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1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, FASTag Annual Pass की कीमतों में वृद्धि

नई दिल्ली FASTag Annual Pass New Price: देश के हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. नेशनल हाईवे पर टोल पेमेंट को आसान बनाने के लिए शुरू की गई फास्टैग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) स्कीम अब थोड़ी महंगी होने जा रही है. सरकार ने फाइनेंशियल ईयर  2026-27 के लिए इस पास की कीमत में हल्की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक 1 अप्रैल से निजी वाहनों के लिए FASTag एनुअल पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दी गई है. इससे पहले इसकी कीमत 3,000 रुपये थी. यह पास प्राइवेट कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल वाहनों के लिए लागू होता है। FASTag Annual Pass क्या है बता दें कि, फास्टैग एनुअल पास को पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू किया गया था. इसका मकसद हाईवे पर बार-बार टोल भुगतान की परेशानी को कम करना और डिजिटल टोल कलेक्शन को बढ़ावा देना था. इस योजना के तहत अगर किसी प्राइवेट व्हीकल में वैलिड FASTag लगा है तो वह इस पास को ले सकता है. ये एनुअल पास एक्टिव होने के बाद वाहन एक साल तक या फिर अधिकतम 200 ट्रिप्स (जो भी पहले पूरा हो) तक के लिए वैलिड होगा। तेजी से बढ़ रहे हैं यूजर्स सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों के मुताबिक यह योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है. फिलहाल देशभर में 50 लाख से ज्यादा वाहन मालिक फास्टैग एनुअल पास का इस्तेमाल कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि नेशनल हाईवे पर प्राइवेट कारों से होने वाले करीब 28 प्रतिशत टोल लेन-देन अब इसी एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं. इससे साफ है कि नियमित रूप से हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के बीच यह योजना काफी पसंद की जा रही है। भारत में FASTag सिस्टम की शुरुआत 2016 में हुई थी और अब यह टोल पेमेंट का मुख्य तरीका बन चुका है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 11.86 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं. इनमें से लगभग 5.9 करोड़ FASTag अभी एक्टिव हैं और देशभर के टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. मौजूदा समय में नेशनल हाईवे पर टोल से होने वाली 98 प्रतिशत से ज्यादा कमाई FASTag के जरिए ही हो रही है।

3.5 अरब लोगों के लिए गूगल का चेतावनी अलर्ट, ‘जीरो डे’ संकट से बचने के लिए करें ये जरूरी कदम

नई दिल्ली टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी Google का क्रोम ब्राउजर दुनियाभर में पॉपुलर है और भारत समेत दुनियाभर में इसके 3.5 अरब से ज्यादा यूजर हैं. अब अधिकतर यूजर्स पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जो असल में दो कमजोरियों हैं, जिनको गूगल ने जीरो डे कैटेगरी की कमजोरियों में रखा है. हैकर्स इनका फायदा उठाकर क्रोम ब्राउजर यूजर्स को शिकार बना सकते हैं. ये जानकारी फॉर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है। खतरे को भांपते हुए क्रोम की तरफ से इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी किया है और यूजर्स को तुरंत ब्राउजर को अपडेट करने की जानकारी शेयर की है. ब्राउजर को अपडेट करने के बाद यूजर्स अपने डिवाइस और डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं। वल्नरेबिलिटी को लेकर ज्यादा डिटेल्स नहीं दी वल्नरेबिलिटी को लेकर अभी बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी का मानना है कि जब तक अधिकतर यूजर्स लेटेस्ट अपडेट के साथ ब्राउजर की कमजोरियों को फिक्स नहीं कर लेते हैं तब तक इनकी डिटेल्स को सीमित रखा जाएगा, जिससे हैकर्स इनका फायदा ना उठा सकें. इन कमजोरियों को CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 के नाम से ट्रैक किया जा रहा है। क्यों ब्राउजर्स को निशाना बना रहे हैं हैंकर्स ?  इंटरनेट यूजर्स किसी भी इंफॉर्मेशन को सर्च करने के लिए ब्राउजर पर ही सर्चिंग करते हैं. हर एक स्मार्टफोन और पीसी यूजर्स के पास ब्राउजर होता है, जिसमें क्रोम सबसे ज्यादा मार्केट शेयर वाला ब्राउजर है. ऐसे में हैकर्स ब्राउजर को निशाना बनाते हैं ताकि वह यूजर्स कि डिटेल्स को आसानी से हैकर कर सकें। यहां एक पुरानी रिपोर्ट के बारे में बताते हैं, Omdia की 2025 की रिपोर्ट है, जो Palo Alto Networks के लिए तैयार की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 95 परसेंट ऑर्गनाइजेसन को एक ऐसा साइबर सिक्योरिटी का सामना करना पड़ा, जिसकी शुरुआत कर्मचारियों के कंप्यूटर से हुई थी। ब्राउजर हैकिंग पर साइबर एक्सपर्ट का क्या कहना ब्राउजर हैकिंग को लेकर साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि अब हैकर्स सीधा ब्राउजर को निशाना बनाते हैं. इसमें हैकर्स चोरी हुए टोकन के जरिए सेशन हाइजेकिंग और ऐसे एजवांस्ड एडवांस्ड फिशिंग अटैक शामिल हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन को भी बायपास कर सकते हैं।