महज 1559 वर्ग किलोमीटर ही वनाच्छादित क्षेत्र है। यह औसत से बहुत कम है। ऐसे में यहां मौसम का मिजाज बिगड़ा-बिगड़ा रहता है। यही वजह है कि पिछले 2 दशक में उत्तरी भारत के राज्यों में गर्मी का पीरियड बढ़ता जा रहा है और सर्दी का पीरियड सिकुड़ रहा है। 1988 में हुई थी 1108 मिलीमीटर बरसात भारतीय मौसम विभाग चंडीगढ़ के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। हरियाणा में मानसून 30 जून को दस्तक देता है। 2008 में मानसून समय से पहले 13 जून को आया जबकि 1987 में मानसून 27 जुलाई को आया था। मानसून के दौरान पिछले साल 1 जून से लेकर 30 सितम्बर तक हरियाणा में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। आमतौर पर मानसून में 426 मिलीमीटर बरसात होती है। आंकड़ों की बात करें तो साल 1988 में सबसे अधिक 1108 मिलीमीटर बरसात हुई थी। इसी तरह से 1995 में 939 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। 2011 में 374 मिलीमीटर, 2018 में 415 मिलीमीटर व 2020 में 376 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। वैसे हरियाणा में 1995 में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। 16 जिलों में 20 लाख 35 हजार एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। 2840 गांवों और हरियाणा के अनेक शहरों के 28 लाख 87 हजार आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा था।