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शहर में बनेंगे 10 हजार नए फ्लैट, आवास परियोजना को हरी झंडी

इंदौर प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। रायपुर में भाजपा की बड़ी बैठक इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।

सावधान! जबलपुर में तेजी से बढ़े Vitamin B-12 Deficiency के मरीज, जानिए 8 अहम लक्षण

जबलपुर Vitamin B12: सुबह उठने पर थकान महसूस होना, पैरों में दर्द, हाथ-पैरों में झुनझुनी, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। शहर में बड़ी संख्या में युवा भी विटामिन बी12 की कमी से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। शहर के अस्पतालों, क्लीनिकों और आयुर्वेद अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जांच में अधिकांश मरीजों में विटामिन बी12 की कमी सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार शाकाहारी लोगों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। युवती को पैरों में जकड़न की शिकायत सिविल लाइन निवासी 26 वर्षीय युवती लंबे समय से पैरों में जकड़न और दर्द की समस्या से परेशान थी। उसे सुबह उठने पर कमजोरी महसूस होती थी। जांच में विटामिन बी12 की कमी सामने आई। चिकित्सकों ने उसे मोरिंगा पाउडर, आम का अचार, आंवला मुरब्बा और दही नियमित रूप से लेने की सलाह दी। करीब एक महीने में उसे राहत मिलने लगी। ये हैं विटामिन बी12 की कमी के प्रमुख लक्षण     हाथ-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी     मांसपेशियों में कमजोरी और संतुलन बनाने में परेशानी     एनीमिया और अत्यधिक थकान     याददाश्त कमजोर होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई     अवसाद और चिड़चिड़ापन     भूख कम लगना और वजन घटना     जीभ में सूजन या जलन     त्वचा का पीला पड़ना और धड़कन तेज होना खानपान में सुधार बहुत जरूरी आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पंकज मिश्रा के अनुसार बड़ी संख्या में लोग विटामिन बी12 की कमी से पीड़ित हैं। कई मरीजों को लंबे समय तक सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि आम का अचार, मोरिंगा, आंवला, दही, पनीर, केला, नारियल पानी, पालक भाजी और किशमिश जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में पोषक तत्वों की कमी दूर करने में मददगार हो सकते हैं। सामान्य काम में भी होने लगी थकान मानेगांव निवासी 32 वर्षीय महिला को अत्यधिक थकान और चक्कर आने की शिकायत थी। स्थिति ऐसी हो गई थी कि घर के सामान्य काम करने में भी वह थक जाती थी। जांच में विटामिन बी12 की कमी पाई गई। डॉक्टरों ने उसे आम का अचार, काला तिल और केला नियमित रूप से खाने की सलाह दी। झुनझुनी की समस्या से मिली राहत अधारताल निवासी 45 वर्षीय महिला को हाथ-पैरों में लगातार झुनझुनी महसूस हो रही थी। जांच में विटामिन बी12 की कमी सामने आने के बाद उसे प्री-बायोटिक दही, आम का अचार, आंवला मुरब्बा और नारियल पानी लेने की सलाह दी गई। कुछ समय बाद उसे आराम मिल गया।

गेहूं खरीदी में बड़ा संकट: एफसीआई के फैसले से किसानों का करोड़ों रुपया अटका

भोपाल FCI- एमपी में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का काम तेजी से चल रहा है। गेहूं खरीदी में मुख्यमंत्री का गृह जिला उज्जैन सबसे आगे निकल गया है। यहां शनिवार शाम तक रेकॉर्ड तोड़ 4.79 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इधर, उत्पादन में कई बार राष्ट्रीय रेकॉर्ड बना चुके नर्मदापुरम में इस बार अभी तक 2.58 लाख मीट्रिक टन ही खरीदी हुई। इसमें भी 3500 मीट्रिक टन गेहूं को एफसीआइ ने रिजेक्ट कर दिया। यह आंकड़ा प्रदेश के 55 जिलों में सबसे अधिक है। अब रिजेक्ट गेहूं की ग्रेडिंग कराई जा रही है, जिसे दोबारा भेजा जाएगा। प्रदेश में कुल 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट किया गया है जिसका किसानों को भुगतान अटक गया है। उधर खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में भोपाल प्रदेश में नंबर- 1 पर है। यहां 1.94 लाख मीट्रिक टन की खरीदी हुई, जिसमें 90 प्रतिशत को एफसीआइ ने स्वीकार किया और 92 फीसद का परिवहन हो चुका है। जब मुख्यमंत्री मैदान में उतरे प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर कई उतार-चढ़ाव आए। किसानों को परेशान भी होना पड़ा। इसके बावजूद उज्जैन, भोपाल जैसे कई जिलों में स्थानीय प्रशासनक की सूझबूझ से खरीदी में अब तक का रेकॉर्ड अच्छा दिखाई दे रहा है। कुछ जिलों में प्रशासनिक चूक ने सरकार की प्रदेश स्तर पर किरकिरी कराई। जबकि मुख्यमंत्री ने केंद्रों तक पहुंचना शुरू किया तो सुधार भी नजर आया। अब ज्यादातर कलेक्टर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, किसानों के हालचाल जान रहे हैं। प्रदेश को 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य मिला है, 15 दिन खरीदी के बचे है।   रीवा संभाग पिछड़ा खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने में रीवा संभाग प्रदेश में सबसे ज्यादा पिछड़ा है। सिंगरौली ने 50 फीसद, मऊगंज ने 31, सीधी ने 40, मैहर ने 46, सतना ने 49 और रीवा ने खरीदे गए गेहूं में से 56 फीसद का ही परिवहन किया है। हालांकि जबलपुर संभाग के मंडला में भी 46 प्रतिशत ही परिवहन हो पाया है। ऐसे बढ़ी स्पीड सैटेलाइट मैपिंग में गेहूं के खेत खाली बताए गए। इसकी वजह से स्लॉट बुकिंग में दिक्कत आई तो मुख्यमंत्री ने शिथिलता बरतने के निर्देश दिए। तब बात बनी। स्लॉट बुकिंग वाला सर्वर ठप्प पड़ा तो मुख्यमंत्री ने अफसरों को फटकारा और ठीक कराया, गेहूं खरीदी भी 5 से बढ़ाकर 6 दिन की। देर रात तक तुलाई शुरू कराई है। तौलकांटों की संख्या पहले से बढ़ाई है। इन जिलों का गेहूं का एक दाना रिजेक्ट नहीं: राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर, आगर मालवा, रतलाम, नीमच, हरदा, जबलपुर, पांढुर्णा, गुना, शहडोल। 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट, भुगतान अटका प्रदेश के 55 जिलों में 54 लाख मीट्रिक टन से अधिक की गेहूं खरीदी हो चुकी है। इसमें से 85 प्रतिशत का परिवहन हुआ है, जबकि 17 हजार मीट्रिक टन रिजेक्ट भी हुआ है। यह गेहूं खराब नहीं होता, बल्कि तय मानकों को पूरा नहीं करता, इसलिए एफसीआइ इसे स्वीकार नहीं करता। जब तक गेहूं की यह मात्रा स्वीकार नहीं कर ली जाती, तब तक किसानों को भुगतान नहीं मिलता।

अब जमीन खरीदना होगा आसान और सुरक्षित: बिहार में रजिस्ट्री से पहले जांच होगी जरूरी

पटना बिहार में जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदारों को उस भूमि की पूरी जानकारी मिलेगी। राजस्व एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। रैयती जमीन के निबंधन से पहले पूरी जानकारी जल्द दी जाएगी। यह व्यवस्था इसी महीने शुरू होने जा रही है। राज्य के सभी अंचलाधिकारियों को भी इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जमीन निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि इस सप्ताह के अंत तक या इस माह के अंत तक इसकी शुरूआत राज्य भर में हो जाएगी। जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी। सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है। जमीन के सौदे के समय देनी हैं ये जानकारियां रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था के अनुसार जमीन का सौदा होने के बाद उसका निबंधन से पहले रैयती भूमि से जुड़ी 13 तरह की जानकारी सरकार को देनी होगी। निबंधन के लिए आवेदन के साथ खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी और विक्रेता की जानकारी आदि पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। सीओ करेंगे जांच इस आवेदन के बाद अंचल अधिकारी जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और विक्रेता के दावों की जांच करेंगे। इसके बाद उसकी रिपोर्ट साझा की जाएगी। इसके लिए सरकार ने समयसीमा भी तय की है। बताया जा रहा है कि सीओ को 10 दिनों के भीतर यह रिपोर्ट देनी होगी। नई व्यवस्था का क्या फायदा? जमीन निबंधन से जुड़ी इस नई व्यवस्था से भूमि की खरीद-बिक्री में और पारदर्शिता आएगी। इससे जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे। खरीदार को रैयती जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले ही उससे जुड़ी सभी जानकारी मिल जाएगी। अगर उस जमीन पर पहले से कोई लोन है या विवाद है तो पता चल जाएगा। क्या है जमीन निबंधन जब आप कोई जमीन खरीदते हैं तो उसकी सेल डीड को सरकार के पास पंजीकृत करवाना होता है। जमीन की कीमत के अनुसार उसका रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी की राशि जमा करानी होती है। बिहार सरकार ने जमीन निबंधन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस ई निबंधन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। रजिस्ट्री होने के बाद जमीन का दावा कानूनी तौर पर नए मालिक का माना जाता है और यह रिकॉर्ड भू‑सर्वेक्षण और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।

स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी बनी किसानों की मुसीबत, मंडियों में नहीं बिक पा रही उपज

शहडोल समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की आस लगाए बैठे किसानों के लिए तकनीक वरदान के बजाय अड़चन साबित हो रही है। उपार्जन केंद्रों में इन दिनों गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले ही सर्वर की सुस्त रफ्तार और सैटेलाइट सत्यापन में तकनीकी खामियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी दावों के विपरीत, पोर्टल पर आ रहे असत्यापित के मैसेज ने हजारों किसानों की नींद उड़ा दी है। फिलहाल, अन्नदाता सरकारी सिस्टम और सैटेलाइट के इस मकडज़ाल में उलझा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन तकनीकी खामियों को कितनी जल्दी दूर कर किसानों को राहत पहुंचाता है। 500 किसान अब भी कतार में जिले में कुल 9,526 पंजीकृत किसान हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते अब तक केवल 7,084 किसान ही अपना स्लॉट बुक कर पाए हैं। करीब 2,500 किसान ऐसे हैं जो दिन-रात ऑनलाइन केंद्रों और सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी जानकारी अपडेट नहीं हो पा रही है। सैटेलाइट मैपिंग बनी जंजाल स्लॉट बुकिंग के दौरान किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सैटेलाइट द्वारा असत्यापित या किसान कोड सत्यापन अपूर्ण जैसे मैसेज आ रहे हैं। शुरुआत में 8,700 खसरों में सैटेलाइट मैपिंग को लेकर विसंगतियां पाई गई थीं। प्रशासनिक जांच के बाद अधिकांश मामलों का निराकरण तो हुआ, लेकिन 46 खसरों में रिकॉर्ड के उलट फसल पाई गई। हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों की फसल मौके पर सही है, उन्हें भी तकनीकी ग्लिच के कारण दोबारा सत्यापन के लिए भटकना पड़ रहा है। मुख्य समस्याएं एक नजर में सर्वर की धीमी गति: स्लॉट बुकिंग के दौरान पोर्टल का बार-बार कैश होना। सत्यापन का फेर: सैटेलाइट डेटा और जमीनी हकीकत में अंतर होने से तकनीकी रुकावट। अपूर्ण किसान कोड: पुराने डेटा और नए पंजीकरण के बीच मिलान न होना। बिचौलियों का सता रहा डर तैयारी कर ली थी, लेकिन जैसे ही स्लॉट बुकिंग करने गया, वहां लिखा आता है कि सैटेलाइट से सत्यापन नहीं हुआ है। पटवारी के पास जाओ तो वो तहसील भेजते हैं, समझ नहीं आ रहा अनाज मंडी ले जाएं या दफ्तरों के चक्कर काटें। रहसू पटेल, किसान ग्राम अमरहा

मध्य प्रदेश में साइंटिफिक अफसर बनने का मौका, भर्ती के लिए आवेदन जल्द होंगे बंद

भोपाल MPPSC Recruitment 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने साइंटिफिक अफसर बायोलॉजी के पदों पर वैकेंसी निकाली है। इस भर्ती के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख अब करीब है। ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, वे बिना देरी किए एमपीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाकर अपना फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख 20 मई, 2026 तय की गई है। एलिजिबिलिटी और आयु सीमा इस वैकेंसी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का वनस्पति विज्ञान (Botany), जंतु विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके साथ ही कुछ अन्य योग्यताएं भी तय की गई हैं। उम्मीदवारों की उम्र की गिनती 1 जनवरी, 2027 के आधार पर होगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में सरकारी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।   लेट फीस और सैलरी कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि, वे 20 मई तक अपना फॉर्म जरूर भर लें। अगर आप 21 मई से 27 मई के बीच आवेदन करते हैं, तो आपको 3000 रुपये लेट फीस देनी होगी। वहीं, 28 मई से 28 अक्टूबर 2026 तक फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों को लेट फीस के रूप में 25000 रुपये का भारी भुगतान करना होगा। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए चुने गए उम्मीदवारों को शानदार सैलरी मिलेगी। चयनित साइंटिफिक अफसर को हर महीने 15600 रुपये से लेकर 39100 रुपये तक सैलरी दी जाएगी। ऐसे करें अप्लाई कैंडिडेट्स इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से अपना फॉर्म अप्लाई कर सकते हैं:     सबसे पहले कैंडिडेट्स मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाएं।     वेबसाइट के होम पेज पर रजिस्ट्रेशन से जुड़े लिंक पर क्लिक करें।     इसके बाद फॉर्म में मांगी गई अपनी सभी जरूरी जानकारी सही तरीके से भरें।     अपने दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा करें।     फॉर्म सबमिट करने के बाद भविष्य की जरूरत के लिए उसका एक प्रिंट आउट जरूर निकाल लें। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से जुड़ी किसी भी लेटेस्ट अपडेट के लिए आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in को समय-समय पर चेक करते रहें।

हजारों कब्रों के नीचे से दौड़ेगी ट्रेन! एमपी के इस प्रोजेक्ट का विरोध तेज, कोर्ट में अगली सुनवाई 14 मई

भोपाल एमपी में इंदौर और भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। दोनों जगहों पर मेट्रो ट्रेनें चलने लगी हैं लेकिन प्रोजेक्ट का अधिकांश हिस्सा अभी बाकी है। इस बीच भोपाल मेट्रो की प्लानिंग पर ही सवाल उठने लगे हैं। राजधानी भोपाल के शाही कब्रिस्तान बड़ा बाग से मेट्रो गुजरने पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत ऊपर बनीं हजारों कब्रों के नीचे से मेट्रो ट्रेनें चलाने की योजना है। इससे जहां मुस्लिम समुदाय ने आपत्ति जताई है वहीं आम लोग भी घबरा रहे हैं। भोपाल टॉकीज स्थित शाही कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर निर्माण के खिलाफ कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण प्रकरण दायर किए है। इन पर रोक की मांग की गई है। भोपाल के शाही कब्रिस्तान बड़ा बाग से मेट्रो गुजरने के प्लान के विरोध प्रदर्शन के बाद मामला वक्फ ट्रिब्यूनल पहुंच गया। मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इसमें ट्रिब्यूनल ने मेट्रो प्रबंधन से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 14 मई को होगी। कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित मेट्रो लाइन से करीब एक एकड़ क्षेत्र सीधे प्रभावित हो सकता है, जिससे बड़ी संख्या में कब्रों के अस्तित्व और संरचना पर खतरा उत्पन्न होगा। यह भी आरोप लगाया गया है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक इस क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट या सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे आशंकाएं और बढ़ गई हैं। मामले में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अब यह कानूनी मामला भी दायर हुआ है। पहले प्रकरण में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। कहा गया है यहां हजारों कब्रें मौजूद हैं। प्रमुख बिंदु कब्रिस्तान के नीचे से निकलेगी मेट्रो लाइन प्रोजेक्ट की खिलाफत कर रहा मुस्लिम समुदाय कब्रिस्तान में बैठकर किया मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध समुदाय ने कानूनी लड़ाई की तैयारी की कहा- हजारों कब्रें मौजूद, इनके अस्तित्व पर खतरा

मध्यप्रदेश को विकास की नई रफ्तार: 830 करोड़ की 973 सड़कों का तोहफा

सीहोर रविवार 10 मई को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को 25 साल पूरे हुए। इसी उपलक्ष में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरुंदा में रजत जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एमपीवासियों को बड़ी सौगात देंगे। यहां सीएम और केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण की शुरुआत करेंगे। एमपी में होगा 973 सड़कों का निर्माण पीएम ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अंतर्गत एमपी में 2117 किलोमीटर 973 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी जाएगी। इस सड़कों के बनने के बाद राज्य की 987 बसाहटों और गांवों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान योजना (PM-JANMAN) के तहत 384 किलोमीटर से अधिक के सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी जाएगी जिससे करीब 168 पिछड़े इलाकों तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी। गौरतलब है कि साल 2026-27 के पीएम ग्राम सड़क योजना के लिए केंद्र सरकार 18907 करोड़ रुपए आवंटित करेगी। बताया जा रहा है कि इसमें से लगभग 830 करोड़ रुपए मध्य प्रदेश के विकास कार्यों के निर्धारित किए जाएंगे। सीहोर जिले में बनेगी 81 सड़कें इस योजना के तहत चौथे चरण में सीहोर जिले की 81 सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इन सड़क की लंबाई करीब 209 किलोमीटर है, जिससे जिले की 85 बसाहटों को लाभ मिलेगा। सरकार इन सड़कों के निर्माण पर करीब 165 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके साथ ही साल 2026-27 में पीएम जनमन योजना (वर्ष 2026-27) के तहत 261 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 168 नई सड़कें बनाई जाएंगी। इनकी लंबाई 384 किलोमीटर होगी और इनसे प्रदेश की 168 बसाहटों को लाभ पहुंचेगा। भैरुंदा में कार्यक्रम की तैयारियां तेज भैरूंदा के दशहरा मैदान स्कूल परिसर में प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। डोम बनकर तैयार हो गया है, जिला प्रशासन की तरफ से करीब 5 हजार व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। बुधवार को कलेक्टर बालागुरु के. और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निज सचिव प्रवीण सिंह ने कार्यक्रम स्थल का दौरा किया। कलेक्टर बालागुरु के. ने अफसरों को कार्यक्रम से पूर्व सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। ये जर्जर सड़कें बनेंगी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के चौथे चरण में सीहोर जिले की 81 सड़क बनेगी। इन सड़कों में कई ऐसी हैं जो इस समय चलने लायक नहीं हैं। बारिश के सीजन में दोपहिया वाहन तक नहीं निकल पाते हैं। कई बार तो रास्ते में इतना कीचड़ हो जाता है कि बीमार व्यक्तियों को खटियां पर डालकर लाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजनाा के तहत बनने वाली सड़कों में मुहाली से टिकली बंजारी, हथियाखेड़ा से बुगलीवाली, रावनखेड़ा-पानबिहार रोड से पठार, सेमरादांगी से छेवटा मोहल्ला, सिराडी से मानाटोला, सोंठी से पुरा, श्यामपुर-बिछिया रोड से अचारपुरा, पाटन से आमखजूर, चांदबड़-मगरखेड़ा रोड से पतलोन, गोपालपुरा से राम नगर, बरखेड़ी दोराहा से हरिपुरा, मुंडलाकलां से खारचा बस्ती, दोराहा-खाईखेड़ा रोड से राम नगर कॉलोनी, मुरख्तारनगर से पहिया टोला और अहमदपुर-पारासोन रोड से झिरी गुर्जर मोहल्ला तक के मार्ग शामिल हैं।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे, एमपी में बड़े ऐलानों की तैयारी में मोहन सरकार

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मई 2026 में अपने 12 साल पूरे कर 13वें में प्रवेश करने जा रही है। भाजपा और एनडीए शासित राज्य इस उपलिब्ध को अपने-अपने अंदाज में जनता से साझा करने की तैयारी कर रहे हैं।मध्यप्रदेश की मोहन सरकार भी मप्र की जनता से केंद्र के कामों, योजनाओं को इस मौके पर साझा करने का रोडमैप बना रही है। जनहित योजनाओं का खाका तैयार करने का आदेश सूत्रों के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने टॉप अफसरों से कहा है कि जनहित योजनाओं का खाका तैयार कर उनके विस्तार पर योजना तैयार करें। इनमें कि सान और आदिवासी सरकार की फोकस में होंगे। बता दें, मई में मोहन सरकार के भी ढाई साल पूरे होंगे। सरकार इस मौके को खास बनाना चाहती है।   जनता को ये सौगात दे सकते हैं मुख्यमंत्री     दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने वाले लाभों का दायरा बढ़ा सकते हैं।     आदिवासियों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने में तेजी।     सड़क, सिंचाई व बिजली से वंचित क्षेत्रों में नई योजना की शुरु आत।     महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, आर्थिक गतिविधियों से जोडऩा।     लघु उद्योगों की स्थापना के लिए अतिरिक्त छूट दी जा सक ती है।     कृषि आधारित उद्योगों में किसानों व उनके परिवारों को जोडऩे के प्रयास। मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए होगी बैठक बता दें कि प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का 13 मई को ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके लिए सीएम मोहन यादव द्वारा सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री ने बैठकों की डेडलाइन भी तय कर दी है जिससे कई मंत्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा ​है कि समीक्षा बैठकें 8 मई से 10 मई के बीच विभागवार होंगी। भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव(CM Mohan Yadav) शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने उन्हें अंगवस्त्रम ओढ़ाया और भेंट किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में ट्वीट भी किया। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में हुई इस भेंट की तस्वीरें अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट की हैं। इधर सीएम के दिल्ली दौरे पर भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बीजेपी में खासी गहमागहमी है।

अब ‘कमांडो स्टाइल’ में तैयार होंगे आबकारी अधिकारी, हथियार संचालन की विशेष ट्रेनिंग शुरू

इंदौर अवैध शराब कारोबारियों के बढ़ते नेटवर्क और अपराधियों की नई-नई तकनीकों ने अब आबकारी विभाग की कार्यशैली भी बदल दी है। शराब माफिया जिस तरह संगठित तरीके से काम कर रहे हैं, उसे देखते हुए अब आबकारी निरीक्षकों और अधिकारियों को भी पुलिस की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए उन्हें हथियार चलाने, शारीरिक प्रशिक्षण, साइबर अपराध की जांच और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की विशेष ट्रैनिंग दी जाएगी। अब तक आबकारी अधिकारियों को 60 दिन का सामान्य प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन नए पाठ्यक्रम के तहत यह अवधि बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है। नया पाठ्यक्रम तैयार किया प्रशिक्षण जवाहर लाल नेहरू पुलिस अकादमी (जेएनपीए), सागर में होगा, जहां पुलिस उप निरीक्षक और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को ट्रैनिंग दी जाती है। हाल ही में भर्ती हुए 45 आबकारी अधिकारियों से इसकी शुरुआत होगी। पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने नया पाठ्यक्रम तैयार किया है।   इसमें आबकारी अधिकारियों को पुलिस उप निरीक्षकों की तरह मैदानी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान वे एसएलआर और पिस्तौल चलाना सीखेंगे, परेड करेंगे और फिजिकल ड्रिल भी करेंगे। ट्रेनिंग में साइबर अपराध की जांच, ई-फाइलिंग, सीपीआर देने और तकनीकी मामलों की जानकारी भी दी जाएगी। फिजिकल ट्रैनिंग के 47 पीरियड आबकारी अधिकारियों को फिजिकल ट्रैनिंग के तहत पांच किमी दौड़, 12 किमी रोड वॉक, क्रोकोडाइल वॉक और डग वॉक जैसे कठिन अभ्यास कराए जाएंगे। इसके लिए 47 पीरियड निर्धारित किए गए हैं। साथ ही योग और ध्यान को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है ताकि अधिकारी मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहें। बुनियादी प्रशिक्षण के साथ आबकारी अधिनियम भी बुनियादी प्रशिक्षण के साथ आबकारी अधिनियम 1915, एनडीपीएस एक्ट, एमपी बीयर एवं शराब अधिनियम 2000, विदेशी शराब भंडारण, टेंडर प्रक्रिया, बिक्री और आबकारी शुल्क से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इस नए प्रशिक्षण मॉडल से आबकारी अधिकारी अवैध शराब कारोबार और उससे जुड़े अपराधों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई कर सकेंगे। शराब माफिया पर शिकंजा बीते दिनों पहले ही मध्यप्रदेश पुलिस ने अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ अभियान तेज करते हुए उज्जैन और इंदौर में दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 1.05 करोड़ से अधिक की शराब और वाहन जब्त किए हैं। जानकारी के मुताबिक उज्जैन में नानाखेड़ा क्षेत्र स्थित निनोरा टोल प्लाजा के पास पुलिस ने एक ट्रक को रोककर तलाशी ली, जिसमें 900 पेटी (21,600 केन) अवैध बीयर बरामद हुई। इंदौर में भी 43 पेटी अवैध विदेशी शराब जब्त की गई।