samacharsecretary.com

लखनऊ में जनता दर्शन,सीएम योगी ने सुनीं शिकायतें, शिक्षा और भर्ती पर दिया बड़ा संदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित 'जनता दर्शन' में प्रदेश भर से आए सैकड़ों फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान सीएम का एक अलग और संवेदनशील रूप देखने को मिला, जब उन्होंने वहां मौजूद बच्चों और उनके माता-पिता से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से दो-टूक कहा कि बच्चों को हर हाल में स्कूल भेजें, क्योंकि एक शिक्षित बच्चा ही सशक्त और समृद्ध भारत की नींव रखेगा। "सरकार सब दे रही है, आप बस स्कूल भेजें" जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री की नजर अभिभावकों के साथ आए कुछ छोटे बच्चों पर पड़ी। जब सीएम ने उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा और यह जानकारी मिली कि कतिपय बच्चों का अभी स्कूल में दाखिला ही नहीं हुआ है, तो उन्होंने इस पर गहरी चिंता जताई। अभिभावकों को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में शिक्षा की तस्वीर बदली है। उन्होंने सरकार की योजनाओं को गिनाते हुए कहा, "बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अब बच्चों को सिर्फ मुफ्त शिक्षा ही नहीं, बल्कि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्कूल बैग और कॉपी-किताबों के लिए अभिभावकों के खातों में सीधे 1200 रुपये भेजे जा रहे हैं। बच्चों को पौष्टिक भोजन (मिड-डे मील) भी मिल रहा है। ऐसे में माता-पिता की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों का एडमिशन कराएं और उन्हें नियमित स्कूल भेजें।" युवाओं को मंत्र: "सिफारिश नहीं, योग्यता दिलाएगी नौकरी" जनता दर्शन में पहुंचे बेरोजगार युवाओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें 'पारदर्शिता' का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बीते वर्षों में 9 लाख से अधिक युवाओं को बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियां दी हैं। सीएम ने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि इस साल भी लाखों रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी शॉर्टकट या सिफारिश के चक्कर में न पड़ें, बल्कि अपनी पूरी ऊर्जा मेहनत और तैयारी में लगाएं। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से युवाओं में नया आत्मविश्वास देखने को मिला। अवैध कब्जे की शिकायतों पर 'जीरो टॉलरेंस' प्रशासनिक मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने 'अवैध कब्जे' की शिकायतों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। कई फरियादियों ने भूमि विवाद और दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायतें उनके समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद पुलिस और राजस्व अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी शिकायतें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने निर्देश दिया कि राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर तत्काल जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई कर शासन को रिपोर्ट सौंपी जाए।

महिला नेतृत्व से विकास को मिल रही नई दिशा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में नारी सशक्तिकरण को नई गति मिल रही है। प्रदेश की महिलाएँ नीति-निर्माण से लेकर तकन ीकी नवाचार तक प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। डिजिटल नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक उद्यमिता के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भागीदारी विकास प्रक्रिया को नया आयाम दे रही है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकलकर महिलाएँ तकनीकी क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। वे प्रदेश की क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर प्रदेश की विकास यात्रा में तकनीकी परिवर्तन की अग्रदूत बनकर उभर रही है, जिससे आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित प्रदेश के निर्माण को सशक्त आधार मिल रहा है। तकनीकी नेतृत्व बना परिवर्तन की आधारशिला आरती अग्रवाल: डिजिटल समावेशन की अग्रदूत एनेक्स डिजिटल रनर्स प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक और सीओओ मती आरती अग्रवाल ने ग्रामीण भारत में डिजिटल खाई को पाटने का कार्य किया है। उनके नेतृत्व में 40 हजार से अधिक डिजिटल रनर्स का नेटवर्क 11 हजार से अधिक पिनकोड क्षेत्रों में सक्रिय है, जो सर्वेक्षण, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और जलवायु से जुड़ी पहलों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित कर रहे हैं। साथ ही, द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (टीआईई) वूमेन चैप्टर की सह-अध्यक्ष के रूप में वे महिला उद्यमियों को मार्गदर्शन देकर उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ा रही हैं। इसका लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों की महिलाओं को भी मिल रहा है। अदिति चौरसिया: छोटे शहर से वैश्विक टेक नेतृत्व तक गढ़ी मलहरा से आने वाली सु अदिति चौरसिया ने इंजीनियर्सबाबू और सुपरसोर्सिंग जैसी कंपनियों के माध्यम से तकनीकी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज उनकी कंपनियाँ 250 से अधिक पेशेवरों को रोजगार दे रही हैं और बोश और ओरेकल जैसी वैश्विक कंपनियों को सेवाएँ दे रही हैं। उन्होंने 5 हजार से अधिक इंजीनियर्स को रोजगार दिलाने और 400 से अधिक टेक उत्पादों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बिंदु पाटीदार: एआई नवाचार में वैश्विक पहचान सोर्सबे की सह-संस्थापक और सीटीओ सु बिंदु पाटीदार ने इंदौर से एक वैश्विक एआई टैलेंट प्लेटफॉर्म का विकास किया। यह प्लेटफॉर्म 3 लाख से अधिक विशेषज्ञों और 700 से अधिक क्लाइंट्स, के लिए एआई से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और मेटा जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। उनकी सफलता से सिद्ध हुआ है कि टियर-2 शहरों से भी वैश्विक स्तर के नवाचार संभव हैं। प्रेरिता बाहेती साबू: रणनीतिक वित्तीय नेतृत्व की मिसाल क्लिनिसप्लाईज की निदेशक सु प्रेरिता बाहेती साबू ने वित्तीय अनुशासन और रणनीतिक प्रबंधन के माध्यम से हेल्थकेयर सप्लाई चेन के क्षेत्र में मजबूत और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल विकसित किया है। उनकी विशेषज्ञता ने संगठन को चुनौतियों के बीच भी स्थिरता और विकास बनाए रखने में मदद की है। उनका दृष्टिकोण मध्यप्रदेश में ईज़-ऑफ-डूइंग-बिजिनेस को भी रेखांकित करता है। सपना भम्बानी: वैश्विक संचालन में नेतृत्व की मिसाल टास्कअस में कंट्री लीडर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में सु सपना भम्बानी भारत में बड़े पैमाने पर वैश्विक व्यवसाय का नेतृत्व कर रही हैं। उनका नेतृत्व ‘5 पी’ (पीपुल्स, परपज, प्राइड पैशन और परफमिंस पर आधारित है। इससे अच्छे प्रदर्शन के साथ संगठन में सकारात्मक कार्य संस्कृति का निर्माण हुआ है। समावेशी और नवाचार-आधारित भविष्य की ओर मध्यप्रदेश इन सभी प्रेरक कहानियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में महिलाएँ हर प्रकार की चुनौतियों को पार कर बड़े पैमाने पर परिवर्तन ला रही हैं। नीति, अवसर और व्यक्तिगत संकल्प के इस संगम से प्रदेश अधिक समावेशी, नवाचारी और भविष्योन्मुख बन कर विकसित हो रहा है। यहां महिलाएँ नेतृत्व, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से एक सशक्त और आत्मनिर्भर प्रदेश का निर्माण कर रही हैं।  

फर्जी पहचान और संदिग्ध किराएदारों पर जयपुर पुलिस का एरिया डोमिनेशन अभियान तेज

 जयपुर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी उमर हासिम उर्फ खरगोश के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जयपुर में एक साल तक रहने के खुलासे के बाद से राजधानी में हड़कंप मच गया है. सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद, जयपुर कमिश्नरेट ने शहर के चारों जिलों में 'एरिया डोमिनेशन' अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बिना पुलिस सत्यापन (Police Verification) और किराएनामे (Rent Agreement) के रह रहे संदिग्ध लोगों और अपराधियों की पहचान करना है.  73 से ज्यादा किराएदार गिरफ्तार, मकान मालिकों पर भी केस दर्ज एडिशनल डीसीपी ललित शर्मा ने बताया कि बाहरी राज्यों के वांटेड बदमाशों को जयपुर में फरारी काटना सुरक्षित लग रहा है. वे नाम-पता बदलकर किराएदार के रूप में रह रहे हैं. इस अभियान के तहत अब तक 73 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जिसमें पत्रकार कॉलोनी थाना क्षेत्र के उदय ग्रीन रेसीडेंसी में पुलिस ने छापेमारी कर बिना सत्यापन के रह रहे 26 लोगों को हिरासत में लिया है. इनमें से दो का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी पाया गया है. कनोता थाना क्षेत्र में बगराना के जेडीए फ्लैट्स में करीब 1,000 फ्लैट्स की जांच के दौरान 47 ऐसे किराएदार मिले, जिनके पास कोई किराएनामा या पुलिस सत्यापन नहीं था. इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है. वही पुलिस ने उन मकान और फ्लैट मालिकों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए हैं, जिन्होंने बिना सत्यापन के अपने घर किराए पर दिए थे.  इन मामलों ने उड़ाई पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नींद आतंकी का जयपुर कनेक्शन आने के पास पुलिस में हड़कंप मचा हुआ है. क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा का ये आतंकी उमर हासिम उर्फ खरगोश लगभग एक साल तक जयपुर में रहा, नौकरी की, सज्जाद नाम से फर्जी वोटर आईडी बनवाई और फिर फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश भाग गया. एमपी का हिस्ट्रीशीटर जवाहर सर्किल इलाके में एक गर्भवती महिला से छेड़छाड़ के मामले में पकड़ा गया जो मध्यप्रदेश का हिस्ट्रीशीटर आरोपी राहुल घुरैया निकला. उसके खिलाफ हत्या के प्रयास और लूट के 33 मामले दर्ज हैं. म्यांमार के शरणार्थियों की गैंग वैशाली नगर इलाके में म्यांमार के शरणार्थी युवक अबूबकर सिद्दकी ने अपने साथी खालिद के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम दिया. गैंगस्टर की गिरफ्तारी सुजानगढ़ में ज्वैलर पर फायरिंग मामले में वांछित अपराधी कृष्ण सिंह को एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने झोटवाड़ा से गिरफ्तार किया. उसके खिलाफ 27 मुकदमे दर्ज हैं. आमजन से पुलिस की अपील जयपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को किराए पर रखने से पहले उसका पुलिस सत्यापन अवश्य करवाएं.  पुलिस का यह विशेष अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा.

सीएम के हाथों नामकरण: ‘रविशंकर’ बना गांव की नई पहचान

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई। इसी दौरान ग्राम की निवासी मती ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी।  मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया और बच्चे के जन्म दिवस के बारे में जानकारी ली।जब मती बघेल ने बताया कि बालक का जन्म रविवार के दिन हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उस नवजात का नाम “रविशंकर” रखा। नामकरण के इस क्षण ने वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेर दी। जैसे ही यह नाम घोषित हुआ, पूरा चौपाल स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और एक उत्सव जैसा माहौल बन गया।  यह दृश्य जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक भी बन गया। इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की मूल भावना को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जहां शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है।  मुख्यमंत्री  साय का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन से जुड़कर उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरोग्य धाम ओपीडी का किया अवलोकन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को ग्वालियर प्रवास के दौरान गोले के मंदिर के समीप निर्माणाधीन आरोग्यधाम चिकित्सालय की ओपीडी का अवलोकन किया। उन्होंने चिकित्सालय में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं के संबंध में अस्पताल प्रबंधन से जानकारी प्राप्त की। साथ ही चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर उपचार व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाने के लिये कहा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आरोग्यधाम चिकित्सालय में मरीजों को कम खर्चे एवं समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये प्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान ओपीडी में पंजीयन, जांच एवं उपचार की प्रक्रिया का अवलोकन भी किया। इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री एवं जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  भारत सिंह कुशवाह, अपेक्स बैंक के प्रशासक  महेन्द्र यादव, वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  मधुसूदन सिंह भदौरिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित आरोग्यधाम न्यास के पदाधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित रहे।  

लखनऊ में 65 वर्षीय अशोक बहार ने दी NEET परीक्षा, बोले सपनों की कोई उम्र नहीं होती

लखनऊ लखनऊ माण्टेसरी स्कूल में रविवार एक परीक्षा केंद्र पर रविवार को 65 वर्षीय अशोक बहार ने नीट (NEET) दी। परीक्षा कक्ष में परीक्षा दे रहे दूसरे युवा परीक्षार्थियों में चर्चा का विषय रहा। युवाओं ने अशोक हौसले का सलाम किया। अधिक उम्र होने पर परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश के दौरान तलाशी के समय पुलिस व कर्मियों को संदेह होने पर पूछताछ की, लेकिन एडमिट कार्ड व आधार के मिलान कराने पर सब कुछ सही पाए जाने पर परीक्षा की अनुमति दी। इस उम्र में अशोक की यह पहल उन युवाओं के किसी प्रेरणा से कम नहीं है। जो एक व दो बार नीट देने पर चयन न होने पर निराश हो जाते हैं। परीक्षा केन्द्र पर मौजूद परीक्षार्थियों ने अशोक की इस हिम्मत और लगन को सलाम किया। परीक्षा देकर बाहर निकले अशोक ने बताया कि वो लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं। उनके पास एलएलबी और एमबीए की डिग्री है। अशोक बहार ने यह साबित कर दिया है कि सीखने की ललक और अपने सपनों को जीने का जज्बा किसी उम्र का मोहताज नहीं होता। अशोक बहार ने बताया कि वह एक खाद बनाने वाली कंपनी में मार्केटिंग प्रमुख के पद पर तैनात रहे हैं। परिवार में शिक्षा और चिकित्सा का माहौल रहा है। पत्नी डॉ. मंजुल बहार एक चिकित्सक हैं, और अमेरिका में हैं। उनके कई रिश्तेदार भी डॉक्टर हैं। इसी वातावरण ने उन्हें भी चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि मैंने वर्ष 2000 हजार में कंपनी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले लिया था। कहा कि नीट जैसी परीक्षा के लिए तय उम्र नहीं होती। कहा कि सिर्फ उम्र या परिस्थितियों को देखकर अपने सपनों को मत छोड़िए। लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत करने का साहस हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। कहा कि मैं दवाओं के बारे में बहुत कुछ जानता हूं, लेकिन दवाएं लिख नहीं सकता। दवा लिखने के लिए डॉक्टर की डिग्री होनी चाहिए। इसलिए परीक्षा दी। परीक्षा में सफलता मिले न मिले, प्रयास करते रहना चाहिए। इससे पहले ओडिशा के सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी 64 वर्षीय किशोर प्रधान 2020 में नीट पास कर चुके हैं। इसके अलावा अलीगढ़ के 69 वर्षीय मोहन लाल नीट दे चुके हैं।

CCL ने दी बड़ी सौगात: दामोदर नदी पर गिद्दी-भुरकुंडा पुल का होगा पुनर्निर्माण

 गिद्दी (रामगढ़)  हजारीबाग और रामगढ़ जिलों को जोड़ने वाली गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नदी पर स्थित जर्जर पुल को लेकर लंबे समय से चल रही मांग आखिरकार रंग लाई है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) बोर्ड की बीते 23 अप्रैल को हुई बैठक में इस महत्वपूर्ण पुल की मरम्मत और नए पुल के निर्माण के लिए 19 करोड़ 44 लाख 64 हजार 400 रुपये की स्वीकृति दे दी गई है। इस फैसले से गिद्दी और भुरकुंडा समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों में खुशी की लहर है। यह फैसला न सिर्फ दो जिलों, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। दो जिलों की धड़कन, अब मिलेगी नई सांस गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल हजारीबाग और रामगढ़ जिलों के साथ-साथ मांडू और बड़कागांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन हजारों भारी वाहन, स्कूली बच्चे, मजदूर और व्यापारी इसी पुल से गुजरते हैं। ऐसे में इसकी जर्जर हालत लंबे समय से खतरे की घंटी बनी हुई थी। प्रतिदिन हजारों लोग और भारी वाहन इस पुल से गुजरते हैं, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल का मरम्मत भी, नया पुल भी बनेगाः जीएम सीसीएल अरगडा जीएम सत्यजीत कुमार ने बताया कि बीते 23 अप्रैल को बोर्ड की बैठक में गिद्दी-दामोदर नद की जर्जर पुल की मरम्मत व नए पुल निर्माण को ले राशि की स्वीकृति मिल गई है। बताया कि 19 करोड़ 44 लाख 64 हजार 400 रुपये की लागत से राज्य सरकार द्वारा पुराने पुल की तत्काल मरम्मत की जाएगी। साथ ही इसके समानांतर नया आधुनिक पुल बनाया जाएगा। कुल स्वीकृत राशि का 25 प्रतिशत करीब 4 करोड़ 75 लाख शुरुआती चरण में राज्य सरकार को दिया जाएगा। हालांकि अभी बोर्ड मीटिंग के आधिकारिक मिनट्स आने बाकी हैं। प्रबंधन ने मुख्यालय से इसकी मांग की है। इसके बाद ही फंड ट्रांसफर और कार्य प्रक्रिया स्पष्ट होगी। खतरे की जद में था पुल गौरतलब है कि गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल की स्थिति पिछले कई वर्षों से काफी जर्जर बनी हुई थी। तकनीकी जांच में पुल के एक पिलर को कमजोर पाया गया था। विशेषज्ञों ने भारी वाहनों के संचालन पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसके बाद अरगडा-बरकासयाल प्रबंधन ने पुल के दोनो ओर एक बोर्ड लगाया था। जिसमें एक बार में एक तरफ से एक ही भारी वाहन पुल से गुजरने का संदेश अंकित था। साथ ही इसके अनुपालन के लिए दोनों ओर सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी लगा दी थी। परंतु रिभर साइड भुरकुंडा की ओर पुल पर तैनात सूरक्षा कर्मी पुल पर एक समय में एक बाड़ी पार कराने के प्रति उतनी संजीदगी नहीं दिखती थाी। जिससे कई बाद पुल के बीच में दोनों ओर से भारी वाहन प्रवेश कर जाने पर पुल पर घंटो जाम लग जाता था। पुल के जर्जर होने से पुल पर कंपन भी महसुस होता है। इसके बावजूद मजबूरी में लोग हर दिन जोखिम उठाकर इसी पुल से गुजर रहे थे। श्रेय लेने की लगी है होड़ गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल निर्माण के लिए बोर्ड द्वारा राशि स्वीकृत करने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा इसे अपनी उपलब्धि बताने का सिलसिला शुरू हो गया है। क्षेत्र में बयानबाजी और सोशल मीडिया के माध्यम से श्रेय लेने की कोशिशें देखी जा रही हैं। हालांकि, आम लोगों का कहना है कि पुल का निर्माण जल्द शुरू होना चाहिए, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके। शुरुआत में निर्माण एजेंसी को लेकर असमंजस थाः एसओसी गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल निर्माण एजेंसी को लेकर असमंजस की स्थिति थाी। यह बाते अरगडा एसओसी नोसिर तौहिद ने कही। कहा कि जनहित से जूड़ा सवाल होने के कारण अरगडा महाप्रबंधक सत्यजीत कुमार व अरगडा के तत्कालित जीएम एसके झा ने पुल निर्माण को लेकर काफी गंभीरता दिखाया। बाद में असैनिक विभाग ने सीसीएल हेडक्वार्टर रांची व झारखंड सरकार के बीच सामांजस बनाकर मामले की जमीन लाने का कार्य किया है। अब जाकर यह तय हो गया है कि सीसीएल राशि उपलब्ध कराएगा, जबकि झारखंड सरकार पुल का निर्माण कार्य कराएगी। पुल मरम्मत व नए पुल निर्माण होने से आवागमन होगा सुगम गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नद की जर्जर पूराने पुल की मरम्मत व नए पुल के निर्माण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ-साथ व्यापार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है। अब आगे क्या? अब सबकी नजर इस बात पर है कि बोर्ड मीटिंग के मिनट्स कब आते हैं और टेंडर प्रक्रिया कब शुरू होती है। साथ ही गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नद पर पूराने पुल की मरम्मत व नए पुल निर्माण कार्य जमीन पर कब दिखता है। पुल निर्माण व मरम्मत की राशि स्वीकृत होने पर लोगों में जो पुल कभी डर का कारण था, वही अब विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और निर्माण कार्य कब शुरू होता है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो जल्द ही यह क्षेत्र एक सुरक्षित और आधुनिक पुल की सौगात पा सकता है।  

गरुड़ पोर्टल से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की होगी केंद्रीकृत रीयल-टाइम मॉनिटरिंग

भोपाल  "गरुड़ पोर्टल" से प्रदेश के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की केंद्रीकृत रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जायेगी। इससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के संचार के साथ संचालन की दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे सीवेज प्रबंधन की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाया जा सकेगा और समय पर निर्णय लेने में सुविधा होगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) द्वारा राज्य में सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़, आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की गई है। मध्यप्रदेश में अपनी तरह की यह प्रथम केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली है, जो वास्तविक समय में डेटा ट्रैकिंग के साथ-साथ उत्कृष्ट परिचालन निरीक्षण एवं त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को अत्यंत सशक्त बनाती है। इस युगांतरकारी व नवाचारपूर्ण पहल से राज्य में पर्यावरण संरक्षण, जल गुणवत्ता के संवर्धन एवं नगरीय स्वच्छता के संकल्प को अभूतपूर्व मजबूती मिलने की पूर्ण अपेक्षा है। आयुक्त  संकेत भोंडवे ने बताया कि विभाग के अंतर्गत संचालित कुल 42 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में अत्याधुनिक एससीएडीए' (Supervisory Control and Data Acquisition – SCADA) सह 'ओसीईएमएस' (Online Continuous Effluent Monitoring System – OCEMS) प्रणाली को सफलतापूर्वक स्थापित व लागू कर दिया गया है। विदित हो कि पूर्व में इन संयंत्रों से प्राप्त होने वाला डेटा केवल संबंधित एसटीपी परिसर तक ही सीमित रहता था, जिसके कारण संपूर्ण व्यवस्था की समग्र निगरानी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। किंतु, इस नूतन प्रणाली के क्रियान्वयन से अब बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड सीओडी (COD), पीएच (pH) एवं टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (TSS) जैसे सभी प्रमुख जल गुणवत्ता मापदंडों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। इन सभी तकनीकी पैमानों की निगरानी अब यूएडीडी (UADD) कार्यालय के 'गरुड़ पोर्टल' के माध्यम से केंद्रीकृत रूप में की जा रही है, जिसके फलस्वरूप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के प्रदर्शन पर अनवरत एवं प्रभावी दृष्टि रखी जा सकेगी। मध्यप्रदेश में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लगभग 52 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं, जिनमें यह उन्नत एससीएडीए एवं ओसीईएमएस प्रणाली कार्यरत है। विभाग द्वारा यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि शेष 12 एसटीपी का डेटा भी लगभग 30 अप्रैल 2026 तक गरुड़ पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगा, जिससे राज्य के सभी प्रमुख एसटीपी एक ही डिजिटल पटल पर पूर्णतः एकीकृत हो सकेंगे।  

जहानाबाद में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 46 शिक्षकों का वेतन रोका गया

जहानाबाद बिहार के जहानाबाद जिले में मैट्रिक और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंटल परीक्षा के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 46 शिक्षकों का वेतन अस्थायी रूप से रोक दिया है और तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इस कदम से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। क्या है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति परीक्षा कार्य के लिए विभिन्न केंद्रों पर की गई थी। केंद्राधीक्षकों की रिपोर्ट में सामने आया कि कई शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना के अपने निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर अनुपस्थित रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने इस संबंध में कोई अनुमति भी नहीं ली। जिला शिक्षा कार्यालय ने इस मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है। जारी आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना, स्वेच्छाचारिता, लापरवाही और अनाधिकृत अनुपस्थिति की श्रेणी में आता है। किसका कितना वेतन रोका गया इंटर कम्पार्टमेंटल परीक्षा में ड्यूटी पर लगाए गए 27 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 11 मई तक रोक दिया गया है। वहीं मैट्रिक कम्पार्टमेंटल परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले 19 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 6 मई तक स्थगित किया गया है। तीन दिन में देना होगा जवाब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनकी सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिहार विद्यालय परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 के तहत भी विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इस कार्रवाई के दायरे में सहायक शिक्षक से लेकर प्रधानाध्यापक तक शामिल हैं, जो विभिन्न प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों में कार्यरत हैं। क्या बोले अधिकारी अधिकारियों ने साफ कहा है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में ‘नो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। शिक्षा विभाग की इस सख्ती को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

रेखा यादव ने मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया

भोपाल  मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए  रेखा यादव ने सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया। उनके साथ ही नवनियुक्त सदस्य  साधना स्थापक ने भी कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए  यादव ने कहा कि आयोग अब केवल शिकायतों के निवारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं के वैचारिक और सामाजिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।  रेखा यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन की सराहना करते हुए कहा कि उनका संकल्प है कि मध्यप्रदेश की हर नारी आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस करे। मेरा प्राथमिक दायित्व उनके इसी विजन को साकार करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला तक पहुंचे।" महिला अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए  यादव ने कहा कि कानून अपनी जगह है, लेकिन समाज की मानसिकता में बदलाव लाए बिना स्थायी सुधार संभव नहीं है। कानूनों के निर्माण से अपराधों पर पूर्णतः अंकुश नहीं लगाया जा सकता, इसके लिए मानव की सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को बदलना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा  कि जब तक पुरुष प्रधान सोच और महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक अपराध की प्रवृत्ति में स्थायी सुधार संभव नहीं है।  यादव ने महिलाओं का आह्वान किया कि वे स्वयं भी जागरूक बनें और अपने अधिकारों को पहचानें, क्योंकि एक जागरूक नारी ही अपने खिलाफ होने वाले अन्याय के विरुद्ध मजबूती से खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की जानकारी ही बचाव की पहली सीढ़ी है। अक्सर जानकारी के अभाव में महिलाएं शोषण सहती रहती हैं। राज्य महिला आयोग अब एक मित्र और मार्गदर्शककी भूमिका निभाएगा। हम हर जिले में महिलाओं तक पहुंचेंगे ताकि वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। इस अवसर पर आयोग के सदस्य सचिव श्री सुरेश तोमर सहित वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित