samacharsecretary.com

खाट में बैठकर मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से किया सीधा संवाद, सुनी समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश

रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज  खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ग्राम सरोधी पहुंचे, जहां उन्हें अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह, आत्मीयता और अपनत्व का अनोखा दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें देखने और उनसे मिलने उमड़ पड़े। गांव की महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने महुआ, चार, आम और रखियां बड़ी भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्कूली बच्चों ने अपने हाथों से तैयार गुलमोहर और कनेर के फूलों के गुलदस्ते भेंट कर अपनी खुशी और सम्मान व्यक्त किया। यह स्वागत ग्रामीण संस्कृति और सादगी की जीवंत झलक बन गया। ग्राम सरोधी के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में कटहल और गुलमोहर के पेड़ों की छांव तले मुख्यमंत्री ने खाट पर बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस सहज और आत्मीय वातावरण में उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से हम आपके बीच आकर आपका हाल-चाल जानने, सुख-दुख सुनने और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने आए हैं। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा, जिसमें सरकार स्वयं आपके द्वार तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह समस्याओं का संकलन कर समाधान शिविरों के माध्यम से उनका निराकरण किया गया था और इस वर्ष भी उसी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी रूप में लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार को अभी महज 28 माह हुए हैं, लेकिन मोदी की गारंटी के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है।  उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है, जिससे वनांचल क्षेत्र के लोगों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही  रामलला दर्शन योजना और तीर्थ यात्रा दर्शन योजना के माध्यम से लोगों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने विशेष रूप से पेयजल समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के साथ और समयबद्ध तरीके से किया जाए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम सरोधी एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। इनमें राशन पीडीएस दुकान की स्थापना, नवीन ग्राम पंचायत भवन, पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नए भवन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही गंडई से बकरकट्टा मार्ग का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण, तेन्दूभाठा से जोम ओटेबंध तक सड़क निर्माण, साल्हेवारा-पंडरापानी मार्ग पर मगुरदा नाला पर पुल निर्माण, पीएचसी बकरकट्टा में 108 एम्बुलेंस की तैनाती, बकरकट्टा से नवागांव सड़क का नवीनीकरण तथा क्षेत्र में 33 केवी सब स्टेशन की स्वीकृति दी गई।  इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।

सुशासन तिहार: सरोधी में महिला स्व सहायता समूह ने मुख्यमंत्री को भेंट की स्थानीय उत्पादों की टोकरी

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की महिलाओं ने मुख्यमंत्री को आम, रखिया बड़ी, कुटकी, चार और पपीता से सजी टोकरी भेंट की। महिला समूह द्वारा भेंट किए गए ये स्थानीय उत्पाद गांव की समृद्ध परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।  मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए महिलाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित किया और कहा कि स्व सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान समूह की महिलाओं ने बताया कि वे स्थानीय संसाधनों से उत्पाद तैयार कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और शासन की योजनाओं से उन्हें निरंतर सहयोग मिल रहा है।

झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर ड्रोन ‘नेत्रा’ और ‘स्विच’ से सुरक्षा बलों को मिली निर्णायक बढ़त

रांची झारखंड में माओवादियों के विरुद्ध अभियान में हाल के वर्षों में मिली सफलता के पीछे उन्नत तकनीक, हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से लैस नेत्रा की भूमिका भी सराहनीय है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इस हाईटेक ड्रोन की नजर से माओवादी लाख कोशिश के बावजूद नहीं बच पा रहे हैं। बोकारो व हजारीबाग के वन क्षेत्र में एक-एक करोड़ के इनामी कई बड़े माओवादियों के विरुद्ध सफल अभियान की बात हो या फिर सारंडा में एक साथ 17 माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने का वीरता पूर्ण कार्य हो, माओवादियों के विरुद्ध अभियान में शामिल जवानों के साथ नेत्रा कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। नेत्रा हाईटेक है। यह सीआरपीएफ के लगभग सभी कैंप में है। यह पांच किलोमीटर तक का चक्कर लगाने में सक्षम है। घने जंगल क्षेत्र में सूक्ष्म गतिविधियों तक को देखने में सक्षम है। अगर कोई छुप जाए तो नहीं दिखेगा, लेकिन वह कब तक छुपेगा। सीआरपीएफ का यह नेत्रा दिनभर उड़ता रहता है। कहीं भी हल्की भी हलचल दिखती है तो उसे यह नेत्रा अपने कैमरे में कैद कर लेता है। देता है सटीक लोकेशन, सुरक्षा कैंपों की भी करता है निगरानी किसी भी कैंप की सुरक्षा में संतरी ड्यूटी लगाई जाती है। जंगल में सुरक्षा बलों के कैंप के बीच में अगर 10 किलोमीटर की भी दूरी है तो नेत्रा उस दूरी को नाप देता है। दोनों सुरक्षा कैंपों के बीच से कोई गुजरेगा तो यह हाईटेक ड्रोन उसे आसानी से अपने कैमरे में कैद कर सुरक्षा बलों को इसकी सूचना दे देगा। यह सटीक लोकेशन देता है। अगर माओवादी कहीं दिखे तो उनके लॉन्गीट्यूड व लेटीट्यूड के साथ लोकेशन मिलने पर अभियान में शामिल सुरक्षा बल आसानी से उनकी घेराबंदी कर लेते हैं, जिससे उनके बचकर भागने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है। यह घने जंगल में भी इंसान की मौजूदगी की जानकारी ले लेता है। रात व कम रोशनी में भी यह बेहद प्रभावी है। स्विच ड्रोन भी है बेहद कारगर माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों के पास एक अन्य ड्रोन भी है, जिसका नाम स्विच है। यह बिना आवाज के कम ऊचाई पर उड़ान भरता है और माओवादियों के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहा है। दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने के लिए इसमें भी लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता है। एक साल के भीतर मिली बड़ी सफलताएं     21 अप्रैल 2025 : बोकारो जिले के ललपनिया स्थित लुगू पहाड़ी पर सुरक्षा बलों व पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक सहित आठ बड़े माओवादी मारे गए।     16 जुलाई 2025 : बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र के बिरहोरडेरा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का इनामी माओवादी कुंवर मांझी ढेर। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के एक जवान परनेश्वर कोच बलिदान हो गए थे।     15 सितंबर 2025 : हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन, 25 लाख का इनामी रघुनाथ हेम्ब्रम व दस लाख का इनामी बीरसेन गंझू मारा गया।     17 अप्रैल 2026 : हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने आपरेशन कोतीनीर चलाया, जिसमें 15 लाख का इनामी सहदेव महतो उर्फ अनुज महतो सहित चार माओवादी ढेर हो गए।     22 जनवरी 2026 : पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी अनल दा सहित 17 माओवादी ढेर। आपरेशन मेगाबुरू में मिली यह सफलता।     माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों का ड्रोन कैमरा बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। इनकी बदौलत बेहतर तरीके से अभियान चल रहा है। – साकेत कुमार सिंह, आईजी सीआरपीएफ, झारखंड चैप्टर  

कैबिनेट के निर्णय के तहत टावर बेस पर 200% और लाइन कॉरिडोर पर 30% का होगा भुगतान

लखनऊ  योगी सरकार ने बिजली की हाईटेंशन लाइनों (765, 400, 220 और 132 केवी) से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब टावर (खंभे) के नीचे आने वाली जमीन पर किसानों को 200% यानी जमीन की कीमत का दोगुना मुआवजा मिलेगा। इसके साथ ही जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर), वहां जमीन की कीमत का 30% मुआवजा दिया जाएगा। योगी कैबिनेट का इस निर्णय से किसानों को कुल मिलाकर 21% से 33% तक अधिक लाभ मिलने का अनुमान है। पहले यह थी व्यवस्था ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने बताया कि 2018 से पहले टावर के नीचे या लाइन के कॉरिडोर में आने वाली जमीन पर प्रायः कोई मुआवजा नहीं मिलता था। 2018 में कुछ सुधार हुआ और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया, लेकिन लाइन के नीचे (कॉरिडोर) आने वाली जमीन के लिए तब भी कोई व्यवस्था नहीं थी। इससे किसानों में असंतोष रहता था और परियोजनाओं को पूरा करने में भी बाधाएं आती थीं। अब यह किया गया बदलाव नई व्यवस्था में टावर (खंभे) के नीचे की जमीन पर 200% (दोगुना) मुआवजा निर्धारित किया गया है। तारों के नीचे आने वाले क्षेत्र (रो कॉरिडोर) पर 30% मुआवजा प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है। मुआवजा जिलाधिकारी द्वारा तय सर्किल रेट के आधार पर दिया जाएगा। किसानों को होगा आर्थिक लाभ इस फैसले से अब किसानों को पहले की तुलना में काफी ज्यादा और न्यायसंगत मुआवजा मिलेगा। जहां पहले या तो मुआवजा नहीं मिलता था या कम मिलता था, वहीं अब जमीन के उपयोग पर सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बिजली परियोजनाओं में उनकी सहमति और सहयोग भी बढ़ेगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह निर्णय किसानों के हित में एक बड़ा कदम है। इससे उन्हें उचित मुआवजा मिलेगा और विकास कार्यों के साथ किसान हितों का संतुलन भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे भविष्य में पारेषण परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।

नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी झटका, शुभेंदु अधिकारी की बड़ी जीत

 पश्चिम बंगाल   पश्चिम बंगाल और असम समेत पांच राज्यों में नतीजों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। बंगाल में बीजेपी 200 से ज्यादा सीटें जीतती दिख रही है। असम में भी BJP की आंधी आई है और पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल रहा है। तमिलनाडु में इस बार खेल ही बदल गया। एक्टर विजय की टीवीके बहुमत के करीब पहुंच गई है। इधर केरल में कांग्रेस गठबंधन ने जीत का दावा कर दिया है। पुडुचेरी में फिर से एनडीए की सरकार रिपीट होती नजर आ रही है। भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पार्टी समर्थकों को संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, 'पिछले साल 14 नवंबर को जब बिहार चुनाव के नतीजे आए थे, तब मैंने यहीं इसी जगह से आप सबको कहा था गंगा जी बिहार से आगे बहते हुए गंगासागर तक जाती हैं। आज बंगाल की जीत के साथ गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक कमल ही कमल खिला हुआ है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और अब पश्चिम बंगाल। आज मां गंगा के ईर्द-गिर्द बसे इन राज्यों में भाजपा, NDA सरकार है।' पश्चिम बंगाल में संवेदनशील माहौल देखते हुए मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बंगाल में एक तरफ जश्न मनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ, आसनसोल, बैरकपोर और बाकुरा में टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं में झड़प के मामले सामने आ रहे हैं। बंगाल में संभावित चुनावी हिंसा को देखते हुए ही केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है। इस बार तमिलनाडु, केरल और पुडुच्चेरी में भी जमकर मतदान हुआ था। असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के चुनाव परिणाम असम में लगातार तीसरी बार बीजेपी हैट्रिक लगा रही है। राज्य की 126 विधानसभा सीट से 722 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य को समेटे हुए इईवीएम, 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर खोली गईं। राज्य में मतदान 9 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 85.96 प्रतिशत मतदान हुआ था। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK एक बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में चुनाव लड़ रही थी, जहां उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी AIADMK के अलावा, अभिनेता और नेता विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) और सीमान की एनटीके जैसी नई पार्टियां भी मैदान में थीं। डीएमके राज्य में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की उम्मीद कर रही थी लेकिन टीवीके ने उसे झटका दे दिया है। केरल यूडीएफ और पुडुचेरी में एनडीए अच्छी बढ़त बनाए हुए है।

SLP खारिज, पेपर लीक पर सख्त रुख कायम: राजस्थान SI भर्ती 2021 में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

जयपुर राजस्थान एसआई भर्ती पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चयनित उम्मीदवारों को राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने इस संबंध में दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि हुई है जिसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह ऐसी गंभीर अनियमितताओं से ग्रस्त चयन प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दे सकता, जहां राजस्थान में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ था. राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने आज इन मामलों की सुनवाई की. ये याचिकाएं राजस्थान हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के 4 अप्रैल 2026 के फैसले से उपजी थीं, जिसमें पूरी भर्ती रद्द कर नई परीक्षा के आदेश दिए गए थे. वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और पी.एस. पटवालिया की विस्तृत दलीलों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने की सहमति नहीं दी और याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोर्ट की गंभीर टिप्पणियां सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने नोट किया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के एक सदस्य की पेपर लीक से जुड़े मामले में गिरफ्तारी हुई थी, जिसकी जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी थी. यह गंभीर व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का संकेत देता है. कोर्ट ने जोर दिया कि ऐसी स्थिति में 'दागी' और 'निर्दोष' उम्मीदवारों को अलग करना ही कानूनी रूप से टिकाऊ रास्ता है, जो इस मामले में संभव नहीं था, इसलिए पूरी प्रक्रिया अविश्वसनीय हो गई. बेंच ने अपने पूर्व फैसले का हवाला दिया, जहां केवल 44 दागी एमबीबीएस उम्मीदवारों के कारण पूरे देश में परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जो परीक्षा धांधली के मामलों में सख्त मानक को रेखांकित करता है. परीक्षार्थियों की दलील याचिकाकर्ताओं ने दलीलें दी कि कोई बड़े पैमाने पर पेपर लीक नहीं था, जो सांख्यिकीय विश्लेषण और अंकों के बेल-कर्व वितरण पर आधारित थी. उनकी दलील थी कि केवल 6.3% उम्मीदवार ही कथित रूप से दागी थे, और अलगाव संभव था. इनमें से 838 से अधिक उम्मीदवारों को नियुक्ति मिल चुकी थी और वे दो वर्ष से अधिक सेवा दे चुके थे, जिसमें प्रशिक्षण पर भारी सार्वजनिक व्यय हुआ था. फिर भी, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निष्कर्ष में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया कि प्रक्रिया दोषपूर्ण थी.

सरकारी स्कूल छात्रों के लिए राहत: नौवीं–दसवीं में फेल विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा मौका

नई दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के उन विद्यार्थियों को एक और मौका दिया है जो नौवीं या 10वीं में लगातार असफल हो रहे हैं। निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) के माध्यम से 10वीं में दाखिले के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि सात जुलाई 2026 तय की गई है। साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पात्र विद्यार्थियों से संपर्क कर उन्हें इस योजना के लिए प्रेरित करें और आवश्यक दस्तावेज जुटाकर समय पर आवेदन सुनिश्चित करें। इस योजना का उद्देश्य स्कूल छोड़ने की कगार पर पहुंचे विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा में वापस लाना है, ताकि वे 10वीं पास कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकें। सिर्फ दिल्ली के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कर सकेंग आवेदन निर्देशों के अनुसार, केवल वही विद्यार्थी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे, जो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे और नौवीं या 10वीं में कम से कम दो बार फेल या कंपार्टमेंट लाए हैं। वहीं, जो विद्यार्थी पहली बार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में फेल हुए हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अपने स्कूल में ही पढ़ाई जारी रखनी होगी। दाखिले की पूरी प्रक्रिया आनलाइन एमआइएस माड्यूल के जरिए संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा पूरी की जाएगी। ये कक्षाएं दिल्ली के करीब 75 निर्धारित सरकारी स्कूलों में संचालित की जाएंगी, जहां अलग-अलग स्टडी सेंटर बनाए जाएंगे। निदेशालय ने कहा कि पांच विषयों तक का पंजीकरण शुल्क सरकार वहन करेगी, लेकिन परीक्षा शुल्क विद्यार्थियों को देना होगा। 300 रुपये की परीक्षा शुल्क तय परीक्षा शुल्क 300 रुपये प्रति विषय, प्रायोगिक के लिए 150 रुपये प्रति विषय और ट्रांसफर आफ क्रेडिट के लिए 230 रुपये प्रति विषय निर्धारित किया गया है। विद्यार्थियों को विषय चयन में भी विकल्प दिए गए हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान के साथ विज्ञान, पेंटिंग और गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थी डाटा एंट्री आपरेशन विषय को अतिरिक्त रूप से चुन सकते हैं।  

सुशासन तिहार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पीएम जनमन के हितग्राही को सौंपी खुशियों की चाबी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत जारी राज्यव्यापी दौरे में आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड के ग्राम सरोधी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सुभान सिंह मेरावी को उनके नवनिर्मित आवास की चाबी सौंपकर गृह प्रवेश कराया। सुभान सिंह ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री स्वयं उनके गांव आकर उन्हें यह सौभाग्य देंगे। उनके लिए यह केवल घर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।बउन्होंने बताया कि उन्हें वन अधिकार पट्टा के तहत 3 एकड़ 2 डिसमिल भूमि मिली है, जिस पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही उनकी पत्नी को महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता भी मिल रही है, जिससे घरेलू जरूरतों में सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

सुशासन तिहार: चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया। सरलाबाई मरावी, पति  लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

स्थानीय स्वाद को मिलेगी वैश्विक पहचान, पारंपरिक व्यंजनों को चिह्नित कर उनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग को दिया जाएगा बढ़ावा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सोमवार को कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने, किसानों को राहत, युवाओं के कौशल विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर रहा। इनमें एक महत्वपूर्ण निर्णय ‘एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी)’ योजना का रहा, जिसे प्रदेश की नई पहचान के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके साथ ही कैबिनेट ने सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए नई ट्रांसफर पॉलिसी को भी मंजूरी दे दी है।  ‘एक जनपद एक व्यंजन’: हर जिले का स्वाद बनेगा ब्रांड एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ की तर्ज पर ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत हर जिले के पारंपरिक व्यंजन को चिह्नित कर उसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना में गुणवत्ता सुधार, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और निर्यात अवसर विकसित करने पर विशेष फोकस रहेगा। खाद्य कारोबार से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को 25% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹20 लाख) दी जाएगी। इसके लिए ₹150 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा व जौनपुर की इमरती जैसे व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रांसफर पॉलिसी 2026-27: 31 मई तक होंगे स्थानांतरण कैबिनेट बैठक में अधिकारियों/कर्मचारियों की नई स्थानांतरण नीति 2026-27 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत, सभी ट्रांसफर 31 मई 2026 तक किए जाएंगे। नीति के तहत समूह ‘क’ व ‘ख’ के ऐसे अधिकारी, जिन्होंने किसी जनपद में 3 वर्ष या मंडल में 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं, उनका स्थानांतरण अनिवार्य होगा, जबकि विभागाध्यक्ष/मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अवधि इसमें शामिल नहीं होगी। मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होगी। समूह ‘क’ व ‘ख’ के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20% और समूह ‘ग’ व ‘घ’ के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत कुल कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10% की सीमा तक किए जा सकेंगे। समूह ‘ख’ व ‘ग’ के ट्रांसफर यथासंभव मेरिट आधारित ऑनलाइन प्रणाली से होंगे तथा समूह ‘ग’ में पटल/क्षेत्र परिवर्तन के नियमों का कड़ाई से पालन होगा। दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को सुविधा अनुसार तैनाती, आकांक्षी जनपदों में प्राथमिकता पोस्टिंग और स्थानांतरण सत्र के बाद समूह ‘क’ व ‘ख’ के ट्रांसफर हेतु मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। पीडब्ल्यूडी में सख्ती: गुणवत्ता से समझौता नहीं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यों की गुणवत्ता सुधारने और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर रोक लगाने के लिए कैबिनेट ने निविदा निस्तारण की नई प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ₹5 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए एसबीडी और ₹5 करोड़ से कम के कार्यों के लिए टी-1 व टी-2 प्रणाली लागू होगी। कम दर पर टेंडर लेने वाले निविदादाताओं से अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी अनिवार्य की गई है। 15% से अधिक कम दर वाले ठेकेदारों के चयन से पहले उनके निर्माणाधीन और पूर्ण कार्यों की गुणवत्ता की जांच होगी, जबकि 15% से कम दर पर बोली लगाने वाले ऐसे ठेकेदार जिनका प्रदेश में कोई कार्य नहीं चल रहा या पिछले दो वर्षों में कोई कार्य पूरा नहीं किया है, उनसे भी अतिरिक्त सिक्योरिटी ली जाएगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होगा। किसानों को राहत: हाईटेंशन लाइनों पर बढ़ा मुआवजा कैबिनेट ने बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अब 200% मुआवजा मिलेगा, जबकि लाइन के नीचे आने वाली जमीन पर 30% मुआवजा दिया जाएगा। इससे किसानों को कुल मिलाकर 21% से 33% तक अधिक लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल पार्क से औद्योगिक विकास को रफ्तार संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्कों का विकास किया जाना है। इसके लिए बंद पड़ी कताई मिलों की जमीन का उपयोग किया जाएगा। कैबिनेट ने 4 कताई मिलों की 251.8 एकड़ भूमि का हस्तकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के पक्ष में निशुल्क हस्तांतरण की मंजूरी दी। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। लखनऊ में 546 करोड़ की सड़क परियोजना राजधानी लखनऊ में आउटर रिंग रोड के रैथा अंडरपास से पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क तक 6 लेन के निर्माण तथा आईआईएम से रैथा अंडरपास मार्ग का 2 लेन में चौड़ाकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए ₹546.51 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इससे टेक्सटाइल पार्क की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ ही औद्योगिक विकास एवं परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी। अन्य अहम फैसले कैबिनेट ने 35 करोड़ पौधरोपण अभियान (₹147 करोड़ बजट), प्रत्येक जिले में वन ट्रिलियन डॉलर सीएम फेलोशिप कार्यक्रम के तहत एक ओटीडी फेलो (आर्थिक विकास) एवं एक ओटीडी फेलो (डेटा विश्लेषण) की तैनाती,  नए निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 का प्रवर्तन, फिरोजाबाद में निजी अमरदीप विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी और हाईकोर्ट रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 2 से बढ़ाकर अधिकतम 3 वर्ष करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं।