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भारत का नया एयरक्राफ्ट कवच, अमेरिका को भी देगा पसीना, कीमत में 60% की भारी बचत

बेंगलुरु  रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत ने बड़ी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है. भारतीय वैज्ञानिकों ने एयरक्राफ्ट्स के लैंडिंग गियर के लिए एक ऐसा हल्का और अत्यधिक मजबूत नैनोकॉम्पोजिट तैयार किया है, जो अमेरिका जैसे दुनिया के ताकतवर देशों के माथे पर पसीना ला सकता है. यह नया मटेरियल न केवल एयरक्राफ्ट्स को लैंडिंग के समय अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा. साथ ही, इसकी कॉस्‍ट मौजूदा विकल्‍पों के मुकाबले 60 प्रतिशत से भी कम है।  दरअसल, किसी भी एयरक्राफ्ट का लैंडिंग गियर बेहद पार्ट होता है. एयरक्राफ्ट को जब आसमान से जमीन पर उतरना होता है, तो लैंडिंग गियर को भारी दबाव और घिसाव का सामना करना पड़ता है. रनवे पर उतरते समय एयरक्राफ्ट का सारा वजन इन्हीं पहियों और गियर पर पड़ता है. मौजूदा समय में लैंडिंग गियर बनाने के लिए अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील, टाइटेनियम और एल्युमिनियम का इस्‍तेमाल किया जाता है।  हालांकि एल्युमिनियम वजन में हल्का होता है, लेकिन अधिक दबाव पड़ने पर इसका टिकना मुश्किल हो जाता है. वहीं, दूसरी ओर स्टील और टाइटेनियम भारी होने के साथ-साथ काफी महंगे भी होते हैं. इससे एयरक्राफ्ट का कुल वजन तो बढ़ता ही है, साथ ही फ्यूल की खपत भी ज्‍यादा होती है।  एनआईटी राउरकेला की पहल से चौंकी दुनिया     इस समस्या का हल निकालने के लिए एनआईटी राउरकेला के मेटलर्जिकल और मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का नया मैटेरियल तैयार किया है।      इसे हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट कहा जाता है. यह नैनोकॉम्पोजिट इंसान के बाल से करीब 1 लाख गुना ज्यादा पतला होता है. इसके बावजूद यह बहुत मजबूत है और आसानी से घिसता नहीं है।      इस खास सामग्री का वजन भी बहुत कम है, इसलिए इसे फाइटर प्लेन और ड्रोन (यूएवी) जैसे एयरक्राफ्ट्स के साथ-साथ सिविल एविएशन के एयरक्राफ्ट्स में इस्तेमाल करने के लिए बेहद अच्छा माना जा रहा है।      हल्का होने के कारण यह एयरक्राफ्ट की परफॉर्मेंस को नकेवल बेहतर करेगा, बल्कि फ्लूल की खपत भी कम होगी. इस नैनोकॉम्पोजिट को बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया।      इसमें कार्बन नैनोट्यूब्स का उपयोग किया गया, जिससे यह ज्यादा दबाव सहने और वजन को बराबर बांटने में सक्षम है. इसके साथ ही ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स मिलाए गए, जिससे इसकी मजबूती और बढ़ जाती है।  हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट को ज्यादा टैंपरेचर में स्थिर रखने के लिए क्या किया गया? हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट को ज्यादा टैंपरेचर में भी स्थिर बनाए रखने के लिए हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का इस्तेमाल किया गया है. यह एक खास तरह का मैटेरियल है, जो गर्मी को सहने की क्षमता बढ़ाता है और मैटेरियल को खराब होने से बचाता है. इसके कारण यह नैनोकॉम्पोजिट हाई टैंपरेचर में भी मजबूत बना रहता है. यही वजह है कि इसे एयरोस्पेस जैसे सेक्‍टर में उपयोग के लिए सबसे बेहतर माना जा रहा है।  इस नैनोकॉम्पोजिट के सभी कंपोनेंट्स को एक समान कैसे मिलाया गया? इस नैनोकॉम्पोजिट के सभी कंपोनेंट्स को एल्युमिनियम के साथ अच्छी तरह मिलाने के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स यानी तेज ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया गया. इन वेव्‍स की मदद से सभी छोटे-छोटे कंपोनेंट पूरे मिक्‍सचर में बराबर फैल जाते हैं. इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि मैटेरियल के हर हिस्से में एक जैसी मजबूती बनी रहें।  इस मैटेरियल को मजबूत बनाने के लिए आगे कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई? सभी कंपोनेंट्स को मिलाने के बाद इस मिक्‍सचर को बिना ऑक्सीजन वाले इंवायमेंट में रखा गया. फिर इसे ज्यादा टैंपरेचर और प्रेशर पर गर्म करके दबाया गया. इस प्रक्रिया से कंपोनेंट आपस में मजबूती से जुड़ गए और एक मजबूत मैटेरियल तैयार हुआ. ऑक्सीजन न होने से मैटेरियल में किसी तरह का ऑक्सीनाइजेशन नहीं हुआ, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रही।  इस शोध को किन वैज्ञानिकों ने पूरा किया और इसका नेतृत्व किसने किया? इस रसिर्च का नेतृत्व प्रोफेसर सैयद नसीमुल आलम ने किया. उनके साथ डॉ. अर्का घोष, डॉ. आशुतोष दास, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, नित्यानंद साहू और पार्थ पटेल जैसे कई शोधकर्ता शामिल थे. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के एक वैज्ञानिक ने भी इस प्रोजेक्ट में अपना योगदान दिया. यह एक ऐसा टीम वर्क है, जिसमें अलग-अलग विशेषज्ञों ने मिलकर इस बेहतरीन तकनीक को तैयार किया है।  इस नए मैटेरियल की खासियतें क्या हैं और यह कैसे घिसाव को कम करता है? प्रोफेसर आलम के अनुसार, यह नया मैटेरियल घिसाव को काफी हद तक कम करता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी सतह पर एक पतली सुरक्षात्मक परत बन जाती है, जो इसे जल्दी खराब होने से बचाती है. इसके अलावा इसका अंदरूनी ढांचा बहुत मजबूत होता है, जिससे यह भार को सही तरीके से संभाल सकता है. यही गुण इसे लंबे समय तक टिकाऊ और भरोसेमंद बनाते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां लगातार घर्षण होता है। 

हाईकोर्ट ने खारिज किया केस: सगी बहनें पतियों का आदान-प्रदान करना चाहती थीं, बड़ी बहन को हुआ छोटी के पति से प्यार

ग्वालियर एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर सभी लोग हैरान हैं। ये मामला दो बहनों का है, जो आपस में अपनी पतियां बदलना चाहती हैं। बड़ी बहन को छोटी बहन के पति से प्यार हो गया है। वहीं, छोटी का दिल भी अपने जीजा पर आ गया है। इसके बाद यह मामला पूरी तरह से उलझ गया है। दतिया निवासी ने लगाई थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दरअसल, दतिया के रहने वाले गिरिजा शंकर ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मायाराम नाम के व्यक्ति ने मेरी पत्नी और बेटी को बंधक बना रखा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि महिला को कोर्ट में पेश किया जाए। महिला की एंट्री से केस में ट्विस्ट वहीं, एमपी हाईकोर्ट के निर्देश पर महिला कोर्ट में पेश हुई है। इसके बाद पूरे मामले में ट्विस्ट आ गया। महिला ने कोर्टरूम में कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है। मैं अपनी मर्जी से मायाराम के साथ गई हूं। मायाराम महिला की छोटी बहन का पति है। साथ ही महिला ने कहा कि हमने अपने पति से तलाक के लिए याचिका लगा रखी है। छोटी बहन ने नहीं जताई आपत्ति यह मामला सुनवाई के दौरान तब और दिलचस्प हो गया, जब मायाराम की पत्नी और उस महिला की छोटी बहन ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उसने कह दिया कि हमारी बड़ी बहन हमारे पति के साथ रहना चाहती है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुझे भी अपने जीजा के साथ रहने की अनुमति दें। अपने-अपने पतियों के साथ नहीं रहना चाहती हैं महिलाएं     ग्वालियर हाईकोर्ट में हैरान करने वाला मामला सामने आया     दो सगी बहनें आपस में बदलना चाहती हैं पति     दोनों को एक-दूसरे के पति से हो गया है प्यार     हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं हैं दोनों बताया जा रहा है कि दोनों बहनें अपनी शादीशुदा जिंदगी से संतुष्ट नहीं हैं। दोनों सहमति और मर्जी से एक-दूसरे के पति के साथ वैवाहिक जीवन शुरू करना चाहती हैं। वहीं, दोनों बहनों के बच्चे भी हैं लेकिन बच्चे को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज वहीं, दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कह दिया है कि यह अपहरण का मामला नहीं है। यह पूरी तरह से पारिवारिक विवाद का मामला है। दोनों महिलाएं बालिग हैं, अपनी मर्जी से फैसला ले रही हैं।

‘नमो यमुना’ क्रूज इस महीने से दिल्ली में, 5 KM का सफर और किराया होगा कितना?

नई दिल्ली दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार एक नई सेवा की शुरुआत करने जा रही है। नमो भारत के बाद अब राजधानी में लोग 'नमो यमुना' में भी सफर कर पाएंगे। इसी महीने (मई) के अंत से तक यमुना नदी में नमो यमुना क्रूज की शुरुआत करने की तैयारी है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यमुना में क्रूज की शुरुआत 20 फरवरी को ही होनी थी, जब दिल्ली में भाजपा सरकार को एक साल पूरे हुए थे। लेकिन कुछ काम पूरे नहीं होने की वजह से लॉन्च को टाल दिया गया था। सरकार अब इसे जल्द ही शुरू करना चाहती है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसका उद्घाटन कर सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'बोट अब तैयार है और पेंटिंग का काम पूरा हो चुका है। सफेद और नीले रंग के बोट पर 'नमो भारत' लिखा है और इसे अभी सोनिया विहार स्पोर्ट्स क्लब में रखा गया है। बोट को एक सफेद कपड़े से ढंका गया है।' 5 किलोमीटर का सफर दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने  एचटी को बताया कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर एक महीने के भीतर उद्घाटन पर फैसला लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सोनिया विहार और जगतपुरी के बीच एक घंटे की बोट राइड का संचालन किया जाएगा। यमुना में 5 किलोमीटर का यह सफर होगा। क्रूज के जरिए लोग घाटों और प्राकृतिक सुंदरता को निहार सकेंगे। कितना होगा किराया इस क्रूज में सफर के लिए प्रति व्यक्ति करीब 500 रुपये का टिकट लगेगा। दोनों 'स्टेशनों' पर टिकट काउंटर और वेटिंग एरिया विकसित किया गया है। सरकार वाटर स्पोर्ट्स पर भी विचार कर रही है। सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक इसका संचालन किया जा सकता है। गर्मी और इस मौसम में पानी की कमी लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि बोट एयर कंडिशंड है। उन्होंने कहा, 'नदी सूखेगी नहीं।'उन्होंने कहा कि वजीराबाद में सालभर पानी का अच्छा स्तर रहता है, इसलिए इस जगह का चुनाव किया गया है। मुंबई की इंस्पिरेशन मरीन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बनाया गया आइलैंड बोट्स 40 (IB-40) एक 40 फीट का नदी क्रूज बोट है। यमुना की सफाई, रिवर फ्रंट भाजपा सरकार का बड़ा एजेंडा दिल्ली में लंबे समय बाद सत्ता में आई भाजपा ने चुनाव से पहले यमुना को लेकर कई बड़े वादे किए थे। यमुना की सफाई और रिवर फ्रंट बनाने का वादा किया गया है। दोनों ही मोर्चे पर सरकार काम शुरू कर चुकी है। यमुना की सफाई और रिवर फ्रंट तैयार होने के बाद यमुना में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाए जाने की योजना है।

भोपाल में जीएसटी नियमों में बदलाव: मालवाहक वाहन को अब सिर्फ नंबर या नाम पर नहीं रोका जाएगा, जानकारी देना जरूरी

भोपाल मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा।मध्यप्रदेश में जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है। अब ऑडिट के दौरान अधिकारी बार-बार डॉक्यूमेंट नहीं मांगेंगे। एक बार में ही पूरी सूची देंगे। इसके अलावा व्यापारियों को जवाब देने के लिए 29 दिन का समय मिलेगा। जानकारी न देने पर लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के मुताबिक अधिकारी व्यापारियों को पहले 15 दिन का समय देंगे। इसके बाद सात-सात दिन के दो रिमाइंडर भेजे जाएंगे। तय समय में जानकारी नहीं दी गई तो राज्य और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत 10-10 हजार रुपए, यानी कुल 20 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि समय पर जानकारी न मिलने से राजस्व संग्रह और ऑडिट प्रक्रिया पर असर पड़ता है। गलत जानकारी पर लाइसेंस रद्द 01 मई 2026 से विभाग उन व्यापारियों की जांच शुरू करेगा जो लंबे समय से एक जैसा टर्नओवर दिखा रहे हैं। एक करोड़ 25 लाख से एक करोड़ 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले माल व्यापारी और 35 से 50 लाख रुपए के सर्विस प्रोवाइडर खास ध्यान में रहेंगे। गलत जानकारी मिली तो उनका कम्पोजीशन लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई की जाएगी। इनफार्मर पर भी सख्ती नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। व्यापारियों को दी सलाह कर सलाहकार पलाश खुरपिया का कहना है कि इस सर्कुलर से ऑडिट प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी है कि वे तय समय में जानकारी दें।

आधार लिंकिंग से हुआ बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ में स्कूलों में फर्जी नामांकन पकड़ा, 10 लाख छात्रों की संख्या में कमी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में यू डाइस सिस्टम (स्कूली शिक्षा प्रबंधन सूचना प्रणाली) में नाम और आधार एंट्री अनिवार्य होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या लगभग 10 लाख घट गई है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से 10वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के आधार लिक करने से फर्जी नामांकन उजागर हुए हैं। डिजिटल सत्यापन के बाद इनकी वास्तविक संख्या सामने आई है । वर्ष 2024 में जहां 53.69 लाख विद्यार्थियों को किताबें बांटी गई थीं, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर 43 लाख रह गई है। इससे अब लगभग 50 लाख किताबें कम छापनी होंगी। वर्षों तक स्थिर रहे आंकड़ों में अचानक आई इस कमी ने नि:शुल्क किताब वितरण और शिक्षा विभाग के खर्च पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ इसे घोस्ट स्टूडेंट्स और फर्जी नामांकन पर नकेल का परिणाम मान रहे हैं।

4 मई तक मध्य प्रदेश में खराब रहेगा मौसम, बाहर जाने से पहले जानें यह चेतावनी

भोपाल   भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है.  प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. जिससे कई शहरों के अधिकतम तापमान में 2 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई. इससे जहां एक ओर लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं और बेमौसम बरसात ने कई जिलों में जनजीवन को भी प्रभावित किया. जबलपुर में तेज आंधी के बीच बरगी डैम में क्रूज पलटने से कई लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है।  आंधी-बारिश का डबल अटैक राजधानी भोपाल में दोपहर बाद मौसम ने करवट बदली और करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई. सड़कों पर पानी भर गया. वहीं टीकमगढ़ में आंधी-तूफान का असर इतना तेज रहा कि कंट्रोल रूम का टावर गिर गया. गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई. यहां 15 से 20 मिनट तक जमकर ओलावृष्टि भी हुई, जिससे खेत और फसलें प्रभावित हुईं. श्योपुर में तेज आंधी के चलते एक होटल का शेड उड़ गया, जिससे करीब 15 लोग घायल हो गए।  इसके अलावा रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, सागर, रायसेन, बालाघाट, दमोह और ग्वालियर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश दर्ज की गई. कई जगह तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे तक उखड़ गए, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. जबलपुर में भी तेज हवाओं के चलते क्रूज शिप डूबने से बड़ा हादसा हो गया।  तापमान में गिरावट, कई जिलों में मिली राहत मौसम में आए इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर तापमान पर देखने को मिला.  सीधी में अधिकतम तापमान गिरकर 31.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिससे दिन-रात के तापमान का अंतर घटकर महज 6.5 डिग्री रह गया. वहीं रीवा में 33.2 डिग्री, पचमढ़ी में 33.4 और सतना में 33.5 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया. हालांकि, प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है. खरगोन में पारा 42.6 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि रायसेन, बैतूल और गुना में भी 41 डिग्री के आसपास तापमान दर्ज किया गया. इंदौर और उज्जैन में पारा करीब 40 डिग्री रहा, जबकि जबलपुर में 38.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।  मौसम के पीछे ये सिस्टम कर रहे काम मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, '' मौसम में इस बदलाव के पीछे कई सक्रिय सिस्टम जिम्मेदार हैं. कश्मीर के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने वातावरण में हलचल बढ़ाई है. इसके साथ ही उत्तर पंजाब और दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा तक फैली हुई है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर प्रदेश में ला रही है. इसी वजह से प्रदेश में अचानक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि जैसी स्थितियां बन रही हैं।  किसानों की बढ़ी चिंता, फसल पर बढ़ा खतरा प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर शुरू होने से भले ही आम लोगों को राहत मिली है, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बता दें कि कई जिलों में मंडियों और उपार्जन केंद्रों पर गेहूं की फसल खुले में रखी हुई है. अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसल के भीगने और खराब होने का खतरा मंडरा रहा है. यदि मौसम ऐसा ही बना रहा, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।  मध्यप्रदेश में 4 मई तक आंधी और बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार  ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना समेत सागर और शहडोल संभाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. जबकि कुछ जिलों में हल्की बारिश और बौछारो की चेतावनी दी गई है. वहीं 2 से 4 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना जताई गई है।  इसके साथ ही शिवपुरी, ग्वालियर, रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग में भी मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है. इस दौरान लोगों को मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें. किसानों को अपनी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और ढंककर रखने की सलाह दी गई है। 

अब बिना रुके कटेगा टोल, बैरियर-फ्री सिस्टम लागू; 100 KM की रफ्तार पर सफर आसान

नई दिल्ली देश में हाईवे यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच NH-48 सेक्शन पर स्थित चोरयासी (चोर्यासी) टोल प्लाजा पर देश के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत की. ये पहल भारत के टोलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगी।  इस नई तकनीक के तहत अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुकने या धीमा करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. वाहन हाईवे की सामान्य गति (100 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक) से गुजरते हुए ही टोल का भुगतान कर सकेंगे. सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों, हाई-स्पीड RFID रीडर्स और अपडेटेड FASTag तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. ओवरहेड गैंट्री पर लगे कैमरे वाहन के नंबर प्लेट को कैप्चर करते हैं, FASTag से जुड़ी जानकारी पढ़ते हैं और बैकएंड सिस्टम से ऑटोमैटिक टोल की कटौती हो जाती है।  प्लाज़ा पर समय बचेगा सरकार का मानना है कि इस सिस्टम से यात्रा का समय कम होगा, हाईवे पर लगने वाला जाम घटेगा और ईंधन की बचत भी होगी. इसके साथ ही गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा और टोल प्रक्रिया में मानवीय दखल भी घटेगा. पारंपरिक टोल प्लाजा में गाड़ियां रुकने के कारण इंजन चलता रहता है, जिससे अनावश्यक ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।  गडकरी ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये कदम आम लोगों के लिए Ease of Living को बेहतर बनाएगा और व्यापार के लिए Ease of Doing Business को भी बढ़ावा देगा. इससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी गति मिलेगी. उन्होंने ये भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश में वर्ल्ड-क्लास और टेक्नोलॉजी आधारित नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही है।  ये नई पहल भारत के टोलिंग सिस्टम को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में हाईवे यात्रा और भी ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक कई और प्रमुख टोल प्लाजाओं को बैरियर-फ्री बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए. इससे न केवल यात्री सुविधा बढ़ेगी बल्कि भारत विश्व स्तर पर आधुनिक हाईवे मैनेजमेंट का एक बेहतरीन उदाहरण भी बनेगा। 

लाड़ली बहनों को मिलेगा बड़ा तोहफा! 36वीं किस्त जारी होगी इस दिन, जानें राशि

भोपाल  मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना का लाभ उठा रही महिलाओं के लिए अहम खबर सामने आई है। योजना की 36वीं किस्त को लेकर प्रदेश की लाखों महिलाओं का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। जानकारी के अनुसार, लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करने की संभावना है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। वहीं, किस्त जारी होने पर प्रदेश की 1.25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खाते में सीधे 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरु की गई थी। सीएम मोहन यादव अब तक इस योजना के तहत करोड़ों हितग्राहियों के खातों में 54 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ट्रांसफर कर चुके हैं। समय के साथ-साथ बढ़ती मंहगाई को देखते हुए योजना राशि में वृद्धि की गई। ताकि, महिलाओं को घर खर्च आदि में राहत मिल सके। वर्ष 2025 में लाडली बहना योजना की राशि 1250 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति माह कर दी गई है। इस योजना से प्रदेश की 1.25 लाख महिलाएं लाभ ले रही हैं। यह योजना महिलाओं के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। महिलाएं घर खर्च के साथ-साथ छोटी बचत और रोजगार के अवसर भी तलाश पा रही हैं। इस योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी महिलाओं को मिलता है। जिसमें विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा महिलाएं शामिल है। 21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाओं को ही ये लाभ मिलता है। इसके अलावा महिला का खुद का बैंक खाता होना जरूरी है। बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी अनिवार्य है। वहीं, समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई होना चाहिए।

क्या 8वां वित्त आयोग बढ़ाएगा शिक्षकों की सैलरी 1.34 लाख तक? जानें सच

नई दिल्ली  8वें वित्त आयोग की एक महत्वपूर्ण मीटिंग 28 से 30 अप्रैल के बीच दिल्ली में हुई। इस मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने वित्त आयोग के सामने कई बड़े मुद्दे उठाए। जिस पर अब पे कमीशन को फैसला करना है। अगर वित्त आयोग कर्मचारी संगठनों की बात मांग लेता है कि सरकारी शिक्षकों की शुरुआती सैलरी 1.34 लाख रुपये हो जाएगी। 8th Pay Commission: टीचर्स की सैलरी 134500 रुपये? दिल्ली में हुई मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने शिक्षकों की सैलरी (लेवल 6) की बढ़ाकर 134500 रुपये करने की मांग की है। अगर यह डिमांड मान ली जाती है तब की स्थिति में शिक्षकों की सैलरी में तेज उछाल देखने को मिलेगा। इसी मीटिंग में फिटमेंट फैक्टर को 2.62 से 3.83 करने की मांग की गई है। जोकि मौजूदा समय के फिटमेंट फैक्टर 2.57 से अधिक है। वहीं, इसके अलावा सालाना 6 से 7 प्रतिशत सैलरी इंक्रीमेंट की भी मांग संगठनों ने वित्त आयोग के सामने रखा है। 50% डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA demands) पे कमीशन से डीए को लेकर भी डिमांड की गई है। संगठनों ने कहा कि भत्ता 50 प्रतिशत होने पर इसे बेसिक पे के साथ मिला दिया जाए। ऐसा होने पर कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय अच्छा लाभ मिल सकता है। HRA को 36% करने की मांग (8th Pay Commission HRA demands) टीचर्स से जुड़े संगठनों ने HRA को 12 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट भत्ता को बेसिक पे का 12 से 15 प्रतिशत करने की डिमांड की गई है। रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जाए (8th Pay Commission pension demands) शिक्षक संगठनों ने रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर 65 वर्ष करने की डिमांड की है। वहीं, ग्रेजुएटी लिमिट को भी 50 लाख रुपये करने की मांग हुई है। इन सबके अलावा संगठन ने एनपीएस और यूपीएस की जगह ओल्ड पेंशन स्कीम लाने की मांग की है। इंटरनेट के लिए मिले 2000 रुपये हर महीने (8th Pay Commission internet demands) डिजिटल अलाउंस के लिए शिक्षक संगठन ने हर महीने 2000 रुपये की मांग रखी है। छुट्टियों को भी बढ़ाने की मांग कर्मचारी संगठनों ने की है। बता दें, 8वें पे कमीशन का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय है। इस दौरान वित्त आयोग सभी से बात करेगा और सुझाव मांगेगा। यही वजह है कि बीते दिनों वित्त आयोग की एक बैठक दिल्ली में हुई है।

छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय गोल्फ टूर्नामेंट की शुरुआत, दुनियाभर के खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

रायपुर  छत्तीसगढ़ को वैश्विक गोल्फ मानचित्र पर स्थापित करने के लिए जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट का आयोजन करने की तैयारी चल रही है। यह आयोजन नवा रायपुर में किया जाएगा। इसके लिए  वल्र्ड प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (पीजीटीआई) के सीईओ अमन दीप जोहल ने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुबोध कुमार ङ्क्षसह से मुलाकात की और आयोजन के लेकर विस्तृत चर्चा की। इसके अलावा बैठक में नवा रायपुर में अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स विकसित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अंकित आनंद और छत्तीसगढ़ सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य सचिव रजत कुमार भी मौजूद थे। गोल्फ इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर छत्तीसगढ़ में गोल्फ इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास करने पर जोर दिया गया। अमन दीप जोहल ने अधिकारियों को प्रोपीजीटीआई कैलेंडर के विस्तार और गोल्फ से पर्यटनए आतिथ्य और रोजगार के क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले अवसरों की जानकारी दी। राज्य को गोल्फ और इससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने, स्पोट््र्स टूरिज्म को बढ़ावा देने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। राज्य में नए गोल्फ कोर्स अधोसंरचना के विकास से रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलेगा। एसईसीएल छत्तीसगढ़ ओपन का सफल आयोजन नवा रायपुर के भारतीय पेशेवर गोल्फ सर्किट पर एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में उभरने को रेखांकित करता है, और यह खेल के अपने पारंपरिक केंद्रों से आगे बढ़ते प्रसार को भी दर्शाता है। बैठक में राज्य में नए गोल्फ कोर्स और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई, जिससे खेल पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं, आतिथ्य और संबंधित क्षेत्रों को समर्थन मिल सकता है, और छत्तीसगढ़ को पेशेवर गोल्फ के लिए भविष्य के गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है। एसईसीएल छत्तीसगढ़ ओपन का सफल आयोजन नवा रायपुर के भारतीय पेशेवर गोल्फ सर्किट पर एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में उभरने को रेखांकित करता है, और यह खेल के अपने पारंपरिक केंद्रों से आगे बढ़ते प्रसार को भी दर्शाता है। नवा रायपुर में ओपन गोल्फ चैंपियनशिप  रायपुर के फेयरवे गोल्फ एंड लैक रिज़ॉर्ट में छत्तीसगढ़ ओपन गोल्फ चैंपियनशिप के दूसरे एडिशन का आयोजन रायपुर में होने जा रहा है, जिसमें देश विदेश के 126 खिलाड़ी शामिल होंगे। यह टूर्नामेंट PGTI का 2026 सीजन का पहला टूर्नामेंट होगा, जो 3 से 6 फरवरी तक नया रायपुर के शानदार फेयरवे गोल्फ एंड लेक रिजॉर्ट में खेला जाएगा।इस इवेंट के लिए प्राइज मनी जो पिछले साल पहले एडिशन में 1 करोड़ रुपये थी, इस साल दूसरे एडिशन के लिए बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है। नवा रायपुर मेें वैश्विक गोल्फ टूर्नामेंट नवा रायपुर में आने वाले दिनों में गोल्फ का वैश्विक स्तर का टूर्नामेंट आयोजित किया जाएगा। इसके लिए यहां विश्वस्तरीय अधोसंरचना विकसित की जाएगी। गुरुवार को प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (पीजीटीआई) के अध्यक्ष व पद्म भूषण कपिल देव ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ चर्चा की और नवा रायपुर में विश्वस्तरीय गोल्फ सुविधाओं के विकास पर जोर दिया। कविल देव ने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ में गोल्फ को आगे बढ़ाने के लिए एक अहम साझेदारी के तहत नवा रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की गोल्फ सुविधाएं विकसित करने का अनुरोध किया, जिससे आने वाले समय में यहां वैश्विक स्तर के टूर्नामेंट आयोजित किए जा सके। बैठक में नवा रायपुर में अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप स्तर का गोल्फ कोर्स विकसित करने के प्रस्ताव पर विशेष रूप से विचार किया गया।