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नसों के बीच फंसा ट्यूमर, निजी अस्पतालों ने किया मना, एम्स में माइक्रोसर्जरी से सफल निकासी

भोपाल  नसों के बीच विकसित हुए खतरनाक ट्यूमर ने एक 40 वर्षीय महिला की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। हालत यह हो गई थी कि उनका उठना-बैठना तक मुश्किल हो गया और धीरे-धीरे वे बिस्तर पर निर्भर हो गईं। कई निजी अस्पतालों ने इस जटिल सर्जरी को जोखिम भरा बताकर हाथ खड़े कर दिए थे।  बिस्तर तक सीमित हो गई थी जिंदगी भोपाल निवासी 40 वर्षीय महिला पिछले कई महीनों से इस न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रही थीं। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि वे खुद से उठ-बैठ भी नहीं पा रही थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने शरीर पर नियंत्रण खोना शुरू कर दिया, जिसमें सबसे बड़ी समस्या मल और मूत्र पर नियंत्रण खत्म होना था। डॉक्टरों ने बताया कि महिला को इंट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर की समस्या थी। यह वह गांठ होती है जो रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) के अंदर विकसित होती है। यह बेहद दुर्लभ स्थिति है और कुल स्पाइनल ट्यूमर मामलों में इसका प्रतिशत बहुत कम होता है। इस तरह के ट्यूमर में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि यह सीधे नसों के बीच विकसित होता है, जिससे सर्जरी के दौरान जरा सी चूक स्थायी लकवे का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में शरीर के हिस्सों में कमजोरी, सुन्नपन, चलने में दिक्कत, और मल-मूत्र नियंत्रण में समस्या शामिल हैं। समय पर पहचान और विशेषज्ञ इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। एक प्रतिशत मामलों में होती है यह बीमारी यह ट्यूमर स्पाइनल श्वाननोमा के बेहद कम, लगभग 1.1 प्रतिशत मामलों में ही देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति रीढ़ की सर्जरी में सबसे जटिल मानी जाती है, क्योंकि इसमें स्पाइनल कॉर्ड के भीतर से ट्यूमर निकालना होता है। जरा सी चूक भी स्थायी लकवा जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। कई अस्पतालों ने ठुकराया, एम्स में मिली उम्मीद मरीज और उनके परिजनों ने इलाज के लिए कई अस्पतालों का रुख किया, लेकिन कहीं सर्जरी को टाल दिया गया तो कहीं इसे अत्यधिक जोखिम भरा और महंगा बताया गया। लगातार निराशा और आर्थिक संकट के बीच परिवार ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने एम्स का रुख किया, जहां उन्हें नई उम्मीद मिली। ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. पंकज मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को स्वीकार किया। सर्जरी से पहले विस्तृत जांच और सटीक योजना बनाई गई। ऑपरेशन के दौरान माइक्रोसर्जिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे स्पाइनल कॉर्ड के भीतर मौजूद ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इस प्रक्रिया में नसों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। ये सावधानियां जरूरी     किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पीठ दर्द, पैरों में कमजोरी, चलने में असंतुलन या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह स्पाइनल ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।     नियमित स्वास्थ्य जांच, एमआरआई जैसी जांचों से समय रहते बीमारी की पहचान संभव है।     सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास बेहद जरूरी होता है, जिससे मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट सके। अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर की सर्जरी इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई विभागों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसआरएएन भूषण ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। वहीं, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के डॉ. विट्ठल पुरी ने सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में मरीज ने धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता वापस पाना शुरू किया। आयुष्मान योजना से मिला फ्री इलाज इस पूरे इलाज की एक और खास बात यह रही कि सर्जरी और उपचार पूरी तरह आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री किया गया। इससे मरीज और उसके परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। यह योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। तेजी से हो रहा सुधार, लौट रही सामान्य जिंदगी सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी ताकत वापस पाना शुरू कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने फिर से मल-मूत्र पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, जो उनके लिए बड़ी राहत की बात है। अब वह धीरे-धीरे सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही हैं।

गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड में एक से ज्यादा शादी पर 7 साल की सजा, लिव इन के कई नए नियम

देहरादून  उत्तराखंड के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित गुजरात में भी अब यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने जा रहा है। बुधवार को हुई गुजरात कैबिनेट की बैठक में यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई और विधानसभा सचिवालय को भेज दिया गया है। सरकार मौजूदा सत्र में ही इसे पारित कराना चाहती है। यूनिफॉर्म सिवल कोड 2026 बिल सदन से पारित होने के बाद राज्य में सभी समुदायों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव इन रिलेशनशिप के नियम एक जैसे होंगे। हालांकि, आदिवासियों की अच्छी आबादी वाले राज्य में अनुसूचित जनजाति (STs) को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है। शादी की रस्में धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक होंगी, लेकिन प्रस्तावित विधेयक में विवाह और तलाक के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया जाएगा। इसका पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। उत्तराखंड की तरह ही गुजरात में भी लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने की व्यवस्था की जाएगी। लिव इन पर और क्या नियम जिला रजिस्ट्रार के पास लिव इन के दोनों पार्टनर को अपने रिश्ते को पंजीकृत करना होगा। ना सिर्फ लिव-इन में साथ रहने को बल्कि अलग होने के फैसले को भी नोटिफाई करना होगा। ऐसे रिश्ते से यदि किसी बच्चे का जन्म होगा तो उसे वैधता होगी और सभी अधिकार प्राप्त होंगे। यदि किसी महिला को उसका लिव इन पार्टनर छोड़ता है तो वह गुजरा भत्ता मांगने की हकदार होगी। शादी की उम्र एक, बहुविवाह पर सजा सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी की उम्र भी समान होगी। मसौदे के मुताबिक, पुरुषों के लिए यह उम्र न्यूनतम 21 और महिलाओं के लिए 18 रखी गई है। यदि दोनों भागीदारों में से कोई एक भ्रामक जानकारी प्रदान करता है तो विवाह को रद्द करने योग्य माना जाएगा। यूसीसी में बहुविवाह पर रोक का प्रावधान भी किया गया है। यदि कोई शख्स कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी या तीसरी शादी करता है, अथवा एक से अधिक पत्नियां रखता है तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है। उत्तराधिकार पर क्या उत्तराधिकार को लेकर भी सभी धर्मों के लोगों के लिए एक जैसे नियम होंगे। मौसदे में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति वसीयत नहीं बनाता है तो उस स्थिति में उत्तराधिकारियों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी, द्वितीय श्रेणी के उत्तराधिकारी और अन्य रिश्तेदार। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल होंगे। द्वितीय श्रेणी के उत्तराधिकारियों में सौतेले माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी शामिल होंगे। अन्य रिश्तेदारों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के व्यक्तियों के अलावा अन्य व्यक्ति शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जयपुर में उद्योगपतियों से करेंगे इंटरएक्टिव सेशन के माध्यम से संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जयपुर में इंटरएक्टिव सेशन में उद्योगपतियों से करेंगे संवाद टेक्सटाइल, ईवी-ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन सेक्टर के निवेशक होंगे शामिल जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश को देश के सबसे भरोसेमंद और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षण की सक्रिय मुहिम चला रहे हैं। इसी कड़ी में वे विभिन्न राज्यों में रोड-शो और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद के माध्यम से मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को निवेशकों के सामने रख रहे हैं। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित सफल संवाद के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव 21 मार्च 2026 को जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” में उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे, जहां वे मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, नई औद्योगिक नीतियों और बेहतर अधोसंरचना की जानकारी देते हुए निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करेंगे। भारत की तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के इस दौर में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रहा है, तब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने औद्योगिक विस्तार और संतुलित क्षेत्रीय विकास को लेकर एक स्पष्ट, आत्मविश्वासपूर्ण और परिणामोन्मुख रणनीति के साथ आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिदृश्य में भी मध्यप्रदेश अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए स्वयं को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है। जयपुर में आयोजित सत्र विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों—कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, टेक्सटाइल एवं गारमेंट्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवीकरणीय ऊर्जा, माइनिंग एवं मिनरल्स तथा पर्यटन से जुड़े उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा चयनित निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें प्रमुख आकर्षण रहेंगी, जिनमें सेक्टर-विशिष्ट अवसरों, परियोजना स्तर के सहयोग और समयबद्ध निवेश क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर एवं राजस्थान के आसपास के क्षेत्रों के उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों, उन्नत अधोसंरचना, नवीन औद्योगिक नीतियों तथा आकर्षक प्रोत्साहन योजनाओं की प्रत्यक्ष एवं तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करते हुए उन्हें राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है। मोहन सरकार की प्राथमिकताओं में भी निरंतरता और स्पष्टता दिखाई देती है। विगत वर्ष को ‘औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन वर्ष’ के रूप में समर्पित करते हुए मध्यप्रदेश ने निवेश आकर्षण और औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में चिन्हित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब कृषि, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औद्योगिक विकास के साथ समेकित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य को समग्र और समावेशी विकास की ओर अग्रसर कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 26 फरवरी 2026 को राजस्थान के भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित एक सफल इंटरएक्टिव सत्र में मध्यप्रदेश के धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए जयपुर में यह दूसरा प्रमुख आयोजन हो रहा है, जिसके माध्यम से मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक सामर्थ्य और निवेश संभावनाओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। राज्य द्वारा अल्प समय में 18 नई औद्योगिक नीतियों का क्रियान्वयन तथा दो ‘जन विश्वास अधिनियमों’ को लागू कर प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया जाना इस परिवर्तनशील और निवेशोन्मुखी दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की “रीजनल बैलेंस अप्रोच” के अंतर्गत औद्योगिक विकास को पूरे प्रदेश में संतुलित रूप से विस्तार दिया जा रहा है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, नर्मदापुरम में पावर एवं रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों के लिए देश का पहला मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क और धार में सबसे बड़े पीएम मित्रा पार्क जैसी पहलें राज्य की औद्योगिक प्रगति और दूरदर्शी योजना के सशक्त उदाहरण हैं। इसके साथ ही भोपाल में स्थापित देश का पहला संत रविदास मल्टी-स्किल्स ग्लोबल स्किल्स पार्क तथा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और रीवा में विकसित हो रहे आईटी पार्क राज्य के नवाचार, कौशल विकास और प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति प्रदान कर रहे हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य मध्यप्रदेश के औद्योगिक पोटेंशियल को प्रदर्शित कर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करना, उद्योगों को प्रदेश में स्थापित होने के लिये प्रेरित करना और रोजगार, कौशल तथा क्षेत्रीय समृद्धि के नए अवसर सृजित करना। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा राज्य की औद्योगिक तैयारियों, अधोसंरचना विस्तार, एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक कॉरिडोर कनेक्टिविटी तथा लॉजिस्टिक दक्षता पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया जाएगा।

नई FASTag नियमों के तहत टोल न कटने पर दोगुना जुर्माना, सरकार ने कड़ा फैसला लिया

नई दिल्ली हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार ने FASTag rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा। 72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी। क्यों लाए गए ये नए नियम? सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है। टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है। क्या है 'अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क'? संशोधित नियमों में 'अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी। ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस 'वाहन' से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके। FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

भोपाल में 5 मेट्रो स्टेशनों के नीचे पार्किंग होगी, ‘शहर सरकार’ का बजट 23 को पेश, 14 नई पार्किंग का प्रस्ताव

भोपाल  भोपाल की 'शहर सरकार' का बजट 23 मार्च को पेश होगा। अबकी बार करीब साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है। टैक्स बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पिछले साल टैक्स बढ़ने की वजह से मंत्री-विधायकों ने टैक्स बढ़ाने पर आपत्ति ली है। बैठक में 14 नई पार्किंग को लेकर प्रस्ताव आएगा। इनमें से 5 पार्किंग मेट्रो स्टेशन के नीचे प्रस्तावित की गई है। जहां 40 फोर व्हीलर और 250 टू व्हीलर्स खड़े किए जा सकेंगे। 16 मार्च को हुई मेयर इन कौंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। अब परिषद में यह प्रस्ताव आएगा। पार्किंग को लेकर निगम ने पुलिस की भी सहमति ली है। मेट्रो स्टेशन बने, लेकिन पार्किंग नहीं बनाई बता दें कि भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इसमें कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इनमें से एक भी स्टेशन पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ रही है। मेट्रो स्टेशनों पर सिर्फ पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था ही है। यानी, यात्री किसी गाड़ी से उतर और चढ़ तो रहे हैं, लेकिन वे अपने वाहन यहां खड़ा नहीं कर सकते। इस मुद्दे पर मेट्रो अफसर दो महीने से पार्किंग के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। नगर निगम ने इस समस्या का हल निकाला है। इन जगहों पर पार्किंग रहेगी सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन के दोनों गेट, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी मेट्रो स्टेशन के नीचे पार्किंग बनेगी। एमपी नगर, रानी कमलापति और एम्स स्टेशन के नीचे फिलहाल को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, तीनों जगह पर दूसरी पार्किंग है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर ही बड़ी पार्किंग है। मेट्रो से आने-जाने वाले यात्री यहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। एम्स के पास मेट्रो की खुद की जमीन है। जहां पार्किंग विकसित होगी। एमपी नगर में ही निगम की एक पार्किंग है। यात्री वहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर सकेंगे। लेगेसी वेस्ट के निपटारे का प्रस्ताव आएगा परिषद की बैठक में आदमपुर खंती लीगेसी वेस्ट के निपटान के लिए प्रस्ताव भी आएगा। दो दिन पहले एमआईसी ने इसे परिषद में लाने का निर्णय लिया था। इसमें 55.54 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के 145 वाहनों को कंडम घोषित किया जाएगा निगम के अनुपयोगी 145 वाहनों को कंडम घोषित कराए जाने के संबंध में भी प्रस्ताव परिषद की बैठक में आएगा। इसे भी एमआईसी मंजूरी दे चुकी है।

महिंद्रा ने Batman Edition को लेकर ग्राहकों के दबाव में वापस किए पैसे

 नई दिल्ली देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ने हाल ही में अपनी मशहूर इलेक्ट्रिक कार BE 6 का नया स्पेशल Batman Edition का दूसरा बैच लॉन्च किया था. लेकिन यह कदम कंपनी के लिए परेशानी का कारण बन गया. जहां नए ग्राहकों ने इसे उत्साह के साथ लिया, वहीं पहले बैच के खरीदार इस फैसले से नाराज हो गए. अब ग्राहकों की नाराजगी को देखते हुए कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए बायबैक ऑफर पेश किया है। क्यों देना पड़ा बायबैक ऑफर दरअसल, कंपनी ने अगस्त 2025 में BE 6 बैटमैन एडिशन को 'लिमिटेड रन' मॉडल बताते हुए लॉन्च किया था और इसकी सिर्फ 999 यूनिट्स ही बनाने की बात कही थी. खास बात यह रही कि ये सभी यूनिट्स कुछ ही मिनटों में बिक गई थीं. लेकिन इसके करीब 7 महीने बाद, 6 मार्च 2026 को कंपनी ने इसी स्पेशल एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च कर दिया. इससे पहले बैच के ग्राहकों को लगा कि कंपनी ने लिमिटेड एडिशन के नाम पर उनके साथ धोखा किया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने इस फैसले की जमकर आलोचना की। ग्राहकों की नाराजगी के बावजूद, BE 6 बैटमैन एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च होते ही मिनटों में बिक गया. इस बार कीमत में करीब 70,000 रुपये की बढ़ोतरी भी की गई थी, फिर भी डिमांड में कोई कमी नहीं दिखी. हालांकि, पहले खरीदारों का गुस्सा लगातार बढ़ता रहा। कंपनी का बड़ा फैसला ग्राहकों के रिस्पांस को देखते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अब पहले बैच के ग्राहकों के लिए फुल बायबैक ऑफर की घोषणा की है. यानी अगर कोई ग्राहक अपनी कार वापस करना चाहता है, तो वह कंपनी से संपर्क कर सकता है. इसके लिए ग्राहकों को अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करना होगा. कंपनी ने साफ किया है कि यह ऑफर 18 मार्च 2026 से सिर्फ 30 दिनों के लिए ही वैलिड रहेगा। Batman Edition में क्या है ख़ास BE 6 Batman Edition में डार्क नाइट थीम दी गई है, जो इसे एक यूनिक लुक देती है. कार के एक्सटीरियर पर Batman के बैज दिए गए हैं, वहीं केबिन के अंदर भी इसी थीम को फॉलो किया गया है. हालांकि, इसके पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक बार चार्ज करने पर 682 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है. इसमें रियर माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 286 hp की पावर और 380 Nm का टॉर्क जनरेट करती है।

बाजार में उथल-पुथल और सप्लाई संकट से बढ़े दबाव, क्या क्रूड $200 तक जाएगा?

मुंबई ईरान के साथ चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल $110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. यूएस क्रूड (WTI) करीब $100 के आसपास आ गया है. मार्च 2026 में ब्रेंट की कीमत $113 से $116 तक पहुंच चुकी है, जो पिछले कुछ हफ्तों में 50-60% की बढ़ोतरी दिखाती है. ईरान-इजराइल तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  में जहाजों की आवाजाही रोक दी है, जहां दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. इससे वेस्ट एशिया से तेल निर्यात 60% से ज्यादा घट गया है. फिलहाल दोपहर 3 बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 फीसदी उछलकर 117 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।  सीएनबीसी आवाज की रिपोर्ट में एनालिस्ट ने बताया है कि भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब खुल जाए, लेकिन बाजार की स्थिति सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा. सिटीग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, Q2 CY26 में ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 130 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या फिलहाल तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकती है? चलिए जानते हैं. क्या तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकता है? कई विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अब असंभव नहीं रहा. ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाकारी ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो तेल $200 तक पहुंच सकता है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा बिगड़ रही है. ईरान ने कहा है कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के लिए एक भी लीटर तेल नहीं गुजरेगा. होर्मुज सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यहां अगर ब्लॉकेज हुआ तो सप्लाई तुरंत टूट जाएगी।  विशेषज्ञ अमृता सेन (एनर्जी एस्पेक्ट्स) का कहना है, “यह अब सिर्फ रिस्क प्रीमियम नहीं है, असली सप्लाई डिसरप्शन हो रहा है.” बॉब मैकनैली और हेलिमा क्रॉफ्ट जैसे एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बड़ा डिसरप्शन हुआ तो कीमतें तेजी से उछल सकती हैं, क्योंकि स्पेयर कैपेसिटी बहुत कम है. कुछ एनालिस्ट्स कहते हैं कि $150-$200 तक जाना अब “अनथिंकेबल” नहीं रहा. हालांकि अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा है कि $200 “अनलाइकली” है, लेकिन पूरी तरह नामुमकिन नहीं।  करेंसी पर दबाव बढ़ेगा अगर होर्मुज बंद रहा तो ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ जाएगी, महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक मंदी आ सकती है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, करेंसी पर दबाव बढ़ेगा और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आएगा. भारत ने अपने टैंकरों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए हैं और डिप्लोमैसी से जहाजों को पास करवाया है. लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो गैसोलीन $6-7 प्रति गैलन तक जा सकती है, जो आम आदमी पर बोझ डालेगा।  इतिहास में 2008 में ब्रेंट $147 तक पहुंचा था (आज के मुताबिक $211 के बराबर), और 1973-74 के ऑयल क्राइसिस में भी कीमतें कई गुना बढ़ी थीं. आज का बाजार पहले से ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि कई जगहों पर डिसरप्शन एक साथ हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब अनिश्चितता नहीं, बल्कि असली शॉक प्राइस कर रहा है. डिप्लोमेसी, स्ट्रैटेजिक रिजर्व रिलीज या मिलिट्री एक्शन से राहत मिल सकती है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो $200 तेल दुनिया को अलग ही दौर में ले जाएगा. ऐसे में महंगाई, मंदी और ग्लोबल पावर बैलेंस बदल सकता है।