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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही, विवाद से बचने की दी सलाह : मौलाना रजवी

बरेली यूपी के बरेली शहर में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। मौलाना ने शरीयत का हवाला देते हुए इस फैसले को सही बताया है। शनिवार को मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि कोर्ट का निर्णय पूरी तरह सही और दुरुस्त है। शरियत के नजरिये का हवाला देते हुए मौलाना ने कहा कि अगर किसी जगह नमाज पढ़ने से विवाद की स्थिति बनती हो या किसी को आपत्ति हो सकती हो, तो ऐसी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए। मौलाना ने आगे कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है, इसलिए ऐसे किसी भी कार्य से बचना जरूरी है जिससे सामाजिक सौहार्द्र प्रभावित हो। दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर बड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थान सबके लिए है। धार्मिक आजादी के नाम पर इस पर कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब सार्वजनिक भूमि की बात आती है तो ये साफ है कि ये सबके लिए है और कानून से कंट्रोल होती है। कोई भी शख्स नियमित धार्मिक आयोजनों के इस्तेमाल के लिए इस पर दावा नहीं कर सकता। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐसा कहा। अदालत ने आबादी भूमि के हिस्से के निजी परिसर में नमाज की अनुमति मांगने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थान के इस्तेमाल पर आम जनता के आने-जाने और सुरक्षा पर असर पड़ता है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर सभी की बराबर पहुंच करे। आपराधिक केस है तो शासनादेश के तहत जारी करें चरित्र प्रमाण पत्र : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्यआदेश में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र रोका नहीं जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को शासन द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार याची को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नीतीश कुमार की याचिका पर उसके अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती व सरकारी वकील को सुनकर दिया है। याची ने याचिका में एडीजी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याची का चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि याची के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है।

CID की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों के घोटाले में नकदी और संपत्ति बरामद

 रांची झारखंड के जिला कोषागारों से अवैध तरीके से वेतन निकासी के करोड़ों रुपये के घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई की। SIT ने गुरुवार को बोकारो के एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात सिपाही काजल मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोपित के घर से नकदी की बरामदगी   यह इस घोटाले में अब तक की चौथी गिरफ्तारी है। गिरफ्तार सिपाही काजल मंडल बोकारो स्टील सिटी का निवासी है। पुलिस की पूछताछ और उसकी निशानदेही पर SIT ने बोकारो स्थित उसके आवास पर छापेमारी की, जहां से 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह राशि अवैध तरीके से सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मुख्य आरोपित के साथ साठगांठ जांच में यह खुलासा हुआ है कि काजल मंडल इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड और लेखापाल (Accountant) कौशल कुमार पांडेय का सक्रिय सहयोगी था। कौशल पांडेय ने यात्रा मद (Travel Allowance) और अन्य मदों से प्राप्त अवैध राशि काजल मंडल के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। सिपाही ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में इस राशि को घर में छिपाने की बात स्वीकार की है। इस मामले में SIT पूर्व में ही तीन अन्य आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है:         कौशल कुमार पांडेय: मुख्य आरोपित, लेखापाल (एसपी कार्यालय)।         सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: सहयोगी गृह रक्षक।         अशोक कुमार भंडारी: एएसआई (ASI) और सहयोगी। ये तीनों वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। अब काजल मंडल सहित सभी चारों आरोपितों को रिमांड पर लेकर अन्य साथियों और नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी। जब्त संपत्तियों का विवरण SIT ने इस घोटाले की जांच के दौरान अब तक करोड़ों की संपत्ति और दस्तावेज जब्त किए हैं :         भूमि व मकान: बोकारो के तेलीडीह में 4.08 डिसमिल और 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज। साथ ही, उक्त भूमि पर निर्मित तीन मंजिला आलीशान मकान।         फिक्स्ड डिपॉजिट: विभिन्न बैंकों में जमा 1.93 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज (Seize) कर दिया गया है।         नकद: ताजा कार्रवाई में जब्त 8.75 लाख रुपये। राज्य सरकार के आदेश पर SIT की पैनी नजर झारखंड सरकार के कड़े रुख के बाद CID की विशेष टीम बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज अवैध निकासी के मामलों की जांच कर रही है। SIT ने इन सभी मामलों को टेकओवर करते हुए रांची के CID थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड पर पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।  

शहडोल के डायल-112 हीरोज रास्ता भटके 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल  शहडोल जिले के थाना बुढ़ार क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से घर का रास्ता भटक गए 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालक को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका। 30 अप्रैल को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल में सूचना प्राप्त हुई कि थाना बुढ़ार क्षेत्र अंतर्गत कॉलेज तिराहा के पास एक 10 वर्षीय बालक अकेला मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही बुढ़ार थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक  प्रिंस अग्रवाल एवं पायलट  पंकज लोधी ने बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। बालक से स्नेहपूर्वक बातचीत करने पर बालक ने बताया कि वह बरतरा गाँव का निवासी है। डायल-112 टीम ने तत्परता दिखाते हुए बालक के बताए स्थान के आधार पर उसके परिजनों से संपर्क स्थापित किया एवं उन्हें मौके पर बुलाया । बालक द्वारा पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसे सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया। बालक के सुरक्षित मिलने पर परिजनों द्वारा डायल-112 सेवा के प्रति आभार व्यक्त किया। डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालक को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

योगी सरकार का स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, एक्सप्रेसवे निर्माण में तकनीक का बढ़ा इस्तेमाल

लखनऊ यूपी में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है। यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है। निर्माण के साथ-साथ निगरानी अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन पहले निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके। सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आंकलन इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है। डेटा से तय होगी सड़क की गुणवत्ता सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सुरक्षा पर सीधा असर योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे, ‘स्मार्ट नेटवर्क’ की ओर बढ़ता यूपी यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।

प्रदेश के 6 लाख घर सौर ऊर्जा से होंगे रोशन : मंत्री शुक्ला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत प्रदेश के 6 लाख घर सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। इसके लिए घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए वेंडर्स के साथ डिजिटल एग्रीमेंट की व्यवस्था लागू की जा रही है। डिजिटल एग्रीमेंट से लागत में कमी और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में तेजी से कार्य किया जा सकेगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आम जनता में उत्साह है। अब तक लगभग 2 लाख आवेदन प्राप्त हो गए हैं। निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लिया जाएगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा हितग्राहियों और वेंडर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न शुल्कों में कमी लाने की विशिष्ट पहल की गई। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क तथा इंस्टॉलेशन/कमीशनिंग शुल्क में राहत देने और भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था। आयोग द्वारा सुनवाई के बाद डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने के आदेश जारी किए गए हैं। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि आयोग के इस निर्णय से न केवल सौर संयंत्रों की स्थापना लागत में कमी आएगी, बल्कि स्थापना प्रक्रिया भी सरल होने के साथ तेजी से पूरी की जा सकेगी। इससे योजना के लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी और लाखों उपभोक्ताओं को यथाशीघ्र लाभ प्राप्त होगा। योजना से प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही आम नागरिकों के बिजली खर्च में कमी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मध्यप्रदेश मजबूत कदम बढ़ाएगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में 1 मई 2026 तक योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिये कुल 1,89,147 आवेदन प्राप्त हुये हैं। इस योजना में 1,18,796 संयंत्र स्थापित किये जा चुके हैं, जिनसे 445 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत लाभार्थियों को 790.97 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया जा चुका है।  

24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैम्पियनशिप का किया शुभारंभ

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित 24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैम्पियनशिप का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिये शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की खेलोन्मुखी नीतियों और अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के कारण प्रदेश आज देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। मंत्री  सारंग ने कहा कि म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शूटिंग अकादमियों में से एक है। यह अकादमी विश्वस्तरीय सुविधाओं और अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है। यहाँ खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शूटिंग खेल की अपार संभावनाएं हैं और प्रदेश के खिलाड़ी ओलम्पिक, एशियन गेम्स सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। मंत्री  सारंग ने शूटिंग परिसर स्थित बैठक कक्ष में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर ग्रीष्मकालीन खेल शिविर आरोह-2026 सहित आगामी खेल गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में संचालक, खेल और युवा कल्याण  अंशुमान यादव, उप-संचालक  बीएस यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ में किया था ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन

भोपाल  काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के पावन परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आभा से डिजिटल दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी डिजिटल रीच दर्ज कराई है। प्रधानमंत्री के अवलोकन से मिला वैश्विक विस्तार प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के इस संगम का अवलोकन बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद किया था। प्रधानमंत्री  मोदी ने इस वैदिक घड़ी को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत मेल बताया। उनके अवलोकन के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर नया उत्साह देखा गया, जिससे यह देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गई। प्रधानमंत्री  मोदी के अवलोकन से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं का ऐसा वातावरण तैयार हुआ कि केवल सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म से ही लाखों उपयोगकर्ताओं तक इसकी गूँज पहुँची। प्रधानमंत्री  मोदी और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर आयोजित लाइव स्ट्रीम को 5,933 दर्शकों ने सीधे देखा। साथ ही राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर हुए सीधे प्रसारण ने करोड़ों दर्शकों तक इसकी जानकारी पहुँचाई।  सोशल मीडिया के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर हैशटैग #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत के 'ट्रेंडिंग सेक्शन' में नंबर 1 स्थान पर काबिज रहा, जो सनातन संस्कृति और भारतीय कालगणना से जुड़े आयोजनों के लिए एक डिजिटल मील का पत्थर है। 16 से अधिक प्रमुख हैशटैग्स को ट्रैक किया गया, जिनमें #Varanasi, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #Vedic Ghadi जैसे हैशटैग ने लाखों लोगों को आकर्षित किया। इस व्यापक कवरेज ने इस गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांस्कृतिक चेतना का नया संवाहक मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा निर्मित इस घड़ी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सादर भेंट किया गया था। 04 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय कालगणना, पंचांग, और ग्रहों की स्थिति जैसी जटिल गणनाओं को सरलता से प्रस्तुत करती है। भविष्य की योजनाएँ इस सफल डिजिटल आउटरीच ने सिद्ध कर दिया है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक आधारों को जानने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, वाराणसी की सफलता के बाद अब अयोध्या के  राम मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंग परिसरों में ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश जन-जन तक पहुँच सके। यह न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय काल-चिन्तन को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप (Vikramaditya Vedic Clock) जिन लोगों को वैदिक घड़ी अपने मोबाइल फोन पर चाहिए तो विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप वैदिक घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जो भारतीय काल गणना (तिथि, नक्षत्र, योग, करण) और 7000 वर्षों का पंचांग दिखाता है। यह ऐप 189+ भाषाओं में उपलब्ध है, जो सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और 30 घंटे के समय प्रारूप को Android/iOS पर दिखाता है। वैदिक घड़ी ऐप की मुख्य विशेषताएं     भारतीय काल गणना: यह ऐप समय को 30 मुहूर्तों में बांटकर दिखाता है, जो सूर्योदय पर आधारित है।     पंचांग विवरण: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, और मास की सटीक जानकारी।     189+ भाषाएँ: यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी सहित 189+ भाषाओं में उपलब्ध है।     शुभ/अशुभ समय: यह दैनिक 'राहुकाल', 'शुभ मुहूर्त' और 'चौघड़िया' की जानकारी देता है     इतिहास: इसमें महाभारत काल से लेकर अब तक के 7000 वर्षों का पंचांग समाहित है।     अलार्म: आप वैदिक समय के अनुसार अलार्म भी सेट कर सकते हैं। ऐप कैसे डाउनलोड करें? यह ऐप Google Play Store (Android) पर "Vikramaditya Vedic Clock" नाम से उपलब्ध है। App Store (iOS/iPhone) से भी इसे डाउनलोड किया जा सकता है।  

NET-PhD धारकों का आक्रोश बढ़ा, संविदा भर्ती को बताया भविष्य से खिलवाड़

जयपुर  राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा कॉलेजों में 3,540 पदों पर 'टीचिंग एसोसिएट' की संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शिक्षित युवाओं में आक्रोश भर दिया है. युवा इस योजना को 'शिक्षावीर' करार देकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. नेट और PhD धारकों के साथ धोखा विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि जिन्होंने बरसों मेहनत कर NET, JRF और PhD जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, उनके भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. युवाओं का तर्क है कि सरकार स्थाई भर्ती करने के बजाय अस्थायी नियुक्तियां कर रही है, जिससे उच्च शिक्षा का स्तर गिरेगा. छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों में स्थाई आचार्य नहीं होंगे, तो शोध (Research) और नए विमर्श पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की स्किल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा. वेतन पर भड़के युवा भर्ती के विरोध का सबसे बड़ा कारण तय किया गया मानदेय है. टीचिंग एसोसिएट के लिए मात्र 28,500 रुपये वेतन तय किया गया है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक से भी कम है. UGC के मानकों के अनुसार, एक सहायक आचार्य की बेसिक पे ही 57,700 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में आधे वेतन पर उच्च शिक्षित युवाओं से काम कराना उनका अपमान है. खाली पदों से जूझते विश्वविद्यालय प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत पहले ही जर्जर है. कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 32% पद खाली पड़े हैं. प्रदेश की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने घेरी सरकार अब इस मुद्दे पर सियासत भी गर्मा गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सेना में 'अग्निवीर' की तर्ज पर अब सरकार 'शिक्षावीर' और 'डॉक्टरवीर' बनाकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है. युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती वापस लेकर स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा.

शाम 4 बजे भड़की आग ने लिया विकराल रूप, घंटों मशक्कत के बाद भी काबू नहीं

देवास इंदौर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र क्रमांक 1 में श्रीनिवास बोर्ड एंड पेपर्स फैक्ट्री के परिसर में शनिवार शाम अचानक आग लग गई। यहां पुराने कागजों को रिसाइकल कर पेपर रोल बनाने का काम किया जाता है। पुराने पेपर के कंप्रेस्ड बंडलों तक पहुंची आग देखते ही देखते विकराल हो गई। लगभग 100 मीटर के दायरे में आग भड़कती रही। सूचना मिलने पर नगर निगम, टाटा, आयशर, सीआइएसएफ बीएनपी की दमकलें मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। देर रात समाचार लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका था। जानकारी के अनुसार शाम करीब 4:45 बजे नगर निगम फायर विभाग को आग की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही नगर निगम के 4 फायर टैंडर और कई टैंकर मौके पर पहुंचे। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र की वाल्वो आयशर, टाटा इंटरनेशनल की दमकल भी मौके पर पहुंची। आग इतनी भीषण थी कि दमकल द्वारा चारों ओर से डाला जा रहा पानी भी बेअसर साबित हो रहा था। फायर ब्रिगेड की लगभग 16 गाड़ियों के अलावा टैंकरों से कई बार पानी लाया गया। आसपास के बोरवेल से भी पानी का छिड़काव लगातार किया गया। बावजूद इसके रात तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। घटनास्थल पर एसडीएम अभिषेक शर्मा, तहसीलदार सपना शर्मा, सीएसपी सुमित अग्रवाल, औद्योगिक क्षेत्र टीआई शशिकांत चौरसिया, यातायात टीआइ पवन बागड़ी सहित पुलिसबल व प्रशासन का अमला भी मौजूद रहा। बड़ी मात्रा में जमा था स्क्रैप कागज बताया जा रहा है कि कंपनी में पुराने व स्क्रैप कागजों को प्रोसेस कर नए पेपर रोल व बाक्स तैयार किए जाते हैं। यहां पुराने गत्ते के बक्सों व रद्दी को कंप्रेस कर बड़े-बड़े बंडल के रूप में रखा गया था। आग रेलवे लाइन की ओर कंपनी के पिछले हिस्से से शुरू हुई और आगे की ओर बढ़ी। फायर ब्रिगेड कर्मचारी लगातार पानी का छिड़काव कर रहे थे, परन्तु बड़ी मात्रा में गत्ते के बंडल नीचे से फिर भभक रहे थे। जेसीबी, लोडर से हटाया कच्चा माल आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वहां भारी मात्रा में जमा कंप्रेस्ड पेपर बंडल व स्क्रैप कागजों को तेजी से हटाने का काम किया गया। हालांकि बड़ी मात्रा में माल होने के कारण घंटों की मशक्कत करना पड़ी। इस दौरान दो जेसीबी व चार लोडर लगातार कच्चा माल आग की ओर से अलग हटाते रहे। तहसीलदार सपना शर्मा ने बताया कि आग के कारणों व नुकसानी का फिलहाल आंकलन नहीं किया जा सका है।   

सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों की साजिश नाकाम

 चाईबासा झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में कोबरा 209 बटालियन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में अब फॉलो-अप कार्रवाई के दौरान बड़ी बरामदगी सामने आई है। सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के रूटुगुटू जंगल में मुठभेड़ के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से एक SLR राइफल, मैगजीन और जिंदा कारतूस, करीब 182 राउंड SLR गोली, खाली कारतूस और एक कार्बाइन हथियार बरामद हुआ है। इसके अलावा एक AK-47 का खाली केस भी मिला है। सबसे अहम बरामदगी विस्फोटक सामग्री की है। कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने कुल 4 पैकेट जिलेटिन (करीब 5 किलो), डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर और अन्य विस्फोटक उपकरण बरामद किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। बरामद सामानों में पिट्ठू, बैग, पाउच, पानी की बोतलें, बैटरी, टेप, धागा, पिन, कैंची, मल्टीपर्पज चाकू, प्लेट, छाता, सिरिंज, नीडल, सिरिंज बोतलें, हेडफोन और डेटा केबल जैसे दैनिक उपयोग और संचार से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नक्सली लंबे समय तक जंगल में ठहरने की तैयारी में थे। अभी भी फंसे हैं कुछ नक्सली इधर, मुठभेड़ में मारे गए नक्सली अमृत उर्फ इजरायल पूर्ति का पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया है। सुरक्षा कारणों से शव को 48 घंटे बाद शुक्रवार को चाईबासा लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया। बताया जा रहा है कि वह करीब 14 साल की उम्र से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और अजय महतो दस्ते का सक्रिय सदस्य था। सूत्रों के मुताबिक, इलाके में अभी भी कुछ नक्सलियों के फंसे होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे जंगल क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है। बीच-बीच में रुक-रुक कर फायरिंग की भी सूचना है, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह दस्ता हाल ही में सारंडा जंगल से निकलकर इस इलाके में सक्रिय हुआ था और कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा तथा अजय महतो समूह से जुड़ा हुआ था। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच से माओवादी नेटवर्क और उनकी भविष्य की योजनाओं को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं।