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3 मई राशिफल: शुभ दिन रहेगा कुछ राशियों के लिए, कुछ को मिल सकती हैं नई कठिनाइयाँ

मेष आज काम बनते नजर आएंगे। घर का माहौल ठीक रहेगा, पार्टनर का साथ मिलेगा। जो बात पहले अटकी थी, उसमें अब आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। ऑफिस में काम का दबाव रहेगा, लेकिन आप संभाल लोगे। पैसा आता-जाता रहेगा, कोई बड़ी दिक्कत नहीं। बस जल्दबाजी में जवाब देने से बचें। वृषभ दिन थोड़ा सुस्त रह सकता है। मन काम में देर से लगेगा। शरीर भी थोड़ा भारी लग सकता है। जरूरी काम पहले निपटाओ, बाकी को खींचने की जरूरत नहीं। खर्च पर ध्यान रखना पड़ेगा, खासकर छोटी-छोटी चीजों में पैसा निकल सकता है। घर में सब सामान्य रहेगा। मिथुन आज बातों से काम बनेगा। कोई कॉल या मैसेज काम का निकल सकता है। दिन में दो-तीन छोटी बातें आपको फायदा दे सकती हैं। लेकिन हर बात पर तुरंत हां मत बोलो। पहले समझो, फिर जवाब दो। काम में फोकस रखोगे तो चीजें आसान रहेंगी। कर्क घर की तरफ ध्यान ज्यादा रहेगा। कोई घरेलू काम या जिम्मेदारी सामने आ सकती है। मन थोड़ा जल्दी प्रभावित हो सकता है, इसलिए बातों को ज्यादा तूल मत दो। काम चलता रहेगा, बस खुद को ज्यादा थकाओ मत। खर्च को लेकर थोड़ा संभलकर चलना ठीक रहेगा। सिंह आज आप एक्टिव रहेंगे। काम तेजी से करेंगे और लोगों से बात भी साफ रखेंगे। अगर कुछ नया शुरू करना है तो कोशिश कर सकते हो। दिन आपके कंट्रोल में रहेगा। बस दिखावे या जल्दबाजी में खर्च करने से बचना होगा। कन्या काम में पकड़ मजबूत रहेगी। ऑफिस में आपकी बात सुनी जाएगी। कोई नया मौका भी मिल सकता है। सीनियर का सपोर्ट मिलेगा। घर में भी माहौल ठीक रहेगा। दिन सीधा-सादा रहेगा, बिना ज्यादा उलझन के। तुला पैसे से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। रुका हुआ काम या पेमेंट आ सकता है। घर का माहौल ठीक रहेगा। सेहत पर थोड़ा ध्यान देना पड़ेगा, खासकर खाने-पीने में। काम ठीक से होता रहेगा, ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। वृश्चिक आज भाग्य साथ देगा। अटका काम आगे बढ़ सकता है। कहीं आने-जाने का प्लान बन सकता है। मन शांत रहेगा और काम भी ठीक से होगा। ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं, जैसा चल रहा है वैसे चलने दें। धनु आज लोग आपकी बात मानेंगे। काम में आपकी पकड़ दिखेगी। कोई पुरानी उलझन सुलझ सकती है। रिश्तों में भी चीजें धीरे-धीरे ठीक होंगी। दिन संतुलित रहेगा। बस पैसों को लेकर प्लान बनाकर चलें। मकर आज मन थोड़ा उलझा रह सकता है। बेवजह सोच बढ़ सकती है। काम तो होगा, लेकिन ध्यान बार-बार भटकेगा। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए कंट्रोल जरूरी है। किसी बात को लेकर ज्यादा न सोचें। कुंभ दिन अच्छा रहेगा। पैसा आने के मौके बन सकते हैं। कोई दोस्त या जान-पहचान वाला काम आ सकता है। छोटी यात्रा भी हो सकती है। काम और रिश्ते दोनों ठीक चलेंगे। बस जो मिल रहा है, उसे संभालकर रखें। मीन आज थोड़ा संभलकर रहना बेहतर है। जल्दबाजी में कोई फैसला मत लो। सेहत का ध्यान रखो और गाड़ी आराम से चलाओ। काम चलता रहेगा, लेकिन उम्मीद ज्यादा न रखें। आज शांति बनाए रखें।

अल्प समय में ही 61 जटिल जीवन-रक्षक प्रक्रियाएँ सफल

भोपाल  विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से विभाग ने एक माह से भी कम समय में 61 से अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने स्वयं विभाग का निरीक्षण कर इन उपलब्धियों और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने उन्नत ईआरसीपी, एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, कोलैन्जियोस्कोपी और लिथोट्रिप्सी जैसी मशीनों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और विभाग की दक्षता की सराहना की। मध्यप्रदेश के सबसे उन्नत 'एडवांस्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्किल लैब' के माध्यम से अस्पताल ने न केवल अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि की है, बल्कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए जीवनदायिनी भी सिद्ध हुआ है। सफल रही 61 प्रक्रियाओं में से एक बड़ी संख्या उन जीवन-रक्षक हस्तक्षेपों की है, जिनमें सक्रिय रक्तस्राव से जूझ रहे मरीजों का समयबद्ध एंडोस्कोपिक हीमोस्टेसिस किया गया। यदि ये आधुनिक सुविधाएं यहाँ उपलब्ध न होतीं, तो मरीजों को अन्य बड़े शहरों के केंद्रों में रेफर करना अनिवार्य हो जाता, जिससे उपचार में देरी के साथ-साथ मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और जान-माल का खतरा भी बना रहता। वर्तमान में यह विभाग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एम.एच. उस्मानी के कुशल नेतृत्व और सह-प्राध्यापक डॉ. प्रदीप निगम के सहयोग से अपनी अधिकतम परिचालन क्षमता पर कार्य कर रहा है। अस्पताल अब उन्नत इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी सेवाएं प्रदान करने में आत्मनिर्भर हो चुका है। इन सुविधाओं के विस्तार से अब स्थानीय स्तर पर ही जटिल बीमारियों का सटीक उपचार संभव हो पा रहा है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को अनावश्यक रेफरल और आर्थिक चुनौतियों से बड़ी राहत मिली है।  

भाजपा की रणनीति तेज, राज्यसभा की तीसरी सीट पर आदिवासी प्रत्याशी पर मंथन

भोपाल मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें जून महीने में रिक्त हो रही हैं। संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। लेकिन कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और कलह का फायदा उठाकर भाजपा तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले इस सीट के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चा में था, लेकिन दतिया में संभावित विधानसभा उपचुनाव के चलते अब किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। इसकी दो वजहें हैं-पहली, कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन हासिल करना और दूसरी, विपक्ष के खेमे में सेंध लगाना। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक उनके संपर्क में हैं। प्रदेश की जिन सीटों पर जून 2026 में चुनाव संभावित हैं, उनमें से एक पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, दूसरी पर भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और तीसरी सीट से केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री जार्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य हैं। तीनों का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है। लेकिन कांग्रेस के लिए आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की तीसरी सीट पर सियासी गणित इस बार उलझता दिख रहा है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद 230 सदस्यीय सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 64 हो गई। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला लंबित होने के बावजूद झुकाव भाजपा की ओर माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर लगभग 62 रह गए हैं।     दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। अभी यह संख्या तो कांग्रेस के पास है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रास वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है।     भाजपा आदिवासी प्रत्याशी उतारती है तो कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन भी उसे मिल सकता है। यही, दांव चलकर भाजपा कांग्रेस से तीसरी सीट छीनने का प्रयास कर सकती है।     पार्टी के पास 164 विधायक हैं, यानी दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास करीब 48 वोट बचेंगे।     यदि कांग्रेस में क्रास वोटिंग होती है और कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है, तो भाजपा तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज कर सकती है।     कांग्रेस में फिलहाल मीनाक्षी नटराजन व कमल नाथ सहित कुछ अन्य नाम चर्चा में हैं। लेकिन, भाजपा की रणनीति देखकर कांग्रेस भी आदिवासी या दलित चेहरे को मौका दे सकती है।  

6.91 लाख किसानों से 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 6 लाख 91 हजार किसानों से 34 लाख 73 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। अभी तक 14 लाख 64 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 5462.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

JMM-कांग्रेस में दूरी बढ़ने के संकेत, राज्यसभा चुनाव पर असर की आशंका

रांची  झारखंड में अगले कुछ दिनों बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर एक सीट के लिए समीकरण साधने में जुटा है। जेएमएम का रुख कांग्रेस के साथ अब सहज नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख सहयोगी दल कांग्रेस के साथ पूरी तरह से सहज नहीं दिख रहा है। जिस तरह से असम विधानसभा में जेएमएम के कांग्रेस के कोई तालमेल किए बगैर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया, उससे कांग्रेस नेतृत्व को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। असम में हेमंत सोरेन ने एक सप्ताह से अधिक समय तक कैंप कर दर्जनों चुनावी सभाएं की, जिससे वहां गैर भाजपा मतों में बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। असम में हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने चाय बगान में रहने वाले झारखंडी मूल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इससे भी कांग्रेस और जेएमएम के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत मिले। लेकिन झारखंड में अब भी हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस और आरजेडी शामिल है। असम और पश्चिम बंगाल की सियासत का झारखंड में भी दिखेगा असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है। असम में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से भी झारखंड में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गई। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एक सीट जीतने के लिए 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आम तौर पर 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। यह संख्या झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 के आधार पर तय होती है। जहां प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा चुनाव होता है। सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसने की आशंका 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक का समर्थन प्राप्त है, जो दोनों सीटों पर कब्जा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन जिस तरह से जेएमएम की ओर से कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। इसके कारण सीट बंटवारे को लेकर पेच फंस सकता है। जेएमएम अपने बल पर एक सीट निकालने में सक्षम है, जबकि दूसरी सीट पर जीत के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी है। इन परिस्थितियों में जेएमएम की ओर से दूसरी सीट के लिए किसी ऐसे राजनेता या उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया जा सकता है या समर्थन दिया जा सकता है, जो अपने बलबूते कई विधायकों का समर्थन हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में झारखंड के एक पूर्व सांसद के नाम की भी चर्चा हो रही है।  

उप मुख्यमंत्री ने किया प्राकृतिक खेती का निरीक्षण

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने रविवार हरिहर धाम स्थित खेत का भ्रमण कर वहां अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खेत में इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक खाद और जीवामृत के निर्माण व प्रयोग की प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया।  शुक्ल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण के लिए अपनाए गए विशेष उपायों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित सहायकों और कृषि विशेषज्ञों को रसायन मुक्त खेती की तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों का न्यूनतम उपयोग न केवल लागत कम करता है, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी दीर्घकालिक लाभ पहुँचाता है।  शुक्ल ने प्राकृतिक कृषि को आधुनिक समय की मांग बताते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध आहार और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, जारी किया विशाल कॉन्ट्रैक्ट

इस्लामाबाद अमेरिकी वायु सेना ने F-16 फाइटर जेट्स के रडार सिस्टम को लॉन्ग-टर्म तकनीकी और इंजीनियरिंग सपोर्ट देने के लिए 488 मिलियन डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान किया है। खास बात यह है कि अमेरिका की इस बड़ी रक्षा डील के दायरे में पाकिस्तान भी शामिल है। यह अहम कॉन्ट्रैक्ट प्रमुख रक्षा कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन को सौंपा गया है। इस कदम को अमेरिका के सहयोगी देशों की वायु सेना में F-16 की ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने के लिए अमेरिका की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है। डील और अपग्रेड से जुड़ी मुख्य बातें:     रडार सिस्टम की बढ़ेगी क्षमता: आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मुख्य रूप से F-16 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले 'APG-66' और 'APG-68' रडार सिस्टम को इंजीनियरिंग सपोर्ट दिया जाएगा।     2036 तक चलेगा काम: फाइटर जेट्स के अपग्रेड और सपोर्ट का यह काम अमेरिका के मैरीलैंड स्थित लिंथिअम हाइट्स में किया जाएगा और इसके 31 मार्च, 2036 तक जारी रहने का कार्यक्रम है।फंडिंग और मंजूरी: यूटाह स्थित अमेरिकी वायु सेना के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट सेंटर द्वारा यह कॉन्ट्रैक्ट जारी किया गया है। इसके लिए वित्त वर्ष 2026 के फंड से शुरुआती तौर पर 2.64 मिलियन डॉलर की राशि जारी भी कर दी गई है। पाकिस्तान के अलावा किन-किन देशों को मिलेगा फायदा? यह कॉन्ट्रैक्ट अमेरिका के 'फॉरेन मिलिट्री सेल्स' (FMS) प्रोग्राम के तहत सहयोगी देशों के लिए किया गया है। इस डील में पाकिस्तान के अलावा बहरीन, बेल्जियम, चिली, डेनमार्क, मिस्र, ग्रीस, इंडोनेशिया, इराक, इजरायल, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, मोरक्को, नीदरलैंड, नॉर्वे, ओमान, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, थाइलैंड और तुर्किए शामिल हैं। 2040 तक बढ़ जाएगी पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की उम्र यह नया समर्थन पाकिस्तान को दिए जा रहे अमेरिकी सहयोग की एक कड़ी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अपनी संसद को पाकिस्तान के F-16 बेड़े को अपग्रेड करने के लिए 686 मिलियन डॉलर के एक अलग पैकेज की जानकारी दी थी। इस 686 मिलियन डॉलर के पैकेज में 'लिंक-16' टैक्टिकल डेटा सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड और ट्रेनिंग सपोर्ट शामिल है। इस अपग्रेड योजना में 'आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो' सिस्टम, सटीक नेविगेशन टूल और सुरक्षित संचार उपकरणों में बदलाव भी शामिल किए गए हैं। DSCA के अनुसार, इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 बेड़े का आधुनिकीकरण करना है ताकि विमानों की सर्विस लाइफ 2040 तक बढ़ाई जा सके। साथ ही इसका मकसद भविष्य में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए अमेरिका और अन्य सहयोगी बलों के साथ पाकिस्तान के तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को और ज्यादा मजबूत करना है। इस अपग्रेड कार्यक्रम के लिए 'लॉकहीड मार्टिन' को प्रमुख ठेकेदार के रूप में चुना गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया था कि इस काम के लिए अमेरिकी कर्मियों को पाकिस्तान भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पाकिस्तान ने किया अमेरिकी मदद का स्वागत मामले से जुड़े एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने F-16 प्रोग्राम के लिए अमेरिका के लगातार मिल रहे सपोर्ट का स्वागत किया है। सूत्रों का कहना है कि इन अपग्रेड्स से विमानों की उम्र बढ़ेगी और सहयोगी प्रणालियों के साथ तकनीकी अनुकूलता बनी रहेगी। सूत्र ने यह भी बताया कि पाकिस्तानी वायु सेना ने हाल के वर्षों में अपने बेड़े में कई नए विकल्प शामिल किए हैं जिससे किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम हुई है, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मौजूदा F-16 क्षमताओं को बनाए रखने को काफी अहमियत देते हैं।

चित्तौड़गढ़: भक्तों की ‘पार्टनरशिप भक्ति’ से बढ़ा सांवलिया सेठ का खजाना

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के प्रसिद्ध श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में इस साल आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। पिछले एक साल में मंदिर के भंडार में 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है, जो पिछले 34 वर्षों में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेकिन इस दान की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें एक बड़ा हिस्सा 'भक्ति के मुनाफे' का है। दुनिया के सबसे अनोखे 'बिजनेस पार्टनर' भक्तों के बीच मान्यता है कि सांवलिया जी यहां 'सेठ' के रूप में विराजमान हैं। यही कारण है कि देशभर के बड़े कारोबारी और शेयर बाजार के खिलाड़ी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं। यहां दान केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि 'पार्टनरशिप डीड' के तहत आता है। स्टाम्प पेपर पर होती है 'साझेदारी' यह जानकर आपको हैरानी होगी कि भक्त यहां बाकायदा स्टाम्प पेपर पर पार्टनरशिप करार बनवाकर लाते हैं। मंदिर में इस तरह के पत्र चढ़ाए जाते हैं- 'मैं निवासी जयपुर, यह साझेदारी करार श्री सांवलिया मंदिर के साथ करता हूं कि मेरे शेयर बाजार और व्यापारिक स्रोतों से होने वाले मुनाफे में 10% हिस्से की साझेदारी ठाकुर जी की रहेगी।' जब मन्नत पूरी होती है और व्यापार चमकता है, तो भक्त अपनी कंपनी के लेटर हेड पर पूरी जानकारी लिखकर लाखों-करोड़ों की राशि ठाकुर जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं। 34 साल का रिकॉर्ड टूटा, मुनाफे में डूबे भक्त भक्तों का अटूट विश्वास है कि एक बार अगर 'सांवलिया सेठ' को अपना पार्टनर बना लिया, तो व्यापार कभी घाटे में नहीं जाता। जैसे-जैसे व्यापार बढ़ता है, मंदिर के भंडार में आने वाली 'प्रॉफिट शेयरिंग' भी बढ़ती जाती है। इसी का नतीजा है कि इस वित्तीय वर्ष में चढ़ावे ने 337 करोड़ का जादुई आंकड़ा छू लिया है।  

पटना में शराब तस्करी का नेटवर्क, होम डिलीवरी से लेकर ‘निंजा तकनीक’ तक का खुलासा

पटना राजधानी के पॉश इलाके कंकड़बाग में 'प्योर मिल्क' (शुद्ध दूध) का मतलब पाश्चुरीकृत दूध का कोई पैकेट नहीं है। ये महंगी ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की का एक कोड वर्ड है, जो जासूसी नजरों से बचने के लिए टेट्रा पैक में आती है। सूखे बिहार (शराबबंदी) में जहां पिछले 10 वर्षों से शराबबंदी ने 'सोनपापड़ी' को महंगी शराब (जो झारखंड, यूपी और बंगाल से तस्करी कर लाई जाती है) के कोड में बदल दिया है। यहां, ये अवैध कारोबार न केवल जीवित है, बल्कि चूहे-बिल्ली के खेल की तरह फल-फूल रहा है। कई जिलों, कस्बों और राजधानी पटना में 'समोसेवाला', 'ग्रॉसरीवाला' और 'संन्यासी बाबा' उन युवाओं के लिए कोड वर्ड हैं, जो समय पर विदेशी शराब (IMFL) की होम डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं' बिहार अप्रैल 2016 से 'ड्राई' है, लेकिन यह केवल कागजों पर है। वास्तव में ये एक बेहद प्यासी भूमि है, जहां अधिकांश पिज्जा डिलीवरी से भी तेज एक सटीक होम-डिलीवरी सिस्टम काम कर रहा है। शराबबंदी ने एक फलता-फूलता काला बाजार बना दिया है, जहां युवा एजेंटों द्वारा शराब दरवाजे तक पहुंचाई जाती है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, ये एजेंट एक सक्रिय अवैध सप्लाई चेन की साइलेंट समझ के साथ काम करते हैं। शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के एक दशक बाद भी शराब की मांग खत्म नहीं हुई है। ये बस पर्दे के पीछे चली गई है। पटना के कई पॉश इलाकों में होम डिलीवरी के धंधे में शामिल 'ट्यूशन मैम', 'नर्स मैम' और 'पार्लरवाली' उन युवतियों के कोड हैं, जो शराब की डिलीवरी करती हैं। पटना में होम-डिलीवरी एजेंट मुन्ना से मुलाकात हुई। वो फॉर्मल शर्ट पहनता है। स्कूटर चलाता है और लैपटॉप बैग ले जाता है। उसने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) संवाददाता से कहा, 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं।' साथ ही जोड़ा कि वो 'खुशी' यूपी या झारखंड से तस्करी कर लाई गई प्रीमियम विदेशी शराब होती है। मुन्ना की सबसे बेहतरीन तरकीब ब्रांडेड कंपनियों के खाने के खाली डिब्बों के अंदर छिपी बोतलें पहुंचाना है। वो 'किराना-वाला' बनकर घरों में जाता है। 5 मिनट में 'संन्यासी बाबा' की डिलिवरी पटना के मोहल्लों में शराबबंदी ने पार्टियों को नहीं रोका। बस, उन्हें गुप्त बना दिया। 'संन्यासी बाबा' से भी मुलाकात हुई, जो एक स्थानीय होम-डिलीवरी नेटवर्क के अनौपचारिक सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) हैं। जहां प्रमुख ऐप्स 10 मिनट में किराना सामान पहुंचाते हैं, वहीं 'संन्यासी' का नेटवर्क पांच मिनट में डिलीवरी करता है, बेशक अतिरिक्त शुल्क के साथ। यहां ब्रांड के आधार पर 180 मिलीलीटर के पैक की कीमत 200 रुपये से बढ़कर 600 रुपये तक हो जाती है। ये सिस्टम लगभग अचूक है। कोई दुकान या साइनबोर्ड नहीं है। बस 'हेल्थ एंड फिटनेस' नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप है। एक मैसेज 'दो प्रोटीन शेक' और 'दो प्योर मिल्'क चाहिए। कुछ ही मिनटों में एक 'दूधवाला' भारी दूध के केन लेकर मोटरसाइकिल पर आ जाता है। विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बिहार की शराबबंदी नीति भारत के सबसे विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बनी हुई है, जो मापने योग्य सामाजिक लाभों, भारी राजकोषीय लागतों और प्रवर्तन की लगातार विफलताओं से चिह्नित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के जरिए से शुरू किया गया ये प्रतिबंध शराबखोरी, गरीबी और घरेलू हिंसा को कम करने के लिए महिलाओं की मांगों के जवाब के रूप में पेश किया गया था। एक दशक बाद, इसका रिकॉर्ड एक तरफ घरेलू कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, तो दूसरी तरफ राजस्व का पतन, काले बाजार का विस्तार और न्यायिक बोझ के बीच बुरी तरह विभाजित है। कानूनी बाजार के गायब होने से मांग खत्म नहीं हुई। इसके बजाय, इसने एक विशाल अवैध व्यापार के लिए जगह बना दी। अनुमान बताते हैं कि बिहार में अब 25,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये की समानांतर शराब अर्थव्यवस्था चल रही है। इसके अलावा, दशक भर की शराबबंदी ने आम नागरिकों को 'आविष्कारशील' तस्करों में बदल दिया है, जिनकी इंजीनियरिंग की महारत बड़े-बड़े मैकेनिकों को मात दे सकती है। बिहार में शराब तस्करी का 'निंजा तकनीक' तस्करों ने हाल ही में वो अपनाया है जिसे पुलिस 'निंजा तकनीक' कहती है। फरवरी में एक व्यक्ति को अपनी मोटरसाइकिल से बंधी खोखली प्लास्टिक की कुर्सियों के अंदर छिपाई गई दर्जनों बोतलों के साथ पकड़ा गया था। ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा' से प्रेरणा लेते हुए, किशनगंज जिले में ताजे टमाटर और गोभी के नीचे छिपाई गई 862 लीटर विदेशी शराब ले जाते हुए तस्करों को पकड़ा गया। मुजफ्फरपुर जाने वाला एक साधारण सब्जी का ट्रक लग रहा था, लेकिन आखिरकार व्हिस्की की गंध सब्जियों की खुशबू पर भारी पड़ गई और भेद खुल गया। नवादा में पुलिस ने एक ऐसी मोटरसाइकिल बरामद की जिसका ईंधन टैंक पूरी तरह से शराब के लिए इस्तेमाल किया गया था। बाइक को चालू रखने के लिए तस्करों ने सीट के नीचे एक छोटा सा अलग पेट्रोल बॉक्स लगाया था। शराब के पाउच या बोतलें कटे हुए गैस सिलेंडरों, पानी के टैंकरों और एम्बुलेंस के अंदर भी ठूंस दी जाती हैं। सारण में 'स्वच्छ भारत अभियान' और 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' जैसे सरकारी नारों वाला एक टैंकर हरियाणा निर्मित व्हिस्की के 330 कार्टन से भरा पाया गया। शराब तस्करी में इस्तेमाल कोडवर्ड का मतलब बिहार में शराब तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कोड वर्ड्स और उनके असली मतलब जानें।     प्योर मिल्क: पॉश इलाकों में 'महंगी स्कॉच व्हिस्की' के लिए इस्तेमाल होने वाला कोड।     सोनपापड़ी: पड़ोसी राज्यों से तस्करी कर लाई गई 'महंगी शराब' का गुप्त नाम।     प्रोटीन शेक: वाट्सऐप ग्रुप्स पर 'शराब की बोतलों' के ऑर्डर के लिए कोड।     संन्यासी बाबा: स्थानीय शराब नेटवर्क के 'मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड' का नाम।     समोसेवाला/ग्रॉसरीवाला: घर पर शराब पहुंचाने वाले 'युवा डिलीवरी एजेंटों' की पहचान।     हेल्थ एंड फिटनेस: शराब के शौकीनों के लिए बना गुप्त 'वाट्सऐप सप्लाई ग्रुप'।     ट्यूशन मैम/नर्स मैम/पार्लरवाली: होम डिलीवरी करने वाली 'महिला एजेंटों' के कोड।     खुशियां: डिलीवरी एजेंटों की ओर से प्रीमियम 'विदेशी शराब' के लिए संबोधन।     निंजा तकनीक: खाली कुर्सियों या सब्जियों के नीचे 'शराब छिपाने' का तरीका।     दूधवाला: मोटरसाइकिल पर दूध के केन में 'शराब की खेप' ढोने वाला। सूखे नशे की चपेट में … Read more

गंगा दशहरा पर जल स्त्रोतों की साफ-सफाई में योगदान दें प्रदेशवासी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन है और जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के प्रेरक मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पानी को सहेजने के कार्य में जन-जन को जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनभागीदारी आधारित जल संचय अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल एक रैंक नहीं बल्कि प्रदेशवासियों की जागरूकता, सहभागिता और भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जल संरक्षण और प्रकृति अनुरूप रहन-सहन की व्यवस्था भारतीय जीवनशैली और परम्पराओं में सदियों से रची-बसी है। हमारे यहां नदी-तालाब-कुंओं की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना गया है। इन गतिविधियों के धार्मिक महत्व को देखते हुए गंगा दशहरा 25 मई को जल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और पौधरोपण के लिए श्रमदान तथा अन्य गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इन गतिविधियों का पुण्य प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक नागरिक गंगा दशहरा पर अपने आस-पास के जल स्त्रोतों और जल संरचनाओं की साफ-सफाई तथा रखरखाव के कार्य से जुड़ें। जनसामान्य की यह पहल मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में एक आदर्श व अनुकरणीय राज्य के रूप में देश में प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए। जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी पहल करना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संचय भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 लाख 64 हजार 119 कार्य पूर्ण हुए हैं। जिला स्तर पर डिण्डौरी और खण्डवा जिले देश में क्रमश: प्रथम और द्वितीय रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर, सुरक्षित और सस्टेनेबल धरती सौंपना हमारा दायित्व है, जो बिना पर्याप्त जल की उपलब्धता के संभव नहीं है। अत: जल संरक्षण के कार्य में जन-जन को जोड़ना जरूरी है। उन्होंने पंचायतों, नगरीय निकायों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों, स्वंयसेवी संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, व्यापारिक संगठनों तथा अन्य सभी संस्थाओं से पानी बचाने की गतिविधियों में जुड़ने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पानी बचाने और जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने के लिए भी लोग आगे आएं। जल संरक्षण के लिए स्कूल, कॉलेज और संस्थाएं कर रही हैं जन-जन को प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार, नगरीय और ग्राम स्तर पर अनेक गतिविधियां संचालित कर रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 2 लाख 43 हजार 887 कार्यों के लिए 6 हजार 232 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में 45 हजार 132 खेत-तालाब, 68 अमृत सरोवर, 77 हजार 975 डगवेल रिचार्ज औ वॉटर शेड से संबंधित 3 हजार 346 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। नगरीय क्षेत्र में भी तालाबों, कुंओं, बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने, नाले-नालियों की साफ-सफाई आदि का कार्य जारी है। नगरीय निकायों द्वारा 3 हजार 40 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग इकाईयां स्थापित की गई हैं। जन सहयोग से बड़े पैमाने पर प्याऊ सेवा संचालित की जा रही हैं। स्कूल, कॉलेजों और जन अभियान परिषद से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से जन-जन को अभियान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।