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बिहार में सामाजिक बहिष्कार का फरमान: परिवार ने बेटी का कराया प्रतीकात्मक दाह संस्कार

मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह करने वाली एक युवती को गांव की पंचायत ने सामाजिक रूप से ‘मृत’ घोषित कर दिया। पंचायत के दबाव में परिजनों ने अपनी ही बेटी का प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया। मामला जिले के मड़वन प्रखंड क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। इस घटना के बाद गांव में नाराजगी फैल गई और पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने युवती के परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया। पंचायत ने परिवार के सामने रखी शर्त ग्रामीणों ने परिवार से कहा कि यदि उन्हें गांव और समाज में फिर से रहना है तो अपनी बेटी का पूरी तरह बहिष्कार करना होगा। पंचायत का फरमान इतना कठोर था कि परिवार को बेटी को ‘मृत’ मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि गांव और समाज में अपनी जगह बनाए रखने के लिए परिजनों ने बेटी को कागजों और रस्मों में मृत घोषित कर दिया। प्रेमी के साथ शादी कर ससुराल चली गई युवती मामले में पहले युवती के परिजनों ने करजा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को बरामद किया और कोर्ट में पेश किया। न्यायालय में युवती ने बयान दिया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से युवक के साथ शादी की है। उसने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती ने अपने परिजनों पर ससुराल पक्ष को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने युवती को उसकी इच्छा के अनुसार उसके ससुराल भेज दिया। जिंदा लड़की की निकाली गई अर्थी पंचायत के फैसले के बाद युवती के परिवार ने गांव वालों के साथ मिलकर उसका सांकेतिक दाह संस्कार किया। ग्रामीणों के अनुसार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पूरे कार्यक्रम को किया गया। बताया गया कि युवती का प्रतीकात्मक शव तैयार किया गया, जिसमें उसकी तस्वीर रखी गई। इसके बाद अर्थी सजाकर गांव में शव यात्रा निकाली गई।   श्मशान घाट में किया गया पुतले का दाह संस्कार शव यात्रा के बाद लोगों ने श्मशान घाट पहुंचकर मंत्रोच्चारण के बीच पुतले का दाह संस्कार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा कार्यक्रम उसी तरह किया गया, जैसे किसी व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। घटना के बाद गांव में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन अधिकांश लोग खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं यह मामला सामाजिक सोच और पंचायत के फैसलों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।  

रिकॉर्ड उत्पादन के बाद संकट: यूपी के कोल्ड स्टोरेज भरने से किसानों की चिंता बढ़ी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में आलू किसानों की बदहाली दूर होगी। अन्य राज्यों से संपर्क करके वहां आलू भेजने की तैयारी चल रही है। अगले सीजन में बोआई के वक्त ही खपत की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें कृषि, उद्यान, विपणन और प्रसंस्करण विभाग मिलकर कार्य करेंगे। आलू उत्पादन के मामले में देशभर में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहां इस वर्ष 246 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ है। आलू बेल्ट के रूप में पहचाने जाने वाले फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा सहित आसपास के जिलों में कोल्ड स्टोर भरने से किसानों के खेत में ढेर लगे हैं। फैक्ट फाइल     246 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन     2363 कोल्ड स्टोर की संख्या प्रदेश में     131 नए कोल्ड स्टोर इस वर्ष खुले     202 लाख मीट्रिक टन कोल्ड स्टोर की क्षमता     172 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर में रखा गया किसानों की फजीहत को देखते हुए उद्यान विभाग अलग- अलग राज्यों से संपर्क में जुट गया हैं। जिन राज्यों में कम आलू उत्पादन होता है, वहां यूपी का आलू भेजने की तैयारी है। इसमें राजस्थान, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, दादरा नगर हवेली, दमन दीव आदि हैं। इसी तरह नेपाल में ज्यादा से ज्यादा आलू का निर्यात करने के साथ ही श्रीलंका को भी आलू भेजा जाएगा। अगले वर्ष के लिए अभी से बनेगी रणनीति अब अगले वर्ष के लिए आलू से जुड़े सभी विभागों को मिलाकर अभी से संयुक्त कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसमें कृषि अनुसंधान परिषद और आगरा में खुल रहे इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर के क्षेत्रीय केंद्र से भी मदद ली जाएगी। दो दिन पहले लखनऊ आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और विभागीय अधिकारियों के साथ ही बैठक में यह सुझाव दिया है। निदेशक उद्यान बीपी राम ने बताया कि कुछ व्यापारी नेपाल आलू भेज रहे हैं। श्रीलंका और खाड़ी देशों में भी संभावना देखी जा रही है। व्यापारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। अगले वर्ष यह नौबत न आए, इसके लिए भी अभी से तैयारी की जा रही है।  

शोएब का अपराध पकड़ा गया: सौरभ बनकर करता था लड़कियों का ब्लैकमेल और धर्मांतरण

   लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां एक युवक पर नाम बदलकर हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने, शारीरिक शोषण करने और फिर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से चौंकाने वाले सबूत बरामद हुए हैं।  सैलून चलाता है शोएब अख्तर आरोपी की पहचान गोंडा निवासी शोएब अख्तर के रूप में हुई है. शोएब सैरपुर थाना क्षेत्र के रैथा रोड पर एक सैलून चलाता है. आरोप है कि शोएब ने सोशल मीडिया पर अपनी पहचान छिपाकर सौरभ सिंह के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बना रखा था. इसी फर्जी प्रोफाइल के जरिए वह हिंदू युवतियों को अपने जाल में फंसाता था।  मोबाइल में मिले फोटो और वीडियो पुलिस की जांच में शोएब का मोबाइल फोन कई राज उगल रहा है. आरोपी के फोन से कई नाबालिग हिंदू लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो मिले हैं. आरोपी शोएब पहले लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे संबंध बनाता था और फिर उनकी अश्लील फोटो-वीडियो खींच लेता था. इन्हीं वीडियो के दम पर वह बाद में लड़कियों पर धर्मांतरण करने का दबाव बनाता और उन्हें ब्लैकमेल करता था।  इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक नाबालिग पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर सैरपुर थाने में शोएब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोपी के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा पुलिस के सामने खोल दिया।  कई सारी लड़कियों को बना चुका शिकार एसीपी बीकेटी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी शोएब फिलहाल पुलिस हिरासत में है. उसके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहनता से पड़ताल की जा रही है. जांच के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शोएब अब तक कितनी लड़कियों को अपना शिकार बना चुका है और क्या इस साजिश में उसके साथ कुछ और लोग भी शामिल हैं. लखनऊ पुलिस मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है। 

भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक हेयर केयर टिप्स: लंबे और घने बालों का राज

 भारत की महिलाएं सदियों से अपने खूबसूरत बालों के लिए जानी जाती हैं, लंबे घने बाल महिलाओं की सुंदरता से जोड़ा जाता है और इसलिए हर महिला चाहती है कि उसका बाल काले, घने और लंबे हो. हालांकि भारत में हर राज्य की क्लाइमेट और खानपान अलग है, लेकिन बालों की देखभाल के उनके ट्रेडिशनल तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं. अगर आप भी नेचुरल तरीके से अपने बालों को हेल्दी बनाना चाहती हैं, तो देशभर के इन आसान हेयर केयर टिप्स को जरूर अपनाएं. क्योंकि एक तो यह केमिकल फ्री होते हैं और इनसे बालों को कोई नुकसान भी नहीं होता है. आप भारत के जिस राज्य से हैं अब आपको अपने बालों की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप अपने प्रदेश की जलवायु के मुताबिक सही हेयर केयर चुन सकते हैं. वैसे भी ज्यादातर गलती लोग गलत हेयरकेयर चुनने में ही करते हैं. केरल: नारियल तेल और हर्बल मास्क केरल की महिलाएं अपने घने और लंबे बालों के लिए मशहूर हैं. अगर आप भी उनकी तरह बाल चाहती हैं तो उनका सबसे बड़ा राज है नारियल तेल से नियमित मालिश. नारियल तेल के अलावा वो थाली नाम का एक खास हेयर मास्क लगाती हैं, जो गुड़हल (हिबिस्कस), खसखस, मूंग दाल और भृंगराज से मिलकर बनता है. यह बालों को पोषण देता है और उन्हें मजबूत बनाता है. आप इसमें मेथी दाना भी मिलाकर इस्तेमाल कर सकती हैं. राजस्थान: गर्मी में ठंडक देने वाले उपाय राजस्थान की तेज गर्मी के बावजूद वहां की महिलाओं के बाल लंबे और हेल्दी भी होते हैं, क्योंकि वो लोग अपने बालों का खास ख्याल रखती हैं. राजस्थानी महिलाएं लौकी यानी घिया को पीसकर स्कैल्प पर लगाती हैं, जो ठंडक देता है. इसके अलावा वे मुल्तानी मिट्टी, शिकाकाई और रीठा से बाल धोती हैं, जिससे बाल साफ और मुलायम रहते हैं. उत्तर प्रदेश: लकड़ी की कंघी का फायदा उत्तर प्रदेश में महिलाएं पीढ़ियों से लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करती आ रही हैं. यह कंघी बालों में फ्रिज कम करती है, स्कैल्प की हल्की मसाज करती है और बालों में नेचुरल ऑयल को समान रूप से फैलाती है. लकड़ी की कंघी से बालों को सुलझाने से बाल कम टूटते हैं और आसानी से सुलझ जाते हैं. पश्चिम बंगाल सरसों तेल और मुलायम कपड़ा बंगाल की महिलाएं अपने बालों में सरसों का तेल लगाना पसंद करती हैं, यह बालों को मजबूती और चमक देता है. बाल धोने के बाद वो मुलमल के कपड़े से बाल सुखाती हैं, जिससे बाल उलझते नहीं और फ्रिज भी कम होता है. तमिलनाडु: गुड़हल और नारियल तेल केरल की तरह तमिलनाडु की महिलाएं भी लंबे और मजबूत बालों के लिए जानी जाती हैं. तमिलनाडु की महिलाएं नारियल तेल में गुड़हल मिलाकर लगाती हैं, यह मिक्सर बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है और उन्हें घना बनाता है. अगर आप तेजी से बाल बढ़ाना चाहती हैं, तो आप भी यह देसी नुस्खा आजमा कर देख सकते हैं. पंजाब: घी से मिलती है चमक और सॉफ्टनेस पंजाबी महिलाओं के घने और चमकदार बालों का एक राज घी भी है, वे इसे खाने के साथ-साथ बालों में भी लगाती हैं. देसी घी बालों को कंडीशन करता है, उन्हें सॉफ्ट बनाता है और उलझने से बचाता है.

अजमेर कड़ेल में मुख्यमंत्री का ग्रामीणों के साथ आत्मीय मिलन और सुबह की सैर

अजमेर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अजमेर जिले के कड़ेल गांव में सोमवार सुबह की सैर के साथ एक बार फिर आमजन के बीच पहुंचकर जन संवाद और जनविश्वास का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। रविवार रात को ग्राम चौपाल में ग्रामीणों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री सुबह गांव की गलियों में पैदल भ्रमण करते नजर आए। ग्रामीण जब अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने मुख्यमंत्री को सहज और सरल भाव से गांव के बीच उपस्थित पाया। मुख्यमंत्री ने गांव की गलियों में भ्रमण करते हुए बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया तथा महिलाओं, किसानों, पशुपालकों, युवाओं, फल एवं सब्जी विक्रेताओं और सफाईकर्मियों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लिया और आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप में पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को दुलारते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई की जानकारी ली साथ ही, उन्हें चॉकलेट वितरित की। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव के प्राचीन शेषनाग भगवान मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थय की कामना की। मंदिर परिसर में भी उन्होंने श्रद्धालुओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से गुलाब, आंवला, लेसवा, जामुन और प्याज सहित स्थानीय कृषि उत्पादों एवं पारंपरिक खेती की पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उन्नत कृषि पद्धतियों और जल संरक्षण आधारित प्रयासों से उत्पादन और आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है। ग्रामीणों की मांग पर मौके पर ही संवेदनशील निर्णय- ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने गांव के प्राथमिक स्वास्थय केंद्र को सामुदायिक स्वास्थय केंद्र में क्रमोन्नत करने की घोषणा की। साथ ही, परिवहन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त बस संचालन सुनिश्चित करने तथा बालिका विद्यालय की चारदीवारी निर्माण के लिए भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने गांव में लंबित राजस्व प्रकरणों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को विशेष शिविर आयोजित कर राजस्व वादों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को त्वरित राहत पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ पी चाय, सुने अभाव अभियोग- ग्राम भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठकर चाय पी तथा गांव के विकास, खेती-किसानी, शिक्षा और दैनिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर आत्मीय चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री की सहजता ने ग्रामीणों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

आंखों में जलन और ड्राईनेस को न करें नजरअंदाज, जानें इसके बड़े कारण

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल और बढ़ते प्रदूषण के बीच आंखों में जलन, खुजली और पानी आने की समस्या एक आम बात हो गई है। स्क्रीन के इस्तेमाल के बाद हल्की जलन कभी-कभी नॉर्मल लग सकती है, लेकिन अगर आपकी आंखों में बार-बार रेडनेस, ड्राईनेस या ऐसा महसूस होता है जैसे आंखों में कुछ चला गया है, तो यह गंभीर समस्या हो सकती है। आइए डॉ. रश्मि मित्तल (सीनियर कंसल्टेंट, ऑप्थैलमोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कि आंखों में इरिटेशन के पीछे क्या कारण जिम्मेदार हैं। आंसू की परत पतली होना हमारी आंखों की सतह पानी, ऑयल और म्यूकस की एक पतली परत से सुरक्षित रहती है, जिसे टियर फिल्म कहा जाता है। यह परत आंखों को नम रखने और बाहरी इन्फेक्शन से बचाने का काम करती है। जब यह सुरक्षात्मक परत अस्थिर हो जाती है, तो आंखें सीधे हवा के कॉन्टेक्ट में आती हैं, जिससे ड्राईनेस और जलन शुरू हो जाती है। डिजिटल आई स्ट्रेन और पलकें झपकाने में कमी आजकल आंखों की जलन का सबसे बड़ा कारण कंप्यूटर विजन सिंड्रोम है। जब हम लंबे समय तक स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी पलकें झपकाने की दर 50-60% तक कम हो जाती है। कम पलकें झपकाने से आंसू जल्दी सूख जाते हैं, जिससे आंखों में ड्राईनेस और चुभन महसूस होने लगती है। इसके कारण मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन की समस्या भी हो सकती है। इसमें पलकों क ऑयल ग्लैंड्स भी ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े कारण भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। हवा में मौजूद प्रदूषण, धुआं और केमिकल सीधे हमारी आंखों की पुतली को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों की सतह पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा होती है। एलर्जी और बीमारियां धूल, पोलन, पालतू जानवरों के बाल या मोल्ड अक्सर एलर्जी का कारण बनते हैं। इसे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है, जिसमें शरीर हिस्टामाइन रिलीज करता है, जिससे आंखों में तेज खुजली, सूजन और पानी आने लगता है। इसके अलावा, विटामिन-ए की कमी, डायबिटीज, साइनस एलर्जी और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर भी आंखों की जलन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। बचाव के उपाय ज्यादातर लोग राहत के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के आई-ड्रॉप्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। स्टेरॉयड-बेस्ड आई-ड्रॉप्स डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल करना मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी खतरनाक स्थितियों को जन्म दे सकता है। स्वस्थ आंखों के लिए कुछ जरूरी टिप्स     20-20-20 नियम- हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड के लिए देखें।     हाइड्रेशन और नींद- शरीर में पानी की कमी न होने दें और पूरी नींद लें।     पलकें झपकाएं- काम के दौरान जानबूझकर पलकें झपकाने की कोशिश करें।     डॉक्टरी सलाह- अगर जलन हफ्तों तक बनी रहे या आंखों में दर्द हो, तो घरेलू इलाज के बजाय किसी आई स्पेशेलिस्ट से पूरी जांच कराएं।  

शशि थरूर का दावा अलग, लेकिन SIR माना कांग्रेस की जीत का मुख्य कारण

तिरुवनंतपुरम कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल चुनाव के नतीजों को लेकर एक ऐसा दावा कर दिया है, जिससे सियासी भूचाल आ सकता है। शशि थरूर ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा है कि उनका मानना है कि केरल में कांग्रेस SIR की वजह से जीत गई। थरूर यहां SIR की आलोचना कर रहे थे लेकिन उन्होंने दावा किया कि SIR यानी मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ने केरल में कांग्रेस की जीत में अहम रोल निभाया है। स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में एक राउंडटेबल चर्चा के दौरान शशि थरूर ने केरल के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर भी बात की। थरूर ने दावा किया कि बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए थे जिनमें से कई लाख वैध वोटर्स हैं। उन्होंने कहा, "SIR के मामले में, मैंने जो कहा है वह एक जायज सवाल है। बंगाल को देखें तो यहां 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। उनमें से 34 लाख लोगों ने अपील की है और उन्हें वोट देने का पूरा अधिकार है।” शशि थरूर ने कहा, “नियमों के मुताबिक हर मामले का अलग-अलग निपटारा होना जरूरी था, इसलिए वोटिंग से पहले सिर्फ कुछ सौ मामलों का ही निपटारा हो पाया। आज भी लगभग 31-32 लाख लोग ऐसे हैं जो शायद आने वाले सालों में वैध वोटर पाए जाएंगे, लेकिन वे वोट देने का मौका गवां चुके हैं।" थरूर ने कहा कि भाजपा ने बंगाल चुनाव 30 लाख वोटों के अंतर से जीता है, जो कि पेंडिंग अपीलों के बराबर है। उन्होंने पूछा, "ऐसे में क्या यह पूरी तरह से निष्पक्ष और लोकतांत्रिक है?" केरल में कांग्रेस की जीत पर भी बोले शशि थरूर ने आगे स्वीकार किया कि SIR प्रक्रिया से केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को भी फायदा हुआ है। थरूर के मुताबिक, केरल में वामपंथी दल (CPM) 'डबल और ट्रिपल एनरोलमेंट' (एक ही व्यक्ति का कई जगह नाम) के मास्टर रहे हैं और इन डुप्लीकेट नामों को हटाने से वोटर लिस्ट साफ हो गई, जिससे कांग्रेस को फायदा मिला। उन्होंने कहा, "केरल में मुझे लगता है कि कांग्रेस को नाम हटाने से फायदा हुआ, क्योंकि CPM लंबे समय से डबल एनरोलमेंट, ट्रिपल एनरोलमेंट, मल्टी एनरोलमेंट, यानी एक ही व्यक्ति का चार अलग-अलग बूथों पर नाम होना, जैसी चीजों में माहिर थी। ऐसा पहले होता था। SIR ने ऐसे नामों को हटा दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि बंगाल की तरह केरल में तमिलनाडु में इतनी अपीलें नहीं की गईं जितनी बंगाल में। उन्होंने कहा, “आपने देखा कि केरल और तमिलनाडु में, बहुत कम अपीलें की गईं। लेकिन बंगाल में, इसमें कोई शक नहीं कि 34 लाख अपीलें की गईं। और ये 34 लाख फॉर्म 34 लाख अलग-अलग लोगों ने भरे थे। उनमें से, सिर्फ कुछ सौ अपीलों पर ही सुनवाई हुई है। गौरतलब है कि हाल ही में पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजे सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल और केरल दोनों में ही सत्ता परिवर्तन देखने को मिला। जहां पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीत कर राज्य में पहली बार सरकार बनाई। वहीं केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने 140 में से 102 सीटें जीत कर वामपंथियों का किला ढहा दिया।

गेहूं की उपज में एमपी का जलवा, हरियाणा और पंजाब से आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी में लाभान्वित होनेवाले किसानों की संख्या 10 लाख से पार हो गई है। इसी के साथ प्रदेश ने हरियाणा और पंजाब को पछाड़ा दिया है। राज्य सरकार ने तमाम चुनौतियों के बीच शनिवार रात तक 10 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 63 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। मप्र ने इसी के साथ रेकॉर्ड बना दिया है। प्रदेश में रोज औसतन 5 लाख मीट्रिक टन खरीदी हो रही है। गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख 23 मई तय की गई है। तब तक प्रदेशभर में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी होगी। भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर संभाग के जिलों में 9 अप्रेल से और बाकी संभाग में 15 मई से खरीदी चल रही प्रदेश के भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर संभाग के जिलों में 9 अप्रेल से और बाकी संभाग में 15 मई से खरीदी चल रही है। गेहूं बेचने कुल 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। खरीदी कोटा पूरा होने पर भी सभी किसान गेहूं नहीं बेच पाए तो सरकार तारीख बढ़ा सकती है। मध्यप्रदेश में हो रहे सर्वाधिक किसान लाभान्वित, अभी तक 10 लाख से अधिक किसान उपार्जन प्रक्रिया में लाभान्वित हो चुके सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में अभी तक 9.10 लाख किसान, पंजाब में 7.5 लाख किसान, उत्तरप्रदेश में 2 लाख किसान और राजस्थान में 1.67 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। वहीं मध्यप्रदेश में अभी तक 10 लाख से अधिक किसान उपार्जन प्रक्रिया में लाभान्वित हो चुके हैं। स्वयं मैदान में उतरे मुख्यमंत्री, केंद्रों पर किसानों से संवाद किया, संगठनों के प्रमुखों से मिले गेहूं खरीदी के दौरान शुरू के दिनों में जब किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा तो सीएम डॉ. मोहन यादव स्वयं मैदान में उतरे। केंद्रों पर किसानों से संवाद किया। किसान संगठनों के प्रमुखों से मिले। संभागायुक्तों, कलेक्टरों के साथ वीसी में दो टूक कहा कि किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाए। किसान परेशान न हों, ऐसा माहौल बनाएं। पिछली कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को भी केंद्रों पर जाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खरीदी में तेजी से सुधार आया। राज्य- किसानों ने गेहूं बेचा- खरीदी की अंतिम तारीख मध्यप्रदेश- 10 लाख- 23 मई हरियाणा -9.10 लाख- 15 मई पंजाब- 7.5 लाख- 10 मई उत्तरप्रदेश- 2 लाख- 15 जून राजस्थान- 1.67 लाख- 31 मई प्रमुख बिंदु एमपी में 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य अभी 63 लाख टन की हुई खरीदी किसानों के आंकड़ों में मध्यप्रदेश आगे हरियाणा और पंजाब को पछाड़ा एमपी में 10 लाख किसानों से गेहूं खरीदा

प्रधानमंत्री के नेतृत्व से बढ़ा देश की सनातन संस्कृति का गौरव, बोले मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति को मिला नया गौरव : मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए मुख्यमंत्री 75 वर्ष पूर्व आज ही के दिन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण का कार्य हुआ था पूरा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं के साथ गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर से वर्चुअली जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पूजा – अर्चना का अवलोकन कर उनका संबोधन सुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान सोमनाथ मंदिर के स्वर्णिम इतिहास, विदेशी आक्रांताओं द्वारा किए गए हमलों, मंदिर के पुनरनिर्माण यात्रा, वर्तमान सरकार द्वारा किये जा रहे आस्था के केंद्रों का संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प सहित विभिन्न विषयों पर अपनी बातें देशवासियों से साझा की।                मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेशवासियों को “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पूर्व आज ही के दिन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ था और इसी ऐतिहासिक अवसर को देशभर में स्वाभिमान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर अनेक बार बाहरी आक्रांताओं द्वारा हमले किए गए, लेकिन मंदिर की आस्था और परंपरा को समाप्त नहीं किया जा सका। साय ने कहा कि पहली बार आक्रमण के दौरान मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने मंदिर नहीं छोड़ा तथा अपने प्राणों का बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका त्याग आज भी इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।              साय ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद तत्कालीन गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने तमाम विरोधों के बावजूद सोमनाथ मंदिर पहुंचकर पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लिया था। साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को नया गौरव मिला है। उन्होंने कहा कि आज देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों का विकास तेजी से हो रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि बनारस के काशी विश्वनाथ, उज्जैन स्थित महाकाल से लेकर सोमनाथ मंदिर तक व्यापक विकास कार्य किए जा रहे हैं।           मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में देवी माताओं के मंदिरों को शक्तिपीठ योजना के माध्यम से विकसित किया जा रहा है। इसी तरह कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव महादेव मंदिर को स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 148 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है और यहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। सनातनियों के लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या के मंदिर में भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं और यह योजना लगातार जारी है।              मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में सभी लोगों से भाईचारे, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की एकता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।            कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सनातन संस्कृति और आस्था केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य लगातार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे मुखिया भी प्रदेश में धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ ही विभिन्न योजनों के माध्यम से लोगों को आस्था से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर देश की संस्कृति, वैभव और स्वाभिमान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सल उन्मूलन के बाद पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि सोमनाथ मंदिर सनातनियों के आस्था का बड़ा केंद्र है। उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के इतिहास में अनेक आक्रमणों के बावजूद सनातन संस्कृति की आस्था को कोई डिगा नहीं पाया है और न कभी ऐसा होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वर महादेव मंदिर पहुँचे। उन्होंने भगवान शिव की पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

धमतरी में ‘समर कैम्प 2026’ का आगाज़, 36 केंद्रों पर खेल और व्यक्तित्व विकास का संगम

धमतरी में 'समर कैम्प 2026' का आगाज़,  36 केंद्रों पर खेल और व्यक्तित्व विकास का संगम ​रायपुर      धमतरी ​जिले के बच्चों और युवाओं की खेल प्रतिभा को तराशने तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश को रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से धमतरी में “समर कैम्प 2026” की शुरुआत हो गई है। जिला प्रशासन और खेल विभाग के समन्वय से आयोजित यह 30 दिवसीय शिविर 9 मई से 8 जून तक चलेगा, जिसमें खेल तकनीक के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।   समर कैम्प का उद्देश्य केवल खेल प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि बच्चों को एक सकारात्मक वातावरण प्रदान कर उन्हें नशामुक्ति, स्वास्थ्य और अनुशासित जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है। ​30 दिन, 36 केंद्र और अनगिनत अवसर     ​इस वर्ष समर कैम्प का दायरा बढ़ाते हुए जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 36 केंद्र बनाए गए हैं। फ्रीडम फिजिकल ट्रेनिंग सहित विभिन्न खेल संघों और क्लबों के माध्यम से बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार खेलों का चयन करने का विकल्प मिल रहा है। ​शिविर में ​मैदानी खेल में फुटबॉल, कबड्डी, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, रग्बी को शामिल किया गया है। ​मार्शल आर्ट्स में कराटे, जूडो, ताइक्वांडो, बॉक्सिंग, कुडो के साथ-साथ​पारंपरिक एवं अन्य में योग, शतरंज, कुश्ती, तीरंदाजी, स्केटिंग, वेटलिफ्टिंग को शामिल किया गया है । ​अनुभवी प्रशिक्षकों की देखरेख में निखरेगी प्रतिभा     ​शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ के अनुभवी प्रशिक्षक हैं, जो न केवल खेल की बारीकियां सिखा रहे हैं, बल्कि बच्चों में फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता (Leadership) जैसे गुणों का संचार कर रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से ऐसी प्रतिभाओं की पहचान करना है, जिन्हें भविष्य में खेल अकादमियों और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा सके। ​योग और आत्मरक्षा पर विशेष फोकस     ​बदलते दौर की चुनौतियों को देखते हुए शिविर में योग और मार्शल आर्ट्स को प्राथमिकता दी गई है। इसके माध्यम से बच्चों को आत्मरक्षा (Self-defense) के गुर सिखाने के साथ-साथ उनकी मानसिक एकाग्रता और स्वास्थ्य जागरूकता पर बल दिया जा रहा है। ​इस वृहद आयोजन में जिले की प्रतिष्ठित संस्थाएं अपनी सहभागिता दे रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से ​सेजेस (SAGES) चर्रा और शौर्य क्रीड़ा क्लब कुण्डेल,​कला केन्द्र इतवारी बाजार और नगर निगम स्पोर्ट्स एकेडमी,​जिला वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, कुडो और कराटे संघ शामिल है। धमतरी जिले में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू हुए इस "समर कैम्प" के लिए ​जिला प्रशासन ने सभी केंद्रों पर खेल सामग्री और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।