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मार्केट क्रैश का डर: मोदी की अपील के बाद सोना-पेट्रोल की बढ़ी चिंता, शेयर बाजार में गिरावट

मुंबई  सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। बाजार खुलते ही बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए। बाजार के इस खराब प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं, जिन्होंने मंदी की गाड़ी में फ्यूल भरने का काम किया है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि अब कहानी सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर आए पीएम मोदी के बयान ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 1000 पॉइंट यानी 1 पर्सेंट से ज्यादा टूटकर 76,364 के लेवल पर आ गया। वहीं निफ्टी भी 1 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट के साथ 23,896 के निचले स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 पर्सेंट तक की गिरावट देखी गई। इस गिरावट की वजह से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 473.5 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार में इस कदर बिकवाली हुई कि छोटे और बड़े हर तरह के निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी बाजार के गिरने की पहली बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का विफल होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है, जिससे युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस अनिश्चितता की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है, जिसका सीधा असर देश की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। पीएम मोदी की बचत वाली अपील का असर बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार ग्लोबल कारणों से ज्यादा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'किफायत' वाली अपील का पड़ा है। पीएम मोदी ने रविवार को भारतीयों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल कम करने और कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, पीएम की इस अपील ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है। लोगों से खर्च कम करने की बात कहने का मतलब है कि आने वाले समय में कंपनियों की कमाई और देश की इकोनॉमी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। इन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार पीएम मोदी की इस अपील का सबसे बुरा असर ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ा है। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेनको गोल्ड और पीसी ज्वेलर जैसे शेयरों में भारी गिरावट देखी गई क्योंकि लोगों को डर है कि सोने की डिमांड कम हो जाएगी। इसके अलावा मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिखा। इतना ही नहीं, पीएम द्वारा विदेशी दौरों से बचने की सलाह देने के बाद थॉमस कुक और ईजी ट्रिप प्लानर्स जैसी ट्रेवल कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। बाजार को डर है कि अगर लोग कम खर्च करेंगे, तो कॉर्पोरेट अर्निंग्स यानी कंपनियों के मुनाफे पर इसका सीधा असर होगा। निवेशकों को 4 लाख करोड़ का नुकसान सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 473.5 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार खुलने के कुछ ही समय में निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। अब सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आ गई? इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इसे देखते हुए पीएम मोदी ने भी गोल्ड और पेट्रोल-डीजल को लेकर लोगों से अपील की है। अमेरिका और ईरान के बीच नहीं हो रही सुलह दरअसल, निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत से हालात सुधर सकते हैं। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर बातचीत पूरी तरह विफल होती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और सख्त कदम उठा सकता है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है। पीएम मोदी की अपील मिडिल ईस्ट संकट से दुनियाभर में एनर्जी की कीमतें आसमान पर हैं। इससे भारत का आयात घाटा लगातार बढ़ रहा है और रुपया गिर रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल को बचाने की अपील की है। पीएम ने कहा कि हमारे पड़ोस मे जंग जल रही है, जिसका असर पूरी दुनिया समेत भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत पर ध्यान दें।

सुकमा जिले के 1 लाख 54 हजार 157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और उपचार कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों के जरूरतमंद नागरिकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में कोंटा विकासखंड के दूरस्थ नियद नेल्लानार क्षेत्र के अरलमपल्ली, पोलमपल्ली, दोरनापाल, बगड़ेगुड़ा, रंगाईगुड़ा, कोलईगुड़ा एवं पेंटापाड़ जैसे गांवों से कुल 39 मरीजों को जिला चिकित्सालय सुकमा लाकर जांच एवं उपचार कराया गया। जिला चिकित्सालय में इन मरीजों का समुचित परीक्षण कर उपचार सुनिश्चित किया गया, जिसमें 16 लोगों को प्रेसबायोपिक चश्मा प्रदान किया गया तथा 8 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। वहीं नियद नेल्लानार के गोगुंडा पहाड़ी क्षेत्र से 5 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित लाकर जांच कराई गई और आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श के साथ वापस भेजा गया। इसके अतिरिक्त कोसागुड़ा से 6 मरीजों को अल्ट्रासाउंड एवं रक्त चढ़ाने हेतु भेजा गया था, जबकि 4 मरीज हाथ-पैर सूजन की समस्या से पीड़ित थे, जिनका भी उपचार कर राहत प्रदान की गई। जिला चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में कुल स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य 2,93,386 निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1,54,157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के दौरान कुल 4990 मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, खून की कमी, उच्च जोखिम गर्भवती महिला, कुपोषित बच्चे, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से चिन्हांकित कर प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।  कलेक्टर  अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद नागरिक इलाज से वंचित न रहे। अभियान के अंतर्गत चिन्हांकित मरीजों को समय पर जिला चिकित्सालय लाकर जांच, उपचार, ऑपरेशन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।   मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता का परिचय देते हुए सभी मरीजों का इलाज पूर्ण कराने के बाद उन्हें सुरक्षित घर वापस भेजने की व्यवस्था भी की गई। सुबह 6 बजे जिला अस्पताल में 4 एम्बुलेंस लगाकर मरीजों को नाश्ता कराया गया और फिर उन्हें उनके गांवों तक पहुंचाया गया। यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि शासन-प्रशासन दूरस्थ अंचलों के लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सम्मान और सुरक्षा के साथ इलाज उपलब्ध करा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का असर: ईरानी तेल टैंकर फंसे, स्टोरेज भरने से समुद्र में रिसाव की आशंका

नई दिल्ली ईरान इस समय क्रूड ऑयल को स्टोर करने को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की गई नाकेबंदी के चलते ईरानी तेल टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में ईरान का कच्चा तेल उसके मुख्य निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर तेजी से जमा हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस इलाके के समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल फैला हुआ नजर आया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि स्टोरेज क्षमता खत्म होने के बाद तेल समुद्र में छोड़ा जा रहा है या फिर पुराने ढांचे से रिसाव हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान प्रतिदिन 30 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का उत्पादन करता है और इसका बड़ा हिस्सा खार्ग द्वीप से निर्यात होता है। फिलहाल अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण टैंकर फारस की खाड़ी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ईरान ने पुराने जहाजों और फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकरों का उपयोग शुरू किया, फिर भी स्टोरेज क्षमता तेजी से भरती चली गई। अगर तेल उत्पादन रोका जाता है तो कई तेल कुओं को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसलिए तेहरान के सामने उत्पादन जारी रखने और अतिरिक्त तेल को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 45 वर्ग किमी तक फैला तेल का धब्बा सैटेलाइट इमेजरी में खार्ग द्वीप के आसपास समुद्र में लगभग 20 से 45 वर्ग किलोमीटर तक फैला तेल का धब्बा देखा गया है। कुछ रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया कि हजारों बैरल तेल समुद्र में रिस चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिसाव पुरानी पाइपलाइन, टैंकरों पर बढ़ते दबाव या युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण हो सकता है। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो फारस की खाड़ी के समुद्री जीवन, तटीय क्षेत्रों और मछली उद्योग पर गंभीर असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ईरान-अमेरिका तनाव और समुद्री टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी भारी अस्थिरता देखी जा रही है। कई देशों को डर है कि अगर यह संकट और गहराया तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। भारत समेत एशियाई देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि वे पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं।

भोपाल से कानपुर का सफर होगा आसान, 4-लेन रोड से समय में बड़ी कटौती

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। ऐसे समझें अभी क्या है स्थिति भोपाल के पास दीवानगंज/सलामतपुर वाले क्षेत्र से विदिशा की ओर बढ़ता है। भोपाल से विदिशा तक की 42 किमी. की दूरी को कवर करता है। यह कॉरिडोर भोपाल को उत्तर प्रदेश के कानपुर नौबस्ता/रिंग रोड से जोड़ेगा। इस हिस्से पर काम सबसे तेज गति से चल रहा है। 4-लेन चौड़ीकरण का काम अब बाहर नजर आने लगा है। भोपाल, विदिशा, सागर, छतरपुर में भूमि अधिग्रहण का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इकोनॉमिक कॉरिडोर पर डालें एक नजर     इसकी कुल लंबाई 526 किमी.। इसमें से 360 किमी. मध्य प्रदेश में है।     यह एक 4-लेन हाईवे होगा। कुछ हिस्सों में 6-लेन की योजना भी है।     भोपाल से कानपुर जाने में अभी 12-13 घंटे लगते हैं। कॉरिडोर से यह सफर सात से आठ घंटे में पूरा होगा।     मध्य प्रदेश वाले हिस्से के लिए 3600 करोड़ रुपए मंजूर है।     भोपाल से विदिशा का भाग 42 किमी. का है। इसमें मौजूदा सड़क को ही हाइवे में बदला जा रहा है।     कॉरिडोर का काम जनवरी में शुरू हुआ है । नेशनल हाइवे व एमपीआइडीसी से प्रशासन इसपर लगातार चर्चा कर रहा है। इसके काम तेजी से पूरे कराने के साथ कॉरिडोर का आमजन को लाभ दिलाने नई योजना बनाई जा रही है। – प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर

शहर में बनेंगे 10 हजार नए फ्लैट, आवास परियोजना को हरी झंडी

इंदौर प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। रायपुर में भाजपा की बड़ी बैठक इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।

सावधान! जबलपुर में तेजी से बढ़े Vitamin B-12 Deficiency के मरीज, जानिए 8 अहम लक्षण

जबलपुर Vitamin B12: सुबह उठने पर थकान महसूस होना, पैरों में दर्द, हाथ-पैरों में झुनझुनी, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। शहर में बड़ी संख्या में युवा भी विटामिन बी12 की कमी से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। शहर के अस्पतालों, क्लीनिकों और आयुर्वेद अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जांच में अधिकांश मरीजों में विटामिन बी12 की कमी सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार शाकाहारी लोगों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। युवती को पैरों में जकड़न की शिकायत सिविल लाइन निवासी 26 वर्षीय युवती लंबे समय से पैरों में जकड़न और दर्द की समस्या से परेशान थी। उसे सुबह उठने पर कमजोरी महसूस होती थी। जांच में विटामिन बी12 की कमी सामने आई। चिकित्सकों ने उसे मोरिंगा पाउडर, आम का अचार, आंवला मुरब्बा और दही नियमित रूप से लेने की सलाह दी। करीब एक महीने में उसे राहत मिलने लगी। ये हैं विटामिन बी12 की कमी के प्रमुख लक्षण     हाथ-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी     मांसपेशियों में कमजोरी और संतुलन बनाने में परेशानी     एनीमिया और अत्यधिक थकान     याददाश्त कमजोर होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई     अवसाद और चिड़चिड़ापन     भूख कम लगना और वजन घटना     जीभ में सूजन या जलन     त्वचा का पीला पड़ना और धड़कन तेज होना खानपान में सुधार बहुत जरूरी आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पंकज मिश्रा के अनुसार बड़ी संख्या में लोग विटामिन बी12 की कमी से पीड़ित हैं। कई मरीजों को लंबे समय तक सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि आम का अचार, मोरिंगा, आंवला, दही, पनीर, केला, नारियल पानी, पालक भाजी और किशमिश जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में पोषक तत्वों की कमी दूर करने में मददगार हो सकते हैं। सामान्य काम में भी होने लगी थकान मानेगांव निवासी 32 वर्षीय महिला को अत्यधिक थकान और चक्कर आने की शिकायत थी। स्थिति ऐसी हो गई थी कि घर के सामान्य काम करने में भी वह थक जाती थी। जांच में विटामिन बी12 की कमी पाई गई। डॉक्टरों ने उसे आम का अचार, काला तिल और केला नियमित रूप से खाने की सलाह दी। झुनझुनी की समस्या से मिली राहत अधारताल निवासी 45 वर्षीय महिला को हाथ-पैरों में लगातार झुनझुनी महसूस हो रही थी। जांच में विटामिन बी12 की कमी सामने आने के बाद उसे प्री-बायोटिक दही, आम का अचार, आंवला मुरब्बा और नारियल पानी लेने की सलाह दी गई। कुछ समय बाद उसे आराम मिल गया।

गेहूं खरीदी में बड़ा संकट: एफसीआई के फैसले से किसानों का करोड़ों रुपया अटका

भोपाल FCI- एमपी में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का काम तेजी से चल रहा है। गेहूं खरीदी में मुख्यमंत्री का गृह जिला उज्जैन सबसे आगे निकल गया है। यहां शनिवार शाम तक रेकॉर्ड तोड़ 4.79 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इधर, उत्पादन में कई बार राष्ट्रीय रेकॉर्ड बना चुके नर्मदापुरम में इस बार अभी तक 2.58 लाख मीट्रिक टन ही खरीदी हुई। इसमें भी 3500 मीट्रिक टन गेहूं को एफसीआइ ने रिजेक्ट कर दिया। यह आंकड़ा प्रदेश के 55 जिलों में सबसे अधिक है। अब रिजेक्ट गेहूं की ग्रेडिंग कराई जा रही है, जिसे दोबारा भेजा जाएगा। प्रदेश में कुल 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट किया गया है जिसका किसानों को भुगतान अटक गया है। उधर खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में भोपाल प्रदेश में नंबर- 1 पर है। यहां 1.94 लाख मीट्रिक टन की खरीदी हुई, जिसमें 90 प्रतिशत को एफसीआइ ने स्वीकार किया और 92 फीसद का परिवहन हो चुका है। जब मुख्यमंत्री मैदान में उतरे प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर कई उतार-चढ़ाव आए। किसानों को परेशान भी होना पड़ा। इसके बावजूद उज्जैन, भोपाल जैसे कई जिलों में स्थानीय प्रशासनक की सूझबूझ से खरीदी में अब तक का रेकॉर्ड अच्छा दिखाई दे रहा है। कुछ जिलों में प्रशासनिक चूक ने सरकार की प्रदेश स्तर पर किरकिरी कराई। जबकि मुख्यमंत्री ने केंद्रों तक पहुंचना शुरू किया तो सुधार भी नजर आया। अब ज्यादातर कलेक्टर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, किसानों के हालचाल जान रहे हैं। प्रदेश को 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य मिला है, 15 दिन खरीदी के बचे है।   रीवा संभाग पिछड़ा खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने में रीवा संभाग प्रदेश में सबसे ज्यादा पिछड़ा है। सिंगरौली ने 50 फीसद, मऊगंज ने 31, सीधी ने 40, मैहर ने 46, सतना ने 49 और रीवा ने खरीदे गए गेहूं में से 56 फीसद का ही परिवहन किया है। हालांकि जबलपुर संभाग के मंडला में भी 46 प्रतिशत ही परिवहन हो पाया है। ऐसे बढ़ी स्पीड सैटेलाइट मैपिंग में गेहूं के खेत खाली बताए गए। इसकी वजह से स्लॉट बुकिंग में दिक्कत आई तो मुख्यमंत्री ने शिथिलता बरतने के निर्देश दिए। तब बात बनी। स्लॉट बुकिंग वाला सर्वर ठप्प पड़ा तो मुख्यमंत्री ने अफसरों को फटकारा और ठीक कराया, गेहूं खरीदी भी 5 से बढ़ाकर 6 दिन की। देर रात तक तुलाई शुरू कराई है। तौलकांटों की संख्या पहले से बढ़ाई है। इन जिलों का गेहूं का एक दाना रिजेक्ट नहीं: राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर, आगर मालवा, रतलाम, नीमच, हरदा, जबलपुर, पांढुर्णा, गुना, शहडोल। 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट, भुगतान अटका प्रदेश के 55 जिलों में 54 लाख मीट्रिक टन से अधिक की गेहूं खरीदी हो चुकी है। इसमें से 85 प्रतिशत का परिवहन हुआ है, जबकि 17 हजार मीट्रिक टन रिजेक्ट भी हुआ है। यह गेहूं खराब नहीं होता, बल्कि तय मानकों को पूरा नहीं करता, इसलिए एफसीआइ इसे स्वीकार नहीं करता। जब तक गेहूं की यह मात्रा स्वीकार नहीं कर ली जाती, तब तक किसानों को भुगतान नहीं मिलता।

अब जमीन खरीदना होगा आसान और सुरक्षित: बिहार में रजिस्ट्री से पहले जांच होगी जरूरी

पटना बिहार में जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदारों को उस भूमि की पूरी जानकारी मिलेगी। राजस्व एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। रैयती जमीन के निबंधन से पहले पूरी जानकारी जल्द दी जाएगी। यह व्यवस्था इसी महीने शुरू होने जा रही है। राज्य के सभी अंचलाधिकारियों को भी इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जमीन निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि इस सप्ताह के अंत तक या इस माह के अंत तक इसकी शुरूआत राज्य भर में हो जाएगी। जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी। सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है। जमीन के सौदे के समय देनी हैं ये जानकारियां रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था के अनुसार जमीन का सौदा होने के बाद उसका निबंधन से पहले रैयती भूमि से जुड़ी 13 तरह की जानकारी सरकार को देनी होगी। निबंधन के लिए आवेदन के साथ खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी और विक्रेता की जानकारी आदि पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। सीओ करेंगे जांच इस आवेदन के बाद अंचल अधिकारी जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और विक्रेता के दावों की जांच करेंगे। इसके बाद उसकी रिपोर्ट साझा की जाएगी। इसके लिए सरकार ने समयसीमा भी तय की है। बताया जा रहा है कि सीओ को 10 दिनों के भीतर यह रिपोर्ट देनी होगी। नई व्यवस्था का क्या फायदा? जमीन निबंधन से जुड़ी इस नई व्यवस्था से भूमि की खरीद-बिक्री में और पारदर्शिता आएगी। इससे जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे। खरीदार को रैयती जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले ही उससे जुड़ी सभी जानकारी मिल जाएगी। अगर उस जमीन पर पहले से कोई लोन है या विवाद है तो पता चल जाएगा। क्या है जमीन निबंधन जब आप कोई जमीन खरीदते हैं तो उसकी सेल डीड को सरकार के पास पंजीकृत करवाना होता है। जमीन की कीमत के अनुसार उसका रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी की राशि जमा करानी होती है। बिहार सरकार ने जमीन निबंधन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस ई निबंधन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। रजिस्ट्री होने के बाद जमीन का दावा कानूनी तौर पर नए मालिक का माना जाता है और यह रिकॉर्ड भू‑सर्वेक्षण और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।

स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी बनी किसानों की मुसीबत, मंडियों में नहीं बिक पा रही उपज

शहडोल समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की आस लगाए बैठे किसानों के लिए तकनीक वरदान के बजाय अड़चन साबित हो रही है। उपार्जन केंद्रों में इन दिनों गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले ही सर्वर की सुस्त रफ्तार और सैटेलाइट सत्यापन में तकनीकी खामियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी दावों के विपरीत, पोर्टल पर आ रहे असत्यापित के मैसेज ने हजारों किसानों की नींद उड़ा दी है। फिलहाल, अन्नदाता सरकारी सिस्टम और सैटेलाइट के इस मकडज़ाल में उलझा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन तकनीकी खामियों को कितनी जल्दी दूर कर किसानों को राहत पहुंचाता है। 500 किसान अब भी कतार में जिले में कुल 9,526 पंजीकृत किसान हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते अब तक केवल 7,084 किसान ही अपना स्लॉट बुक कर पाए हैं। करीब 2,500 किसान ऐसे हैं जो दिन-रात ऑनलाइन केंद्रों और सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी जानकारी अपडेट नहीं हो पा रही है। सैटेलाइट मैपिंग बनी जंजाल स्लॉट बुकिंग के दौरान किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सैटेलाइट द्वारा असत्यापित या किसान कोड सत्यापन अपूर्ण जैसे मैसेज आ रहे हैं। शुरुआत में 8,700 खसरों में सैटेलाइट मैपिंग को लेकर विसंगतियां पाई गई थीं। प्रशासनिक जांच के बाद अधिकांश मामलों का निराकरण तो हुआ, लेकिन 46 खसरों में रिकॉर्ड के उलट फसल पाई गई। हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों की फसल मौके पर सही है, उन्हें भी तकनीकी ग्लिच के कारण दोबारा सत्यापन के लिए भटकना पड़ रहा है। मुख्य समस्याएं एक नजर में सर्वर की धीमी गति: स्लॉट बुकिंग के दौरान पोर्टल का बार-बार कैश होना। सत्यापन का फेर: सैटेलाइट डेटा और जमीनी हकीकत में अंतर होने से तकनीकी रुकावट। अपूर्ण किसान कोड: पुराने डेटा और नए पंजीकरण के बीच मिलान न होना। बिचौलियों का सता रहा डर तैयारी कर ली थी, लेकिन जैसे ही स्लॉट बुकिंग करने गया, वहां लिखा आता है कि सैटेलाइट से सत्यापन नहीं हुआ है। पटवारी के पास जाओ तो वो तहसील भेजते हैं, समझ नहीं आ रहा अनाज मंडी ले जाएं या दफ्तरों के चक्कर काटें। रहसू पटेल, किसान ग्राम अमरहा

मध्य प्रदेश में साइंटिफिक अफसर बनने का मौका, भर्ती के लिए आवेदन जल्द होंगे बंद

भोपाल MPPSC Recruitment 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने साइंटिफिक अफसर बायोलॉजी के पदों पर वैकेंसी निकाली है। इस भर्ती के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख अब करीब है। ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, वे बिना देरी किए एमपीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाकर अपना फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख 20 मई, 2026 तय की गई है। एलिजिबिलिटी और आयु सीमा इस वैकेंसी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का वनस्पति विज्ञान (Botany), जंतु विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके साथ ही कुछ अन्य योग्यताएं भी तय की गई हैं। उम्मीदवारों की उम्र की गिनती 1 जनवरी, 2027 के आधार पर होगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में सरकारी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।   लेट फीस और सैलरी कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि, वे 20 मई तक अपना फॉर्म जरूर भर लें। अगर आप 21 मई से 27 मई के बीच आवेदन करते हैं, तो आपको 3000 रुपये लेट फीस देनी होगी। वहीं, 28 मई से 28 अक्टूबर 2026 तक फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों को लेट फीस के रूप में 25000 रुपये का भारी भुगतान करना होगा। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए चुने गए उम्मीदवारों को शानदार सैलरी मिलेगी। चयनित साइंटिफिक अफसर को हर महीने 15600 रुपये से लेकर 39100 रुपये तक सैलरी दी जाएगी। ऐसे करें अप्लाई कैंडिडेट्स इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से अपना फॉर्म अप्लाई कर सकते हैं:     सबसे पहले कैंडिडेट्स मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाएं।     वेबसाइट के होम पेज पर रजिस्ट्रेशन से जुड़े लिंक पर क्लिक करें।     इसके बाद फॉर्म में मांगी गई अपनी सभी जरूरी जानकारी सही तरीके से भरें।     अपने दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा करें।     फॉर्म सबमिट करने के बाद भविष्य की जरूरत के लिए उसका एक प्रिंट आउट जरूर निकाल लें। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से जुड़ी किसी भी लेटेस्ट अपडेट के लिए आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in को समय-समय पर चेक करते रहें।