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बुंडू नवरात्रि मेला कमिटी का हुआ गठन, बबलू प्रजापति बने अध्यक्ष और विधायक विकास मुंडा मुख्य संरक्षक

बुंडू  झारखंड के रांची के बुंडू में हर साल की तरह इस वर्ष भी बुंडू में नवरात्रि मेला पूरे धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इसको लेकर श्री श्री राधा रानी मंदिर परिसर में राधा रानी कमिटी, मौसी बाड़ी कमिटी और आम जनता की संयुक्त बैठक संपन्न हुई. तय हुई मेला की तिथि इस बैठक में मेला की तिथि को लेकर निर्णय लिया गया.तय किया गया कि मेले का आयोजन 19 अप्रैल से 28 अप्रैल तक किया जाएगा. परंपराओं का रखा जाएगा विशेष ध्यान मेला अवधि के दौरान पारंपरिक मान्यताओं का पालन करते हुए मांस, मछली और अंडा का सेवन वर्जित रहेगा. नई कमिटी का गठन स्थायी कमिटी के अध्यक्ष गणेश कुम्हार जी के स्वर्गवास के बाद अध्यक्ष का चुनाव किया गया है. नई कमिटी में अरुण जैन, मुख्यसंरक्षक विधायक विकास कुमार मुंडा, मेला संचालन के अध्यक्ष बबलू प्रजापति, उपाध्यक्ष बबलू कुंडू, राजकिशोर कुशवाहा सचिव रोशन महतो, उपसचिव जीतू महतो, कोषाध्यक्ष धनंजय प्रमाणिक, उपकोषाध्यक्ष सौरभ नायक, सदस्य आकाश लायक, राकेश मछुवा, रोहित नायक,बाली उरांव,संजय महतो, पवन राणा,ललित साहू, पिंटू दत्ता, संरक्षक नगर अध्यक्ष जितेंद्र उरांव, नगर उपाध्यक्ष रविन्द्र उरांव, बुंडू प्रमुख राजकुमार बिंझिया, प्रमोद सिंह, ढोलु शर्मा, सूरज प्रकाश भगत, रंजीत लाहेरी, रंजीत मोदक, मुख्य भंडारपाल मनोज कुंडू, सलाहाकर भंडारपाल मोहित नायक, तुलसी भगत चुने गए. शांति और भाईचारे का संदेश इस मौके पर सभी ने निर्णय लिया की नवरात्रि मेला पूरे शांति, सौदर्य और भाईचारा के साथ मनाने की अपील किया.

बिहार की राजनीति में नए युग की शुरुआत, 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार

पटना बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने साल 2005 से बिहार की कमान संभाली है, अब राज्य की सत्ता की बागडोर छोड़कर दिल्ली की राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पुष्टि की है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. 2005 से लगातार सत्ता में रहे नीतीश नीतीश कुमार 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद संभालते रहे. राज्यसभा जाने के उनके फैसले ने सभी को चौंका दिया. नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति के एक युग का समापन माना जा रहा है. अप्रैल के दूसरे सप्ताह में बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. बिहार की जनता और राजनीतिक पंडितों की निगाहें अब एनडीए के अगले कदम पर टिकी हैं, जो राज्य के भविष्य की नई दिशा तय करेगा. किन-किन नेताओं का नाम चर्चा में? इस बार राज्यसभा चुनाव के नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. नीतीश कुमार के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी निर्वाचित हुए हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार भी ऊपरी सदन में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे. तीन-तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का एक साथ राज्यसभा जाना केंद्र में बिहार के बढ़ते सियासी वजन की ओर इशारा कर रहा है. राज्यसभा शपथ के बाद क्या होगा अगला कदम? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने उत्तराधिकारी की चर्चाओं को हवा दे दी है. राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री हो सकता है. कई पार्टी नेताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को सत्ता सौंपने की वकालत की है, जिसके समर्थन में पटना की सड़कों पर पोस्टर भी देखे जा रहे हैं. एनडीए का केंद्रीय नेतृत्व और नीतीश कुमार मिलकर जल्द ही नए नाम पर मुहर लगा सकते हैं, ताकि शासन-प्रशासन में निरंतरता बनी रहे.

दूरस्थ गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाकर बदलाव ला रही हैं रिंगो कश्यप

रायपुर दूरस्थ गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाकर बदलाव ला रही हैं रिंगो कश्यप कोंडागांव जिले के मर्दापाल तहसील के अंतर्गत अंतिम छोर पर स्थित सुदूर ग्राम कुधुर, जो कभी माओवाद के प्रभाव के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था, आज परिवर्तन की नई कहानी लिख रहा है। जहां कभी ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं की राशि निकालने के लिए लगभग 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल के बैंक तक जाना पड़ता था, वहीं अब गांव में ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।     यह परिवर्तन संभव हुआ है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल और बीसी सखी के रूप में कार्यरत  रिंगो कश्यप के प्रयासों से। ग्राम पंचायत कुधुर के गुमियापाल पारा की निवासी रिंगो कश्यप न केवल कुधुर, बल्कि तुमड़ीवाल और टेकापाल के ग्रामीणों को भी घर-घर बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रही हैं।     रिंगो कश्यप ने वर्ष 2020 में “मां पार्वती स्व सहायता समूह” से जुड़कर अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद वर्ष 2024 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने बीसी सखी के रूप में कार्य प्रारंभ किया। आज उनके माध्यम से ग्रामीणों को महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि गांव में ही आसानी से प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही बिजली बिल भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन भी सरल हो गए हैं।    अब तक रिंगो कश्यप द्वारा 355 से अधिक सफल लेनदेन किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 6 लाख 75 हजार रुपये से अधिक है। इस कार्य ने न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को कम किया है, बल्कि रिंगो कश्यप के लिए भी स्व-रोजगार का सशक्त माध्यम बना है।     उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर एक छोटा किराना दुकान भी शुरू किया है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की आय हो रही है, और भविष्य में वे अपने व्यवसाय को और विस्तार देना चाहती हैं।     रिंगो कश्यप जैसी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों में विकास को नई दिशा मिल रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि समाज में अपनी एक नई पहचान भी स्थापित कर रही हैं।

व्यक्तिगत अधिकार बनाम धार्मिक परंपरा, सीजेआई सूर्य कांत की बेंच तय करेगी धर्म और संवैधानिक नैतिकता की नई परिभाषा

नई दिल्ली 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई, मस्जिदों पर भी होगा असर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐतिहासिक संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है। 7 अप्रैल 2026 से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ उन व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। यह न केवल हिंदू धर्म, बल्कि मुस्लिम, पारसी और दाऊदी बोहरा समुदायों की धार्मिक प्रथाओं को भी प्रभावित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विचार नहीं कर रही है। अदालत के सामने असल चुनौती यह तय करना है कि क्या व्यक्तिगत मौलिक अधिकार किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों से ऊपर हैं। इस फैसले का असर मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकारों और दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं पर भी पड़ेगा। 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। एकमात्र महिला जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने तब असहमति जताते हुए कहा था कि धार्मिक प्रथाओं की तर्कसंगतता की जांच करना अदालतों का काम नहीं है। नवंबर 2019 में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मुद्दा बहुत व्यापक है और इसे बड़ी बेंच (9 जजों) को भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के सामने कई सवाल संविधान पीठ कुछ मुद्दों पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है? अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदाय के अधिकार) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा? क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार संविधान के 'भाग-III' (मौलिक अधिकार) के अधीन हैं? अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त 'नैतिकता' शब्द का अर्थ क्या है? क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है? क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कोई धार्मिक प्रथा उस धर्म का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं? अनुच्छेद 25(2)(b) में हिंदुओं के वर्गों का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या कोई व्यक्ति जो उस विशेष धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, उसकी प्रथाओं को कोर्ट में चुनौती दे सकता है? अन्य धर्मों पर भी होगा असर यह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें कई अन्य विवादों को जोड़ दिया गया है। मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित 'बहिष्कार' और अन्य प्रथाओं की वैधता। गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के 'अग्नि मंदिर' में प्रवेश का अधिकार। आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई जैन संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है, क्योंकि कोर्ट का फैसला उनके व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकता है। नई बेंच का गठन CJI सूर्य कांत के नेतृत्व वाली इस बेंच में विविधता का ध्यान रखा गया है। इसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी जज शामिल हैं। 7 अप्रैल से होने वाली यह दैनिक सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्याओं में से एक साबित होगी। अदालत के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन साथ ही यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कोई भी प्रथा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, वह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकती। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि धर्म की अपनी आंतरिक स्वायत्तता होती है और अदालतों को सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

दरभंगा एयरपोर्ट पर अकासा एयर की एंट्री, बेंगलुरु जाने वाले यात्रियों का इंतज़ार खत्म, जानें फ्लाइट का पूरा शेड्यूल

  दरभंगा दरभंगा और आसपास के जिलों के लोगों का लंबा इंतजार आज खत्म हो गया. रविवार से दरभंगा एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए सीधी फ्लाइट शुरू हो गई है. अब मिथिलांचल के लोगों को बेंगलुरु जाने के लिए पटना या कोलकाता जाने की जद्दोजहद नहीं करनी होगी. अकासा एयर ने इस रूट पर अपनी रेगुलर सेवा शुरू कर दी है. संजय सरावगी ने जताई खुशी इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक संजय सरावगी ने क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पूरे बिहार के लिए गर्व का पल है. सरावगी ने इस सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उड़ान योजना ने छोटे शहरों को बड़े सपनों से जोड़ दिया है. इस सीधी सेवा से बेंगलुरु में पढ़ने वाले छात्रों और वहां की बड़ी कंपनियों में काम करने वाले बिहार के युवाओं को घर आना-जाना बहुत सुलभ हो जाएगा. क्या है फ्लाइट का समय? अकासा एयर की यह फ्लाइट सप्ताह के सातों दिन उड़ान भरेगी. शेड्यूल के मुताबिक, विमान सुबह 9:40 बजे बेंगलुरु से उड़ेगा और दोपहर 12:15 बजे दरभंगा पहुंचेगा. इसके बाद, यही फ्लाइट दोपहर 12:50 बजे दरभंगा से टेक-ऑफ करेगी और दोपहर 3:30 बजे वापस बेंगलुरु लैंड करेगी. बुकिंग और कनेक्टिविटी लंबे समय से इस रूट पर विमान सेवा ठप रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही थी. अब विभिन्न ट्रेवल साइट्स पर टिकटों की बुकिंग तेजी से शुरू हो गई है. पहले स्पाइसजेट इस रूट पर सेवा देती थी, लेकिन बीच-बीच में सर्विस बंद होने से यात्री परेशान रहते थे. अब अकासा एयर की एंट्री से उत्तर बिहार के कारोबारियों को नया बाजार मिलेगा और इलाके में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

अमेरिका में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर, अमेजॉन और एयरलाइंस ने बढ़ाया बोझ, 2026 में आर्थिक संकट गहराया

  इन्फ्लेशन  ईरान के खिलाफ जंग लड़ रहे अमेरिका में लोगों पर महंगाई की मार पड़ी है. पेट्रोल की कीमतें 1 डॉलर से ज्‍यादा और डीजल की कीमतें 1.89 डॉलर बढ़ गई हैं. इसका असर कृषि और उद्योंगों पर तो पड़ ही रहा है, ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हो गया है. इन वजहों से युद्ध का असर अब सीधे अमेरिकी नागरिकों की जेब तक पहुंच गया है. जेट फ्यूल की कीमतें भी आसमान पर पहुंच ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजॉन ने डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज लगाने का ऐलान किया है, वहीं प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं. पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ? अमेरिका में महंगाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन (करीब 3.8 लीटर) पर पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे उच्च स्तर है. वहीं, अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के आंकड़ों के अनुसार, डीजल की कीमत एक साल पहले के 3.64 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर 5.53 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन हो गई है. डीजल का उपयोग कृषि, निर्माण और परिवहन के साथ-साथ अन्य उद्योगों में भी व्यापक रूप से होता है. अमेजॉन और डाक सेवा ने लगाया सरचार्ज दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर अमेजॉन ने पुष्टि की है कि वह 17 अप्रैल से तीसरे पक्ष के विक्रेताओं (थर्ड-पार्टी सेलर्स) पर 3.5 फीसदी का ईंधन और लॉजिस्टिक्स सरचार्ज लागू करेगा अमेजॉन ने एक बयान में कहा, 'ईंधन और लॉजिस्टिक्स में बढ़ी हुई लागत ने पूरे उद्योग में परिचालन की लागत बढ़ा दी है.' कंपनी ने कहा कि उसने अब तक इन बढ़ोतरी को खुद ऑब्‍जर्ब किया है, लेकिन अब लागत कम करने के लिए येअस्थाई कदम उठाना जरूरी हो गया है. अमेजॉन अकेली ऐसी कंपनी नहीं है. अमेरिकी डाक सेवा (USPS) ने भी पार्सल और एक्सप्रेस मेल डिलीवरी पर 8 फीसदी का अस्थायी ईंधन सरचार्ज लगाने की मांग की है. यदि मंजूरी मिलती है, तो ये सरचार्ज 26 अप्रैल से प्रभावी होगा और 17 जनवरी, 2027 तक जारी रहेगा इसके अलावा, यूनाइटेड पार्सल सर्विस (UPS) और फेडएक्स (FedEx) ने भी अपने ईंधन सरचार्ज में बढ़ोतरी की है एयरलाइंस ने बढ़ाए टिकट के दाम युद्ध के कारण जेट ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो एयरलाइनों के लिए लेबर कॉसट के बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च है डेल्टा, यूनाइटेड और अमेरिकन एयरलाइंस के सीईओ ने एक कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया कि वे बढ़ती लागत की भरपाई के लिए टिकट के दाम बढ़ा रहे हैं डेल्टा एयर लाइंस के CEO एड बैस्टियन ने कहा कि उनकी कंपनी ईंधन लागत को 'रिकैप्चर' करने के लिए अच्छी स्थिति में है. अमेरिकन एयरलाइंस ने खुलासा किया कि उसने ईंधन पर अतिरिक्त 400 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस भारी बढ़ोतरी के बावजूद यात्रियों की मांग कम नहीं हुई है. होर्मुज संकट के बीच बढ़ी चिंता इस पूरे आर्थिक संकट की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से है, जिससे होकर दुनिया के 20 फीसदी तेल का परिवहन होता है जानकारों का कहना है कि अगर ये संकट लंबा खिंचा तो अमेरिका में सप्लाई चेन बाधित हो सकती है. न्यूयॉर्क स्थित विश्लेषक राचेल ज़िम्बा ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अमेरिका इससे बच पाएगा. ये वैश्विक बाजार हैं. एक हफ्ते पहले भी विशेषज्ञ चिंतित थे, अब वे और अधिक चिंतित हैं' शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने चेतावनी दी कि अगर परिवहन लागत बढ़ती है, तो इसका असर अन्य कीमतों पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा कि उपभोक्ता 'स्टिकर शॉक' (कीमतें देखकर हैरान रह जाना) का सामना करेंगे, जिससे पहले से ही बढ़ती महंगाई और भी गंभीर हो जाएगी. महंगाई का कोहराम, आगे और संकट के संकेत अभी फरवरी 2026 में अमेरिका की महंगाई (कोर इंफ्लेशन) दर 2.50 फीसदी थी , लेकिन युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं. पीटरसन इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ गैरी हुफबॉर का अनुमान है कि ईरान युद्ध के कारण महंगाई  4 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो सकती है. सीएनएन के एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग दो-तिहाई अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने आर्थिक स्थितियों को खराब किया है. जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका तेल की कमी से प्रभावित होने वाला अंतिम बाजार होगा, लेकिन कैलिफोर्निया में अप्रैल के अंत या मई से उत्पादों की कमी शुरू हो सकती है.

NH-48 पर सुगम होगा सफर, खेरवाड़ा में एलिवेटेड स्ट्रक्चर के लिए केंद्र की मंजूरी, सीएम भजनलाल ने जताया आभार

जयपुर एलिवेटेड स्ट्रक्चर (ऊंची संरचना) बनाने की स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। इस में स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावी ढंग से अलग किया जाएगा। खेरवाड़ा को बड़ी सौगात: 363.89 करोड़ की लागत से बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर, जाम से मिलेगी मुक्ति राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-48 के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी खंड पर खेरवाड़ा शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। शर्मा ने शनिवार रात सोशल मीडिया के माध्यम से आभार जताते हुए कहा कि 363.89 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना यातायात सुगमता एवं सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करेगी और प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को और अधिक मजबूत बनाएगी। उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर निर्माण उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर खेरवाड़ा शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए 363.89 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी है। लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी यह परियोजना खेरवाड़ा कस्बे में एक एलिवेटेड स्ट्रक्चर (ऊंची संरचना) बनाने की स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। इस में स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावी ढंग से अलग किया जाएगा और पहचाने गए 'ब्लैक-स्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्रों) को ठीक किया जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा में समग्र सुधार होगा। ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी यह एलिवेटेड स्ट्रक्चर बाहर से आने वाले ट्रैफिक को स्थानीय ट्रैफिक से अलग कर गुजरने देगा, जिससे खेरवाड़ा शहर में ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी और यात्रा का समय भी बचेगा। इससे आवागमन और भी सुगम और तेज हो जाएगा।

ब्लैक मार्केट में 10 हजार तक पहुंचा एलपीजी सिलिंडर, महाराष्ट्र और गोवा के फिशरीज सेक्टर पर छाई आर्थिक मंदी

नई दिल्ली ईरान में चल रहे युद्ध का असर दुनिया के हर एक देश पर देखा जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पहले के मुकाबले एलपीजी सप्लाई में कमी आई है। वहीं डीजल और पेट्रोल को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं। गोवा और महाराष्ट्र के मछुआरे इस परिस्थिति के शिकार हुए हैं। उनकी सैकड़ों नौकाएं समंदर किनारे खड़ी रहने को मजबूर हैं। मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक कई मछुआरों का कहना है कि एलपीजी सिलिंडर की कमी की वजह से उनके सामने बोट पर खाना बनाने की भी समस्या है। हालांकि कई लोग अब स्टोव पर भरोसा कर रहे हैं। एलपीजी सिलिंडर की कमी एक मछुआरे ने कहा, आज एक सिलिंडर की कीमत ब्लैक मार्केट में 10 हजार के करीब है। ऐसे में हमें स्टोव का सहारा लेना पड़ रहा है। बतादें कि ईरान यु्द्ध को एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। ऐसे में कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता ही जा रहा है। मुंबई और गोवा में बल्क फ्यूल की कीमत भी बढ़ गई है। मुंबई में रहने वाले कोली समुदाय के लोगों का कहना हैकि उनकी नाव 15 दिन में करीब 2000 से 3000 लीटर डीजल खाती है। ऐसे में उन्हें बल्क डीजल लेना पड़ता है जिसकी कीमत बढ़ गई है। बल्क डीजल की कीमतों में वृद्धि उन्होंने कहा,मुंबई में बल्क डीजल 122 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है जो कि पहले 70 से 80 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहा था। ओएमसी ने एक बार फिर बल्क डीजल की कीमत 23 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी। बता दें कि तेल की कीमतें भारत पेट्रोलिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी ओएमसी ही तय करती हैं। महाराष्ट्र सरकार मछुआरों को बल्क डीजल पर सब्सिडी भी उपलब्ध करवाती है। मालिम के एक मछुआरे ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर की कमी होते ही बहुत सारे मछुआरों ने फिशिंग का समय कम करदिया। उन्होंने कहा कि अगदर कोई चार दिन के लिए फिशिंग पर जाताहै तो नाव में कम से कम 4 से 5 लोग होते हैं और उन्हें एक एलपीजी सिलिंडर की जरूरत होती है. वहीं बड़ी नावों पर 30 से 40 लोग होते हैं और वे 15 दिन के लिए निकलते हैं। ऐसे में उन्हें 3 से 4 सिलिंडर की जरूरत होती है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक गोवा में करीब 12651 मछुआरे परिवार हैं। फिशरी सेक्टर तटीय राज्यों की जीडीपी में करीब 2.5 फीसदी का योगदान देते हैं। अर्थव्यवस्था में फिशरीज सेक्टर का बड़ा योगदान डायरेक्टरेट ऑफ प्लानिंग स्टेटिस्टिक्स ऐंड इवैलुएशन के मुताबिक 2024-25 में गोवा के समंदर से 1.27 लाख टन मछलियां पकड़ी गईं जिनकी कीमत करीब 2300 करोड़ थी। ज्यादातर मछली का निर्यमात दक्षिण-पुर्वी एशिया, अमेरिका, चीन और यूरोप को किया गया। वहीं महाराष्ट्र में 2026 में फिशिंग कम्युनिी के करीब 3.65 लोगों को इससे रोजगार मिलता है। इनमें से 23000 से ज्यादा मुंबई के ही रहने वाले हैं। इस उद्योग का साल का टर्नओवर करीब 9121 करोड़ रुपये है। मछुआरों का कहना है कि तट के पास डीजल 138 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। अगर ऐसे ही 10 दिन और चलता रहा तो स्थिति यह होगी की काम बंद ही करना पड़ेगा। बता दें कि अगर मछुआरों का काम ज्यादा प्रभावित होता है तो इसका असर महाराष्ट्र और गोवा दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर सैटेलाइट इमेजरी बंद, क्या ईरान के हमलों में हुए नुकसान को छिपा रहा है अमेरिका

वॉशिंगटन प्लेनेट लैब्स एक सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी है जो सरकारों, कंपनियों और मीडिया कंपनियों को उपग्रह से ली गई तस्वीरें बेचता है। उसके ताजा फैसले को लेकर पेंटागन ने कहा कि 'वह इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है।' ईरान-इजरायल युद्ध की तस्वीरें जारी नहीं करेगा प्लेनेट लैब्स वॉशिंगटन: सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी प्लेनेट लैब्स ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वह अमेरिकी सरकार के अनुरोध का पालन करते हुए ईरान और पश्चिम एशिया के संघर्ष वाले क्षेत्र की तस्वीरें अनिश्चित काल के लिए रोक रही है। कैलिफोर्निया स्थित प्लेनेट लैब्स ने अपने ग्राहकों को भेजे एक ईमेल में इस फैसले की घोषणा की है। इसने बताया है कि अमेरिकी सरकार ने सैटेलाइट इमेज देने वाली सभी कंपनियों से कहा है कि वे संघर्ष वाले क्षेत्र की तस्वीरें जारी करना अनिश्चित काल के लिए रोक दें। प्लेनेट लैब्स ने पिछले महीने ही पश्चिम एशिया की तस्वीरें जारी करने पर 14 दिनों की रोक लगा दी थी और अब उसे बढ़ा दिया गया है। कंपनी ने उस दौरान कहा था कि इस कदम का मकसद विरोधियों को इन इमेज का इस्तेमाल करके अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हमला करने से रोकना है। प्लेनेट लैब्स ने कहा कि वह 9 मार्च से पहले की तस्वीरों को जारी नहीं करेगा और उसे उम्मीद है कि यह नीति तब तक लागू रहेगी जब तक संघर्ष समाप्त नहीं हो जाता। आपको बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले की शुरूआत की थी। इसके बाद ईरानी मिसाइलों ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की थी। प्लेनेट लैब्स ईरान-अमेरिका युद्ध की तस्वीरें जारी नहीं करेगा ईरान के मिसाइल हमलों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। विरोधियों का कहना है कि ईरान के मिसाइल हमलों में अमेरिका को इतना ज्यादा नुकसान हुआ है कि वो नहीं चाहता कि तस्वीरें बाहर आएं। इसीलिए ट्रंप प्रशासन ने तस्वीरों के जारी करने पर रोक लगा दी है।आपको बता दें कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के मिलिट्री इस्तेमाल में टारगेट की पहचान, हथियारों को गाइड करना, मिसाइल को ट्रैक करना और कम्युनिकेशन शामिल हैं। कुछ स्पेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान कमर्शियल इमेजिंग का इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें अमेरिका के दुश्मनों से मिली तस्वीरें भी शामिल हैं। सैटेलाइट तस्वीरें उन पत्रकारों और मिलिट्री एक्सपर्ट्स की भी मदद करती हैं जो उन जगहों का अध्ययन कर रहे हैं जहां पहुंचना मुश्किल है। सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी प्लेनेट लैब्स क्या है? प्लेनेट लैब्स एक सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी है जो सरकारों, कंपनियों और मीडिया कंपनियों को उपग्रह से ली गई तस्वीरें बेचता है। उसके ताजा फैसले को लेकर पेंटागन ने कहा कि 'वह इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है।' प्लेनेट लैब्स ने कहा है कि वो ऐसी तस्वीरें जारी करेगा जो संवेदनशील ना हों और जिनसे जोखिम ना बढ़े। प्लेनेट लैब्स सैटेलाइट से पृथ्वी की तस्वीरें लेता है खासकर जिन इलाकों में संघर्ष छिड़ा हो या प्राकृतिक आपदा आई हो। यह दुनिया के सबसे बड़े अर्थ-इमेजिंग सैटेलाइट बेड़े का संचालन करती है जिसमें लगभग 200 सक्रिय उपग्रह शामिल हैं। प्लैनेट लैब्स भारत में भी सक्रिय है और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर भूमि उपयोग और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में डेटा सहायता प्रदान करती है।

MP बोर्ड अपडेट: 1.29 लाख छात्रों ने नहीं पास की 5वीं-8वीं, मई में होगी रीटेस्ट

भोपाल प्रदेश में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में इस बार बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं। दोनों कक्षाओं के करीब 1.29 लाख विद्यार्थी 33 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर सके। अब इन विद्यार्थियों को एक और मौका देते हुए मई के दूसरे सप्ताह में पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों और स्कूलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जहाँ पांचवीं में करीब 62 हजार और आठवीं में करीब 67 हजार विद्यार्थी फेल हुए हैं, ऐसे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पुनः परीक्षा में शामिल होना होगा। कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को एक और अवसर देकर उन्हें अगली कक्षा में आगे बढ़ने का मौका दिया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे फेल हुए विद्यार्थियों के लिए विशेष तैयारी कराएं। इसके तहत अतिरिक्त कक्षाएं, अभ्यास सत्र और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विद्यार्थी पुनः परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि कमजोर छात्रों की पहचान समय रहते की जाए और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग दिया जाए। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले नहीं होंगे प्रोन्नत दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यार्थी पुनः परीक्षा में भी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उसी कक्षा में दोबारा अध्ययन करना होगा। यानी ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे नियमित रूप से अतिरिक्त समय देकर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से उनकी समझ मजबूत करें। विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाते हुए बार-बार पुनरावृत्ति कराई जाए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें। अतिरिक्त कक्षाएं और अभिभावकों की भूमिका स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि 5वीं और 8वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की तैयारी के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं। इन कक्षाओं में विषयवार कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष जोर दिया जाए। इसके साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने और नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। शिक्षकों को कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के मन से परीक्षा का डर निकालें और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करें ताकि अगली परीक्षा में सफलता सुनिश्चित हो सके।