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विदेश से वतन वापसी: पश्चिम एशिया से 5 लाख 72 हजार भारतीय भारत पहुंचे

नई दिल्ली  सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र से लगभग 5,72,000 यात्री भारत लौट आए हैं, और कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुलने के साथ ही, मंगलवार को देश के लिए लगभग 8-10 गैर-निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। यूएई में, एक दिन में लगभग 85 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। ऑपरेशनल और सुरक्षा संबंधी बातों को ध्यान में रखते हुए, सीमित संख्या में गैर-निर्धारित उड़ानें जारी हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, ओमान और सऊदी अरब से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र बंद है। सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए विशेष गैर-निर्धारित कमर्शियल उड़ानें संचालित हो रही हैं। मंत्रालय ने कहा, "ईरान में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, भारतीय नागरिकों को यात्रा की सुविधा आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते दी जा रही है। इजरायल में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों को देखते हुए, भारतीय नागरिक मिस्र और जॉर्डन के रास्ते स्वदेश लौट रहे हैं।" मंत्रालय ने आगे कहा कि इराक में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, भारतीय नागरिकों की यात्रा की सुविधा जॉर्डन और सऊदी अरब के रास्ते दी जा रही है। इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है; उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है और उनकी सुरक्षा तथा कल्याण के लिए परामर्श जारी किए जा रहे हैं। बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। सरकार के अनुसार, पश्चिमी फारसी खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 485 भारतीय नाविक सवार हैं; डीजी शिपिंग, जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा है। डीजी शिपिंग ने अब तक 959 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वतन वापसी में सहायता की है, जिसमें पिछले 24 घंटों में वापस लौटे 9 नाविक भी शामिल हैं। पूरे भारत में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है; गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के राज्य समुद्री बोर्डों ने बंदरगाहों के सुचारू रूप से काम करने की पुष्टि की है।

गैस सिलेंडर डिलीवरी बना कमाई का जरिया, पंजाब में उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली

बरनाला. जिले में गैस सिलेंडर की कमी के कारण जहां आम जनता पहले से ही गंभीर मानसिक और आर्थिक परेशानी से गुजर रही है, वहीं अब गैस एजेंसियों द्वारा कस्टमर्स की जेब पर सीधी लूट के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। होम डिलीवरी और एजेंसी से ही सिलेंडर उठाने के दाम में अंतर का फायदा उठाकर भोले-भाले लोगों को लूटा जा रहा है, जिसके कारण शहरवासियों में भारी विरोध है। दामों में अंतर और एजेंसी की चालाकी आज अनाज मंडी बरनाला में हरजीत सिंह मान (टेंट हाउस), सोहन लाल, महा सिंह और बलविंदर सिंह समेत इकट्ठा हुए कस्टमर्स ने मीडिया से बात की और एजेंसियों की कथित मनमानी का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि उनकी गैस की कॉपी 'पनसप गैस सर्विस' ने बनाई थी। जब वे सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचे और रसीद कटवाई, तो उन्हें एक सिलेंडर की रसीद दी गई जिसमें 934 रुपये की कटौती की गई थी। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि 934 रुपये वह रेट है जिसमें होम डिलीवरी भी शामिल है। नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंज्यूमर खुद एजेंसी के गोदाम या ऑफिस में आकर सिलेंडर लेता है, तो उसे होम डिलीवरी चार्ज नहीं देना पड़ता और सिलेंडर का रेट 901 रुपये हो जाता है। विरोध करने पर रसीद बदली गई पीड़ित कंज्यूमर्स ने कहा कि जब उन्हें इस कीमत के अंतर के बारे में पता चला और उन्होंने एजेंसी स्टाफ से बात की, तो एजेंसी स्टाफ ने अपनी गलती छिपाने के लिए तुरंत 934 रुपये की रसीदें वापस ले लीं और उन्हें 901 रुपये की नई रसीदें दे दीं। कंज्यूमर्स ने सवाल उठाया कि अगर उन्हें पता नहीं होता, तो उनके साथ लूट हो जाती। उन्होंने डर जताया कि पता नहीं पहले कितने अनजान लोगों को 33 रुपये अतिरिक्त लेकर सिलेंडर बेचे गए होंगे। यह हजारों रुपये का घोटाला लगता है। मैसेज आए पर सिलेंडर नहीं मिला – लूट के अलावा, कंज्यूमर्स ने डिलीवरी सिस्टम पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन पर 'सिलेंडर डिलीवर होने' के मैसेज आए हैं, लेकिन असल में सिलेंडर उनके घर नहीं पहुंचा। यह डिजिटल फ्रॉड का बड़ा मामला है, जिससे कंज्यूमर्स सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं और एजेंसी कागजों में अपना कोटा पूरा दिखा रही है। कंज्यूमर्स ने अपना विरोध जताते हुए कहा कि एक तरफ महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है और दूसरी तरफ ये गैस एजेंसियां ​​खुलेआम लूट कर रही हैं।  ये मांगे – फूड सप्लाई डिपार्टमेंट तुरंत इन एजेंसियों के रिकॉर्ड चेक करे।  एजेंसी के बाहर होम डिलीवरी और एजेंसी रेट में अंतर दिखाने वाला बोर्ड लगाया जाए। जिन लोगों को सिलेंडर नहीं मिले हैं लेकिन मैसेज आ गए हैं, उनकी तुरंत सुनवाई हो। अगर एडमिनिस्ट्रेशन ने जल्द ही इन एजेंसियों पर शिकंजा नहीं कसा तो शहरवासी बड़े लेवल पर संघर्ष करने को मजबूर होंगे। सिस्टम और एडमिनिस्ट्रेशन से सीधे सवाल: इसकी जिम्मेदारी किसकी है?: क्या फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट को इस लूट की जानकारी नहीं है? अगर कस्टमर्स ने विरोध नहीं किया होता, तो क्या 33 रुपये प्रति सिलेंडर की यह लूट जारी नहीं रहती? डिजिटल फ्रॉड: कस्टमर्स को सिलेंडर मिलने से पहले ही 'डिलीवर हो गया' का मैसेज कैसे आ रहा है? क्या एजेंसियां ​​कागजों में कोटा पूरा दिखाकर सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग कर रही हैं? ट्रांसपेरेंसी की कमी: एजेंसियों के बाहर होम डिलीवरी और वेयरहाउस रेट के बड़े बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए? क्या यह जानबूझकर लोगों को अंधेरे में रखने की कोशिश है? एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन कब लिया जाएगा?: क्या डिप्टी कमिश्नर बरनाला इन एजेंसियों के रिकॉर्ड की सरप्राइज चेक करेंगे ताकि गरीब जनता की लूट रुक सके?

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 कर्नाटक की मनीषा जोंस सिद्दी ने जीता गोल्ड

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत आज सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में पिछले चार दिनों से जारी कुश्ती स्पर्धा का शानदार समापन आज हुआ। प्रथम ऐतिहासिक संस्करण में कर्नाटक की बेटी मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुश्ती के 76 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय है। पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल           मनीषा का खेल जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद, उनकी माँ ने हार नहीं मानी और अकेले दिन-रात मेहनत करके मनीषा के सपनों को पंख दिए। पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीत चुकीं मनीषा के करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है। स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार का मिला साथ            अपनी सफलता को साझा करते हुए मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, हॉस्टल के कोच और साथी खिलाड़ियों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरा बड़ा भाई मेरा मार्गदर्शक रहा है, वहीं छोटा भाई, जो खुद एक राज्य स्तरीय एथलीट है, वह मेरी सबसे बड़ी हिम्मत है। ट्राइबल गेम्स- एक नई पहचान का मंच            मनीषा ने केंद्र सरकार और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच से जनजातीय समुदाय के बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला है। उन्होंने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा मैच के दौरान सुरक्षा, भोजन और यातायात की व्यवस्था बेहतरीन थी। छत्तीसगढ़ के लोगों का व्यवहार और यहाँ का माहौल खिलाड़ियों के लिए अत्यंत सुखद है। लक्ष्य-अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना         स्वर्ण पदक की चमक के साथ मनीषा की निगाहें अब भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। छत्तीसगढ़ की धरती पर मिली इस सफलता से उत्साहित मनीषा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में जुटी हैं। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है।

नक्सलवाद को करारा झटका: बीजापुर-दंतेवाड़ा समेत 5 जिलों में 35 माओवादी सरेंडर, भारी मात्रा में हथियार बरामद

रायपुर  बस्तर रेंज में माओवादी हिंसा विरोधी अभियान के तहत मंगलवार को सुरक्षा बल को सफलता मिली है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर और नारायणपुर जिलों में कुल 35 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। वहीं बड़ी मात्रा में हथियार और करोड़ों की संपत्ति बरामद की गई है। यह कार्रवाई क्षेत्र में माओवाद की कमजोर होती पकड़ का संकेत मानी जा रही है। बीजापुर और दंतेवाड़ा में भारी मात्रा में हथियार और सोना बरामद बीजापुर जिले में 25 माओवादियों ने सरेंडर किया। इनके पास से 93 हथियार बरामद हुए, जिनमें चार एके-47 और नौ एसएलआर राइफलें शामिल हैं। इसके साथ ही सुरक्षा बल ने कुल ₹14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसमें ₹2.90 करोड़ रुपये और 7.2 किलोग्राम सोना (कीमत ₹11.16 करोड़) शामिल है। दंतेवाड़ा जिले में पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से आठ एसएलआर सहित अन्य हथियार बरामद किए गए। सुकमा और नारायणपुर में सरेंडर और नगदी की जब्ती सुकमा जिले में दो माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से एक एलएमजी, दो एके-47 और ₹10 लाख रुपये बरामद किया गया। नारायणपुर जिले में एक माओवादी ने आत्मसमर्पण किया। इसके पास से एक एलएमजी बरामद हुई। कांकेर जिले में दो और माओवादियों ने सशस्त्र संघर्ष त्यागकर शांति का मार्ग अपनाया। इनकी पहचान शंकर और हिडमा डोडी के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मसमर्पण के दौरान एके-47 राइफल भी पुलिस के समक्ष सौंपी। 25 मार्च से अब तक यहां 11 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। मुठभेड़ में 5 लाख का इनामी कमांडर ढेर इससे पहले रविवार को सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के जंगलों में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के साथ मुठभेड़ में एक माओवादी मारा गया था। मारे गए माओवादी की पहचान पीपीसीएम मुचाकी कैलाश के रूप में हुई है, जो सुकमा जिले के चिंतलनार थाना क्षेत्र के पूलानपाड़ा का निवासी था। वह प्लाटून नंबर 31 का सेक्शन कमांडर था और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। उस पर नागरिकों की हत्या, हमलों और आइईडी विस्फोट की साजिश रचने जैसे कई मामले दर्ज थे। पुनर्वास नीति और विकास कार्यों का दिख रहा असर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे अभियान, पुनर्वास नीति और विकास कार्यों के चलते माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले कैडर मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे आ रहे हैं, जो क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

66.20 लाख की लागत से बना सर्वसुविधायुक्त भवन, राजस्व सेवाओं में आएगी तेजी और पारदर्शिता

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायपुर जिले के धरसींवा में नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण किया। यह पहल प्रशासनिक सेवाओं को आमजन के और अधिक निकट, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन का मूल उद्देश्य यही है कि नागरिकों को उनकी जरूरत की सेवाएं समय पर, सरल और पारदर्शी तरीके से मिलें। धरसींवा का यह नया तहसील कार्यालय इसी संकल्प को साकार करता है। उन्होंने कहा कि इस भवन के शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में अब अधिक सुविधा और तेजी मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर नागरिक को बिना किसी अनावश्यक परेशानी के बेहतर प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध हो। नवनिर्मित तहसील कार्यालय में नायब नाजिर कक्ष, रिकॉर्ड रूम, माल जमार, नकल शाखा, कानूनगो कक्ष, भुइयां एवं भू-अभिलेख शाखा जैसी आवश्यक इकाइयों के साथ-साथ लोक सेवा केंद्र और आधार केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पेयजल सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक तहसील कार्यालय का निर्माण 66.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जो क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा और सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा, संभागायुक्त  महादेव कावरे, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त  विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री साव का ऐलान: रायगढ़ में सड़क और पुल निर्माण पर 18.72 करोड़ खर्च

रायपुर. राज्य शासन ने रायगढ़ जिले में दनौट कया-कमतरा मार्ग के उन्नयन के लिए 18 करोड़ 71 लाख 96 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 13.4 किमी सड़क के उन्नयन के साथ ही 60 मीटर लंबा पुल भी बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है। उप मुख्यमंत्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।

ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन एथलीटों ने दिखाया दमखम

रायपुर बस्तर जिले धरमपुरा जगदलपुर स्थित क्रीड़ा परिसर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत मंगलवार को एथलेटिक्स की स्पर्धाओं ने दर्शकों में भारी उत्साह भर दिया। जनजातीय युवाओं के कौशल और शारीरिक दक्षता को समर्पित इस आयोजन के दूसरे दिन प्रातः कालीन विभिन्न स्पर्धाओं में रोमांच का माहौल रहा। पुरुष वर्ग की बाधा दौड़ में असम के खिलाड़ी त्रैलोक्य मसरोंग ने अपनी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 15.85 सेकंड में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। स्पर्धा में तेलंगाना के सपावत दत्तू ने 16.65 सेकंड के साथ रजत और त्रिपुरा के हरि मोहन त्रिपुरा ने 16.82 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया।             इसके अलावा पुरुषों की 100 और 400 मीटर दौड़ में काँटे की टक्कर देखने को मिली। 400 मीटर दौड़ में गुजरात के एथलीट संतोषभाई उत्तमभाई गनवित ने 49.332 सेकंड में दौड़ पूरी कर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि ओडिशा के नोबल कुमार किसान महज 49.335 सेकंड के मामूली अंतर से पिछड़कर दूसरे स्थान पर रहे, तीसरे स्थान पर कर्नाटक राज्य के रामू रहे। 100 मीटर दौड़ में झारखंड के शिव कुमार सोरेन 10.58 मीटर में स्वर्ण, छत्तीसगढ़ राज्य के तिलक बर्सेल 10.87 के साथ दूसरे (रजत) और ओड़िसा के अतीश किंडो ने 10.91 के साथ तीसरा स्थान हासिल किया ।            इसी तरह पुरुषों की लंबी कूद में लक्षद्वीप के अब्दुल फतह एनएम ने 7.03 मीटर की शानदार छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, तो वहीं ओडिशा के भीमा सरदार और जीवन मुक्ति बिलुंग ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। मैदानी स्पर्धाओं में शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी रहा, जहाँ पुरुष वर्ग की तवा फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में गुजरात के मकवाना दानिश दिलीपभाई ने 44.83 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता। छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण तब आया जब स्थानीय खिलाड़ी सिद्धार्थ नागेश ने 35.56 के स्कोर के साथ रजत पदक जीतकर घरेलू दर्शकों का उत्साह बढ़ा दिया। तीसरे स्थान पर ओड़िसा के चंद्रय मुर्मू रहे ।           महिला वर्ग में भी देश की बेटियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। 100 मीटर दौड़ में झारखंड की पृथ्वी  ओरव ने 12.73 सेकंड और नागालैंड की रुदुओलहौनुओं बेहो ने 16.81 सेकंड का समय निकालकरदूसरे स्थान हासिल किए, जबकि झारखंड की पुतुल बास्की ने कांस्य पदक जीता।

एमएसपी से किसानों को मिलेगा लाभ, पारदर्शी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता: सूर्य प्रताप शाही

एमएसपी से किसानों को मिलेगा लाभ, पारदर्शी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता: सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री ने रबी सीजन की फसलों की खरीद के लिए बनाई गई व्यापक रणनीति के बारे में मंगलवार को दी जानकारी एमएसपी पर दलहन-तिलहन खरीद 7 अप्रैल से होगी शुरू, 30 जून तक चलेगी चना, मसूर, सरसों की खरीद पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी दरों में वृद्धि, कृषि विभाग की योजनाओं पर रिकॉर्ड खर्च और बीज वितरण में ऐतिहासिक उपलब्धि का किया उल्लेख* लखनऊ रबी सीजन 2026-27 में भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिलेगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मंगलवार को लोक भवन में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि चना, मसूर, सरसों की खरीद 7 अप्रैल से 30 जून तक की जाएगी। इस दौरान पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था, डीबीटी भुगतान और विस्तृत क्रय नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।  सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, फसलों का उचित मूल्य दिलाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। एमएसपी पर दलहन और तिलहन की खरीद की यह रणनीति किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और 75 जनपदों में उर्वरकों की सप्लाई सुचारु रूप से हो रही है। एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था कृषि मंत्री ने बताया कि मूल्य समर्थन योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। चने का एमएसपी 5875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर का 7000 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों का 6200 रुपये प्रति क्विंटल और अरहर का 8000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। खरीद लक्ष्य और समयसीमा सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने फसलों की खरीद के स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने कहा कि चने के लिए 2.24 लाख मीट्रिक टन, मसूर के लिए 6.77 लाख मीट्रिक टन, सरसों के लिए 5.30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि कर किसानों को अतिरिक्त लाभ देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि चने पर 225 रुपये, मसूर पर 300 रुपये और सरसों पर 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है और एमएसपी में यह वृद्धि उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पारदर्शी खरीद और भुगतान प्रणाली कृषि मंत्री ने बताया कि खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त होगी। किसानों को उपज का भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। क्रय केंद्रों और एजेंसियों की व्यवस्था कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष खरीद व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ी संख्या में क्रय केंद्र स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। भारत सरकार की एजेंसियां नैफेड और एनसीसीएफ को राज्य की 5 एजेंसियां यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस किसानों से उपज को क्रय करके सप्लाई करेंगी, जिसका लाभ किसानों को सीधे खाते में वितरित किया जाएगा। इन एजेंसियों के समन्वय से खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का किया उल्लेख सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा लगभग 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न योजनाओं पर व्यय की गई, जो रिकॉर्ड उपलब्धि है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधारात्मक प्रावधान लागू करने से राज्य को 303 करोड़ रुपये की बचत हुई है। बीज वितरण की दी जानकारी कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बीज वितरण किया गया है। 11.25 लाख किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया गया, जबकि 12.73 लाख किसानों को मुफ्त बीज वितरित किए गए। जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 31,950 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जिसमें मूंगफली, उड़द और मूंग शामिल हैं। उर्वरक उपलब्धता की दी जानकारी राज्य में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य में कुल 25.41 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो सभी 75 जनपदों में संतुलित रूप से वितरित किया गया है। उपलब्ध उर्वरकों में 11.26 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.08 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.64 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.45 लाख मीट्रिक टन एसएसपी तथा 98 हजार मीट्रिक टन पोटाश (एमओपी) शामिल है। यह मात्रा किसानों की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और किसी भी जिले में कमी की स्थिति नहीं है। उर्वरकों का वितरण पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। पीओएस मशीनों के जरिए अब तक 63.34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता बनी हुई है और वास्तविक किसानों तक ही लाभ पहुंच रहा है। अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने अग्रिम योजना के तहत उर्वरकों का भंडारण भी किया है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में भी किसी प्रकार की कमी न हो। साथ ही वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर प्रति हेक्टेयर उर्वरक उपयोग के मानक तय किए गए हैं, जिससे संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिल सके। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार लगातार इसकी निगरानी कर रही है, ताकि हर किसान को समय पर उर्वरक मिल सके। सीड पार्क की स्थापना का भी किया उल्लेख कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने … Read more

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पर सवाल: क्या 2026 में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध हो सकता है?

 नईदिल्ली  ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के युद्ध ने पूरी दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींच रखी हैं. हर कोई सोच रहा है कि आगे क्या होगा. लोग डर और चिंता में हैं क्योंकि किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ लोग इसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं, जिन्होंने आने वाले समय में बड़े युद्ध और दुनिया में उथल-पुथल होने की बात कही थी. यही वजह है कि 2026 में नास्त्रेदमस जैसी पुरानी भविष्यवाणियां फिर सुर्खियों में आ गई हैं. लोग यह भी सोच रहे हैं कि इस बड़े तनाव का असर सोने और चांदी की कीमतों पर क्या होगा. क्या यह शेयर बाजार में कोई बड़ी गिरावट का संकेत है।  क्या कहती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी? नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में सीधे सीधे कभी सोना, चांदी या 2026 में मंहगाई का जिक्र नहीं किया था. लेकिन, उनकी लिखी बातें अक्सर युद्ध, आर्थिक उथल-पुथल और दुनिया में अस्थिरता की चेतावनी के रूप में देखी जाती हैं. आज लोग इन्हें हाल के युद्ध और संकट से जोड़कर देख हैं. युद्ध के समय लोग सोना और चांदी जैसी संपत्ति की तरफ जाते हैं. इसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर जा सकती हैं. लेकिन, बाजार में हमेशा ऐसा नहीं होता है क्योंकि कीमतों में हमेशा उतार चढ़ाव बना रहता है।  सोना‑चांदी के रेट ऊपर जाएंगे या नीचे? हाल ही के मार्केट ट्रेंड्स बताते हैं कि स्थिति थोड़ी उलझी हुई है. युद्ध और तनाव होने के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें कभी-कभी नीचे जा रही हैं. इसका मुख्य कारण है अमेरिका में डॉलर का मजबूत होना और ब्याज दरों का बढ़ना. असल में इसका मतलब यह है कि सिर्फ दुनिया में युद्ध का होना ही कीमतें बढ़ाने के लिए काफी नहीं. बाजार में और भी कई चीजें असर डालती हैं जैसे कि पैसे की कीमत (डॉलर) और बैंक की नीतियां. यानी, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी चाहे जैसी भी हो, असली मार्केट की चाल तो इन असली आर्थिक कारणों से तय होती है।  क्या हो सकता है तीसरे विश्व? आजकल लोग ये बात खूब कर रहे हैं कि क्या मौजूदा हालात आगे चलकर तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकते हैं. इसकी वजह ये है कि नास्त्रेदमस ने अपनी लिखी बातों में बड़े युद्ध का जिक्र किया था, जिसे लोग आज के हालात से जोड़ रहे हैं. लेकिन सच यह है कि उनकी बातों में कहीं भी साफ-साफ आज के किसी तीसरे विश्व युद्ध का जिक्र नहीं मिलता है।  एक्सपर्ट क्या कहते हैं और नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी क्या कहती है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना, चांदी और शेयर बाजार का हाल महंगाई, ब्याज दर और दुनिया भर की सप्लाई जैसी चीजों पर निर्भर करता है. यानी बाजार असली आर्थिक हालात से चलता है, न कि किसी भविष्यवाणी से. वहीं, नास्त्रेदमस की लिखी बातें सीधी नहीं होतीं हैं, बल्कि इशारों में होती हैं. लोग उन्हें अपने हिसाब से समझ लेते हैं, इसलिए एक ही बात के अलग-अलग मतलब निकाले जाते हैं।  नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां लोगों के बीच चर्चा और डर को जरूर बढ़ा देती हैं, लेकिन असली मार्केट ऊपर-नीचे होने के पीछे वजह अर्थव्यवस्था और दुनिया के हालात होते हैं. इसलिए, निवेश करते समय अंदाजों या भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि सही डेटा और एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करना ज्यादा समझदारी है।   

इंदौर की सपना शर्मा ने पैराताइक्वांडो में चौथा गोल्ड जीता, बनीं चार बार की नेशनल चैंपियन

इंदौर  बेंगलुरु के कोरामंगला स्टेडियम में आयोजित पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में मध्य प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ी सपना शर्मा ने अपनी स्वर्णिम सफलता का सिलसिला जारी रखते हुए एक बार फिर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है। यह सपना शर्मा का लगातार चौथा नेशनल गोल्ड मेडल है, जिसके साथ ही वह देश की पहली ऐसी दिव्यांग खिलाड़ी बन गई हैं जिन्होंने खेल जगत में यह विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है। इंदौर की रहने वाली सपना की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल उनके शहर बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।  फाइनल मुकाबले में तेलंगाना की खिलाड़ियों को दी मात इस दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 28 और 29 मार्च को किया गया था, जिसमें देशभर के लगभग 70 खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया। फाइनल मुकाबले में सपना शर्मा ने अपनी बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर दिया। कड़े मुकाबले में तेलंगाना की ममता को रजत पदक से संतोष करना पड़ा, जबकि कृष्णवेणी ने कांस्य पदक हासिल किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान सपना का प्रदर्शन इतना प्रभावी रहा कि उन्होंने हर राउंड में अपना दबदबा बनाए रखा और स्वर्ण पदक पर अपना नाम दर्ज कराया। संघर्षों से लड़कर हासिल किया यह मुकाम सपना शर्मा की सफलता की यह कहानी जितनी सुखद है, उनका सफर उतना ही चुनौतीपूर्ण रहा है। दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद सपना ने शारीरिक अक्षमता को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। ताइक्वांडो से पहले वह टेबल टेनिस में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और आर्म रेसलिंग में भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं। उनकी यह यात्रा आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच निरंतर अभ्यास की मिसाल है। सपना का मानना है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक बाधाएं सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। खुद की जिंदगी और संघर्ष से सब सीखा सपना का कहना है कि मेहनत, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने का जज़्बा ही मेरी सफलता का सबसे बड़ा राज है। मैं हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं। मेरा सबसे बड़ा रोल मॉडल मेरी खुद की जिंदगी और मेरा संघर्ष है। मैंने जो भी सीखा है, अपनी परिस्थितियों से सीखा है। परिवार में पति संज वर्मा और बेटी हनाया है। ये भी मेरे संघर्ष के हिस्सेदार हैं। हर मुश्किल ने मुझे मजबूत बनाया है और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। हौसले मजबूत हैं कमजोरी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती बकौल सपना अगर किसी एक व्यक्ति की बात करूं, तो मैं उन सभी खिलाड़ियों को अपना रोल मॉडल मानती हूं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश के लिए मेडल जीतते हैं। मेरे लिए असली प्रेरणा वही लोग हैं, जो हालात से हार नहीं मानते, बल्कि अपने संघर्षों को अपनी ताकत बनाकर सफलता हासिल करते हैं। अगर आपके हौसले मजबूत हैं, तो कोई भी कमजोरी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए और अपने सपनों को कभी छोटा मत समझिए।सपना का लक्ष्य है कि लक्ष्य है कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए और ज्यादा गोल्ड मेडल जीतूं और देश का नाम रोशन करूं। सपना ने टेबल टेनिस और आर्म रेसलिंग में भी मप्र और भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उनका कहना है कि हार मानने वालों में से नहीं हूं, मैं हर बार गिरकर और मजबूत बनकर उठती हूं। परिस्थितियों को बनाया अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा सपना अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने वाले जज्बे को देती हैं। वह किसी अन्य के बजाय अपनी खुद की जिंदगी और संघर्षों को अपना रोल मॉडल मानती हैं। उनके परिवार में पति संजय वर्मा और बेटी हनाया हैं, जो उनके इस कठिन सफर में हमेशा साथ खड़े रहे हैं। सपना का कहना है कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, अपनी परिस्थितियों से ही सीखा है। वह उन सभी खिलाड़ियों से प्रेरणा लेती हैं जो विपरीत हालातों के बावजूद देश के लिए मेडल जीतकर लाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराने का है अगला लक्ष्य सपना शर्मा अब अपनी इस सफलता को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ले जाना चाहती हैं। वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं, हालांकि कई बार आर्थिक कारणों से वह चयन होने के बाद भी विदेशी दौरों पर नहीं जा सकीं। लेकिन इन असफलताओं ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है। अब उनका एकमात्र लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए अधिक से अधिक स्वर्ण पदक जीतना और देश का गौरव बढ़ाना है। वह कहती हैं कि वह गिरकर संभलने और हर बार पहले से अधिक मजबूत होकर उभरने में विश्वास रखती हैं।