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बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है, न सशक्त बन सकता है और न ही आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री

व्यापक बचाव अभियान और मजबूत उपचार व्यवस्था ही बनेगी भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को किया संबोधित सीएम ने कहा- स्वस्थ नागरिक से स्वस्थ समाज बनेगा और स्वस्थ समाज ही रखता है एक सशक्त राष्ट्र की नींव बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है, न सशक्त बन सकता है और न ही आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री स्वस्थ दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से ही कर सकते हैं इस चुनौती का प्रभावी समाधान: सीएम लखनऊ तेजी से बदलती जीवनशैली और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य नीति के केंद्र में अब केवल उपचार नहीं, बल्कि बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट), दोनों का संतुलित समन्वय अनिवार्य हो गया है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि देश को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ और उत्पादक बनाना है, तो चिकित्सा व्यवस्था को इलाज-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़ाकर जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार पर आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना और किफायती उपचार के विस्तार पर काम कर रही है। दूसरी ओर, समाज को बीमारियों से पहले ही सुरक्षित करने की रणनीति यानी ‘बचाव’ को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यही द्विस्तरीय दृष्टिकोण (मजबूत उपचार व्यवस्था और व्यापक बचाव अभियान) आने वाले भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगा और ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने की दिशा तय करेगा। बचाव को बनाना होगा प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज आज समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं, जबकि भारत की परंपरा में संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या हमेशा से स्वस्थ जीवन का आधार रही है। बदलती जीवनशैली के चलते उत्पन्न चुनौतियों के बीच अब स्वास्थ्य के दो प्रमुख आयाम – बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट) स्पष्ट रूप से सामने हैं। जहां विशेषज्ञों की स्वाभाविक रुचि उपचार और नवाचार में होती है, वहीं उनका मानना है कि इन बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बचाव को प्राथमिकता देनी होगी। जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके। आयुष्मान भारत बना सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तेजी से नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बढ़ रही हैं और समाज का बड़ा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। पहले गंभीर बीमारी का मतलब पूरे परिवार के लिए आर्थिक संकट होता था, क्योंकि न पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान थे और न ही विशेषज्ञों की उपलब्धता। लेकिन पिछले वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से आज देश के लगभग 55-60 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जो दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवरेज योजनाओं में एक है और आमजन को उपचार की बड़ी चिंता से राहत प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से लगभग 1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। आयुष्मान भारत योजना से वंचित रह गए वर्गों को भी मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत शामिल कर स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है। हाल ही में शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, एएनएम तथा मिड-डे मील से जुड़े रसोइयों को भी इस योजना में कवर किया गया है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग अब स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ गया है और उन्हें प्रभावी लाभ मिल रहा है। जागरूकता के बिना नहीं रुकेगी बीमारी की चुनौती मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जो 25 करोड़ की आबादी के लिए बेहद अपर्याप्त थे, जबकि आज केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है और 2 एम्स भी संचालित हैं। हर जिले में आईसीयू की स्थापना, अनेक स्थानों पर कैथ लैब की शुरुआत, निजी क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों का तेजी से विस्तार और पुराने मेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दे रहा है। लखनऊ के एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान के माध्यम से टेली-कंसल्टेशन, टेली-आईसीयू और वर्चुअल आईसीयू सेवाओं को प्रदेशभर के अस्पतालों से जोड़ा गया है। साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क के जरिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इंगित किया कि इन सभी प्रयासों के बावजूद, यदि जीवनशैली में सुधार और व्यापक जागरूकता अभियान पर समान बल नहीं दिया गया, तो बढ़ती बीमारियों की चुनौती को केवल उपचार के माध्यम से नियंत्रित करना संभव नहीं होगा। चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां निजी क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों के लिए परिस्थितियां अपेक्षाकृत सहज हैं, वहीं सरकारी संस्थानों में अत्यधिक मरीजों की भीड़ एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि केजीएमयू में प्रतिदिन 12 से 14 हजार, एम्स दिल्ली में 16 से 17 हजार और एसजीपीजीआई में 10 से 12 हजार तक ओपीडी होती है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण उपचार दे पाना कठिन हो जाता है, और भविष्य में यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, विशेषकर प्रतिदिन 4 से 6 घंटे स्मार्टफोन के उपयोग ने नई बीमारियों को जन्म दिया है, वहीं डायबिटीज का तेजी से बढ़ता प्रसार भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इन परिस्थितियों में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यही संदेश डॉक्टरों के माध्यम से समाज तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा और स्थायी होता है, इसलिए चिकित्सकों की भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिलावटी खान-पान और बिगड़ी दिनचर्या सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सबसे बड़ी … Read more

वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने से 6 श्रद्धालुओं की मौत, कई लापता; CM योगी ने हादसे पर जताया संज्ञान, रेस्क्यू के निर्देश

वृंदावन  उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बड़ा हादसा हो गया. यहां श्रद्धालुओं से भरी एक नाव यमुना नदी में पलट गई. इस दुर्घटना में 6 लोगों की मौत की पुष्टि जिला प्रशासन ने की है, जबकि 14 से अधिक लोगों को बचा लिया गया. हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए तुरंत रेस्क्यू अभियान तेज करने के निर्देश दिए. प्रशासन और राहत टीमें मौके पर लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं।  जानकारी के अनुसार, पंजाब से आए श्रद्धालु यमुना नदी में घूमने के लिए मोटर बोट पर सवार थे, लेकिन अचानक बोट असंतुलित होकर पलट गई. इसमें सभी लोग नदी में गिर गए।  दिल को झकझोर देने वाली है ये घटना : सीएम योगी सीएम योगी ने एक्स पर लिखा कि जनपद मथुरा में नाव पलटने से हुई मौतें बेहद दुखद और दिल को झकझोर देने वाली हैं. उन्होंने कहा कि इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं. उन्होंने अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य तेज करने और घायलों का बेहतर इलाज कराने के निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।  हादसा दोपहर पौने 3 बजे केशी घाट पर हुआ, जो श्रीबांके बिहार मंदिर से करीब ढाई किमी की दूरी पर है. नाव पीपा पुल से टकराने के बाद नदी में पलट गई. स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की टीमें करीब 50 स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में लापता लोगों की तलाश कर रही हैं. बताया जा रहा है कि तेज हवा के कारण नाव पर नियंत्रण नहीं रहा और वह पीपा पुल से टकराकर यमुना नदी में पलट गई।  मथुरा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने कहा, 'केशी घाट के पास यमुना नदी के एक हिस्से में नाव डूब गई है. अब तक 22 लोगों को नदी से बाहर निकाला जा चुका है. बचाए गए लोगों को एम्बुलेंस और पुलिस वाहन (पीआरवी) की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. हम फिलहाल स्थिति का जायजा ले रहे हैं ताकि पता चल सके कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लोगों की जान गई है… यहां एक पोंटून पुल है. चूंकि यह पुल जर्जर हालत में था, इसलिए एक एजेंसी पोंटूनों की मरम्मत का काम कर रही थी. आशंका है कि यह दुर्घटना इसी मरम्मत कार्य के दौरान हुई होगी। 

गर्मी में नींबू पानी से ज्यादा हाइड्रेटिंग है तरबूज का शरबत, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर यह ड्रिंक तुरंत देगा एनर्जी

भीषण गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और शरीर के तापमान को कम करने के लिए कुछ ना कुछ ठंडी हेल्दी ड्रिंक्स पीते रहना चाहिए लेकिन शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादातर लोग नींबू के शरबत पर ही निर्भर रहते हैं. लेकिन आपको बता दें कि हाइड्रेशन के मामले में तरबूज बहुत ही अच्छा माना जाता है.   तरबूज का शरबत के फायदे विटामिन A, C और पोटेशियम से भरपूर तरबूज का शरबत न केवल प्यास बुझाता है बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा कर तुरंत ताकत से भर देता है. बाजार के मिलावटी जूस के बजाय घर पर बना यह शुद्ध और ठंडा शरबत आपको दिन भर की थकान से राहत देगा. साथ ही इसे घर पर बनाना भी बेहद आसान है. यहां हम आपको इसकी रेसिपी शेयर कर रहे हैं. शरबत बनाने के लिए तैयार कर लें ये चीजें तरबूज: 3-4 कप (कटा हुआ और बीज निकले हुए) नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच पुदीना के पत्ते: 8-10 ताजी पत्तियां काला नमक: आधा छोटा चम्मच चीनी/शहद: 1 चम्मच (अगर तरबूज कम मीठा हो) चाट मसाला: एक चुटकी बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका तरबूज को छोटे टुकड़ों में काट लें और जितना संभव हो सके इसके बीज निकाल दें. कुछ छोटे क्यूब्स को सर्विंग के लिए अलग रख लें. एक मिक्सर जार में तरबूज के टुकड़े, ताजी पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और काला नमक डालें. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करके जूस तैयार कर लें. अगर आपको बिल्कुल साफ जूस पसंद है तो इसे छान लें. वरना इसके पल्प के साथ भी यह काफी टेस्टी लगता है. तैयार जूस में एक चुटकी चाट मसाला मिलाएं जो इसके स्वाद को दोगुना कर देगा. गिलास में बर्फ के टुकड़े और पहले से बचाकर रखे हुए तरबूज के छोटे क्यूब्स डालें. ऊपर से ठंडा-ठंडा जूस डालें और पुदीने की पत्ती से सजाकर तुरंत सर्व करें.

30 लाख बेस प्राइस पर 28 बार बोली, संजीव गोयनका ने ‘सिक्सर किंग’ चौधरी पर लगाया दांव

कोलकाता कोलकाता के ईडन गार्डन्स में 9 अप्रैल (गुरुवार) को खेले गए रोमांचक मुकाबले में 21 साल के मुकुल चौधरी ने ऐसी पारी खेली, जिसने ना सिर्फ मैच का रुख बदला बल्कि एक नए फिनिशर का संकेत भी दे दिया. लखनऊ सुपर जायंट्स जब 104/5 पर संघर्ष कर रही थी और 7 ओवर में 78 रन चाहिए थे, तब क्रीज पर मौजूद मुकुल ने हालात को समझते हुए जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।  आयुष बदोनी के आउट होते ही मुकुल को साफ हो गया कि अब मैच को अंत तक ले जाना उनकी ही जिम्मेदारी है. उन्होंने खुद मैच के बाद कहा- जब आयुष भैया आउट हुए, तब मुझे लगा कि जो भी करना है, अब मुझे ही करना है. मैं जीत-हार के बारे में नहीं सोच रहा था, बस मैच को करीब ले जाना चाहता था।  इसके बाद 30 गेंदों में से मुकुल ने 25 गेंदें खुद खेलीं, जिससे दबाव को अपने ऊपर रखा और दूसरे छोर पर बल्लेबाजों को बचाने का काम किया. उन्होंने कई ओवरों में स्ट्राइक मैनेजमेंट का बेहतरीन उदाहरण पेश किया. दो ओवर लगातार पांचवीं गेंद पर सिंगल लेकर उन्होंने आवेश खान को सिर्फ एक गेंद खेलने दी. हालांकि 19वें ओवर में उन्होंने स्ट्राइक अपने पास रखने का फैसला किया और कैमरन ग्रीन की धीमी शॉर्ट गेंद को मिडविकेट के ऊपर छक्के के लिए भेज दिया।  मुकुल की पारी सिर्फ ताकत का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि मानसिक मजबूती का भी उदाहरण थी. मैच से एक दिन पहले तक वह अपनी बैटिंग को लेकर ज्यादा सोच रहे थे. टीम बस में कप्तान ऋषभ पंत ने उन्हें सलाह दी कि ज्यादा प्रयोग करने के बजाय गेंद को देखकर खेलो. इस सलाह ने उनका खेल पूरी तरह बदल दिया।  शुरुआत में मुकुल को थोड़ी परेशानी हुई. वह सुनील नरेन की गेंदों को पढ़ नहीं पा रहे थे और वैभव अरोड़ा के खिलाफ भी जूझते दिखे. 9 गेंदों में 6 रन के स्कोर पर और 21 गेंदों में 50 रन की जरूरत के समय उन्होंने पहले से यॉर्कर का अंदाजा लगाकर दो कदम हटकर कलाईयों के दम पर लंबा छक्का जड़ दिया. इस शॉट में महेंद्र सिंह धोनी की झलक दिखी, जिसे बाद में उन्होंने उन्हें समर्पित भी किया।  कार्तिक त्यागी की स्लोअर गेंदों पर भी मुकुल ने जबरदस्त बैटस्पीड से जवाब दिया. कवर के ऊपर मारा गया उनका शॉट उनकी ताकत और आत्मविश्वास दोनों को दिखाता है।  19वें ओवर में कैमरन ग्रीन के खिलाफ मुकुल ने अलग ही अंदाज दिखाया. पहली गेंद पर टॉप-एज मिला, दूसरी पर मिस कर गए और गेंद पीठ पर लगी. इसके बाद उन्होंने तुरंत ग्लव्स बदले. दबाव साफ दिख रहा था, लेकिन अगली ही गेंद पर उन्होंने लंबा छक्का जड़कर मैच को अपने नियंत्रण में कर लिया. आखिरी गेंद पर सिंगल लेने के बजाय फिर छक्का लगाकर उन्होंने मुकाबला लगभग खत्म कर दिया।  मैच में आवेश खान उनसे बात करने की कोशिश करते रहे, लेकिन मुकुल ने जरूरत के हिसाब से ही बात सुनी. उन्होंने खुद को अलग रखते हुए पूरी तरह अपने गेम पर ध्यान दिया. यह दिखाता है कि इतनी कम उम्र में भी उनके पास मैच की समझ और मानसिक संतुलन है।  आखिरी शॉट में उनकी कलाईयों की ताकत और बैलेंस साफ दिखा. गेंद बाउंड्री के पार जाने के बाद भी उनका संतुलन बना रहा. जीत के बाद उन्होंने आसमान की ओर देखकर जश्न मनाया और भगवान का शुक्रिया अदा किया।  मैच खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मुकुल उतने ही शांत दिखे. उन्होंने इसे अपने लिए मौका बताया और कहा कि वह इसी तरह अपना नाम और पहचान बनाना चाहते हैं।  मुकुल चौधरी का नाम भले ही अभी नया हो, लेकिन जिस तरह से उन्होंने दबाव में खुद को संभाला, उससे साफ है कि भारतीय क्रिकेट को एक और भरोसेमंद फिनिशर मिल सकता है।  तो कितने रुपए में आईपीएल में खरीदे गए मुकुल चौधरी  ईडन गार्डन में अपने खेल की छटा ब‍िखेरेने वाले मुकुल को आईपीएल में खरीदने के लिए कई टीमों ने जोर लगाया था. वो मौजूदा आईपीएल में अब तक 3 मैच खेल चुके हैं. जहां उनके नाम 162.79 के स्ट्राइक रेट से कुल 70 रन हैं. उनका बेस प्राइज 30 लाख रुपए था, जहां उनको संजीव गोयनका की टीम लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने उनको  2.60 करोड़ में खरीदा था।  28 बार लगी थी मुकुल चौधरी के लिए बोली  मुकुल चौधरी के लिए IPL 2026 का ऑक्शन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. उन्होंने अपना नाम 30 लाख रुपये की बेस प्राइस पर डाला था, लेकिन जैसे ही उनका नाम आया, टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर शुरू हो गई. शुरुआत में मुंबई इंडियंस (MI) और राजस्थान रॉयल्स (RR) ने बोली लगानी शुरू की. धीरे-धीरे कीमत  ₹30 लाख से बढ़कर 1 करोड़ तक पहुंच गई।  इसके बाद असली मुकाबला राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के बीच देखने को मिला. दोनों टीमों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी और लगातार बोली बढ़ाते गए. हर कुछ सेकंड में कीमत ऊपर जाती रही, 1.20 करोड़, 1.50 करोड़, 1.80 करोड़ और फिर 2 करोड़ के पार. आखिर में लखनऊ सुपर जायंट्स ने बाजी मार ली और मुकुल चौधरी को 2.60 करोड़ रुपये में खरीद लिया. कुल मिलाकर उनके लिए 28 बार बोली लगी, जो दिखाता है कि फ्रेंचाइजियों को उनके टैलेंट पर कितना भरोसा था।  राजस्थान के झुंझनू में हुआ मुकुल चौधरी का जन्म मुकुल चौधरी राजस्थान के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं. उन्होंने अंडर-23 लेवल पर शानदार प्रदर्शन कर पहचान बनाई. इसके बाद सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 में उन्होंने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 5 पारियों में 173 रन बनाए, जहां उनका स्ट्राइक रेट 198.85 रहा।  मुकुल चौधरी राइट हैंडेट मिडिल ऑर्डर बैटर हैं. मुकुल का जन्म 6 अगस्त 2004 को राजस्थान के झुंझुनू हुआ. मुकुल राजस्थान के लिए ही घरेलू क्रिकेट खेलते हैं. मुकुल ने अब तक 4 फर्स्ट क्लास, 5 लिस्ट-ए और 10 टी20 मुकाबले खेले हैं. फर्स्ट क्लास मैचों में मुकुल ने 17.16 की औसत से 103 रन बनाए हैं. वही लिस्ट-ए क्रिकेट में मुकुल के नाम पर 14.20 के एवरेज से 71 रन दर्ज हैं. टी20 क्रिकेट में मुकुल ने 46.66 और 164.70 की स्ट्राइक रेट से … Read more

कमल कौर भाभी की हत्या का आरोपी गिरफ्तार, UAE से डिपोर्ट कर पंजाब लाया गया अमृतपाल मेहरा

बठिंडा पिछले साल बठिंडा में हुए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कमल कौर भाभी हत्याकांड मामले में वांटेड अमृतपाल मेहरो को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है।  बठिंडा में जून 2025 में इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसर कंचन कुमारी उर्फ कमल भाभी की सनसनीखेज हत्या मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपित अमृतपाल सिंह मेहरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) से डिपोर्ट (Deport) कर भारत लाया गया, जहां दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईजीआई एयरपोर्ट) पर 10 अप्रैल 2026 की सुबह उसे गिरफ्तार किया गया। पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग के तहत ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्राडिशन सेल (ओएफटीईसी) और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपित की लोकेशन को ट्रेस कर उसके खिलाफ एक्सट्राडिशन प्रक्रिया शुरू की गई थी। जानकारी के अनुसार, 11 जून 2025 को आरोपित अमृतपाल सिंह मेहरों ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर कंचन कुमारी का अपहरण किया और उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को बठिंडा के आदेश अस्पताल के पास खड़ी कार में छोड़ दिया गया था। इस मामले में शामिल अन्य तीन आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। हत्या के बाद मुख्य आरोपित देश छोड़कर फरार हो गया था और कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहा था। लेकिन पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसकी तलाश जारी रखी और आखिरकार उसे विदेश से गिरफ्तार कर भारत लाने में सफलता हासिल की। पंजाब पुलिस ने दोहराया है कि संगठित अपराध और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है। पुलिस का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों को सजा दिलाने के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जून में कार में मिला था शव सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर कंचन कुमारी उर्फ कमल भाभी की बठिंडा में पिछले साल जून में हत्या कर दी गई थी। चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल की पार्किंग में खड़ी गाड़ी से उनका शव मिला था। कंचन कुमारी का इंस्टाग्राम पर कमल काैर भाभी नाम से अकाउंट था। कंचन कुमारी लक्ष्मण बस्ती, लुधियाना की रहने वाली थी। वह नाै जून को अपनी मां को कहकर निकली थी कि वह बठिंडा में प्रमोशनल इवेंट के लिए जा रही है।   तीन माह की रेकी के बाद की थी हत्या मामले में पकड़े गए दोनों आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया है कि कंचन कुमारी उर्फ कमल कौर की हत्या के लिए तीन माह से अमृतपाल महरों और उसके साथी रेकी कर रहे थे। कुछ दिन अमृतपाल अपने साथियों समेत कंचन के घर पास एक होटल में भी रुका रहा था। इतना ही नहीं अमृतपाल दो बार कंचन के घर भी गया था, लेकिन वो घर पर नहीं मिली थी।  जब ऐसे बात न बनी तो फिर अमृतपाल ने 8 जून को कंचन से संपर्क करके कहा कि उसे कार की प्रमोशन करने के लिए बठिंडा आना है। इसके बाद कंचन उर्फ कमल कौर 9 जून को लुधियाना से अपनी कार से बठिंडा पहुंची। जहां पर अमृतपाल महरों, जसप्रीत सिंह और निमरजीत सिंह तीनों कंचन को मिले और उसकी गाड़ी में बैठ गए। पहले तीनों आरोपियों ने भुच्चो के समीप एक गैरेज से कंचन की गाड़ी रात के साढ़े 12 बजे तक ठीक करवाई और फिर अपनी स्कॉर्पियो को एक पेट्रोल पंप पर खड़ा करके कंचन को साथ लेकर उसी की गाड़ी में चारों सवार हो गए। आरोपियों द्वारा किए खुलासे के अनुसार अमृतपाल महरों कंचन की गाड़ी चला रहा था। जसप्रीत और निमरतजीत कंचन के साथ कार की पिछली सीट पर बैठे थे।  आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि अमृतपाल के कहने पर सबसे पहले उन्होंने कंचन के दोनों मोबाइल ले लिए और उससे पासवर्ड मांगा जब उसने पासवर्ड नहीं बताया तो अमृतपाल के कहने पर कंचन से दोनों ने मारपीट की। इसके बाद कमर कस्सी से दोनों ने एक सुनसान जगह पर गाड़ी में ही कंचन का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।   मां बोली-अब इंसाफ की उम्मीद कंचन कुमारी की मां ने कहा कि अब उनको इंसाफ की उम्मीद जग गई है। उन्होंने मांग की कि उनकी बेटी के हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए। उन्होंने बताया कि उनकी तीन बेटियां थीं, एक की शादी हुई थी। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी मेरा बहुत ख्याल रखती थी।   

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान: यूरिया और डीएपी की कीमत बढ़ने पर किसानों का चेक होगा रिकॉर्ड

भोपाल  अमेरिका-ईरान के बीच भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन अभी भी तनाव बना हुआ है. ऐसे में भारत में युद्ध का असर दिखने लगा है. रासायनिक खाद संकट को देखते हुए केन्द्र सरकार ने खाद वितरण का एक नया तरीका तैयार किया है. किसानों को आगामी फसलों के लिए पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार नया सिस्टम तैयार कर रही है. इसमें किसानों को उनकी जमीन और फसल के हिसाब से खाद उपलब्ध कराया जाएगा. केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी जानकारी दी है।  शिवराज बोले- नहीं बढ़ेंगी खाद की कीमतें केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा "युद्ध की वजह से अभी रासायनिक खाद का कोई संकट नहीं है. देश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है. केन्द्र सरकार अलग-अलग स्तर पर इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है. पश्चिम एशिया में पैदा हुई परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लगातार बैठकें की जा रही हैं।  शिवराज ने कहा "युद्ध के चलते कच्चे माल की कीमतों में बढोत्तरी हुई है. इससे डीएपी और यूरिया के रेट में बढोत्तरी हुई है, लेकिन सरकार ने तय किया है कि डीएपी और यूरिया के दाम पहले के तरह ही रहेंगे. खाद की कीमतों में बढोत्तरी नहीं की जाएगी. इसके लिए केन्द्र सरकार ने अपनी पिछली कैबिनेट बैठक में 41 हजार करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की है, ताकि बढ़ती कीमतों का बोझ किसानों पर न पड़े. इसके अलावा खाद की उपलब्धता जहां से हो सकती है, उसके प्रयास किए जा रहे हैं।  किसान की आईडी के आधार पर मिलेगा खाद केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा "किसानों को मिलने वाले खाद का डायवर्सन बहुत होता है. सब्सिडी पर किसानों को मिलने वाला सस्ता खाद अलग-अलग तरीकों से इंडस्ट्री में चला जाता है, इसको रोकने के लिए मध्य प्रदेश सहित देशभर के किसानों को फॉर्मर आईडी बनाई जा रही है. अभी तक 9 करोड़ 29 लाख फार्मर आईडी बन चुकी हैं. इस संख्या को बढ़ाकर 13 करोड़ तक लेकर जाना है।  फॉर्मर आईडी से किसान का पूरा डाटा एक क्लिक पर उपलब्ध होगा. पता चल सकेगा कि किसान के पास कितनी भूमि है और वह कौन-सी फसल उगाता है. भूमि के हिसाब से उसे कितनी खाद की जरूरत होगी. उस हिसाब से ही खाद उपलब्ध कराई जाएगी. जरूरत पड़ने पर कुछ अतिरिक्त उर्वरक भी उपलब्ध कराया जाएगा. ब्लैकमार्केटिंग पर लगाम लगाने के लिए सिस्टम तैयार किया जा रहा है।  हर स्थिति पर नजर रखे है केंद्र सरकार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा "उम्मीद तो यही की जाती है कि युद्ध की परिस्थितियां समाप्त हो जाएं. मैं यह नहीं कहता कि ऐसी परिस्थितियों का हम पर प्रभाव नहीं पड़ता. एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी किसान को परेशानी न हो, इसकी कोशिशें की जा रही हैं. रासायनिक खाद की उपलब्धता को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं और प्रयास किए जा रहे हैं कि यह कहां से कितना मिल सकता है।  साथ ही इसका बेहतर तरीके से वितरण कैसे करना है. किसानों के उत्पादों के निर्यात पर भी निगाह बनाए रखी है. परिस्थितियां चुनौनीपूर्ण हैं और यह सामान्य भी होंगी, लेकिन इससे निपटने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 

सफलता पाने के लिए बगुले से सीखें ये खास गुण, स्थान और अपनी शक्ति का सही अंदाजा लगाकर ही शुरू करें कोई भी नया कार्य

महान विद्वान चाणक्य ने अपनी किताब चाणक्य नीति में जीवन से जुड़ी कई अहम बातों का जिक्र किया है. उनकी नीतियों को आज भी लोग सफलता का रास्ता मानते हैं. कहा जाता है कि जो व्यक्ति उनकी बातों को अपनाता है, वह अपने जीवन में आगे बढ़ सकता है. चाणक्य ने सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों के गुणों के बारे में भी विस्तार से बताया है. उनका मानना था कि प्रकृति में मौजूद हर जीव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने बताया कि कुछ जानवरों के खास गुण ऐसे होते हैं, जिन्हें अगर इंसान अपनी जिंदगी में उतार ले, तो उसे सफलता हासिल करने में मदद मिल सकती है. उन्हीं में से एक बगुला. इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत्पण्डितो नरः । देशकाल बलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ।। आचार्य चाणक्य बगुले के जरिए एक बहुत जरूरी सीख दे रहे हैं. बगुला जब शिकार करता है, तो वह पूरी तरह शांत और एकाग्र होकर खड़ा रहता है. उसका ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य यानी मछली पर होता है. वह जल्दबाजी नहीं करता, बल्कि सही समय का इंतजार करता है. जैसे ही मौका मिलता है, तुरंत उसे पकड़ लेता है. इसी तरह इंसान को भी अपने काम में पूरा फोकस रखना चाहिए. कार्यों पर रखें फोकस आचार्य चाणक्य आगे कहते हैं कि इंसान को भी अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए. अगर हम बार-बार ध्यान भटकाते हैं या बिना सोचे-समझे जल्दबाजी करते हैं, तो सफलता मिलना मुश्किल हो जाता है. धैर्य के साथ सही समय का इंतजार करना और मौके को पहचानना बहुत जरूरी होता है. काम शुरू करने से पहले इन चीजों पर दें ध्यान देश (स्थान)- जहां आप काम कर रहे हैं, वहां उसका कितना फायदा होगा और उसकी जरूरत कितनी है, यह समझना जरूरी है. काल (समय)- कौन-सा समय उस काम के लिए सही है, यह जानना चाहिए. बल (शक्ति)- अपनी क्षमता, पैसे और संसाधनों का सही अंदाजा लगाना भी जरूरी है.

परशुराम जयंती की तारीख को लेकर उलझन हुई दूर, 19 अप्रैल को प्रदोष काल में मनेगा जन्मोत्सव और यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

 हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की तारीख को लेकर लोगों में बना रहता है. इस बार कुछ लोग 19 अप्रैल को मनाने बात कर रहे हैं और कुछ लोग 20 अप्रैल को. क्योंकि उसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर परशुराम जयंती की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी प्रदोष काल में हुआ था. द्रिक पंचांग के मुताबिक, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. कैसे मनाएं परशुराम जयंती? इस पावन अवसर पर आप घर पर ही सरल तरीके से पूजा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान परशुराम की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल या साफ जल से छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें. फिर भगवान को तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और फूल या माला चढ़ाएं. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में अपनी मनोकामनाओं के लिए भगवान से प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और आसपास के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है. परशुराम जयंती से मिलने वाले लाभ परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से उपासना करने पर व्यक्ति के जीवन में साहस और पराक्रम बढ़ता है. साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मन को शांति मिलती है. मान्यता है कि इस पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिन से कठिन कार्यों को पूरा करने की क्षमता भी मिलती है.

जशपुर के नायक से पद्मश्री तक का सफर: अब किताब में मिलेगी जागेश्वर यादव के संघर्षों की झलक

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मजागेश्वर यादव के जीवन पर आधारित पुस्तक “बिरहोर जननायक” का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक के लेखक डॉ. लोकेश पटेल को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पद्मजागेश्वर यादव का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन समाज के प्रति समर्पित रहा है और उनके कार्य विशेष रूप से जनसेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के रूप में विख्यात जागेश्वर यादव ने बिरहोर आदिवासी समाज के उत्थान के लिए जो कार्य किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि उनका सरल व्यक्तित्व और समाज के प्रति अटूट प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि सच्चा नेतृत्व सेवा और संवेदनशीलता से ही जन्म लेता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “बिरहोर जननायक” पुस्तक उनके संघर्ष, समर्पण और सेवा की उस प्रेरक यात्रा को सामने लाती है, जो नई पीढ़ी को समाज के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनने की दिशा देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कृति पाठकों को न केवल प्रेरित करेगी, बल्कि समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक होगी। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने बताया कि इस पुस्तक की रचना आदिम जनजातियों, विशेषतः बिरहोर समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए जागेश्वर यादव द्वारा किए गए समर्पित प्रयासों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इस कृति में उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक योगदान और मानवीय दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

दूरी के हिसाब से तय होगा बसों का नया किराया, 5 साल बाद समीक्षा के आधार पर बिहार सरकार ने शुरू की बदलाव की तैयारी

 पटना   बिहार में बस यात्रा महंगी हो सकती है. लगभग 15 प्रतिशत तक किराया बढ़ सकता है. इससे कहीं ना कहीं लोगों की टेंशन बढ़ने वाली है. परिवहन विभाग की ओर से गुरुवार को ही प्रस्ताव की अधिसूचना जारी की गई है. इसे लेकर एक महीने के अंदर आपत्ति या फिर सुझाव मांगा गया है. कितने प्रतिशत तक बढ़ेगा किराया? जानकारी के मुताबिक, नॉर्मल बसों के किराए में 50 किलोमीटर तक के लिए 15 प्रतिशत, 100 किलोमीटर के लिए 14 प्रतिशत, 150 किलोमीटर तक के लिए 13 प्रतिशत, 200 किलोमीटर तक के लिए 12 प्रतिशत, 250 किलोमीटर तक के लिए 11 प्रतिशत और 300 किलोमीटर की अधिक दूरी तक के लिए 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा गया है. हर 5 साल पर बस किराए की होती है समीक्षा परिवहन विभाग की ओर से हर 5 साल पर बस के किराए की समीक्षा की जाती है. प्रस्ताव को लेकर बिहार राज्य मोटर फेडरेशन की बैठक में फैसला लिया जाएगा. आपत्ति या सुझाव आने के बाद उस बैठक में चर्चा की जाएगी. इस दौरान बस यात्रियों के साथ-साथ बस संचालकों के हित का भी ध्यान रखा जाएगा. जानकारी के मुताबिक, दूरी के हिसाब से बस का किराया तय किया जाएगा. चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसों की मिलेगी सुविधा जानकारी के मुताबिक, परिवहन विभाग ने मई महीने से गांधी मैदान से अटल पथ और जेपी सेतु होते हुए सोनपुर और हाजीपुर रेलवे स्टेशन तक चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसें चलाने का फैसला किया है. सबसे खास बात यह है कि इस सेवा के शुरू होने से अटल पथ के दोनों ओर रहने वाली करीब पांच लाख की आबादी को पहली बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सीधी सुविधा मिलेगी. यह पहल ‘पीएम ई-बस सेवा’ योजना के तहत की जा रही है, जिसका सर्वे इसी महीने पूरा कर लिया जाएगा.