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हरियाणा में पराली जलाने के मामले बढ़े, हजारों जगह खेतों में लगी आग

चंडीगढ़  हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं। शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी। फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

सेंसर आधारित स्कैनिंग और एआई कैमरों से सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का नया दौर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जहां एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है।  निर्माण के साथ-साथ निगरानी अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन प्रायः निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके। सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आकलन इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है। डेटा से तय होगी सड़क की गुणवत्ता सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सुरक्षा पर सीधा असर योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे, ‘स्मार्ट नेटवर्क’ की ओर बढ़ता यूपी यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।

नौकरी बनाम रोजगार: बिहार में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक टकराहट

पटना  बंपर जीत के नायक और नीतीश कुमार की पसंद बने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रोजगार पर अटैक शुरू कर दिया हे । इसका संकेत उन्होंने पहले ही कैबिनेट में नौकरी देने की घोषणा कर अपनी तेवर साफ कर दिया है। सम्राट चौधरी ने नौकरियों की बौछार के साथ-साथ रोजगार की वृद्धि के लिए चुनौती भी स्वीकार करते फर्स्ट कैबिनेट से ही सम्राट चौधरी ने न केवल राज्य सरकार के फोरम पर बल्कि निजी फोरम पर उद्योग का दरवाजा खोलने की उम्मीद दिखा दी है। मगर, सम्राट चौधरी के रोजगार से जुड़े फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तंज कसा है। नौकरियों का खोला पिटारा वो कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही झलकने लगते हैं। नौकरियों को लेकर बहुत कुछ ऐसा ही पहले कैबिनेट की बैठक से ही दिखने लगा। नीतीश नीत सरकार के स्लोगन के साथ मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी ने अपना इरादा साफ कर लिया कि वे हर हाल में एक करोड़ जनता को रोजगार देंगे। घोषणाओं में नौकरी/रोजगार     बिहार पुलिस में दारोगा (एसआई) के 20,937 पदों पर बहाली और प्रोन्नति का रास्ता साफ। इनमें से 50 फीसदी पद पदोन्नति और 50 फीसदी सीधी नियुक्ति से भरे जाएंगे।     भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ (नालंदा) और गया जैसे शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात पुलिस के 485 नए पद सृजित किए गए हैं। साथ ही पहले से सृजित 1,606 पदों को भी शामिल किया गया है।     बिहार के 208 प्रखंडों में खुलने वाले डिग्री कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 44 पदों के हिसाब से कुल 9,152 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।     पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत अभियंत्रण संभाग का गठन और इसके लिए 63 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। रोजगार बढ़ाने पर जोर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नौकरी से ज्यादा महत्व रोजगार को दिया। इस लिहाजन उद्योगपतियों के साथ बैठक करने के बाद सम्राट चौधरी के निशाने पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट है। बिहार सरकार (सम्राट चौधरी) ने राज्य में औद्योगीकरण और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन और नौकरियों के अवसर की घोषणा की है। इनका मानना है कि मक्का, केला, मखाना की प्रोसेसिंग यूनिट बिठा कर रोजगार देने की दिशा में बिहार आगे बढ़ सकता है। राज्य की नई 'न्यू एज इंडस्ट्री' रणनीति के तहत 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की योजना है। तेजस्वी यादव को क्यों लगी मिर्ची? इन सबके बीच आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार का नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम लिए बिना ही कहा कि नाम बदलने के विशेषज्ञ भाजपाइयों, खासकर बिहार के 'नए-नवेले मुख्यमंत्री' को नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' कर देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि बिहार पिछले 21 वर्षों में औद्योगिक उत्पादन में बेहद पीछे लेकिन लेबर सप्लाई में अव्वल रहा है। उन्होंने कहा कि राजग सरकार पलायन रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिससे बिहार के मजदूर मजबूर होकर घर से दूर रहने को विवश हैं। दरअसल, अलग-अलग डिपार्टमेंट में हाल के दिनों में कई वैकेंसी आई है। नौकरी को लेकर सम्राट चौधरी अपनी हर सभा में बयान दे रहे हैं। बिहार में लगभग 2.97 करोड़ परिवार हैं। तेजस्वी ने चुनावी वादे में हर घर में नौकरी की बात कही थी। रोजगार वाला मुद्दा हाईजैक होते देख तेजस्वी ने कहा कि बिहार का नाम बदलकर श्रमिक प्रदेश कर देना चाहिए।

ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास, रूफटॉप सोलर स्थापना में देश में नंबर-1

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर स्थापना के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में अब तक 5,00,115 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।     राज्य में कुल 8,94,217 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से बड़े पैमाने पर स्वीकृति एवं स्थापना सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 1,696.68 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता सृजित हुई है तथा ₹3,038.08 करोड़ की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा एवं ₹1,000 करोड़ से अधिक की सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है।       इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि कुल उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग ₹5 करोड़ मूल्य की मुफ्त बिजली उत्पन्न हो रही है तथा लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में लगभग 5,000 कंपनियों के माध्यम से 65,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार एवं लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। साथ ही, सौर परियोजनाओं को लोगों के छतों पर स्थापित किए जाने से प्रदेश की लगभग 6,500 एकड़ भूमि को संरक्षित करते हुए उसे कृषि एवं अन्य व्यावसायिक उपयोग हेतु सुरक्षित रखा गया है।    अप्रैल 2026 में मात्र 30 दिनों में 51,882 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर प्रदेश ने स्थापना की गति में नया मानक स्थापित किया तथा योजना प्रारंभ से अब तक किसी भी राज्य द्वारा 50,000 संयंत्रों की सर्वाधिक तीव्र स्थापना का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।     माह अप्रैल में प्रदेश की औसत दैनिक स्थापना 1,729 संयंत्र प्रति दिन रही, जो अब तक का सर्वाधिक है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उत्तर प्रदेश ने अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।     उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में औसत दैनिक स्थापना 1,700 संयंत्र प्रति दिन थी, जिसे पीछे छोड़ते हुए अप्रैल में नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ समन्वय और निरंतर निगरानी का प्रत्यक्ष परिणाम है।

राजस्थान पुलिस में हड़कंप, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग आईजी अचानक हुए गायब

जयपुर राजस्थान पुलिस महकमे में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। अमूमन अपराधी गायब होते हैं और पुलिस उन्हें तलाशती है, लेकिन यहां तो 'कानून के रखवाले' और एक उच्च पदस्थ आईपीएस अधिकारी ही रहस्यमयी तरीके से लापता हैं। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नवनियुक्त आईजी कालूराम रावत पिछले साढ़े तीन महीने से ड्यूटी से 'गायब' हैं। दिलचस्प बात यह है कि वे सिर्फ एक दिन की छुट्टी का मैसेज भेजकर गए थे, जो आज तक खत्म नहीं हुई। मैसेज में लिखा 'बुखार है', फिर नहीं लौटे पूरा मामला किसी फिल्मी पटकथा जैसा है। आईपीएस कालूराम रावत जुलाई 2025 में डीआईजी (पुलिस हाउसिंग) के पद पर तैनात थे। 12 जनवरी को उन्होंने अपने बॉस एडीजी (हाउसिंग) भूपेंद्र साहू को एक छोटा सा मोबाइल मैसेज भेजा। मैसेज में लिखा था कि 'बुखार होने के कारण आज कार्यालय नहीं आ सकूंगा।' विभाग को लगा कि साहब अगले दिन लौट आएंगे, लेकिन उस एक दिन के बाद से रावत न तो दफ्तर लौटे और न ही किसी के संपर्क में आए। बिना जॉइनिंग के ही हो गया प्रमोशन और तबादला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हैरानी की बात यह है कि उनकी अनुपस्थिति के दौरान ही विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया हुई और वे डीआईजी से आईजी बन गए। 23 फरवरी को सरकार ने उनका तबादला आईजी (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के महत्वपूर्ण पद पर कर दिया। नियमानुसार उन्हें पुराने पद से रिलीव होकर नए पद का कार्यभार संभालना था, लेकिन साढ़े तीन महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने नए दफ्तर में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। मुख्यालय ने थमाया 'रिकॉल नोटिस', फोन भी बंद जब आईजी रावत लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं लौटे, तो एडीजी (सिविल राइट्स व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) लता मनोज ने डीजीपी ऑफिस को लिखित में इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा ने उन्हें 'रिकॉल नोटिस' जारी किया है। नोटिस में उन्हें तुरंत हाजिर होने की चेतावनी दी गई है, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वर्तमान में उनका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है और पुलिस मुख्यालय का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जूनियर अफसरों में बढ़ी हलचल अधिकारी के इस तरह अचानक ओझल हो जाने से महकमे के जूनियर अफसर और कर्मचारी भी अचंभे में हैं। चर्चा है कि रावत पहले हमेशा अपनी छुट्टियों की विधिवत सूचना देते थे, लेकिन इस बार सिर्फ एक मैसेज ने पूरे मुख्यालय को उलझन में डाल दिया है। अधिकारी और उनके मातहत अब अपने-अपने स्तर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर साहब गए तो गए कहां?  

सीएम योगी ने जिलाधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल जीवन मिशन के तहत खुदाई का काम करते समय सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और कार्य संपन्न होते ही खोदी गई सड़कों व गड्ढों को तत्काल भरा जाए। जिलाधिकारी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी खुद स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ पानी पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। जल जीवन मिशन के जरिए करोड़ों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी, जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकरी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर खुदी हुई सड़कों व गड्ढों की स्थिति का पता करें। साथ ही इन्हें तत्काल भरना भी सुनिश्चित करें। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काम को समय से पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए। सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जल समाधान पोर्टल पर आपूर्ति, लीकेज व खुदाई से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। टोल फ्री नंबर पर कीजिए शिकायत जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति या मरम्मत संबंधित शिकायतों के लिए लोग 18001212164 टोल फ्री नंबर पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में करीब 2.50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। विंध्य और बुंदेलखंड में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। योगी सरकार घर-घर साफ पानी पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर कर रही है।

बिहार में जनगणना प्रक्रिया तेज, 33 सवालों के साथ घर-घर सर्वे; डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

छपरा. अब सारण के गांवों की गलियों से लेकर शहर के मोहल्लों तक हर दरवाजे पर जनगणना की दस्तक सुनाई देगी। एक मई की रात स्वगणना का चरण समाप्त होने के साथ ही शनिवार से जिले में घर-घर सर्वे अभियान शुरू हो गया। अब तक 73 हजार 564 परिवारों ने स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करायी है, जबकि बाकी परिवारों तक पहुंचने के लिए हजारों प्रगणक और पर्यवेक्षक मैदान में उतरेंगे। आने वाले एक माह तक जिले में हर घर की तस्वीर सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती नजर आएगी। 31 मई तक चलेगा सर्वे अभियान जनगणना 2027 के पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य किया जाएगा। इसके तहत प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे। जिन लोगों ने पहले ही स्वगणना पूरी कर ली है, उनसे केवल स्वगणना पहचान संख्या ली जाएगी। वहीं, जिन परिवारों ने अभी तक स्वगणना नहीं की है, उनसे 33 बिंदुओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रशासन ने इस कार्य को 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिले में 7467 प्रगणकों और 1269 पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। साथ ही 1034 कर्मियों को रिजर्व में रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत लगाया जा सके। विकास योजनाओं की मजबूत नींव प्रधान जनगणना अधिकारी सह जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने लोगों से जनगणना कार्य में सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि विकास योजनाओं की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं के निर्माण में जनगणना के आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में नागरिकों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि भविष्य की योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकें। स्वगणना आईडी दिखाना होगा जरूरी जिलाधिकारी ने बताया कि जिन लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से स्वगणना की है, उन्हें प्रगणकों के घर पहुंचने पर अपनी स्वगणना पहचान संख्या उपलब्ध करानी होगी। इसके माध्यम से जानकारी का सत्यापन और अंतिम प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनगणना के दौरान जुटायी जाने वाली सभी जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएंगी। डिजिटल तकनीक से बदलेगी जनगणना की तस्वीर इस बार जनगणना अभियान को पूरी तरह आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। डाटा संग्रहण के लिए मोबाइल एप और डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे आंकड़ों के संकलन में तेजी आएगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। जिलाधिकारी ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अब जिले में शुरू होने वाला यह घर-घर सर्वे केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास योजनाओं का आधार बनने जा रहा है। सारण में जनगणना अभियान एक नजर में – 73 हजार 564 परिवारों ने किया स्वगणना 31 मई तक चलेगा घर-घर सर्वे अभियान 7467 प्रगणक करेंगे डाटा संग्रहण 1269 पर्यवेक्षक करेंगे निगरानी 1034 कर्मी रिजर्व में रखे गए 33 प्रश्न पूछे जाएंगे स्वगणना नहीं करने वाले लोगों से मोबाइल एप व डिजिटल तकनीक से होगा डाटा संग्रहण

हैदराबाद में भिड़ेंगी SRH और KKR, प्लेइंग XI और पिच रिपोर्ट पर नजर

 हैदराबाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का 45वां मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच खेला जाएगा। SRH ने इस संस्करण अब तक 9 मुकाबले खेले हैं। 6 मैच में उसे जीत और 3 मुकाबलों में टीम को हार का सामना करना पड़ा है। KKR ने 8 मैच खेले हैं। 2 मैच में उसे जीत और 5 मुकाबलों में टीम को हार मिली है। ऐसे में आइए मैच से जुड़ी जरूरी बातों पर एक नजर डालते हैं। SRH के खिलाफ KKR का पलड़ा रहा है भारी IPL में SRH और KKR के बीच अब तक 31 मुकाबले हुए हैं। इस दौरान SRH को 11 मैच में जीत मिली है। KKR 20 मुकाबले अपने नाम करने में सफल रही है। IPL 2026 में दोनों टीमों के बीच ये दूसरा मुकाबला होगा। पहले मैच में SRH को 65 रन से जीत मिली थी। IPL 2025 में दोनों टीमों के बीच 2 मैच हुआ। एक मैच KKR ने जीता और एक मैच में SRH को जीत मिली थी। इस प्लेइंग इलेवन के साथ उतर सकती है SRH की टीम SRH ने अपने पिछले 5 मुकाबलों में जीत दर्ज की है। ऐसे में वह अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बड़ा बदलाव करने को नहीं देखेंगे। ट्रेविस हेड भी अपने लय में लौट आए हैं। KKR के खिलाफ वो एक जोरदार पारी खेलना चाहेंगे। गेंदबाजी में ईशान मलिंगा से काफी उम्मीदें होंगी। संभावित एकादश: अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन (विकेटकीपर), हेनरिक क्लासेन, सलिल अरोड़ा, नितीश रेड्डी, पैट कमिंस (कप्तान), हर्ष दुबे, साकिब हुसैन, प्रफुल हिंगे और ईशान मलिंगा। इस संयोजन के साथ नजर आ सकती है KKR KKR ने अपने पिछले 2 मैचों में जीत दर्ज की है। ऐसे में वह भी अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहेगी। हालांकि, खराब फॉर्म में चल रहे टिम साइफर्ट की जगह रचिन रविंद्र को मौका मिल सकता है। रिंकू सिंह एक और शानदार पारी खेलना चाहेंगे। संभावित एकादश: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), रचिन रविंद्र, कैमरून ग्रीन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), रोवमैन पॉवेल, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय, वैभव अरोड़ा और कार्तिक त्यागी। ये हो सकते हैं इम्पैक्ट सब्स प्लेयर KKR: मनीष पांडे, फिन एलन, तेजस्वी सिंह, नवदीप सैनी और वरुण चक्रवर्ती। SRH: स्मरण रविचंद्रन, अनिकेत वर्मा, लियाम लिविंगस्टोन, शिवांग कुमार और हर्षल पटेल कैसी होगी पिच की स्थिति? राजीव गांधी क्रिकेट स्‍टेडियम की पिच पर गेंदबाजों को ज्यादा मदद नहीं मिलती है। हालांकि, तेज गेंदबाजों की तुलना में स्पिन गेंदबाज थोड़े असरदार साबित होते हैं। तेज गेंदबाजों को विकेट चटकाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। एक बार बल्लेबाजों की यहां नजरें जम जाती है तो आसानी से बड़े-बड़े शॉट लगते हैं। हाउस्टेट के मुताबिक, यहां पहली पारी का औसत स्कोर 162 रन है। यहां सर्वोच्च स्कोर SRH (286/6 बनाम RR, 2025) ने ही बनाया है। कैसा रहेगा मौसम? एक्यूवेदर के मुताबिक, 3 मई को हैदराबाद में अधिकतम तापमान 39 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री रहने की उम्मीद है। मैच के दौरान बारिश की कोई संभावना नहीं है। मुकाबला दोपहर 3:30 बजे से शुरू होगा, ऐस में खिलाड़ियों को गर्मी से परेशानी होगी। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेगी नजरें SRH के लिए क्लासेन ने पिछले 10 मैचों में 74.14 की औसत से 519 रन बनाए हैं। अभिषेक के बल्ले से पिछले 10 मैचों में 457 रन निकले हैं। KKR के लिए रिंकू ने पिछले 10 मैच में 142.07 की स्ट्राइक रेट से 233 रन बनाए हैं। गेंदबाजों में ईशान ने पिछले 10 मैच में 9.09 की इकॉनमी से 18 विकेट लिए हैं। KKR से नरेन ने पिछले 9 मैचों में 7.14 की इकॉनमी से 9 विकेट चटकाए हैं। कब और कहां देखें मुकाबला? SRH और KKR के बीच यह मुकाबला हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में दोपहर 3:30 बजे से खेला जाएगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।  

फाजिल्का में ड्रग कंट्रोल एक्शन: 75 mg से अधिक प्रेगाबालिन दवाओं की बिक्री पर रोक

फाजिल्का. जिल मजिस्ट्रेट अमरप्रीत कौर संधू ने इंडियन सिविल प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (पुराना सीआरपीसी 1973, सेक्शन 144) के सेक्शन 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, जिले में 75 एमजी से ज़्यादा के प्रेगाबालिन कैप्सूल/टैबलेट की बिक्री और स्टॉकिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। उन्होंने निर्देश दिया कि दवा देते समय, केमिस्ट प्रिस्क्रिप्शन स्लिप पर अपनी मुहर लगाएगा और केमिस्ट की फर्म का नाम, दवा देने की तारीख और टैबलेट की संख्या दर्ज की जाएगी। यह रोक 30 जून, 2026 तक लागू रहेगी। यह आदेश सिविल सर्जन फाजिल्का के पत्र पर की गई कार्रवाई के संबंध में जारी किया गया है। सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कैप्सूल आम लोग मेडिकल ड्रग के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने इस सेक्शन के तहत कैप्सूल की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगाने की मांग की है। जारी किए गए ऑर्डर के मुताबिक, कोई भी होलसेलर, रिटेलर, केमिस्ट/मेडिकल स्टोर का मालिक, हॉस्पिटल के अंदर फार्मेसी या कोई भी दूसरा व्यक्ति बिना ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्शन के Pregabalin 75 mg नहीं बेचेगा। प्रेगाबिलन (75 mg तक) की खरीद और बिक्री का सही रिकॉर्ड रखने के अलावा, उन्हें ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्शन पर इन डिटेल्स, केमिस्ट/रिटेलर का ट्रेड नेम, डिस्ट्रीब्यूशन की तारीख, डिस्ट्रीब्यूट की गई टैबलेट की संख्या की स्टैम्प भी सुनिश्चित करनी होगी। 

सलमान खान का ‘टन टना टन’ गाना असल में गोविंदा को ध्यान में रखकर बनाया गया था

बॉलीवुड के दबंग सलमान खान पर कई शानदार गाने फिल्माए गए हैं। एक्टर पर फिल्माए ये गाने उनके फैंस और ऑडियंस के बीच अलग जगह जगह बनाए हुए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं सलमान खान का एक ऐसा भी गाना है जिसे गोविंदा को ध्यान में रखकर गाया गया था। सिंगर के मुताबिक इस गाने में अगर सलमान की जगह गोविंदा होते तो ये ज्यादा बड़ा हिट होता है। आज भी ये गाना बहुत मशहूर है जिसे उनके फैंस हर पार्टी, फंक्शन में सुनते हैं। सलमान का हिट गाना साल 1997 में सलमान खान की फिल्म जुड़वा आई थी। इस फिल्म में सलमान ने डबल रोल किया था। रंभा और करिश्मा कपूर लीड किरदार में नजर आई थीं। इस फिल्म को डेविड धवन ने गाया था। इस फिल्म के लगभग सभी गाने पार्टी एंथम थे जो ऑडियंस के बीच खूब मशहूर हुए। गाने का म्यूजिक दिया था अनु मलिक थे। सलमान पर फिल्माया एक गाना था ‘टन टना टन टन टन टारा’। इस गाने को सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य ने गाया था। लेकिन असल में ये गाना उन्होंने गोविंदा को ध्यान में रखते हुए गाया था। गोविंदा के लिए गाया था ये गाना अभिजीत भट्टाचार्य ने अपने कई इंटरव्यूज में ये बताया था कि उन्हें एक दिन अनु मलिक का फोन आया और उन्होंने डेविड धवन की फिल्म के लिए गाना रिकॉर्ड करने के लिए कहा। सिंगर अभिजीत को लगा कि उन्हें लगा डेविड धवन की फिल्म है तो पक्का गोविंदा ही हीरो होंगे। तो उन्होंने गोविंदा को ध्यान में रखते हुए उनके हिसाब के एक्सप्रेशन गाने में दिए थे। अभिजीत ने ये भी कहा कि सलमान की जगह ये गाना अगर गोविंदा पर फिल्माया गया होता तो ज्यादा शानदार होता। उन्होंने कहा था कि गाने में सलमान के डांस पर फोकस किया गया जबकि ये फेशियल एक्सप्रेशन का गाना था। अभिजीत ने गोविंदा के लिए गाए ये गाने अभिजीत ने गोविंदा के लिए कई हिट गाने गाए। इसमें फिल्म शोला और शबनम का गाना ‘डोले डोले दिल मेरा बोले, फिल्म राजा बाबू से ‘अ आ इ ई, उ ऊ ओ’, फिल्म किस्मत का गाना 'कोई भी ना जाने', मैं जोरू का गुलाम बन के रहूंगा का टाइटल सॉन्ग, फिल्म हथकड़ी से गाना 'आनन फानन’ गाए हैं। गोविंदा के लिए गाए गए अभिजीत के ये गाने जबरदस्त हिट हुए थे। सुपरहिट थी फिल्म जुड़वा बता दें, फिल्म जुड़वा में सलमान खान ने डबल रोल प्ले किया था। इस फिल्म में सलमान के किरदारों प्रेम और राजा को ऑडियंस ने खूब पसंद किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही। आज भी टीवी पर इस फिल्म को पसंद किया जाता है।