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कृषि मंत्री कंषाना ने कहा- नरवाई जलाना खेत और सेहत दोनों के लिए नुकसानदायक

नरवाई जलाना खेत और सेहत दोनों के लिए हानिकारक : कृषि मंत्री कंषाना कृषि चौपाल के माध्यम से प्रदेशभर में किसान जागरूकता अभियान भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश में नरवाई जलाने के नुकसान और नहीं जलाने के फायदों को लेकर कृषि विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप ‘कृषि चौपाल’ के माध्यम से हर विकासखंड के गांवों में किसानों को नरवाई प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि रबी कटाई के बाद अप्रैल-मई में यह अभियान तेज कर दिया गया है। वर्तमान में मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, चंबल और विंध्य क्षेत्र के सभी 313 विकासखंडों में ‘कृषि चौपाल’ आयोजित की जा रही हैं। बड़े स्तर पर नरवाई प्रबंधन पर चर्चा हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा परियोजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से लाइव प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। मंत्री कंषाना ने कहा कि नरवाई जलाने के कई दुष्परिणाम हैं। इसे जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है। लगभग 1 टन नरवाई जलाने से 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 25 किलो पोटाश व 400 किलो कार्बनिक पदार्थ जल जाते हैं, जिससे मित्र कीट मर जाते हैं। पर्यावरण व स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। धुएं से जहरीली गैसें बढ़ती हैं, जिससे सांस व आंखों के रोग होते हैं। दृश्यता घटने से सड़क हादसे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश पर नरवाई जलाना दंडनीय अपराध है और जुर्माने का प्रावधान है। मंत्री कंषाना ने कहा कि नरवाई नहीं जलाने के फायदे हैं। इसे खेतों में मिलाने से भूमि की सेहत सुधरती है। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर से नरवाई खेत में मिलाने पर जैविक कार्बन बढ़ता है, पानी रोकने की क्षमता 30 प्रतिशत बढ़ती है। किसानों को अतिरिक्त आय भी होती है। स्ट्रॉ बेलर से गट्ठर बनाकर गोशाला, पेपर मिल, बायो-सीएनजी प्लांट को बेचा जा सकता है। पराली को खेत में मिलाने से अगली फसल में 20 प्रतिशत यूरिया कम लगती है। प्रदेश में नरवाई प्रबंधन यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि मंत्री कंषाना ने अपील की है कि किसान ‘कृषि चौपाल’ में अवश्य भाग लें और ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से मशीनों के लिए आवेदन करें। उन्होंने कहा कि “नरवाई खेत का सोना है, इसे जलाएं नहीं, अपनाएं।” अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर या ‘एमपी किसान ऐप’ पर संपर्क कर सकते हैं।  

म्युनिसिपल कमिश्नर से FICO की खास मुलाकात, इंडस्ट्री मुद्दों पर हुई खुली चर्चा

लुधियाना. प्रेसिडेंट गुरमीत सिंह कुलार के नेतृत्व में इंडस्ट्रियलिस्ट्स के एक डेलीगेशन ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन लुधियाना की कमिश्नर डॉ. नीरू कत्याल गुप्ता से मुलाकात की और इंडस्ट्रियलिस्ट्स को आ रही दिक्कतों पर डिटेल में चर्चा की। कमिश्नर गुप्ता ने कहा कि सभी पॉइंट्स पर विचार किया गया है और इन सभी खतरों को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू किया जाएगा। इस मौके पर FICO के प्रेसिडेंट गुरमीत सिंह कुलार, एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस प्रेसिडेंट अवतार सिंह भोगल, प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रघबीर सिंह सोहल, प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजीव जैन, यूनाइटेड सिलाई मशीन्स एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी गुरमुख सिंह रूपल, FICO के एग्जीक्यूटिव मेंबर रवि महाजन मौजूद थे। फोकल पॉइंट्स में आस-पास के इलाकों और लेबर क्वार्टर्स से कचरा फोकल पॉइंट्स की सड़कों पर डाला जा रहा है, जिससे फोकल पॉइंट्स डंपिंग ग्राउंड जैसा लग रहा है। इससे बहुत गंदगी और अनहेल्दी हालात बन रहे हैं। उद्योगपति होने के नाते हमें अपनी फैक्ट्रियों में बिखरे कचरे के कारण अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को लाने में शर्म महसूस होती है। उन्होंने कहा कि इस मामले की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए और इन इलाकों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए। -फोकल प्वाइंटों के लिए स्टैटिक कॉम्पैक्टर प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लुधियाना के फोकल प्वाइंटों में कचरा रोकने के लिए उचित कचरा डंप और स्टैटिक कॉम्पैक्टर लगाए जाने चाहिए। औद्योगिक इलाकों में स्ट्रीट लाइटें फोकल प्वाइंटों में स्ट्रीट लाइटों के लिए करीब 2200 प्वाइंट हैं और इनमें से कोई भी चालू नहीं है, जिसके कारण इन इलाकों में चोरी और डकैती की घटनाएं बढ़ रही हैं। स्ट्रीट लाइटों पर भी तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। -ग्रीन बेल्टों का सौंदर्यीकरण प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि औद्योगिक ग्रीन बेल्टों में भी फोकल प्वाइंटों में कचरा डाला जा रहा है, कचरे को फैलने से रोकने और ग्रीन बेल्टों का सौंदर्यीकरण करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि फोकल प्वाइंटों में ग्रीन बेल्टों को अपनाने और विकसित करने के लिए इंडस्ट्री को ग्रीन बेल्ट अलॉट की जानी चाहिए, इससे इलाके में बढ़ते प्रदूषण को ठीक करने में भी मदद मिलेगी। गैर-कानूनी ट्रक और ट्रेलर पार्किंग: डेलीगेशन ने ध्यान दिलाया कि फोकल पॉइंट्स में कई सड़कों का इस्तेमाल पूरे साल ट्रकों और ट्रेलरों के लिए गैर-कानूनी पार्किंग के तौर पर किया जाता है, खासकर कंटेनर डिपो जैसे ढंडारी से जीवन नगर, ढंडारी से शेरपुर, ढंडारी से फोकल पॉइंट को जोड़ने वाली सड़कों पर, जिसकी वजह से ट्रैफिक के लिए लगभग एक लेन ही बचती है और आखिर में ट्रैफिक जाम हो जाता है। यह सुझाव दिया गया है कि हाई टेंशन बिजली की तारों के नीचे की जगह का इस्तेमाल ट्रक और ट्रेलर पार्किंग के लिए किया जा सकता है। फोकल पॉइंट्स में कब्ज़ा: फोकल पॉइंट्स में कई जगहों पर झुग्गियों और झुग्गियों के रूप में बहुत सारे कब्ज़े हैं, जो इलाकों में गैर-कानूनी कामों को बढ़ावा दे रहे हैं, इन्हें युद्ध स्तर पर हटाया जाना चाहिए।

कोरिया: राज्य से आए तकनीकी अधिकारी एस.के. साहू ने परखी मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता

कोरिया : ’राज्य से आए तकनीकी अधिकारी एस के साहू ने परखी मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता’ ग्राम पंचायत भ्रमण के बाद तीन जिलों की तकनीकी टीम की बैठक लेकर दिया मार्गदर्शन कोरिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में आयुक्त मनरेगा तारण प्रकाश सिन्हा के निर्देशानुसार राज्य कार्यालय में पदस्थ तकनीकी अधिकारी एस के साहू ने गत दिवस कोरिया जिले में जनपदों का भ्रमण कर योजनाओं के कार्यों का आंकलन किया। दोनों जनपदों की विभिन्न ग्राम पंचायतों में भ्रमण के बाद देर शाम उन्होने तीन जिलों की तकनीकी टीम के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। विदित हो कि राज्य कार्यालय द्वारा अधिकारियों को अलग अलग जिलों के प्रभार आवंटित किए गए हैं और वह प्रतिमाह आकर योजनाओं के क्रियान्वयन की भौतिक जांच कर रहे हैं। इससे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।  ’दस ग्राम पंचायतों के दर्जनों कार्यों का निरीक्षण’ राज्य से आए सहायक अभियंता से एस के साहू ने कोरिया जिले मे जनपद पंचायत सोनहत के ग्राम पंचायत मझारटोला में हितग्राही जयसिंह के आजीविका डबरी का निरीक्षण कर हितग्राही से बात की। इसके बाद उन्होने ग्राम पंचायत मधौरा के नवा तरिया स्थल का निरीक्षण किया। जनपद मुख्यालय सोनहत की ग्राम पंचायत तथा रजौली में बने धान चबूतरे के अलावा साहू ने अमृत सरोवर, बोड़ार मे बने कंटूर टें्रच कार्य, अक्लासरई के बंधवागढ़ा अमृत सरोवर, ग्राम पंचायत किशोरी में बने 30-40 माडल का निरीक्षण किया। जनपद पंचायत सोनहत के बाद उन्होने बैकुण्ठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सलका में जाकर नवीन आंगनबाड़ी भवन कार्य तथा ग्राम पंचायत जामपारा में बने धान संग्रहण चबूतरा कार्य का अवलोकन किया।  ’तकनीकी टीम की समीक्षा बैठक’ सहायक अभियंता साहू को राज्य द्वारा कोरिया जिले के अलावा सूरजपुर तथा एमसीबी जिले में निरीक्षण का दायित्व सौंपा गया है। वह बीते तीन दिनों से निरंतर भ्रमण कर अलग अलग ग्राम पंचायतों में निरीक्षण कर चुके हैं। कल शाम उन्होने मनरेगा के समस्त तकनीकी टीम के साथ एक समीक्षा बैठक लेकर कार्यों की प्रगति का आंकलन किया। इसके बाद उन्होने तीनों जिलों से आए समस्त तकनीकी सहायकों को कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस बैठक में सहायक परियोजना अधिकारी व कार्यक्रम अधिकारी भी शामिल रहे।  ’समीक्षा के विषय’ राज्य के तकनीकी अधिकारी साहू ने बैठक में नवा तरिया निर्माण, आजीविका डबरी निर्माण कार्य, समूहों के गठन और उनके लाभ के लिए संगम परियोजना के कार्य, एमआईएस रिपोर्ट, फेस अथेंटिकेशन प्रणाली, जियो टेग, आवास हितग्राहियों को 90 कार्यदिवस के रोजगार, युक्तधारा पोर्टल पर प्रगति सहित क्षेत्र भ्रमण के दौरान आए हुए विषयों पर विस्तार से जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश: DAV कॉलेज में पोस्टर प्रतियोगिता ने खींचा सबका ध्यान

अमृतसर. DAV कॉलेज अमृतसर के नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) डिपार्टमेंट ने वर्ल्ड हेल्थ डे मनाने के लिए पोस्टर मेकिंग कॉम्पिटिशन सक्सेसफुली ऑर्गनाइज़ किया। कॉम्पिटिशन का मेन मकसद स्टूडेंट्स में हेल्थ अवेयरनेस, बैलेंस्ड लाइफस्टाइल और बीमारियों से बचाव का मैसेज फैलाना था। कॉलेज के अलग-अलग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स ने कॉम्पिटिशन में जोश के साथ हिस्सा लिया। पार्टिसिपेंट्स ने मेंटल हेल्थ, न्यूट्रिशन, हाइजीन, रेगुलर एक्सरसाइज और तंबाकू और शराब से दूर रहने जैसे ज़रूरी टॉपिक पर पोस्टर के ज़रिए अपने क्रिएटिव एक्सप्रेशन पेश किए। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अमरदीप गुप्ता ने इवेंट की तारीफ़ की और कहा कि ऐसी एक्टिविटीज़ स्टूडेंट्स को सोशल और हेल्थ इशूज़ के प्रति सेंसिटिव बनाती हैं। उन्होंने NSS डिपार्टमेंट की कोशिशों की बहुत तारीफ़ की। NSS ऑफिसर डॉ. स्मृति अग्रवाल ने कहा कि कॉम्पिटिशन का मकसद युवाओं को भारत को हेल्दी बनाने में एक्टिव रोल निभाने के लिए मोटिवेट करना था। उन्होंने सभी पार्टिसिपेंट्स और विनर्स, कशिश सैनी, खुशी लखोत्रा ​​और जशनप्रीत सिंह को बधाई दी। इस मौके पर प्रोफेसर मनीष कपूर, प्रोफेसर मोहित मेहरा और प्रोफेसर निधि कौशल खास तौर पर मौजूद थे।

छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर सुधार को लेकर झारखंड हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

रांची  झारखंड हाईकोर्ट ने रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आगामी बरसात से पहले भैरवी नदी के डेंजर जोन में बैरिकेडिंग का कार्य हर हाल में पूरा किया जाए, ताकि हादसों को रोका जा सके. बैरिकेडिंग से हादसों पर लगेगा ब्रेक कोर्ट ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि भैरवी नदी के किनारे चिन्हित खतरनाक क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग लगाई जाए. यह कदम इसलिए जरूरी माना गया है क्योंकि हर साल यहां कई श्रद्धालु और पर्यटक दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं. सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 50 लाख रुपये की लागत से इस परियोजना का डीपीआर तैयार कर लिया गया है और जल्द ही काम शुरू होगा. विस्थापित दुकानदारों के लिए स्थायी व्यवस्था का आदेश खंडपीठ ने मंदिर परिसर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर भी अहम निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि सभी प्रभावित दुकानदारों के लिए स्थायी दुकानें बनाकर दी जाएं और उनसे नियमानुसार किराया वसूला जाए. इससे न केवल दुकानदारों को स्थायित्व मिलेगा, बल्कि सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा. 254 दुकानदारों के पुनर्वास की तैयारी पूरी रामगढ़ के उपायुक्त ने अदालत को जानकारी दी कि कुल 254 दुकानदारों को पुनर्वासित करने की योजना बनाई गई है. इसके लिए मंदिर के पास ही उपयुक्त स्थान चिन्हित कर लिया गया है. प्रशासन का दावा है कि जल्द ही इन दुकानों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे प्रभावित लोगों को राहत मिल सकेगी. श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल बनाने का सुझाव कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) को अपने सीएसआर फंड के तहत मंदिर परिसर के पास एक अस्पताल बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है. इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी. फिलहाल इस प्रस्ताव पर कंपनी को निर्णय लेना है. मंदिर सौंदर्यीकरण और सुविधाओं पर भी जोर हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के व्यापक विकास के लिए कई अहम बिंदुओं पर जोर दिया है. इनमें सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, कपड़े बदलने के कक्ष, स्वच्छ शौचालय, पेयजल की व्यवस्था, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं. साथ ही अतिक्रमण हटाने और भैरवी नदी के चौड़ीकरण की भी योजना पर काम करने को कहा गया है. डीपीआर तैयार, विशेषज्ञ एजेंसी कर रही काम राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मंदिर के पुनर्निर्माण और विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है. यह कार्य चड्ढा एंड एसोसिएट नामक एजेंसी को सौंपा गया है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएंगे. 11 मई को अगली सुनवाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख निर्धारित की है. साथ ही रामगढ़ के उपायुक्त को अगली सुनवाई में फिर से उपस्थित रहने और कार्यों की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. इससे यह स्पष्ट है कि कोर्ट इस मामले की निगरानी गंभीरता से कर रहा है. जनहित याचिका के आदेश के अनुपालन पर जोर यह मामला पहले दायर जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें 11 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के विकास और सुरक्षा को लेकर कई निर्देश दिए थे. अवमानना याचिका के माध्यम से उन आदेशों के अनुपालन की मांग की गई थी. सुरक्षा और पर्यटन विकास का संतुलन जरूरी रजरप्पा मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में सुरक्षा और सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय रहा है. हाईकोर्ट के ताजा निर्देशों से उम्मीद है कि न केवल दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव भी मिलेगा.

मां नर्मदा को प्रदूषणमुक्त रखने के संकल्प के साथ आटे के दीपक का व्यवसाय शुरू किया

सफलता की कहानी मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्‍त रखने के संकल्‍प के साथ आटे के दीपक का शुरू किया व्‍यवसाय महिला स्‍व-सहायता समूह की सराहनीय पहल भोपाल प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण एवं उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से स्‍व-सहायता समूह बनाकर उनको  रोजगार के अवसर प्रदान किये जा रहे है। प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत गठित स्‍व-सहायता समूह स्‍थानीय आवश्‍यकताओं के अनुरूप रोजगार के साधन अपना रहे हैं। ओंकारेश्‍वर के एक स्‍व-सहायता समूह ने इसी दिशा में एक अच्‍छा कार्य आरंभ किया है।  पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल: आटे के दीपक निर्माण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर के समीप स्थित ग्राम मोरटक्का निवासी श्रीमती विजया जोशी ने “मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह” का गठन कर एक अनूठी पहल की। उन्होंने “आटे के दीपक” निर्माण का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि प्लास्टिक के दोने में दीपदान करने से नदी में प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मां नर्मदा में रहने वाले जलीय जीव-जंतुओं को भी नुकसान होता है। इसी सोच के साथ समूह की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए “आटे के दीपक” बनाने का कार्य शुरू किया। सरकारी सहयोग और बाज़ार उपलब्धता से महिलाओं को मिली नई पहचान महिलाओं ने स्‍व-सहायता समूह के माध्यम से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर दीपक निर्माण की मशीन खरीदी। ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आनंद शर्मा ने बताया कि मिशन द्वारा महिलाओं को पैकेजिंग, मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के क्षेत्र में आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जा रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए आटे के दीपक मोरटक्का के खेड़ीघाट स्थित फूलमाला एवं किराना दुकानों पर विक्रय के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इससे ओंकारेश्वर और मोरटक्का क्षेत्र में मां नर्मदा में दीपदान करने वाले श्रद्धालुओं को उचित मूल्य पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प मिल रहा है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती विजया जोशी ने बताया कि इस पहल से दो प्रमुख लाभ हुए हैं। पहला, प्लास्टिक के दोने से होने वाला प्रदूषण कम हुआ है। दूसरा, दीपक में उपयोग किया गया आटा नदी में मछलियों के भोजन के रूप में उपयोग हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि शास्त्रों में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रीय विधि से आटे के दीपक में दीपदान करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता भी है।

स्कूलों की छुट्टी के लिए शिक्षा विभाग का प्रस्ताव, एमपी में गर्मी से बीमार हो रहे बच्चों को मिली राहत की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। जबर्दस्त गर्मी के कारण बच्चों की सेहत पर पड़ते बुरे असर की शिकायतें बढ़ गई हैं। राजधानी भोपाल में ही स्कूलों में अनेक विद्यार्थी बीमार हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों ने स्कूलों की छुट्टी घोषित करने की मांग की है। मामले में कलेक्टर से शिकायत करते हुए उन्हें पत्र सौंपा गया है। इस बीच कई प्राइवेट स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। इधर तेज गर्मी को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों में अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। कलेक्टर की मंजूरी मिलते ही आदेश लागू कर दिया जाएगा। दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही अभिभावकों ने बताया कि दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही है। गर्मी में ये गर्म चैंबर की तरह प्रतीत हो रही है। इनमें दो से तीन घंटे का सफर तय कर बच्चे घर पहुंचते हैं। पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा है। शहर में अधिकांश स्कूल बाहरी क्षेत्रों में हैं। यहां तक आने-जाने में लगने वाला समय ही तीन से चार घंंटे है। 12 बजे छुट्टी के बाद डेढ़ से दो बजे बच्चे घर पहुंचते हैं। यही हाल सुबह है। आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला, अभिभावकों को मैसेज से जानकारी दी: राजधानी के आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला है। अपने स्तर पर निर्णय लेते हुए कक्षा का समय 10.30 बजे किया गया। अभिभावकों को मैसेज से यह जानकारी दी गई। बाकी का समय पहले की ही तरह है। जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव कलेक्टर को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी अनुमति मिलते ही स्कूलों में अवकाश की घोषणा कर दी जाएगी। 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान राजधानी के 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान हैं। अब नजरें कलेक्टर के अगले आदेश पर टिकी हैं।

Ganga Expressway: पश्चिमी यूपी से पूरब तक, 12 जिलों को जोड़ने वाला 594KM लंबा एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश में सड़क नहीं, रफ्तार का एक नया अध्याय खुलने जा रहा है. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का लोकार्पण कर सकते हैं. ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि 'नए यूपी' की रेस का अगला गियर लगेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की बात करती रही है, गंगा एक्सप्रेसवे उसका सबसे बड़ा और सबसे तेज उदाहरण बनकर सामने आने वाला है।  सबसे ख़ास बात ये है कि, तकरीबन 36,402 करोड़ की लागत से बनकर तैयार होने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसव अब तक का यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे है. इसके बाद गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर भी काम चल रहा है जो तकरीबन 700 किमी लंबा होगा. यानी फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे ही सबसे बड़ा है।  करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा. यह सड़क पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ेगी. इससे लंबी दूरी का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा. बताया जा रहा है कि, इस एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा केवल 6-7 घंटों में ही पूरी की जा सकेगी, जिसके लिए अभी तकरीबन 11 घंटे से ज्यादा समय लगता है।  इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा. करीब 519 गांव इस परियोजना से जुड़ेंगे. इससे गांव और शहर के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि विकास के रफ्तार में भी घटेगी।  AI बेस्ड हाईटेक टोल कलेक्शन  इस एक्सप्रेस वे पर कुल 14 टोल प्लाजा बनाए जाएंगे. टोल सिस्टम पूरी तरह से मॉडर्न और डिजिटल होगी, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत ही न पड़े. इसके अलावा टोल कलेक्शन के लिए सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर बेस्ड हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं. जो सिर्फ वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही फास्टैग टोल कलेक्ट कर लेंगे।  इतना ही नहीं इस एक्सप्रेसवे पर  ‘नो-स्टॉप टोल कलेक्शन सिस्टम’ लगाया जा रहा है. यानी वाहन बिना रूके टोल कलेक्ट करवाते हुए आगे बढ़ते रहेंगे. इससे एक्सप्रेस के टोल प्लाजाओं पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. वाहनों की अधिकत स्पीड लिमिट 120 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सड़क के आसपास कटीले तारों से फेंसिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह से मवेशियों को सड़क पर आने से रोका जाए और दुर्घटना की स्थिति न बने।  एक्सप्रेसवे पर मिलेंगी ये सुविधाएं गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल 9 फेसिलिटी सेंटर बनाये गए हैं. हर फैसिलिटी सेंटर पर यात्रियों को कई अलग-अलग तरह की सुविधाएं मिलेंगी. जिसमें पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, ढाबा, मोटेल, डॉरमेट्री, ट्रामा सेंटर, टॉयलेट्स इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा बीच सड़क किसी के वाहन खराब होने की स्थिति को ध्यान में रखकर मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर भी मिलेगा. इस फैसिलिटी सेंटर पर वाहनों को खड़ा करने के लिए बड़ी पार्किंग भी उपलब्ध होगी।  लाइटिंग का भी इंतजाम आमतौर पर रात में एक्सप्रेसवे से यात्रा करने पर सबसे बड़ी समस्या लाइटिंग को लेकर देखने को मिलती है. चूकिं एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ खेत होते हैं और आबादी काफी दूर होती है ऐसे में सड़क पर पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है. इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर रेड कलर के रेडियम लाइट, सड़क के दोनों किनारों पर ब्लिंकर्स, बीच में पड़ने वाले पुलों पर स्ट्रीट लाइट्स और बेरिकेड्स पीली रेडियम लाइट्स का इंतजाम किया गया है. ताकि रात के समय भी लोग सुरक्षित यात्रा कर सकें।  किसानों के लिए बड़ा गेमचेंजर किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. अब फसलें तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगी. इससे फसलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी. खासकर जल्दी खराब होने वाले फसलों और उत्पाद के लिए यह बड़ा फायदा साबित होगा. प्रयागराज समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक शहर इस एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेंगे. इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी. स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।  एक्सप्रेसवे में यूपी का दबदबा देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में पहले ही उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है. गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यह आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. यानी एक्सप्रेसवे की रेस में यूपी बाकी राज्यों से काफी आगे निकलता नजर आ रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा मतलब है कम लॉजिस्टिक्स लागत. इससे उद्योगों को फायदा मिलेगा और नए निवेश के दरवाजे खुलेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो सकता है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।  गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है. यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है. पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब यह प्रोजेक्ट यूपी को “एक्सप्रेसवे स्टेट” के रूप में और मजबूत बनाएगा. आने वाले समय में यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा करने की बड़ी वजह बन सकता है। 

EPFO में बड़ा बदलाव, मई से UPI से PF का पैसा निकालने की सुविधा, लिमिट भी तय

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए बड़ी राहत देने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2026 के आखिर तक UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा शुरू हो सकती है। यह बदलाव EPFO के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म CITES 2.0 के तहत किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया तेज और आसान होगी। बता दें ईपीएफओ में अभी 7.98 करोड़ मेंबर हैं। वहीं, 82 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं। इनमें से 7.74 करोड़ सदस्यों की केवाईसी अपडेट हो चुकी है। ईपीएफओ पोर्टल पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक एक साल में 6.42 करोड़ क्लेम सेटल हो चुके हैं। अब नहीं करना होगा लंबा इंतजार अभी PF निकालने के लिए कर्मचारियों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है और कई बार क्लेम रिजेक्ट भी हो जाते हैं, लेकिन नए सिस्टम के लागू होने के बाद यूजर सीधे अपने UAN से लॉगिन कर सकेंगे, OTP वेरिफाई करेंगे और यूपीआई के जरिए पैसा तुरंत अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर पाएंगे। इससे कागजी प्रक्रिया और देरी दोनों खत्म हो जाएंगी। जल्द ही EPF स्कीम 2026, EPS 2026 और EDLI Scheme 2026 जैसे नए सुधार लागू किए जा सकते हैं, जिससे PF, पेंशन और बीमा से जुड़े नियम और मजबूत होंगे।   कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब PF निकालने का प्रोसेस पहले से कहीं आसान और तेज होने वाला है। मई 2026 के अंत तक UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सर्विस शुरू हो सकती है। यह बदलाव EPFO के नए डिजिटल सिस्टम CITES 2.0 के तहत किया जा रहा है। UPI से तुरंत मिलेगा पैसा अभी तक PF निकालने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन नए सिस्टम के आने के बाद यह प्रोसेस काफी तेज हो जाएगी। EPFO सदस्य अपने UAN से लॉगिन करके, OTP वेरिफिकेशन पूरा कर, सीधे UPI के जरिए पैसा अपने बैंक खाते में तुरंत ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे लंबी प्रोसेस और कागजी झंझट से राहत मिलेगी। क्या है CITES 2.0 सिस्टम? CITES 2.0 EPFO का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका मकसद पूरे प्रोसेस को आसान, तेज और ट्रांसपेरेंट बनाना है। पुराने सिस्टम की जगह अब एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म आएगा, जिससे क्लेम प्रोसेसिंग में देरी कम होगी और यूजर्स को बेहतर सुविधा मिलेगी। कैसे काम करेगा नया सिस्टम? नई सुविधा शुरू होने के बाद यूजर EPFO पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करेंगे। वहां उन्हें अपनी कुल बैलेंस और निकाल सकने वाली अमाउंट देख सकेंगे। इसके बाद वह जितना अमाउंट निकालना चाहते हैं, उसे डालेंगे और अपनी UPI ID डालेंगे। वेरिफिकेशन के बाद पैसा सीधे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा। 75% तक ही निकाल पाएंगे PF EPFO ने नए नियम में एक जरूरी बदलाव भी किया है। अब कर्मचारी अपना पूरा PF अमाउंट एक साथ नहीं निकाल पाएंगे। कुल बैलेंस का अधिकतम 75% ही निकाला जा सकेगा, जबकि कम से कम 25% रकम खाते में रखना जरूरी होगा। इसका मकसद यह तय करना है कि कर्मचारियों के पास रिटायरमेंट के लिए कुछ सेविंग जरूर रहे। नए नियम क्यों हैं जरूरी? सरकार चाहती है कि कर्मचारी अपनी पूरी जमा अमाउंट जल्दी खर्च न कर दें और भविष्य के लिए कुछ पैसा बचाकर रखें। इसलिए यह लिमिट तय की गई है। साथ ही UPI सुविधा से जरूरत के समय तुरंत पैसा मिल सकेगा। नई स्कीम भी होगी लागू इसके साथ ही EPFO नए कानूनों के तहत EPF Scheme 2026, EPS 2026 और EDLI Scheme 2026 भी लाने की तैयारी में है। इनका मकसद PF, पेंशन और बीमा से जुड़े नियमों को और मजबूत बनाना है। कैसे काम करेगा नया सिस्टम? नई सुविधा शुरू होने के बाद प्रक्रिया बेहद आसान होगी। यूजर EPFO पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करेंगे, वहां उन्हें अपना कुल बैलेंस दिखेगा। इसके बाद वे जितनी राशि निकालना चाहते हैं, वह दर्ज करेंगे और अपनी UPI ID डालेंगे। वेरिफिकेशन पूरा होते ही पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा। सरकार का इस बदलाव का मकसद क्या है? सरकार इस कदम के जरिए दो बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है। पहला, इमरजेंसी में कर्मचारियों को तुरंत पैसा मिल सके। दूसरा, पूरी जमा राशि एक साथ निकालने से बचाकर रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत किया जाए।सरकार EPFO सिस्टम को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। EPFO के लेटेस्ट अपडेट्स, जो आपके लिए बेहद जरूरी UAN में नाम, जन्मतिथि, लिंग, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति कैसे सुधारें? अगर आपके UAN खाते में कोई जानकारी गलत है, तो उसे सुधारना बहुत जरूरी है। नीचे तरीका बताया गया है… नाम, लिंग, डेट ऑफ बर्थ सही करना: अपने ईपीएफओ पोर्टल (https://www.epfindia.gov.in) पर जाएं, ‘Manage’ में जाकर ‘Modify Basic Details’ का विकल्प चुनें। फिर नए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। आपके एम्प्लॉयर को इसे मंजूरी देनी होगी। माता-पिता का नाम, रिश्ता और वैवाहिक स्थिति बदलना: यह भी ऊपर दिए गए तरीके से ही करें। शादी या तलाक के बाद यह जानकारी अपडेट करना जरूरी है। भ्रष्टाचार की शिकायत कैसे करें अगर आपको EPFO के किसी कर्मचारी पर भ्रष्टाचार या अनियमितता का शक है, तो आप Vigilance Division में शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए EPFO ने अलग से गाइडलाइन जारी किए हैं। वेबसाइट पर जाकर विजिलेंस सेक्शन में शिकायत दर्ज करें। प्रयास योजना (Prayas Yojna) क्या है? EPFO की प्रयास योजना कर्मचारियों को जागरूक करने और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने के लिए चलाई जाती है। इस योजना के तहत विशेष शिविर और ऑनलाइन सुविधाएं दी जाती हैं।

पेट्रोल-डीजल के बाद खाने और नहाने की चीज़ों के बढ़े दाम, मुसीबत कहां से आ रही है?

नई दिल्ली  ईरान युद्ध की वजह से भारत में तेल का एक और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. पेट्रोल-डीज़ल नहीं. वो तो अलग मसला है. एक और मसला जो खड़ा हो रहा है वो है पाम ऑयल का. दुनिया में सबसे ज़्यादा पाम ऑयल भारत इंपोर्ट करता है. भारत हर साल लगभग 95 लाख टन पाम ऑयल इस्तेमाल करता है. और भारत में पाम ऑयल पैदा होता 4 लाख टन से भी कम. यानी सारा बाहर से ही आता है. क्योंकि पाम के पेड़ जिनसे पाम ऑयल बनता है उनको लगातार बारिश चाहिए होती है, बहुत पानी चाहिए होता है. तो ये दक्षिण पूर्व एशिया में बहुत ज़्यादा होते हैं पाम के पेड़. उनसे तेल निकाल कर पाम ऑयल बनाया जाता है. और दुनिया भर में भेजा जाता है. भारत भी वहीं से लेता है. ज़्यादातर इंडोनेशिया से और मलेशिया से. हम कोई 90 लाख टन पाम ऑयल वहां से मंगाते हैं।   भारत में कुल खाने का तेल जो इस्तेमाल होता है उसका 40% ये पाम ऑयल ही है. क्योंकि एक तो ये बाक़ी खाने के तेलों से सस्ता पड़ता है और लंबे टाइम तक ख़राब नहीं होता. तो कई परिवारों में सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है खाना पकाने के लिए।  पाम ऑयल से देश में क्या-क्या बनता है? अनुमान है कि देश के आधे परिवारों में खाना पाम ऑयल से बनता है. या ऐसे तेलों से बनता है जिनमें पाम ऑयल मिलाया हुआ होता है. औऱ ये जो चिप्स, नमकीन, भुजिया, समोसे, वड़े, फ्रेंच फ्राइज़, डोनट वगैरह जो डीप फ़्राई होते हैं बाज़ार में ये सब कंपनियां पाम ऑयल ही इस्तेमाल करती हैं. क्योंकि ये गर्म होने पर स्थिर भी रहता है और चीज़ें लंबे समय तक खस्ता रहती हैं।      बिस्किट, कुकीज़, केक, पेस्ट्री, बाक़ी बेकरी की चीज़ें, ये सब भी पाम ऑयल से बनती हैं. इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, आइसक्रीम,सब पाम ऑयल से बनाई जा रही हैं आजकल.     सारा रेडी-टू-ईट खाना, सॉस, ग्रेवी, ब्रेड, पीत्ज़ा, इन सब में भी पाम ऑयल ही इस्तेमाल किया जा रहा है. कुल मिलाकर ये समझ लीजिये कि खाद्य उद्योग में 70% से ज्यादा पाम ऑयल जाता है.     होटेल हों, रेस्ट्रॉन्ट हों या छोटी खाने-पीने की दुकानें, ढाबे, स्ट्रीट फ़ूड वाले, सब लोग फ्राई करने के लिए, तड़का लगाने के लिए बड़े पैमाने पर पाम ऑयल का ही इस्तेमाल करते हैं. और त्योहारों में तो मिठाइयों और तले हुए खाने की मांग बढ़ने से पाम ऑयल की खपत बहुत बढ़ जाती है।      खाने की चीज़ों की ही बात नहीं है. साबुन, शैम्पू, बॉडी वॉश, इन सब में जो झाग बनता है वो झाग बनाने का काम इनमें मिला हुआ पाम ऑयल करता है।      क्रीम में पाम ऑयल है, लोशन में पाम ऑयल है, मॉइश्चराइजर में पाम ऑयल है, आपकी लिपस्टिक में पाम ऑयल है. टूथपेस्ट तक में पाम ऑयल होता है. और कपड़े धोने के साबुन पाउडर भी पाम ऑयल से बनते हैं. पेंट में भी पाम ऑयल डलता है।  मतलब पाम ऑयल भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हर जगह घुसा हुआ है. सुबह की पूड़ी से लेकर शाम के बिस्किट, साबुन और शैम्पू तक. खाने की चीजों में इसका 70-90% इस्तेमाल होता है, बाकी साबुन-कॉस्मेटिक्स वगैरह और दूसरी चीज़ों में।  भारत अपनी पाम ऑयल जरूरत का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया से मंगाता है।  पाम ऑयल का इतना इस्तेमाल क्यों? मुख्य कारण ये हैं कि ये सस्ता होता है. पाम ऑयल समझ लो अगर थोक में 125 रुपये लीटर होता है तो बाक़ी तेल 150-175 रुपये लीटर होते हैं. दाम ऊपर नीचे होते रहते हैं लेकिन मुख्य वजह पाम ऑयल की इस्तेमाल की यही है कि ये सस्ता पड़ता है और बड़ी मात्रा में मिल जाता है और भारत में इतना खाने के तेल का उत्पादन होता नहीं तो हमें तो ये बाहर से ही मंगाना पड़ता है।  साबुन, शैम्पू, बिस्किट और चिप्स जैसे प्रोडक्ट्स में पाम ऑयल का भारी इस्तेमाल होता है. सप्लाई घटने से अब इन सबकी कीमतें आसमान छू सकती हैं।  सवाल ये कि ईरान युद्ध का इससे क्या लेना-देना? ये अगर दक्षिण-पूर्व एशिया से आ रहा है, यानी इंडोनेशिया, मलेशिया वगैरह से आ रहा है, तो उधर से आने पर स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज़ तो पड़ता नहीं. तो इसमें कौनसी दिक़्क़त आ गई कि अब इसका भी संकट आने वाला है? तो वो दिक़्क़त ये है कि इंडोनेशिया ने बोल दिया कि वो अब इसको बाहर बेचने पर कंट्रोल लगाएगा. ख़ुद ही इस्तेमाल करेगा।      इंडोनेशिया ये कर रहा है तो बाक़ी देशों से भी ऐसे ही संकेत आ रहे हैं कि वो सब भी अब पाम ऑयल ज़्यादा बाहर भेजने पर कंट्रोल लगाने वाले हैं. लेकिन वो क्यों? क्या करेंगे वो पाम ऑयल का? वो इसका डीज़ल बनाएंगे. जी. पाम ऑयल से बायो-डीज़ल भी बनाया जाता है. और इंडोनेशिया में तो डीज़ल में इसको मिलाया भी जाता है. 40% तक पाम ऑयल वाला डीज़ल मिलाते हैं वो।      मलेशिया में भी बनाते हैं पाम ऑयल से डीज़ल. लेकिन अभी तक क्या था कि इससे डीज़ल बनाने से सस्ता ओरिजिनल डीज़ल पड़ रहा था. तो वो सोचते थे कि डीज़ल तो खाड़ी देशों से मंगा लो, और इसको खाने के तेल के रूप में एक्सपोर्ट कर दो. बारिश बेहिसाब होती ही है वहां पर तो खेती बढ़िया हो रही थी. लेकिन ईरान युद्ध ने सारी तस्वीर ही बदल दी है।      कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. और सबसे बड़ी बात अनिश्चितता बढ़ गई है. कि आगे क्या होगा, कब तक युद्ध चलेगा और युद्ध बंद भी हो गया तब भी हॉर्मूज़ पर टोल की बातें हो रही है, तो पेट्रोल-डीज़ल का मामला तो बहुत ऊपर-नीचे होता रहेगा ये दिख ही रहा है. तो इन देशों ने सोचा कि अपना तेल ख़ुद बनाने का हमारे पास तो रास्ता है ही. हम ये खाड़ी देशों के सहारे क्यों बैठे रहें?     इंडोनेशिया ने ऐलान कर दिया है कि वो जुलाई से अपने देश में डीज़ल में 50% पाम ऑयल मिलाकर बायोडीज़ल बनाने जा रहे हैं. मतलब, पहले वो डीजल में 40% पाम ऑयल मिलाता था, उसको कहते हैं B40, अब इसे बढ़ाकर … Read more