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सुहागनगरी में महिला मार्केट का काम तेज, कोटला रोड पर बनेगा आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स

 फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद सुहागनगरी में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक खरीदारी का माहौल तैयार करने की दिशा में नगर निगम ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महिलाओं के लिए एक अलग महिला मार्केट बनाने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस मार्केट के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है और अब टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस मार्केट का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में खरीदारी के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इस विशेष मार्केट में महिलाओं से जुड़े उत्पादों की दुकानें होंगी और यहां सुरक्षा, स्वच्छता व अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह मार्केट न सिर्फ स्थानीय महिलाओं के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि शहर के विकास में भी योगदान देगा। नगर निगम का निर्माण विभाग पिछले काफी समय से योजना के क्रियान्वयन को लेकर मंथन कर रहा है। नवनिर्मित प्रोजेक्ट के अनुसार महिला मार्केट में आधी आबादी के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विभागीय जानकारी के अनुसार वित्तीय निविदाएं खुलने खुलने के साथ ही अगली कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। महिला मार्केट के निर्माण का कार्य नगर निगम के निर्माण विभाग की देखरेख में किया जाएगा। महिला मार्केट को लेकर सहायक अभियंता द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों के बीच काफी देर तक विचार विमर्श किया गया। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद योजना के क्रियान्वयन की तैयारी तेज कर दी गई है। फिलहाल महिला मार्केट के लिए कोटला रोड स्थित पीडी जैन इंटर कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन को चयनित किया गया है। धनराशि बढ़ाने के लिए शासन को लिखेंगे पत्र विभागीय जानकारी के अनुसार महिला मार्केट के लिए निर्माण विभाग द्वारा शासन के समक्ष जो डीपीआर भेजा गया था। उसमें निर्माण लागत की धनराशि छह करोड़ निर्धारित की गई थी। शासन ने इसमें कटौती करते हुए यह धनराशि पांच करोड़ कर दी। ऐसा समझा जाता है कि निर्माण पर अधिक धनराशि खर्च होने के कारण विभाग फिर से इस संबंध में शासन को पत्र लिखेगा। जल्द करेगी आर्किटेक्ट टीम सर्वे नगर निगम का निर्माण विभाग महिला मार्केट के निर्माण को लेकर आर्किटेक्ट टीम का सहयोग लिया जाएगा। विभागीय अधिकारी इस संबंध में जल्द ही आगरा की एक आर्किटेक्ट टीम से संपर्क स्थापित करेंगे। आर्किटेक्ट टीम द्वारा जल्द ही निर्माण स्थल का सर्वे किया जाएगा। प्रस्ताव को सदन में भी पारित किया मेयर कामिनी राठौर ने बताया कि शहर की महिलाओं को सुरक्षित खरीदारी स्थल मुहैया कराने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा महिला मार्केट का निर्माण कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रस्ताव को सदन में भी पारित किया गया है।  

विद्यालयों में परिपूर्ण जीवन शिक्षा की ओर कदम – आनंद सभा कार्यशालाए

भोपाल  राज्य आनंद संस्थान द्वारा प्रदेश में शिक्षा को मानवीय एवं मूल्य-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत प्रदेश के शासकीय स्कूली शिक्षकों के लिये 6 दिवसीय आवासीय कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसका शुभारंभ वाल्मी, ईटीसी सेंटर नीलबड़ और राज्य आनंद संस्थान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  आशीष कुमार ने किया। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित होंगी, जिनमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक सहभागिता करेंगे। राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  आशीष कुमार ने कहा कि आनंद सभा के अंतर्गत हमारा लक्ष्य है कि विद्यालयों में आनंद सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन के गहरे मूल्यों से जोड़ा जाए। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में एक सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रयास है। जब शिक्षक स्वयं इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे, तभी वे विद्यार्थियों तक इन्हें प्रभावी ढंग से पहुँचा पाएंगे। आनंद सभा मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में एक महत्वाकांक्षी सतत प्रयास है। राज्य आनंद संस्थान के निदेशक  सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि आनंद सभा विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास और आंतरिक आनंद का एक सशक्त माध्यम है। यह केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की ओर एक यात्रा है। कार्यशालाओं के माध्यम से हम शिक्षकों को तैयार कर रहे हैं, जिससे वे विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ सकें। आनंद सभा विद्यार्थियों को केवल सफल नागरिक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह पहल शिक्षा प्रणाली को केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन-कौशल, आंतरिक आनंद एवं समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने का प्रयास है। विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थी के भावी जीवन को दक्षता से जीने का आधार बनाती है। इन कार्यशालाओं में प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षक भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें विद्यालयों में आनंद सभा के संचालन के लिये तैयार करेगा। कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। प्रत्येक कार्यशाला 6 दिन की आवासीय अवधि में होगी। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक भाग लेंगे। प्रशिक्षण में संवाद सत्र, समूह चर्चा, समझ-सुविधा-संबंध की चर्चा, अभ्यास पुस्तिका की गतिविधियाँ और विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद की तकनीकें शामिल होंगी। आनंद सभा का महत्व विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थियों को दक्षता से जीवन जीने का आधार प्रदान करती है। लेकिन शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को परिपूर्ण जीवन जीने के योग्य बनाना भी है। इसी दृष्टि से राज्य आनंद संस्थान ने आनंद सभा की परिकल्पना की है। आनंद सभा में विद्यार्थी किसी विषय की पढ़ाई नहीं करते, बल्कि जीवन कौशल और मानवीय मूल्यों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझते हैं। इसमें संवाद, सहयोग, क्षमा, कृतज्ञता, संकल्प शक्ति, समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी केवल सफल ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त होकर परिपूर्ण जीवन जी सकें। साथ ही जीवन के विभिन्न आयामों स्वयं, परिवार, समाज एवं प्रकृति के साथ हमारे संबंधों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है। कार्यशाला के सत्रों में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर विशेष बल दिया जाता है। स्वयं और शरीर के अंतर को समझना, संबंधों में संवेदनशीलता विकसित करना, क्षमा मांगने और क्षमा करने का महत्व, कृतज्ञता का भाव, दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति, तथा संकल्प शक्ति का सकारात्मक उपयोग जैसे विषयों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिखाया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आंतरिक परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रारंभ करना है। जब विद्यार्थी इन मूल्यों को अनुभव के स्तर पर समझने लगते हैं, तो उनका व्यवहार, दृष्टिकोण और जीवनशैली सकारात्मक रूप से परिवर्तित होने लगती है।  

योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मेडिकल कॉलेज के बगल में निशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

लखनऊ  तथागत बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में राजकीय नर्सिंग कॉलेज की स्थापना का मार्ग सोमवार को प्रशस्त हो गया। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए कुशीनगर के मेडिकल कॉलेज (स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय) के बगल में स्थित सीलिंग भूमि में से 0.405 हेक्टेयर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने को मंजूरी मिल गई है।  केंद्र सहायतित योजना के तहत भारत सरकार ने प्रदेश को 27 नर्सिंग कॉलेज आवंटित किए हैं। इन नर्सिंग कॉलेजों में जनपद कुशीनगर भी शामिल है। केंद्र सरकार की तरफ से प्रति नर्सिंग कॉलेज की लागत 10 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें 60 प्रतिशत केंद्र का अंश होगा जबकि 40 प्रतिशत राज्यांश है।  कुशीनगर में राजकीय नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए पडरौना तहसील के मौजा रामपुर में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के बगल में 1.054 हेक्टेयर सीलिंग भूमि में से 0.405 हेक्टेयर भूमि का निशुल्क हस्तांतरण होना था। यह भूमि पडरौना-कुबेरस्थान मुख्य मार्ग से 500 मीटर दक्षिण में स्थित है। राजकीय नर्सिंग कॉलेज को निशुल्क भूमि हस्तांतरण के लिए प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को मंजूरी दे दी। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में राजकीय नर्सिंग कॉलेज की स्थापना से उच्च स्तरीय चिकित्सा में सहायता तो मिलेगी ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन होगा।

सीएम योगी बोले: यूपी अब वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रहा है

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोक भवन में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के नव चयनित लेखा परीक्षकों को नियुक्ति-पत्र वितरित किया। कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, सचिव वित्त संदीप कौर, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत आदि उपस्थित थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में हुए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते भारत के साथ उत्तर प्रदेश ने भी नई पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले और उसके बाद के उत्तर प्रदेश का अंतर किसी से छिपा नहीं है और यह परिवर्तन हर क्षेत्र में देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की प्राथमिकता कानून का राज और सुरक्षा होती है, लेकिन इसके साथ ही बेहतर वित्तीय प्रबंधन और अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है। यदि वित्तीय अनुशासन नहीं होता और बिना बजट के खर्च होते, तो उत्तर प्रदेश आज बीमारू राज्य की छवि से बाहर नहीं निकल पाता। योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित करीब 500 नव चयनित युवाओं के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण जेपीएनआइसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) है। जिसकी प्रारंभिक लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 860 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना आज भी अधूरी है। मुख्यमंत्री ने 2017 के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कोई बैंक उत्तर प्रदेश को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने बताया कि सरकार ने निर्णय लिया कि बिना कर्ज लिए वित्तीय अनुशासन के साथ विकास कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज स्थिति बदल चुकी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया, जो करीब 600 किलोमीटर लंबा है और जिस पर 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इसके साथ ही नौ इंडस्ट्रियल और लाजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 7000 एकड़ भूमि ली गई है। कुल मिलाकर इस परियोजना पर लगभग 42 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज बड़े प्रोजेक्ट के लिए बैंक स्वयं निवेश की पेशकश करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश अब आत्मनिर्भर वित्तीय प्रबंधन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले तो प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के कई घोटाले हुए, लेकिन वर्तमान सरकार ने वित्तीय कुप्रबंधन को सुधारते हुए प्रदेश को अनुशासित वित्तीय ढांचे में आगे बढ़ाया है, जिसके परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वित्तमंत्री के जिले में किसका चयन हुआ उन्हें भी नहीं पता मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले हर पेपर लीक हो जाता था लेकिन अब इसकी पुख्ता व्यवस्था की गई है। उन्होंने वित्त मंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि शाहजहांपुर से कई कैंडिडेट चयनित हुए हैं। वित्त मंत्री वहीं के हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि किसका चयन हो रहा है। पहले पेपर लीक होता था तो जो बचा रहता था वह चाचा भतीजे पूरा कर देते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ की मुस्लिम बेटी का चयन हुआ है। यह सबूत है कि कहीं किसी भी तरह का भेदभाव नहीं हुआ है। इसके लिए बोर्ड को बधाई। जो भी युवा योग्य होगा उसे नौकरी मिलेगी और अयोग्य लोगों की दाल नहीं गलेगी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र पाने वालों में बड़ी संख्या में बेटियां है। यह साबित करता है कि बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं और उन्हें हर हाल में अधिकार देना पड़ेगा। कोई कितना भी विरोध कर ले, लेकिन बेटियों को कोई पीछे नहीं कर सकता है।  

महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई केकती बाई की जिंदगी

रायपुर सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जीवंत तस्वीर भी बन गया।इसी चौपाल में सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसने सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को भावनात्मक रूप से उजागर किया। ग्राम सरोधी की निवासी मती केकती मरावी, अपने पति  राजेंद्र मेरावी और तीन बच्चों—चिंरजीव, किरण और विक्रांत के साथ एक साधारण किसान परिवार से जुड़ी हैं। खेती-किसानी ही उनके जीवन का मुख्य आधार है, लेकिन सीमित आय के बीच परिवार का खर्च चलाना हमेशा एक चुनौती रहा है। केकती बाई बताती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नई रोशनी लाई है। अब तक उन्हें योजना की 26 किश्तें मिल चुकी हैं, जिससे वे घर के छोटे-छोटे खर्चों में हाथ बंटा पा रही हैं। पहले जहां हर छोटी जरूरत के लिए सोच-विचार करना पड़ता था, वहीं अब उनके पास आत्मनिर्भरता का एक आधार बन गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है और रसोई का काम आसान हुआ है। केकती बाई केवल अपने परिवार तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की अध्यक्ष भी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपए का अनुदान मिला है, जिससे वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भावुक होते हुए केकती बाई ने कहा कि आज उनका परिवार पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी महसूस करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं सही हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक मदद नहीं देतीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोलती हैं।

ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, विद्वता और कला का शिखर रही है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है। एक विश्वविद्यालय शिक्षा का केन्द्र होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण का भी स्थल होता है। ऋषि गालव के नाम पर बनने वाला यह संस्थान हमारी आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सुसज्जित कर राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत बनाएगा। मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक श्रद्धेय सदाशिव गणेश गोखले का त्याग पूजनीय है, उन्होंने 85 वर्ष पहले 21 जुलाई 1941 को इस समिति नींव रख पराधीनता के कठिन काल में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। एक स्कूल से शुरू हुआ यह सफर चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी तक पहुंचा। वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऋषि गालव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की शिक्षा भी छात्रों को मिलेगी। इसका लक्ष्य ऐसा नागरिक तैयार करना है, जो ज्ञानवान, चरित्रवान, नवाचारी और समाज के लिए उत्तरदायी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण, कंस वध के बाद शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे और इस दौरान उन्होंने सुदामा से मित्रता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। यह इस बात का संकेत है कि गरीब-अमीर के बीच कोई परदा नहीं होना चाहिए। इसी समय हमें द्रोणाचार्य और द्रुपद के संदर्भ से शिक्षा के दुरूपयोग का उदाहरण भी प्राप्त होता है, परंतु नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से मानवता के मूल्यों के प्रसार का उदाहरण भी भारतीय ज्ञान परम्परा में विद्यमान है। इसी भाव का अनुसरण करते हुए प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाओं तक राष्ट्रवादी विचारों का विस्तार लगातार जारी है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा की गई आरंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय सरकार और समाज के साझा प्रयासों का एक सजीव उदाहरण बनेगा। राष्ट्रवादी विचारों को समर्पित इस विश्वविद्यालय की पूर्ण गौरव और गरिमा के साथ स्थापना में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी इै, इसे आधार मानकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। इस क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरू का सम्मानजनक और श्रद्धापूर्ण संबोधन प्रदान किया गया है। संपूर्ण प्रदेश में गुरू पूर्णिमा का आयोजन भी इसी क्रम का नवाचार है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई। पहले कई-कई वर्षों तक दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं होते थे, अब हर साल हर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह किए जा रहे हैं। तात्या टोपे, क्रांतिसूर्य टंट्या भील और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर आरंभ किए गए विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय स्थापित किया गया। सागर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय पहले से ही था, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय आरंभ किया गया। प्रदेश के सभी 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना कर इन्हें नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहुसंकाय कॉलेजों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य भारत शिक्षा समिति को ऋषि गालव की गौरवशाली परम्परा को विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अगले साल गुरूपूर्णिमा तक आरंभ करने का संकल्प पूर्ण हो यही कामना है। मनुष्य के साथ परिवेष का विकास ही वास्तविक विकास है-  सुरेश सोनी मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य  सुरेश सोनी ने कहा कि सड़क, भवन व अन्य अधोसंरचनाओं का निर्माण एवं आविष्कार केवल परिवेश का विकास है। वास्तविक विकास वह होता है जिसमें मनुष्य के साथ परिवेश का भी विकास हो। मनुष्य अधिक संवेदनशील, विचारवान व व्यापक दृष्टिकोण वाले हों। इसी पुनीत उद्देश्य को लेकर मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। विश्वविद्यालय द्वारा रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ मनुष्य के चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया जायेगा। साथ ही भरोसा जताया कि यहाँ पढ़कर निकले विद्यार्थी नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय की तरह विश्वभर में भारतीय ज्ञान का परचम लहरायेंगे। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति भी इसी भावना के साथ बनाई गई है कि ज्ञान, चरित्र व संस्कार के साथ युवा अपने पैरों पर खड़े हों। साथ ही दूसरों को भी रोजगार व नौकरी देने वाले बनें।  सोनी ने उपकरण एवं गैजेट्स इत्यादि पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चेतन व अचेतन के समन्वय से हम आगे बढ़ेंगे तो अच्छा परिवार, अच्छा समाज व अच्छा देश तैयार कर सकेंगे। साथ ही पर्यावरण जैसी समस्याओं के समाधान का मार्ग भी हम निकाल सकेंगे। उन्होंने कहा हमारी दृष्टि ऐसी होना चाहिए जो आधुनिकता व मूल परंपरा के साथ समन्वय बनाकर विकास का मार्ग प्रशस्त करती हो।  सोनी ने कहा कि एआई का उपयोग तो करें पर अपने बौद्धिक कौशल को कम न होने दें। केवल सैन्य शक्ति की बदौलत देश महान नहीं बनते :  अशोक पाण्डे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्यभारत प्रांत के संघचालक  अशोक पाण्डे ने कहा कोई भी देश केवल सैन्य शक्ति की बदौलत महान नहीं बन सकता। महान बनने के लिए शिक्षा व संस्कारों की जरूरत होती है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना इसी भाव के साथ की जा रही है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों की स्थापना है : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों को स्थापित करना शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होता है। … Read more

पीएम-कुसुम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार पूरी ऊर्जा के साथ कार्य करें। हमें प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2030 के लिये तय किये गये लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाना है। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को हम सब मिलकर दूर करेंगे। मंत्री  शुक्ला पीएम-कुसुम योजना (कंपोनेंट ‘अ’ एवं ‘स’) के अंतर्गत सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव, एमडी मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम  अमनवीर सिंह बैंस, जीआईजेड के प्रोजेक्ट हेड  बर्नार्ड और सोलर एनर्जी डेवलपर्स मौजूद थे। कार्यशाला में मंत्री  शुक्ला एवं अन्य अतिथियों ने कुसुम योजना अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले सौर संयंत्रों के ग्रिड पर लोड संबंधी रिपोर्ट का विमोचन भी किया। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार तीव्र गति से हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत सौर परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत समर्थन प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों एवं उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये पॉवर परचेज एग्रीमेंट की प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है तथा डेवलपर्स को समयबद्ध स्वीकृतियां प्रदान करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इससे परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो सकेंगी। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि राज्य में वृहद स्तर पर सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा रही है। इसके लिए तकनीकी मूल्यांकन, ग्रिड समन्वय एवं आवश्यक आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सौर परियोजनाओं में आने वाली तकनीकी एवं संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से कार्य किया जा रहा है। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं डेवलपर्स, यूटिलिटीज एवं अन्य हितधारकों के लिए उपयोगी मंच प्रदान करती हैं, जहां वे अपने अनुभव साझा कर बेहतर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। एसीएस नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा  वास्तव ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का क्रियान्वयन राज्य में सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ उनके तकनीकी एवं वाणिज्यिक पक्षों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एमडी ऊर्जा विकास निगम  बैंस ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य डेवलपर्स, यूटिलिटीज एवं अन्य संबंधित हितधारकों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना है, जिससे सौर ऊर्जा परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश में “सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना” के अंतर्गत 493 उपकेंद्रों के माध्यम से लगभग 4022 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिये जीआईजेड, पीआरडीसी एवं आई-डेक की टीमें उपकेंद्रों के तकनीकी एवं कंडिशनल आंकलन का कार्य कर रही हैं। कार्यशाला में रिएक्टिव पॉवर मैनेजमेंट, ग्रिड स्टडीज, टाइम सीरीज लोड फ्लो विश्लेषण, सोलर पीवी प्रोजेक्ट डेवलपमेंट, गुणवत्ता प्रबंधन, सोलर मॉड्यूल की कार्यक्षमता एवं प्रदर्शन तथा जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जा रही है। विकासकों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये जा रहे हैं। मंगलवार को कार्यशाला का समापन होगा।  

मंगलवार को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा शिक्षामित्र सम्मान समारोह का प्रदेशस्तरीय आयोजन

गोरखपुर  शिक्षामित्रों के मानदेय में 80 प्रतिशत वृद्धि का उपहार देकर मान बढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेसिक शिक्षा की सुदृढ़ता में उनके योगदान के लिए सम्मान भी देने जा रहे हैं। शिक्षामित्रों को सम्मानित करने के लिए प्रदेशस्तरीय भव्य आयोजन मंगलवार को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। इस अवसर पर सीएम योगी शिक्षामित्रों को वृद्धि के बाद नियत मानदेय का प्रतीकात्मक चेक भी शिक्षामित्रों को सौंपेंगे।  उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात 1.43 लाख शिक्षामित्रों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय मिलता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों की शैक्षिक सेवा को सराहते हुए इसे बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। नया मानदेय अप्रैल माह से लागू हो गया है। मानदेय वृद्धि को सम्मान के साथ वितरित करने का शुभारंभ मंगलवार को समारोहपूर्वक गोरखपुर में सीएम योगी के सानिध्य में होगा। पहले मानदेय वृद्धि और अब सेवा के सम्मान की योगी सरकार की पहल से शिक्षामित्रों में उत्साह का जबरदस्त संचार देखा जा रहा है। शिक्षमित्रों के सम्मान समारोह को भव्य बनाने को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने जोरदार तैयारी की है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में पूर्वाह्न 11 बजे से होने वाले समारोह में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह भी मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री, 10 शिक्षामित्रों को नए मानदेय (18 हजार रुपये) की धनराशि का प्रतीकात्मक चेक वितरित करेंगे।  ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का सीएम करेंगे विमोचन   कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिक्षा विभाग के उपलब्धिपरक स्टालों का अवलोकन करने के साथ ही विद्यार्थी नेतृत्व आधारित प्रार्थना सभा की गतिविधियों पर आधारित ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन भी करेंगे। मुख्यमंत्री की सहभागिता वाले भव्य समारोह के समानांतर राज्य के सभी जिलों में भी आयोजन किए जाएंगे। कार्यक्रम को लेकर शिक्षामित्रों में भारी उत्साह  गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री का संबोधन सुनने के लिए शिक्षामित्रों में खासा उत्साह का माहौल है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों की सहभागिता रहेगी। उन्होंने कहा कि मानदेय वृद्धि के जरिये मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों की शैक्षिक सेवा का मान बढ़ाया है। उनकी पहचान और प्रतिष्ठित हुई है और वे अब आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे। सरकार की तरफ से पहले मानदेय वृद्धि और अब सम्मान की पहल से शिक्षामित्रों का मनोबल बढ़ेगा और इससे शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाई मिलेगी।

भारत को विकसित बनाने में विद्यार्थी करें सहभागिता

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि समाज की सेवा में ही जीवन की सार्थकता है। समाज सेवा द्वारा वंचित वर्ग का व्यक्ति राज्यपाल बन सकता है। चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है। भारतीय संस्कृति के ध्येय 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के अनुसार शिक्षित व्यक्ति का परम कर्तव्य वंचितों और गरीबों की खुशहाली और उत्थान के लिए कार्य करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा है कि आत्मविश्वासी, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी शिक्षा और प्रतिभा के द्वारा आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत बनाने में सहभागिता करें। राज्यपाल  पटेल एल.एन.सी.टी. विश्वविद्यालय के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सांसद  रवि किशन, सांसद  राजीव शुक्ला, सांसद  देवूसिंग चौहान, फिल्म अभिनेता एवं कास्टिंग डायरेक्टर  मुकेश छाबड़ा, सेज समूह के चेयरमैन  संजीव अग्रवाल को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से विभूषित किया। फार्मेसी, विधि, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, पत्रकारिता और मेडिकल साइंस के क्षेत्र में पी.एच.डी. उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका और  जय नारायण चौकसे की आत्मकथा पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षांत शपथ भावी जीवन की मार्गदर्शिका है। प्राप्त उपाधि मन, वचन और कर्म से देश, समाज और मानव जाति की सेवा करने का संकल्प है, जिसका पालन 365 दिन करना दीक्षित विद्यार्थियों का दायित्व है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति परिवर्तनकारी कदम है। नीति ने शिक्षण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बनाया है। उन्होंने नीति के परिप्रेक्ष्य में तकनीकी संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। विश्वविद्यालयों से पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़कर आधुनिक आयामों को अपनाने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाएं। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाए। विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं नवाचार को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बनाएं। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे ए.आई., डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित तकनीकों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया। विद्यार्थियों में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, समसामयिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप, उद्यमिता और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराकर “‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब प्रोवाइडर’” बनाने के लिए कहा है। विद्यार्थियों का अपनी प्रतिभा और चिंतन से समाज, राष्ट्र और स्वयं के उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया गया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण मती कृष्णा गौर ने कहा कि समारोह में दीक्षित हर विद्यार्थी शिक्षा, संस्कार, नवाचार, कौशल का पुंज है। राष्ट्र के विकास के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कहा कि युग दृष्टा प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी की योग्यता और दायित्वबोध को पहचानते हुए विकसित भारत एट 2047 का संकल्प लिया है। संकल्प की सफलता के लिए हर युवा को सकारात्मकता, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ राष्ट्र के लिए समर्पित होना होगा। उन्होंने कहा कि प्राप्त उपाधि समाज के लिए उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि मंचासीन विभूतियों की सकारात्मकता, मानवीयता और विनम्रता को आत्मसात कर राष्ट्र समाज के उत्थान में योगदान दें। सांसद  देवूसिंह चौहान ने उनके आकाशवाणी के अभियंता की सुरक्षित सेवा का त्याग कर राजनैतिक जीवन में प्रवेश की जानकारी दी। विद्यार्थियों से कहा कि निरंतर मेहनत करना ही जीवन में सफलता का आधार है। सफलता निरंतर प्रयास करने वालों को ही चुनती है। सांसद  राजीव शुक्ला ने स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि जिन्हें पदक नहीं मिले है, वह हताश नहीं हो। हुनर प्राप्त करें। उन्होंने हुनर के साथ वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का उल्लेख कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया। अभिनेता अभिनेता एवं सांसद  रवि किशन ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन का लक्ष्य तय करें। उसके लिए निरंतर अथक प्रयास करने पर ही सफलता मिलती है। उन्होंने उनके जीवन के संघर्षों की कथा सुनाते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एल.एन.सी.टी. समूह के चेयरमैन  जय नारायण चौकसे ने और आभार ज्ञापन सचिव  अनुपम चौकसे ने किया।

निष्पक्ष भर्ती से बढ़ा विश्वास, बिना सिफारिश नौकरी मिलने पर युवाओं ने जताया मुख्यमंत्री का आभार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया को मजबूती देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग तथा स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए चयनित कुल 500 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए युवाओं के चेहरे पर उत्साह और गर्व साफ झलक रहा था। योगी सरकार में सिफारिश या दबाव की नहीं पड़ती जरूरत नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चयन होना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक गर्व की बात यह है कि उन्हें स्वयं मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ। लखनऊ की आयुषी त्रिपाठी ने कहा कि यह उनके जीवन का ऐतिहासिक क्षण है। योगी सरकार में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है, जहां किसी सिफारिश या दबाव की जरूरत नहीं पड़ती। आयुषी ने युवाओं को संदेश दिया कि वे मेहनत और ईमानदारी से तैयारी करें, सफलता अवश्य मिलेगी।  महिलाओं को बराबरी का अवसर दे रही योगी सरकार शाहजहांपुर की सुनेहा मिश्रा ने कहा कि नियुक्ति पत्र पाकर वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। इस बार बड़ी संख्या में महिलाओं का चयन होना इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार महिलाओं को बराबरी का अवसर दे रही है। सुनेहा ने विश्वास दिलाया कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, वह उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगी। अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भर्ती प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया सरल, सुगम और पारदर्शी रही। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है और योग्य अभ्यर्थियों को उनका अधिकार मिल रहा है। कम शुल्क और बिना किसी बाधा के पूरी प्रक्रिया संपन्न होना युवाओं के लिए बड़ी राहत है। यूपी में महिलाएं बना रहीं अलग पहचान  झांसी की वंदना कुशवाहा और मयंक कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना अत्यंत ही गर्व का विषय है। योगी सरकार की नीतियों के कारण महिलाओं को अधिक अवसर मिल रहे हैं और वे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रदेश के सुल्तानपुर, झांसी, आजमगढ़, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या समेत कई जिलों से आए अभ्यर्थियों ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता ने उनके विश्वास को मजबूत किया है। इनको मिला सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पत्र  सहकारी समिति एवं पंचायत लेखा परीक्षा के पद पर चयनित सुल्तानपुर के राम कुमार चौरसिया, झांसी की वंदना कुशवाहा, आजमगढ़ के देवव्रत यादव व विवेक सिंह, लखनऊ की आयुषी त्रिपाठी, मऊ के सौरभ कुमार गोंड, शाहजहांपुर की सुनेहा मिश्रा, वाराणसी के राम कुमार गुप्ता तथा गोरखपुर की पूर्णिमा सिंह को सीएम योगी ने स्वयं नियुक्ति पत्र सौंपे। इसी प्रकार स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए लेखा परीक्षकों में पीलीभीत के वकार हुसैन अंसारी, सोनभद्र की कुमारी प्रांशु सिंह, हमीरपुर के सुधीर यादव, झांसी की तनु प्रजापति, शाहजहांपुर के अमित कुमार, प्रयागराज की बबीता, अयोध्या के सुधीर कुमार शुक्ला, लखनऊ की अना अली, गोरखपुर के सर्वजीत सिंह कोहली, बलिया की श्वेता को सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पत्र पाने का अवसर मिला।