samacharsecretary.com

भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आंगनबाड़ी संचालन समय में बदलाव: बच्चों की उपस्थिति सुबह 7 से 9 बजे तक सीमित बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, निर्देशों के क्रियान्वयन में कोई ढिलाई नहीं होगी: महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े रायपुर  प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए त्वरित एवं संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशानुसार  30 जून 2026 तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित किए जाएंगे। इस अवधि में बच्चों की उपस्थिति केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित की गई है, ताकि उन्हें अत्यधिक तापमान एवं लू के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख, शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा (ECCE) गतिविधियाँ निर्धारित समय-सारिणी एवं कलेण्डर के अनुसार संचालित होंगी तथा पूरक पोषण आहार का वितरण नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे बच्चों के पोषण एवं शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा न आए। निर्देशानुसार आंगनबाड़ी केंद्र प्रातः 7:00 बजे से प्रारंभ होंगे, जिसमें बच्चों की उपस्थिति 7:00 से 9:00 बजे तक रहेगी, जबकि अन्य सेवाओं के लिए केंद्र 11:00 बजे तक संचालित रहेगा। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के पश्चात निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि गर्म हवाओं, अधिक तापमान एवं लू की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित रूप से घर तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में संबंधितों की जवाबदेही तय की जाएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित करें तथा जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकाल समाप्ति उपरांत 01 जुलाई 2026 से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित किए जाएंगे।

रायपुर: ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से उपभोक्ताओं को मिल रही बड़ी राहत, बन रहे ऊर्जा उत्पादक

रायपुर : पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से मिल रही बड़ी राहत, उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक डबल सब्सिडी और सौर ऊर्जा से कम हुआ बिजली बिल, बढ़ रही आत्मनिर्भरता रायपुर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ प्रदेश में आम नागरिकों के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली इस योजना के माध्यम से उपभोक्ता न केवल अपने बिजली खर्च में कमी ला रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन कर ‘ऊर्जा दाता’ के रूप में भी उभर रहे हैं। इसी क्रम में सरगुजा जिले के अंबिकापुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत भगवानपुर निवासी श्री शिशिर सरकार ने इस योजना का लाभ उठाकर उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कर बिजली के बढ़ते बिल से राहत पाई है। डबल सब्सिडी से आसान हुआ निवेश शिशिर सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है, जबकि राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त अनुदान राशि प्रक्रियाधीन है। इस प्रकार डबल सब्सिडी के कारण सोलर सिस्टम स्थापित करना आर्थिक रूप से सहज हो गया है। बिजली बिल में आई भारी कमी उन्होंने बताया कि सोलर सिस्टम लगवाने से पहले उनका मासिक बिजली बिल 8 हजार से 11 हजार रुपये तक आता था, जो परिवार के लिए आर्थिक बोझ था। सौर ऊर्जा अपनाने के बाद अब बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है और उन्हें न्यूनतम खर्च वहन करना पड़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान शिशिर सरकार ने कहा कि सौर ऊर्जा स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य नागरिकों से भी इस योजना का लाभ लेने की अपील की, ताकि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रदान की जा रही आर्थिक सहायता और सरल प्रक्रिया ने सौर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ बना दिया है। प्रदेश में ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन से ऊर्जा बचत, आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

हरियाली से महका मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर, फलदार वृक्ष बने आकर्षण का केंद्र

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिला मुख्यालय स्थित मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर इन दिनों अपनी हरियाली और फलदार वृक्षों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परिसर में लगे लीची, आम और कटहल के पेड़ न केवल पर्यावरण की सुंदरता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि यहां आने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच ये घने वृक्ष परिसर में ठंडी छाया और सुकून का एहसास करा रहे हैं। न्यायालय में आने वाले अधिवक्ता, कर्मचारी और पक्षकार इन पेड़ों की छांव में राहत महसूस कर रहे हैं। परिसर में विशेष रूप से लीची के गुच्छेदार फल, आम के कच्चे-पके फलों की बहार और कटहल के बड़े आकार के फल इसे किसी बाग-बगीचे जैसा मनोहारी स्वरूप दे रहे हैं। यह प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के लिए खास आकर्षण का विषय बन गया है। अधिवक्ता श्रीमती पूनम गुप्ता के अनुसार, न्यायालय परिसर में इस प्रकार की हरियाली न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण का एक सकारात्मक संदेश भी देती है। यदि न्यायालय प्रशासन और अधिवक्ता संघ द्वारा इस हरियाली को और बढ़ावा दिया जाए, तो आने वाले समय में यह परिसर एक आदर्श उदाहरण बन सकता है, जहां न्यायिक कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।

जिले में परिवहन सुविधा केंद्र खोलने का सुनहरा मौका, 15 मई तक आवेदन आमंत्रित

जिले में परिवहन सुविधा केंद्र खोलने का सुनहरा मौका, 15 मई तक आवेदन आमंत्रित "एक ही स्थान पर ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी परिवहन सेवाएं, स्थानीय स्तर पर रोजगार के भी बनेंगे अवसर" मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में परिवहन सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत परिवहन सुविधा केंद्र (Transport Facilitation Center) स्थापित करने के लिए इच्छुक व्यक्तियों एवं संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। जिला परिवहन अधिकारी, कोरिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को परिवहन संबंधी सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और समय की बचत हो सके। एक ही केंद्र पर मिलेंगी सभी सेवाएं परिवहन सुविधा केंद्र के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्य, ऑनलाइन आवेदन, शुल्क भुगतान, दस्तावेजों का स्कैन एवं अपलोड, तथा विभिन्न प्रपत्रों के प्रिंट आउट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इससे नागरिकों को त्वरित, सरल और पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी। पहले भी हुई थी प्रक्रिया, अब फिर अवसर गौरतलब है कि इस योजना के तहत पहले भी आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के लिए प्रक्रिया संचालित की गई थी। अब पुनः चयनित क्षेत्रों के लिए आवेदन आमंत्रित कर अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है। 15 मई तक करें आवेदन इच्छुक आवेदक 15 मई 2026 तक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन ने समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों का चयन कर शीघ्र केंद्र स्थापित किए जा सकें। रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे प्रशासन का मानना है कि इन केंद्रों की स्थापना से जहां आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के साथ-साथ जनसेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

25, 26 और 27 अप्रैल को अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश: सीएम योगी ने किए कड़े इंतजाम

अभूतपूर्व सुरक्षा में होगी होमगार्ड लिखित परीक्षा सीएम योगी ने दिए कड़े सुरक्षा इंतजाम के निर्देश, 25, 26 व 27 अप्रैल को 1053 केंद्रों पर 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल 41,424 पदों के लिए जुटेंगे लाखों अभ्यर्थी, हर 240 परीक्षार्थियों पर एक निरीक्षक/उप निरीक्षक की तैनाती सभी केंद्रों व स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी से निरंतर निगरानी, घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित लखनऊ  योगी सरकार की “पारदर्शी एवं नकलविहीन भर्ती” की प्रतिबद्धता के तहत होमगार्ड एनरॉलमेंट 2025 की लिखित परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने अभूतपूर्व सुरक्षा का खाका तैयार किया है। 41,424 पदों के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा में 25.32 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा 25, 26 व 27 अप्रैल को प्रदेश भर के 1053 केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित की जाएगी। योगी सरकार के निर्देशन में व्यापक एवं बहुस्तरीय व्यवस्था न केवल परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी, बल्कि प्रदेश में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूती से स्थापित करेगी। हर स्तर पर कड़ी निगरानी, पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष डीजी एस.बी. शिरडकर ने बताया कि परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में अपर पुलिस अधीक्षक/अपर पुलिस उपायुक्त स्तर के नोडल ऑफिसर बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर प्रति 240 परीक्षार्थियों पर एक निरीक्षक/उप निरीक्षक की तैनाती की गई है। प्रवेश द्वार पर हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से सभी अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग होगी। महिला अभ्यर्थियों की जांच महिला पुलिसकर्मियों द्वारा बंद परिसर में कराई जाएगी। प्रश्नपत्र सुरक्षा के लिए ‘डबल लॉक’ सिस्टम, सख्त प्रोटोकॉल प्रश्नपत्रों को कोषागार में डबल लॉक व्यवस्था में रखा गया है, जिसकी चाबियां अलग-अलग अधिकारियों के पास रहेंगी। स्ट्रॉन्ग रूम में 24 घंटे बिजली, इंटरनेट और अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुंचाने के लिए रूट मैप बनाकर सेक्टर मजिस्ट्रेट द्वारा पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) किया गया है। परिवहन के दौरान किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। परीक्षा केंद्रों का सैनिटाइजेशन, सीसीटीवी से होगी निगरानी सभी परीक्षा केंद्रों का गहन सैनिटाइजेशन कराया गया है और छत, गैलरी, मैदान और वॉशरूम तक की सघन जांच की गई है, ताकि किसी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या आपत्तिजनक सामग्री छिपी न रह जाए। सभी केंद्रों और स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी की जाएगी। साथ ही पेयजल, क्लॉक रूम और समय की सूचना के लिए बेल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। अभ्यर्थियों के लिए सख्त गाइडलाइन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित अभ्यर्थियों को केवल प्रवेश पत्र, पहचान पत्र और काला/नीला पेन लाने की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार की घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। कक्ष निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीटिंग व्यवस्था और अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। रेलवे स्टेशन से परीक्षा केंद्र तक सुरक्षा, यूपी-112 और एम्बुलेंस तैनात परीक्षा के दौरान रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष पुलिस व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास यूपी-112 की गाड़ियां और एम्बुलेंस तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिससे अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा डीजी शिरडकर ने बताया कि नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पूर्व आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके साथ ही केंद्रों पर आइरिस बायोमेट्रिक डेस्क स्थापित की जाएंगी, जहां अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इस व्यवस्था के माध्यम से इंपर्सनेशन (दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने) जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

वर्सिटी कॉलेज में पगड़ी सजाने का कॉम्पिटिशन

जालंधर. यूनिवर्सिटी कॉलेज, लाडोवाली रोड ने श्री गुरु अंगद देव जी के प्रकाशोत्सव को समर्पित पगड़ी सजाने का कॉम्पिटिशन आयोजित किया। इवेंट का उद्घाटन करते हुए कॉलेज के OSD डॉ. नवजोत ने कहा कि पगड़ी सिर्फ सिर की सजावट नहीं है, बल्कि पंजाबियों की पहचान और सम्मान की निशानी है। पगड़ी हमें अनुशासन, आत्म-सम्मान और जिम्मेदारी की प्रेरणा देती है और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने स्टूडेंट्स को संस्कृति को समझने और अपनाने के लिए प्रेरित किया। कॉम्पिटिशन में स्टूडेंट्स ने अलग-अलग स्टाइल में पगड़ी सजाकर अपनी कला दिखाई। जजों द्वारा घोषित नतीजों के अनुसार, जगनूर सिंह ने पहला, दिलजानजीत सिंह ने दूसरा और हरमनदीप सिंह और ईशरपाल सिंह रंधावा ने तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों में सुखदीप कौर ने पहला स्थान हासिल किया। इवेंट का मंच संचालन सिमरनप्रीत कौर ने सही तरीके से किया। आखिर में विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी प्रतिभागियों की हिम्मत बढ़ाई गई।

महासमुंद में ई-ऑफिस की शुरुआत, फाइल ट्रैकिंग और काम में तेजी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित

महासमुंद  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिजिटल इंडिया पहल और विष्णुदेव साय के सुशासन एवं पारदर्शिता के संकल्प को साकार करते हुए महासमुंद जिला प्रशासन ने ई-ऑफिस प्रणाली को तेजी से अपनाया है। शासन की प्राथमिकता के अनुरूप ई-ऑफिस प्रणाली अब जिले के लगभग सभी विभागों में गति पकड़ चुकी है। जिले के लगभग सभी विभागों में अब परंपरागत कागज़ी फाइलों के स्थान पर ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। 1366 अधिकारी-कर्मचारियों का ई-ऑफिस के लिए ऑनबोर्डिंग किया जा चुका है, जो इस प्रणाली के व्यापक क्रियान्वयन को दर्शाता है। अब तक लगभग साढ़े 5 हजार से अधिक फाइलों का मूवमेंट डिजिटल माध्यम से किया जा चुका है, जिससे कार्यों में गति और दक्षता आई है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में कलेक्ट्रेट का अधिकांश कार्य ई-ऑफिस प्रणाली से संचालित हो रहा है। प्रत्येक सप्ताह समय-सीमा की बैठकों में इसकी समीक्षा कर विभागवार प्रगति की समरी रिपोर्ट ली जाती है। सभी शासकीय पत्राचार, नियमित फाइलें और वित्तीय स्वीकृतियाँ यहां तक कि छोटी नोटशीट्स भी अब ऑनलाइन दर्ज की जा रही हैं, जिससे कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी आसान हो गई है। ई-ऑफिस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण लाभ इसकी ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा है। अब किसी भी फाइल की स्थिति को आसानी से देखा जा सकता है, वह किस अधिकारी के पास लंबित है और कितने समय से। इससे कार्यों में अनावश्यक विलंब कम हुआ है और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है। इस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों को तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे फाइल निर्माण, नोटशीट लेखन और दस्तावेज अपलोडिंग में दक्ष हो चुके हैं। तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए एनआईसी और तकनीकी टीम का सहयोग भी लगातार लिया जा रहा है। शासन की मंशा है कि भविष्य में संपूर्ण पत्राचार केवल ई-ऑफिस के माध्यम से ही किया जाए। शासन की यह कदम समय की बचत और विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा कार्यों में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगा। महासमुंद जिले में यह पहल निश्चित रूप से डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में सार्थक रूप से संचालित हो रहा है।

तेजस MK-1A फाइटर जेट की तात्कालिक जरूरत, HAL के नए सीएमडी के साथ वायुसेना करेगी बैठक

बेंगलुरु भारतीय वायुसेना (IAF) को नए लड़ाकू विमानों की बहुत जरूरत है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाए जा रहे लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए (Tejas Mk1A) की डिलीवरी पहले से दो साल से ज्यादा देरी से चल रही है।  अब मई 2026 में IAF और HAL के बीच एक अहम समीक्षा बैठक होने वाली है. इस बैठक में विमान की तैयारियों और इंडक्शन टाइमलाइन पर चर्चा होगी. यह बैठक नई दिल्ली के एयर हेडक्वार्टर्स में मई मध्य में हो सकती है।  नए HAL चेयरमैन रवि कोटा की भूमिका HAL के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) रवि कोटा 1 मई 2026 को पद संभालेंगे. वे वर्तमान CMD डॉ. डीके सुनील की जगह लेंगे, जो 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं. रवि कोटा को डिफेंस सर्कल में LCA मैन के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने तेजस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  वे वर्तमान में HAL के डायरेक्टर (ऑपरेशंस) हैं. IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रिव्यू मीटिंग को लीड करेंगे. बैठक में HAL की टीम रवि कोटा के नेतृत्व में शामिल होगी. IAF चीफ पहले भी तेजस Mk1A की देरी पर सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं।  IAF की सख्त शर्तें: गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं IAF को नए विमानों की सख्त जरूरत है, लेकिन वह तब तक तेजस Mk1A स्वीकार नहीं करेगी जब तक वह सभी जरूरी ऑपरेशनल रिक्वायरमेंट्स पूरी नहीं कर लेता. HAL ने दावा किया है कि पांच तेजस Mk1A विमान तैयार हैं. वह IAF से उनकी स्वीकृति के लिए चर्चा कर रहा है।  भारतीय वायुसेना पहले इन पहले पांच विमानों की पूरी जांच करेगी. उसके बाद ही बड़े पैमाने पर इंडक्शन का फैसला होगा. IAF कुछ छोटी-मोटी या सेकेंडरी सुविधाओं पर छूट दे सकती है, लेकिन मुख्य लड़ाकू क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं होगा।  तीन अहम क्षमताएं जिन पर IAF नहीं करेगी समझौता IAF ने तीन महत्वपूर्ण क्षमताओं को पूरी तरह जरूरी बताया है…     मिसाइल फायरिंग क्षमता: हवा से हवा और हवा से जमीन मिसाइलों (एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड) की फायरिंग ट्रायल पूरी होनी चाहिए और सर्टिफिकेशन होना चाहिए।      रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इंटीग्रेशन: विमान के रडार को EW सूट के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट और वैलिडेट किया जाना चाहिए. यह दुश्मन के क्षेत्र में विमान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।      वेपन्स डिलीवरी और फायर कंट्रोल सिस्टम: पूरे वेपन्स डिलीवरी सिस्टम और फायर-कंट्रोल आर्किटेक्चर की एंड-टू-एंड वैलिडेशन होनी चाहिए।  ये तीनों चीजें तेजस Mk1A की वारफाइटिंग स्पाइन यानी लड़ाई की रीढ़ हैं. इन्हें किसी भी हाल में कमजोर नहीं किया जा सकता. मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि रडार-EW इंटीग्रेशन और वेपन्स वैलिडेशन का काम अंतिम चरण में है।  दो साल की देरी, कारण क्या? तेजस Mk1A कार्यक्रम में लगभग दो साल की देरी हो चुकी है. HAL का कहना है कि मुख्य वजह GE इंजन की सप्लाई में समस्या है. इसके अलावा इजरायली EL/M-2052 AESA रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के इंटीग्रेशन में भी देरी हुई।    IAF का कहना है कि जब तक विमान पूरी तरह ऑपरेशनल रूप से तैयार नहीं होगा, तब तक स्वीकृति नहीं दी जाएगी. HAL के पास मजबूत ऑर्डर बुक है, जिसमें 83 तेजस Mk1A शामिल हैं. भविष्य में और ऑर्डर आने की उम्मीद है. मई की बैठक में IAF पहले पांच विमानों की पूरी जांच करेगी।  अगर सब कुछ ठीक रहा तो स्वीकृति ट्रायल्स शुरू होंगे, जो कुछ हफ्तों तक चल सकते हैं. उसके बाद ही विमानों को फ्रंटलाइन स्क्वाड्रनों में शामिल किया जाएगा. इस बीच, HAL इंजन सप्लाई बढ़ाने और उत्पादन तेज करने पर काम कर रहा है। 

रायपुर: राज्यपाल ने कोसा वस्त्रों के नवाचार और बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा साड़ी, शाल और गमछा का अवलोकन किया तथा राज्य के हाथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए नवाचार, डिज़ाइन विकास और मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी एवं शाल में डॉबी और जैकार्ड तकनीक का उपयोग कर आधुनिक डिज़ाइन विकसित किए जाएं। साथ ही विभिन्न आयु वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पादों को आकर्षक एवं किफायती बनाया जाए, ताकि इनकी बाजार में मांग बढ़ सके। उन्होंने उत्तर-पूर्व के प्रसिद्ध रेशम क्षेत्र असम के सुवालकुची, विजयनगर और डेमाजी क्षेत्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर वहां के लोकप्रिय डिज़ाइनों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में समाहित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि इससे राज्य के बुनकरों को नई पहचान मिलेगी तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। राज्यपाल ने कोसा साड़ी को अधिक किफायती बनाने के लिए साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को पृथक रूप से तैयार कर नई शैली की साड़ियों के निर्माण का सुझाव भी दिया। उन्होंने विशेष रंगों एवं धागोंकृएक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न का उपयोग कर आकर्षक मोटिफ और डिज़ाइन विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने आगामी एक माह में इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामोद्योग विभाग  को राज्य की किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव एम. एम. जोशी, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बुनकर सेवा केंद्र रायगढ के उपनिदेशक विजय सावनेरकर सहित तकनीकी विशेषज्ञों तथा डिज़ाइनर उपस्थित रहे।

3700 एकड़ में डेवलप होगी नई सिटी, 20 अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने किया प्रोजेक्ट में रुचि का इज़हार

भोपाल  मध्यप्रदेश में एक नया शहर डेवलप किया जा रहा है। राज्य की राजधानी भोपाल में इसे नॉलेज एंड एआइ सिटी के नाम से विकसित किया जा रहा है। इसे भौरी क्षेत्र में बनाया जाएगा। नॉलेज एंड एआइ सिटी लगभग 3700 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। यहां प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के कैंपस रहेंगे और एआइ रिसर्च पार्क के तहत डेटा सेंटर बनाया जाएगा। एआइ लैब व रिसर्च हब भी विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट पर कई ग्लोबल एजेंसियों की नजर है। भौरी में प्रस्तावित नॉलेज एंड एआइ सिटी के विकास के लिए ऐसी 20 से अधिक एजेंसियोें ने रुचि दिखाई है। अधिकारियों का कहना है कि इसके निर्माण के लिए मुख्य एजेंसी को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। नॉलेज एंड एआइ सिटी भौंरी क्षेत्र में इंदौर-भोपाल कॉरिडोर के पास विकसित होगी प्रस्तावित नॉलेज एंड एआइ सिटी भौंरी क्षेत्र में इंदौर-भोपाल कॉरिडोर के पास विकसित होगी। अभी इसकी विस्तृत योजना तय होनी है। इस प्रोजेक्ट में करीब 38 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। रिसर्च, स्टार्टअप, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाना उद्देश्य नॉलेज एंड एआइ सिटी प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसके लिए बीडीए को नोडल बनाया है। इसका उद्देश्य रिसर्च, स्टार्टअप, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाना है। जिले में इसे लेकर काफी चर्चा है। रोडमैप फॉर नॉलेज एंड एआइ सिटी पर एक महत्वपूर्ण सत्र भी आयोजित हो चुका है। प्रोजेक्ट के लिए अनेक ग्लोबल एजेंसियां लालायित, बीडीए और अन्य संबंधित अधिकारी बताते हैं कि 20 से ज्यादा एजेंसियां यह काम करने को तैयार एआई सिटी प्रोजेक्ट से भौरी क्षेत्र का भी खासा विकास होगा। इस प्रोजेक्ट के विकास के लिए अनेक ग्लोबल एजेंसियां लालायित हैं। बीडीए और अन्य संबंधित अधिकारी बताते हैं कि 20 से ज्यादा एजेंसियां यह काम करने को तैयार हैं। अधिकारियों के अनुसार एआई सिटी के निर्माण के लिए जल्द ही मुख्य एजेंसी को फायनल कर लिया जाएगा। ऐसे बढ़ेगी योजना: ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के तहत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के कैंपस होंगे, एआइ रिसर्च पार्क के तहत डेटा सेंटर और एआइ लैब के साथ एक समर्पित रिसर्च हब इस साल के आखिर तक एआई सिटी का काम जमीन पर उतारने की शुरुआत होगी। ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के तहत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के कैंपस यहां होंगे। एआइ रिसर्च पार्क के तहत डेटा सेंटर और एआइ लैब के साथ एक समर्पित रिसर्च हब तय किया जाएगा। स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर में नए उद्यमियों के लिए सुविधाएं दी जाएंगी।