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IPL 2026 Match 44: चेन्नई vs मुंबई—दोनों दिग्गज टीमों के लिए ‘करो या मरो’ मुकाबला

चेन्नई  इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में आज (शनिवार) यानी 2 मई को चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और मुंबई इंडियंस (एमआई) के बीच मुकाबला खेला जाएगा। सीजन का 44वां मैच एमए चिदंबरम स्टेडियम में आयोजित होगा, जिसमें दोनों ही टीमें अपनी किस्मत बदलकर जीत की राह पर लौटना चाहेंगी। छठे नंबर पर है चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स 8 में से 5 मैच गंवाकर पॉइंट्स टेबल में छठे पायदान पर है। छह दिन के ब्रेक के बाद चेन्नई सुपर किंग्स मैदान पर वापसी कर रही है। चेपॉक में गुजरात टाइटंस ने इस टीम को 8 विकेट से हराया था। उस मुकाबले में सीएसके के बल्लेबाज अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण के सामने बेबस नजर आए थे। 9वें पायदान पर है मुंबई इंडियंस दूसरी ओर, मुंबई इंडियंस भी सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के हाथों चौंकाने वाली हार झेलने के बाद इस मुकाबले में उतर रही है। एसआरएच को 244 रन का टारगेट देने के बावजूद यह टीम 6 विकेट से मैच गंवा बैठी थी। 8 में से 6 मुकाबले गंवाने के बाद फिलहाल यह टीम प्वाइंट्स टेबल में 9वें पायदान पर मौजूद है। अपने सीजन को बुरे अंजाम से बचाने के लिए उन्हें जीत की सख्त जरूरत है। चेन्नई और मुंबई का हेड टू हेड रिकॉर्ड चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस ने 5-5 बार आईपीएल खिताब अपने नाम किए हैं। दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 40 मैच खेले गए हैं, जिसमें 21 मुकाबले एमआई के पक्ष मे रहे, जबकि 19 मैच सीएसके ने जीते हैं। मैच के लिए दोनों टीमें इस प्रकार हैं चेन्नई सुपर किंग्स: ऋतुराज गायकवाड़ (कप्तान), एमएस धोनी (विकेटकीपर), डेवोन कॉन्वे, राहुल त्रिपाठी, शेख रशीद, वंश बेदी (विकेटकीपर), आंद्रे सिद्धार्थ, रचिन रवींद्र, रविचंद्रन अश्विन, विजय शंकर, सैम करन, अंशुल कंबोज, दीपक हुड्डा, जेमी ओवरटन, कमलेश नागरकोटी, रामकृष्ण घोष, रवींद्र जडेजा, शिवम दुबे, खलील अहमद, नूर अहमद, मुकेश चौधरी, डेवाल्ड ब्रेविस, नाथन एलिस, श्रेयस गोपाल। मुंबई इंडियंस: हार्दिक पंड्या (कप्तान), रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, रॉबिन मिंज, रयान रिकेल्टन (विकेटकीपर), श्रीजीत कृष्णन (विकेटकीपर), बेवोन जैकब्स, तिलक वर्मा, नमन धीर, विल जैक्स, केशव महाराज, राज अंगद बावा, विग्नेश पुथुर, कॉर्बिन बॉश, ट्रेंट बोल्ट, कर्ण शर्मा, दीपक चाहर, अश्वनी कुमार, रीस टॉपले, वीएस पेनमेत्सा, अर्जुन तेंदुलकर, मुजीब उर रहमान, जसप्रीत बुमराह।

2032 तक डिजिटल जर्नलिस्ट की मांग में 13% का इजाफा, इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में सबसे बड़ी वृद्धि: पत्रकारों के लिए अच्छी खबर

 नई दिल्ली पत्रकार‍िता में जिस तरह एआई ने दख‍ल दिया है, हर तरफ से नकारात्मक खबरें ही सुनने को मिलती हैं. इस बीच जर्नलिज्म के छात्रों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर आई है. ग्लोबल रिपोर्ट्स और एम्प्लॉयमेंट प्रोजेक्शन के आंकड़ों ने साफ किया है कि साल 2032 तक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट्स की मांग में 13% की जबरदस्त तेजी आने वाली है. बता दें कि ये विकास दर अन्य सभी व्यवसायों की औसत वृद्धि दर से कहीं अधिक है।  बढ़ी'AI लिटरेट' पत्रकारों की तलाश मार्केट एनालिसिस से ये भी साफ हुआ है कि अब मीड‍िया कंपनियों को सिर्फ पारंपरिक रिपोर्टर नहीं, बल्कि ऐसे पत्रकार चाहिए जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा के साथ काम करने में सक्षम हों. डेटा जर्नलिज्म और सोशल मीडिया स्पेशलिस्ट की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके पीछे मुख्य कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस का बढ़ता जुड़ाव और रियल-टाइम एंगेजमेंट की जरूरत है।  इन क्षेत्रों में मिल रहे हैं सबसे ज्यादा मौके: डिजिटल कंटेंट स्पेशलिस्ट: कंपनियां ब्रांड लॉयल्टी और सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन के लिए स्टोरीटेलिंग के माहिर लोगों को ढूंढ रही हैं।  मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट: पॉडकास्ट, वीडियो और मोबाइल-फर्स्ट न्यूज के दौर में उन पत्रकारों की मांग बढ़ी है जो मल्टीपल चैनल्स पर कहानी कह सकें।  मीडिया एनालिस्ट: बिग डेटा और AI टूल्स के जरिए ऑडियंस के व्यवहार को समझने वाले प्रोफेशनल्स अब संपादकीय फैसलों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  टेक्निकल राइटर्स: हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे जटिल क्षेत्रों में सरल भाषा में जानकारी देने वाले पत्रकारों की भारी जरूरत है।  सैलरी में भी उछाल का रुझान हायरिंग ट्रेंड्स बताते हैं कि खोजी पत्रकारिता (इनवेस्ट‍िगेट‍िव रिपोर्ट‍िंग) और ब्रांडेड कंटेंट जैसे खास क्षेत्रों में सालाना सैलरी में 8% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह साफ संकेत है कि जो जर्नलिस्ट अपनी स्किल्स को अपग्रेड करेंगे, उनके लिए करियर और कमाई, दोनों के रास्ते खुले हैं। 

BJP की नई टीम पर फोकस, 33% महिला भागीदारी के साथ ड्रीम पूरा करने की तैयारी

  नई दिल्ली पश्चिम बंगाल और असम सहित पांच राज्यों के चुनाव नतीजे के बाद बीजेपी में कई अहम फैसले होंगे. बीजेपी अध्यक्ष की कमान संभाल रहे नितिन नवीन को अपनी टीम का गठन करना हो तो उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक कैबिनेट विस्तार पेंडिग है. बीजेपी संगठन और सरकार के हिसाब से मई का महीना कई बड़े बदलाव लेकर आएगा।  माना जा रहा है कि 4 मई को बाद बीजेपी नवीन टीम के साथ यूपी से बिहार तक कैबिनेट गठन को अमलीजामा पहनाने का काम करेगी. लंबे समय से लटके पड़े कई फ़ैसले मई में लागू होने की संभावना है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में फेरबदल शामिल है।  उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे पहले बीजेपी कैबिनेट विस्तार करके सियासी समीकरण को साधने की कवायद करना चाहती है. बिहार में सीएम और डिप्टीसीएम बनाए जाने के बाद अब कैबिनेट विस्तार होना है, जिसे अब बीजेपी अमलीजामा पहनाना चाहती है? बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने सारी तैयारी कर ली है, जिसे चार मई के बाद किसी भी दिन अमल में लाया जा सकता है?    नवीन टीम में युवा और महिलाओं को तवज्जे?  जेपी नड्डा की जगह नितिन नवीन बीजेपी के अध्यक्ष 2025 के आखिर में बन गए हैं, लेकिन पांच महीने के बाद भी अपनी टीम का गठन नहीं कर सके हैं. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने चार मई के बाद नवीन टीम के गठन का प्लान बनाया है. इस तरह संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव करने का है.  बीजेपीके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में जल्द ही एक नई टीम बनने की संभावना है।  माना जा रहा है कि नितिन नवीन की टीम में अनुभवी और युवा नेताओं का मिश्रण होगा ताकि एक संतुलन टीम बन सके. युवाओं के साथ महिलाओं को भी शामिल करने की रणनीति है. बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 33 फीसदी महिलाओं को शामिल करने की योजना है।  यूपी में योगी कैबिनेट का विस्तार का प्लान उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने भूपेंद्र चौधरी की जगह पर पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष तो बना दिया है, लेकिन अभी तक उनकी टीम नहीं बन सकी है. सूत्रों के अनुसार यूपी में ख़ाली पड़ें पदों को भरने के अलावा कुछ फेरबदल भी हो सकता है. इसमें कुछ मौजूदा मंत्रियों की ज़िम्मेदारी में बदलाव की भी संभावना है.पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी की सरकार में वापसी तय मानी जा रही है।  2027 के चुनावों को ध्यान में रख कर क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को भी साधा जाएगा. बीजेपी नेताओं के अनुसार योगी कैबिनेट में फेरबदल के साथ ही प्रदेश बीजेपी में भी नई टीम का गठन होने की संभावना है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम और योगी कैबिनेट दोनों का निर्णय करते समय आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का ध्यान रखा जाएगा।  बिहार में सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का गठन यूपी कैबिनेट विस्तार के साथ बिहार में सम्राट चौधरी के अगुवाई में बनी एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का गठन होना है. बीजेपी जेडीयू के फार्मूले के अनुसार दोनों के पास सोलह-सोलह मंत्री पद रहने की संभावना है, वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास जो विभाग हैं, वो सभी बीजेपी कोटे से बनने वाले मंत्रियों को दिए जा सकते हैं. ऐसे ही जेडीयू के दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास के विभाग जेडीयू कोटे से बनने मंत्रियों को दिए जाएंगे।  उम्मीद है कि मई का महीना बीजेपी में संगठन और सरकार, दोनों ही स्तरों पर बड़े बदलाव लेकर आएगा. इन बदलावों की मुख्य वजह आगामी चुनाव और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा। 

बंगाल में BJP की सत्ता से होगा भूचाल, बांग्लादेशी MP ने दी शरणार्थियों को लेकर चेतावनी

ढाका  पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से बाहर हो सकती है। हालांकि कुछ पोल में ममता बनर्जी की टीएमसी की जीत का भी अनुमान है। 'पी-मार्क' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं तो टीएमसी को 118-138 सीटें मिलने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' के सर्वे के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस 177 से 187 सीटें हासिल करके अपनी सत्ता बरकार रख सकती है। वहीं भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को एक से तीन सीट मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा 'जनमत पोल्स' के एग्जिट पोल के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस को 195 से 205 सीटें मिल सकती हैं तो वहीं भाजपा को 80 से 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से … Read more

अमेरिका ने इजरायल को भेजे 6500 टन हथियार, ईरान पर संभावित हमले की अटकलें तेज

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरपर्सन ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की योजनाओं पर लगभग 45 मिनट तक ब्रीफिंग दी. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में ईरान पर छोटा लेकिन शक्तिशाली हमलों की योजना बताई गई. इसमें बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों को निशाना बनाने की बात है, ताकि मौजूदा संघर्ष विराम में अटकी बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।  अन्य दो महत्वपूर्ण योजनाएं भी ट्रंप को बताई गईं. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके उसे व्यावसायिक जहाजों के लिए दोबारा खोलना. ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए स्पेशल फोर्सेस का ऑपरेशन.यह ब्रीफिंग उस समय हुई जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर कमजोर स्थिति में है और बातचीत आगे नहीं बढ़ रही है।  इजराइल को अमेरिका से भारी सैन्य सहायता     इसी बीच अमेरिका ने इजराइल को मात्र 24 घंटे में 6,500 टन हथियार और सैन्य उपकरण भेज दिए. इसमें हवाई और जमीनी गोला-बारूद, सैन्य ट्रक, जॉइंट लाइट टैक्टिकल व्हीकल्स (JLTV) और अन्य उपकरण शामिल हैं.दो बड़े कार्गो जहाज और कई विमानों के जरिए यह सामान इजराइल पहुंचाया गया।      जहाज अश्दोद और हाइफा बंदरगाहों पर लंगर डाले. इजराइली रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सामान सैकड़ों ट्रकों से देश भर के सैन्य ठिकानों पर पहुंचाया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ऑपरेशन रोरिंग लायन शुरू होने के बाद से इजराइल को अब तक 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य उपकरण मिल चुके हैं।      इस जखीरे में 403 एयरलिफ्ट और 10 सीलिफ्ट शामिल हैं. इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने कहा कि देश अपने दुश्मनों के खिलाफ हर पल कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि हथियारों की सप्लाई जारी रहेगी और आने वाले हफ्तों में और बढ़ेगी।  अमेरिका का क्या है रुख? ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान पर नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा प्रभावी है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की चिंताओं का समाधान नहीं करता तो दबाव और बढ़ाया जाएगा. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से बातचीत में कहा कि अमेरिका पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर दो बार हमला किया है और आगे भी ऐसा हो सकता है. पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए मतभेद सुलझाने के पक्ष में रहा है, लेकिन अमेरिका की कार्रवाइयों ने विश्वास तोड़ दिया है. दोनों तरफ से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और होर्मुज संकट सुलझने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा।     

आउटसोर्स कर्मचारियों को 26 हजार सैलरी और स्थायी नौकरी का वादा, पर कब होगा लागू?

भोपाल  बीते दिन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के अस्थाई, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगों को लेकर 'महासंग्राम आंदोलन' किया गया। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से मुफ्त में काम कराने की आदत बदलने और न्यूनतम 26,000 रुपये वेतन व नौकरी की सुरक्षा देने की मांग की। न्यूनतम वेतन सिर्फ कागजों पर, हकीकत में शोषण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मजदूरी 12,425 से 16,769 रुपये घोषित है, लेकिन धरातल पर पंचायत चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों और अंशकालीन कर्मियों को 3 से 5 हजार रुपये थमाए जा रहे हैं। 2003 के बाद से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं, जिससे गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लोकल यूथ सर्वेयर महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी ने कहा कि ६ जुलाई को हाईकोर्ट के सामने आंदोलने करेंगे। प्रशासन की सख्ती और पाबंदियों के बीच आंदोलन कर्मचारियों ने पहले भाजपा कार्यालय के घेराव और 'सामूहिक आत्मदाह' का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन की तीन दिनों की खींचतान और पाबंदियों के बाद शर्तों के साथ नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मिली। आंदोलन में डॉ. अमित सिंह, राजभान रावत, उमाशंकर पाठक और विपिन पांडे सहित कई संगठनों के नेता शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का हुआ बुरा हाल प्रदर्शनकारियों तेज गर्मी के चलेत काफी परेशान हुए। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक महिला गर्मी की वजह से बेहोश भी हो गई। इस दौरान महिला पुलिस उन्हें संभालती नजर आई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज करेंगे। पूरे प्रदेश के 1 लाख कर्मचारी भोपाल में डेरा डालेंगे। ये है वेतन का सच (प्रति माह) लोकल यूथ सर्वेयर: 1,000 पंचायत चौकीदार/पंप ऑपरेटर: 3,000 से 4,000 मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता, पेशा मोबिलाइजर: 4,000 स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी: 7,000 से 8,000 (वेतन रुपए में) कौन होते हैं आउटसोर्स कर्मचारी जानकारी के लिए बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें कोई कंपनी या सरकारी विभाग सीधे तौर पर नियुक्त न करके, किसी तीसरी निजी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम पर रखती है। ये कर्मचारी मुख्य संस्थान के कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि एजेंसी के पेरोल पर होते हैं और उन्हें आमतौर पर संविदा या अल्पकालिक (Temporary) आधार पर काम पर रखा जाता है। इनकी नियुक्ति और वेतन का प्रबंधन ठेकेदार या आउटसोर्सिंग कंपनी करती है। ये कर्मचारी स्थायी नहीं होते और उनकी नौकरी अक्सर टेंडर या ठेके की अवधि (जैसे 1-3 साल) तक ही सीमित होती है।

योगी सरकार श्रमिकों के साथ-साथ हर वर्ग के लिए कर रही काम: असीम अरुण

लखनऊ   योगी सरकार ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लाखों आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। यह जानकारी समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने शुक्रवार को 'अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस' के मौके पर दी। उन्होंने लखनऊ में आयोजित श्रमिक संवाद 2026 में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रमिकों के साथ-साथ हर वर्ग के लिए काम कर रहे हैं। यूपी की जीडीपी बढ़ाने में श्रमिकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। जैसे-जैसे आर्थिक विकास होगा, उसी क्रम में सामाजिक विकास भी होगा। असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नए लेबर कोड्स और 'आउटसोर्स सेवा निगम' के गठन के माध्यम से सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए छुट्टियों, काम के घंटों और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनिवार्य बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कर्मचारियों का शोषण संभव नहीं होगा और उनके अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों को 15 दिन के अंदर आईडी कार्ड जारी करने के लिए कहा। इसके साथ बेहतर काम करने वालों को वार्षिक प्रमाणपत्र और इनाम देने की व्यवस्था करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि हमें श्रम कानून लागू करने का संकल्प लेना होगा।  श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य 'अंत्योदय' है। आउटसोर्सिंग कर्मचारी हमारी व्यवस्था की रीढ़ हैं, और उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देना हमारी प्राथमिकता है। आज श्रमिक दिवस पर यह सुधार उन्हीं के पसीने की कीमत और उनके अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। श्रमिकों के बच्चों का रखा ध्यान इस दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड ने कहा कि देश-प्रदेश को अग्रणी बनाने में श्रमिकों का योगदान है। योगी सरकार उन्हें श्रम कार्ड, वेतन वृद्धि जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध करा रही है। 18 जिलों में अटल आवासीय विद्यालय बन चुके हैं, जिनमें हजारों श्रमिकों के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं यूपी सिडको चेयरमैन वाईपी सिंह ने कहा कि योगी सरकार में श्रमिकों का आज ही नहीं, बल्कि हर दिन सम्मान होगा। इस सरकार में उनका भविष्य पहले से बेहतर रहेगा। कार्यक्रम के दौरान श्रमिक और आउटसोर्स कर्मियों ने मंच से अपनी बातें भी साझा कीं। वहीं कार्यक्रम में चार नए श्रम कानूनों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक कल्याण के लिए छुट्टियों के नियमों में व्यापक सुधार किया गया है। भारत सरकार के नए लेबर कोड्स के अनुरूप उत्तर प्रदेश में वेतन ढांचे को बनाया गया है।  'आउटसोर्स सेवा निगम' का प्रभाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए इस निगम के माध्यम से बिचौलियों के शोषण को जड़ से समाप्त किया जा रहा है। न्यूनतम मजदूरी अकुशल श्रमिकों के लिए 11,000 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 13,500 रुपये से शुरू होने वाली नई दरें निर्धारित की गई हैं।

ग्वालियर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अल्पसंख्यक संस्थान तय करेंगे प्राचार्य, सरकार नहीं लगा सकेगी नियम

ग्वालियर  ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगल पीठ ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों को लेकर अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य के चयन का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। राज्य सरकार इन संस्थानों पर वरिष्ठता आधारित नियम लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में प्राचार्य की भूमिका केंद्रीय होती है, जो अनुशासन, प्रशासन और शिक्षा की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। ऐसे में संस्थान को यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह अपनी आवश्यकता और योग्यता के आधार पर नेतृत्व का चयन करे, भले ही वह व्यक्ति वरिष्ठतम न हो। कोर्ट ने 25 अगस्त 2021 और 8 सितंबर 2021 को जारी उन सरकारी सर्कुलरों को अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू होने के मामले में निरस्त कर दिया, जिनमें वरिष्ठतम शिक्षक को ही प्रभारी बनाने का प्रावधान था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार प्रबंधन द्वारा किसी योग्य व्यक्ति का चयन कर लिया जाए, तो उसकी उपयुक्तता पर सरकार या न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेंगे। विदिशा से ग्वालियर तक की कानूनी जंग वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी के मुताबिक, यह मामला विदिशा स्थित एसएसएल जैन पीजी कॉलेज से शुरू हुआ। कॉलेज की तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. शोभा जैन के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रबंधन समिति ने डॉ. एसके उपाध्याय को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। हालांकि, शासन के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने इस फैसले को निरस्त करते हुए वरिष्ठता के आधार पर डॉ. अर्चना जैन को प्रभार सौंपने का आदेश जारी कर दिया। प्रबंधन ने इसे अपनी स्वायत्तता में हस्तक्षेप मानते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी। शुरुआत में सिंगल बेंच ने शासन के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन अब ग्वालियर की युगल पीठ ने उस आदेश को पूरी तरह पलटते हुए प्रबंधन के अधिकार को सही ठहराया।

मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, कहा, प्रदेश में कहीं भी पेयजल की कमी न हो; पाइप्ड योजनाओं के साथ टैंकर आदि वैकल्पिक व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रखी जाएं

लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी और इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और राहत प्रबंधन में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी तथा सभी विभाग परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाकर अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करें। शुक्रवार को कृषि, जलशक्ति, पशुधन, समाज कल्याण एवं उद्यान विभाग के मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पूर्व में सूखा प्रभावित रहे 18 जनपदों में विशेष निगरानी रखने, 15 जून से 30 जुलाई के बीच निर्धारित मानकों के अनुसार स्थिति का समयबद्ध आकलन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ से सहायता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शासन से लेकर जनपद स्तर तक कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश दिए और कहा कि आवश्यक जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और डीजीपी को उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग करने और जल संरक्षण को गति देने के लिए 30 मई तक नहरों, तालाबों एवं पोखरों की डी-सिल्टिंग पूर्ण कराने को कहा। साथ ही तालाबों से निकली मिट्टी प्रजापति समाज एवं पारंपरिक कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क उपलब्ध कराने तथा इस संबंध में जिलाधिकारियों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि राहत कार्यों के साथ आजीविका के अवसर भी सृजित हो सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में कहीं भी पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। पाइप्ड पेयजल योजनाओं के साथ वैकल्पिक व्यवस्थाएं, जैसे टैंकर आदि, पूरी तरह तैयार रखी जाएं। वन विभाग को अभ्यारण्यों एवं पक्षी विहारों में वन्यजीवों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में जल, चारा एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सभी नलकूपों को क्रियाशील रखने, समय से मरम्मत सुनिश्चित करने तथा सिंचाई हेतु निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने जल के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में जल की कमी न हो और दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। फसल सुरक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने अनुदानित बीज वितरण तथा कृषि परामर्श के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए उन्होंने नुकसान की स्थिति में समयबद्ध आकलन एवं क्लेम निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। खाद्यान्न सुरक्षा के संबंध में उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र लाभार्थियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने, पर्याप्त भंडारण बनाए रखने तथा आवश्यकतानुसार केंद्र सरकार से अतिरिक्त आवंटन प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही जमाखोरी एवं कालाबाजारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने हीट स्ट्रोक, लू एवं गर्मी जनित बीमारियों से निपटने के लिए अस्पतालों में समुचित व्यवस्थाएं सुदृढ़ रखने तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही, पशुधन की सुरक्षा हेतु निराश्रित गो-आश्रय स्थलों में पेयजल उपलब्ध कराने और पशु चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने पर भी उन्होंने बल दिया। अर्ली वेदर वार्निंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाते हुए मौसम संबंधी सूचनाएं समय पर आमजन एवं किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। साथ ही 19 हजार से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्रों, होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की सेवाएं आवश्यकता अनुसार लेने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हाल के आंधी-तूफान में हुई जनहानि पर दुःख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए। कृषि तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद की उपलब्धता की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए, साथ ही सहकारिता विभाग को भी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। खाद वितरण में पारदर्शिता हेतु फॉर्मर रजिस्ट्री व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे लागत में कमी के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता एवं जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। खरीफ फसल वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने नहर प्रणालियों के प्रभावी संचालन, टेल फीडिंग के माध्यम से अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने तथा जल संसाधनों के समुचित उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि नहरों का संचालन केवल हेड रीच तक सीमित न रहे, बल्कि टेल एंड तक समान रूप से पानी पहुंचे। इसके लिए फील्ड स्तर पर कड़ी निगरानी, जवाबदेही निर्धारण एवं नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए। जल की सीमित उपलब्धता की स्थिति में वैज्ञानिक एवं संतुलित प्रबंधन अपनाते हुए हेड रीच पर अनावश्यक खपत को नियंत्रित कर टेल क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। बैठक में जानकारी दी गई कि खरीफ 1434 फसली वर्ष में 11,375 टेलों के सापेक्ष 10,487 टेलों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तालाबों को भरने के अभियान में 24,153 लक्षित तालाबों में से 17,961 से अधिक को भरा जा चुका है, जो 70 प्रतिशत से अधिक प्रगति को दर्शाता है। जलाशयों में जल की उपलब्धता भी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। मुख्यमंत्री ने नहरों की सिल्ट सफाई एवं रखरखाव कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि सिंचाई तंत्र की दक्षता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना है और इसके लिए टेल फीडिंग अभियान को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ लागू किया जाए, ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में किसानों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

गंगा एक्सप्रेसवे के टोल रेट में लगातार बदलाव, 3 दिन में तीसरी बार हुआ संशोधन, नई दर जानें

 प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाला प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे आखिरकार शुरू हो चुका है. अब मेरठ से प्रयागराज सिर्फ 5-6 घंटे में पहुंचा जा सकता है. मगर, बताया जा रहा था कि इस एक्सप्रेसवे पर जितनी सुविधा मिल रही, उतना ही मोटा टोल टैक्स भी देना पड़ेगा. हालांकि, अब यात्री को उलझन में डालने वाली खबर सामने आ रही है. उद्घाटन से पहले और बाद में टोल दरों को लेकर यूपीडा उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में भारी उलझन रही. सिर्फ 3 दिन में तीन बार टोल दरें बदल दी गईं. हर कोई जानना चाहता है कि अब कितना टोल रेट देना पड़ेगा. आइए जानते हैं… 15 दिन तक फ्री सफर, पर क्यूं? गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को हरदोई में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था. अब यह एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए शुरू हो गया है और इसपर गाड़ियां फर्राटे भरने लगी हैं. फिलहाल किसी को कोई टोल नहीं चुकाना पड़ेगा. इसका कारण है मजदूर दिवस पर योगी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर आप 15 दिन तक फ्री में सफर कर सकते हैं, यानी आपको कोई टोल नहीं देना पड़ेगा।  क्या है खासियत? करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ को सीधे प्रयागराज से जोड़ेगा. साल 2021 में दिसंबर महीने में इस एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया गया था. 5 वर्षों की मेहनत के बाद आज इस पर वाहन दौड़ने के लिए तैयार है. पहले जहां 10 से 12 घंटे का समय पहुंचने में लगता था अब वह घटकर 5 से 6 घंटे हो गया है. 120 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से अब आप इस पर सफर कर सकेंगे. गंगा एक्सप्रेस-वे 6 लेन का है. मेरठ से प्रयागराज जाने तक कुल 12 जिले पड़ेंगे।  इतना किया था टोल दर तय इसकी पहले टोल दरें 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर के आधार पर तय की गई थीं. पूरे एक्सप्रेसवे पर कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहनों (LMV) के लिए कुल टोल 1,514 रुपये तय हुआ था. यह दरें दिसंबर 2025 के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर तय की गई थीं. मगर, उद्घाटन से ठीक पहले 29 अप्रैल को यूपीडा ने नई दरें जारी कीं. हल्के वाहनों के लिए एक तरफ का टोल बढ़ाकर 1,800 रुपये कर दिया गया. दोपहिया, तीनपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर चालकों को 905 रुपये चुकाने पड़ते. तब यूपीडा (UPEIDA) ने स्पष्ट किया था कि ये दरें एक्सप्रेसवे के पहले टोल प्लाजा से आखिरी टोल प्लाजा तक की पूरी एकल यात्रा पर लागू होंगी।  अब हुआ ये यह दरें यहां ही तय नहीं हुईं बल्कि एक बार फिर बुधवार को 1,800 रुपये तय होने के बाद गुरुवार 30 अप्रैल को फिर संशोधन कर दिया गया. अब कार जैसे हल्के वाहनों के लिए टोल 1,765 रुपये कर दिया गया. इसमें से 1,365 रुपये अडानी एंटरप्राइजेज और 440 रुपये आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेंगे. एक्सप्रेसवे अभी प्रायोगिक दौर ट्रायल रन में चल रहा है. इसलिए उद्घाटन के बाद बुधवार रात 12 बजे से जनता के लिए खुलने के बावजूद किसी भी वाहन से टोल नहीं लिया जा रहा है।  यूपीडा अधिकारियों का कहना है कि टोल दरों में मामूली बदलाव WPI और अन्य तकनीकी गणनाओं के आधार पर किया गया है. अंतिम दरें जल्द ही स्थिर हो जाएंगी और टोल वसूली शुरू हो जाएगी. 24 घंटे के अंदर वापसी पर 20% डिस्काउंट की सुविधा भी यात्रियों को राहत देगी. फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे का फ्री में मजा उठा सकते हैं।