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84 ईरानी नाविकों के शव तुर्की के प्लेन से श्रीलंका से रवाना, शिया देश ने बदले की कसम खाई

कोलंबो  हिंद महासागर में अमेरिकी हमले का शिकार बने ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. श्रीलंका ने इस हमले में मारे गए 84 ईरानी नाविकों के शव स्वदेश वापस भेज दिए हैं. ये शव श्रीलंका के दक्षिणी तट पर गाले के पास युद्धपोत डूबने के बाद बरामद किए गए थे. बताया गया है कि ये शव शुक्रवार को तुर्किये की एक निजी एयरलाइन के विमान से ईरान रवाना किए गए. यह ईरानी पोत भारत के विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था, जहां उसने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था. अमेरिका ने डुबो दिया था जहाज रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 मार्च को श्रीलंका के गाले तट के पास हिंद महासागर में इस युद्धपोत पर अमेरिकी टॉरपीडो हमला हुआ, जिसके बाद यह डूब गया. हमले के बाद 84 नाविकों के शव बरामद किए गए थे, जबकि 32 लोग जिंदा बच गए, जिनका इलाज श्रीलंका के अस्पताल में किया गया. श्रीलंका के मुख्य मजिस्ट्रेट ने 11 मार्च को करापितिया नेशनल हॉस्पिटल के निदेशक को आदेश दिया था कि वे इन शवों को ईरान के दूतावास को सौंप दें. इससे पहले श्रीलंका सरकार ने कहा था कि हालात सामान्य होने तक शवों को वहीं रखा जाएगा, ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस भेजा जा सके. हमले में बचे 32 नाविकों को रविवार को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई थी. ईरान ने शहीदों के बदले की खाई कसम इस बीच, ईरान ने इस हमले को लेकर कड़ा रुख दिखाया है. न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सेना के कमांडर इन चीफ अमीर हातमी ने कहा है कि ईरान अपने युद्धपोत पर हुए हमले का जवाब जरूर देगा. उन्होंने कहा कि डेना जहाज और उसके जवानों की कुर्बानी ईरानी नौसेना के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी और देश अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए नौसेना को और मजबूत बनाएगा. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह जहाज किसी युद्ध में शामिल नहीं था और सैन्य अभ्यास पूरा करके वापस लौट रहा था, तभी उस पर हमला हुआ. ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे ‘समुद्र में की गई बर्बरता’ बताया.  

राजधानी में गैंगवार जैसी वारदात: हिस्ट्रीशीटर के बेटे पर हमला, अस्पताल तक हमलावरों ने बरसाईं गोलियां

भोपाल अशोका गार्डन क्षेत्र में शनिवार तड़के एक बार फिर गैंगवार की घटना ने शहर में सनसनी फैला दी। कुख्यात बदमाश लल्लू रईस के घर पर बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में लल्लू रईस का बेटा इमरान घायल हो गया, जिसके पैर में गोली लगी है। हमलावरों ने घायल इमरान का पीछा करते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर में भी फायरिंग की, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घर के बाहर घेराबंदी और ताबड़तोड़ फायरिंग जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह करीब 5:45 बजे ऐशबाग का बदमाश शादाब गेट अपने साथियों के साथ शंकर गार्डन स्थित लल्लू रईस के घर पहुंचा। उसके साथ शावर, गुड्डू स्टेशन और अल्लू परवेज सहित 8 से 10 लोग मौजूद थे। बताया जा रहा है कि आरोपित पहले से ही इमरान का पीछा कर रहे थे। जैसे ही इमरान अपने घर पहुंचा, आरोपितों ने पीछे से उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जान बचाने के लिए इमरान तेजी से घर के अंदर घुस गया और गेट बंद कर लिया। इसी दौरान चली एक गोली उसके पैर पर लग गई, जिससे वह घायल हो गया। फायरिंग की आवाज सुनकर इलाके में दहशत फैल गई। गोलीबारी को अंजाम देने के बाद सभी आरोपित मौके से फरार हो गए। हमीदिया अस्पताल परिसर में भी मची अफरा-तफरी घायल इमरान को तत्काल इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि हमलावर अस्पताल तक भी पहुंच गए और वहां भी फायरिंग की। इस दौरान अस्पताल की खिड़की और दीवार पर गोलियां लगीं, जिससे अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हालांकि इस फायरिंग में कोई अन्य व्यक्ति घायल नहीं हुआ। लल्लू रईस ने आरोप लगाया कि अस्पताल में भी उस पर फायरिंग की गई। उसने बताया कि बदमाश उन्हें जान से मारने की नीयत से आए थे, लेकिन गनीमत रही कि उन्हें कोई गोली नहीं लगी। पुरानी रंजिश और अवैध कारोबार का विवाद घटना को लेकर लल्लू रईस ने बताया कि करीब दो साल पहले इमरान का शादाब गेट के भाई से विवाद हुआ था। उस दौरान हुए हमले में शादाब के भाई की उंगलियां कट गई थीं। इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए यह हमला किया गया है। लल्लू रईस का यह भी आरोप है कि हमलावर शहर के अलग-अलग इलाकों में जुआ और सट्टे का अवैध कारोबार चलाते हैं और उसे कई बार उसने उजागर भी किया है।  

शादी के लिए दबाव बना रहा था युवक, मना करने पर किया अपहरण; पुलिस ने युवती को बचाया

अनूपपुर इंस्टाग्राम के माध्यम से युवक और युवती की जान पहचान हुई। युवक शादी करने का दबाव बना रहा था लेकिन लड़की परिवार की मर्जी के बगैर विवाह नहीं करना चाह रही थी। इस बात से नाराज होकर युवक ने जबरन शादी करने का इरादा बनाया और लड़की के अपहरण की योजना बना डाली। दिनदहाड़े युवक ने लड़की को अपने दो दोस्तों की मदद से एक जीप के माध्यम से अगवा भी कर लिया लेकिन पुलिस के पीछा करने पर वह लड़की को छोड़कर भाग निकला। आरोपित फरार हो पाते, उससे पहले पुलिस ने मुख्य आरोपित सहित उसके दो साथियों और वारदात में इस्तेमाल की गई चार पहिया गाड़ी को भी जब्त कर लिया। यह मामला जैतहरी थाना क्षेत्र का है। शुक्रवार दोपहर को अपहरण की वारदात तीन आरोपितों द्वारा अंजाम दी गई थी। आरोपितों की पहचान और पुलिस की कार्रवाई जैतहरी पुलिस से मिली जानकारी अनुसार गिरफ्तार आरोपितों में मुख्य आरोपित, जिसकी लड़की से पहचान थी, उसका नाम जयप्रकाश पिता ललन राठौर (23 वर्ष) निवासी चोर भठी थाना जैतहरी है। इस वारदात में शामिल आरोपित के साथी शुभम पिता दुलारे राठौर (23 वर्ष) निवासी ग्राम बेला थाना अनूपपुर एवं सागर पिता संतोष पटेल (22 वर्ष) निवासी ग्राम मौहरी थाना कोतवाली शामिल हैं। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अपहरण जैसी वारदात में स्कार्पियो वाहन क्रमांक एमपी 65 जेडबी 4472 का उपयोग किया गया था, जिसे पुलिस ने जब्त कर अभिरक्षा में ले लिया है। इंस्टाग्राम से पहचान और जबरन शादी का दबाव थाना प्रभारी अमर वर्मा ने मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता शहडोल में नर्सिंग की पढ़ाई करती है। 3 वर्ष पूर्व लड़की की पहचान इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से जयप्रकाश राठौर से हुई थी। फोन पर हुई बातचीत में जयप्रकाश ने उसे विवाह करने की बात कही लेकिन पीड़िता ने स्पष्ट कर दिया था कि वह केवल अपने माता-पिता की इच्छा के अनुसार ही विवाह करेगी। पीड़िता जब जैतहरी बड़े पापा के घर आकर रह रही थी, इसी दौरान आरोपित जयप्रकाश शुक्रवार दोपहर अपने दो साथियों के साथ जीप लेकर लड़की के घर के पास पहुंचा। लड़की अपनी सहेली के साथ घर के बाहर बैठी थी। पहचान न हो सके, इसलिए आरोपित चेहरा ढके हुए था और उसके द्वारा पीड़िता को जबरन गाड़ी में बैठाकर अपहरण कर भाग निकला। पीछा करने पर पीड़िता को छोड़ भागे आरोपित टी आई ने बताया कि मामले की सूचना मिलने पर तत्परता पूर्वक वाहन और आरोपितों का पीछा किया गया, जो कि गांव के अंदरूनी मार्ग से अनूपपुर की तरफ भाग रहे थे। पिपरिया गांव के पास मौका पाकर आरोपित पीड़िता को छोड़कर भाग निकले। गांव के लोगों की मदद से पीड़िता के परिजनों को सूचना दी गई, इसके बाद भाई और मामा पिपरिया पहुंच कर लड़की को सुरक्षित वापस ले गए। इसके बाद थाना जैतहरी में पीड़िता द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम आरोपितों को पकड़ने के लिए बनाई। पुलिस की घेराबंदी के चलते आरोपित जिला क्षेत्र छोड़कर भाग निकलने में असफल रहे और शुक्रवार रात जैतहरी तथा अनूपपुर थाना क्षेत्र सीमा में पकड़ लिए गए। बताया गया कि आरोपित जयप्रकाश टेंट का काम करता है। किराए की टैक्सी का उपयोग और न्यायिक हिरासत जानकारी अनुसार जीप अनूपपुर के अल्ताफ की बताई गई जो गाड़ी को बुकिंग पर चलाता है। गाड़ी का टैक्सी परमिट भी है। जयप्रकाश के दोस्त ने गाड़ी मालिक को गलत जानकारी देकर किराए पर ली थी। शनिवार को गिरफ्तार आरोपितों को न्यायालय अनूपपुर में पेश किया गया जहां से रिमांड पर जिला जेल भेजा गया। इस कार्रवाई में निरीक्षक अमर वर्मा, उप निरीक्षक अमर लाल यादव, जे पी एच तिर्की, सहायक उप निरीक्षक विनोद विश्वकर्मा, प्रधान आरक्षक राजकुमार मार्को, संतोष जायसवाल, विजयानंद पांडे, श्याम शुक्ला, आरक्षक मनीष सिंह तोमर, विजय प्रताप सिंह शामिल रहे।  

महिला पुलिस की कामयाबी को सलाम: सेमिनार में उत्कृष्ट विवेचना करने वाली अधिकारियों का सम्मान

भोपाल महिला सुरक्षा शाखा, पुलिस मुख्यालय द्वारा 13 मार्च को नवीन पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में “महिला पुलिस अधिकारियों की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण एवं सम्मान” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर प्रधान आरक्षक स्तर तक की कुल 95 महिला पुलिस अधिकारी प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित हुईं। सेमिनार के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा अपने द्वारा विवेचित महत्वपूर्ण प्रकरणों से संबंधित अनुभव, चुनौतियां एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतियों में विवेचना की अवधि, अनुसंधान के दौरान सामने आई चुनौतियाँ तथा उनसे निपटने की प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन की वैज्ञानिक एवं विधिक प्रक्रिया, न्यायालय द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियों का विश्लेषण तथा विवेचना के दौरान अपनाई गई प्रभावी रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इन प्रस्तुतियों के आधार पर प्रतिभागियों द्वारा की गई विवेचनाओं का निर्धारित मापदण्डों के अनुसार मूल्यांकन भी किया गया। सेमिनार के समापन अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) श्री अनिल कुमार द्वारा चयनित प्रतिभागियों को उत्कृष्ट विवेचना एवं उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि महिला पुलिस अधिकारियों को अपने द्वारा की गई विवेचनाओं तथा उनसे प्राप्त न्यायालयीन निर्णयों का गहन अध्ययन करते हुए महत्वपूर्ण बिंदुओं का विश्लेषण करना चाहिए तथा उन्हें भविष्य की विवेचनाओं में समाहित करना चाहिए, जिससे अनुसंधान की गुणवत्ता और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ हो सके। मूल्यांकन के उपरांत उत्कृष्ट विवेचना के लिए प्रथम पुरस्कार उपनिरीक्षक लक्ष्मी बागरी (जिला मैहर), द्वितीय पुरस्कार उपनिरीक्षक मोनिका गौर (जिला नर्मदापुरम्) तथा तृतीय पुरस्कार उपनिरीक्षक अंजली श्रीवास्तव (नगरीय पुलिस, इंदौर) को प्रदान किया गया। वहीं उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रथम पुरस्कार उपनिरीक्षक वीणा विश्वकर्मा (जिला टीकमगढ़) का चयन किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा मैदानी स्तर पर विवेचना के दौरान आने वाली चुनौतियों, उनके व्यावहारिक समाधान तथा विवेचना की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस सेमिनार के माध्यम से महिला पुलिस अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए महिला सुरक्षा के क्षेत्र में संवेदनशील, प्रभावी एवं पेशेवर पुलिसिंग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया गया।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इंजीनियरिंग कॉलेज रीवा में टेक फेस्ट का किया शुभारंभ

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने इंजीनियरिंग कालेज रीवा में टेक फेस्ट का शुभारंभ किया। रीवा इंजीनियरिंग कालेज के 62वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में कालेज के पूर्व छात्र उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि अपने स्थापना की 62वीं वर्षगांठ मना रहा इंजीनियरिंग कालेज, रीवा तकनीक और विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। इंजीनियरिंग कालेज के विकास में इसके पूर्व छात्रों का सराहनीय योगदान है। इंजीनियरिंग कालेज, रीवा ने विन्ध्य की कई प्रतिभाओं को तराशा है जो देश-विदेश के बड़े संस्थानों में अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर रही हैं। इंजीनियरिंग कालेज के विकास के लिए हर संभव सहायता दी जाएगी। पूर्व छात्रों के सहयोग से आज इंडस्ट्री इंस्टीट्यूट इंट्रैक्शन सेंटर की आधारशिला रखी गई है। यह सेंटर कालेज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, प्रोफेसरों का बड़े औद्योगिक संस्थानों के साथ संवाद का केन्द्र बनेगा। उन्होंने सेंटर के निर्माण के लिए विधायक निधि से 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। उप मुख्यमन्त्री  शुक्ल ने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में तेजी से विकास हो रहा है। भारत विश्वगुरू बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। खाड़ी में अशांति के कारण होर्मूज स्टेट से किसी भी देश के जल जहाज पार नहीं हो रहे हैं, लेकिन ईरान ने भारत के जहाजों को जाने की अनुमति दी है। यह हमारे देश के कुशल नेतृत्व की विश्व में अच्छी साख का परिणाम है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि रीवा बहुत तेजी से विकास कर रहा है। पेरिस सम्मेलन के बाद हमने सबसे पहले गुढ़ में 750 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया। इसकी बिजली से दिल्ली की मेट्रो चल रही है। रीवा से इंदौर, भोपाल और दिल्ली के लिए सीधी हवाई सेवा है। रीवा से 17 मार्च को रायपुर और 15 अप्रैल से कोलकाता के लिए भी हवाई सेवा शुरू हो रही है। अब बड़े उद्योगपतियों, निवेशकों तथा विशेषज्ञों को रीवा आने में किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी। इंजीनियरिंग कालेज में रिसर्च और इनोवेशन की दिशा में लगातार अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने एलपीजी गैस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत किये हैं। यहाँ प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बड़े प्लेटफार्म का अवसर मिलने पर विन्ध्य की प्रतिभाएं आसमान तक तिरंगा फहरा सकती हैं। उप मुख्यमंत्री ने समारोह के पूर्व ट्रिपल आई सेंटर का भूमिपूजन किया और विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई टेक फेस्ट प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह में कॉलेज के पूर्व छात्र एवं एनटीपीसी के सेवानिवृत्त सीएमडी  आरएस शर्मा, अडानी उद्योग समूह के रिन्यूअल एनर्जी के मैनेजिंग डायरेक्टर  चैतन्य साहू ने भी विचार व्यक्त किये। समारोह में कालेज के प्राचार्य  आर.पी. तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कालेज की विकास यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कालेज में 1964 में तीन कोर्स शुरू किए गए। वर्तमान में पाँच कोर्स, पीजी कोर्स और पीएचडी की सुविधा है। कालेज में 9 यूजी कोर्स तथा 10 पीजी कोर्स शुरू करने के लिए 175 करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई है। नगर निगम के अध्यक्ष  व्यंकटेश पाण्डेय, अल्ट्राटेक सीमेंट मैहर के प्रेसिडेंट तथा प्लांट हेड  विजनेश्वर मोहंती, टोंस हाइड्रल पावर के असिस्टेंट चीफ इंजीनियर  पुरूषोत्तम गुप्ता, बीएसएनएल के पीजीएम  यतीश कठेरिया, कालेज के प्रथम बैच के छात्र सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर  अनुपम वास्तव, अन्य पूर्व छात्र, प्राध्यापकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

मुरैना के डायल 112 हीरोज: संवेदनशीलता का उदाहरण, घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर मिला उपचार

भोपाल डायल-112 सेवा केवल आपराधिक या आपात पुलिस सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आमजन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुरैना जिले में डायल-112 जवानों की संवेदनशील कार्यवाही से घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर उपचार मिल सका। 13 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल में सूचना प्राप्त हुई कि मुरैना जिले के थाना नूराबाद क्षेत्र के सीहोरा गाँव में एक मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया है। सूचना मिलते ही नूराबाद थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  रवि कुमार एवं पायलट  अंशुल शर्मा ने देखा कि वन क्षेत्र से भटककर आया एक मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया था। स्थिति को देखते हुए डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घायल मोर को सावधानीपूर्वक सुरक्षित किया और एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं संरक्षण के लिए वन केंद्र मुरैना पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया। वन विभाग द्वारा घायल मोर का उपचार किया जा रहा है। डायल-112 टीम की संवेदनशील और जिम्मेदार कार्रवाई से राष्ट्रीय पक्षी को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात स्थितियों में केवल नागरिकों ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भी समान रूप से सजग और प्रतिबद्ध है।  

नक्सलियों पर शिकंजा: 10 लाख का इनामी कमांडर सहित दो माओवादी झारखंड पुलिस के हत्थे चढ़े

लातेहार. पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव को मिली गुप्त सूचना पर लातेहार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस न माओवादियों के जोनल कमाउंर मृत्युंजय भुईयां उर्फ फ्रेश भुईयां व माओवादी सदस्य बबलू राम उर्फ रोहित उर्फ बबलू चंद्रवंशी को गिरफ्तार जेल भेज दिया है। मृत्युंजय भुईयां पर दस लाख व बबलू राम पर सरकार ने दो लाख रुपये का इनाम रखा है। पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रेस वार्ता कर बताया कि ऐसी सूचना मिल रही थी कि मृत्युजंय भुईयां अपने दस्ता के इस क्षेत्र में भ्रमणशील है। इसी सूचना पर लगातार छापामारी कर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। सर्च ऑपरेशन के लगातार चलने से माओवादियों के दैनिक उपयोग के सामानों की चैन बाधित हो गई। सुरक्षाबलों ने चलाया सर्च ऑपरेशन एसपी ने आगे बताया कि पिछले 12 मार्च को सूचना प्राप्त हुई कि मृत्युंजय भुईयां छिपादोहर थाना क्षेत्र क हरिणामाड़ गांव में राशन व सामान लेने आने वाला है। इस सूचना पर पुलिस अधीक्षक निर्देश पर छिपादोहर व गारु थाना प्रभारी सशस्त्र बलों का एक छापामारी दल का गठन किया गया। छापामारी दल ने हरिणामाड़ के आसपास छापामारी अभियान चलाया। इस दौरान माओवादियों का जोनल कमांडर मृत्युंजय भुईयां उर्फ फ्रेश भुईया उर्फ दिलीप उर्फ अवधेश जी और माओवादी सदस्य बबलू राम उर्फ रोहित उर्फ बबलू चंद्रवंशी को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि मृत्युंजय भुईयां पर लातेहार, पलामू, गढ़वा व राज्य के बार छतीसगढ़ में कुल 104 मामले दर्ज हैं, जबकि बबलू राम पर लातेहार, पलामू व गढ़वा जिला में 15 मामले दर्ज हैं। हथियार बरामद  मृत्युंजय भुईयां लातेहार के छिपादोहर थाना क्षेत्र के नावाडीह ग्राम के चकलवा व बबलू राम बिहार के अरवल जिले का रहने वाला है। पुलिस अधीक्षक श्री गौरव ने बताया कि सर्च ऑपरेशन में हथियार व गोली समेत उग्रवादी दस्ता के दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गयी है। इसमें एक स्वचलित एके-47 हथियार, एके-47 का मैगजीन व छह जिंदा गोली, इंसास रायफल का 15 पीस गोली, एक वायरलेस सेट, एक लाख 50 हजार रुपये नगद, एक टैब व चार सिम कार्ड तथा नक्सली पर्चा समेत कइ सामग्रियां बरामद की गई है। छापमारी में शामिल अधिकारी इस छापामारी अभियान में पुअनि सह छिपादोहर थाना प्रभारी मो यकीन अंसारी, गारु थाना प्रभारी जयप्रकाश शर्मा, बारेसाढ़ थाना प्रभारी शशि कुमार, महुआडांड़ थाना प्रभारी मनोज कुमार, मनिका थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास, नेतरहाट थाना प्रभारी अभिषेक कुमार के अलाव पुअनि किशोर मुंडा, सैट 137 व 147 तथा बारेसांढ़ थाना के सशस्त्र बल शामिल थे।

कोविड पीड़ितों के लिए मुआवजा: ‘नो-फॉल्ट’ कंपेंसेशन पॉलिसी से मिलेगा न्याय या बढ़ेगी चुनौती?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें केंद्र सरकार को कोविड-19 वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स या इससे होने वाली मौतों के लिए 'नो-फॉल्ट' कंपेंसेशन पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया गया है. इस फैसले के अनुसार, प्रभावित परिवारों को यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि मौत या कोई गंभीर इफेक्ट्स के लिए राज्य सरकार किसी भी तरह से जिम्मेदार है. राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान के दौरान होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए राहत प्रदान करे. यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है, जहां वैक्सीन लेने के बाद मौत या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का दावा किया गया था. यह निर्णय न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। हालांकि इस फैसले को लागू करने में बहुत सी व्यावहारिक चुनौतियां हैं. क्योंकि इसके कार्यान्वयन में इतनी तरह की जटिलताएं हैं जिसका निदान करना असंभव हो सकता है.पर एक देश और समाज के रूप में, हमें इस फैसले की गहराई को समझना होगा. यह फैसला अव्यावहारिक लग सकता है लेकिन लंबे समय में महत्वपूर्ण साबित होगा. फैसले की पृष्ठभूमि में कोविड महामारी के दौरान भारत में चलाया गया दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान है. करोड़ों लोगों को वैक्सीन दी गई, जिसने संक्रमण दर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, सरकारी आंकड़ों से भी पता चलता है कि कुछ मामलों में वैक्सीन के बाद मौतें हुईं  हैं. यह बात तो वैक्सीन बनाने वालों ने भी स्वीकार किया था कि कुछ मामलों में साइड इफेक्ट संभव है. दुनिया की कोई भी वैक्सीन अपने आप को हंड्रेड परसेंट सुरक्षित होने का दावा नहीं कर सकती हैं. पर दुनिया भर में तरह तरह के वैक्सीन आम जनता के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए लगाईं जाती हैं. शायद यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार को आधार बनाते हुए कहा कि जब वैक्सीनेशन राज्य-प्रायोजित कार्यक्रम है, तो प्रभावितों को अदालतों में लंबी लड़ाई लड़ने के बजाय सीधा मुआवजा मिलना चाहिए. 'नो-फॉल्ट' का मतलब है कि बिना दोष साबित किए राहत, जो कई विकसित देशों में पहले से लागू है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह भारत जैसे विकासशील देश में व्यावहारिक है? सबसे बड़ी चुनौती कार्यान्वयन की है. वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को साबित करना वैज्ञानिक रूप से जटिल है. कोविड वैक्सीन जैसे कोविशील्ड या कोवैक्सिन के बाद देश में बहुत सी मौतें हुईं हैं, लेकिन क्या हर दावे की जांच कैसे हो सकती है? अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पॉलिसी बनाने का आदेश दिया है, लेकिन सरकार कोई ऐसी सर्वसुलभ प्रक्रिया बना पाएगी . इसमें संदेह है. उदाहरण के लिए, अमेरिका या यूके में ऐसी पॉलिसी है, लेकिन उनके पास मजबूत स्वास्थ्य डेटा सिस्टम हैं। भारत में ग्रामीण इलाकों को छोड़िए शहरों में भी मेडिकल रिकॉर्ड इस तरह के नहीं हैं कि अदालत में यह साबित किया जा सके कि अमुक व्यक्ति की मौत कोविड के चलते हुई है. ग्रामीण इलाकों में तो मेडिकल रिकॉर्ड माशा अल्ला है. अब सवाल उठता है कि क्या वैक्सीन और मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए विशेषज्ञ पैनल बनाए जाएंगे? अगर हां, तो क्या सरकार के पास इतने प्रशासनिक संसाधन है कि वह इसे क्रियान्वित कर सकेगी? स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही AEFI (एडवर्स इफेक्ट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन) की निगरानी करता है, लेकिन मौतों के मामलों में जांच लंबी चलती है. नई पॉलिसी से दावों की बाढ़ आ सकती है, जिसमें वास्तविक और फर्जी दोनों शामिल होंगे.देश में दलालों के रैकेट सक्रिय हो जाएगा जो सामान्य मौतों को भी कोविड से हुई मौत साबित करना शुरू कर देंगे.   दुरुपयोग की आशंका से सिस्टम चरमरा सकता है, और वित्तीय बोझ जो बढ़ेगा वो अलग से है। इसके अलावा, यह फैसला वैक्सीन उत्पादकों की जिम्मेदारी को भी प्रभावित कर सकता है. वर्तमान में, वैक्सीन कंपनियां इंडेम्निटी क्लॉज के तहत सुरक्षित हैं, यानी वे सीधे जिम्मेदार नहीं. अगर राज्य मुआवजा देगा, तो क्या यह कंपनियों को और लापरवाह बना देगा? वैश्विक स्तर पर देखें तो WHO की COVAX योजना में भी ऐसी प्रावधान हैं, लेकिन भारत जैसे देश में जहां वैक्सीन आयात और उत्पादन दोनों होते हैं, यह जटिल हो जाता है। इन सब के बावजूद इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि एक लोकतांत्रिक समाज में, राज्य की जिम्मेदारी सिर्फ वैक्सीन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसके जोखिमों को भी संभालना है. महामारी ने दिखाया कि वैक्सीनेशन सामूहिक प्रयास था, लेकिन कुछ लोगों ने व्यक्तिगत कीमत चुकाई. ऐसे में, 'नो-फॉल्ट' पॉलिसी न्याय सुनिश्चित करती है. यह अनुच्छेद 21 को मजबूत करती है, जो जीवन के अधिकार को सिर्फ नकारात्मक (हानि न करने) नहीं, बल्कि सकारात्मक (रक्षा करने) रूप में देखता है। अदालत ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य संरक्षण का दायित्व निभाए, जो सार्वजनिक विश्वास बढ़ाएगा. कल्पना कीजिए, अगर भविष्य में कोई नई महामारी आई, तो लोग वैक्सीन से डरेंगे नहीं क्योंकि वे जानेंगे कि दुर्घटना में सहायता मिलेगी. यह सामाजिक न्याय का प्रतीक है, जहां गरीब परिवारों को अदालतों की लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी. कई मामलों में, जैसे दो युवतियों की मौत पर याचिका, परिवारों ने संघर्ष किया. यह फैसला उन्हें राहत देगा और समाज को संदेश देगा कि राज्य अपने नागरिकों के साथ खड़ा है।

राजगढ़ में गैस एजेंसियों के लिए नए नियम, अधिक पैसे लेने पर कलेक्टर ने कार्रवाई का किया ऐलान

 राजगढ़  कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जिले में आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं, विशेष रूप से एलपीजी गैस की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। गैस वितरकों के लिए स्टॉक और दरों का प्रदर्शन अनिवार्य जारी आदेश के अनुसार राजगढ़ जिले में संचालित सभी एलपीजी गैस वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने गैस गोदाम/एजेंसी परिसर के बाहर प्रतिदिन उपलब्ध स्टॉक एवं दरों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करेंगे। इसके साथ ही गैस वितरण से संबंधित वाहनों पर भी स्टिकर एवं बैनर लगाकर सही जानकारी का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे। शिकायत निवारण और मूल्य नियंत्रण के निर्देश आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक गैस वितरक अपने उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी कर उसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करेंगे तथा प्राप्त शिकायतों की विधिवत पंजी संधारित करेंगे। साथ ही निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर गैस रिफिलिंग नहीं की जाएगी। साप्ताहिक रिपोर्ट और वैधानिक कार्रवाई कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि सभी गैस एजेंसियां प्रत्येक सप्ताह वितरण से संबंधित जानकारी संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उपलब्ध कराएंगी। नियमों का पालन नहीं करने पर “द्रवित पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश 2000” के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी पर रोक इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति, संस्था अथवा समूह द्वारा सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक अथवा गलत जानकारी पोस्ट अथवा शेयर नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 सहित अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

लखनऊ-गौतमबुद्ध नगर में यू-हब स्थापित करने से इन्क्यूबेशन, एक्सेलेरेशन और अनुसंधान के जरिए स्टार्टअप को मिलेगा मजबूत प्लेटफॉर्म

लखनऊ योगी सरकार राज्य को नवाचार और स्टार्टअप का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में बजट 2026-27 के माध्यम से लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में यू-हब स्थापित करने की घोषणा की गई है। योगी सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ तकनीक आधारित उद्यमों को नई गति प्रदान करने का काम करेगी। इस हब को देश के अग्रणी नवाचार केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। तेलंगाना, ओडिशा, केरल और कर्नाटक में स्थापित नवाचार केंद्र की तरह ही इस यू-हब को विश्वस्तरीय नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यू-हब का उद्देश्य युवाओं के नवाचार और नए विचारों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। इसके माध्यम से स्टार्टअप और उद्यमियों को अपने आइडिया को व्यवसाय में बदलने के लिए जरूरी संसाधन, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इससे प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार की योजना के अनुसार यह हब प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप को शुरुआती स्तर से आगे बढ़ने तक हर चरण में सहयोग मिलेगा। यहां इन्क्यूबेशन, एक्सेलेरेशन, अनुसंधान, विकास और सहयोग कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही स्टार्टअप को विशेषज्ञों की मेंटोरशिप, निवेशकों से जुड़ने के अवसर और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  विशेषज्ञों का मानना है कि यू-हब की स्थापना से उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सूचना प्रौद्योगिकी, फिनटेक, हेल्थटेक और अन्य तकनीक आधारित क्षेत्रों में नए स्टार्टअप स्थापित होने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही युवाओं को पारंपरिक नौकरी की तलाश के बजाय उद्यमिता की ओर बढ़ने का अवसर मिलेगा। बजट में इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी और तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार को गति मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यू-हब के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नई कंपनियां स्थापित होंगी और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। आने वाले समय में यू-हब उत्तर प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ ही उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख स्टार्टअप मामलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।