samacharsecretary.com

मन शांत तो तन स्वस्थ… आर्ट ऑफ लिविंग का यही संदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मन की शांति ही तन का योग सादृश्य…यही है आर्ट ऑफ लिविंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविशंकर जी का 70वां जन्मोत्सव प्रदेशवासियों की ओर से रविशंकर के लिए जन्मोत्सव की मंगलकामनाएं लेकर स्वयं उदयपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के स्थापना दिवस समारोह में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमने कभी दुनिया को हथियारों के बल पर जीतने की चेष्ठा नहीं की। हमने विश्वशक्ति नहीं, विश्वगुरु बनने का मार्ग चुना है। हमने हमेशा सबके सुख की कामना की है और वैश्विक कल्याण का नारा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की शांति ही तन के योग सादृश्य है। जब मन शांत होता है, तभी शरीर सही संतुलन, स्वास्थ्य और सामंजस्य में रहता है। यही आर्ट ऑफ लिविंग है। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' हमारी संस्कृति का मूल है और रविशंकर जी इसी संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित कर रहे हैं। ने दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को तनाव से मुक्ति दिलाकर शांत, स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को कर्नाटक राज्य में आर्ट ऑफ लिविंग के इंटरनेशनल सेन्टर, उदयपुरा, बैंगलुरू में रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने रविशंकर से कहा कि वे मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से उन्हें जन्मोत्सव की अनंत और अशेष मंगलकामनाएं देने स्वयं यहां (उदयपुरा) आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 7 दशक की की ऊर्जा और करुणा इस व्यस्त और ऊथल पुथल के दौर में भी हर दिन नई और चिरयुवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इस विश्व को की देन है। यह सेवा, साधना और शांति का परम संगम है। आर्ट ऑफ लिविंग पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गये निष्काम कर्मयोग और जीवन को एक उत्सव की तरह जीने की कला का सहज मार्ग है, एक नव वैश्विक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग सिर्फ जीवन जीने की कला नहीं, जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने योग, प्राणायाम, ध्यान और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से जोड़कर लोगों को आत्मिक शांति प्रदान की है। करीब एक माह का यह आर्ट ऑफ लिविंग वैश्विक सम्मेलन वास्तव में मानवता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां मन शांत होता है, वहीं समाज भी समृद्ध होता है। मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग आध्यात्मिक संगठन को वैश्विक पुनीत सामाजिक कार्यों के लिए बधाई देते हुए कहा कि आप सब भारत की ध्यान, योग, साधना, मेडिटेशन, सुदर्शन क्रिया जैसी प्राचीन आध्यात्मिक परम्पराओं को पुनर्जीवित कर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का भी उत्थान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र, बेंगलुरु आकर देवलोक जैसा आनंद प्राप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति में भाषाओं का गुलदस्ता है। भाषा कोई भी हो, लेकिन चेहरे के भाव से ही बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। गुजरात के सोमनाथ में गुरूदेव के आशीर्वाद से सोमनाथ उत्सव भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रत्येक सांस के साथ जीवन और मृत्यु साथ-साथ चलती है। दोनों परमपिता परमात्मा के हाथ में है। श्रीरविशंकर जी ने 70वें जन्मदिन के अवसर पर 20 दिवसीय उत्सव मनाने का निर्णय लिया है। संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु स्वयं से साक्षात्कार करने के लिए बेंगलुरु स्थित इस केंद्र में आते हैं। हमारी संस्कृति में हमारे गुरु ही हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। हमारा जीवन यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे यानी जैसा पिंड है, वैसा ही ब्रह्मांड है की अवधारणा पर चलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य का भोजन तीन प्रकार का है। बगैर भोजन के 30 दिन तक जीवित रह सकते हैं। पानी हमें 7 दिन तक जिंदा रख सकता है। गुरुदेव ने हमें प्राण से परमानंद और परमानंद से परमात्मा की ओर जाने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसारिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य का जीवन नियत है। हमारा यह जीवन ऊर्जा और चेतना के साथ प्रकृति से भी जुड़ा रहे, इसके लिए के सभी सामाजिक सेवा प्रकल्प विशेष महत्व रखते हैं। बेंगलुरु के इस आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र में हमें सांस्कृतिक चेतना और शांति का मार्ग प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के जय घोष के साथ गुरुदेव रविशंकर जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सह्स्त्रायु को प्राप्त हों और दीर्घकाल तक हम सबके जीवन का मार्गदर्शन करते रहें। कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। न्यूज फर्स्ट मीडिया हाऊस के सीईओ एस. रवि कुमार एवं टीवी 9 के वरिष्ठ एंकर रंगनाथ भारद्वाज ने कन्नड़ भाषा में दिये संबोधन में कहा कि गुरुदेव रविशंकर विश्व शांति के दूत हैं। आपने पूरे विश्व के लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग के साथ-साथ आर्ट ऑफ लविंग भी सिखाया है। कार्यक्रम में तेलंगाना राज्य के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, श्रीमती जानकी शुक्ला, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह, फिल्म अभिनेता जैकी श्राफ, एशियन पेंट के मालिक जलस दानी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। 

पेट्रोल-डीजल के साथ अब CNG और हाइड्रोजन की सख्त निगरानी: उपभोक्ता सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था लागू

नई दिल्ली भारत में क्लीन एनर्जी और ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ CNG, LNG और हाइड्रोजन फ्यूल डिस्पेंसर की भी सख्ती से जांच और सत्यापन किया जाएगा। 24 मई 2026 को उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) ने लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स (Legal Metrology Rules) में बड़ा बदलाव करते हुए GATC (Government Approved Test Centres) के दायरे को बढ़ा दिया है। इसका मतलब यह है कि अब देशभर में इस्तेमाल होने वाले नए जमाने के ईंधन डिस्पेंसर भी सरकारी मानकों के तहत चेक किए जाएंगे, ताकि ग्राहकों को सही मात्रा में फ्यूल मिल सके और किसी तरह की गड़बड़ी न हो। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारत तेजी से क्लीन फ्यूल की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ सालों में CNG और LNG वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी को भी भविष्य का बड़ा विकल्प माना जा रहा है। सरकार पहले ही इलेक्ट्रिक और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बड़े निवेश कर रही है। ऐसे में फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया था। नई व्यवस्था के तहत अब GATC सिर्फ वजन और माप वाले उपकरणों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर की भी जांच करेंगे। पहले यह व्यवस्था केवल 18 तरह के उपकरणों पर लागू थी, लेकिन अब इसमें पांच नए फ्यूल डिस्पेंसर जोड़ दिए गए हैं। इससे कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि पेट्रोल पंप या गैस स्टेशन पर कम मात्रा में फ्यूल दिया जाता है। अब नई जांच व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक जितने पैसे दे रहा है, उसे उतना ही ईंधन मिले। इससे ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। इसके अलावा सरकार ने वेरिफिकेशन फीस भी तय कर दी है। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के लिए प्रति नोजल ₹5,000 शुल्क रखा गया है, जबकि CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए ₹10,000 प्रति नोजल फीस निर्धारित की गई है। इससे प्राइवेट लैब और इंडस्ट्री को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, ताकि तकनीकी विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल हो सके। राज्य सरकारों को भी नई शक्तियां दी गई हैं। अब वे अपने राज्यों की जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त उपकरणों और माप प्रणाली को GATC के तहत शामिल कर सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर जांच और निगरानी की प्रक्रिया और मजबूत होगी। वहीं प्रशासनिक कामकाज को तेज करने के लिए ज्वॉइंट सेक्रेटरी (Joint Secretary) रैंक और उससे ऊपर के अधिकारियों को मंजूरी देने का अधिकार भी दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में भारत का फ्यूल मार्केट तेजी से बदलने वाला है। पेट्रोल और डीजल के साथ CNG, LNG और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों की मांग बढ़ेगी। ऐसे में सरकार का यह कदम सिर्फ उपभोक्ता सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश के ग्रीन एनर्जी मिशन को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और क्लीन फ्यूल अपनाने की रफ्तार भी तेज हो सकती है।

रांची स्मार्ट सिटी घोटाला या लापरवाही? फ्लैट, अस्पताल और मॉल अब तक कागजों में

 रांची  रांची की स्मार्ट सिटी परियोजना आज अपने सबसे बड़े सवालों के घेरे में है। करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद न तो आम लोगों को फ्लैट मिले, न मेडिकल कॉलेज बना, न अस्पताल और न ही माल जैसे बड़े प्रोजेक्ट जमीन पर उतर सके। हालत यह है कि 656 एकड़ में फैली स्मार्ट सिटी में 70 करोड़ रुपये की लागत से मंत्रियों के आलीशान बंगले तो बन गए, लेकिन आम आदमी के हिस्से अब तक एक भी फ्लैट नहीं आया। स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन अब तक जमीन बेचकर 550 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुका है, लेकिन तकनीकी उलझन, म्यूटेशन विवाद और विभागीय समन्वय की कमी ने पूरे प्रोजेक्ट की रफ्तार रोक दी है। 60 प्लाटों में महज 13 ही बिक सके हैं और पिछले दो वर्षों से प्लाट ऑक्शन भी बंद पड़ा है। एक साल बाद भी शुरू नहीं हुआ म्यूटेशन स्मार्ट सिटी की सबसे बड़ी बाधा जमीन का म्यूटेशन बना हुआ है। बीते साल 17 जून को मुख्य सचिव अलका तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में म्यूटेशन प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया था। बैठक की प्रोसिडिंग नामकुम अंचल कार्यालय को भेजी गई, लेकिन करीब एक साल होने के हैं उसके बाद भी प्रक्रिया जमीन पर शुरू नहीं हो सकी। म्यूटेशन नहीं, इसलिए नक्शा भी पास नहीं स्मार्ट सिटी कारपोरेशन ने जिन कंपनियों और निवेशकों को जमीन आवंटित की, उनकी जमीन का म्यूटेशन नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से भवन निर्माण के नक्शे भी अटक गए हैं। दो अपार्टमेंट, एक माल, मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भवन के नक्शे स्वीकृति के लिए भेजे गए थे, लेकिन टाउन प्लानिंग विभाग ने म्यूटेशन नहीं होने का हवाला देते हुए नक्शा पास करने की आगे की प्रक्रिया रोक दी है। नतीजा यह हुआ कि हजारों करोड़ के निवेश वाली परियोजनाएं कागजों में कैद होकर रह गईं। 65 साल पुरानी गलती अब बनी सबसे बड़ा संकट दरअसल, समस्या की जड़ 65 साल पुरानी है। संयुक्त बिहार के समय एचईसी के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन उस समय म्यूटेशन नहीं कराया गया। वर्ष 2016 में झारखंड सरकार ने एचईसी से यह जमीन खरीदी, तब भी म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसके बावजूद स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने निवेशकों को प्लाट आवंटित कर दिए। अब निवेशकों की जमीन का भी म्यूटेशन नहीं हो पा रहा है और पूरा प्रोजेक्ट कानूनी व तकनीकी पेंच में फंस गया है। निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया तकनीकी बाधाओं और विभागीय ढिलाई से परेशान निवेशकों का भरोसा अब टूटने लगा है। चैलस रियल एस्टेट ने अपने 100 करोड़ रुपये वापस लेने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने पांच प्रतिशत राशि काटकर शेष 95 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया। माना जा रहा है कि दूसरे निवेशक भी अब पीछे हट सकते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित स्मार्ट सिटी योजना के तहत आम लोगों के लिए करीब 5000 फ्लैट, बेहतर अस्पताल, स्कूल, तकनीकी कॉलेज, माल और रोजगार के नए अवसर विकसित होने थे, लेकिन परियोजनाएं अटकने से सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। करोड़ों खर्च कर तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर भी खाली पड़ा है और स्मार्ट सिटी का सपना धीरे-धीरे अव्यवस्था की भेंट चढ़ता दिख रहा है। इन कंपनियों को मिला है प्लॉट     चैलस रियलटर्स     मालती रेसिडेंसी इंफ्रा प्रोजेक्ट     अनंता रियलिटी     मणिकरण एक्सेल     जेएस क्लस्सी     बिग रियलटर्स     इक्फाई यूनिवर्सिटी     राइट पाथ फाउंडेशन     प्रमुख प्रस्तावित परियोजनाएं     5000 आवासीय फ्लैट     मेडिकल कॉलेज व अस्पताल     टेक्निकल कॉलेज     शापिंग माल     फाइव स्टार होटल     स्कूल और कमर्शियल काम्प्लेक्स  

नियद नेल्लानार योजना: कच्चापाल जलप्रपात के पास ‘इन्द्रावती समूह’ की महिलाएँ मुर्गी पालन से लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई इबारत

​ ​रायपुर       छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास की नई किरण पहुँचाने वाली 'नियद नेल्लानार योजना' अब ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। जिला प्रशासन के लगातार प्रयासों से ओरछा विकासखण्ड के ग्राम कच्चापाल में आजीविका के नए रास्ते खुले हैं। यहाँ की महिलाओं ने न सिर्फ आत्मनिर्भर बनने की ठानी है, बल्कि वे क्षेत्र के पर्यटन विकास में भी अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं। ​प्रशासन का सहयोग, महिलाओं का हौसला       ​ प्रशासन के कुशल निर्देशन में पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्राम कच्चापाल के 'इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह' को एक नई ताकत मिली है। समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत लाभान्वित किया गया है।​विभाग द्वारा समूह के सदस्यों को आजीविका शुरू करने के लिए ​10 इकाई उन्नत नस्ल के चूजे और​गुणवत्तापूर्ण कुक्कुट आहार (दाना) दिया गया है। ​पर्यटन और आजीविका का शानदार संगम       ​ इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष  पुनई ने जिला प्रशासन के इस सहयोग पर खुशी जताते हुए एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल की उम्मीद जताई है। कच्चापाल जलप्रपात (Waterfall) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। ​उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में कच्चापाल जलप्रपात होने के कारण पर्यटन की असीम संभावनाएँ हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों के कारण स्थानीय स्तर पर अंडा और मांस की मांग हमेशा बनी रहती है। ​आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम       ​ पहले जहाँ ग्रामीण महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे, वहीं अब इस कुक्कुट इकाई (Poultry Unit) के मिलने से वे मुर्गी पालन और अंडा उत्पादन का काम बड़े पैमाने पर करेंगी। जलप्रपात क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय दुकानों में सीधे सप्लाई होने से महिलाओं को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी से समूह की महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा। ​       ​ कच्चापाल की इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह की यह कहानी इस बात का प्रतीक है कि अगर सही समय पर सही संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण अंचलों की महिलाएँ भी मुख्यधारा में शामिल होकर विकास की गति को तेज कर सकती हैं।

योगी सरकार का गो संरक्षण मॉडल: ‘हेता’ ब्रांड से A2 दूध और 150+ प्रोडक्ट्स की ग्लोबल पहचान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब उत्तर प्रदेश की जमीन से उठकर वैश्विक मंच पर अपनी सफलता का परचम लहरा रहा है। राज्य में देशी गायों के संरक्षण को सिर्फ आस्था तक सीमित न रखकर एक मजबूत आर्थिक मॉडल में बदल दिया गया है। इसका नतीजा यह है कि आज उत्तर प्रदेश में देशी गायों के सहारे न सिर्फ 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा हुआ है, बल्कि अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की भारी मांग पैदा हो गई है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बदली गो-संरक्षण की परिभाषा इस क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत गाजियाबाद के सिकंदरपुर से हुई, जहां अमेरिका की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में 14 साल तक इंजीनियर रहे असीम रावत ने सीएम योगी की प्रेरणा से गो-संरक्षण की राह चुनी। उन्होंने 'हेता' (HETHA) ब्रांड के तहत 1000 से ज्यादा देशी गायों पर आधारित एक एथिकल डेयरी सिस्टम स्थापित किया है। आज 100 लोगों की उनकी विशेष टीम इस मिशन को एक ग्लोबल ब्रांड बना चुकी है, जिसके अंतर्गत संरक्षित साहीवाल गाय की महत्ता को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गोपूजन कर सराह चुके हैं। दूध से लेकर कॉस्मेटिक्स तक, 150 से अधिक प्रोडक्ट्स 'हेता' का यह मॉडल स्वदेशी नस्लों के समग्र और वैज्ञानिक उपयोग पर आधारित है। यहाँ केवल दूध ही नहीं, बल्कि पंचगव्य, आयुर्वेदिक औषधियां, ऑर्गेनिक फूड और स्किन व हेयर केयर जैसे लगभग 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यहाँ के A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत और गोमूत्र अर्क की शुद्धता धूम मचा रही है। सबसे खास बात यह है कि इस मॉडल में वृद्ध या दूध न देने वाले गोवंश को बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानकर सिस्टम का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है। दुनिया के कोने-कोने में पहुंचा 'मेड इन यूपी' उत्तर प्रदेश की इस अनूठी 'गो-इकोनॉमी' का विस्तार अब भारत से बाहर निकलकर अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर और दुबई जैसे मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक हो चुका है। इन वैश्विक बाजारों में यूपी के गो-उत्पादों की बढ़ती पहुंच ने राज्य की एक नई और प्रगतिशील पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत मिल रही 50 प्रतिशत सब्सिडी पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, इस मॉडल को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार नीतिगत स्तर पर भारी वित्तीय सहायता दे रही है। सरकार की ‘ऑपरेशन-4’ योजना के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक के स्टार्टअप के लिए 15% स्वयं का निवेश, 35% बैंक लोन और 50% सरकारी अनुदान (सब्सिडी) का एक पारदर्शी फॉर्मूला लागू किया गया है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों पर केंद्रित योगी सरकार की यह नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल ला रही हैं। यह 'गो-इकोनॉमी' मॉडल अब उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।

पेपर लीक अफवाह फेल, हाईटेक निगरानी में हुई UPSSSC लेखपाल परीक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर वर्षों तक सक्रिय रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर योगी सरकार की सख्ती लगातार भारी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण विगत दिनों आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 में देखने को मिला, जहां सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन और आयोग की सतर्कता के आगे यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। कुल 3,66,712 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। उपस्थिति प्रतिशत 82.29 रहा, जो अभ्यर्थियों के भरोसे को भी दर्शाता है। पेपर लीक का शोर, लेकिन हकीकत में निकली अफवाह परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ लोगों ने पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आयोग और निगरानी टीमों ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित थीं। दरअसल, एक कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक का रंग देने की कोशिश की। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा शांतिपूर्वक जारी रही योगी सरकार का हाईटेक एग्जाम मॉडल बना ढाल इस बार परीक्षा की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर सभी परीक्षा केंद्रों तक कंट्रोल कमांड रूम के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड तैनात किए गए थे। एआई आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े पर नजर रखी गई। यही कारण रहा कि बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी तुरंत पकड़ लिया गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकल माफिया पर लगातार कड़ा प्रहार उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के कारण सवालों में रहती थीं, लेकिन योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। हाईटेक निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआई ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 का शांतिपूर्ण आयोजन इस बात का संकेत है कि अब प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता और सख्ती के नए मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं।  

परंपरागत धान के बदले उद्यानिकी को अपनाया, प्रति एकड़ उत्पादन 21 क्विंटल से बढ़कर हुआ 155 क्विंटल

रायपुर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है। कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान  नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ            कृषक  नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग           ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई  के लिए तैयार हो जाती है। इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है। नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता            साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं। कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

निर्बाध बिजली व्यवस्था पर पंजाब सरकार सख्त, फील्ड में उतरेंगे टेक्निकल कर्मचारी

जालंधर. टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज पावरकॉम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसके चलते आमतौर पर फाल्ट समय पर ठीक नहीं हो पाता और पब्लिक को भारी परेशानियां उठानी पड़ती है। इसके लिए पावरकॉम द्वारा टैक्निकल कर्मचारियों को दफ्तरों से निकाल कर फील्ड में तैनात करने के आदेश जारी किए गए हैं। पावरकॉम दफ्तरी आदेश नंबर 1296/22-5 के तहत जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक कहा गया है कि दफ्तरों में काम करने वाले स्टॉफ को फील्ड में तैनात किया जाए। बताया जा रहा है कि इन आदेशों के बाद विभाग संबंधित विभिन्न एसोसिएशनों द्वारा दफ्तरों में तैनात कर्मचारियों की लिस्टें तैयार की जा रही है जोकि पटियाला हैड ऑफिस भेजी जाएगी ताकि दफ्तरों में काम करने वाले टैक्निकल कर्मचारियों की फील्ड तैनाती को यकीनी बनाया जा सके। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पावरकॉम में पोस्ट के हिसाब से बड़े स्तर पर टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज चल रही है। इनमें जे.ई., लाइनमैन, सहायक लाइनमैन इत्यादि शामिल हैं। पावरकॉम द्वारा कम स्टॉफ के साथ काम किया जा रहा है जिसके चलते फील्ड में काम करने वाले स्टॉफ पर ओवरलोड बना हुआ है। विभागीय जानकारों का कहना है कि महानगर जालंधर ही नहीं बल्कि पंजाब के सभी जोन में टैक्निकल स्टॉफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह से दूर-दराज की कई डिवीजनों में हालात बेहद नाजूक है, जिसके चलते लोगों के दिलों में विभाग का अकस खराब हो रहा है। टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज को देखते हुए पावरकॉम द्वारा ठेके पर कंपलेंट हैंडलिंग बाइक (सी.एच.बी.) कर्मचारियों से सेवाएं ली जा रही है। लेकिन इसके बावजूद स्टॉफ शार्टेज की समस्या का पक्का समाधान नहीं निकल पा रहा है। छोटे-मोटे फाल्ट के लिए सी.एच.बी. से काम लिया जा सकता है, लेकिन शट्डाऊन लेने, बड़ी लाइनों पर काम करने जैसी स्थिति में पक्के स्टॉफ की उपलब्धता जरूरी हो जाती है। इसी क्रम में रोजाना पड़ रहे फाल्ट को निपटाने में सी.एच.बी. व पक्के स्टॉफ को काफी मश्कत करनी पड़ रही है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है, लेकिन रिटायर्ड हुए कर्मचारियों के मुकाबले भर्ती प्रक्रिया का अनुपात बेहद कम साबित हो रहा है। इसी के चलते टैक्निकल स्टॉफ की शॉर्टेज बनी हुई है। फाल्ट बढ़ने से खराब हो रहे हालात स्टॉफ शार्टेज का सबसे विपरीत प्रभाव गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। गर्मी में बिजली का इस्तेमाल बढ़ने के कारण फाल्ट बढ़ जाते है जिसके चलते टैक्निकल स्टॉफ की डिमांड में भारी बढ़ौतरी होती है। कई इलाकों में लोगों को घंटों तक स्टॉफ का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, बारिश व तूफान के मौसम में हजारों के हिसाब से शिकायतें सामने आती हैं और ऐसे समय में हालात बेहद खराब हो जाता है।

मिथाइल मेथाक्रायलेट लीक से दहशत, विस्फोट का खतरा बढ़ा

नई दिल्ली  कैलिफोर्निया में एक केमिकल फैक्ट्री के खराब वाल्व ने लाखों जिंदगियों और छह शहरों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। ऑरेंज काउंटी की इस फैक्ट्री से मिथाइल मेथाक्रायलेट नाम के बेहद खतरनाक और आग पकड़ने वाले केमिकल का रिसाव हो रहा है। खराबी इतनी बड़ी है कि रिसाव को पूरी तरह बंद करना नामुमकिन हो चुका है। अब डर इस बात का है कि अत्यधिक दबाव या गर्मी के कारण यह स्टोरेज टैंक कभी भी फट सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए लगभग 40,000 लोगों को फौरन अपने घर खाली करने का सख्त आदेश जारी किया है। प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां फायर अथॉरिटी के अधिकारियों ने साफ किया है कि इस वक्त वे दो सबसे बुरे हालातों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। पहला खतरा यह है कि टैंक का ढांचा पूरी तरह ढह जाए, जिससे आसपास के पार्किंग एरिया में 6,000 से 7,000 गैलन जहरीला केमिकल फैल जाएगा। दूसरा और सबसे भयानक खतरा यह है कि कड़कती गर्मी के चलते टैंक के अंदर का तापमान और दबाव बढ़ जाए, जिससे उसमें जोरदार धमाका हो जाए। अगर ऐसा ब्लास्ट होता है, तो पास में ही मौजूद ईंधन और अन्य रसायनों के टैंक भी आग की चपेट में आ जाएंगे, जिससे यह हादसा एक बड़ी तबाही में बदल सकता है। पर्यावरण और इंसानी सेहत पर मंडराता खतरा इस जहरीले लिक्विड को पर्यावरण में तबाही मचाने से रोकने के लिए बचाव दल युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। केमिकल को स्थानीय नालियों, नदियों या समंदर में बहने से रोकने के लिए रेत की बोरियों की मजबूत दीवारें बनाई गई हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तापमान बढ़ने पर इस केमिकल से निकलने वाली भाप हवा को पूरी तरह जहरीला बना देगी। इसके संपर्क में आने से लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ, आंखों में चुभन और तेज जलन, उल्टी आने जैसा महसूस होना और असहनीय सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। 15% आबादी ने घर छोड़ने से किया इनकार यह पूरी घटना लॉस एंजिल्स से करीब 38 मील दूर गॉर्डन ग्रोव शहर में हुई है। यह इलाका मशहूर डिज़नीलैंड थीम पार्क के काफी करीब है। राहत की बात यह है कि अधिकारियों ने फिलहाल डिज़नीलैंड को इस खतरे के दायरे से बाहर बताया है। इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच पुलिस के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। आदेश के बावजूद इलाके के करीब 15 फीसदी लोगों ने अपने आशियाने को छोड़ने से साफ मना कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षित निकाले गए लोगों के ठहरने के लिए दो बड़े शेल्टर होम तैयार किए हैं और लोगों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में न डालें और इस सरकारी आदेश का पूरी गंभीरता से पालन करें।

पटना चिड़ियाघर में बड़ा बदलाव: गैंडों की अदला-बदली से बढ़ेगी प्रजातियों की विविधता

पटना बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना जू में नए जानवरों का आगमना होने जा रहा है। दिल्ली और रोहतक चिड़ियाघर के बाद अब पटना में सिंगापुर से एक जानवर आने वाला है। उसका बेसब्री से इंताजर हो रहा है। पटना जू में दो सिंग वाला सफेद गैंडों का एक जोड़ा देखने को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक इसके बदले में पटना जू से एक सिंग वाला एक जोड़ा गैंडा सिंगापुर जाएगा। पटना आएगा गैंडा इसके लिए दोनों देशों के अधिकारी के अलावा पटना जू और वन पर्यावरण के अधिकारियों में वार्तालाप जारी है। पटना जू प्रबंधन के मुताबिक ये एक्सजेंज प्रोग्रामा के तहत जानवरों की अदला- बदली की जा रही है। ये दो सिंग वाला गैंडा पानी के जहाज से आएगा। उसके बाद समुद्र मार्ग से कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगा। जहां से गैंडा को ट्रक पर लेकर टीम पटना पहुंचेगी। ऐसी योजना तैयार की जा रही है। सिंगापुर से आएगा गैंडा हवाई मार्ग की जगह समुद्री मार्ग और सड़क मार्ग को तरजीह दी जा रही है। ध्यान रहे कि पटना जू में गैंडों की संख्या एशिया में पहले स्थान प र है। वहीं दुनिया में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। पटना जू में दस गैंडें हैं। इनमें छह मादा और चार नर गैंडा शामिल है। सभी गैंडें व्यस्क हैं और सबसे छोटे की उम्र पांच वर्ष की है। पटना जू ने दी जानकारी जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहले स्थान पर अमेरिका के कैलिफोर्निया का सेंट डिएगो जू सफारी है। इन गैंडों के पटना जू आ जाने से गैंडों की प्रजाति की विविधता बढ़ जाएगा। जानकारी के मुताबिक अब दर्शन एक सिंग वाला गैंडा देखने के साथ दो सिंग वाला गैंडा भी देख पाएंगे।