बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है, न सशक्त बन सकता है और न ही आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री
व्यापक बचाव अभियान और मजबूत उपचार व्यवस्था ही बनेगी भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को किया संबोधित सीएम ने कहा- स्वस्थ नागरिक से स्वस्थ समाज बनेगा और स्वस्थ समाज ही रखता है एक सशक्त राष्ट्र की नींव बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है, न सशक्त बन सकता है और न ही आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री स्वस्थ दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से ही कर सकते हैं इस चुनौती का प्रभावी समाधान: सीएम लखनऊ तेजी से बदलती जीवनशैली और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य नीति के केंद्र में अब केवल उपचार नहीं, बल्कि बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट), दोनों का संतुलित समन्वय अनिवार्य हो गया है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि देश को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ और उत्पादक बनाना है, तो चिकित्सा व्यवस्था को इलाज-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़ाकर जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार पर आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना और किफायती उपचार के विस्तार पर काम कर रही है। दूसरी ओर, समाज को बीमारियों से पहले ही सुरक्षित करने की रणनीति यानी ‘बचाव’ को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यही द्विस्तरीय दृष्टिकोण (मजबूत उपचार व्यवस्था और व्यापक बचाव अभियान) आने वाले भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगा और ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने की दिशा तय करेगा। बचाव को बनाना होगा प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज आज समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं, जबकि भारत की परंपरा में संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या हमेशा से स्वस्थ जीवन का आधार रही है। बदलती जीवनशैली के चलते उत्पन्न चुनौतियों के बीच अब स्वास्थ्य के दो प्रमुख आयाम – बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट) स्पष्ट रूप से सामने हैं। जहां विशेषज्ञों की स्वाभाविक रुचि उपचार और नवाचार में होती है, वहीं उनका मानना है कि इन बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बचाव को प्राथमिकता देनी होगी। जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके। आयुष्मान भारत बना सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तेजी से नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बढ़ रही हैं और समाज का बड़ा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। पहले गंभीर बीमारी का मतलब पूरे परिवार के लिए आर्थिक संकट होता था, क्योंकि न पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान थे और न ही विशेषज्ञों की उपलब्धता। लेकिन पिछले वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से आज देश के लगभग 55-60 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जो दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवरेज योजनाओं में एक है और आमजन को उपचार की बड़ी चिंता से राहत प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से लगभग 1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। आयुष्मान भारत योजना से वंचित रह गए वर्गों को भी मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत शामिल कर स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है। हाल ही में शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, एएनएम तथा मिड-डे मील से जुड़े रसोइयों को भी इस योजना में कवर किया गया है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग अब स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ गया है और उन्हें प्रभावी लाभ मिल रहा है। जागरूकता के बिना नहीं रुकेगी बीमारी की चुनौती मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जो 25 करोड़ की आबादी के लिए बेहद अपर्याप्त थे, जबकि आज केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है और 2 एम्स भी संचालित हैं। हर जिले में आईसीयू की स्थापना, अनेक स्थानों पर कैथ लैब की शुरुआत, निजी क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों का तेजी से विस्तार और पुराने मेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दे रहा है। लखनऊ के एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान के माध्यम से टेली-कंसल्टेशन, टेली-आईसीयू और वर्चुअल आईसीयू सेवाओं को प्रदेशभर के अस्पतालों से जोड़ा गया है। साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क के जरिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इंगित किया कि इन सभी प्रयासों के बावजूद, यदि जीवनशैली में सुधार और व्यापक जागरूकता अभियान पर समान बल नहीं दिया गया, तो बढ़ती बीमारियों की चुनौती को केवल उपचार के माध्यम से नियंत्रित करना संभव नहीं होगा। चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां निजी क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों के लिए परिस्थितियां अपेक्षाकृत सहज हैं, वहीं सरकारी संस्थानों में अत्यधिक मरीजों की भीड़ एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि केजीएमयू में प्रतिदिन 12 से 14 हजार, एम्स दिल्ली में 16 से 17 हजार और एसजीपीजीआई में 10 से 12 हजार तक ओपीडी होती है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण उपचार दे पाना कठिन हो जाता है, और भविष्य में यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, विशेषकर प्रतिदिन 4 से 6 घंटे स्मार्टफोन के उपयोग ने नई बीमारियों को जन्म दिया है, वहीं डायबिटीज का तेजी से बढ़ता प्रसार भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इन परिस्थितियों में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यही संदेश डॉक्टरों के माध्यम से समाज तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा और स्थायी होता है, इसलिए चिकित्सकों की भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिलावटी खान-पान और बिगड़ी दिनचर्या सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सबसे बड़ी … Read more