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हैदराबाद के पास भीषण सड़क हादसा: एक्टर भरत कांत और साई त्रिलोक का निधन

तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री से दुखद खबर सुनने को मिल रही है. जाने माने एक्टर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के. भरत कांत (भरत कांत या कट्टी भरत कांत) का निधन हो गया है. 31 साल के एक्टर की सड़क दुर्घटना में जान गई है. भरत कांत के साथ उनके दोस्त जी. साई त्रिलोक, जो कि पेशे से सिनेमेटोग्राफर और यूट्यूब आर्टिस्ट थे, उनकी भी मौत हुई है. जी. साई त्रिलोक की उम्र भी 31 साल थी. एक्टर के निधन की खबर से दुखी फैंस जानकारी के मुताबिक, रविवार तड़के हैदराबाद के पास आदिबाटला (Adibatla) के आउटर रिंग रोड पर भयानक सड़क हादसे में दोनों की जान गई. आदिबाटला पुलिस के मुताबिक, भरत कांत कार चला रहे थे. एग्जिट 12 के पास (बैंगलोर/तुक्कुगुडा और शमशाबाद के बीच) उन्होंने कंट्रोल खो दिया. उनकी गाड़ी आगे धीमी स्पीड में चल रहे कंटेनर लॉरी से टकरा गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लॉरी के पीछे के पहिए उखड़ गए और कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इस जानलेवा हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. दोनों पीड़ित आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के रहने वाले थे. बताया जा रहा है कि वे हैदराबाद की तरफ जा रहे थे. पुलिस को आशंका है कि ज्यादा स्पीड और ड्राइव करते हुए थकने के कारण ये हादसा हुआ. एक्सीडेंट के बाद तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने केस दर्ज किया है. शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और जांच चल रही है. भरत कांत की बात करें तो वो इंडस्ट्री के उभरते हुए एक्टर, डांसर और कंटेंट क्रिएटर थे. वे तेलुगु फिल्मों और शॉर्ट फिल्मों में नजर आए थे. इनमें टेनेंट और ग्रामम शामिल हैं. उनके इंस्टा पर 40 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. यूट्यूब पर 30 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं. वहीं साई त्रिलोक डिजिटल और फिल्म प्रोजेक्ट्स में सिनेमेटोग्राफर थे. इतनी कम उम्र में सामने आई निधन की खबर ने फैंस को तोड़ दिया है. सोशल मीडिया पर सभी उन्हें नम आंखों से विदाई दे रहे हैं. यूजर्स का कहना है अचानक से भरत के साथ ऐसा कुछ होगा, किसी ने इसकी कल्पना नहीं की थी.

पहला विश्व कप मेडल: साहिल जाधव ने डेनमार्क को हराकर रचा इतिहास

शंघाई विश्व यूनिवर्सिटी खेलों के मौजूदा चैंपियन साहिल जाधव ने शनिवार को तीरंदाजी विश्व कप के दूसरे चरण में पुरुष कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यह विश्व कप में उनका पहला पदक भी है। महाराष्ट्र के 25 वर्षीय तीरंदाज जाधव ने कांस्य पदक के प्लेऑफ मुकाबले में डेनमार्क के मार्टिन डैंसबो को 147-144 से हराकर मौजूदा टूर्नामेंट में भारत का पहला पदक हासिल किया। भारत ने इस पदक के साथ कंपाउंड वर्ग में अपने अभियान का भी समापन किया। इस वर्ग में भारत के अन्य खिलाड़ी पदक जीतने में नाकाम रहे थे। भारत को कंपाउंड टीम स्पर्धाओं में मजबूत टीम माना जाता है लेकिन उसकी सभी टीम शुरुआती दौर में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। भारत अब रविवार को प्रतियोगिता के समापन दिवस पर रिकर्व स्पर्धा में दो और पदक जीतने की कोशिश करेगा। भारतीय महिला टीम स्वर्ण पदक के लिए प्रतिस्पर्धा करेगी। इसके अलावा सिमरनजीत कौर सेमीफाइनल से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी। विश्व कप में अपना पहला पदक जीतने के लिए उन्हें एक जीत की जरूरत होगी। जाधव पहले सेट के बाद एक अंक से पीछे चल रहे थे क्योंकि 40 वर्षीय डैंसबो ने तीन परफेक्ट 10 के साथ शुरुआत की थी। लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दूसरे सेट में परफेक्ट 30 का स्कोर बनाया जबकि डैंसबो 27 का स्कोर ही बना पाए। इससे जाधव को कुल 59-57 की बढ़त हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद जाधव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने अंतिम नौ तीरों में से केवल दो अंक गंवाकर तीन अंक की यादगार जीत हासिल की। जाधव ने पहले दौर में हमवतन अभिषेक वर्मा को, प्री-क्वार्टर फाइनल में जर्मनी के रूवेन फ्लुस को और क्वार्टर फाइनल में आस्टि्रया के 2022 के विश्व चैंपियन निको विएनर को शूटआफ में हराया था। हालांकि सेमीफाइनल में उन्हें फ्रांस के मौजूदा विश्व चैंपियन निकोलस गिरार्ड से एक अंक से हार का सामना करना पड़ा था।  

ब्रिक्स मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा, अमेरिका संग कारोबार पर फोकस, डॉलर नीति पर नजर

 नई दिल्ली  अगले हफ्ते (14-15 मई) भारत की अध्यक्षता में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारियों में चीन और रूस की ओर से गैर-डॉलरीकरण को और तेजी देने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन भारत इस प्रस्ताव को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने को लेकर कोई स्पष्ट या मजबूत टिप्पणी शामिल किए जाने की संभावना नहीं है। भारत सरकार का मानना है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अभी जारी है। इसलिए वह ऐसे किसी मुद्दे को हवा नहीं देना चाहती जिसे वाशिंगटन संवेदनशील मानता हो। अमेरिका के साथ भारत का सालाना कारोबार करीब 200 अरब डॉलर का है, जबकि 50 लाख से अधिक भारतीय वहां रहते हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी अत्यंत मजबूत है। भारत की अगुवाई में हो रही इस बैठक में वह स्पष्ट संदेश नहीं देना चाहता कि ब्रिक्स मंच का इस्तेमाल अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। चीन और रूस लगातार ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच अमेरिकी डॉलर की जगह राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन भारत ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर से अलग होने का कोई प्लान नहीं है और ब्रिक्स समूह भी ऐसा नहीं कर रहा। फिर भी, ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्रों में स्थानीय मुद्रा कारोबार को प्रोत्साहन देने का जिक्र नियमित रूप से होता रहा है। जुलाई 2025 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद जारी रियो डी जनेरियो घोषणा-पत्र में इस मुद्दे पर कहा गया था: “हम ब्रिक्स इंटरबैंक कोऑपरेशन मैकेनिज्म (आईसीएम) के प्रयासों का स्वागत करते हैं, जो परियोजनाओं और कार्यक्रमों के लिए नवाचारी वित्तीय प्रथाओं और तरीकों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण के स्वीकार्य तंत्र ढूंढना शामिल है।'' वर्ष 2024 की शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की एक समिति भी बनाई गई थी जिसने स्थानीय मुद्रा में कारोबार व भुगतान उपकरणों पर साझा सहयोग की रिपोर्ट तैयार की है। हालांकि इस रिपोर्ट के आधार पर अभी तक कोई अहम फैसला नहीं किया गया है। इस बार भी बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्रा कारोबार का सामान्य जिक्र हो सकता है, लेकिन कोई नया ठोस प्रस्ताव या समयबद्ध रोडमैप शामिल किए जाने की उम्मीद नहीं है। वैसे भारत द्विपक्षीय स्तर पर ब्रिक्स और गैर-ब्रिक्स दोनों देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की नीति पर लगातार काम कर रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा है कि भारत के साथ उसके कुल कारोबार का 95 फीसदी हिस्सा अब स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में हो रहा है। भारत ब्रिक्स के कुछ अन्य देशों जैसे यूएई व चीन के साथ भी स्थानीय मुद्रा में कारोबार करता है। यूएई के साथ तो भारत का द्विपक्षीय से समझौता भी है। उधर, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं ने ब्रिक्स पर अमेरिकी डॉलर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। जुलाई 2025 में ब्राजील शिखर सम्मेलन के घोषणा-पत्र के बाद ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में इसे लागू नहीं किया गया।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घोषणा: यूपी में फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ अब टैक्स फ्री

यूपी में फिल्म कृष्णावतारम् टैक्स फ्री लोकभवन सभागार में फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने की घोषणा फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में राज्यपाल आनंदीबेन, दोनों डिप्टी सीएम, अन्य मंत्रीगण और जनप्रतिनिधि भी रहे शामिल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का संदेश, सीएम योगी ने मंच पर कलाकारों का किया सम्मान   कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे से गूंजा लोकभवन सभागार, भक्तिमय रहा माहौल भगवान कृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से दिखाती है फिल्म लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म कृष्णावतारम् को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया है।  मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद राज्यपाल आनंदीबेन व सीएम योगी ने दोनों उप मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों ने एक साथ यह फिल्म देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इसे टैक्स फ्री करने को घोषणा की। राजधानी स्थित लोकभवन सभागार उस समय पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जब फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान “कृष्णा कृष्णा, राधे राधे” के जयघोष से पूरा सभागार गूंज उठा। इस दौरान सभागार खचाखच भरा रहा और फिल्म को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान सीएम योगी ने मंच पर कलाकारों का सम्मान भी किया।   फिल्म में द्वापर युग और सनातन संस्कृति की झलक फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में द्वापर युग, भारतीय पुरातन संस्कृति और सनातन परंपरा के विभिन्न आयामों को भव्यता के साथ दर्शाया गया है। फिल्म की सबसे खास बात यह रही कि इसमें भगवान कृष्ण के साथ राधा, रुक्मिणी और सत्यभामा की प्रेम कथाओं को अलग-अलग स्वरूपों में प्रस्तुत किया गया है।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वृंदावन बिहारी लाल की जय और भारत माता के जयकारे लगाए। उन्होंने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आज मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्री पूरे मंत्रिमंडल के साथ इस अद्भुत कार्यक्रम में सहभागी बने। करीब ढाई घंटे तक सभी एक साथ यहां बैठे रहे और हर एक चेहरे पर नई रौनक दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति से जुड़ी भगवान कृष्ण पर आधारित इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के साथ हम सभी यहां जुड़े हैं। फिल्म के कलाकार भी यहां उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के रूप में सत्यभामा का किरदार निभाने वाली कलाकार का नाम भी संस्कृति है, जिन्होंने इस भूमिका को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने लिया सीएम योगी से आशीर्वाद सीएम योगी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम सभी ने एक साथ इस फिल्म को देखा। यह भारत की संस्कृति और परंपराओं से जुड़े इतिहास को समेटते हुए तथा पुरातन विरासत को मुख्य धारा में प्रस्तुत करने वाली फिल्म है। इस दौरान फिल्म की मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने सीएम योगी से आशीर्वाद लिया। सीएम योगी ने निर्माता-निर्देशक और फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों को धन्यवाद भी दिया।  जो नए मंत्री बने हैं, उनके स्वागत के लिए यादगार क्षण मुख्यमंत्री ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा भी की। उन्होंने सूचना विभाग को प्रत्येक जनपद में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित कराने में सहयोग करने का निर्देश दिया, जिससे बच्चे और युवा इसे देखकर अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन विरासत के बारे में समझ सकें। उन्होंने कहा कि जब हम बरसाना, मथुरा और वृंदावन में जाते हैं तो वहां संबोधन राधे-राधे का ही होता है। उन्होंने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णावतारम् की मुख्य पात्र संस्कृति राज्यपाल की नातिन हैं और किसी भी नानी के लिए इससे अद्भुत क्षण और कोई नहीं होगा कि पालन-पोषण कर जिस बच्ची को आगे बढ़ाया है, आज उसे इतना बेहतर काम करते हुए वे देख रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार को सम्मान मिलना चाहिए।  हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए : राज्यपाल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नए मंत्रियों को शुभकामनाएं भी दीं।  इस अवसर पर विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हिंदी, तमिल और तेलुगु में की गई रिलीज यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज की गई है। फिल्म के निर्देशक हार्दिक गज्जर हैं। फिल्म में सिद्धार्थ गुप्ता, संस्कृति, सुष्मिता भट्ट और निवासिनी कृष्णन मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, जैकी श्रॉफ और आशुतोष राणा समेत कई बड़े कलाकार अपने किरदारों के जरिये छाप छोड़ने में सफल रहे।

कपिल शर्मा शो पर क्या हुआ? सुनील पाल ने मेकर्स और जज पर लगाए गंभीर आरोप

कॉमेडियन सुनील पाल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रहे हैं. हफ्तों पहले वो कपिल शर्मा के नेटफ्लिक्स शो पर पहुंचे थे, जहां समय रैना भी थे जिनसे उनका 36 का आंकड़ा है. सुनील पाल और समय रैना ने एक-दूसरे को जमकर रोस्ट भी किया. हालांकि इंटरनेट के मुताबिक, सुनील पाल को शो के दौरान निशाना बनाया गया. सुनील पाल के जोक्स पर बेहद कम लोगों को हंसी आ रही थी. यहां तक कि कपिल शर्मा भी उनकी टांग खींच रहे थे. शो के बाद कॉमेडियन ने अपनी सफाई में कई सारी बातें कहीं. अब एक बार फिर सुनील पाल ने अपने चर्चित एपिसोड पर बात की. लेकिन इस बार उन्होंने शो के मेकर्स और जज पर निशाना साधा. यूट्यूबर सूरज कुमार संग पॉडकास्ट में सुनील पाल ने कहा कि नेटफ्लिक्स समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया को हाइलाइट करना चाहता था. वो उन दोनों को डाउनफॉल से ऊपर उठाना चाहते थे, इसलिए कपिल शर्मा के शो पर स्पेशल एपिसोड लेकर आए. कॉमेडियन ने दावा किया कि शो की टीआरपी में भारी बूस्ट मिल सके, इसलिए मेकर्स ने उन्हें भी समय वाले एपिसोड में बुला लिया. सुनील पाल ने समय संग शो करने पर भी रिएक्ट किया, जिनको वो किसी वक्त आतंकवादी बुलाते थे. कपिल के शो पर सुनील संग क्या हुआ? कॉमेडियन ने कहा, 'वो कपिल शर्मा का शो था, ना कि समय रैना या रणवीर का. वहां तो शाहरुख-सलमान-आमिर खान जैसे सुपरस्टार भी जाते हैं, उसमें क्या शॉकिंग बात हो गई अगर मैं वहां चला गया? मुझे वहां शो में बुलाया गया था. मुझे कोई आइडिया नहीं था कि वहां पर समय रैना भी होगा. मुझसे कहा गया कि एपिसोड में स्टैंडअप कॉमेडियन्स को लाया जाएगा, और उसमें वो भी शायद होंगे. मुझे कहा कि आप आओ और वहां एक स्टैंडअप शो करके दिखाओ, कोई इंटरव्यू नहीं.' 'मैंने एक 15 मिनट का स्कैच भी तैयार किया था और शो के डायरेक्टर अनुकल्प गोस्वामी ने उसे फाइनल भी कर दिया था. जब मैं वहां पहुंचा, तो मुझे पता चला कि वो दोनों समय और रणवीर भी वहां थे. मुझे स्टेज पर स्टैंडअप करने का मौका नहीं मिला. यहां तक कि उन्होंने मेरे कुछ जोक्स एडिटिंग के वक्त काट दिए, जो मैंने शो पर बोले थे.' सुनील पाल ने हालांकि ये भी साफ किया कि ना सिर्फ उनके, बल्कि समय और रणवीर की भी कई सारी बातें एडिट की गई थी. कॉमेडियन ने इस दौरान शो के जज नवजोत सिंह सिद्धू और अर्चना पूरन सिंह पर भी तंज कसा. सुनील पाल ने कहा कि समय के एक जोक पर दोनों हंस-हंसकर लोटपोट हो गए, लेकिन उनके जोक पर कोई नहीं हंसा जिससे उन्हें उनके खिलाफ हुई प्लानिंग का शक हुआ. शो के जज पर सुनील पाल ने उठाए सवाल कॉमेडियन ने कहा, 'सब कुछ एक तरफा हो गया. मुझे लगा कि मैं कहीं फंस गया हूं और लोग मुझे निशाना बना रहे हैं. बहुत से लोगों ने भी ये बात नोटिस की. जान-बूझकर लोगों को कहा गया था कि मेरे जोक्स पर मत हंसो, और दूसरे इंसान के छोटे-से-छोटे जोक पर भी बहुत ज्यादा तारीफ करो. नवजोत सिंह सिद्धू, जो 20 साल से कॉमेडियन्स को सुन रहे हैं, उन्होंने समय के एक छोटे जोक पर कहा कि बहुत बढ़िया, तुम अगले कपिल हो. यहां तक कि अर्चना भी उनके जोक पर नहीं हंसी. अर्चना ऐसी है कि पैसे मिले तो हवा पर भी हंस देगी. लेकिन अगर उसने भी नहीं हंसा, तो मुझे लगा कि यह सब प्लानिंग थी.'

डिजिटल युग की शुरुआत: छत्तीसगढ़ प्रशासन में ई-ऑफिस का प्रभाव

विशेष लेख ई-ऑफिस का विस्तार: छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में डिजिटल क्रांति का आगाज "पारदर्शिता की नई पहचान 'ई-ऑफिस' रायपुर छत्तीसगढ़ में 'ई-ऑफिस' (e-Office) प्रणाली सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही लाकर सुशासन (Good Governance) का नया सवेरा लेकर आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, यह डिजिटल पहल भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। फाइलों का डिजिटल होना फाइलों में हेराफेरी की गुंजाइश को लगभग खत्म कर देता है, जिससे शासन में पारदर्शिता आती है। कागजी फाइलों के भौतिक परिवहन में लगने वाला समय बचता है, जिससे फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं और निर्णय जल्दी लिए जाते हैं।            डिजिटल तकनीक आज केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की कार्यप्रणाली को नया आयाम दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के संकल्प को साकार करते हुए राज्य में ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली प्रशासनिक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। फाइलों के अंबार से डिजिटल रफ्तार तक           छत्तीसगढ़ में अब शासकीय दफ्तरों की तस्वीर बदल रही है। वह दौर बीत रहा है जब कार्यालयों में धूल खाती फाइलों के ढेर और कछुआ गति से चलने वाली प्रक्रियाएं सामान्य मानी जाती थीं। अब डिजिटल फाइलों के माध्यम से कार्यों में न केवल तेजी आई है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। सक्ती जिला रहा अव्वल          ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य ने डिजिटल गवर्नेंस में नए मानक स्थापित किए हैं। व्यापक नेटवर्क के तहत प्रदेश के 87 हजार 222 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। अब तक 5 लाख 46 हजार 903 से अधिक फाइलों का सफल डिजिटल संचालन किया गया है। 30 अप्रैल 2026 की स्थिति में प्रदेश का 33 वां जिला सक्ती 15 हजार 735 फाइलों के डिजिटल संचालन के साथ राज्य में अग्रणी रहा है। ई-ऑफिस के प्रमुख लाभ         ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग की सुविधा से अब यह जानना आसान है कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय से लंबित है। इससे कार्य के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। कुशल निर्णय प्रक्रिया सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक फाइलों की आवाजाही त्वरित होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया व्यवस्थित और समयबद्ध हुई है। कागज के उपयोग में भारी कमी आने से यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा योगदान दे रही है। डिजिटल संधारण (Storage) के कारण दस्तावेजों के फटने, खोने या खराब होने का डर खत्म हो गया है और भंडारण की समस्या भी सुलझ गई है। प्रशिक्षण और तकनीकी मजबूती          किसी भी नवाचार की सफलता उसके उपयोगकर्ताओं पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन ने अधिकारी-कर्मचारियों के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में एनआईसी (NIC) और चिप्स (CHiPS) की टीमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य की राह पूर्णतः डिजिटल प्रशासन          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का लक्ष्य आगामी समय में समस्त शासकीय पत्राचार को शत-प्रतिशत ई-ऑफिस के माध्यम से संचालित करना है। यह बदलाव केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह नागरिक-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ता एक ठोस कदम है। ऑफिस ने यह सिद्ध कर दिया है कि तकनीक का सही समन्वय प्रशासन को प्रभावी और जनोन्मुखी बना सकता है। छत्तीसगढ़ का यह मॉडल आने वाले समय में सुशासन की एक नई और आधुनिक परिभाषा लिखने के लिए तैयार है।  नितेश चक्रधारी  (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

होमगार्ड सुनील कुमार पर कार्रवाई, वीडियो सामने आने के बाद जांच तेज

 गोरखपुर यूपी के गोरखपुर के एक थाने में बैठकर खुलेआम घूस लेते होमगार्ड का वीडियो वायरल होने पर पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया है। पता चला है कि पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर यह पैसा लिया जा रहा था। वीडियो पीपीगंज थाने के अंदर की थी। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो सामने आने के बाद एसपी नार्थ ने जांच शुरू करा दी है। सीओ कैम्पियरगंज की रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने पासपोर्ट सत्यापन का काम देखने वाले मुंशी को सस्पेंड कर दिया। दरअसल, घूसखोरी के मामले में पब्लिक जागरूक हो गई है। घूसखोरों को पैसा देने के साथ उनका वीडियो भी बना रही है। पुलिसवालों को भी यह पता है इस वजह से पैसे की वसूली के लिए होमगार्ड या अन्य को वह जिम्मेदारी सौंप रखी है। रविवार को पीपीगंज थाने में तैनात होमगार्ड सुनील कुमार का वीडियो सामने आया। कुर्सी पर बैठा होमगार्ड पैसा लेकर जेब में रख रहा है। पता चला कि पासपोर्ट सत्यापन का काम देखने वाले मुंशी सूर्यकांत भारती ने उसे यह जिम्मेदारी दी थी। वीडियो सामने आने बाद सीओ कैम्पियरगंज अनुराग सिंह ने थाने पर पहुंच कर जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को दे दी है। जिसके बाद एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने होमगार्ड को थाने से हटाने के साथ ही उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए कमांडेंट को पत्र लिखा है, वहीं पासपोर्ट का काम देखने वाले मुंशी सूर्यकांत भारती को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही थाने में हो रही इस वसूली में और किन-किन लोगों की भूमिका है इसकी भी जांच भी शुरू करा दी है। वीडियो पर हो चुकी है कार्रवाई नौसढ़ इलाके में एक ट्रैफिक सिपाही का भी वीडियो सामने आया था जिसमें डीसीएम चालक उसके सामने गिड़गिड़ा रहा था। एसएसपी ने ट्रैफिक सिपाही को निलम्बित कर दिया था। पहले भी हुई है कार्रवाई पूर्व एसएसपी गौरव ग्रोवर के थाने में निरीक्षण के दौरान भी पासपोर्ट के मामले में पैसा लेने की शिकायत मिली थी। तत्कालीन एसएसपी ने पासपोर्ट रजिस्ट्रर पर दर्ज एक नम्बर पर फोन कर पूछा आप का पासपोर्ट मिल गया है कोई खर्च तो नहीं लगा है। पीड़ित ने बताया था कि पांच सौ रुपये मुंशी जी को दिया था। गौरव ग्रोवर ने उस समय भी पासपोर्ट मुंशी को निलंबित किया था।

अपरा एकादशी 2026: तिथि, महत्व और व्रत विधि की संपूर्ण जानकारी

साल भर में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को मिलाकर लगभग 24 एकादशी आती हैं, लेकिन इनमें से अपरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है और इसे बहुत ही फलदायी माना गया है. इस वर्ष अपरा एकादशी 13 मई 2026, बुधवार को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 12 मई की दोपहर 2 बजकर 52 मिनट पर शुरू हो जाएगी. लेकिन हिंदू धर्म में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए व्रत 13 मई को ही रखा जाएगा. इसका पारण 14 मई को किया जाएगा. अपरा एकादशी का महत्व अपरा एकादशी को 'अपर' यानी अपार फल देने वाली एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को धन, सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. साथ ही इसे ऐसा व्रत माना जाता है जो गुरु निंदा जैसे दोषों से भी मुक्ति दिलाने में सहायक होता है. श्रद्धा और भक्ति से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना गया है. व्रत की तैयारी इस व्रत की तैयारी एक दिन पहले से शुरू करनी चाहिए. 12 मई से ही सात्विक भोजन करना चाहिए और मन को शांत रखना चाहिए. इस दिन प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए. संभव हो तो रात्रि भोजन भी नहीं करना चाहिए और संयमित जीवनशैली अपनानी चाहिए ताकि व्रत का पूरा लाभ मिल सके. अपरा एकादशी पूजा विधि 13 मई को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए. इसके बाद श्री हरि विष्णु की मूर्ति या चित्र को पीले आसन पर स्थापित किया जाता है. भगवान को धूप, दीप, फल, पीले फूल, मिठाई और पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. तुलसी दल भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है, इसलिए इसका विशेष महत्व होता है. तुलसी से जुड़ा नियम एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है और ना ही तुलसी को जल अर्पित किया जाता है. इसलिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए ताकि पूजा में इसका उपयोग किया जा सके. व्रत के दौरान क्या करें इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है. इसके साथ व्रत कथा सुनना और भगवान की आरती करना भी महत्वपूर्ण होता है. संभव हो तो प्रसाद अधिक से अधिक लोगों में वितरित करना चाहिए, जिससे पुण्य फल बढ़ता है. क्या ना करें इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है. यदि कोई व्यक्ति व्रत न भी रखे, तब भी चावल खाने से परहेज करना शुभ माना जाता है. इस दिन क्रोध, नकारात्मक विचार और गलत बोलचाल से बचना चाहिए ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके.

ग्रामीण सड़क निर्माण में बिहार अव्वल, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सर्वोच्च सम्मान

पटना ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने में बिहार को देश में अव्वल स्थान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में आयोजित राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया। इसमें बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग को इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च सम्मान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सर्वाधिक गांव और टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने के मामले में बिहार ने यह कीर्तिमान स्थापित किया है। बिहार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक 31,287 ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़कर देश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश 17,493 बसावटों के साथ दूसरे तथा ओडिशा 16,990 बसावटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। इसके साथ बिहार ने केवल ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि उनके गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के अनुरक्षण एवं रखरखाव की श्रेणी में भी बिहार ने बड़े राज्यों के बीच पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। रखरखाव के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने 553 करोड़ रुपये खर्च कर ग्रामीण सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित किया है। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश 654 करोड़ रुपये के व्यय के साथ प्रथम, बिहार दूसरे तथा पश्चिम बंगाल 497.62 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। विभागीय पदाधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण कार्य विभाग के सतत प्रयास से राज्य के हर गांव तक सुरक्षित, सुगम और बारहमासी सड़क संपर्कता सुनिश्चित हो रही है।  

योगी सरकार 13 से 19 मई तक परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में आयोजित करेगी ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’

अब स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ मिलेगी भारतीय भाषाओं और सांकेतिक संवाद की सीख  योगी सरकार 13 से 19 मई तक परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में आयोजित करेगी 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026'  नई शिक्षा नीति-2020 को जमीन पर उतारते हुए बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा पर जोर – पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज को भी शिविर से जोड़कर बच्चों को दिया जाएगा व्यावहारिक प्रशिक्षण – भविष्य में बच्चों में संवाद क्षमता, भाषाई समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने वाला बड़ा अभियान बनेगा 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' लखनऊ  योगी सरकार अब शिक्षा को भारतीय संस्कृति, संवाद कौशल और सामाजिक समावेश से जोड़ते हुए नई पीढ़ी को भारतीय भाषाई विरासत से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में 13 से 19 मई तक 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आयोजित किए जाएंगे, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ भारतीय भाषाओं और सांकेतिक संवाद की भी सीख दी जाएगी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य अधिकारियों को मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के विजन को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। शिविर के दौरान बच्चे अपनी मातृभाषा के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं से परिचित होंगे। संवाद कौशल विकसित करेंगे और पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) की बुनियादी जानकारी भी प्राप्त करेंगे। योगी सरकार शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर बच्चों को भारतीय संस्कृति, विविधता और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने का माध्यम भी बना रही है। यह शिविर भाषा सीखने के कार्यक्रम के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीयता, सांस्कृतिक समरसता और राष्ट्रीय एकता से जोड़ने वाले अभियान के रूप में भी स्थापित हो रहा है। योगी सरकार अब प्रदेश में शिक्षा को भारतीयता, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक समावेश से जोड़कर नई दिशा देने की ओर अग्रसर हो चुकी है। 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आने वाले समय में बच्चों में संवाद क्षमता, भाषाई समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने वाला बड़ा अभियान बन सकता है। बहुभाषावाद और भारतीय संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा शिविर का उद्देश्य बच्चों में भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान और बहुभाषावाद की समझ विकसित करना है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी मातृभाषा के अलावा दूसरी भारतीय भाषाओं में भी बुनियादी संवाद कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता की सबसे मजबूत कड़ी है। इसी सोच के अंतर्गत योगी सरकार द्वारा स्कूलों में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को मजबूत करेगी सांकेतिक भाषा की पहल शिविर में इंडियन साइन लैंग्वेज को शामिल किया जाना योगी सरकार की समावेशी शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आरपीडब्ल्यूडी  एक्ट-2016 के अनुरूप बच्चों को सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि समाज में संवेदनशीलता और समावेश की भावना को बढ़ावा मिल सके। एससीईआरटी द्वारा पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से इंडियन साइन लैंग्वेज से जुड़ी शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों इसका प्रभावी उपयोग कर सकें।