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ईशांक श्रीवास्तव का कमाल, 9 घंटे 50 मिनट में समुद्र तैरकर रचा इतिहास

रांची कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों' ये पंक्तियां जब दुष्यंत कुमार ने लिखीं तो उन्हें नहीं पता था कि रांची का 7 साल का ईशांक श्रीलंका और भारत के बीच पड़ने वाले समुद्री रास्ते को इतनी कम उम्र में तैरकर पार कर देगा और इसके लिए महज 9 घंटे 50 मिनट की तैराकी करनी पडे़गी। ईशांक अब इस स्ट्रेट को तैरकर पार करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक का रिकॉर्ड बना लिए हैं। कौन हैं ईशांक ईशान रांची के धुर्वा के रहने वाले हैं। बीते दिनों ईशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी तक के खतरनाक पाक स्ट्रेट को तैरकर पार किया। ईशांक ने 29 किलोमीटर की समुद्री दूरी को तय करने के लिए महज 9 घंटे 50 मिनट का समय लिया। इसके साथ ही अब ईशांक ऐसा करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 30 अप्रैल को ईशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से अपनी यात्रा शुरू की थी। अगले 9 घंटे और 50 मिनट में ईशांक ने विश्व रिकॉर्ड बना दिया। ईशांक को इस उपलब्धि के लिए यूनिवर्सल रिकॉर्ड्स फोरम की तरफ से यंगेस्ट एंड फास्टेस्ट पाक स्ट्रेट स्विमर का वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट दिया गया है। ईशांक ने यह उपलब्धि कड़ी ट्रेनिंग, अनुशासन और अपने पक्के इरादे से हासिल की है। क्या करते थे ईशांक पाक स्ट्रेट को सबसे तेज पार करने के लिए ईशांक रांची के धुर्वा डैम में रोजाना 4-5 घंटे प्रैक्टिस किया करते थे। अपने कोच अमन कुमार जयसवाल और बजरंग कुमार के मार्गदर्शन में ईशांक की मेहनत रंग लाई और उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। ईशांक की इस उपलब्धि ने ना सिर्फ रांची बल्कि देश का नाम विश्व स्तर पर किया है। तारीफों की बाढ़ ईशांक रांचीक के श्यामली डीएवी स्कूल की तीसरी कक्षा के छात्र हैं। इस उपलब्धि के लिए स्कूल की तरफ से भी ईशांक के लिए तारीफों की बाढ़ आ गई है। उनकी इस उपलब्धि पर प्रिंसिपल ने कहा कि ईशांक की यह उपलब्धि स्कूल के लिए, पूरे रांची शहर के लिए और पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस कम उम्र में ईशांक का कठिन समुद्री परिस्थितियों में विश्व रिकॉर्ड बनाना असाधारण साहस और पक्के इरादे के चलते संभव हो पाया है। प्रिंसिपल ने ईशांक की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में इतना बड़ा रिकॉर्ड बनाना उनकी लगन और मार्गदर्शन का परिणाम है। प्रिंसिपल ने कहा कि ईशांक की यह उपलब्धि बाकी छात्रों को भी प्रेरित करेगी।

गर्मियों में गुलाब जल से स्किन केयर: नेचुरल ग्लो पाने के आसान तरीके

 गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी हमारी स्किन की सारी चमक छीन लेते हैं. अक्सर इसके कारण चेहरा डल, बेजान और ऑयली नजर आने लगता है. ऐसे में इस मौसम में स्किन का खास ख्याल जरूरी हो जाता है. अच्छी बात यह है कि घर में मौजूद कुछ चीजों से आप आसानी से अपनी स्किन का ध्यान रख सकते हैं. गुलाब जल उन्हीं में से एक है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से स्किन केयर के लिए किया जाता रहा है. यह न सिर्फ चेहरे को ठंडक देता है, बल्कि स्किन के PH लेवल को भी बैलेंस बनाए रखता है. इसे रोजाना चेहरे पर लगाने से स्किन से जुड़ीं समस्याएं कम होती हैं और चेहरा नेचुरली ग्लो करता है. आज हम आपको बताएंगे कि गर्मियों में आप गुलाब जल का इस्तेमाल करके कैसे ग्लोइंग और बेदाग स्किन पा सकते हैं. गुलाब जल और बेसन का पैक गर्मियों के मौसम में धूप और गर्मी के कारण स्किन डल और बेजान हो जाती है. ऐसे में इससे बचने के लिए आप गुलाब जल और बेसन का फेस पैक चेहरे पर लगा सकते हैं. इस फेस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच बेसन में 1 चम्मच में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को चेहरा धोने के बाद अच्छे से लगाएं और 10–15 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार यह पैक जरूर लगाएं. गुलाब जल और मुल्तानी मिट्टी गर्मी के दिनों में स्किन ऑयली हो जाती है. ऑयली स्किन के कारण पिंपल्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो आपकी खूबसूरती को कम कर देती हैं. इससे बचने के लिए 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी में 2–3 चम्मच गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें. चेहरा अच्छे से धोने के बाद इस फेस पैक को 10–15 मिनट तक लगाकर रखें. जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें और बाद में मॉइश्चराइजर लगा लें. टोनर के तौर पर गर्मी में चेहरे को फ्रेश रखने के लिए आप गुलाब जल को टोनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. यह चेहरे को ठंडक देता है और ताजगी बनाए रखता है. आप इसे एक स्प्रे बोतल में भरकर फ्रिज में रख सकती हैं और चेहरा धोने के बाद चेहरे पर स्प्रे कर सकती हैं.  

कोचिंग सिटी कोटा में दर्दनाक घटना, नीट परीक्षा से एक दिन पहले छात्र ने किया सुसाइड

 कोटा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 (NEET UG 2026) के आयोजन से ठीक एक दिन पहले राजस्थान के कोटा से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रहे छात्र दीक्षित प्रसाद ने छत से कूदकर आत्महत्या (Dixit Prasad Suicide) कर ली. मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला दीक्षित पिछले दो साल से कोटा में रहकर कड़ी मेहनत कर रहा था. पुलिस ने परिजनों को दी सूचना घटना की सूचना मिलते ही कुन्हाड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया. बताया जा रहा है कि दीक्षित ने हॉस्टल की छत से छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या छात्र कल होने वाली परीक्षा के तनाव में था या आत्महत्या के पीछे कोई और कारण था. पुलिस ने अल्मोड़ा में छात्र के परिजनों को सूचना दे दी है और उनके आने के बाद ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाएगी. रविवार को होने वाली परीक्षा से ठीक पहले उठाए गए इस खौफनाक कदम ने एक बार फिर कोचिंग सिटी में छात्रों के मानसिक दबाव और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गूगल मैप के भरोसे न रहें छात्र बता दें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कल यानी 3 मई को होने वाली परीक्षा के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है. एजेंसी ने परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को सख्त हिदायत दी है कि वे परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए पूरी तरह गूगल मैप पर निर्भर न रहें. एनटीए के मुताबिक, कई परीक्षा केंद्रों की भौगोलिक स्थिति गूगल मैप पर स्पष्ट या सटीक नहीं है. ऐसे में किसी भी तरह की देरी या असुविधा से बचने के लिए छात्र अपने एडमिट कार्ड पर दिए गए पते की पुष्टि पहले ही केंद्र पर जाकर कर लें. रिकॉर्ड 22.8 लाख उम्मीदवार इस साल नीट-यूजी 2026 के लिए रिकॉर्ड तोड़ रजिस्ट्रेशन हुए हैं. कुल 22,79,743 उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है, जिनमें महिला उम्मीदवारों की संख्या करीब 13.3 लाख और पुरुषों की संख्या 9.4 लाख है. इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. जयपुर के जिला कलेक्टर संदेश नायक ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं में कोई कसर न छोड़ी जाए. छात्रों के लिए जरूरी सलाह और नियम एनटीए ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय से काफी पहले केंद्र पर पहुंचें और अपने साथ जरूरी दस्तावेज व एडमिट कार्ड रखें. गूगल मैप वाली चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने भी छात्रों से अपील की है कि वे अंतिम समय की भागदौड़ से बचें.

स्टेशन पर अब नहीं करनी होगी कुली से मोलभाव, ऑनलाइन बुकिंग से तय होगा फिक्स चार्ज

प्रयागराज रेलवे स्टेशनों पर अब आपको कुली के लिए इधर-उधर भटकने या उनके साथ रेट को लेकर मोलभाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज मंडल देश में पहली बार कुलियों की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इस पहल से यात्रियों को ओवर चार्जिंग की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद यात्री रेलवे के अधिकृत एप या वेबसाइट के माध्यम से अपनी ट्रेन के आगमन या प्रस्थान के समय के अनुसार कुली को पहले से ही बुक कर सकेंगे। जैसे ही यात्री स्टेशन पहुंचेगा, बुक किया गया कुली निर्धारित स्थान पर मौजूद रहेगा। इस सेवा के लिए एक पारदर्शी डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे यात्रियों को पहले से पता होगा कि उन्हें कितना शुल्क देना है। मनमाना किराया वसूलने की अक्सर रहती है शिकायत अक्सर देखा जाता है कि त्योहारों या भीड़भाड़ के समय कुछ कुली यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे यात्रियों और कुलियों के बीच विवाद की स्थिति भी पैदा होती है। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम शुरू होने से यह समस्या खत्म हो जाएगी। वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल यात्री सुविधाओं में इजाफा होगा, बल्कि कुलियों के काम में भी अनुशासन और पारदर्शिता आएगी। जंक्शन, छिवकी से होगी शुरुआत यह सुविधा शुरुआत में मंडल के प्रयागराज जंक्शन, छिवकी, कानपुर सेंट्रल, मिर्जापुर, इटावा, अलीगढ़ जैसे प्रमुख स्टेशनों पर लागू की जाएगी। इसके सफल ट्रायल के बाद इसे अन्य मंडल के स्टेशनों में विस्तार देने की योजना है। सीनियर डीसीएम हरिमोहन का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सुविधा देना ही हमारा लक्ष्य है। यात्री कुलियों की ऑन लाइन बुकिंग कर सके इस दिशा में तैयारी की जा रही है।  

मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में तबादला आदेश पर उठे सवाल

मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में तबादला आदेश पर उठे सवाल वर्षों से जमे बाबुओं का नाम सूची से गायब मनेन्द्रगढ़  वनमण्डल कार्यालय में हाल ही में जारी किये गये कर्मचारियों के नवीन कार्य आबंटन (तबादला) आदेश के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। आदेश जारी होते ही जहां कई कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदले गये वहीं वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे कुछ बाबुओं का नाम सूची से गायब होने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।            विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिन बाबुओं का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है वे लंबे समय से विभाग की कथित “मलाईदार” कुर्सियों पर काबिज हैं। बताया जा रहा है कि इनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ है और वे अधिकारियों के भी खास माने जाते हैं जिसके चलते इन पर कार्यवाही नहीं हो पाती। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि इन कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाये तो विभाग में करोड़ों रुपयों के संभावित भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं। यही कारण है कि इनके नाम को सूची से बाहर रखा गया है।           गौरतलब है कि कुछ समय पहले मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में कथित घोटालों को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ने ही जोरदार तरीके से मुद्दा उठाया था। हालांकि अब मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है।             ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वनमण्डल के डीएफओ इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष कार्यवाही करेंगे या फिर पूर्व की तरह प्रभावशाली बाबुओं को संरक्षण मिलता रहेगा। विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अब आम लोगों की निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।

5 वर्षीय शानवी वस्त्रकार ने राष्ट्रीय मंच पर दिखाई प्रतिभा

5 वर्षीय शानवी वस्त्रकार ने राष्ट्रीय मंच पर दिखाई प्रतिभा कत्थक नृत्य में प्रथम स्थान से बढ़ाया मान बिलासपुर/ जबलपुर मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।इस प्रेरणादायक कथन को बिलासपुर के मोपका क्षेत्र की नन्हीं प्रतिभा शानवी वस्त्रकार ने साकार कर दिखाया है। महज 5 वर्ष की आयु में शानवी ने अपनी लगन, मेहनत और कला के प्रति समर्पण के दम पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।         जबलपुर में आयोजित रेवा महोत्सव के अंतर्गत आदिदेव कला संस्थान द्वारा अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्तर संगीत, नृत्य एवं वाद्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित मंच पर देशभर से आये प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया जहां प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊँचा रहा।         इसी प्रतियोगिता के कत्थक नृत्य की शिशु वर्ग श्रेणी में शानवी वस्त्रकार ने एकल प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में भाव-भंगिमा, तालमेल, लय और मंच पर आत्मविश्वास का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। इतनी कम उम्र में उनके नृत्य की शुद्धता और अभिव्यक्ति ने ना केवल दर्शकों का मन मोह लिया बल्कि निर्णायक मंडल को भी प्रभावित कर दिया। परिणामस्वरूप शानवी को प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया।       कार्यक्रम के आयोजक एवं निदेशक अखिलेश पटेल ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य देशभर की उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और भारतीय शास्त्रीय कला को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने शानवी की प्रस्तुति को अत्यंत प्रभावशाली बताते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में इस स्तर की प्रस्तुति दुर्लभ है। प्राचार्या वर्षा चौहान ने भी शानवी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और अनुशासन भविष्य में उन्हें और ऊँचाइयों तक ले जायेगा वहीं निर्णायक मंडल में शामिल पियूष मोटघरे और अंकिता गिनारा झा ने शानवी की नृत्य शैली, भाव-प्रदर्शन और मंच पर पकड़ को उत्कृष्ट बताते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।             इस उपलब्धि पर आदिदेव कला संस्थान परिवार ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए शानवी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है वहीं शानवी की इस सफलता से उनके परिजनों और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी इस नन्हीं प्रतिभा की उपलब्धि को गौरव का विषय बताया है। कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर शानवी वस्त्रकार ने यह साबित कर दिया है कि यदि लगन सच्ची हो और मेहनत निरंतर, तो सफलता जरूर कदम चूमती है। उनकी यह सफलता आने वाले समय में अन्य बच्चों के लिये भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

SCERT की नई पहल: परिषदीय विद्यालयों में शुरू होगा दैनिक गतिविधि आधारित शिक्षण ‘अरुणोदय’

लखनऊ प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 से बच्चों को हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने पूरे वर्ष के लिए दैनिक गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया है, जिसे जल्द ही सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा। यह पहल अपने आप में अनोखी मानी जा रही है। नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार इस कैलेंडर को ‘अरुणोदय’ नाम दिया गया है। इसके तहत हर दिन किसी न किसी विषय जैसे पर्यावरण, स्वास्थ्य, महापुरुषों की जयंती, नदियां, शब्द ज्ञान, कला, कहानी-कविता, देशभक्ति और स्वतंत्रता से जुड़े प्रसंग पर बच्चों को जानकारी दी जाएगी। यह गतिविधियां सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान आयोजित होंगी। संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक बच्चों को विषय की जानकारी देंगे और उससे जुड़ी गतिविधियां भी कराएंगे। खास बात यह है कि प्रत्येक विषय के साथ क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है, जिससे शिक्षक अतिरिक्त जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। कैलेंडर को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के अनुसार अलग-अलग तैयार किया गया है, ताकि बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप सामग्री मिल सके।   विविध विषयों से होगा सर्वांगीण विकास कैलेंडर में बच्चों से छुट्टियों के अनुभव साझा कराने से लेकर मौसमी फल-सब्जियों के लाभ, वर्णमाला, शब्द निर्माण, विलोम शब्द, कहानी-कहानी, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक सेंस, स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा वर्षा जल संरक्षण, पौधरोपण, बाढ़ से बचाव, संचारी रोगों की रोकथाम, विद्यालय शिष्टाचार, वाद्ययंत्र और लोकगीतों की जानकारी भी दी जाएगी। बच्चों को अच्छी आदतें, पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता, जीवन मूल्य, प्रकृति, आपदा प्रबंधन, ऋतुओं का ज्ञान और खेल-खेल में विज्ञान भी सिखाया जाएगा।   अखबारों से भी जोड़ने की पहल एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के अनुसार, सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए बच्चों को अखबारों से भी जोड़ा जाएगा। उन्हें नए और पुराने अखबारों की उपयोगिता, समाचारों की समझ और उनसे जुड़ी चर्चाओं के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। साथ ही गणित के डर को दूर करने के लिए खेल, पहेलियां, गणित किट और भारतीय गणितज्ञों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों का बहुमुखी विकास करना है, ताकि वे विभिन्न विषयों की समग्र जानकारी प्राप्त कर सकें। इसे जल्द ही प्रदेशभर के स्कूलों में लागू किया जाएगा।  

हरियाणा में नहीं थम रही पराली जलाने की घटनाएं, आदेश के बावजूद 7 गुना बढ़े केस

चंडीगढ़. हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं। शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी। फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

शराब ठेकों पर एक्साइज विभाग का बड़ा कदम, लाइसेंस फीस में कमी

जालंधर/चंडीगढ़  पंजाब में शराब के ठेकों की अलॉटमेंट प्रक्रिया के तहत एक्साइज विभाग ने पेंडिंग 25 में से 8 शराब ग्रुप (लिकर ग्रुप) अलॉट कर दिए हैं, जबकि 17 ग्रुप अभी भी बाकी हैं, जिन्हें ई-टेंडर प्रक्रिया के तहत भरा जाएगा। विभाग ने सभी ग्रुप की बिक्री यकीनी बनाने के लिए एक बार फिर लाइसेंस फीस में 3 परसेंट की कटौती की है। इस ताजा कटौती के बाद अब तक कुल 13 फीसदी लाइसेंस फीस घटाई जा चुकी है। ठेकेदारों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में उन्हें इन ग्रुपों से भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके कारण इस बार वे नए ग्रुप लेने में ज्यादा रूची नहीं दिखा रहे।      उनका मानना ​​है कि मौजूदा नीतियों और मुकाबले के कारण कारोबार में लाभ की संभावना कम हो गई है। एक्साइज विभाग फिर से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के शराब ग्रुप के लिए ई-टेंडर जारी करेगा। इनमें चंडीगढ़ के नए इलाके, भारतगढ़, सिटी सेंटर, टांडा, दसूहा, जालंधर के B.M.C. चौक और सोढल चौक, बलाचौर सिटी, कपूरथला-2, फगवाड़ा-2, बेगोवाल, पठानकोट बस स्टैंड, जुगियाल, परमानंद, बठिंडा-2 भारत नगर, फिरोजपुर कैंट और अबोहर सिटी-2 शामिल हैं। ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि राज्य में अंग्रेजी शराब की बिक्री को कंट्रोल किया जाए और सिर्फ देसी शराब के दायरे में ही कारोबार को सीमित किया जाए।  

बरनाला में मिसाल बनी संस्था, 6800 महिलाओं तक पहुंचाए 3 महीने के सेनेटरी पैड

बरनाला. न कोई सरकारी बजट, न कोई बड़ा दफ्तर, न कोई राजनीतिक मंच बस एक संकल्प कि बरनाला की एक भी बेटी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में पीछे न रहे। यही संकल्प है मिट्टी फाउंडेशन का, जिसने आज तक 6800 महिलाओं और बेटियों तक तीन-तीन महीने के सेनेटरी पैड पहुंचाकर वो मुकाम हासिल किया है जो बड़ी-बड़ी सरकारी योजनाएं भी नहीं कर पाईं। आज इसी मिशन की अगली कड़ी के रूप में मिट्टी फाउंडेशन के संस्थापक एवं नगर पार्षद और हेमराज गर्ग के नेतृत्व में सर्वहितकारी उच्च विद्या मंदिर बरनाला में 200 जरूरतमंद छात्राओं को विशेष स्वास्थ्य किट भेंट की गईं। प्रत्येक किट में 28 सेनेटरी पैड, एक तौलिया, टूथब्रश और टूथपेस्ट शामिल थे। वो संख्या जो बताती है असली कहानी 6800 यह केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह 6800 उन महिलाओं और बेटियों की कहानी है जो पहले इस बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित थीं। यह उन परिवारों की मजबूरी है जहां सेनेटरी पैड को विलासिता समझा जाता था, जरूरत नहीं। और यह उस एक इंसान की जिद है जिसने तय किया कि यह हालात बदलेंगे। हेमराज गर्ग ने आज के कार्यक्रम में कहा कि जब उन्होंने यह मुहिम शुरू की थी तो लोगों ने कहा था कि इस विषय पर कौन बात करेगा, कौन साथ देगा। लेकिन आज मिट्टी फाउंडेशन की यह यात्रा 6800 महिलाओं तक पहुंच चुकी है और यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। शर्म की दीवार तोड़ना सबसे बड़ी चुनौती हेमराज गर्ग ने बेबाकी से कहा कि देश में सेनेटरी पैड के मुद्दे पर आज सबसे ज्यादा बात करने की जरूरत है, लेकिन शर्म और संकोच के कारण इस विषय पर खुलकर चर्चा नहीं होती। उन्होंने कहा कि यही शर्म हमारी बेटियों के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी दुश्मन है। जब एक किशोरी को यह नहीं पता कि माहवारी के दौरान स्वच्छता कितनी जरूरी है तो वह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक भी पीड़ित होती है। गर्ग ने कहा कि मिट्टी फाउंडेशन केवल सेनेटरी पैड नहीं बांट रही, बल्कि उस चुप्पी को तोड़ रही है जो दशकों से हमारे समाज में घर किए हुए है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि इस विषय पर घर में, स्कूल में और समाज में खुलकर बात करें क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ी दवा है। किट में था पूरे स्वास्थ्य का संदेश  इस बार वितरित की गई किट महज सेनेटरी पैड तक सीमित नहीं थी। 28 सेनेटरी पैड के साथ-साथ तौलिया, टूथब्रश और टूथपेस्ट देकर मिट्टी फाउंडेशन ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य केवल एक पहलू नहीं, यह एक समग्र जीवनशैली है। संस्था का मानना है कि जब बेटी स्वस्थ होगी तभी वह पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी और समाज को बदलेगी। विद्यालय प्रबंधन ने की सराहना सर्वहितकारी उच्च विद्या मंदिर के अध्यक्ष एडवोकेट जीवन मोदी,मैनेजर एडवोकेट अभय जिंदल और एडवोकेट सोमनाथ गर्ग ने मिट्टी फाउंडेशन की पूरी टीम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जब समाज में ऐसी संस्थाएं काम करती हैं तो सरकारी तंत्र की कमियां भी भर जाती हैं। उन्होंने संस्था के इस निस्वार्थ कार्य को समाज के लिए अनुकरणीय बताया और कहा कि मिट्टी फाउंडेशन का यह मिशन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। कार्यक्रम में मिट्टी फाउंडेशन के अनेक समर्पित सदस्य उपस्थित रहे जिन्होंने छात्राओं को किट वितरित करने में उत्साहपूर्वक सहयोग दिया।