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12 मई 2026 राशिफल: सभी राशियों के लिए कैरियर, प्यार और पैसों की दिशा

मेष 12 मई के दिन जल्दबाजी में खर्च करने के बजाय सोच समझकर प्लान करना चाहिए। आप अपना आत्मविश्वास दोबारा कायम कर सकते हैं। अपने गोल्स की तरफ आगे बढ़ने और बदलाव लाने का एक दुर्लभ अवसर मिल सकता है। आपकी क्रिएटिविटी और बुद्धि ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। वृषभ 12 मई के दिन सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों में पैसे खर्च हो सकते हैं। ऑफिस में लोग आपकी मेहनत और प्रयासों की तारीफ करेंगे। आपको पैसों के मामले में लाभ हो सकता है। कुछ की जिम्मेदारी बढ़ेगी, लेकिन साथ ही आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा। मिथुन 12 मई के दिन नौकरी पेशा करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। इस दौरान आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। आपको ट्रैवल या ड्राइव करते समय सावधान रहना चाहिए। कर्क 12 मई का दिन शुभ समाचार लेकर आ सकता है। आपके कमाई के साधन में वृद्धि होगी। व्यापारियों को मन चाहा लाभ होगा। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। इस दिन नौकरी पेशा करने वाले जातकों को नए अवसर मिलेंगे। सिंह 12 मई के दिन मन में नकारात्मक विचारों का प्रभाव भी हो सकता है। जिसके कारण आपका आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। इस दौरान आप संतान की किसी बात से परेशान रहेंगे। किसी विशेष काम में आपको सफलता मिल सकती है। कन्या 12 मई के दिन काम के सिलसिले में ट्रैवल करना पड़ सकता है। सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों में पैसे खर्च हो सकते हैं। जिससे आर्थिक बजट गड़बड़ा सकता है। व्यापारियों को मनचाहा लाभ होगा। तुला 12 मई का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। आपको किसी काम में सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है। दिन की शुरुआत में खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। वृश्चिक 12 मई का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। दिन की शुरुआत में कुछ चुनौतियों आएंगी, जिनका सामना करना पड़ सकता है। आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। गुस्से और वाणी पर काबू रखें। धनु 12 मई का दिन मिला-जुला रहने वाला है। दिन की शुरुआत में आपको मेहनत का पूरा फल मिलेगा। मान-सम्मान बढ़ेगा। हालांकि दिन के अंत में पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा लोगों की जिंदगी में खुशियां रहेंगी। मकर 12 मई का दिन मिला-जुला रहने वाला है। दिन की शुरुआत में नौकरी करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। इस दौरान आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। कुंभ 12 मई का दिन खत्म होते-होते आपको मनचाहा लाभ मिल सकता है। किसी काम में लापरवाही करने से बचना चाहिए। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को गुप्त शत्रुओं से बचना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जातकों के लिए यह दिन शुभ साबित हो सकता है। मीन 12 मई के दिन आपको अप्रत्याशित चुनौतियों और आकर्षक अवसरों दोनों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। यह आपकी क्षमता और स्किल्स को प्रेजेंट करने का समय है। अपने मन पर भरोसा रखें और अच्छे रिश्ते बनाने पर फोकस करें। बैलेंस बनाने पर फोकस करें।  

वर्क फ्रॉम होम से खजाना भरेगा: 1 करोड़ लोगों की 3-दिन की आदत से होगी ₹70,000 करोड़ की बचत

मुंबई  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. देश अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम आदमी की जेब पर पड़ता है. इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील बेहद अहम मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन की बचत के लिए कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम अपनाने की बात कही।  प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ एक अस्थायी सलाह नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत और शहरी ट्रैफिक संकट से जुड़ा बड़ा आर्थिक संदेश है. अगर देश में बड़े पैमाने पर कंपनियां हफ्ते में 2 से 3 दिन वर्क फ्रॉम होम लागू कर दें, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हो सकता है।  दरअसल भारत के बड़े शहरों- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में करोड़ों लोग रोज ऑफिस आने-जाने के लिए निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं. एक औसत कर्मचारी रोज 20 से 40 किलोमीटर तक सफर करता है. अगर सिर्फ एक करोड़ कर्मचारी भी हफ्ते में 3 दिन घर से काम करें और रोज औसतन 30 किलोमीटर की यात्रा बच जाए तो हर दिन करीब 30 करोड़ किलोमीटर की वाहन आवाजाही कम हो सकती है. सामान्य माइलेज के हिसाब से यह रोज लगभग दो करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत के बराबर बैठता है।  70,000 करोड़ रुपये की बचत इसी गणना को सालभर के स्तर पर देखें तो करीब 700 से 750 करोड़ लीटर ईंधन की बचत संभव है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी आर्थिक वैल्यू 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह रकम कई राज्यों के सालाना बजट के बराबर है. यानी सिर्फ काम करने के तरीके में बदलाव से भारत हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।  प्रधानमंत्री मोदी ने बीती रात देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल संयम के साथ करना समय की जरूरत है. उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियां और संस्थान घर से काम करने की व्यवस्था पर फिर से विचार करें. पीएम का संकेत साफ था कि ऊर्जा बचत अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।  कोरोना काल में हो चुका है सफल प्रयोग कोरोना काल में भारत ने पहली बार बड़े स्तर पर देखा कि डिजिटल इकोनॉमी और रिमोट वर्किंग मॉडल कैसे लाखों लोगों के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं. आईटी, मीडिया, बैंकिंग, कंसल्टिंग और कई सर्विस सेक्टर कंपनियों ने बिना ऑफिस आए भी कामकाज जारी रखा. उस दौर में शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ, प्रदूषण घटा और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी. अब सरकार उसी अनुभव को सीमित लेकिन रणनीतिक रूप में फिर अपनाने की बात कर रही है।  वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा फायदा केवल ईंधन बचत नहीं है. इससे ट्रैफिक जाम कम होंगे, सार्वजनिक परिवहन पर दबाव घटेगा और शहरों में प्रदूषण का स्तर नीचे आएगा. कर्मचारी रोज के सफर में खर्च होने वाला समय परिवार या उत्पादक काम में लगा सकेंगे. कंपनियों के लिए भी ऑफिस स्पेस, बिजली और ऑपरेशन कॉस्ट में कमी संभव है।  हाइब्रिड मॉडल में हो सकती करोड़ों नौकरियां हालांकि, यह मॉडल हर सेक्टर में लागू नहीं हो सकता. मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, रिटेल, हेल्थकेयर और फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी रहती है. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में करोड़ों नौकरियां ऐसी हैं जिन्हें हाइब्रिड मॉडल में आसानी से चलाया जा सकता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे, राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी पहल शुरू करे और बड़े शहरों में हाइब्रिड ऑफिस संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत अपने तेल आयात बिल में बड़ी कमी ला सकता है. इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा और रुपया भी मजबूत हो सकता है। 

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा दांव, मंत्रिमंडल में 60% ओबीसी व एससी समाज शामिल

 लखनऊ  सत्ता की हैट-ट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार के जरिए जातीय से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों के संतुलन का रणक्षेत्र सजा लिया है। 19वीं विधानसभा के लिए लगभग आठ माह बाद होने वाले चुनाव को लेकर सपा जिस पीडीए के अस्त्र को धार दे रही है, भाजपा ने विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर उसको कुंद करने का बड़ा दांव चला है। सपा चुनाव के लिए जाट, गुर्जर, पाल, वाल्मीकि, पासी आदि जातियों में पैठ बढ़ाने में जुटी है। भाजपा ने सपा की इसी रणनीति को ध्वस्त करने का ताना-बाना मंत्रिमंडल के सहारे बुना है। ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ दो को प्रोन्नत किया गया है। दलित समाज से भी दो और मंत्री बनाए गए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब 60 प्रतिशत मंत्री ओबीसी और एससी समाज से पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। रविवार के विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज का ही प्रतिनिधित्व हो गया है। क्षत्रिय व वैश्व समाज की भागीदारी यथावत रखते हुए पार्टी ने सवर्ण समाज से एक मात्र मनोज पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर यूजीसी सहित अन्य मुद्दों को लेकर समाज में उपजी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया गया है। चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार के कई मायने चुनाव से आठ माह पहले किया गया विस्तार कई मायनों में अहम है। बनाए गए मंत्रियों को भले ही अन्य की तरह लंबा कार्यकाल नहीं मिलेगा लेकिन इस बहाने सत्ताधारी भाजपा, विरोधियों के साथ ही कार्यकर्ताओं को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। चूंकि प्रदेश की राजनीति आज भी जातीय संतुलन पर ही टिकी है, इसलिए दूसरे विस्तार में खासतौर से जातीय गणित का ही ध्यान रखा गया है। चुनाव में ओबीसी जातियों की निर्णायक भूमिका होने के नाते विस्तार में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में आने वाले लोध (कैलाश राजपूत), पाल (अजीत सिंह), विश्वकर्मा (हंसराज), गुर्जर (सोमेन्द्र तोमर) व जाट (भूपेन्द्र चौधरी) बिरादरी का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया है। इससे पहले भाजपा पिछड़े में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को पार्टी की कमान सौंप चुकी है। पिछड़े समाज को बनाया वोट बैंक सूबे की सत्ता हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की नजर पहले से ही राज्य के लगभग 44 प्रतिशत आबादी वाले पिछड़े समाज के वोट बैंक पर है। दोनों पार्टियों ने पिछड़े समाज से आने वाले नेताओं को ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप रखी है। अनुसूचित जाति से पहली बार वाल्मीकि (सुरेन्द्र दलेर) के साथ ही पासी(कृष्णा पासवान) बिरादरी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस संग सपा, पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए भाजपा को बड़ा झटका दे चुकी है। विस्तार के बाद अधिकतम 60 मंत्रियों वाले योगी मंत्रिमंडल में पिछड़े समाज से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित सर्वाधिक 25 मंत्री हो गए हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के 11, सवर्ण समाज से भी 22 (ब्राह्मण समाज के आठ, राजपूत के छह, वैश्य के चार, दो भूमिहार, एक-एक खत्री व कायस्थ समाज से) मंत्री अब हो गए हैं। विस्तार के जरिए भाजपा ने जिस तरह से सवर्णों के साथ ही गैर यादव ओबीसी बिरादरी को साधने की कोशिश की है, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा के सामने इसमें सेंधमारी करने की ही बड़ी चुनौती होगी। विदित हो कि लोकसभा चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। यथावत ही रही सहयोगी दलों की हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भले ही काफी समय से एनडीए के सहयोगी दल बयानबाजी के साथ दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे थे लेकिन दूसरे विस्तार में किसी को भी मौका नहीं मिला। इसके बाद भी सहयोगी दलों के नेता पूरी तरह से शांत हैं। माना जा रहा है कि बिहार के बाद बंगाल, असम एवं पुडुचेरी विधान सभा चुनाव में भी मिली बड़ी जीत के बाद सहयोगी दल, भाजपा पर अब दबाव बनाने से बच रहे हैं। सहयोगी दलों को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह का माहौल भाजपा के पक्ष में बना हुआ है उसका असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी रहने वाला है। ऐसे में किसी तरह का दबाव बनाने से सत्ताधारी भाजपा में उनकी स्थिति बिगड़ सकती है। सपा सहित विरोधियों के साथ खड़े होने से फिलहाल फायदा मिलने का आसार नहीं है। 2017 में अपना दल और सुभासपा से हुआ था अलायंस गौरतलब है कि भाजपा वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपना दल ( सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी थी। सरकार बनने पर सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में निषाद पार्टी का भी भाजपा से गठजोड़ हुआ लेकिन मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए जाने पर सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से किनारा कर लिया। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी तो भाजपा के साथ रहीं लेकिन सुभासपा ने सपा के साथ चुनाव लड़ा था। छह विधायक भी जीते लेकिन सपा से अनबन के बाद राजभर ने फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व रालोद भी सपा से नाता तोड़कर भाजपा के साथ आ गई। भाजपा के साथ खड़े दलों का एक-एक विधायक वर्तमान में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री है।  

योगी सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर फोकस

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विश्वविद्यालयों के कायाकल्प के बाद, अब राज्य सरकार ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने का लक्ष्य तय किया है। जिस तरह यूपी के सात विश्वविद्यालयों ने नैक (NAAC) की 'A++' रैंकिंग हासिल कर देशभर में मिसाल पेश की है, ठीक उसी तर्ज पर अब डिग्री कॉलेजों को भी उत्कृष्ट श्रेणी में लाने के लिए 'मिशन मोड' में काम शुरू हो गया है। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेजों तक: रैंकिंग का नया रोडमैप उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का विजन अब केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है।  विशेष कार्यशालाएं: प्रदेशभर के डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें नैक रैंकिंग की बारीकियों, डेटा संकलन और गुणवत्ता सुधार के मंत्र दिए जा रहे हैं। रिसर्च और डिजिटल कल्चर: कॉलेजों को केवल 'डिग्री बांटने' वाला केंद्र न मानकर, उन्हें शोध (Research) और डिजिटल शिक्षा का हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बी-ग्रेड का दौर खत्म, ए++ की लगी झड़ी योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अक्सर रैंकिंग के मामले में पिछड़ जाती थी। ऐतिहासिक सुधार: पहले जहां विश्वविद्यालय बी या बी-प्लस ग्रेड तक ही पहुंच पाते थे, आज कुलाधिपति (राज्यपाल) और सरकार के साझा प्रयासों से राज्य के सात विश्वविद्यालय ए++ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं। ग्लोबल बेंचमार्क: उत्तर प्रदेश के दो विश्वविद्यालय अब 'क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग' में शामिल हैं, जबकि छह संस्थानों ने 'क्यूएस एशिया रैंकिंग' में अपनी जगह पक्की की है। तीन विश्वविद्यालय यूजीसी की 'ग्रेड-1' श्रेणी का गौरव हासिल कर चुके हैं। छात्र सुविधाएं और रोजगार: नई शिक्षा नीति का आधार उच्च शिक्षा में यह गुणात्मक सुधार केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ छात्रों को मिल रहा है।  इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और बेहतर छात्र सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।  नई शिक्षा नीति (NEP): पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाकर छात्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।  प्रतिस्पर्धा: कॉलेजों के बीच बेहतर रैंकिंग हासिल करने की होड़ से अंततः शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।  

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत में, पटना में घरेलू और व्यावसायिक गैस महंगी

पटना पटना में पीएनजी, सीएनजी और उद्योगों के उपयोग में आने वाली गैस की सभी श्रेणियों में इजाफा किया गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस के आयात में आ रही कमी के कारण गैस मूल्यों में इजाफा किया गया है। घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (डी-पीएनजी) की कीमतों में 50 पैसे प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके पहले इसकी कीमत 49.44 रुपये एससीएम थी। घरेलू गैस की कीमतों में इजाफा होने से पटना में डी-पीएनजी का उपयोग करने वाले 32 हजार उपभोक्ता सीधे प्रभावित होंगे। CNG के दाम में 1 रुपये की बढ़ोतरी व्यावसायिक कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। पटना में सीएनजी की बढ़ी हुई कीमत 89.90 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। पहले सीएनजी के दाम 88.90 रुपये प्रति किलोग्राम थे। इससे 40 हजार से ज्यादा वाहनों पर सीधा असर पड़ेगा। इन वाहनों में 15 से 20 हजार ऑटो और सामान ढोने वाले वाहन हैं। अप्रैल 2026 के बाद व्यावसायिक और औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस (सी-पीएनजी और आई-पीएनजी) की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। सी-पीएनजी की कीमत प्रति एससीएस 5.38 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब 93.27 रुपये प्रति एससीएम मिलेगी। इससे शहर के होटलों, रेस्टोरेंटों, बैंक्वेट हॉल आदि के परिचालन लागत में इजाफा होना तय है। औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमत में भी पांच रुपये प्रति एससीएम बढ़ी है। यह गैस अब उद्योगों को 85.95 और 86.25 रुपये प्रति एससीएम मिलेगी। पीएम मोदी ने देशवासियों से की सहयोग की अपील बता दें कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई दिनों से जारी जंग से कई देश लगातार प्रभावित हो रहे हैं। इस बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के मद्देनजर देश के लोगों से सहयोग करने की अपील की है। पीएम ने उन्होंने देश के नागरिकों से विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा समय का जो संकट है उसे देखते हुए हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर बहुत जोर देना होगा। उन्होंने कहा, “हमें तय करना होगा कि जब यह संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है तो कम से कम एक साल के लिए विदेशों में जाने की बातों को टालना चाहिए। भारत में बहुत सारी जगह हैं वहां हम जा सकते हैं। भारत में बहुत कुछ किया जा सकता है।” पीएम मोदी ने देश के लोगों से अगले एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील भी की है। इस दौरान उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल तथा रसोई गैस बचाने तथा सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की भी अपील की। तनाव कम होने के नहीं दिख रहे आसार इधर ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव कम होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने संबंधी उसके (ईरान) प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार देते हुए खारिज कर दिया है। डोनल्ड ट्रंप को रविवार को ईरान का प्रस्ताव प्राप्त हुआ और उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने में सफलता मिलेगी। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम, समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जिससे कई देश ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने रविवार को 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया, 'मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया – यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।' ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस से कहा, ‘मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह ठीक नहीं है। मुझे उनकी प्रतिक्रिया पसंद नहीं आई।’

दुआ लिपा ने सैमसंग पर ठोका 125 करोड़ का मुकदमा, बिना अनुमति फोटो इस्तेमाल का आरोप

  ब्रिटिश सिंगर दुआ लिपा ने इलेक्ट्रॉनिक्स की एक दिग्गज कंपनी पर केस ठोंका है। मामला सिंगर की एक तस्वीर के बिना अनुमति इस्तेमाल से जुड़ा है। दुआ लीपा ने कंपनी के खिलाफ लीगल एक्शन लेते हुए हर्जाने में करोड़ों रुपये मांगे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, 'सिंगर दुआ लीपा ने टेक कंपनी सैमसंग पर 15 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये) का मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि कंपनी ने बिना उनकी अनुमति के टीवी की पैकेजिंग पर उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया'। ये भी पढ़ें शिकायत में क्या आरोप लगाया? 'द हॉलीवुड रिपोर्टर' के अनुसार, यह मुकदमा शुक्रवार को कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में दायर किया गया था। ग्रैमी विजेता गायिका ने टेक कंपनी सैमसंग पर कॉपीराइट उल्लंघन, ट्रेडमार्क उल्लंघन और अपने प्रचार के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि कंपनी ने कथित तौर पर टेलीविजन के प्रचार और बिक्री के लिए उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया। कॉपीराइट तस्वीर का बिना इजाजत इस्तेमाल किया शिकायत के अनुसार, दुआ लीपा ने दावा किया कि 2024 में ऑस्टिन सिटी लिमिट्स म्यूजिक फेस्टिवल के दौरान ली गई उनकी एक बैकस्टेज तस्वीर का इस्तेमाल, 2025 से शुरू होने वाले सैमसंग टेलीविजन के कई मॉडलों की पैकेजिंग पर किया गया। गायिका ने कहा कि उस तस्वीर का कॉपीराइट उन्हीं के पास है। मुकदमे में आरोप लगाया गया कि सैमसंग ने टेलीविजन के डिब्बों के सामने वाले हिस्से पर उस तस्वीर का प्रमुखता से इस्तेमाल किया, जबकि कंपनी न तो गायिका से इसकी अनुमति ली और न ही तस्वीर के इस्तेमाल के लिए उन्हें कोई मुआवजा दिया। रोकने की बात कहे जाने पर भी जारी रखा फोटो का इस्तेमाल 'द हॉलीवुड रिपोर्टर' के अनुसार, मुकदमे में कहा गया है, 'दुआ लीपा की लोकप्रियता और साख को देखते हुए सैमसंग ने बिना किसी अनुमति या लाइसेंस के उनकी एक कॉपीराइट वाली तस्वीर का इस्तेमाल किया और उसे खुद बनाए गए उन टेलीविजन के कार्डबोर्ड बॉक्स के सामने वाले हिस्से पर प्रमुखता से दिखाया, जिन्हें बिक्री के लिए रखा गया था'। दुआ ने यह भी दावा किया कि कंपनी ने उनकी तस्वीर का इस्तेमाल तब भी जारी रखा, जब उसे ऐसा करने से रोकने की मांग की गई थी। कंपनी को बताया लापरवाह और असंवेदनशील शिकायत में सैमसंग की प्रतिक्रिया को लापरवाह और असंवेदनशील बताया गया है। प्रकाशन के अनुसार, मुकदमे में यह तर्क भी दिया गया है कि प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर दुआ लीपा की तस्वीर के इस्तेमाल से ग्राहकों को यह गलतफहमी हो सकती है कि दुआ ने आधिकारिक तौर पर सैमसंग टेलीविजन का समर्थन किया है। शिकायत में सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं की कई टिप्पणियों का भी हवाला दिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर यह मान लिया था कि यह गायिका इस अभियान से जुड़ी हुई है।

NEET UG 2026 विवाद: पेपर लीक के शक में 14 गिरफ्तार, 30 लाख से 30 हजार में बिके सवाल, 120 प्रश्न मैच

 नईदिल्ली / जयपुर  देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर राजस्थान में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा में कथित गड़बड़ी, गेस पेपर और संभावित पेपर लीक की आशंका के बीच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS) लगातार जांच में जुटी हैं। मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि कई लोगों से पूछताछ जारी है। जांच के केंद्र में राजस्थान का सीकर जिला है, जहां परीक्षा से पहले छात्रों के बीच एक कथित “गेस पेपर” वायरल हुआ था।  हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शुरुआती स्तर पर पेपर लीक से इनकार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने आए तथ्यों ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि वायरल गेस पेपर के 100 से अधिक सवाल वास्तविक NEET UG 2026 परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 125 बताई गई है। 2 मई की रात वायरल हुआ गेस पेपर जानकारी के अनुसार, नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 2 मई की रात कुछ छात्रों तक एक गेस पेपर पहुंचा। यह गेस पेपर व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए साझा किया गया था और बाद में इसकी फोटोकॉपी भी कई जगहों पर बांटी गई। राजस्थान एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने खुद इस बात की पुष्टि की कि “गेस पेपर आया था। यह व्हाट्सएप पर आया और फोटोकॉपी की दुकान पर मिला। इसकी जांच चल रही है।” पहले 5-5 लाख तो परीक्षा से एक दिन पहले 30 हजार में बिका गेस पेपर जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआत में यह गेस पेपर कथित तौर पर 2 से 5 लाख रुपये में कुछ छात्रों तक पहुंचाया गया था। बाद में यही सामग्री 30 हजार रुपये तक में बेचे जाने की बात सामने आई। हालांकि, एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रकम किस स्तर पर और किन लोगों के बीच ली गई। केरल से आया था सैंपल पेपर: रिपोर्ट्स कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राजस्थान एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि केरल से एक सैंपल पेपर सीकर आया था, जिसमें करीब 150 प्रश्न वही थे जो परीक्षा में पूछे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 मई को राकेश मंडारिया नाम के काउंसलर के पास केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक चुरू के लड़के ने गेस पेपर भेजा। लड़के ने बताया कि दक्षिण भारत में ये गेस पेपर बिक रहे हैं। इस प्रकार यह पेपर कोचिंग संस्थानों, फॉटो कॉपी की दुकानों तक और छात्रों तक पहुंचा। हालांकि, मामले की जांच जारी है और एनटीए के आधिकारिक बयान के बाद ही स्थिति साफ होगी।   जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के सवाल सबसे ज्यादा मैच जांच में सामने आया कि वायरल गेस पेपर में शामिल बड़ी संख्या में सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। खासकर बायोलॉजी और केमिस्ट्री विषयों में समानता अधिक पाई गई। सूत्रों के मुताबिक, 400 से अधिक प्रश्नों के एक सेट में से करीब 125 प्रश्न वास्तविक परीक्षा में आए सवालों जैसे थे। यही वजह है कि मामला सामान्य “गेस पेपर” से आगे बढ़कर संभावित पेपर लीक और संगठित रैकेट की दिशा में जांच का विषय बन गया। एनटीए ने कहा- परीक्षा पूरी सुरक्षा के बीच हुई नीट यूजी 2026 विवाद बढ़ने के बाद एनटीए ने आधिकारिक बयान जारी किया। एजेंसी ने कहा कि 3 मई को परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार और पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आयोजित हुई थी। एनटीए ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यह नोटिस जारी किया: एनटीए के मुताबिक, प्रश्नपत्र जीपीएस ट्रैकिंग वाले वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे। प्रश्नपत्रों पर यूनिक वॉटरमार्क लगाए गए थे। परीक्षा केंद्रों की निगरानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से की गई और उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी कराया गया। केंद्रों पर 5G जैमर भी सक्रिय थे। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्वीकार किया कि 7 मई को उसे अनियमितताओं से जुड़े इनपुट मिले थे, जिन्हें जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को भेजा गया। सीकर के हॉस्टलों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओजी की टीमें सीकर पहुंचीं। यहां कई हॉस्टलों में छात्रों और युवकों से पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों ने मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले हैं। एसओजी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गेस पेपर आखिर कहां से आया, इसे किसने तैयार किया और इतनी बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा से कैसे मेल खा गए। क्या 600 नंबर के सवाल पहले ही पहुंच गए एसओजी की जांच में ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं जिन्होंने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नीट यूजी के 720 नंबर में से 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहले ही पहुंच गए थे। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) विशाल बंसल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'नीट यूजी परीक्षा को लेकर फैली तरह-तरह की भ्रांतियों के बारे में मैं आपको बताऊं, तो एक गेस पेपर है, जिसमें करीब 410 सवाल हैं। उन 410 सवालों में से तकरीबन 120 सवाल केमिस्ट्री में आए हुए बताए जाते हैं। बताया जा रहा है कि यह गेस पेपर स्टूडेंट्स के बीच काफी पहले से सर्कुलेट हो रहा था। यह असली एग्जाम से 15 दिन पहले, एक महीने पहले ही उन तक पहुंचना शुरू हो गया था। इसलिए, हमारी इन्वेस्टिगेशन का अभी इस बात पर फोकस है कि क्या इस गेस पेपर के आधार पर कोई चीटिंग या क्रिमिनल एक्टिविटी हुई है। हम इस मामले की एक्टिवली जांच कर रहे हैं और अभी इन्वेस्टिगेशन प्रोसेस में लगे हुए हैं।' क्या गेस पेपर 5-5 लाख रुपये में बिका? इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गेस पेपर परीक्षा से दो दिन पहले 5-5 लाख रुपये में बिका लेकिन परीक्षा से एक रात पहले इसकी 30-30 हजार रुपये में बिक्री हुई। एसओजी ने यह भी बताया है कि हिरासत में लिए गए लोगों … Read more

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, 15 मई से लगेंगे विशेष सहायता कैंप

लखनऊ  ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। पूर्वांचल के उपभोक्ता 8010968292, मध्यांचल के 7669003409, पश्चिमांचल के 7859804803, दक्षिणांचल के 8010957826 तथा केस्को कानपुर के 8287835233 मोबाइल नंबर पर अपना बिजली कनेक्शन नंबर वाट्सअप कर बिल हासिल कर सकते हैं। अब नया बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के पोस्टपेड मोड में ही मिलेगा। प्रदेशभर में अब तक 83 लाख से अधिक प्रीपेड मोड में किए जा चुके स्मार्ट मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में करने के साथ ही उपभोक्ताओं को पहले की तरह जून से बिल देने के संबंध में पावर कारपोरेशन के एमडी ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए हैं। मई में उपभोग की गई बिजली का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। उपभोक्ताओं को अगले 15 दिन में बिल जमा करने की सुविधा मिलेगी। 15 दिन में बिल न जमा करने पर अगले सात दिन में कनेक्शन काट दिया जाएगा। 30 अप्रैल तक के बकाए बिल का घरेलू उपभोक्ता 10 किस्तों में जबकि अन्य श्रेणियों के उपभोक्ता तीन किस्तों में विलंब अधिभार सहित जमा कर सकेंगे। तकनीकी दिक्कतों के चलते स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चार मई को प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की थी। चार दिन बाद गुरुवार को कारपोरेशन के एमडी नितीश कुमार ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल डिस्काम व केस्को के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में परिवर्तित करने संबंधी निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि अब सभी नए कनेक्शन स्मार्ट मीटर के माध्यम से पोस्टपेड मोड में ही दिए जाएंगे। मई में बिजली खपत संबंधी बिल पोस्टपेड पद्धति में उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं। स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि स्मार्ट मीटर की आटोमैटिक रीडिंग न उपलब्ध होने पर मैनुअल रीडिंग कर अनिवार्य रूप से 10 तक बिल उपलब्ध कराया जाए। उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर रजिस्टर्ड न हो या गलत हो तो उसे डिस्काम के संबंधित वाट्सएप नंबर पर कनेक्शन संख्या के माध्यम से अपडेट कराने के बारे में बताया जाए। 1912 के माध्यम से भी बिल हासिल किया जा सकेगा

बिहार में विकास पर जोर, मंत्रियों को नीतीश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

 पटना बिहार सीएम की पद छोड़ने से पहले नीतीश कुमार ने कहा था कि वे राज्यसभा जा रहे हैं पर बिहार नहीं छोड़ेंगे। राज्य का विकास और जनता की सुख सुविधाओं का ख्याल रखेंगे। इसका असर दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सरकार की सभी योजनाओं का असर सीधे जनता तक दिखना चाहिए। सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रियों ने नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है कि सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने विभाग के कार्यों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन मंत्री अनिवार्य रूप से करें। नीतीश कुमार से रविवार को मिलने गये मंत्रियों को उन्होंने सरकार के आगे के कार्यकलापों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिये। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि सभी मंत्री अपने विभाग की योजनाओं को समय पर पूरा करायें। नियमित रूप से योजनाओं की निगरानी करें और जिलों में वह धरातल पर पूरी तरह से उतरे, इसे भी सुनिश्चित करायें। खासकर जदयू के नवनियुक्त मंत्री अपने-अपने विभागों में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने उनके आवास सात सर्कुलर रोड में रविवार को गये थे। इसके साथ ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी वहां पहुंचे थे। हालांकि, कई मंत्री शनिवार को भी अपने नेता नीतीश कुमार से मिले थे। रविवार को मिलने वालों में मंत्री अशोक चौधरी, लेशी सिंह और शीला कुमारी आदि शामिल रहीं। इस दौरान केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार न बीस सालों के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार की नई दिशा दी। विकास की नई इबारत लिखी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में उनके सीएम रहते काफी काम हुआ। सात निश्चय योजना के तहत रोजगार, नागरिक सुविधाएं और पार्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सम्राट चौधरी भी कहते हैं के नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेगी। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नीतीश कुमार ने भी जदयू नेताओं के साथ मीटिंग में बिहार में एक नई यात्रा का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा का कार्यों के बाद वे बिहार को ही समय देंगे। रविवार को मंत्रियों ने अपने नेता नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश कुमार के बेटे और बिहार से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी कहते हैं कि पिता के कार्यों को जन जन तक पहुंचाएंगे। निशांत बिहार की सद्भाव यात्रा की शुरुआत बाल्मीकिनगर से कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा सरकार के अभिभावक नीतीश कुमार हैं। उनके मार्गदर्शन का पालन किया जाएगा।

सरकार के तर्कों पर अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. राज्य सरकार ने बीते दिनों हाईकोर्ट में दलील देते हुए समय मांगा था. हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच दलीलों से सहमत नहीं दिखी. बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार भी लगाई. हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है. फिर दी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की दलील सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई. जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा, "आदेश निकायों को लेकर था तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है." कोर्ट ने सरकार के तर्क किए खारिज कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है. जून में हीटवेव चलती है और जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है. ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा. लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है. 18 मई को अवमानना याचिका दायर हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. वहीं, परिसीमन पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की डेडलाइन दी गई थी. अब सरकार और चुनाव आयोग ने समय मांगा है. जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.