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सोमनाथ संकल्प महोत्सव में बोले सीएम योगी, विदेशी आक्रांताओं की कोशिशें रहीं नाकाम

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि 'विदेशी आक्रांताओं' ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने के प्रयास किए लेकिन वह नाकाम रहे क्योंकि सनातन भारत की चेतना में बसता है और इसे मिटाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत वाराणसी में आयोजित 'सोमनाथ संकल्प महोत्सव' को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सनातन को खत्म करने की कोशिश की लेकिन वह भारत की आत्मा को तोड़ नहीं सके। उन्होंने कहा कि मोहम्मद गौरी से लेकर मुगलों तक कई विदेशी आक्रांताओं ने हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर दिया और यहां गुलामी का प्रतीक एक ढांचा खड़ा कर दिया लेकिन वे भारत की आत्मा को तोड़ नहीं सके। वे यह नहीं समझ सके कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों के भीतर नहीं, बल्कि स्वयं भारत की चेतना में बसता है। भारत अपनी आत्मा को शाश्वत और अमर मानता है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने की कोशिश की, वे खुद ही धूल में मिल गए और आज उन आक्रमणकारियों को कोई याद नहीं करता, लेकिन काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के स्वाभिमान की गाथा को आगे बढ़ा रहे हैं। लोगों ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था उन्होंने कहा कि आज भी ऐसी ताकतें मौजूद हैं जो भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के पुनरुत्थान का विरोध करती हैं। मुख्यमंत्री ने किसी भी राजनीतिक दल या नेता का नाम लिए बगैर कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, उन्हीं लोगों ने बाद में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में भी बाधाएं खड़ी कीं। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि सोमनाथ महादेव मंदिर की पुनर्स्थापना के कार्यक्रम के दौरान बाधाएं खड़ी करने वाले लोग कौन थे। ये वही लोग थे जिन्होंने बाद में राम मंदिर के निर्माण और इस मुद्दे के समाधान में बार-बार रुकावट डालने की कोशिश की। आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विज़न की ओर ले जाने और पूरे भारत में प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों के पुनरुद्धार का नेतृत्व करने का श्रेय दिया और इसके लिए उनके प्रति आभार प्रकट किया। नए वैभव के साथ विकास की एक नई यात्रा पर आगे बढ़ रहे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि चाहे वह सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण हो, काशी में काशी विश्वनाथ धाम हो, उज्जैन में महाकाल महालोक हो, या अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो; सनातन परंपरा से जुड़े कई पवित्र केंद्र नए वैभव के साथ विकास की एक नई यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री से प्रेरित हैं और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से, मैं उन्हें बधाई देता हूं। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी जनसभा को संबोधित किया।

5000 से अधिक लंबित पदों पर जल्द बहाली के संकेत

पटना बिहार सरकार के नए योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने सोमवार को पटना के घंटाघर स्थित कार्यालय में विभाग का कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण के दौरान विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यभार संभालने के बाद मंत्री को विभाग की योजनाओं, सांख्यिकी गतिविधियों और विकास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही विभाग की मौजूदा स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर भी प्रस्तुतीकरण किया गया। नौकरी और बहाली को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता कार्यभार संभालते ही मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि विभाग में लंबित बहालियों को पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। मंत्री ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय से अटकी नियुक्तियों पर जल्द फैसला लिया जाएगा। 5000 से ज्यादा पदों की बहाली पर फोकस मंत्री कुशवाहा ने विभाग में लंबित करीब पांच हजार से अधिक पदों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और कोर्ट के आदेश आने के बावजूद अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे को वे पहले बिहार विधानसभा और विधान परिषद में भी उठा चुके हैं। अब विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएंगे। LAEO और जिला योजना पदाधिकारियों पर नजर मंत्री ने कहा कि योजना एवं विकास विभाग बिहार के विकास कार्यों में बेहद अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि जिले स्तर पर LAEO-1, LAEO-2 और जिला योजना पदाधिकारी योजनाओं को लागू करते हैं। विभाग की कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर की स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाया जाएगा। अधिकारियों को भी दिखाई सख्ती भगवान सिंह कुशवाहा ने साफ कहा कि सिर्फ सरकार की इच्छा से काम नहीं चलेगा, अधिकारियों को भी गंभीरता दिखानी होगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार हमेशा रोजगार देने के पक्ष में रही है। लेकिन विभागीय स्तर पर तेजी और जवाबदेही जरूरी है, तभी नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी होगी। मंत्री ने कहा कि खाली पदों का आकलन कर जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। तकनीक आधारित मॉनिटरिंग पर जोर अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि विभाग विकास योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मंत्री ने भी भरोसा दिलाया कि जो काम अब तक अधूरे रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधायिका और कार्यपालिका के बेहतर समन्वय से ही बिहार के विकास को नई गति मिलेगी।  

गुजरात टाइटंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच होगा निर्णायक टक्कर

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग अब जबकि अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है तब दूसरे स्थान पर काबिज सनराइजर्स हैदराबाद और तीसरे स्थान की टीम गुजरात टाइटंस के बीच मंगलवार को यहां होने वाला मैच काफी रोमांचक होने की संभावना है जो प्लेऑफ की दौड़ को ध्यान में रखते हुए दोनों टीम के लिए महत्वपूर्ण होगा। अच्छी लय में है गुजरात टाइटंस शुभमन गिल की अगुवाई वाली गुजरात की टीम ने इस सीजन की खराब शुरुआत से उबरते हुए कई महत्वपूर्ण जीत हासिल की हैं। इनमें पिछले मैच में राजस्थान रॉयल्स पर 77 रन की जीत भी शामिल है, जिससे वह अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस जीत से गुजरात की स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आ रही है। अभी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, सनराइजर्स और टाइटंस सभी के समान 14 अंक हैं। ऐसे में नेट रन रेट प्लेऑफ की दौड़ में निर्णायक कारक बन सकता है। सनराइजर्स किसी से कम नहीं सनराइजर्स ने सही समय पर अपनी लय हासिल कर ली है। पंजाब किंग्स के खिलाफ पिछले मैच में पर 33 रन की जीत में उसने अपनी बल्लेबाजी ताकत का शानदार नमूना पेश किया। उसने इस मैच में चार विकेट पर 235 रन बनाए लेकिन प्लेऑफ की दौड़ काफी कड़ी है और इसलिए वह किसी तरह के मुगालते में नहीं रह सकता। दोनों टीमों के बीच खेले जाने वाले इस मुकाबले को जीतने वाली टीम के प्लेऑफ में पहुंचे के और नजदीक पहुंच जाएगी। वहीं हारने वाली टीम के लिए प्लेऑफ से दूर हो जाएगी। गुजरात टाइटंस की असली ताकत जहां तक टाइटंस का सवाल है तो उसकी टीम बेहद संतुलित है। उसकी बल्लेबाजी कप्तान गिल और साई सुदर्शन के इर्द-गिर्द घूमती है। इन दोनों ने शीर्ष क्रम में मजबूती प्रदान की है और पावरप्ले में अच्छा प्रदर्शन किया है। जोस बटलर और वाशिंगटन सुंदर बीच के ओवरों में अच्छी भूमिका निभा रहे हैं। इससे उसकी टीम बड़ा स्कोर बनाने या बड़े लक्ष्य हासिल करने में सफल रही है। टाइटंस की गेंदबाजी भी उतनी ही दमदार है, जिसमें मोहम्मद सिराज और कैगिसो रबाडा की तेज गति और विकेट लेने की क्षमता के साथ-साथ राशिद खान का नियंत्रण और बीच के ओवरों में मैच का रुख बदलने वाली गेंदबाजी का शानदार संयोजन है SRH की बल्लेबाजी है दमदार सनराइजर्स ने एक बार फिर से अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से प्रभावित किया है जो किसी भी विरोधी टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। उसके चोटी के चार बल्लेबाजों अभिषेक शर्मा, ट्रैविस हेड, ईशान किशन और हेनरिक क्लासेन ने लगातार आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया है। बल्लेबाजों के अच्छे प्रदर्शन के कारण उसने इस सत्र में लगातार 200 से अधिक रन बनाए हैं। टाइटंस के गेंदबाजों के लिए सनराइजर्स के बल्लेबाजों पर अंकुश लगाना आसान नहीं होगा। सनराइजर्स का गेंदबाजी आक्रमण भी कप्तान पैट कमिंस के आक्रामक दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जो चोट के कारण सत्र के शुरू में नहीं खेल पाए थे। उनकी वापसी से सनराइजर्स के गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती मिली है दोनों टीमों का स्क्वाड गुजरात टाइटंस: शुभमन गिल (कप्तान), अनुज रावत, अरशद खान, अशोक शर्मा, जोस बटलर, कॉनर एस्टरहुइज़न, गुरनूर बरार, जेसन होल्डर, कुलवंत खेजरोलिया, कुमार कुशाग्र, मोहम्मद सिराज, ग्लेन फिलिप्स, प्रसिद्ध कृष्णा, कैगिसो रबाडा, राशिद खान, साई किशोर, साई सुदर्शन, शाहरुख खान, इशांत शर्मा, निशांत सिंधु, मानव सुथार, राहुल तेवतिया, वाशिंगटन सुंदर, ल्यूक वुड, जयन्त यादव। सनराइजर्स हैदराबाद: पैट कमिंस (कप्तान), अभिषेक शर्मा, आरएस अंबरीश, अमित कुमार, सलिल अरोड़ा, गेराल्ड कोएत्जी, हर्ष दुबे, क्रेन्स फुलेट्रा, ट्रैविस हेड, प्रफुल्ल हिंगे, ईशान किशन, हेनरिक क्लासेन, लियाम लिविंगस्टोन, दिलशान मदुशंका, ईशान मलिंगा, कामिंडु मेंडिस, नितीश कुमार रेड्डी, हर्षल पटेल, साकिब हुसैन, शिवांग कुमार, रविचंद्रन स्मरन, ओंकार तरमाले, जयदेव। उनादकट, अनिकेत वर्मा, जीशान अंसारी।

मादक पदार्थों के खिलाफ सख्ती, किशनगंज पुलिस ने बनाई विशेष एएनटीएफ टीम

किशनगंज बिहार के किशनगंज जिले में बढ़ते मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से पुलिस कप्तान ने बड़ा कदम उठाया है। किशनगंज पुलिस ने बिहार की पहली एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का गठन किया है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जिले को सूखे नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए यह विशेष टीम पूरी गंभीरता और रणनीति के साथ काम करेगी। एसपी संतोष कुमार ने बताया कि बिहार में पहली बार किसी जिले में इस प्रकार की विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों, उनके नेटवर्क, फंडिंग और आकाओं तक पहुंच कर पूरे अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करना है। इस विशेष टास्क फोर्स का नेतृत्व एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह करेंगे, जबकि इंस्पेक्टर राजू को इसका प्रभारी बनाया गया है। टीम में कुल 12 पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल किए गए हैं, जिन्हें विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जेल से छूटने के बाद भी रहेगी निगरानी पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। एएनटीएफ उन तस्करों की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखेगी जो जेल से छूट चुके हैं या भविष्य में रिहा होंगे। ऐसे लोगों पर प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए दोबारा अपराध में शामिल होने से रोकने की रणनीति तैयार की गई है। एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेगी, जिसके माध्यम से आम लोग गुप्त रूप से मादक पदार्थों की तस्करी या सेवन से जुड़ी जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकेंगे। एसपी संतोष कुमार ने कहा कि बिहार में पहली बार किसी जिले में इस प्रकार की विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों, उनके नेटवर्क, फंडिंग और आकाओं तक पहुंच कर पूरे अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करना है। युवाओं को जागरूक करने पर भी रहेगा जोर एसपी संतोष कुमार ने कहा कि पुलिस केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युवाओं और आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाएगी। स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों पर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी को इस जाल में फंसने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग नशे के सेवन के आदी हैं, उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती करवाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। पुलिस प्रशासन का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून से नहीं बल्कि सामाजिक सहयोग और जागरूकता से भी जीती जा सकती है। एसपी ने जिलेवासियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किशनगंज को सूखे नशे से मुक्त कराना पुलिस की प्राथमिकता है और इस मिशन को हर हाल में पूरा किया जाएगा। एएनटीएफ का मुख्य कार्य जिले और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों की पहचान करना, उनके आपराधिक इतिहास का अध्ययन करना तथा उनके नेटवर्क और सप्लाई चैन की पूरी जानकारी जुटाना होगा। पुलिस इन अपराधियों का विस्तृत डोजियर तैयार करेगी ताकि संगठित रूप से इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। एसपी ने कहा कि यह टास्क फोर्स सूचना संकलन और सत्यापन के बाद छापेमारी करेगी तथा कानूनी कार्रवाई को अंजाम देगी। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त लोगों की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का प्रयास रहेगा कि गिरफ्तार तस्करों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।

27 हजार पदों वाली भर्ती में नया मोड़, संशोधित रिजल्ट के आधार पर नियुक्ति के निर्देश

जयपुर राजस्थान हाई कोर्ट ने श‍िक्षक भर्ती 2022 परीक्षा में एक बड़ा और अहम फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने भर्ती परीक्षा में अधिक अंक लाने वाले सभी अभ्यर्थियों को नौकरी देने के निर्देश दिए हैं. जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया. याचिकाकर्ताओ की ओर से अधिवक्ता आनंद शर्मा ने पैरवी की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि भर्ती परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी होने के बाद जिन अभ्यर्थियों के अंक बढ़े, उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई. कम अंक वाले नौकरी कर रहे हैं. कोर्ट ने दलील सुनने के बाद सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए. यह फैसला लेवल-2 भर्ती को लेकर हुआ है. 27 हजार पदों पर निकाली थी भर्ती राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से दिसंबर 2022 में लेवल-1 और लेवल-2 के लिए अध्यापक भर्ती परीक्षा की विज्ञप्ति जारी की गई थी. कर्मचारी चयन बोर्ड ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 27 हजार पदों पर विभिन्न विषयों में भर्ती निकाली थी, इसके बाद 2023 में भर्ती परीक्षा का आयोजन करवाया गया. भर्ती परीक्षा के बाद 18 मार्च 2024 को प्रथम उत्तर कुंजी जारी की. 9 जून 2024 को अंतिम सूची जारी हुई अभ्यर्थियों की आपत्तियों का निस्तारण कर 9 जून 2024 को अंतिम सूची जारी कर परिणाम घोषित कर दिया. इसके बाद अभ्‍यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि मान्यता प्राप्त पुस्तकों, लेखकों और शिक्षा बोर्ड की पुस्तकों के आधार पर उनके जवाब सही है, लेकिन चयन बोर्ड ने उन्हें सही नहीं माना. इसके बाद भर्ती परीक्षा का रिवाइज्ड रिजल्ट जारी किया गया था.

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने दी चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन जरूरी

बिलासपुर  हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया है कि नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर नियमित पद के अनुरूप वेतन दिया जाए। यह मामला लंबे समय से चल रहे नियमितीकरण विवाद और पूर्व आदेशों के पालन नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं का है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट द्वारा आदेश पारित किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सभी लाभ अब तक नहीं दिए हैं। पक्षकारों ने कहा कि 6 मार्च 2023 के आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संबंधित कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी माना जाएगा तथा उनकी सेवाओं का नियमितीकरण 26 अगस्त 2008 से प्रभावी समझा जाएगा। साथ ही उन्हें नियमित कर्मचारियों के बराबर सभी सुविधाएं और लाभ भी दिए जाने थे। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर निर्देश जानकारी के अनुसार,  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया है और न ही देयकों का पेमेंट किया गया है। जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट SLP और रिव्यू पीटीशन खारिज कर चुका जानकारी के अनुसार, सेंट्रल यूनिवर्सिटी की ओर से दायर एसएलपी और रिव्यू पीटीशन सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। फिर भी अब तक नियमित कर्मचारियों की तहर दैनिभो कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि, साल 2023 में पारित आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय अब तक कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के समान पूरा लाभ नहीं दे रहा है। यूनिवर्सिटी ने जबाव में दी सफाई मामले में  यूनिवर्सिटी की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों का नियमितीकरण कर दिया गया है, लेकिन कुछ दस्तावेजों के सत्यापन की प्रोसेस बाकी है। विश्वविद्यालय ने सफाई दी कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे,जो उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे लाभ देने में देरी हो रही है। इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि संबंधित आदेश और पत्राचार कर्मचारियों को उपलब्ध ही नहीं कराया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्राचार 12 मई तक सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारियों को एक हफ्ते के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।  हाईकोर्ट ने कहा- 15 दिन में नियमित पद का वेतन दिया जाए सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी भले नियमितीकरण का दावा कर रही हो, लेकिन अब तक कर्मचारियों को नियमित पद का वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस पर विवि की ओर से कहा गया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी कर ली जाएगी और जो कर्मचारी नियमित पद पर कार्यरत हैं, उन्हें नियमित पद के अनुसार वेतन दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस यूनिवर्सिटी के पक्षकार वकीलों के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि नियमित कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे याचिकाकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर नियमित पद का वेतन भुगतान किया जाए। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा इस आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका और पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। इसके बावजूद कर्मचारियों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कहा गया कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। इस पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्र सभी याचिकाकर्ताओं को 12 मई तक उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे। सुनवाई के दौरान कर्मचारियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि विश्वविद्यालय नियमितीकरण का दावा तो कर रहा है, लेकिन उन्हें अब भी नियमित पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा। इस पर विश्वविद्यालय ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी और नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उसी अनुरूप वेतन दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट कर दिया कि जो कर्मचारी नियमित पदों पर कार्य कर रहे हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाना अनिवार्य होगा।

शपथ ग्रहण से रोकी गई तमिलनाडु की महिला मंत्री एस कीर्तना, कारण सामने आया

चेन्नई  तमिलनाडु की इकलौती महिला और सबसे युवा मंत्री एस कीर्तना सोमवार को विधानसभा में विधायक के रूप में शपथ ही नहीं ले पाईं। जानकारी के मुताबिक वह अपना इलेक्शन सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर पाईं और इसलिए उन्हें शपथ लेने से रोक दिया गया। विधानसभा के मुख्य सचिव के श्रीनिवासन ने उन्हें पहले शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। वह पोडियम तक पहुंच गईं लेकिन जब श्रीनिवासन ने पूछा कि उन्होंने अपना इलेक्शन सर्टिफिके प्राप्त कर लिया है। इसपर कीर्तना ने इनकार कर दिया। शपथ लेने से क्यों रोका गया विधानसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण में देखा गया कि जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष) की ओर मुख करके खड़े होते हैं जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाणपत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाणपत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है। पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, "ऐसा लगता है कि उनके पास उस समय निर्वाचन प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। प्रमाणपत्र जमा नहीं कर पाने के कारण, वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें शपथ लेने की अनुमति देने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। अब वह निर्वाचन प्रमाणपत्र जमा करने के बाद किसी भी समय शपथ ले सकती हैं।" अधिकारी ने बताया कि सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे अपना प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से साथ लाएं। सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए भी यह बात साफ कर दी थी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सहित सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने पहले अपने प्रमाणपत्र जमा किए और उसके बाद अधिकारियों के निर्देशानुसार संविधान के तहत पद की शपथ ली। कैबिनेट में नौवें स्थान पर काबिज कीर्तना, शपथ लेने के लिए आमंत्रित की जाने वाली अंतिम मंत्री थीं। शिवकाशी से चुनी गई हैं कीर्तना एस. कीर्तना शिवकाशी विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अशोकन जी. को 11,670 मतों के अंतर से हराया है। इस चुनाव में पूर्व मंत्री और अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेता के.टी. राजेंद्र बालाजी तीसरे स्थान पर रहे। तमिलनाडु विधानसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 233 है। मुख्यमंत्री विजय ने पेरम्बलुर और तिरुचि पूर्व दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, जिसमें से उन्होंने तिरुचि पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से इस्तीफा दे दिया है।

बंगाल में डबल इंजन सरकार की रफ्तार: सीएम की पहली कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, बॉर्डर एरियाज की जमीन BSF को 45 दिनों में ट्रांसफर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार अस्तित्व में आ गई है. शुभेंदु सरकार सत्ता में आते ही फॉर्म में आ गई. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 5 मंत्रियों के साथ अपनी पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें बॉर्डर पर फेंसिंग करने और बीजेपी के मारे गए 321 कार्यकर्ताओं को सम्मान देने समेत 6 अहम फैसले लिए गए। पहली कैबिनेट बैठक के बाद सीएम शुभेंदु ने बताया कि उनकी पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश के साथ सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में नौकरी के आवेदकों की आयु सीमा पांच साल बढ़ाने की मंजूरी दी गई. यह वादा गृह मंत्री अमित शाह ने किया था।  पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक की. इसमें पांच बड़े फैसले किए गए. मीटिंग में शुभेंदु के साथ सभी पांच कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का रोडमैप इस सरकार की प्राथमिकता होगी।  पहली कैबिनेट बैठक में राज्य के मतदाताओं, चुनाव आयोग और इस विशाल चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया गया।  शुभेंदु सरकार के पहले पांच बड़े ऐलान 1. आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राज्य में इसे लागू करने के लिए काम करेंगे।  2. नियमों के मुताबिक, आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।  3. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (ममता सरकार) ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।  4. बॉर्डर एरियाज में जमीन ट्रांसफर का काम आज से शुरू होगा. 45 दिनों के अंदर जमीन BSF को ट्रांसफर की जाएगी।   5. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बता दें कि बीजेपी का ऐसा दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।  नौकरी की सुरक्षा में विस्तार: कैबिनेट की बैठक में छठा अहम फैसला राज्य सरकार की सभी नौकरियों के लिए 5 साल का विस्तार दिया गया है. इस तरह से ये कदम पश्चिम बंगाल में शासन, सुरक्षा और कल्याण की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देते हैं. पश्चिम बंगाल में साल 2015 से कोई भर्ती नहीं हुई है, इसी वजह से सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि की गई है आयुष्मान भारत लागू बीजेपी ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्‍ता में आने पर राज्‍य में आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को लागू किया जाएगा. अब ये वादा पूरा होने जा रहा है. शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य ने आधिकारिक तौर पर केंद्र की स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत' से जुड़ने का फैसला किया है. CM ने कहा कि अब PM की सभी योजनाएं बंगाल में लागू की जाएंगी।  नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और BNS लागू सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पिछली CM ममता बनर्जी द्वारा रोकी गई नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और तैनाती को मंजूरी दे दी गई है. साथ ही, बंगाल में अब तक लागू न हुई भारतीय न्याय संहिता यानी BNS आज से प्रभावी हो गई है. अब सभी नए केस नए कानून के तहत दर्ज होंगे।  2015 से बंद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सरकार ने माना कि 2015 से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई. CM ने वादे के मुताबिक नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने का ऐलान किया.कैबिनेट बैठक के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ये फैसले "नए बंगाल" की दिशा तय करेंगे. विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।  आयुष्मान भारत योजना से गरीब और कमजोर परिवारों को इलाज मिलता है. इसमें हर साल पांच लाख रुपये तक सालाना कवरेज मिलता है. ये इलाज कैशलेस होता है. कैबिनेट बैठक के बारे में और जानकारी देते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा, 'बंगाल के सीमावर्ती जिलों में लगातार बदलती जनसंख्या को देखते हुए, हमारे मंत्रिमंडल ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है. मुख्य सचिव और राज्य के भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है।  अधिकारी ने आगे बताया कि टीएमसी सरकार ने संविधान और जनता के साथ विश्वासघात किया और जानबूझकर बंगाल में जनगणना प्रक्रिया को रोके रखा ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को रोका जा सके. लेकिन अब मंत्रिमंडल ने राज्य में परिपत्र को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी है।  मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) मतलब नया आपराधिक कानून, जो पूर्ववर्ती आईपीसी और सीआरपीसी की जगह ले रहा है, राज्य में टीएमसी सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया था और कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में नए कानून को लागू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।  बता दें कि बंगाल (293 सीट) में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है. इस चुनाव में बीजेपी को 207 सीट मिली हैं. वहीं सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई।  चुनावी जीत के बाद शुभेंदु को सीएम बनाया गया. उन्होंने ही भवानीपुर विधानसभा से ममता बनर्जी को हराया है. भवानीपुर में शुभेंदु को 73,917 वोट मिले. वहीं ममता 58,812 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. उनको 15105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 

राजस्थान-बंगाल के सिस्टम का असर: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन मौसम रहेगा खराब

रायपुर  छत्तीसगढ़ का मौसम इन दिनों काफी बदल चुका है। राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक जो ट्रफ लाइन बनी है और बिहार से आंध्र प्रदेश तक का एक्टिव साइक्लोनिक सर्कुलेशन, इसका सीधा असर हमारे प्रदेश पर देखने को मिल रहा है। इसी कारण शाम और रात के समय कई जगहों पर अचानक बादल छाने, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने में आ रहा है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, और बिजली गिरने का खतर भी बना रहेगा। लोगों को खासतौर पर खुले मैदानों और खेतों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि मौसम के इस बदलाव से अचानक जोखिम बढ़ सकता है। कई जगहों पर हल्की बारिश और थंडरस्टॉर्म जैसी स्थिति बन रही है। हालांकि, मौसम विभाग के मुताबिक 11 मई के बाद इसकी तीव्रता थोड़ी कम होने लगेगी। फिर भी अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी, जिससे मौसम को पूरी तरह स्थिर कहना मुश्किल है। पिछले 24 घंटों में तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया है, लेकिन गर्मी का असर बरकरार है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे गर्म हवाओं का असर फिर से बढ़ेगा। इसी बीच, दुर्ग में कल का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रहा, जो उस दिन का सबसे गर्म तापमान था। वहीं, पेंड्रा रोड में 19.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडी स्थिति रही। रायपुर समेत कई शहरों में दिन के समय बादल छाए रहे और शाम तक मौसम ने करवट ली। राजस्थान से बंगाल तक बनी ट्रफ लाइन और बिहार से आंध्र प्रदेश तक एक्टिव साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण छत्तीसगढ़ का मौसम बदला हुआ है। इसके प्रभाव से शाम और रात में बादल, गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन रही है। इस बीच मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कुछ इलाकों में गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना है, हालांकि आज (11 मई) के बाद से थंडरस्टॉर्म की एक्टिविटी धीरे-धीरे कम होगी। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में पारा 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर फिर तेज होगा। पिछले 24 घंटे में 39 डिग्री के साथ दुर्ग सबसे गर्म रहा। वहीं 19.2 डिग्री के साथ पेंड्रा रोड सबसे ठंडा रहा। अगर हम राजधानी रायपुर की बात करें, तो यहां दिन में आंशिक बादल छाए रहने की उम्मीद है। अधिकतम तापमान लगभग 40 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। भिलाई और अंबिकापुर जैसे क्षेत्रों में हाल ही में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई है, जिससे कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली की आपूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं भी सामने आईं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कुछ जगहों पर बिजली गिरने और तेज हवाओं का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। हालांकि, 11 मई के बाद धीरे-धीरे थंडरस्टॉर्म की गतिविधियां कम होने लगेंगी। लेकिन तब तक लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर, शाम और रात के समय बाहर निकलते वक्त सावधानी बरतें, क्योंकि मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है।

चांदनी चौक मंदिर में पूजा-अर्चना, ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा वातावरण

 नई दिल्ली सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर सोमवार को देश भर में भक्ति और हर्षोल्लास का वातावरण रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आयोजित इस विशेष उत्सव के क्रम में, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री गौरी शंकर मंदिर (चांदनी चौक) पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और अटूट श्रद्धा का संगम आज का दिन भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। एक ओर जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित सोमनाथ मंदिर में नतमस्तक होकर राष्ट्र की खुशहाली की कामना की, वहीं दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी कैबिनेट के सहयोगियों के साथ देवाधिदेव महादेव की आराधना की। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा और कपिल मिश्रा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में सोमनाथ मंदिर के मुख्य आयोजन का लाइव प्रसारण देखा गया, जिससे श्रद्धालु वर्चुअली इस भव्य क्षण के साक्षी बने। 'हर हर महादेव' के जयकारों से पूरा चांदनी चौक और मंदिर प्रांगण गुंजायमान हो उठा। विरासत भी, विकास भी पूजा के उपरांत मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की अपराजेय जिजीविषा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनगिनत आक्रमणों और विध्वंसों के बावजूद सोमनाथ का बार-बार उठ खड़ा होना यह संदेश देता है कि भारत की सनातन चेतना को कोई पराजित नहीं कर सकता। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश 'विकास भी और विरासत भी' के मंत्र पर चल रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंत्रियों ने भी इस अवसर को भारत की सांस्कृतिक एकता का महापर्व बताया और सोमनाथ के 75 गौरवशाली वर्षों को आत्मसम्मान का प्रतीक करार दिया।