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किसके पास कितने वोट? राज्यसभा चुनाव में गणित बिगड़ा तो बदल सकता है पूरा समीकरण

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 सीटों के चुनाव में संख्याबल के बावजूद विपक्षी दलों में अपने उम्मीदवार की जीत का भरोसा पैदा नहीं हो पा रहा है। पिछले कई मौकों पर बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग ने भाजपा विरोधी खेमे को कई बड़े झटके दिए हैं। इस बार भी मध्य प्रदेश, झारखंड एवं कर्नाटक में काग्रेस और उसके सहयोदी दलों को क्रॉस वोटिंग की चिंता सता रही है। झारखंड की 2 सीटों पर चुनाव झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो और उसकी सहयोगी कांग्रेस के पास खाली हो रही दोनों सीट जीतने के लिए पर्याप्त नंबर हैं, लेकिन भाजपा के द्वारा चुनाव लड़ने की तैयारी से समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के चुनाव में एक सीट की जीत के लिए 28 वोट चाहिए। झामुमो के नेतृत्व वाली INDIA गठबंधन की सरकार के पास 56 विधायक हैं। यानी दोनों सीटें जीती जा सकती हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं। यानी चार सीटों की क्रॉस वोटिंग से तो मामला पलट ही सकता है, एक दो वोट इधर उघर होने पर दूसरी वरीयता से दूसरी सीट का फैसला होगा। कर्नाटक में रोचक हुआ चुनाव कर्नाटक में कांग्रेस में सरकार के भीतर खींचतान जारी है। ऐसे में, वहां की चार सीटों का चुनाव रोचक है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पास 135 व भाजपा-जदएस के पास 85 विधायक हैं। एक सीट के लिए 45 वोट की जरूरत है। इसमें कांग्रेस तीन एवं भाजपा के एक सीट जीतने के आंकड़े हैं, लेकिन भाजपा दूसरी सीट के लिए उतरती है तो उसे बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग करानी पड़ेगी या फिर मामला दूसरी वरीयता के वोटों पर जा सकता है। मध्य प्रदेश में चाहिए 58 वोट मध्य प्रदेश में तीन सीटों के चुनाव में एक सीट के लिए 58 वोट की जरूरत है। भाजपा के पास दो सीट जीतने के बाद भी 48 वोट अतिरिक्त हैं। यानी उसे एक और सीट जीतने के लिए दस और वोटों का जुगाड़ करना होगा। कांग्रेस के पास 62 वोट हैं। यानी आसानी से एक सीट आ सकती है, लेकिन अगर भाजपा एक ज्यादा उम्मीदवार उतारती है तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ जाएगा। गौरतलब है कि इस बार कांग्रेस से दिग्विजय सिंह की सीट खाली हो रही है। वह फिर से लड़ते हैं तो भाजपा दांव खेल सकती है। पिछली बार दिग्विजय सिंह के चलते हुए राज्यसभा सीट के विवाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी थी। सिंधिया अब भाजपा में हैं। भाजपा यहां पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। इन राज्यों में चुनाव 18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। जिन 26 सीटों के लिए चुनाव और उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं। इसके अलावा चार सीटें कांग्रेस, तीन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और एक झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास हैं। भाजपा की खाली होने वाली सीटों में गुजरात से तीन, कर्नाटक, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से दो-दो और अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और मणिपुर से एक-एक सीट शामिल हैं।

MP राज्यसभा चुनाव: 1 जून से नामांकन, 18 जून को वोटिंग; BJP-कांग्रेस ने बनाई रणनीति

भोपाल  मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज गया है. भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव के संबंध में कार्यक्रम जारी कर दिया है. 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. 18 जून को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने राज्यसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दी है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर कांग्रेस की उस एक सीट पर टिकी है, जिसे बचाए रखना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से मना करने के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है।  तीन सीटों पर मुकाबला, सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस की वरिष्ठ पत्रकार अजय द्विवेदी के अनुसार "प्रदेश में खाली हो रही 3 सीटों में 2 सीटें भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जार्ज कुरियन की हैं, जबकि तीसरी सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास है. भाजपा अपनी दोनों सीटों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस की एकमात्र सीट को लेकर अंदरखाने चिंता बढ़ गई है।  दिग्विजय सिंह ने बनाई दूरी, नए चेहरों की लॉबिंग शुरू पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे इस बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि अब किसी नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने यह भी इच्छा जताई है कि उनकी जगह अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को अवसर दिया जाए. इसके बाद कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है. कई वरिष्ठ और युवा नेता दिल्ली तक सक्रिय हो गए हैं।  कांग्रेस को सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस अपनी एक सीट निकाल सकती है, लेकिन पार्टी को क्रॉस वोटिंग का बड़ा खतरा दिखाई दे रहा है. भाजपा यदि तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो मुकाबला रोचक हो सकता है. कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं या मतदान के दौरान रणनीतिक गच्चा हो सकता है।  2020 और 2022 का इतिहास बढ़ा रहा बेचैनी वरिष्ठ पत्रकार खिलावन चंद्राकर बताते हैं "राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार समीकरण अचानक बदले हैं. साल 2020 के राज्यसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफे से पूरा गणित बदल गया था. वहीं 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस को झटका दिया था. ऐसे में इस बार पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही।  चुनाव का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है     नामांकन शुरू – 01 जून 2026     नामांकन की अंतिम तारीख – 08 जून 2026     नामांकन पत्रों की जांच – 09 जून 2026     नाम वापसी की आखिरी तारीख – 11 जून 2026     मतदान – 18 जून 2026, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक     मतगणना – 18 जून 2026, शाम 5 बजे से

JMM-कांग्रेस में दूरी बढ़ने के संकेत, राज्यसभा चुनाव पर असर की आशंका

रांची  झारखंड में अगले कुछ दिनों बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर एक सीट के लिए समीकरण साधने में जुटा है। जेएमएम का रुख कांग्रेस के साथ अब सहज नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख सहयोगी दल कांग्रेस के साथ पूरी तरह से सहज नहीं दिख रहा है। जिस तरह से असम विधानसभा में जेएमएम के कांग्रेस के कोई तालमेल किए बगैर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया, उससे कांग्रेस नेतृत्व को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। असम में हेमंत सोरेन ने एक सप्ताह से अधिक समय तक कैंप कर दर्जनों चुनावी सभाएं की, जिससे वहां गैर भाजपा मतों में बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। असम में हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने चाय बगान में रहने वाले झारखंडी मूल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इससे भी कांग्रेस और जेएमएम के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत मिले। लेकिन झारखंड में अब भी हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस और आरजेडी शामिल है। असम और पश्चिम बंगाल की सियासत का झारखंड में भी दिखेगा असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है। असम में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से भी झारखंड में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गई। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एक सीट जीतने के लिए 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आम तौर पर 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। यह संख्या झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 के आधार पर तय होती है। जहां प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा चुनाव होता है। सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसने की आशंका 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक का समर्थन प्राप्त है, जो दोनों सीटों पर कब्जा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन जिस तरह से जेएमएम की ओर से कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। इसके कारण सीट बंटवारे को लेकर पेच फंस सकता है। जेएमएम अपने बल पर एक सीट निकालने में सक्षम है, जबकि दूसरी सीट पर जीत के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी है। इन परिस्थितियों में जेएमएम की ओर से दूसरी सीट के लिए किसी ऐसे राजनेता या उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया जा सकता है या समर्थन दिया जा सकता है, जो अपने बलबूते कई विधायकों का समर्थन हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में झारखंड के एक पूर्व सांसद के नाम की भी चर्चा हो रही है।  

MP में राज्यसभा चुनाव का गणित बदलेगा, भाजपा तीसरे प्रत्याशी को उतारने की तैयारी में, कांग्रेस की सीट पर नजर

भोपाल  मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है. . एमपी में क्रॉस वोटिंग की चर्चा  मध्य प्रदेश में भले ही अभी राज्यसभा चुनाव में 2 महीने का समय है. लेकिन जिस हिसाब से परिस्थितियां बदल रही हैं. उससे राज्यसभा का मामला फंसता दिख रहा है. तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के एक विधायक आयोग्य साबित हो गए हैं. जबकि एक विधायक को वोट करने का अधिकार नहीं होगा और तीसरे विधायक अपनी स्थिति क्लीयर नहीं कर रही हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और विधायक कम होते हैं तो फिर तीसरी सीट पर मुकाबला फंस जाएगा. क्योंकि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं।  जानिए राज्यसभा चुनाव का सरल गणित  राज्यसभा चुनाव के लिए पहले मध्य प्रदेश का सियासी गणित जानना जरूरी है. मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस के एक विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है. जबकि एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो गई है. इस हिसाब से प्रदेश में मौजूदा विधायकों की संख्या 228 है. भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं.कांग्रेस के पास कुल 65 विधायक है. लेकिन इनमें 1 के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. जबकि एक की सदस्यता चली गई है. जबकि बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे का वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने की स्थिति दिख रही है. इस हिसाब से बीजेपी विधायकों की संख्या 165 तक जाती है. वहीं एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से है. जो खुद अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं. इससे राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह उलझ रहा है।  क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी। इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है। खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है। एक सीट जीतने चाहिए 58 वोट  राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है. भाजपा अपने 116 विधायकों के साथ 2 सीटें आसानी से जीतेगी और उसके पास 49 वोट बचेंगे. यानि भाजपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारेगी तो उसके पास 49 वोट सेफ हैं. कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं. फिलहाल पार्टी के पास 4 विधायक ज्यादा है. लेकिन अगर कांग्रेस के 7 विधायक क्रॉस वोटिंग या फिर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते तो फिर कांग्रेस जीत के फिगर से नीचे आ जाएगी. इस हिसाब से कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बदल रहा है.  बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके।  एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 4-5 विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। भाजपा तीसरी सीट पर खेल सकती है दांव इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिनसे दो सीटें जीतने के बाद भी करीब 48 वोट बचते हैं।  

क्रॉस वोटिंग से सियासी हलचल: हरियाणा में कांग्रेस को झटका, मेवात में BJP की बढ़ती सक्रियता

चंडीगढ़. हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायकों द्वारा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के समर्थन में क्रॉस वोट करना भाजपा के लिए शुभ संकेत है। मेवात के नूंह जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस के इन चार विधायकों में से दो को भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में अपने समर्थन में वोटिंग के लिए तैयार कर जहां मेवात क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, वहीं कांग्रेस के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राज्यसभा चुनाव में हथीन के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल और पुन्हाना के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास के वोट क्रॉस हुए हैं। इन दोनों विधायकों को कांग्रेस ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। विधायकों के जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में क्रॉस वोट करने के आरोपी इन विधायकों को किसी भी समय कांग्रेस पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कांग्रेस का यह फैसला भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी मददगार साबित हो सकता है। भाजपा क्रॉस वोट करने के आरोपी विधायकों को अपने गले लगाने के लिए तैयार बैठी है। हरियाणा में साल 2024 के विधानसभा चुनाव में पांच मुस्लिम विधायक चुनाव जीतकर आए हैं और पांचों कांग्रेस से हैं। नूंह से चौधरी आफताब अहमद तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं। फिरोजपुर झिरका से मामन खान दूसरी बार चुनाव जीते, जबकि हथीन से कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल पहली बार चुनाव जीते हैं। पुन्हाना के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास की तबीयत आजकल ठीक नहीं रहती। उनका नियमित डायलिसिस होता है। मोहम्मद इलियास पुन्हाना से तीसरी बार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस से पहले वे इनेलो की राजनीति करते रहे हैं। यमुनानगर जिले की जगाधरी विधानसभा सीट भी मुस्लिम बाहुल्य है, जहां से चौधरी अकरम खान दूसरी बार चुनाव जीते हैं। उन्होंने पहला चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीता था। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से एक पर भाजपा और दूसरी पर कांग्रेस की जीत हुई है। कांग्रेस को जीत हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के समर्थन में कांग्रेस के चार वोट निरस्त हुए और चार क्रास हुई हैं। जिन चार विधायकों की वोट क्रास हुई है, उनमें मेवात क्षेत्र के दो मुस्लिम विधायक मोहम्मद इसराइल और मोहम्मद इलियास भी शामिल हैं। इसी तरह ओडिसा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को अपना वोट दिया है। ओडिशा व हरियाणा में जिस तरह से कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों का भाजपा के प्रति राजनीतिक प्रेम बढ़ा है, वह पार्टी के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। मेवात भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से ज्यादा उपजाऊ नहीं रहा है। शुरू से यहां कांग्रेस और इनेलो का दबदबा रहा है। भाजपा ने इनेलो से शामिल हुए दो तत्कालीन विधायकों जाकिर हुसैन को नूंह और नसीम अहमद को फिरोजपुर झिरका से टिकट दिया था, मगर साल 2019 के चुनाव में दोनों ही हार गए थे। पिछले चुनाव में अच्छा नहीं रहा भाजपा का प्रदर्शन साल 2024 के चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने जिस तरह से मेवात क्षेत्र के दो विधायकों को तोड़कर अपने पाले में लाने में सफलता हासिल की, उससे संभावना बन रही है कि यदि कांग्रेस इन विधायकों को अपनी पार्टी से बाहर निकालने का फैसला लेती है तो भाजपा भविष्य में उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़वाने से परहेज नहीं करेगी। कांग्रेस के बागी मुस्लिम विधायकों के लिए भाजपा अछूत नहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के लिए जागा मुस्लिम कांग्रेस विधायकों का प्रेम यह संकेत भी दे रहा है कि अब भाजपा उनके लिए बिल्कुल भी अछूत नहीं है। भाजपा उनका सहयोग लेना चाहती है और मुस्लिम देना चाहते हैं। ऐसे में न केवल इनेलो बल्कि कांग्रेस के लिए अपार चुनौतियां हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि जगाधरी के कांग्रेस विधायक मोहम्मद अकरम खान से भी राज्यसभा चुनाव में वोट के लिए संपर्क साधा गया था, लेकिन ऐन वक्त पर बात बनते-बनते बिगड़ गई।

हार के बाद बदला राजनीतिक अंदाज़? तेजस्वी यादव को मिला नया नाम, नेताओं के बयान चर्चा में

 पटना राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के हार को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार ट्रोल हो रहे हैं। सत्ता पक्ष के नेता तो उनपर हमला बोल ही रहे हैं, अब लिस्ट में महागठबंधन के नेता भी शामिल हो गए हैं। सत्ता पक्ष से कृषि मंत्री राम कृपाल यादव और राष्ट्रीय जनता दल के सूप्रीमो लालू प्रसाद के करीबी शिवांनद तिवारी ने भी तेजस्वी यादव पर तंज कसा है। दरअसल, तेजस्वी यादव राज्यसभा चुनाव के परिणाम के बाद बिहार से बाहर चले गए। इसके बाद रामकृपाल यादव और शिवानंद तिवारी ने उन्हें रणछोड़ कह दिया। वहीं पप्पू यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव ने अपनी जिम्मेदारी ही ठीक से नहीं निभा पाए। पहले जानिए शिवानंद तिवारी ने क्या कहा? पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि पराजय से ज्यादा खराब है कि पराजय के बाद मैदान छोड़ देना। सुना है कि तेजस्वी यादव कोलकाता के लिए निकल गए हैं। इसके पहले भी वह बिहार से बाहर चले गए थे। परिवार के साथ यूरोप चले गए थे। पराजय के बाद रण छोड़ देने वाले नेताओं के साथ उनके समर्थक नहीं टिकते हैं। मंत्री रामकृपाल यादव ने क्या कहा? वहीं कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव जिस तरह से विधानसभा चुनाव में पटना छोड़कर चले गए थे, उसी तरह राज्यसभा चुनाव में भी हार के बाद पटना के बाहर चले गए। वह अब रणछोड़ बन गए हैं। यही कारण है कि तेजस्वी यादव की पार्टी के नेताओं को उनपर भरोसा नहीं है। सांसद पप्पू यादव ने उठाया सवाल वहीं सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के बिहार प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से बातचीत ही नहीं की। विपक्ष के नेता का दायित्व था कि वह सबसे बात करें। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया। जिसका परिणाम हुआ कि कांग्रेस के तीन विधायक नाराज हो गए और वोट डालने नहीं गए।

राज्यसभा चुनाव को लेकर BJP सतर्क, हरियाणा विधायकों को गुप्त जगह पर कराया जाएगा मॉक ड्रिल

चंडीगढ़. हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। बीजेपी ने हरियाणा निवास में अपने विधायकों को इकट्ठे करने शुरू कर दिए हैं। हरियाणा निवास से सभी बीजेपी विधायकों को बसों में बैठाकर किसी दूसरी स्थान पर ले जाया जाएगा, जहां उनकी एक मीटिंग होगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री नायब सैनी, हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष मोहनलाल बडौली और हरियाणा बीजेपी के प्रभारी सतीश पूनिया मौजूद रहेंगे। इस मीटिंग में बीजेपी अपने विधायकों को राज्यसभा चुनाव में वोटिंग की प्रक्रिया के बारे में समझाएगी। बीजेपी कराएगी चुनावी मॉक ड्रिल इतना ही नहीं, राज्यसभा चुनाव की एक मॉक ड्रिल भी होगी, जिसमें राज्यसभा में जिस तरह से चुनाव होता है, ठीक उसी तरह चुनाव करवाया जाएगा। ताकी बीजेपी विधायक पहली वरीयता वोट, दूसरी वरीयता वोट कहां टिक मार्क करना है ये प्रक्रिया आसानी से समझ जाएं। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को चुनाव एजेंट बनाया गया। कैबिनेट मंत्री रणवीर सिंह गंगवा और विधायक योगेंद्र राणा को काउंटिंग एजेंट नियुक्त किया है। वहीं, पार्टी प्रतिनिधि एवं पार्टी एर्जेंट के तौर पर खेल मंत्री गौरव गौतम और विधायक सुनील सांगवान जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने काउंटिंग एजेंट के तौर पर चेतन मित्तल और घनश्याम को लगाया है।

राज्यसभा के लिए 26 नेता निर्वाचित, शरद पवार-सिंघवी शामिल; हरियाणा और बिहार में चुनाव से तय होंगे नतीजे

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत 26 उम्मीदवार सोमवार (9 मार्च) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होगा। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं। भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (9 मार्च) को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा। हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी। ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले। राज्यों में चुनावी समीकरण और कड़ा मुकाबला बिहार (5 सीटें) बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (RJD) ने व्यवसायी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। एनडीए के उम्मीदवार: केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं। नीतीश कुमार का ऐतिहासिक कदम: नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा जाने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिससे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (20 वर्ष) के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राजद का समीकरण: राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा (BSP) की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है। ओडिशा (4 सीटें) ओडिशा में भी एक सीट के लिए मुकाबला तय है। भाजपा उम्मीदवार: प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। बीजद उम्मीदवार: संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा (2 सीटें) हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। मैदान में उम्मीदवार: भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं। विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। महाराष्ट्र (7 सीटें): सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। पश्चिम बंगाल (5 सीटें): सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) के चार उम्मीदवार – बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते। असम (3 सीटें): सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार- जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (UPPL) के प्रमोद बोरो- निर्विरोध निर्वाचित हुए। तेलंगाना (2 सीटें): कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए। तमिलनाडु (6 सीटें): सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए। छत्तीसगढ़ (2 सीटें): भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं। हिमाचल प्रदेश (1 सीट): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।  

राज्यसभा चुनाव में फूलो देवी नेताम और लक्ष्मी वर्मा सहित कई निर्विरोध निर्वाचित

रायपुर. देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान है। हालांकि न उससे पहले ही राजनीतिक तस्वीर साफ हो चुकी है। 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar), कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Singhvi ), केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले (Athawale Ramdas Bandu), फूलो देवी नेताम (phoolo devi netam) और लक्ष्मी वर्मा (lakshmi verma) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। कई राज्यों में विपक्षी दलों ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिसके कारण ये नेता बिना मतदान के ही राज्यसभा पहुंच गए हैं। वहीं बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर चुनाव 16 मार्च को होंगे। इन चुनावों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। कुल 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। अब 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट पर मुकाबला होगा। बीजेपी ने हरियाणा, ओडिशा और बिहार के राज्यसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया बीजेपी ने हरियाणा, ओडिशा और बिहार के राज्यसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार के लिए दो जबकि ओडिशा और हरियाणा के लिए एक-एक नेताओं की नियुक्ति की है। इससे साफ है कि इन तीनों राज्यों में राज्यसभा चुनाव के लिए सियासी मुकाबला होगा। वहीं, सात राज्यों के 26 सीटों पर शाम तीन बजे तक राज्यसभा के निर्विरोध सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। बिहार की पांचवी सीट पर होगा मुकाबला बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए 6 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी की तरफ से नितिन नबीन और शिवेश कुमार मैदान में है तो जेडीयू से रामनाथ ठाकुर और नीतीश कुमार किस्मत आजमा रहे हैं। एनडीए की तरफ से पांचवें उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा हैं। आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों की जरूरत है. एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं जबकि विपक्ष के पास 35 विधायक हैं। इसके अलावा छह विधायक अन्य हैं। बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को अपनी जीत के लिए आरजेडी से दो-दो हाथ करना होगा। कुशवाह को तीन अतरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए तो आरजेडी के अमरेंद्र सिंह को 6 विधायकों का समर्थन चाहिए। आरजेडी ने ओवैसी की पार्टी का समर्थन मांगा है। अब देखना है कि कौन सियासी बाजी मारता है?  हरियाणा में रोचक हुआ राज्यसभा का मुकाबला हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी से संजय भाटिया और कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध मैदान में है। सतीश नांदल ने निर्दलीय पर्चा भरकर मुकाबले को रोचक बना दिया है, जिन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में एक सीट पर बीजेपी की जीत तय है, लेकिन दूसरी सीट के लिए कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला होगा। हरियाणा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का समर्थन चाहिए। राज्य की विधानसभा में 90 सदस्य हैं, जिनमें से बीजेपी के 48 विधायक हैं तो कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। इसके अलावा दो विधायक इनेलो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इस लिहाज से बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक-एक राज्यसभा सीट जीत सकती हैं। बीजेपी की एक सीट तय मानी जा रही है, लेकिन पहले देखा गया है कि कांग्रेस के पास संख्याबल होने के बावजूद उसके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि दूसरी सीट पर सियासी संग्राम होगा। ओडिशा में चौथी सीट के लिए होगी फाइट ओडिशा की चार राज्यसभा सीट के लिए 5 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी से दो प्रत्याशी- मनमहोन सामल और सुजीत कुमार उतार रखे हैं तो दिलीप रे को पार्टी ने अपना समर्थन दिया है। इसके अलावा बीजेडी से संतृप्त मिश्रा और कांग्रेस ने डॉ दत्तेश्वर मिश्रा को अपना समर्थन दे रखा है। बीजेपी के दोनों और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत तय है, लेकिन चौथी सीट के लिए बीजेपी समर्पित दिलीप रे और कांग्रेस के समर्पित दत्तेश्वर मिश्र के बीच फाइट होगी। छत्तीसगढ़ के निर्विरोध निर्वाचित होने वाले नेताओं की सूची – लक्ष्मी वर्मा (भाजपा) – फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हरियाणा राज्यसभा की 2 सीटों पर नॉमिनेशन शुरू

पंचूकला. 9 अप्रैल को खाली होने जा रही हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। खाली सीटों को भरने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 5 मार्च तक अपना नॉमिनेशन भर सकेंगे। वोटिंग के लिए 16 मार्च की डेट फाइनल की गई है। भाजपा के 2 राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। अभी ये दोनों सीटें भाजपा के पास हैं। 16 मार्च को वोटिंग के बाद शाम को रिजल्ट जारी होगा। वहीं ईसीआई के जारी नोटिफिकेशन में हरियाणा के आईएएस पंकज अग्रवाल को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है। पंकज अग्रवाल अभी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी देख रहे हैं। वहीं असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी हरियाणा विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी गौरव गोयल को दी गई है।