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स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी बनी किसानों की मुसीबत, मंडियों में नहीं बिक पा रही उपज

शहडोल समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की आस लगाए बैठे किसानों के लिए तकनीक वरदान के बजाय अड़चन साबित हो रही है। उपार्जन केंद्रों में इन दिनों गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले ही सर्वर की सुस्त रफ्तार और सैटेलाइट सत्यापन में तकनीकी खामियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी दावों के विपरीत, पोर्टल पर आ रहे असत्यापित के मैसेज ने हजारों किसानों की नींद उड़ा दी है। फिलहाल, अन्नदाता सरकारी सिस्टम और सैटेलाइट के इस मकडज़ाल में उलझा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन तकनीकी खामियों को कितनी जल्दी दूर कर किसानों को राहत पहुंचाता है। 500 किसान अब भी कतार में जिले में कुल 9,526 पंजीकृत किसान हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते अब तक केवल 7,084 किसान ही अपना स्लॉट बुक कर पाए हैं। करीब 2,500 किसान ऐसे हैं जो दिन-रात ऑनलाइन केंद्रों और सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी जानकारी अपडेट नहीं हो पा रही है। सैटेलाइट मैपिंग बनी जंजाल स्लॉट बुकिंग के दौरान किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सैटेलाइट द्वारा असत्यापित या किसान कोड सत्यापन अपूर्ण जैसे मैसेज आ रहे हैं। शुरुआत में 8,700 खसरों में सैटेलाइट मैपिंग को लेकर विसंगतियां पाई गई थीं। प्रशासनिक जांच के बाद अधिकांश मामलों का निराकरण तो हुआ, लेकिन 46 खसरों में रिकॉर्ड के उलट फसल पाई गई। हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों की फसल मौके पर सही है, उन्हें भी तकनीकी ग्लिच के कारण दोबारा सत्यापन के लिए भटकना पड़ रहा है। मुख्य समस्याएं एक नजर में सर्वर की धीमी गति: स्लॉट बुकिंग के दौरान पोर्टल का बार-बार कैश होना। सत्यापन का फेर: सैटेलाइट डेटा और जमीनी हकीकत में अंतर होने से तकनीकी रुकावट। अपूर्ण किसान कोड: पुराने डेटा और नए पंजीकरण के बीच मिलान न होना। बिचौलियों का सता रहा डर तैयारी कर ली थी, लेकिन जैसे ही स्लॉट बुकिंग करने गया, वहां लिखा आता है कि सैटेलाइट से सत्यापन नहीं हुआ है। पटवारी के पास जाओ तो वो तहसील भेजते हैं, समझ नहीं आ रहा अनाज मंडी ले जाएं या दफ्तरों के चक्कर काटें। रहसू पटेल, किसान ग्राम अमरहा

मध्य प्रदेश में साइंटिफिक अफसर बनने का मौका, भर्ती के लिए आवेदन जल्द होंगे बंद

भोपाल MPPSC Recruitment 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने साइंटिफिक अफसर बायोलॉजी के पदों पर वैकेंसी निकाली है। इस भर्ती के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख अब करीब है। ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, वे बिना देरी किए एमपीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाकर अपना फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख 20 मई, 2026 तय की गई है। एलिजिबिलिटी और आयु सीमा इस वैकेंसी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का वनस्पति विज्ञान (Botany), जंतु विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके साथ ही कुछ अन्य योग्यताएं भी तय की गई हैं। उम्मीदवारों की उम्र की गिनती 1 जनवरी, 2027 के आधार पर होगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में सरकारी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।   लेट फीस और सैलरी कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि, वे 20 मई तक अपना फॉर्म जरूर भर लें। अगर आप 21 मई से 27 मई के बीच आवेदन करते हैं, तो आपको 3000 रुपये लेट फीस देनी होगी। वहीं, 28 मई से 28 अक्टूबर 2026 तक फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों को लेट फीस के रूप में 25000 रुपये का भारी भुगतान करना होगा। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए चुने गए उम्मीदवारों को शानदार सैलरी मिलेगी। चयनित साइंटिफिक अफसर को हर महीने 15600 रुपये से लेकर 39100 रुपये तक सैलरी दी जाएगी। ऐसे करें अप्लाई कैंडिडेट्स इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से अपना फॉर्म अप्लाई कर सकते हैं:     सबसे पहले कैंडिडेट्स मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाएं।     वेबसाइट के होम पेज पर रजिस्ट्रेशन से जुड़े लिंक पर क्लिक करें।     इसके बाद फॉर्म में मांगी गई अपनी सभी जरूरी जानकारी सही तरीके से भरें।     अपने दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा करें।     फॉर्म सबमिट करने के बाद भविष्य की जरूरत के लिए उसका एक प्रिंट आउट जरूर निकाल लें। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से जुड़ी किसी भी लेटेस्ट अपडेट के लिए आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in को समय-समय पर चेक करते रहें।

हजारों कब्रों के नीचे से दौड़ेगी ट्रेन! एमपी के इस प्रोजेक्ट का विरोध तेज, कोर्ट में अगली सुनवाई 14 मई

भोपाल एमपी में इंदौर और भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। दोनों जगहों पर मेट्रो ट्रेनें चलने लगी हैं लेकिन प्रोजेक्ट का अधिकांश हिस्सा अभी बाकी है। इस बीच भोपाल मेट्रो की प्लानिंग पर ही सवाल उठने लगे हैं। राजधानी भोपाल के शाही कब्रिस्तान बड़ा बाग से मेट्रो गुजरने पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत ऊपर बनीं हजारों कब्रों के नीचे से मेट्रो ट्रेनें चलाने की योजना है। इससे जहां मुस्लिम समुदाय ने आपत्ति जताई है वहीं आम लोग भी घबरा रहे हैं। भोपाल टॉकीज स्थित शाही कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर निर्माण के खिलाफ कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण प्रकरण दायर किए है। इन पर रोक की मांग की गई है। भोपाल के शाही कब्रिस्तान बड़ा बाग से मेट्रो गुजरने के प्लान के विरोध प्रदर्शन के बाद मामला वक्फ ट्रिब्यूनल पहुंच गया। मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इसमें ट्रिब्यूनल ने मेट्रो प्रबंधन से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 14 मई को होगी। कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित मेट्रो लाइन से करीब एक एकड़ क्षेत्र सीधे प्रभावित हो सकता है, जिससे बड़ी संख्या में कब्रों के अस्तित्व और संरचना पर खतरा उत्पन्न होगा। यह भी आरोप लगाया गया है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक इस क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट या सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे आशंकाएं और बढ़ गई हैं। मामले में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अब यह कानूनी मामला भी दायर हुआ है। पहले प्रकरण में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। कहा गया है यहां हजारों कब्रें मौजूद हैं। प्रमुख बिंदु कब्रिस्तान के नीचे से निकलेगी मेट्रो लाइन प्रोजेक्ट की खिलाफत कर रहा मुस्लिम समुदाय कब्रिस्तान में बैठकर किया मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध समुदाय ने कानूनी लड़ाई की तैयारी की कहा- हजारों कब्रें मौजूद, इनके अस्तित्व पर खतरा

मध्यप्रदेश को विकास की नई रफ्तार: 830 करोड़ की 973 सड़कों का तोहफा

सीहोर रविवार 10 मई को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को 25 साल पूरे हुए। इसी उपलक्ष में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरुंदा में रजत जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एमपीवासियों को बड़ी सौगात देंगे। यहां सीएम और केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण की शुरुआत करेंगे। एमपी में होगा 973 सड़कों का निर्माण पीएम ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अंतर्गत एमपी में 2117 किलोमीटर 973 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी जाएगी। इस सड़कों के बनने के बाद राज्य की 987 बसाहटों और गांवों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान योजना (PM-JANMAN) के तहत 384 किलोमीटर से अधिक के सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी जाएगी जिससे करीब 168 पिछड़े इलाकों तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी। गौरतलब है कि साल 2026-27 के पीएम ग्राम सड़क योजना के लिए केंद्र सरकार 18907 करोड़ रुपए आवंटित करेगी। बताया जा रहा है कि इसमें से लगभग 830 करोड़ रुपए मध्य प्रदेश के विकास कार्यों के निर्धारित किए जाएंगे। सीहोर जिले में बनेगी 81 सड़कें इस योजना के तहत चौथे चरण में सीहोर जिले की 81 सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इन सड़क की लंबाई करीब 209 किलोमीटर है, जिससे जिले की 85 बसाहटों को लाभ मिलेगा। सरकार इन सड़कों के निर्माण पर करीब 165 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके साथ ही साल 2026-27 में पीएम जनमन योजना (वर्ष 2026-27) के तहत 261 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 168 नई सड़कें बनाई जाएंगी। इनकी लंबाई 384 किलोमीटर होगी और इनसे प्रदेश की 168 बसाहटों को लाभ पहुंचेगा। भैरुंदा में कार्यक्रम की तैयारियां तेज भैरूंदा के दशहरा मैदान स्कूल परिसर में प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। डोम बनकर तैयार हो गया है, जिला प्रशासन की तरफ से करीब 5 हजार व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। बुधवार को कलेक्टर बालागुरु के. और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निज सचिव प्रवीण सिंह ने कार्यक्रम स्थल का दौरा किया। कलेक्टर बालागुरु के. ने अफसरों को कार्यक्रम से पूर्व सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। ये जर्जर सड़कें बनेंगी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के चौथे चरण में सीहोर जिले की 81 सड़क बनेगी। इन सड़कों में कई ऐसी हैं जो इस समय चलने लायक नहीं हैं। बारिश के सीजन में दोपहिया वाहन तक नहीं निकल पाते हैं। कई बार तो रास्ते में इतना कीचड़ हो जाता है कि बीमार व्यक्तियों को खटियां पर डालकर लाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजनाा के तहत बनने वाली सड़कों में मुहाली से टिकली बंजारी, हथियाखेड़ा से बुगलीवाली, रावनखेड़ा-पानबिहार रोड से पठार, सेमरादांगी से छेवटा मोहल्ला, सिराडी से मानाटोला, सोंठी से पुरा, श्यामपुर-बिछिया रोड से अचारपुरा, पाटन से आमखजूर, चांदबड़-मगरखेड़ा रोड से पतलोन, गोपालपुरा से राम नगर, बरखेड़ी दोराहा से हरिपुरा, मुंडलाकलां से खारचा बस्ती, दोराहा-खाईखेड़ा रोड से राम नगर कॉलोनी, मुरख्तारनगर से पहिया टोला और अहमदपुर-पारासोन रोड से झिरी गुर्जर मोहल्ला तक के मार्ग शामिल हैं।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे, एमपी में बड़े ऐलानों की तैयारी में मोहन सरकार

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मई 2026 में अपने 12 साल पूरे कर 13वें में प्रवेश करने जा रही है। भाजपा और एनडीए शासित राज्य इस उपलिब्ध को अपने-अपने अंदाज में जनता से साझा करने की तैयारी कर रहे हैं।मध्यप्रदेश की मोहन सरकार भी मप्र की जनता से केंद्र के कामों, योजनाओं को इस मौके पर साझा करने का रोडमैप बना रही है। जनहित योजनाओं का खाका तैयार करने का आदेश सूत्रों के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने टॉप अफसरों से कहा है कि जनहित योजनाओं का खाका तैयार कर उनके विस्तार पर योजना तैयार करें। इनमें कि सान और आदिवासी सरकार की फोकस में होंगे। बता दें, मई में मोहन सरकार के भी ढाई साल पूरे होंगे। सरकार इस मौके को खास बनाना चाहती है।   जनता को ये सौगात दे सकते हैं मुख्यमंत्री     दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने वाले लाभों का दायरा बढ़ा सकते हैं।     आदिवासियों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने में तेजी।     सड़क, सिंचाई व बिजली से वंचित क्षेत्रों में नई योजना की शुरु आत।     महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, आर्थिक गतिविधियों से जोडऩा।     लघु उद्योगों की स्थापना के लिए अतिरिक्त छूट दी जा सक ती है।     कृषि आधारित उद्योगों में किसानों व उनके परिवारों को जोडऩे के प्रयास। मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए होगी बैठक बता दें कि प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का 13 मई को ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके लिए सीएम मोहन यादव द्वारा सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री ने बैठकों की डेडलाइन भी तय कर दी है जिससे कई मंत्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा ​है कि समीक्षा बैठकें 8 मई से 10 मई के बीच विभागवार होंगी। भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव(CM Mohan Yadav) शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने उन्हें अंगवस्त्रम ओढ़ाया और भेंट किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में ट्वीट भी किया। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में हुई इस भेंट की तस्वीरें अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट की हैं। इधर सीएम के दिल्ली दौरे पर भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बीजेपी में खासी गहमागहमी है।

अब ‘कमांडो स्टाइल’ में तैयार होंगे आबकारी अधिकारी, हथियार संचालन की विशेष ट्रेनिंग शुरू

इंदौर अवैध शराब कारोबारियों के बढ़ते नेटवर्क और अपराधियों की नई-नई तकनीकों ने अब आबकारी विभाग की कार्यशैली भी बदल दी है। शराब माफिया जिस तरह संगठित तरीके से काम कर रहे हैं, उसे देखते हुए अब आबकारी निरीक्षकों और अधिकारियों को भी पुलिस की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए उन्हें हथियार चलाने, शारीरिक प्रशिक्षण, साइबर अपराध की जांच और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की विशेष ट्रैनिंग दी जाएगी। अब तक आबकारी अधिकारियों को 60 दिन का सामान्य प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन नए पाठ्यक्रम के तहत यह अवधि बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है। नया पाठ्यक्रम तैयार किया प्रशिक्षण जवाहर लाल नेहरू पुलिस अकादमी (जेएनपीए), सागर में होगा, जहां पुलिस उप निरीक्षक और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को ट्रैनिंग दी जाती है। हाल ही में भर्ती हुए 45 आबकारी अधिकारियों से इसकी शुरुआत होगी। पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने नया पाठ्यक्रम तैयार किया है।   इसमें आबकारी अधिकारियों को पुलिस उप निरीक्षकों की तरह मैदानी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान वे एसएलआर और पिस्तौल चलाना सीखेंगे, परेड करेंगे और फिजिकल ड्रिल भी करेंगे। ट्रेनिंग में साइबर अपराध की जांच, ई-फाइलिंग, सीपीआर देने और तकनीकी मामलों की जानकारी भी दी जाएगी। फिजिकल ट्रैनिंग के 47 पीरियड आबकारी अधिकारियों को फिजिकल ट्रैनिंग के तहत पांच किमी दौड़, 12 किमी रोड वॉक, क्रोकोडाइल वॉक और डग वॉक जैसे कठिन अभ्यास कराए जाएंगे। इसके लिए 47 पीरियड निर्धारित किए गए हैं। साथ ही योग और ध्यान को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है ताकि अधिकारी मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहें। बुनियादी प्रशिक्षण के साथ आबकारी अधिनियम भी बुनियादी प्रशिक्षण के साथ आबकारी अधिनियम 1915, एनडीपीएस एक्ट, एमपी बीयर एवं शराब अधिनियम 2000, विदेशी शराब भंडारण, टेंडर प्रक्रिया, बिक्री और आबकारी शुल्क से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इस नए प्रशिक्षण मॉडल से आबकारी अधिकारी अवैध शराब कारोबार और उससे जुड़े अपराधों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई कर सकेंगे। शराब माफिया पर शिकंजा बीते दिनों पहले ही मध्यप्रदेश पुलिस ने अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ अभियान तेज करते हुए उज्जैन और इंदौर में दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 1.05 करोड़ से अधिक की शराब और वाहन जब्त किए हैं। जानकारी के मुताबिक उज्जैन में नानाखेड़ा क्षेत्र स्थित निनोरा टोल प्लाजा के पास पुलिस ने एक ट्रक को रोककर तलाशी ली, जिसमें 900 पेटी (21,600 केन) अवैध बीयर बरामद हुई। इंदौर में भी 43 पेटी अवैध विदेशी शराब जब्त की गई।

कुपोषण पर सवाल: 2026 में भी 2017 की दरों पर चल रही पोषण योजना

इंदौर मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई के बीच अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल ये है कि, क्या 8 रुपए प्रतिदिन में किसी बच्चे को पोषण मिल सकता है? महंगाई के इस दौर में जब एक गिलास दूध की कीमत ही 10 से 12 रुपए है, तब सरकार कुपोषित बच्चों के लिए रोजाना मात्र 8 रुपए खर्च करके उन्हें पोषित करने का दावा कर रही है। खास बात ये है कि, 2026 में भी लागू ये दर 2017 में तय की गई थी और तब से अब तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की जा सकी है। खास बात ये है कि, एक तरफ जहां सरकार कुपोषण मुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य पेश करती है तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी आंकड़े इस दावे को चुनौती देते नजर आते हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर संभाग में ही पिछले पांच साल के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि, इन चार बड़े क्षेत्रों में ही 5 लाख से ज्यादा बच्चे कृपोषित पाए गए हैं। इनमें एक लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में हैं। सबसे चिंताजनक पहलू मौतों का है। अनुमान के मुताबिक, इन चार संभागों में पिछले 5 साल के दौरान 3500 से 4600 बच्चों की मौतें कुपोषण से जुड़ी परिस्थितियों में हुई हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानते हैं कि वास्तविक आंकड़े इससे ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कई मामलों में मौत का कारण सीधे कुपोषण दर्ज नहीं होता। अब डबल क्राइसिस बन चुका कुपोषण स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब शहरों में पानी और स्वास्थ्य की समस्याएं भी इससे जुड़ जाती हैं। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में दूषित पानी, डायरिया और संक्रमण के मामले कुपोषण को और बढ़ा रहे हैं, यानी कुपोषण अब सिर्फ भोजन की कमी नहीं, बल्कि डबल क्राइसिस बन चुका है।   जमीनी स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई अनियमित, टेक-होम राशन की गुणवत्ता पर सवाल और मॉनिटरिंग की कमी जैसे कारण इस संकट को और गहरा कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्‍या 8 रुपए में पोषण संभव है या ये सिर्फ कागजों में चल रही योजना है? न्यूनतम संतुलित आहार के लिए 25 से 40 रुपए रोज जरूरी सरकारी व्यवस्था के तहत एक कुपोषित बच्चे के लिए केंद्र और राज्य मिलाकर करीब 8 रुपए प्रतिदिन खर्च किए जाते हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम संतुलित आहार के लिए कम से कम 25 से 40 रुपए प्रतिदिन जरूरी हैं, यानी सरकारी खर्च और वास्तविक जरूरत के बीच 4 से 5 गुना का अंतर है। कई राज्यों ने खुद बजट बढ़ाया, एमपी पीछे जब एक बच्चे के पोषण की कीमत बाजार में 30 से 40 रुपए है, जब 8 रूपए में कुपोषण खत्म करने का दावा-नीति नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का संकेत है। मध्य प्रदेश से आगे तो केरल और तमीलनाड राज्य हैं, जहां गंभीरता के साथ 20 से 30 रुपए के करीब पोषण पर खर्च किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया शुरू, यूजी-पीजी समेत डिप्लोमा कोर्स की पहली मेरिट लिस्ट 20 मई को

छतरपुर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं में संचालित स्नातक , स्नातकोत्तर और विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया गया है। कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह एवं कुलसचिव श्री यशवंत सिंह पटेल के मार्गदर्शन में प्रवेश समितियों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। ऑनलाइन पंजीयन और महत्वपूर्ण वेबसाइट प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की जाएगी। पहली मेरिट लिस्ट और शुल्क भुगतान का समय अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं प्रवेश प्रभारी डॉ. आरएस सिसोदिया के अनुसार, प्रवेश के प्रथम चरण का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा। सीट आवंटन (मेरिट लिस्ट): स्नातक कक्षाओं के लिए पहली मेरिट लिस्ट 20 मई को जारी की जाएगी, जबकि स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए आवंटन पत्र 21 मई को जारी होंगे। प्रवेश शुल्क: जिन विद्यार्थियों का नाम मेरिट लिस्ट में आएगा, उन्हें स्नातक स्तर के लिए 20 से 26 मई तक और स्नातकोत्तर के लिए 21 से 26 मई के बीच अपना ऑनलाइन शुल्क जमा करना होगा। शुल्क समय से जमा करना जरूरी: यदि निर्धारित तिथि तक शुल्क जमा नहीं किया जाता है, तो छात्र का आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा और सीट अगले छात्र को दे दी जाएगी। दूसरे चरण की प्रक्रिया और सहायता केंद्र जो विद्यार्थी प्रथम चरण में आवेदन करने से चूक जाएंगे या जिन्हें सीट आवंटित नहीं होगी, उनके लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया स्नातक हेतु 21 मई और स्नातकोत्तर हेतु 22 मई से प्रारंभ कर दी जाएगी। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय परिसर में एक हेल्प डेस्क भी स्थापित की गई है। किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या या प्रवेश संबंधी जानकारी के लिए छात्र अधिष्ठाता छात्र कल्याण कक्ष में संपर्क कर सकते हैं।

प्यासा हुआ बीना: भूजल 34 मीटर नीचे, पानी के लिए रोज लंबी दूरी तय करने की मजबूरी

सागर/ बीना गर्मी का मौसम आते ही क्षेत्र के कुछ गांवों में जल संकट गहराने लगता है। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा पूर्व से तैयारियां नहीं की जाती हैं और ग्रामीण पानी के लिए भटकते हैं। इस वर्ष भी पिछले माह एसडीएम ने बैठक लेकर जल संकट से निपटने के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। पीएचई के अनुसार बीना का जलस्तर 34 मीटर नीचे खिसक गया है। जानकारी के अनुसार ब्लॉक में गिरोल, हडक़ल जैन, उमरिया, जुगपुरा, सलिता में जल संकट गहराने लगा है। यहां जलस्तर गिरने से हैंडपंप, कुआं सूख गए हैं, जिससे ग्रामीणों को खेतों से पानी लाना पड़ रहा है। कई जगह ग्रामीण डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने मजबूर हैं। गिरोल गांव के सरपंच हरगोविंद सिंह ने बताया कि गांव में पांच हैंडपंप हैं, जो सूख गए हैं और लोग खेतों से पानी लाने मजबूर हैं। जल संकट को लेकर कलेक्टर, एसडीएम से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन पानी का परिवहन शुरू नहीं हुआ है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले समय में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी। इसी तरह अन्य चार गांवों में भी पानी के लिए ग्रामीण भटक रहे हैं। यह पांच गांव वह हैं, जो अधिकारियों ने चिंहित किए हैं, इसके अलावा कई गांव हैं, जहां पानी की समस्या गर्मियों में होती है। जल जीवन मिशन का कार्य अधूरा जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने सहित टंकी निर्माण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन अभी योजना चालू नहीं हो पाई है और अगले साल गर्मियों तक योजना के चालू होने की बात कही जा रही है। पीएचई की नलजल योजनाएं अधूरी ब्लॉक में पीएचई की 36 नलजल योजनाएं हैं, जिसमें 19 ही हैंडओवर हो पाई हैं। शेष में कार्य चल रहा है और अधिकारी जून माह तक इन योजनाओं के चालू होने की बात कह रहे हैं। यदि यह योजनाएं समय पर चालू हो जाती, तो ग्रामीणों को राहत मिलती। तत्काल सुधार रहे हैं हैंडपंप हैंडपंप बंद होने की सूचना मिलने पर तत्काल सुधार कराया जा रहा है। ज्यादा जलस्तर गिरने पर हैंडपंप में मोटर पंप डालकर पानी सप्लाई करते हैं। शेष रह गईं योजनाओं का कार्य तेजी से चल रहा है, जो जून माह तक पूरा हो जाएगा। -राहुल आरमो, एसडीओ, पीएचई, खुरई परिवहन के नहीं हैं आदेश ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के परिवहन के आदेश कलेक्टर से नहीं आए हैं। पंचायतों से जनसहयोग के साथ पानी की व्यवस्था बनाने के लिए कहा गया है। साथ ही पीएचई के अधिकारियों से भी बात की गई है।- प्रदीप पाल, सीईओ, जनपद पंचायत, बीना