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अमृत योजना से पंजाब के शहरों में आई क्रांति, 5 साल में ₹3,600 करोड़ का हुआ निवेश

जालंधर  पंजाब के शहरी इलाकों में पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार की AMRUT (अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) योजना ने बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने की कोशिश की है। जल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम और हरित क्षेत्रों के विकास पर फोकस करते हुए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।सीवरेज व्यवस्था में सुधार ने भी शहरों को नई पहचान दी है। नई लाइनों और ट्रीटमेंट सिस्टम से जलभराव की समस्या घटी है और साफ-सफाई में सुधार आया है। इससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम हुए हैं। AMRUT योजना का एक और अहम पहलू—हरियाली। पिछले कुछ वर्षों में शहरों के पार्कों को नया जीवन मिला है। छोटे शहरों के पार्क अब लोगों के मिलने-जुलने सुकून के स्थान बन गए हैं। बच्चों के खेलने से लेकर बुजुर्गों की सैर तक, ये स्थान शहरी जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ₹3,626 करोड़ की परियोजनाएं, 80% से अधिक कार्य पूरे राज्य में AMRUT के तहत कुल 214 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, जिनकी कुल लागत ₹3,626 करोड़ रही। इनमें से लगभग ₹2,980 करोड़ के कार्य पूरे किए जा चुके हैं, यानी करीब 82% प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। हर घर पानी की ओर बढ़ता पंजाब AMRUT 2.0 के तहत लक्ष्य है कि हर शहरी घर तक नल से पानी पहुंचे।     कुल बजट का 60–65% हिस्सा जल आपूर्ति पर खर्च     मलोट शहर में ₹16.25 करोड़ की योजना से लगभग 1 लाख लोगों को फायदा     समाना (पटियाला) में ₹61 करोड़ की जल परियोजना इन परियोजनाओं से कई शहरों में पानी की सप्लाई पहले से ज्यादा नियमित हुई है और टैंकर पर निर्भरता कम हुई है। सीवरेज नेटवर्क में विस्तार, स्वास्थ्य में सुधार योजना के तहत सीवरेज पाइपलाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए गए हैं।     कई शहरों में जलभराव की समस्या में कमी     स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार     हालांकि, कुछ प्रोजेक्ट अभी भी अधूरे हैं, जिससे पूरी क्षमता हासिल नहीं हो पाई है। शहरों में बढ़े हरे-भरे क्षेत्र AMRUT के तहत पार्कों और हरित क्षेत्रों का विकास किया गया:     नए पार्क और ओपन जिम     वॉकिंग ट्रैक और सामुदायिक स्थान इससे छोटे शहरों में भी लोगों को बेहतर जीवन गुणवत्ता का अनुभव मिला है।   डेटा बॉक्स      214 परियोजनाएं स्वीकृत     ₹3,626 करोड़ कुल लागत     ₹2,980 करोड़ के कार्य पूरे     60%+ बजट जल आपूर्ति पर     ₹665 करोड़ (2026–27 आवंटन)     मलोट में 1 लाख लोगों को लाभ AMRUT योजना ने पंजाब के शहरों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया है। पानी, सीवरेज और हरित क्षेत्र में सुधार दिख रहा है, लेकिन पूरी सफलता के लिए समय पर क्रियान्वयन और स्थानीय निकायों की क्षमता बढ़ाना जरूरी रहेगा।

Bhopal Metro : 2030 तक 28 स्टेशन और ‘ऑरेंज-ब्लू’ लाइन का निर्माण होगा पूरा

भोपाल   मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत भदभदा से रत्नागिरी मेट्रो लाइन में पहला स्लैब पिपलानी से जेके रोड के बीच डाला जाएगा। इसकी तैयारी हो चुकी है। करीब डेढ़ किमी का स्लैब बिछाया जाएगा। अगले दो से तीन माह में इसे पुल बोगदा तक लाया जाएगा। भदभदा से डिपो चौराहा तक भी पियर्स का काम तेजी से हो रहा है। यहां भी इस साल आखिर तक स्लैब का काम शुरू हो जाएगा। साल 2027 तक ब्लू लाइन का 80 प्रतिशत काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। बताया जा रहा है कि जिस तरह ऑरेंज लाइन में एम्स से सुभाष ब्रिज तक छह स्टेशनों का काम कर ट्रेन शुरू की, उसी तरह ब्लू लाइन में रत्नागिरी तिराहा से ऐशबाग तक ट्रेन शुरू करने का लक्ष्य है। बढ़ी नई समय सीमा के तहत 2030 तक ऑरेंज व ब्लू लाइन पर काम पूरा करना है। हालांकि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 2027-28 तक का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है। मेट्रो लाइन पर आपत्तियां भी डिपो चौराहा से जहांगीराबाद तक की एलीवेटेड लाइन पर सांसद आलोक शर्मा आपत्ति जता चुके हैं। उनके अनुसार ये वीआइपी व संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए यहां मेट्रो लाइन अंडरग्राउंड होनी चाहिए। इसी तरह बड़ा बाग की ओर मेट्रो की लाइन पर विधायक आतिफ अकील ने आपत्ति ली थी। यहां अंडरग्राउंड कितनी हो, एलीवेटेड कितनी हो, इसे नए सिरे से तय करने की मांग की। ऐसे समझें मेट्रो -16 किमी लंबी है ऑरेंज लाइन एम्स से करोंद तक -14 किमी लंबी है ब्लू लाइन भदभदा से रत्नागिरी तिराहा तक -16 स्टेशन है ऑरेंज मेट्रो लाइन में -12 स्टेशन है ब्लू मेट्रो लाइन में -07 किमी में मेट्रो ट्रेन एम्स से सुभाष स्टेशन तक संचालित हो चुकी है -11 हजार करोड़ रुपए लागत तय है अभी दोनों लाइनों की -2030 तक की नई बढ़ाई हुई समय सीमा -3.39 किमी लंबाई में अंडरग्राउंड लाइन भी बन रही है काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। हर काम की समय सीमा तय की है और मॉनीटरिंग का शेड्यूल भी बनाया है। – चैतन्य कृष्णा, एमडी मेट्रो रेल बनेंगे ‘2 अंडरग्राउंड’ मेट्रो स्टेशन मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी।