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2022 नियम उल्लंघन के कारण 3500 अभ्यर्थी 2027 नगर निकाय चुनाव में नहीं लड़ सकेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 अभ्यर्थियों को आगामी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की ओर से ये कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की गई है। ये वे प्रत्याशी हैं, जो चुनाव खर्च का सही ब्यौरा पेश नहीं कर पाए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित उपचुनाव के साथ साल 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां भी शुरु कर गी हैं। 2022 के चुनाव में जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित 30 दिन की अवधि में निर्वाचन व्यय का ब्योरा नहीं दिया था, उन्हें सुनवाई का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें आयोग के भोपाल स्थित कार्यालय आने की जरूरत भी नहीं है। NIC ने की ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने संबंधित अभ्यर्थी के जिला मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) से जुड़कर पक्ष रखने की व्यवस्था की है। हर गुरुवार सुनवाई के लिए डेढ़ घंटे निर्धारित किए हैं। अब तक करीब 3,500 अभ्यर्थियों के मामलों का निराकरण कर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया है। इसमें कुछ लोगों को 2 साल तो कुछ को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। यानी इस हिसाब से ये सभी 2027 के जून-जुलाई में होने वाले निकाय चुनाव तक अयोग्यता अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए ये चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। खर्च का हिसाब न देने वाले अयोग्य घोषित यही नहीं, जिन नेताओं को 5 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, वो 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नियम के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों में हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पाई-पाई का ब्यौरा देना जरूरी होता है। लेकिन, आयोग की जांच में सामने आया कि, इन 3500 अभ्यर्थियों ने या तो खर्च का हिसाब दिया और ना ही ऐसी जानकारी दी, जिसे पूरा और संतोषजनक माना जाए। आयोग ने इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन साक्ष्य पेश न कर पाने के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। भोपाल के 82 अभ्यर्थी प्रदेशभर की बात करें तो यहां 3500 के आसपास अभ्यार्थी अयोग्य घोषित किए गए हैं। जबकि, इनमें भोपाल के 82 और बैरसिया के 3 अभ्यर्थियों सहित जिला स्तर पर बड़ी सूची तैयार की गई है। बता दें कि, भोपाल में 100 डिफॉल्टरों की लिस्ट बनाई गई थी, इनमें से सिर्फ 12 ने ही स्पष्ट जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई है, इसी के चलते अब यही अभ्यार्थी आगे चुनाव लड़ सकेंगे, बाकी 82 को दो और पांच साल तक के लिए बाहर किया गया है। अयोग्यता की अवधि 2 से 5 साल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगा है, जो आगामी उपचुनावों या अगले स्थानीय चुनावों में फिर से दावेदारी की तैयारी कर रहे थे। अयोग्य घोषित होने के बाद अब ये अभ्यर्थी अयोग्यता की अवधि (2 से 5 वर्ष तक) पूरी होने तक किसी भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे। भोपाल में 82 अभ्यार्थियों पर एक्शन भोपाल के अलग अलग वार्डों में हुई इस कार्रवाई ने क्षेत्र के समीकरण तक बदल दिए हैं। 2 और 5 साल के लिए प्रतिबंधित होने वाले प्रमुख नामों में जिन्हें शामिल किया गया है, वो कुछ इस प्रकार हैं…। -वार्ड-1 से इमाम खां एडवोकेट, बेनी प्रसाद मीना को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड-2 से शेलेंद्र सोनू तोमर जैसे अभ्यर्थियों को 2 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। -वार्ड 12 से समीर खान और वसीम खान को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड 19 से ओसाफ अली, आदिल खां और महेंद्र सिंह को अयोग्य घोषित किया गया है। -अन्य दिग्गज: बसंती बाई, हरीश कुशवाह, इमाम हुसैन, रु म्याना रशीद, नंदा परिहार और अंजली यूनानी को भी अयोग्य घोषित किया है। पारदर्शिता से समझौता नहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि, चुनाव में धनबल के उपयोग पर लगाम लगाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने से आगे चुनाव लड़ने वाले ये सुनिश्चित करेंगे कि, अभ्यर्थी चुनाव लड़ने के 30 दिन के भीतर चुनाव खर्च का ब्यौरा देना है।

मदर्स डे पर चीन: गलवान में मारे गए सैनिकों की प्रतिमाओं के सामने माताओं की आंसुओं भरी श्रद्धांजलि

बीजिंग  चीनी सेना में भ्रष्टाचार पर बढ़ते गुस्से के बीच बीजिंग ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एक भावनात्मक पैंतरा आजमाया है। मदर्स डे (10 मई) के मौके पर सरकारी मीडिया ने गलवान घाटी की झड़प में मारे गए सैनिकों की शोकाकुल माताओं के वीडियो दिखाए और एक राष्ट्रवादी माहौल बनाने की कोशिश की, जिससे भ्रष्टाचार की खबरों से लोगों का ध्यान हट जाए। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, मदर्स डे की पूर्व संध्या पर जून 2020 में गलवान घाटी सीमा संघर्ष में मारे गए जवानों- चेन शियांगरोंग, शियाओ सियुआन और वांग झूओरान की माताओं ने 'चीनी जन क्रांति के सैन्य संग्रहालय' का दौरा किया। ये महिलाएं यहां अपने बेटों की प्रतिमाओं को देखकर फूट पड़ीं और खूर रोईं। ये वीडियो चीन में खूब वायरल हो रहा है। मिलिट्री स्कैंडल के बीच गलवान का संदेश 'गलवान घाटी के शहीदों की मांएं, मदर्स डे से पहले अपने बेटों को दिल से याद कर रही हैं' शीर्षक वाले एक वीडियो में तीन मांओं के एक मिलिट्री म्यूजियम के दौरे को दिखाया गया गै। म्यूजियम में गलवान घाटी में मारे गए उनके बेटों की मूर्तियां थीं। वीडियो में दिखाया गया कि सात साल बीत जाने के बाद भी उनका दुख कम नहीं हुआ है। दुनियाभर में मदर्स डे को मातृत्व और परिवार के जश्न के तौर पर मनाया गया। वहीं चीन के सरकारी मीडिया ने दुख, बलिदान और मिलिट्री से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल करके सीमा विवाद से जुड़ी राष्ट्रवादी भावनाओं और देशभक्ति के किस्सों को मजबूत किया। यह चीनी मिलिट्री के एजेंडे को भी दिखाता है। 15 जून 2020 को गलवान में क्या हुआ था? दरअसल, 15 जून 2020 की रात लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। पूर्व समझौता के बावजूद चीनी सैनिकों द्वारा एलएसी पर निर्माण गतिविधियां बढ़ाने और तैनाती बदलने के प्रयास के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया। भारतीय सैनिकों ने चीनी हमले का जमकर मुकाबला किया। इस संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए, जबकि अन्य रिपोर्ट्स और खुफिया आंकड़ों के अनुसार चीन को 40 से ज्यादा सैनिकों के हताहत होने का सामना करना पड़ा था। भारतीय सेना के मुताबिक, कर्नल बी. संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय जवान बातचीत के लिए चीनी पक्ष के पास गए थे, लेकिन चीनी सैनिकों ने विश्वासघात कर हमला बोल दिया। दोनों पक्षों के सैनिक पत्थर, लोहे की रॉड्स और कांटेदार डंडों से लैस होकर घंटों तक भिड़े। भारत ने हमेशा कहा कि उसके सैनिकों ने अदम्य बहादुरी से दुश्मन का सामना किया और सीमा की संप्रभुता की रक्षा की। जून 2020 में, लद्दाख के भारतीय इलाके में मौजूद गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हो गई थी. यह इलाका इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह अक्साई चिन की ओर जाता है जिस पर भारत अपना दावा करता है और अभी यह चीन के कब्जे में है. 1975 के बाद से ये पहला मौका था जब भारत और चीन के बीच हुई सैन्य झड़प में सैनिकों की जान गई।  यह झड़प भारतीय क्षेत्र के पास चीन की अवैध गतिविधियों को लेकर शुरू हुई थी. चीन ने गलवान के इलाके में टेंट और निगरानी टावर लगाने शुरू किए थे. जब मना करने के बाद भी चीन नहीं माना तो भारतीय सैनिकों ने इसे नष्ट कर दिया. इसके कुछ दिन बाद जब एक भारतीय गश्ती दल इस इलाके में गया तो घात लगातर बैठे चीनी सैनिकों ने नुकीले हथियारों से हमला कर दिया. इसके बाद पीछे की चौकियों से भी भारतीय सैनिक पहुंच गए और दोनों पक्षों में भीषण संघर्ष हुआ. हालांकि इस दौरान किसी भी पक्ष ने बंदूकों का इस्तेमाल नहीं किया था. इस संघर्ष में ज्यादातर सैनिक ऊंचाई से श्योक नदी के ठंडे में पानी गिरने के कारण शहीद हुए थे।  चीन का एकतरफा नैरेटिव चीन ने इस घटना को लेकर कभी पूरा सच स्वीकार नहीं किया। लंबे समय तक अपने सैनिकों के नुकसान को छिपाए रखने के बाद उसने केवल चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी। अब मदर्स डे के बहाने जारी किए गए वीडियो में चीन केवल तीन सैनिकों की मौत का जिक्र कर एकतरफा कथा पेश कर रहा है। यहां बताना जरूरी है कि गलवान घाटी संघर्ष 1975 के बाद भारत-चीन सीमा पर सबसे घातक टकराव था। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कई महीनों तक तनाव रहा, हालांकि समय के साथ संबंधों में सुधार की प्रक्रिया जारी है। पांच साल बाद चीनी मीडिया द्वारा इस घटना को फिर से हाइलाइट करना और केवल अपने तीन सैनिकों का जिक्र करना प्रोपगैंडा की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कई रिपोर्ट्स चीनी पक्ष के ज्यादा नुकसान की पुष्टि करती हैं। चीन का रवैया उजागर इस वीडियो ने चीन की प्रोपेगैंडा मशीनरी के चुनिंदा रवैये को एक बार फिर उजागर किया है। चीन अक्सर ऐसे त्योहारों को पश्चिमी प्रभाव कहकर आलोचना करता है। हालांकि जब उनका इस्तेमाल सरकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने और देशभक्ति की भावना जगाने के लिए किया जा सकता है तो उन्हें अपना लिया जाता है। गलवान के सैनिकों की यह वीडियो चीन में ऐसे समय वायरल हो रही है, जब पीएलए के भ्रष्टाचार को लेकर ऑनलाइ बहस छिड़ी हुई है। इसकी वजह वे रिपोर्टें हैं, जिनमें बताया गया है कि 7 मई 2026 को पूर्व रक्षा मंत्रियों वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई लेकिन फिर इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया। चीनियों में चर्चा चीनी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इन सजाओं की बात कर रहे हैं और इस ओर ध्यान दिला रहे हैं कि सशस्त्र बलों के भीतर करप्शन किस तरह से गहरी जड़ें जमा चुका है। कई लोगों का कहना है कि मिलिट्री के आला अधिकारी भाई-भतीजावाद, हथियारों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता की कमी और सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं।  

बरेली दूसरे और पीलीभीत तीसरे स्थान पर रहे

 लखनऊ  योगी सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। रामपुर ने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है जबकि बरेली ने दूसरा और पीलीभीत ने तीसरा स्थान हासिल किया है। रामपुर ने 10 में से 9.42 अंक प्राप्त कर बाजी मारी मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खासतौर पर जनशिकायतों के समाधान में जिले ने बेहतर कार्य करते हुए शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया। शिकायतों के निस्तारण के बाद प्राप्त सकारात्मक फीडबैक ने भी जिले की रैंकिंग को मजबूत किया। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.42 अंक प्राप्त हुए। इसके साथ ही रामपुर ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं, बरेली ने 9.41 अंक के साथ दूसरा और पीलीभीत ने 9.36 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। टॉप टेन जिलों में इटावा, हमीरपुर, महराजगंज ने स्थान प्राप्त किया सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें इटावा ने 9.35 अंक हासिल कर चौथा, हमीरपुर ने 9.33 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह महराजगंज ने 9.31 अंक हासिल कर छठवां, शाहजहांपुर ने 9.30 अंक हासिल कर सांतवां, सीतापुर ने 9.29 अंक हासिल कर आठवां, हरदोई ने 9.27 अंक हासिल कर नौवां और औरैया ने 9.26 अंक हासिल कर दसवां स्थान प्राप्त किया है। इन सभी जिलों ने जनशिकायतों के समाधान, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश के जिलों के बीच बेहतर कार्य करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड योगी सरकार का एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योगी सरकार को जिलों के प्रदर्शन की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होता है, वहां प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

कोयला चोरी और ओवररिपोर्टिंग पर लगेगी लगाम, डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता

 धनबाद कोयला स्टाक की मैन्युअल जांच में लगातार सामने आ रही ओवररिपोर्टिंग, गलत आकलन और कोयले की हेराफेरी की शिकायतों के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने नई हाईटेक व्यवस्था लागू कर दी है। संशोधित 'न्यू येलो बुक' के तहत पहली बार थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और आधुनिक डिजिटल तकनीक से कोयला स्टाक की जांच पूरी कर ली गई है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह जांच कर रिपोर्ट भी कोल इंडिया मुख्यालय को सौंप दी गई है। नई तकनीक लागू होने से स्टाक की ओवररिपोर्टिंग, कोयला चोरी और हेराफेरी पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हुआ है। इसके साथ ही उत्पादन, डिस्पैच और उपलब्ध स्टाक के आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ी है तथा भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिली है। अप्रैल 2026 से संशोधित नियम लागू होने के बाद अब खदानों में स्टाक की माप पूरी तरह वैज्ञानिक और डिजिटल प्रणाली से की जा रही है। हेरफेर की बनी रहती थी आशंका अब तक अधिकांश खदानों में कोयला स्टाक की माप पारंपरिक सर्वे और मानवीय अनुमान के आधार पर की जाती थी। इस प्रक्रिया में त्रुटि और हेरफेर की आशंका बनी रहती थी। कई परियोजनाओं में वास्तविक स्टाक से अधिक कोयला दिखाने, रिकॉर्ड में अंतर और चोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही थीं। सूत्रों के अनुसार कई बार स्टाक के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिलने के बावजूद सटीक सत्यापन संभव नहीं हो पाता था। नई येलो बुक लागू होने के बाद पहली बार कोयला स्टाक की जांच थ्रीडी लेजर स्कैनर से की गई। जांच के दौरान पूरे कोयला स्टाक की त्रिआयामी डिजिटल स्कैनिंग कर वास्तविक आयतन और घनत्व का सटीक आकलन किया गया। इसके बाद विशेष साफ्टवेयर के माध्यम से सीधे स्टाक और वाल्यूम की गणना की गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से प्राप्त आंकड़े पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक सटीक और पारदर्शी पाए गए हैं। इसके बाद अब इसे सभी परियोजनाओं और ओपनकास्ट खदानों में लागू कर दिया गया है।  

नगर निगम चुनाव के बीच विवाद: 1 घंटा 50 मिनट कैमरा बंद, प्रत्याशियों का प्रदर्शन

 पंचकूला  पंचकूला नगर निगम चुनाव के बीच आज सुबह यानी सोमवार (11 मई, 2026) उस समय हड़कंप मच गया, जब सेक्टर-14 स्थित स्टेट गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा करीब 1 घंटा 50 मिनट तक बंद रहने की सूचना सामने आई। इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने मौके पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीनें इसी स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं। कैमरा बंद होने की जानकारी मिलते ही कांग्रेस मेयर प्रत्याशी सुधा भारद्वाज सहित कई दलों के और निर्दलीय वार्ड प्रत्याशी मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ सख्त नाराजगी जताई। प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि करीब दो घंटे तक कैमरा बंद रहना बेहद गंभीर मामला है और इससे ईवीएम सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। प्रत्याशियों ने जिला प्रशासन, इलेक्शन ऑब्जर्वर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। मौके पर मौजूद नेताओं और प्रत्याशियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कैमरा बंद होने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। घटना की सूचना मिलते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालात का जायजा लेने के लिए पंचकूला के विधायक चौ चंद्रमोहन भी मौके पर पहुंचे। वहीं, मामला बढ़ता देख इलेक्शन ऑब्जर्वर और प्रशासनिक अधिकारी भी स्ट्रांग रूम स्थल पर पहुंचे और प्रत्याशियों को समझाने का प्रयास किया। फिलहाल प्रशासन की ओर से कैमरा बंद होने के कारणों को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, जबकि प्रत्याशी लगातार ईवीएम सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अपराध मुक्त बिहार का लक्ष्य, सीएम ने पुलिस को खुली छूट देने की बात कही

पटना बिहार में अब अपराधियों की खैर नहीं है। पुलिस लगातार अपराधियों पर नकेल कस रही है तो वहीं अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी लॉ एंड ऑर्डर को लेकर साफ-साफ कर दिया है कि पुलिस को चुनौती देने वालों को 48 घंटे के अंदर जवाब दिया जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने अपराध मुक्त बिहार का जिक्र करते हुए कहा है कि अब कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। यहां बता दें कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद सम्राट चौधरी लगातार अपराधियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते आ रहे हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री ने पटना में मंदिरी नाला पर बने सड़क का उद्घाटन किया और फिर अपने संबोधन में अपराधियों को कड़े लहजे में चेताया।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि हमने पुलिस के हाथ खोल दिए हैं। पुलिस को कोई चुनौती देता है तो उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा। कोई अपराधी बच नहीं सकता है। उद्योग को लाना है तो बिहार में सुशासन को और बेहतर ढंग से स्थापित करना है। हमें अपराध मुक्त बिहार बनाना है, इसके लिए हम कुछ भी करेंगे। इससे समझौता नहीं करेंगे। सीएम ने कहा कि कौन अपराधी किस जाति का है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। एनकाउंटर में ढेर हो रहे अपराधी बता दें कि एक तरफ जहां विपक्ष बिहार में अपराध के मुद्दे पर रह-रह कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ एनडीए सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि बिहार में अपराधियों पर जोरदार प्रहार जारी है। सम्राट सरकार के पहले 18 दिन में ही मगध से अंग और सारण तक पुलिस ने पांच एनकाउंटर किए थे। इसमें तीन हाफ एनकाउंटर शामिल थे तो वहीं दो मुठभेड़ में पुलिस ने अपराधियों को मार गिराया था कुछ ही दिनों पहले गया में एक कार्यक्रम में मौजूद सीएम सम्राट चौधरी ने कहा था कि बिहार में अपराधियों का पिंडदान किया जाएगा। सीएम ने कहा था, ‘बिहार में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाए जााएंगे। गया जी तो पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। पिंडदान भी होगा। कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गय है। बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे कई अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकार करती रहेगी।’ मंदिरी नाले पर सड़क निर्माण से कई फायदे बहरहाल बता दें कि करीब 115 करोड़ रुपये की लागत से पटना के मंदिरी नाले पर बनी सड़क का उद्घाटन होने के बाद लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। मंदिरी नाले के निर्माण एवं विकास कार्य क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था अधिक सुचारू और व्यवस्थित होगी। नाले के ऊपर सड़क निर्माण से नेहरू पथ से जेपी गंगा पथ, अशोक राजपथ, डबल डेकर, पीएमसीएच तक जाने के लिए स्थानीय नागरिकों को एक नया मार्ग मिलेगा। इस पथ के निर्माण से प्रमुख रूप से वार्ड संख्या 25, 26 और 27 समेत उतरी बिहार जाने वाले लाखों की आबादी को सुगम सड़क संपर्कता मिलेगी। साथ ही पटना के बेली रोड पर होने वाले ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। राज्य सरकार ने इस सड़क का नाम दिवंगत विधायक नवीन किशोर सिन्हा के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। इस सड़क से उत्तर बिहार से भी कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

वीडियो कॉल सुविधा से परिवार से मिली महिला कैदी, रायपुर जेल में भावुक पल

रायपुर मातृ दिवस (Mother's Day 2026) के अवसर पर रायपुर महिला केंद्रीय जेल में बंद महिला बंदियों को बड़ी सौगात मिली। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप रविवार को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब महिला बंदी जेल परिसर से ही अपने स्वजन और अधिवक्ताओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर सकेंगी। पहले चरण में रायपुर महिला केंद्रीय जेल के साथ कवर्धा, जशपुर समेत सात जेलों में यह सुविधा शुरू की गई है। यह व्यवस्था जेल विभाग और BSNL के बीच हुए एमओयू के तहत लागू की गई है। परिवार को देखकर छलक उठीं आंखें वीडियो कॉलिंग सिस्टम के उद्घाटन के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। कई महिला बंदियों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने वर्षों बाद अपने परिवार के सदस्यों को स्क्रीन पर देखा और उनसे बातचीत की। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलेगी और वे भावनात्मक रूप से अपने परिवार से जुड़े रह सकेंगे। कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनने की पहल कार्यक्रम के दौरान निश्चय योजना के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 38 महिला बंदियों को कौशल प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल रिहाई के बाद बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। मदर्स डे के मौके पर जेल प्रशासन ने अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे 14 बच्चों को विशेष उपहार भी भेंट किए। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ निश्चय कार्यक्रम के तहत जेल में बंद युवाओं को अपराध की दुनिया से दूर कर रोजगार के योग्य बनाने के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। रविवार को केंद्रीय और महिला जेल रायपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 67 बंदियों, जिनमें 38 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल हैं, को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय जेल में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यहां बंदियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा प्रदान की जाएगी। बंदियों के लिए लोन मेला भी लगेगा बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 13 मई को इंडियन ओवरसीज बैंक की ओर से जेल परिसर में लोन मेला आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रिहा होने वाले बंदियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, बीएसएनएल के विजय छबलानी, महिला जेल प्रभारी गरिमा पांडेय सहित जेल विभाग का स्टाफ उपस्थित रहा।  

छत्तीसगढ़ में परंपरा और विवाद: शव दफनाने के लिए जमीन न मिलने से लोगों में गुस्सा

जगदलपुर  बस्तर के गांवों में कभी सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति की पहचान माने जाने वाले सामुदायिक आयोजन अब विवादों की वजह बनने लगे हैं। भानपुरी पंचायत के करंदोला गांव में एक ईसाई मत में मतांतरित महिला के शव को दफनाने को लेकर उपजा विवाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। यह मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बस्तर में बढ़ती वैचारिक दूरी और सामाजिक बदलाव को फिर उजागर कर दिया। ग्रामीणों ने ग्राम परंपरा का दिया हवाला गांव के लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि गांव की जमीन पर ईसाई रीति से शव दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ग्रामीणों का तर्क था कि गांव की परंपरागत व्यवस्था, रीति-रिवाज और ग्राम सभा की सहमति सर्वोपरि है। उनका कहना था कि सामुदायिक सहमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब ग्रामीणों को जानकारी मिली कि वन विभाग की फेंसिंग युक्त भूमि पर शव दफनाने की तैयारी की जा रही है। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि तार फेंसिंग हटाकर गड्ढा भी खोद दिया गया था। इसके बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अंततः शव को अंतिम संस्कार के लिए जगदलपुर स्थित करकापाल कब्रिस्तान भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि मतांतरण के बाद गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय नियमों को लगातार चुनौती दी जा रही है। उनका कहना था कि इससे गांवों की सांस्कृतिक पहचान कमजोर हो रही है और सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है। संगठनों ने उठाए पेसा कानून के मुद्दे घटना के बाद बजरंग दल विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने कहा कि बस्तर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून और ग्राम परंपराओं को विशेष महत्व प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मिशनरी संगठन गांवों की सामाजिक संरचना को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं विहिप जिला सह मंत्री घनश्याम नाग ने कहा कि हर समाज को स्थानीय परंपराओं और ग्राम व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में स्पष्ट नीति तैयार करने की मांग की, ताकि भविष्य में सामाजिक तनाव की स्थिति न बने। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद बस्तर संभाग में पिछले कुछ वर्षों में मतांतरण और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में सामाजिक बहिष्कार, सामुदायिक आयोजनों में मतभेद और अंतिम संस्कार को लेकर तनाव की घटनाएं लगातार चर्चा में रही हैं। पिछले वर्ष नारायणपुर के एड़का गांव में शव दफनाने को लेकर हुए विवाद के दौरान तत्कालीन एसपी सदानंद घायल हो गए थे। इस मामले में कई ग्रामीणों की गिरफ्तारी भी हुई थी। पेसा कानून और ग्राम सभा पर फिर चर्चा करंदोला विवाद के बाद एक बार फिर पेसा कानून और ग्राम सभा की शक्तियां चर्चा में आ गई हैं। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के कारण बस्तर में ग्राम सभा और पारंपरिक व्यवस्था को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की भूमि, सामाजिक परंपराओं और सामुदायिक फैसलों में ग्राम सभा की सहमति सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। यही वजह रही कि करंदोला गांव में लोग अपने पारंपरिक नियमों का हवाला देते हुए विरोध पर अड़े रहे।

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में इतिहास की खोज: 500 वर्षीय श्रीमद्भागवत गीता और कई पांडुलिपियां बरामद

पेंड्रा  भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जीपीएम जिले में प्राचीन, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर सर्वेक्षण कर दुर्लभ पांडुलिपियों का संकलन एवं संरक्षण किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत पेंड्रा में राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह तथा पुरानी बस्ती वार्ड क्रमांक चार निवासी प़ं मोहन दत्त शर्मा के घर से 200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। डिजिटल संरक्षण के माध्यम से सुरक्षित किया गया इन पांडुलिपियों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के समक्ष डिजिटल संरक्षण के माध्यम से सुरक्षित किया गया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में “ज्ञानभारतम” अभियान के जिला समन्वयक डाॉ राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वेक्षण टीम ने पंडित मोहन दत्त शर्मा के घर पर लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित “अथ श्रीमद्भागवत गीता” सहित कई प्राचीन पांडुलिपियां खोजीं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र धरोहर है कलेक्टर डॉ. देवांगन ने इस दुर्लभ धार्मिक धरोहर की प्राप्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रीफल और दक्षिणा अर्पित कर ग्रंथ को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र धरोहर है। प्राप्त पांडुलिपियों में “लग्न चंद्रिका”, “अथश्रीभागवतमहात्म्य”, “यद्वादशमहावाक्य”, “रामचंद्राय नमः” तथा अन्य धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथ शामिल हैं। पांडुलिपियों की फोटोग्राफी भी कराई गई इन सभी पांडुलिपियों की जियो टैगिंग कर “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण किया गया। यह ग्रंथ पंडित मोहन दत्त शर्मा के स्वामित्व में ही सुरक्षित रहेंगे। धार्मिक पांडुलिपियों के संरक्षण और स्मृति स्वरूप पंडित मोहन दत्त शर्मा के संयुक्त परिवार के सदस्यों के साथ पांडुलिपियों की फोटोग्राफी भी कराई गई। राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी प्राप्त हुए इसी दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के निवास पर लगभग 200 वर्ष पुरानी हस्तलिखित जमींदारी वंशावली तथा पेंड्रागढ़ के राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों का भी डिजिटल संरक्षण किया गया। कलेक्टर डॉ. देवांगन ने राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह एवं उनकी पत्नी शिखा सिंह से ऐतिहासिक धरोहरों और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर चर्चा की। इस अवसर पर जसीईओ मुकेश रावटे, एसडीएम विक्रांत अंचल, डिप्टी कलेक्टर अमित बेक, सीएमओ अमनदीप मिंज सहित सर्वे टीम के सदस्य उपस्थित थे। पांडुलिपियां का अभियान के तहत हुआ डिजिटल संरक्षण  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है. जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वेक्षण टीम ने पेंड्रा की पुरानी बस्ती में स्थित पंडित मोहन दत्त शर्मा और राजा उपेंद्र बहादुर सिंह के निवास स्थानों से 200 से 500 साल पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां बरामद की हैं।  इन अमूल्य धरोहरों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां इनका जियो-टैगिंग कर ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित किया गया. ​सर्वेक्षण के दौरान पंडित मोहन दत्त शर्मा के घर से लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘श्रीमद्भागवत गीता’ के साथ-साथ लग्न चंद्रिका, शीघ्रबोध और सारस्वत तद्धित प्रक्रिया जैसी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्राप्त हुईं।  भौगोलिक इतिहास को समझने में अत्यंत सहायक कलेक्टर ने इन पवित्र ग्रंथों की प्राप्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पंडित शर्मा के दस सदस्यीय संयुक्त परिवार के साथ इस उपलब्धि को साझा किया. वहीं, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह के घर से पेंड्रागढ़ की 200 साल पुरानी जमींदारी वंशावली और राजस्व व वन विभाग के ऐतिहासिक नक्शे मिले हैं, जो क्षेत्र के राजनीतिक और भौगोलिक इतिहास को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।  क्या होता है इनका महत्व? दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां ऐसे पुराने दस्तावेज या किताबें होती हैं, जिन्हें प्राचीन समय में हाथ से लिखा जाता था. उस दौर में छपाई मशीनें नहीं होती थीं, इसलिए विद्वान, पंडित या लेखक कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र या कपड़े पर हाथ से धार्मिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जानकारी लिखते थे. इन पांडुलिपियों में धर्मग्रंथ, ज्योतिष, आयुर्वेद, इतिहास, संस्कृत साहित्य, गणित और समाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं. कई पांडुलिपियां सैकड़ों साल पुरानी होती हैं, इसलिए उन्हें दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है।  इनका महत्व इसलिए भी ज्यादा होता है क्योंकि ये हमें पुराने समय की भाषा, संस्कृति, परंपरा और ज्ञान के बारे में जानकारी देती हैं. कई बार इनमें ऐसी जानकारियां मिलती हैं, जो किसी छपी हुई किताब में उपलब्ध नहीं होतीं।   

मध्य प्रदेश में मौसम का बदलाव: 8 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में गर्मी बरकरार

भोपाल मध्य प्रदेश में मौसम अब फिर से बदलता हुआ दिख रहा है। एक्टिव दो टर्फों और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के चलते सोमवार को भी कई जिलों में आंधी और बारिश का असर बना रहेगा। मौसम विभाग ने मंडला, सिवनी सहित आठ जिलों के लिए चेतावनी दी है। इधर, भोपाल, इंदौर, और उज्जैन के कुछ इलाकों में तेज गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। रविवार को रतलाम सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मई में यह पहली बार है जब यह तापमान इतना ऊँचा गया। मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव से लोगों को उमस और गर्म हवाओं दोनों का सामना करना पड़ रहा है। इंडिया भू-आवरण विभाग की भोपाल शाखा के अनुसार बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है। हल्की बारिश और बूंदाबांदी का भी अनुमान है। रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदलता रहा। इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, और शहडोल संभाग के करीब 18 जिलों में कहीं बादल छाए रहे, तो कहीं हल्की बारिश हुई। कई जगहों पर तेज हवा से थोड़ी राहत मिली, लेकिन दिन चढ़ने के साथ गर्मी फिर से बढ़ गई। IMD भोपाल के अनुसार, सोमवार को बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में 30 से 40Km प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी और बारिश का अनुमान है। इसकी वजह टर्फ और चक्रवात का एक्टिव होना है।रविवार को तीन सिस्टम एक्टिव रहे। इससे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के 18 जिलों में मौसम बदला रहा। कहीं बादल छाए तो कहीं बूंदाबांदी हुई। आज इन जिलों में तेज गर्मी का असर मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, छतरपुर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर और शाजापुर में तेज गर्मी पड़ेगी।रतलाम में रिकॉर्ड 45.5 डिग्री पारा रविवार को प्रदेश के कई शहरों में तेज गर्मी पड़ी। रतलाम में इस सीजन मई में पहली बार पारा 45.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यहां लगातार दूसरे दिन प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। शाजापुर में 44 डिग्री, धार में 42.4 डिग्री, खंडवा में 42.1 डिग्री और नर्मदापुरम में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। रायसेन, नरसिंहपुर, सागर और गुना में पारा 40 डिग्री से अधिक रहा।प्रदेश के 5 बड़े शहरों में उज्जैन में सबसे ज्यादा 42.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। भोपाल में 40.4 डिग्री, इंदौर में 41.9 डिग्री, ग्वालियर में 38.4 डिग्री और जबलपुर में 38.9 डिग्री सेल्सियस रहा। कल से हीट वेव का अलर्ट मौसम विभाग ने 12 मई से प्रदेश में हीट वेव यानी लू का अलर्ट जारी किया है। इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में लू चल सकती है।मई में पहली बार तेज गर्मी का दौर प्रदेश में 30 अप्रैल से आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया था। लगातार 11 दिन यानी 10 मई तक बारिश हुई। कभी वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर रहा तो कभी चक्रवात और टर्फ का। इसी वजह से मई के पहले सप्ताह में बारिश हुई। रतलाम सबसे गर्म रविवार को प्रदेश के कई शहरों में तेज गर्मी का दौर देखने को मिला। इनमें सबसे अधिक तापमान रतलाम में रिकॉर्ड हुआ। सीजन में पहली बार प्रदेश का अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। यहां लगातार दूसरे दिन प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज हुआ। इसके अलावा शाजापुर में 44 डिग्री, धार में 42.4 डिग्री, खंडवा में 42.1 डिग्री और नर्मदापुरम में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। इसके अलावा, रायसेन, नरसिंहपुर, सागर और गुना में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश के 5 बड़े शहरों का तापमान बड़े शहरों में सबसे अधिक तापमान उज्जैन में 42.4 डिग्री दर्ज हुआ। इसके बाद इंदौर में 41.9 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, जबलपुर में 38.9 डिग्री और ग्वालियर में 38.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कल से हीट वेव का अलर्ट मौसम विभाग ने 12 मई से प्रदेश में हीट वेव यानी लू चलने का अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि, इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में लू का अधिक असर देखने को मिल सकता है। खास बातें -दो टर्फ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव होने से सोमवार को एमपी के 8 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना है। -बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी बारिश हो सकती है। -30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है। -वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, छतरपुर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर और शाजापुर में तेज गर्मी पड़ेगी।