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मनरेगा से जल संरक्षण को मिली रफ्तार, रोजगार और आजीविका सशक्त बनाने का महाअभियान

महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और आजीविका को मिली नई ताकत पानी, रोजगार और समृद्धि का संगम: ‘मोर गांव-मोर पानी’ से बदल रहे गांव *मनरेगा अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार, 57 प्रतिशत महिलाएं *  1610 करोड़ रुपये से एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का निर्माण रायपुर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। 24 अप्रैल 2025 से प्रारंभ ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से महात्मा गांधी नरेगा के तहत प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।         अभियान के अंतर्गत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों से जहां जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह संगम छत्तीसगढ़ को सतत ग्रामीण विकास की दिशा में नई पहचान दे रहा है। जल संरक्षण से आजीविका का सृजन        राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे आजीविका से जोड़ते हुए कई अभिनव पहलें शुरू की हैं। वर्तमान में  समाज के संवेदनशील एवं कमजोर वर्गो की निजी भूमियों पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नवा तरिया-आय के जरिया’ के अंतर्गत विकसित हो रहे 624 सामुदायिक तालाब      इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। क्लस्टर स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इन जल संरचनाओं से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे जल संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम भी बन रहा है। 1.50 लाख से अधिक आवासों में हितग्राहियों ने स्वेच्छा से लगाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम        इसके साथ साथ अन्य जल सरंक्षण, संवर्धन कार्य भी व्यापक सामुदायिक भागीदारी से किए जा रहे है। प्रधान मंत्री आवास ग्रामीण अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवास में हितग्राहियों द्वारा अपने खर्च पर स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है ।  तकनीक से जल संरक्षण को मिली नई दिशा         ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप के माध्यम से स्थल चयन तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। जलदूत प्रणाली से भू-जल स्तर की हो रही नियमित निगरानी       भू-जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर का लेखन कर स्थानीय स्तर पर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी और समुदाय आधारित बन सके। पारदर्शिता का अभिनव मॉडल         मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश ने तकनीक आधारित नवाचारों को अपनाया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत एवं पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से योजना में पारदर्शिता एवं जनविश्वास को और सुदृढ़ किया गया है। जनभागीदारी से “भागीदारी से साझेदारी “(Participation to Partnership) की ओर          अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्राम सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार का अभिनव मॉडल        छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की अवधारणा को धरातल पर साकार करता दिखाई दे रहा है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और अभिसरण का यह मॉडल राज्य को भागीदारी से साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिख रहा है।

सरगुजा के किसान देवानंद बने मिसाल, मनरेगा डबरियों से खेती और रोजगार को मिला नया सहारा

मनरेगा की आजीविका डबरियां बन रहीं ग्रामीण समृद्धि का आधार जल संरक्षण, मछली पालन और सिंचाई से किसानों की बढ़ रही आय, सरगुजा के किसान देवानंद बने सफलता की मिसाल रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बहुआयामी परिवर्तन का माध्यम बन रही है। योजना के तहत निर्मित ‘आजीविका डबरियां’ जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम अडची के किसान देवानंद इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मनरेगा से निर्मित एक डबरी ने बदल दी है। जनपद पंचायत अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत अडची निवासी किसान देवानंद ने वर्ष 2025-26 में अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण का प्रस्ताव रखा था। ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 2 लाख रुपये की लागत से 17×19 मीटर आकार की डबरी का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, वहीं देवानंद को खेती और अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त हुए। आज यह डबरी वर्षा जल से भरकर उनके खेत की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। डबरी के जल से वे अपनी फसलों और सब्जियों की समय पर सिंचाई कर रहे हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है। साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। आगामी छह महीनों में पहली मछली फसल से उन्हें 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति से सिंचाई और मत्स्य पालन दोनों के माध्यम से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। देवानंद की डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है। मात्र 2 लाख रुपये के शासकीय निवेश से निर्मित यह परिसंपत्ति आगामी दो दशकों तक उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी मनरेगा के माध्यम से डबरी निर्माण और मत्स्य पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। सरगुजा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से डबरी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 487 आजीविका डबरियां स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 422 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन डबरियों के माध्यम से वर्षा जल का संचयन हो रहा है, भू-जल स्तर में सुधार आ रहा है, खेतों में नमी बनी रह रही है तथा किसानों को सिंचाई और मत्स्य पालन जैसे अतिरिक्त आजीविका साधन उपलब्ध हो रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां आज ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जल सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

कोरिया: राज्य से आए तकनीकी अधिकारी एस.के. साहू ने परखी मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता

कोरिया : ’राज्य से आए तकनीकी अधिकारी एस के साहू ने परखी मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता’ ग्राम पंचायत भ्रमण के बाद तीन जिलों की तकनीकी टीम की बैठक लेकर दिया मार्गदर्शन कोरिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में आयुक्त मनरेगा तारण प्रकाश सिन्हा के निर्देशानुसार राज्य कार्यालय में पदस्थ तकनीकी अधिकारी एस के साहू ने गत दिवस कोरिया जिले में जनपदों का भ्रमण कर योजनाओं के कार्यों का आंकलन किया। दोनों जनपदों की विभिन्न ग्राम पंचायतों में भ्रमण के बाद देर शाम उन्होने तीन जिलों की तकनीकी टीम के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। विदित हो कि राज्य कार्यालय द्वारा अधिकारियों को अलग अलग जिलों के प्रभार आवंटित किए गए हैं और वह प्रतिमाह आकर योजनाओं के क्रियान्वयन की भौतिक जांच कर रहे हैं। इससे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।  ’दस ग्राम पंचायतों के दर्जनों कार्यों का निरीक्षण’ राज्य से आए सहायक अभियंता से एस के साहू ने कोरिया जिले मे जनपद पंचायत सोनहत के ग्राम पंचायत मझारटोला में हितग्राही जयसिंह के आजीविका डबरी का निरीक्षण कर हितग्राही से बात की। इसके बाद उन्होने ग्राम पंचायत मधौरा के नवा तरिया स्थल का निरीक्षण किया। जनपद मुख्यालय सोनहत की ग्राम पंचायत तथा रजौली में बने धान चबूतरे के अलावा साहू ने अमृत सरोवर, बोड़ार मे बने कंटूर टें्रच कार्य, अक्लासरई के बंधवागढ़ा अमृत सरोवर, ग्राम पंचायत किशोरी में बने 30-40 माडल का निरीक्षण किया। जनपद पंचायत सोनहत के बाद उन्होने बैकुण्ठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सलका में जाकर नवीन आंगनबाड़ी भवन कार्य तथा ग्राम पंचायत जामपारा में बने धान संग्रहण चबूतरा कार्य का अवलोकन किया।  ’तकनीकी टीम की समीक्षा बैठक’ सहायक अभियंता साहू को राज्य द्वारा कोरिया जिले के अलावा सूरजपुर तथा एमसीबी जिले में निरीक्षण का दायित्व सौंपा गया है। वह बीते तीन दिनों से निरंतर भ्रमण कर अलग अलग ग्राम पंचायतों में निरीक्षण कर चुके हैं। कल शाम उन्होने मनरेगा के समस्त तकनीकी टीम के साथ एक समीक्षा बैठक लेकर कार्यों की प्रगति का आंकलन किया। इसके बाद उन्होने तीनों जिलों से आए समस्त तकनीकी सहायकों को कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस बैठक में सहायक परियोजना अधिकारी व कार्यक्रम अधिकारी भी शामिल रहे।  ’समीक्षा के विषय’ राज्य के तकनीकी अधिकारी साहू ने बैठक में नवा तरिया निर्माण, आजीविका डबरी निर्माण कार्य, समूहों के गठन और उनके लाभ के लिए संगम परियोजना के कार्य, एमआईएस रिपोर्ट, फेस अथेंटिकेशन प्रणाली, जियो टेग, आवास हितग्राहियों को 90 कार्यदिवस के रोजगार, युक्तधारा पोर्टल पर प्रगति सहित क्षेत्र भ्रमण के दौरान आए हुए विषयों पर विस्तार से जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

मनरेगा में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

मनरेगा में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग- मनरेगा क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल ई-केवायसी, जियो-टैगिंग और क्यूआर कोड से पारदर्शिता को मिली नई गति   रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने विभिन्न प्रमुख मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 97% सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूर्ण        1 अप्रैल 2026 की स्थिति में राज्य ने 97 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूर्ण कर लिया है, जिससे भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हुई है। जिसके तहत प्रदेश के 58.16 लाख श्रमिकों का ई-केवायसी तथा 11.32 लाख निर्मित परिसंपत्तियों का जियो टैगिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जिससे कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग संभव हुई है। 11,668 ग्राम पंचायतों में जीआईएस आधारित योजना         वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से 11,668 ग्राम पंचायतों में 2,86,975 कार्यों की जीआईएस आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक योजना निर्माण सुनिश्चित हुआ है। इसके साथ ही मनरेगा कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन आधारित एनएमएमएस (NMMS) प्रणाली के उपयोग से उपस्थिति की निगरानी अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। क्यूआर कोड से आमजन को सीधी जानकारी       ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से नागरिक, कार्यों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एक सितंबर से अब तक लगभग 5 लाख से अधिक स्कैन दर्ज किए गए हैं। जिससे कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। हर माह 7 तारीख को समाधान का मंच         प्रदेश में प्रत्येक माह की 7 तारीख को चावल उत्सव के साथ “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का आयोजन किया जा रहा है, जहां हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण एवं योजनाओं की जमीनी समीक्षा की जाती है।

15 मार्च तक मनरेगा और जून तक पीएम आवास पूर्ण करने के निर्देश

जांजगीर-चांपा.  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे ने जिले के सभी जनपद सीईओ, सहायक अभियंता, कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक और रोजगार सहायकों को निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत सूचीबद्ध सभी कार्यों को 15 मार्च तक निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने, श्रमिकों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने और गुणवत्ता से समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण और साप्ताहिक प्रगति समीक्षा के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत आवासों में हितग्राहियों को 90 दिवस की मजदूरी सुनिश्चित करने और निर्माणाधीन आवासों को जून माह तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया है। सीईओ ने स्पष्ट किया कि आवास निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जल संचयन और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत कार्यों की समय पर पोर्टल एंट्री सुनिश्चित की जाए तथा युक्तधारा पोर्टल पर योजनाओं की कार्ययोजना नियमित रूप से अपलोड की जाए। जल संरक्षण के तहत निजी डबरी प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ तैयार कर शीघ्र स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए। सीईओ ने चेतावनी दी कि सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

राहुल गांधी: मनरेगा को मजबूत करने के लिए किसान-मजदूर मिलकर आगे आएं

नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (मनरेगा) की जगह लाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम' को लेकर बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी तथा केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और लोगों का आह्वान किया कि वे सरकार के इस कदम के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों। उन्होंने कांग्रेस के प्रकोष्ठ 'रचनात्मक कांग्रेस' द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘मनरेगा बचाओ मोर्चा' में यह आरोप भी लगाया कि भाजपा ने तीनों ‘काले' कृषि कानून लाकर किसानों के साथ जो किया था, वही अब वह मनरेगा को खत्म कर मजदूरों के साथ करना चाहती है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा एक ऐसा हिंदुस्तान चाहती है जिसमें एक राजा सारे फैसले करे तथा देश के गरीब, अदाणी और अंबानी पर पूरी तरह निर्भर हो जाएं। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘मनरेगा ने गरीबों को अधिकार दिया था। इसके पीछे यह सोच थी कि जिसे भी काम की जरूरत हो, वह सम्मान के साथ काम मांग सके। मनरेगा को पंचायती राज के तहत चलाया जाता था। मनरेगा में लोगों की आवाज थी, उनका अधिकार था- जिसे नरेन्द्र मोदी खत्म करने में लगे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘कुछ साल पहले भाजपा ने 'तीन काले कृषि कानून' लाकर किसानों पर आक्रमण किया था लेकिन किसानों और हम सबने नरेन्द्र मोदी पर दबाव डाल कर उसे रोक दिया। अब उसी तरह का हमला मजदूरों पर करने की कोशिश हो रही है।'' उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें नए अधिनियम का नाम भी नहीं याद है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि मनरेगा की जगह लाए गए नए कानून के तहत केंद्र सरकार निर्णय लेगी कि किस राज्य को कितना पैसा भेजा जाएगा। उनका कहना था, ‘‘भाजपा शासित राज्य में ज्यादा पैसा जाएगा और विपक्ष शासित राज्य में कम पैसा जाएगा। केंद्र सरकार ही तय करेगी कि कब कहां काम होगा, किसको कितनी मजदूरी मिलेगी। जो अधिकार मजदूरों को मिलते थे, अब वह ठेकेदारों को मिलेंगे। भाजपा की विचारधारा है कि देश का धन, संपत्ति चुने हुए हाथों में हो और वही लोग इस देश को चलाएं।'' राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘भाजपा चाहती है कि देश से लोकतंत्र, संविधान और 'एक व्यक्ति-एक वोट' की परिकल्पना खत्म हो जाए। ये लोग आजादी से पहले वाला हिंदुस्तान फिर से लाना चाहते हैं। भाजपा वाले डरपोक लोग हैं, इन्हें रोकने के लिए हमें एक साथ खड़ा होना होगा।'' कांग्रेस नेता ने कहा कि जिस दिन सब एकजुट हो गए, उस दिन मनरेगा फिर से बहाल हो जाएगा।  

भिंड प्रशासन ने मनरेगा मजदूरों पर सख्ती, 70% मजदूरों को छोड़ा जाएगा, 84 हजार मजदूर प्रभावित

भिंड पंचायतों में फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा की मजदूरी हड़पने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिला पंचायत के माध्यम से सभी पंचायतों में सचिव और जीआरएस ने मजदूरों की ई-केवाइसी की जा रही है। जॉब कार्ड धारी मजदूर के आधार से उसका फेस मैच किए जा रहे हैं। दोनों का मिलान न होने पर संबंधित मजदूर को मनरेगा योजना की मजदूरी से बेदखल किया जा रहा है। 10 हजार मजदूर ही सही बता दें जिले में कुल डेढ़ लाख मजदूरों के मनरेगा के तहत पंचायतों में जॉब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 84 हजार एक्टिव मजदूर है। एक माह में 38 हजार मजदूरों की केवाईसी हुई है, जिसमें से महज 10 हजार मजदूर ही सही पाए गए हैं। स्थिति यह है कि जिस पंचायत में 100 मजदूर दर्ज है, वहां केवाईसी के बाद 20 से 25 कामगार ही रह गए है।  30 जनवरी तक मनरेगा में कार्यरत सभी मजदूरों की केवाईसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में जानकारों का मानना है कि पंचायतों में सरपंच और सचिवों द्वारा बनाए फर्जी जॉबकार्ड धारी 70 प्रतिशत तक मजदूर इस योजना से बेदखल किए जा सकते हैं। इस तरह चल रही केवाईसी मनरेगा के तहत पंचायतों में किए जा रहे कार्य में जॉब कार्ड धारी मजदूर कार्य करने पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनकी ई-केवाईसी की जा रही है। सार्वजनिक कार्यक्षेत्र पर पोर्टल से आधार लिंक कर मजदूर का फोटो खींचा जा रहा है, जो आधार में लगे फोटो से मैच किया जा रहा है। इतना ही नहीं कार्यक्षेत्र पर मजदूर की सुबह-शाम नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप से उपस्थिति दर्ज की जा रही है। जिससे मनरेगा में अब फर्जी मजदूर कार्य नहीं कर पाएंगे। पंचायतों में भी असल मजदूर ही रह गए हैं। अब मजदूर के खाते में जाएगी मजदूरी मनरेगा में प्रतिदिन की 261 रुपए मजदूरी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में चेक डेम, पीएम आवास योजना, पंचायत में पौधरोपण, पशु शेड निर्माण, शांतिधाम निर्माण, तालाब निर्माण, खेत तालाब, नाला निर्माण, सड़क निर्माण, स्कूल भवन का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन का निर्माण, गोशाला, चारागाह विकास, बायोगैस निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता, सीसी रोड निर्माण सहित आदि कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों को मनरेगा के मजदूर करते हैं, लेकिन अभी तक पंचायत द्वारा मजदूर के दस्तावेज लगाकर सीधे खाते में पैमेंट डाल दिया जाता था। शासन की सख्ती के बाद अब मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूर के आधार से लिंक खाते में ही मजदूरी भेजी जाएगी। मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी की जा रही है। जो कार्य करने वाले मजदूर हैं, वही रह जाएंगे। केवाइसी पूरी होते ही मजदूरों की छटनी करेंगे। – सुनील दुबे, सीईओ, जिपं भिण्ड ये भी जानिए…. 1.5 लाख मजदूर मनरेगा में दर्ज। 84 हजार पंचायतों में हैं एक्टिव । 38 हजार की ई-केवाईसी पूरी। 28 हजार मजदूर नहीं आए। 30 जनवरी तक पूरी होगी जांच।

मंत्री रामविचार नेताम बोले- मनरेगा पर भ्रम फैलाने आ रहे सचिन पायलट

रायपुर. सरकार द्वारा मजदूरों के हित में चलाई जा रही मनरेगा योजना को बदलकर अब VB-G RAM G (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन के लिए गारंटी) कर दिया गया है. कांग्रेस देशभर में इसका विरोध कर रही है. इसी कड़ी में आज कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं. उनके आगमन को लेकर मंत्री रामविचार नेताम ने पायलट के दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए उन्हें बैठक करने का अधिकार है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है और इसमें सफल नहीं होगी. सचिन पायलट सैर-सपाटा कर के चले जाएंगे, ईंधन की कमी होगी तो भरकर चले जाएंगे.” बता दें, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट आज दोपहर 12.20 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे. इसके बाद वे दोपहर 1 बजे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. दोपहर 2 बजे नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों के साथ चर्चा होगी. इन बैठकों में मनरेगा बचाओ संग्राम आंदोलन की रूपरेखा पर मंथन किया जाएगा. पायलट शाम 5.55 बजे रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे. मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जी राम जी योजना से श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, जिन कार्यों को पहले शामिल नहीं किया जा पाता था, उन्हें अब जोड़ा गया है. सरकार पूरी कार्ययोजना के साथ काम कर रही है. धान खरीदी पर मंत्री रामविचार के बयान धान खरीदी को लेकर मंत्री नेताम ने कहा कि इस बार धान खरीदी पूरी तरह से व्यवस्थित तरीके से चल रही है. जहां-जहां समस्याएं सामने आ रही हैं, वहां अधिकारी समाधान कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की दिक्कतों को 15 जनवरी तक दूर करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार किसानों का धान बिके, इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. वहीं, कांग्रेस द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का ऑब्जर्वर बनाए जाने पर मंत्री रामविचार नेताम ने तंज कसते हुए कहा कि “जहां उनके पांव पड़ते हैं, वहां सफाया हो जाता है. असम में भी यही होगा.”

भोपाल में शिवराज सिंह चौहान का बयान: MNREGA भ्रष्टाचार का पर्याय, G RAM G बिल में ऊर्जा देखी

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निवास पर 'जी रामजी' बिल को लेकर विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने मनरेगा को भ्रष्टाचार का पर्याय कहते हुए पंजाब को करप्शन से ग्रसित बताया। इस दौरान उन्होंने जी रामजी बिल की विषेशताएं बताते हुए कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। बता दें कि, पंजाब विधानसभा ने अभी-अभी विशेष सत्र आयोजित कर केंद्र सरकार की जी राम जी योजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा- '20 साल पहले मनरेगा योजना आई थी। इससे पहले कई रोजगार योजनाएं थीं। फिर या तो उनका स्वरूप बदला या योजना का नाम बदला गया। मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई थी। मजदूरों के बजाय मशीन या कॉन्ट्रेक्टर से काम हो रहा था। ओवर स्टेटमेंट बनाना, एक ही काम बार-बार करना ये सब हो रहा था। इसलिए इसपर सालभर से विचार चल रहा था। ‘मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई थी’ शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 20 साल पहले मनरेगा योजना आई थी। इससे पहले कई रोजगार योजनाएं थीं। फिर या तो उनका स्वरूप बदला या योजना का नाम बदला गया। मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई थी। मजदूरों के बजाय मशीन या कॉन्ट्रेक्टर से काम हो रहा था। ओवर स्टेटमेंट बनाना, एक ही काम बार बार करना ये सब हो रहा था। इसलिए इस पर सालभर से विचार चल रहा था।  प्रशासनिक व्यय बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि मनरेगा न विकास के लिए कारगर थी और न मजदूरों के लिए उपयोगी थी। पैसे का उपयोग गांव के सुनियोजित विकास में नहीं हो रहा था। इसलिए विकसित भारत के लिए जी राम जी योजना लाए हैं। अब मजदूर को रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 120 दिन की गई है। इसके लिए वित्तीय प्रावधान भी किए जा रहे हैं। आगे जरूरत के हिसाब से बजट भी बढ़ेगा। सहायक स्टाफ की तनख्वाह नहीं मिलने की शिकायत मिलती थी। इसलिए प्रशासनिक व्यय 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है।  G RAM G में रहेगी पारदर्शिता उन्होंने G RAM G के फायदे बताते हुए कहा कि इसमें पारदर्शिता रहेगी। खेती में बुवाई और कटाई के समय इस योजना के काम को राज्य स्थगित कर सकेंगे। संसद में विपक्ष ने जबरन का लल्ला किया। फिर भी दृढ़ता के साथ मैंने अपनी बात रखी। पंजाब में एक दिन का विधानसभा का सत्र हो रहा है। जिसमें इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है। इस संवैधानिक संसद व्यवस्था के खिलाफ है। यह अमर्यादित, अंधविरोध, अमर्यादित है।  ‘पंजाब में बहुत करप्शन’  शिवराज सिंह ने पंजाब को करप्शन से ग्रसित बताया। उन्होंने कहा कि आधे से अधिक गांव का ऑडिट ही नहीं हुआ। भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं की। मजदूर कह रहे हैं उन्हें भुगतान ही नहीं मिलता।  अमित शाह और सीएम मोहन की तारीफ की शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के बयान ‘मंत्री को ही योजना के बारे में जानकारी नहीं’ पर कहा कि स्वर्गीय पीएम हों या राहुल बाबा, कल्पना लोक में रहते हैं। देश में तो रहते ही नहीं। अमित शाह और सीएम डॉ. मोहन यादव की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सीएम तेज गति से काम कर रहे हैं। मुझसे अधिक ऊर्जा है। इसी तेज गति से काम करते हैं। मेरी शुभकामना है। संघ को लेकर आए दिग्विजयसिंह के बयान पर उन्होंने कहा कि अपने बुद्धि और विवेक से काम करना चाहिए। 

रायपुर: निजी डबरी से संवरी त्रिपतीनाथ केवट की ज़िंदगी, मनरेगा से मिली स्थायी आजीविका

रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत स्वीकृत हितग्राही मूलक निजी डबरी निर्माण कार्य ने जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पंचायत बनाहिल, जनपद पंचायत अकलतरा निवासी त्रिपतीनाथ केवट के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन ला दिया है। सीमित संसाधनों और जलाभाव से जूझ रहे इस परिवार के लिए आजीविका हमेशा अस्थिर बनी रहती थी, किंतु निजी डबरी के निर्माण ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। वर्ष 2024 में स्वीकृत इस कार्य के माध्यम से जहां एक ओर 842 मानव दिवस का सृजन हुआ, वहीं 58 श्रमिक परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हुआ। इस निर्माण कार्य ने ग्राम में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूर्व में अनुपयोगी एवं सूखी पड़ी भूमि आज जल से परिपूर्ण डबरी के रूप में आजीविका का स्थायी साधन बन चुकी है। डबरी के निर्माण के पश्चात त्रिपतीनाथ केवट द्वारा मछली पालन प्रारंभ किया गया, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। इसके अतिरिक्त डबरी में संचित जल से बाड़ी एवं आसपास की कृषि भूमि की सिंचाई संभव हो सकी है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भू-जल स्तर में भी सुधार दर्ज किया गया है। हितग्राही केवट बताते हैं कि पहले जीवन रोज़ी-रोटी की चिंता में बीतता था, जबकि आज मेहनत का प्रतिफल सुनिश्चित आय के रूप में मिल रहा है और बच्चों के भविष्य को लेकर विश्वास बढ़ा है। डबरी के आसपास पपीता के पौधे लगाए गए हैं, जिनसे नियमित खेती की जा रही है, वहीं मेड़ पर अरहर की फसल लेकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त की जा रही है। ग्राम पंचायत के सरपंच एवं रोजगार सहायक के अनुसार यह कार्य केवल एक संरचना निर्माण नहीं, बल्कि एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत नींव है। यह उदाहरण दर्शाता है कि मनरेगा केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, कृषि विस्तार और स्थायी आजीविका के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक जीवन प्रदान कर रही है। आज निजी डबरी त्रिपतीनाथ केवट के लिए मात्र एक जलस्रोत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्वाभिमान और बेहतर भविष्य का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।