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नंदिनी नगर कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर गरमाई सियासत, आरोप-प्रत्यारोप जारी

 लखनऊ पहलवान विनेश फोगाट और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नंदिनी नगर में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब इशारों और शेरो-शायरी तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर दोनों के आरोप-प्रत्यारोप की खेल व राजनीतिक जगत में चर्चा हो रही है। पहलवान विनेश फोगाट ने एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा की है। इसमें लिखा, ‘जिंदगी फंसी है किसी मझधार में, जमाना ढूंढ़ता है खामी मेरे किरदार में… जिंदगी तेरा सर सदा बुलंद रखा है, झुकाने की ताकत नहीं किसी तलवार में…!’ विनेश की इस पोस्ट को उनके समर्थक संघर्ष और आत्मसम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि यह पोस्ट गोंडा में रविवार को शुरू हुई प्रतियोगिता और उससे जुड़े घटनाक्रमों की ओर इशारा कर रही है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी दी प्रतिक्रिया विनेश की इस पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक शेर साझा करते हुए लिखा, ‘शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो, वह टूट भी सकती है।’ सोशल मीडिया यूजर इसे विनेश की पोस्ट का जवाब मान रहे हैं। हालांकि, दोनों ने सीधे तौर पर एक-दूसरे का नाम नहीं लिया है, लेकिन समय और संदर्भ को देखते हुए इसे सीधा मुकाबला माना जा रहा है। विवाद की जड़ 10 से 12 मई तक नंदिनी नगर में होने वाली सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता है। हाल ही में विनेश फोगाट ने इस आयोजन स्थल को लेकर अपनी असहजता जताई थी। इसके बाद पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया था कि इस प्रतियोगिता से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा था कि आयोजन भारतीय कुश्ती संघ की ओर से कराया जा रहा है और वह इसमें हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। विनेश ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा प्रतिबंध : संजय सिंह भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा है कि विनेश फोगाट ने अनुशासनहीनता के नोटिस का समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उन पर प्रतिबंध लग सकता है। गोंडा में नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को आयोजित ओपन सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर आए संजय सिंह ने कहा कि विनेश हर बात पर आरोप लगाने की आदी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि विनेश के प्रतियोगिता में आने की बात कहने पर सुरक्षित लाने, मुकाबला कराने व वापस छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी ली गई थी। संजय सिंह ने बताया कि 2028 ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी गई है। भारत को चार से पांच पदक मिलने की उम्मीद है। देशविरोधी कुछ ताकतें फिर माहौल खराब करने की कोशिश कर सकती हैं।   बृजभूषण शरण सिंह और विनेश के बीच सोशल मीडिया पर शायरी पोस्ट करने को लेकर संजय सिंह ने कोई टिप्पणी नहीं की। वह सिर्फ इतना बोले कि बृजभूषण शायरी के बादशाह हैं। जवाब देने में पूर्वांचल में उनका मुकाबला नहीं है। दोनों के बीच सोशल मीडिया पर जो चल रहा है, वह उनका व्यक्तिगत मामला है। संजय सिंह ने कहा कि नंदिनी नगर स्टेडियम जैसी सुविधाएं देश में कहीं नहीं हैं। प्रतियोगिता में 28 राज्यों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। फ्री स्टाइल कुश्ती में करीब 600 पहलवान मैदान में हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत हरियाणा से हैं। रैंकिंग सीरीज का मकसद नए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तरह आगे बढ़ने के लिए मंच देना है।    

Jharkhand University Act 2026 लागू, नियुक्ति और प्रमोशन नियम बदलेंगे

 रांची  झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के लागू होने के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग इसके अनुपालन के लिए लगभग आधा दर्जन स्टैच्यूट (परिनियम) गठित करने की तैयारी कर रहा है। सारे परिनियम विश्वविद्यालयों में संरचनात्मक सुधार से संबंधित हैं। नए अधिनियम में कुलपतियों से लेकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के नियुक्ति, सेवाशर्त एवं प्रोन्नति से संबंधित प्रविधानों में बदलाव हुआ है। सभी से संबंधित अलग-अलग परिनियम लागू किए जाएंगे। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 के तहत विश्वविद्यालयों में पहली बार विभिन्न विभागों के लिए निदेशक पद के प्रविधान किए गए हैं। परिनियम गठित कर इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी। विश्वविद्यालयों में विभिन्न बोर्ड के गठन को लेकर भी नीतियां तैयार होंगी। विश्वविद्यालयों में अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों की नियुक्ति के लिए झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन की भी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। इसके लिए भी अलग से परिनियम गठित किया जाएगा। छात्रों तथा शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की शिकायतों के निपटारे के लिए कमेटी और न्यायाधिकरण के भी प्रविधान अधिनियम में पहली बार किए गए हैं। इन सभी निकायों के गठन के लिए भी परिनियम गठित किया जाएगा। छात्रसंघ चुनाव के लिए भी प्रविधान छात्र संघ चुनाव के लिए भी प्रविधान में बदलाव किया गया है। साथ ही पहली बार प्रति कुलाधिपति के पद का प्रविधान किया गया है। गठित होने वाले सारे परिनियम पर कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल की भी स्वीकृति ली जाएगी। परिनियम में विश्वविद्यालयों, अंगीभूत एवं संबद्ध कालेजों तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारों का स्पष्ट रेखांकन किया जाएगा। बताते चलें कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद राज्य में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा अधिनियम अधिसूचित हो चुका है। इस अधिनियम को लागू करने के लिए ही विभिन्न परिनियमों का गठन किया जा रहा है।

रेंट एग्रीमेंट से इमिग्रेशन तक बड़ा बदलाव, चंडीगढ़ प्रशासन ने लागू किए नए कानून

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में पांच नए कानून लागू किए गए हैं. प्रशासन की तरफ से 6 मई से लागू किए गए इन कानूनों के बाद अब रेंट एग्रीमेंट, फायर सेफ्टी, जमीन रिकॉर्ड, स्टांप ड्यूटी और इमिग्रेशन कारोबार से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे. चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने गुरुवार को यह जानकारी दी है. मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने बताया कि प्रशासन ने पंजाब इंडियन स्टांप (संशोधन) अधिनियम-2001 व 2003, पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) अधिनियम-2021, पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट-2012 व संशोधन अधिनियम-2014, हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022 और असम टेनेंसी एक्ट-2021 को चंडीगढ़ में लागू किया है. उन्होंनेबताया कि तीन कानून पंजाब, एक हरियाणा से और रेंट कंट्रोल व्यवस्था के तहत असम टेनेंसी एक्ट लागू किया गया है. चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू होने के बाद कौन सा पुराना कानून समाप्त हो गया?     A पंजाब इंडियन स्टांप एक्ट-2001     B ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949     C हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022       D पंजाब आबादी देह रिकॉर्ड ऑफ राइट्स अधिनियम-2021 नए कानून की वजह से अब चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू होने पर ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949 खत्म हो गया है. रेंट एग्रीमेंट कानूनः चंडीगढ़ मे अब मकान मालिकों को किरायेदारों के साथ रेंट एग्रीमेंट करना अनिवार्य कर दिया है. प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा. प्रशासन ने बताया कि पोर्टल अगले एक महीने में शुरू होगा. तब तक लोग फिजिकल दस्तावेज जमा कर पंजीकरण कर सकते हैं. रेंट विवाद के निपटारे के लिए रेंट कंट्रोल अथॉरिटी और ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे और सुनवाई जिला स्तर के जज करेंगे. अहम बात है कि अब मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे. किराया के विवाद 60 दिन में निपटाए जाएंगे. वहीं, मकान मालिकों को भी अवैध कब्जों से राहत मिलेगी. फर्जी ट्रैवल एजेंटों पर कसेगा शिकंजा चंडीगढ़ मेंने पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट-2012 और संशोधन अधिनियम-2014 भी लागू कर दिया है. गौर रहे कि बहुत से लोग कबूतरबाजी को लेकर शिकायतें देते हैं. ऐसे में अब बिना  रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के इमिग्रेशन ऑफिस या ट्रैवल एजेंट काम नहीं कर पाएंगे. अगर नियम तोड़ा तो तीन से सात साल तक की सजा होगी. दोषी मिलने पर संपत्ति भी अटैच की जाएगी. सभी ट्रैवल एजेंटों और इमिग्रेशन कंपनियों को अपने स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करनी होगी. स्टांप चोरी की तो जुर्माना लगेगा पंजाब इंडियन स्टांप संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद चंडीगढ़ में अब प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त में अंडर वैल्यूएशन पर सख्ती की जेगी. नए कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संपत्ति की वास्तविक कीमत छिपाकर कम स्टांप ड्यूटी भरता है तो उस पर संपत्ति की वैल्यू का तीन प्रतिशत जुर्माना लगेगा. गांवों की आबादी देह जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) अधिनियम-2021 लागू होने के बाद अब गांवों की आबादी देह वाली जमीनों का रिकॉर्ड लोगों के नाम से तैयार होगा. अभी तक ये जमीनें केवल खसरा नंबरों के आधार पर दर्ज थीं. इसके तहत हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. इससे जमीन संबधी विवाद कम हो जाएंगे. फायर सेफ्टी सर्टिफिकेटः चंडीगढ़ ने हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022 को लागू किया है और इससे अब सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता पांच साल लागू होगी. अब फायर सेफ्टी अप्रूवल टाइम-बाउंड तरीके से होगे. आधुनिक फायर सेफ्टी उपकरणों होने के बाद ही एनओसी मिलेगी.

शनि-चंद्रमा की युति से बनेगा विष योग, इन राशियों पर बढ़ेगा संकट

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली में शनि और चंद्रमा एक साथ आ जाते हैं, तो इसे 'विष योग' कहा जाता है. इस योग को मानसिक तनाव, अस्थिरता और जीवन में उतार-चढ़ाव का संकेत माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 12 मई की शाम चंद्रमा कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे. उस समय पहले से ही मीन राशि में मौजूद शनि के साथ उनकी युति बन जाएगी. इसी वजह से विष योग सक्रिय हो जाएगा. इस दौरान कुछ राशियों को ज्यादा सावधानी रखने की सलाह दी जा रही है. क्योंकि इस समय तनाव, मानसिक दबाव और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. यह अशुभ योग 14 मई से ज्यादा भी देखने को मिल सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन राशियों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है. कर्क राशि कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, ऐसे में शनि के साथ उनकी युति आपके लिए थोड़ा तनावपूर्ण समय ला सकती है. इस दौरान मानसिक बेचैनी और चिंता बढ़ सकती है. कुछ लोगों को खांसी-जुकाम या छोटी स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं. इस समय मेहनत पर भरोसा रखें. किस्मत के भरोसे एकदम न चलें. उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, इससे राहत मिल सकती है. सिंह राशि सिंह राशि वालों को इस समय खास सावधानी रखने की जरूरत है. वाहन चलाते समय सतर्क रहें. जोखिम लेने से बचें. पुरानी बीमारियां फिर से परेशान कर सकती हैं. आर्थिक मामलों में भी ध्यान रखना होगा. अनावश्यक खर्चों से बचें. सोच-समझकर निर्णय लें. उपाय: जरूरतमंदों की मदद करें और सेवा भाव रखें. तुला राशि तुला राशि वालों पर आलस्य हावी हो सकता है, जिससे काम में देरी हो सकती है. गले या पेट से जुड़ी हल्की समस्याएं परेशान कर सकती हैं. पारिवारिक जीवन में छोटी-छोटी बातों पर विवाद से बचना जरूरी होगा. इस समय धैर्य और संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है. उपाय: विष योग का प्रभाव कम करने के लिए मां पार्वती की पूजा करें. मीन राशि मीन राशि में ही यह विष योग बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. शरीर में थकान, जोड़ों में दर्द या नींद की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. घर और परिवार में भी बहस या तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए शांत रहना जरूरी होगा. उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें.

ठेला-खोमचा पर महंगाई की मार, फास्ट फूड की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी

रांची  शहर में बढ़ती महंगाई के बीच अब ठेला-खोमचा और स्ट्रीट फूड भी आम लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। गैस सिलिंडर की किल्लत और ब्लैक में अधिक कीमत पर गैस खरीदने की मजबूरी ने फास्ट फूड से लेकर पारंपरिक नाश्ते तक की कीमतें बढ़ा दी है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, मजदूर, छात्र और रोज कमाकर खाने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जो सस्ते और गर्म खाने के लिए ठेला-खोमचा पर निर्भर रहते हैं। शहर के कई इलाकों में एग रोल, चौमिन, पकौड़ी, समोसा, जलेबी, कचौड़ी और कुलचा-नान जैसे खाद्य पदार्थों के दाम में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले 30 से 40 रुपये में मिलने वाला एग रोल अब 60 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 8 रुपये में बिकने वाला समोसा, आलू चाप और कचौड़ी अब 10 रुपये से लेकर कई जगहों पर 15 रुपये प्रति पीस तक बिक रहा है। गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से दुकानदारों को उठानी पड़ रही परेशानी इसी तरह 10 रुपये प्लेट मिलने वाली पकौड़ी अब 20 रुपये तक पहुंच गई है। जलेबी का भाव भी 30 रुपये पाव से बढ़कर 40 रुपये पाव हो गया है। कुलचा-नान और अन्य फास्ट फूड की कीमतों में भी लगभग 20 रुपये तक का इजाफा देखा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के कई फास्ट फूड दुकानदारों ने बताया कि जितनी संख्या में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, उतनी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर बाहर से गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। एक गैस सिलिंडर पांच से छह दिनों तक चलता एक फास्ट फूड संचालक ने बताया कि चौमिन, चिल्ली और एग रोल बनाने में रोजाना अधिक गैस की खपत होती है। लेकिन गैस नहीं मिलने से खर्च बढ़ गया है, जिसके कारण खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं एक समोसा दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान में एक गैस सिलेंडर पांच से छह दिनों में खत्म हो जाता है। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने पर उन्हें ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई छोटे दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह उनकी मजबूरी बन चुकी है। बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी उधर, ठेला-खोमचा में खाना खाने वाले लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और बड़े होटल या रेस्टोरेंट में खाना उनके बजट से बाहर है। ऐसे में ठेला-खोमचा ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा है। लोगों ने बताया कि कम कीमत में ताजा और गर्म खाना मिलने के कारण वे वर्षों से स्ट्रीट फूड पर निर्भर हैं, लेकिन अब यहां भी लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

एमसीबी में गर्मी से राहत, हैंडपंप की मरम्मत से गांवों में पानी की सुविधा बहाल

एमसीबी भीषण गर्मी और बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग की टीम द्वारा विकासखंड भरतपुर के ग्राम बड़गांवकला, घाटमा, केसौडा, जनौरा एवं ढाबतुमाड़ी में हैंडपंपों की मरम्मत और निरीक्षण कार्य किया गया। गर्मी के मौसम में पेयजल की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए खराब एवं बंद पड़े हैंडपंपों को प्राथमिकता के आधार पर सुधार कर पुनः चालू किया जा रहा है। विभागीय अमले की तत्परता से ग्रामीणों को समय पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं विभागीय टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समय पर मरम्मत कार्य होने से पानी की समस्या काफी हद तक दूर हुई है। विभाग द्वारा लगातार गांवों का निरीक्षण कर पेयजल व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि भीषण गर्मी के दौरान किसी भी क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न न हो। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बताया कि जिलेभर में हैंडपंप सुधार एवं रखरखाव का कार्य निरंतर जारी है और जहां से भी खराब हैंडपंप की सूचना प्राप्त हो रही है, वहां तत्काल टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जा रहा है।

सोमनाथ अमृत महोत्सव: पीएम मोदी ने हिस्सा लिया और जताई खुशी

सोमनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यहां पर आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जय सोमनाथ! यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। हम इस पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।" उन्होंने आगे लिखा कि पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पावनधाम सोमनाथ आकर दिव्य अनुभूति हुई है। इस अवसर पर मंदिर मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों के जोश और प्रचंड उत्साह को देखकर मन अभिभूत और भावविभोर है! मैं आज यहां उस क्षण को जी रहा हूं, जिसका अनुभव भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर किया होगा। सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण हर तरफ अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को गुजरात पहुंचे, जहां सोमनाथ में एक रोडशो किया। यह रोडशो सोमनाथ अमृत महोत्सव से पहले आयोजित किया गया था। गुजरात के गिर सोमनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। आज सुबह गुजरात के प्रभास पाटन में श्री सोमनाथ महादेव ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष महा पूजा में शामिल हुए, इसके बाद कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह संपन्न हुए, जो मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण की रीतियों के प्रतीक हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 11 तीर्थ स्थलों से लाए गए जल को मंदिर के शिखर पर अर्पित किया गया। 90 मीटर ऊंची क्रेन की सहायता से, मंदिर के शीर्ष पर कलश स्थापित किया गया। पीएम ने लिखा कि सोमनाथ में, हर कोने में भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अनगिनत लोग एक साथ एकत्रित हुए हैं। वह दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक मील का पत्थर था। वहीं, भारतीय वायु सेना की 'सूर्य किरण' एरोबेटिक्स टीम ने बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के दौरान हवाई करतब दिखाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में एक 'विशेष महापूजा' में भी हिस्सा लिया। बता दें कि ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित समारोहों में मंदिर के जीर्णोद्धार और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1951 में इसके उद्घाटन की स्मृति को याद किया गया। धार्मिक समारोहों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जामनगर से सोमनाथ पहुंचने के बाद वहां रोड शो किया। वह रविवार रात गुजरात पहुंचने के बाद जामनगर में रुके थे। रोड शो में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए मंदिर के पास स्थित वीर हमीरजी सर्कल तक हेलीपैड से लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हजारों लोग जमा हो गए। जब उनका काफिला इलाके से गुजरा तो समर्थकों ने झंडे लहराए और नारे लगाए, जबकि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कलाकारों ने मार्ग में निर्धारित स्थानों पर पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए।   अस्तित्व की गवाही और सनातन के गौरव की गौरवगाथा  यह नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में गर्व और श्रद्धा का भाव जाग उठता है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अटूट आस्था, भारतीय सभ्यता की जीवटता, भारत भूमि के आत्मसम्मान और राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक है. गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों से बना एक देवालय नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के कभी न हारने वाले संकल्प का सजीव तथ्य है. ‘सोमनाथ हमारा स्वाभिमान’… यह उस सत्य की घोषणा है जिसने सदियों के आक्रमणों, लूट और विध्वंस के बाद भी अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी. एक हजार साल पहले 1026 में महमूद गजनवी के हमले से लेकर आज तक सोमनाथ हमें बताता है कि आस्था को तोड़ा जा सकता है, लेकिन उसके विश्वास को मिटाया नहीं जा सकता।  सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के किनारे स्थित है. यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है. पुराणों के अनुसार चंद्रदेव ने सबसे पहले सोने का मंदिर बनवाया था. बाद में रावण ने चांदी का, भगवान कृष्ण ने चंदन का और कई राजाओं ने पत्थर का मंदिर बनाया. यह स्थान केवल पूजा और अराधना का केंद्र नहीं थी, यहां व्यापार, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम होता था. लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते थे. मंदिर की भव्यता और धन-दौलत की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।  विनाश का काला अध्याय और सनातन का धैर्य सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्षों की लंबी गाथा है. विदेशी आक्रांताओं ने इस मंदिर की अकूत संपदा और हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के लिए इसे बार-बार निशाना बनाया. महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, हर बार मंदिर को तोड़ा गया, लूटा गया और अपवित्र करने का प्रयास किया गया. लेकिन हर विनाश के बाद, सनातनियों का संकल्प और भी मजबूत होकर उभरा।  1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया. उसने मंदिर लूटा, तोड़ा और लाखों श्रद्धालुओं की हत्या की. लेकिन यह पहला हमला नहीं था और आखिरी भी नहीं. अलाउद्दीन खिलजी, औरंगजेब समेत कई आक्रमणकारियों ने मंदिर को निशाना बनाया. इतिहासकार बताते हैं कि मंदिर को 16-17 बार तोड़ा गया. हर बार तोड़ने के बाद भारतीयों ने आत्मबल और आस्था के विश्वास से अपने स्वाभिमान को फिर से खड़ा किया. आक्रांताओं ने मंदिर की दीवारें तो ढहाईं, लेकिन वे लोगों के हृदय में बसे महादेव को नहीं निकाल सके. दरअसल, यह सिर्फ ईंट-पत्थर का खेल नहीं था, यह सनातन की अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण था।  लौह पुरुष का संकल्प और आधुनिक मंदिर का उदय स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ का आधुनिक पुनरुद्धार आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे बड़ी सांस्कृतिक घटना के रूप में वर्णित है. जूनागढ़ की आजादी के बाद, जब लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रभास पाटन की धरती पर पैर रखा तो उन्होंने समुद्र का जल हाथ में लेकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया. उन्होंने निर्णय किया कि सोमनाथ मंदिर को फिर से भव्य रूप में खड़ा किया जाएगा. उनके इस … Read more

5 लाख की इनामी महिला माओवादी पोडियम लक्ष्मी ने दिया समर्पण, सीमा क्षेत्र में थी सक्रिय

जगदलपुर टूटे हुए नक्सल कैडर को फिर से एकजुट करने की नई साजिश नाकाम नजर आ रही है. छत्तीसगढ़ सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सिताराम राजू जिले में एक ईनामी महिला माओवादी ने मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ाते हुए सरेंडर कर दिया. सरेंडर करने वाली महिला माओवादी पोडियम लक्ष्मी पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित है.लक्ष्मी बीजापुर जिले के उसुर थाना क्षेत्र की निवासी है।  जानकारी के मुताबिक, इनामी माओवादी पोडियम लक्ष्मी लंबे वक्त से नक्सल संगठन के साथ जुड़ी हुई थी. DKSZC के 2 सीआरसी पीएलजीए बटालियन  सक्रीय सदस्य के रूप में लक्ष्मी लंबे समय से छत्तीसगढ़ आंध्र प्रदेश बॉर्डर में सक्रियता थी. सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादी पोडियम लक्ष्मी ने एटका पुलिस कैंप में अतिरिक्त पुलिस अध्यक्ष पंकज मीणा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास, रोजगार और सरकारी योजनाओ का लाभ दिया जाएगा।  नक्सलियों ने जारी किया पत्र हाल में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान और सरकार के राज्य से ‘नक्सल सफाए’ की आधिकारिक घोषणा के बाद नया मोड़ आया. प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) की उत्तर तालमेल कमेटी द्वारा तेलंगाना में जारी किए गए एक विस्तृत पत्र से इस नई साजिश का खुलासा हुआ. माओवादी संगठन ने अपने पत्र में आंदोलन के वर्तमान पतन और मौजूदा संकट का ईमानदारी से जिक्र करते हुए इतिहास का हवाला दिया है।  पत्र में नक्सलबाड़ी आंदोलन के सूत्रधार चारू मजूमदार के दौर का उदाहरण देते हुए बताया कि भले ही संगठन अभी कमजोर दिख रहा हो, लेकिन उनकी केंद्रीय कमेटी अभी भी रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय है और अंततः जीत उन्हीं की होगी. इस पत्र में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात शीर्ष नक्सली नेता ‘देवजी’ के आत्मसमर्पण को लेकर कही गई. संगठन ने देवजी को ‘गद्दार’ और ‘दुश्मन का एजेंट’ करार दिया है. पत्र में आरोप लगाया गया है कि देवजी का रास्ता ‘संशोधनवाद’ का है, जो पार्टी को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।  पुलिस का कहना है कि यह बयानबाजी पुरानी, अप्रासंगिक और खोखली विचारधारा को जिंदा दिखाने की कोशिश प्रयास है. वहीं पोडियम लक्ष्मी के आत्मसमर्पण ने पुलिस के इस दावे को और मजबूती दी है।  सीमा क्षेत्र में थी सक्रिय जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मी छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर सक्रिय नक्सली संगठन का हिस्सा थी। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। उस पर राज्य सरकार ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। लक्ष्मी के आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरणा मिलेगी। क्या है छत्तीसगढ़ की नई पुनर्वास नीति? मार्च 2025 में लागू की गई छत्तीसगढ़ सरकार की नई पुनर्वास नीति का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और नक्सल हिंसा प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, आवास सुविधा, बच्चों की शिक्षा, रोजगार के अवसर और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का मानना है कि इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा। बस्तर संभाग में नक्सल मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां लंबे समय से सक्रिय रही महिला माओवादी उर्मिला उर्फ टेटकी (28) ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। रावघाट एरिया कमेटी की सदस्य रही उर्मिला ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला मुख्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। गुरुवार को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उसका विधिवत आत्मसमर्पण कराया जाएगा। 13 साल तक नक्सली संगठन में रही सक्रिय उर्मिला मूल रूप से मानपुर ब्लॉक के मुंजाल गांव की रहने वाली है। उसने करीब 13 वर्षों तक सशस्त्र माओवादी संगठन के साथ रहकर काम किया। कम उम्र में ही वह नक्सल गतिविधियों में शामिल हो गई थी और धीरे-धीरे संगठन के भीतर उसकी भूमिका मजबूत होती गई। उसका आत्मसमर्पण इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उसे मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का आखिरी सक्रिय माओवादी कैडर बताया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में कर रहा नए आयाम स्थापित

वन्यजीव संरक्षण में नए आयाम स्थापित कर रहा है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नेशनल पार्क में दो मादा चीतों को प्राकृतिक आवास में किया मुक्त प्रोजेक्ट चीता को प्रदेश में मिली नई रफ्तार-बोत्सवाना से लाए गए दोनों मादा चीते- अब स्थानीय परिवेश में घुल मिल कर रहने लगे हैं चीतें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेशवासियों को 'प्रोजेक्ट चीता' के रूप में बड़ी सौगात मिली है। मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। चीता पुनर्वास के लिए श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को दो मादा चीतों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। ये दोनों चीते बोत्सवाना से लाए गए हैं, इसके बाद इन्हें कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़े में रखा गया था। अब दोनों चीते उनके लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की इस पहल से प्रदेश में जारी प्रोजेक्ट चीता को विस्तार और नई रफ्तार मिली है, यह कदम वन्यजीवों के साथ हमारी सहअस्तित्व की भावना को प्रकट करता है। बोत्सवाना से चीतों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी तथा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का भी आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को कूनो नेशनल पार्क में चीतों को मुक्त करने के बाद मीडिया से चर्चा कर रहे थे। 57 हो गई है प्रदेश में चीतों की संख्या मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी मध्यप्रदेश में अब 5000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर चीते मुक्त विचरण करते हुए अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में राज्य में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो चुकी है, चीते अब परिवार की तरह घुल-मिलकर रहने लगे हैं। प्रदेश के श्योपुर, कूनो, पालनपुर, राजगढ़ सहित मालवा और चंबल के क्षेत्र में चीते विचरण करते नजर आते हैं। कई बार तो ये मध्यप्रदेश से राजस्थान तक फर्राटा भरते हैं। उल्लेखनीय है कि इन चीतों के आगमन के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या, देश में जन्मे शावकों सहित, बढ़कर 57 हो गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के पुत्र- पुत्रवधू को दिया सुखद दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के पुत्र- पुत्रवधू को दिया सुखद दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के सुपुत्र केसरी नंदन और पुत्रवधू प्रेरणा के परिणय सूत्र में बंधने पर उन्हें हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य तथा सुख-शांति और समृद्धि से परिपूर्ण जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैवाहिक कार्यक्रम में सागर के निजी होटल में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर नव-दंपति को आर्शीवाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और उनके परिजन से भेंट कर खुशियां साझा कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भी आत्मीय चर्चा की। इस अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, नवकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री राकेश शुक्ला, विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, विधायक शैलेंद्र जैन, प्रदीप लारिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं परिजन उपस्थित थे।