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10 जून का Horoscope: कुछ राशियों को मिलेगा लाभ, तो कुछ को स्वास्थ्य को लेकर रहना होगा सतर्क

मेष 10 जून के दिन आपका दिन शानदार रहने वाला है। आज एक खुशहाल, प्यार भरा रिश्ता बनाइए, अहंकार और मनमुटाव से मुक्त रहिए। ध्यान करें कि आप प्रोफेशनल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। आज के दिन वित्तीय दिक्कतें हो सकती हैं। वृषभ 10 जून के दिन लव के मामले में छोटी-मोटी दिक्कतें आ सकती हैं। आपको अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों पर भी अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी। कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या नहीं है। फिर भी आज आपको वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मिथुन 10 जून के दिन बिजनेस का विस्तार करने या नई पार्टनरशिप शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। निजी और पेशेवर जीवन में परेशानियों से दूर रहें। अपने करियर के प्रति आपकी मेहनत सकारात्मक परिणाम देगी। कर्क 10 जून के दिन स्टूडेंट्स को कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। आर्थिक रूप से, भाग्य आपका इंतजार कर रहा है। कोई गंभीर दिक्कत आपके प्रेम जीवन को प्रभावित नहीं करेगी। दफ्तर में आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा। सिंह 10 जून के दिन कोई सहकर्मी आपकी कमिटमेंट पर उंगली उठा सकता है। आपकी वित्तीय स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन कुछ छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। सिंगल पुरुष जातकों को कोई दिलचस्प व्यक्ति मिलने का सौभाग्य प्राप्त होगा। कन्या 10 जून के दिन ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहें। अपने विचारों को जाहिर करने और लक्ष्य निर्धारित करने का यह एक बढ़िया समय है। सबकुछ ठीक-ठाक होता हुआ प्रतीत होता है। प्रेम शांति से भरपूर महसूस होगा। तुला 10 जून के दिन आपके सीनियर्स आपके प्रयासों की सराहना कर सकते हैं। आज का दिन आगे बढ़ने, खुद को क्लियर रूप से एक्सप्रेस करने और दूसरों के साथ विचारशील और सार्थक तरीकों से जुड़ने के अवसरों से भरा है। वृश्चिक 10 जून के दिन अहंकार के रूप में चुनौतियां आ सकती हैं। आपकी जिज्ञासा आपको विभिन्न दृष्टिकोण का पता लगाने के लिए मोटिवेट करेगी, जिससे आपको समस्याओं को अधिक आसानी से सॉल्व करने में मदद मिलेगी। धनु 10 जून के दिन सिंगल जातक भाग्यशाली रहेंगे। आपका दिमाग नए विचारों और क्रिएटिव एनर्जी से भरा हुआ है। आप खुद को नई चीजें सीखने और अपने आस-पास के लोगों के साथ अपने विचारों को साझा करने के लिए अधिक मोटिवेटेड पाएंगे। मकर 10 जून के दिन जीवनशैली पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। आप अधिक केंद्रित और शांत महसूस कर रहे हैं। रिश्ते आसान महसूस हो सकते हैं और काम पर आपके प्रयास प्रगति दिखाने लग सकते हैं। फाइनेंशियल डिसीजन क्लियर हो सकते हैं। कुंभ 10 जून के दिन आर्थिक समृद्धि बनी हुई है। जब आप ईमानदारी से बात करते हैं और ध्यान से सुनते हैं तो दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों के साथ संबंध मजबूत होते हैं। आपकी एनर्जी में सुधार हो सकता है। धन लाभ के योग हैं। मीन 10 जून के दिन प्रेमी द्वारा रिश्ते में आपकी कमिटमेंट पर सवाल उठाया जा सकता है। ये दिन बदलाव लेकर आया है। आपका आत्मविश्वास जीवन के हर हिस्से में पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है।

आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर कम लागत में बढ़ा रहे उत्पादन, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर राज्य शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर किसान खेती को अधिक सुविधाजनक, किफायती और लाभकारी बना रहे हैं। सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम अचानकपुर के प्रगतिशील किसान  गुलाबचंद राठौर भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया (तरल) का सफल उपयोग कर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं तथा अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।           गुलाबचंद राठौर ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया का उपयोग किया था, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यूरिया की 45 किलोग्राम की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया का परिवहन, भंडारण एवं उपयोग कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसकी छोटी शीशी को किसान आसानी से खेत तक ले जा सकते हैं, जिससे समय, श्रम और परिवहन व्यय में उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि एवं विकास में सहायता मिलती है।         उर्वरकों की उपलब्धता से किसानों को मिल रही सुविधा  राठौर ने बताया कि वर्तमान खरीफ सीजन के लिए सेवा सहकारी समिति में शासन के मानकों के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्हें भी आवश्यकता के अनुसार यूरिया एवं डीएपी खाद सहजता से प्राप्त हुआ है, जिससे कृषि कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे खेती-किसानी के कार्य सुचारु रूप से संपादित किए जा सकते हैं। कम लागत में अधिक लाभ का माध्यम बन रहा नैनो यूरिया          किसान  गुलाबचंद राठौर का मानना है कि नैनो यूरिया खेती की लागत को नियंत्रित करने, उर्वरक प्रबंधन को सरल बनाने तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। नैनो उर्वरकों का उपयोग कृषि को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। अन्य किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील           राठौर ने जिले एवं प्रदेश के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों तथा नैनो उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और नवाचारों को अपनाने से कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।       राज्य शासन द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्नत बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और समृद्ध बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बदली तस्वीर, ग्रामीणों को मिली आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा

रायपुर  बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अतिसंवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित अबुझमाड़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। वर्षों तक विकास से दूर रहे मयूरीपारा तक अब सड़क पहुंचने से लोगों को बेहतर आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है। 16 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ रहा दूरस्थ क्षेत्र           प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बैल से मयूरीपारा तक 16 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में अब तक 13 किलोमीटर मिट्टीकृत सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही मुरूमीकरण और छह पुलियों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य जून माह में पूरा कर लिया जाएगा। दुर्गम रास्तों से मिल रही राहत           ग्राम बैल की सरपंच मती जुग्गी अठामी ने बताया कि लंबे समय तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए घने जंगलों से होकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बरसात के मौसम में नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते थे। उन्होंने बताया कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था। अब सड़क निर्माण से हालात तेजी से बदल रहे हैं और लोगों को बड़ी राहत मिली है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आधार        सड़क बनने से स्कूली बच्चों का आवागमन आसान हुआ है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है। अब जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी सुविधा मिल रही है। विकास और समृद्धि की नई उम्मीद           ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। बैल से मयूरीपारा मार्ग के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अबुझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

16 विधाओं में 1281 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ भव्य समापन

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और आधुनिक रचनात्मकता के अद्भुत संगम का प्रतीक बना संस्कृति विभाग का बहुप्रतीक्षित कला प्रशिक्षण शिविर “आकार-2026” रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं प्रतिभागियों की शानदार प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हो गया। 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर, रायपुर में आयोजित इस 16 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी प्रतिभा को नई दिशा दी। समापन समारोह में रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद  बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे तथा उप संचालक  प्रताप चंद्र पारख सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, प्रशिक्षु एवं अभिभावक उपस्थित थे। मुख्य अतिथि सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2004 में संस्कृति मंत्री रहते हुए उन्होंने “आकार” प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से यह पहल प्रारंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि इसकी लोकप्रियता को देखते हुए ऐसे आयोजन प्रदेश के सभी संभागों में आयोजित किए जाने चाहिए। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक आभूषणों, हस्तशिल्प के लिए स्थायी विक्रय केंद्र भी विकसित किए जाने चाहिए, जिससे कलाकारों को आर्थिक लाभ मिल सके और लोग छत्तीसगढ़ के आभूषण और हस्तशिल्प को देख और खरीद सकंे।  अग्रवाल ने बच्चों को मिट्टी और प्रकृति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “जिस दिन बच्चे मिट्टी से जुड़ना और मिट्टी से सृजन करना सीख जाएंगे, उनका जीवन आनंद और संवेदनशीलता से भर जाएगा। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, कला और लोक परंपराओं की जानकारी देना समय की आवश्यकता है।” कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि “आकार केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित एवं संवर्धित करने का एक सशक्त माध्यम है। वर्ष 2004 से लगातार आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम युवाओं में सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।”  उन्होंने बताया कि अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंजीयन शुल्क को 200 रुपये से घटाकर मात्र 100 रुपये किया गया। साथ ही दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों के लिए विशेष रियायत भी प्रदान की गई, जिससे समाज के सभी वर्गों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल सके। “आकार-2026” ने इस वर्ष पारंपरिक लोक कलाओं और आधुनिक तकनीक के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण किया। जहां एक ओर प्रतिभागियों ने टेराकोटा, जूट शिल्प, गोदना कला, रजवार भित्ति चित्र, मंडला एवं मांडना कला, भरथरी गायन और कथक जैसी विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया, वहीं दूसरी ओर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कला की नवीनतम तकनीकों से भी परिचित कराया गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि  बृजमोहन अग्रवाल ने सभी कला गुरुओं एवं प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने प्रशिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया। समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। सुवा नृत्य, कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन तथा लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि और कलाकारों की ऊर्जा ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। शिविर में प्रदेश के प्रतिष्ठित कला गुरुओं ने प्रशिक्षण प्रदान किया। एआई आर्ट का प्रशिक्षण  वल्कल्पति जेस्सी, क्ले एवं टेक्सचर आर्ट सु अलका हनवत, पेंटिंग  राकेश पुजारी, बोनसाई कला  अनिल वर्मा, भरथरी गायन  प्रांजल सिंह, कथक नृत्य  चिरंजीव हलधर, मंडला एवं मांडना आर्ट मती कविता यादव, रजवार भित्ति चित्र कला मती प्रतिमा डहरवाल, जूट एवं गोदना शिल्प मती कल्पना यादव, पारंपरिक गहना निर्माण एवं वुडन ट्राइबल आर्ट डॉ. शुभ्रा मिश्रा, लोकनृत्य एवं लोकसंगीत  तेजराम साहू, हस्तकढ़ाई एवं शिल्प डिजाइनिंग प्रेमलता सिंह, टेराकोटा  विमल फुटान, लिप्पन आर्ट एवं पचवाई कला निधि अग्रवाल, वाद्य यंत्र  रिखी क्षत्रीय तथा क्रोशिया कला का प्रशिक्षण सीमा रायजादा ने दिया। “आकार-2026” ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी है। 1281 प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता, अनुभवी कला गुरुओं का मार्गदर्शन और लोक संस्कृति से सराबोर प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को रंग, रचनात्मकता और परंपरा के सच्चे महाकुंभ में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन न केवल कला प्रशिक्षण का मंच बना, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का एक सफल प्रयास भी सिद्ध हुआ।

चांदी की पायल के लालच में बुजुर्ग महिला की हत्या, पुलिस जांच में जुटी

भोपाल राजधानी के देहात क्षेत्र के नज़ीराबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां बैरसिया क्षेत्र की रहने वाली एक 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला की गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोपी की बर्बरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने महिला के दोनों पैरों से चांदी की पायल निकालने के लिए कुल्हाड़ी से दोनों पैर काट दिए। सोमवार को जब पुलिस ने महिला का शव बरामद किया, तब वह निर्वस्त्र स्थिति में था, जिसके चलते पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच आने तक दुष्कर्म की आशंका से भी इनकार नहीं किया है। मामले में पुलिस ने मृतका के एक 40 वर्षीय भांजे दामाद को हिरासत में लिया है, जिसने शुरुआती पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपी ने गुमराह कर मोटरसाइकिल पर ले जाकर दिया वारदात को अंजाम पुलिस के अनुसार, बैरसिया थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली भगवती बाई (नाम परिवर्तित) के पति पेशे से किसान हैं। वह बीते 4 जून की दोपहर करीब 12 बजे अपने एक रिश्तेदार शेषपुरा गांव के 40 वर्षीय जसमन गुर्जर के साथ यह कहकर घर से निकली थीं। जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटीं, तो स्वजनों ने अपने स्तर पर तलाश शुरू की और रिश्तेदार से पूछताछ की, लेकिन असफल रहने पर 6 जून को स्वजनों ने बैरसिया थाने में महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तभी से पुलिस और स्वजन उनकी तलाश में जुटे थे। शेषापुरा के जंगलों में मिला निर्वस्त्र शव बैरसिया पुलिस संभाग की एसडीओपी वैशाली करहालिया ने बताया कि सोमवार शाम को नज़ीराबाद पुलिस को सूचना मिली कि शेषापुरा के जंगल में एक अज्ञात महिला का नग्न अवस्था में शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हुलिए के आधार पर लापता महिला के स्वजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया। स्वजनों ने मृतका की पहचान भगवती बाई के रूप में की। घटनास्थल का दृश्य बेहद खौफनाक था, महिला के दोनों पैर टखने के पास से कुल्हाड़ी से कटे हुए थे और पैरों में पहनी हुई चांदी की पायल गायब थी। दाएं हाथ का एक पंजा भी गायब था। शरीर पर कपड़े न होने के कारण पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों और फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। जांच के दौरान स्वजनों ने उसी 40 वर्षीय रिश्तेदार पर शक जताया, जिसके साथ बुजुर्ग महिला गई थीं। रिश्तेदार हिरासत में, लूटपाट के इरादे से की हत्या पुलिस ने घेराबंदी कर संदेही को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने पूरी साजिश का खुलासा किया कि वह 4 जून को महिला के घर गया था और उसने झांसा दिया कि वह उन्हें मोटरसाइकिल से उनके बेटे के पास छोड़ देगा। महिला ने उस पर भरोसा कर उसके साथ बाइक पर बैठ गईं। आरोपी उन्हें सीधे शेषापुरा के सूने जंगल में ले गया, जहां उसने पहले गला घोंटकर उनकी जान ली और फिर कुल्हाड़ी से पैर काटकर चांदी की पायल लूट ली। नज़ीराबाद पुलिस ने इस मामले में अपहरण, हत्या और लूट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मंगलवार को डॉक्टरों के एक विशेष पैनल ने मृतका के शव का पोस्टमार्टम किया। इनका कहना है 'आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। महिला का शव बिना कपड़ों के मिला है, इस कारण से पीएम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों में पुष्टि जरूरी है। अगर ऐसा कुछ होता है तो मामले में तत्काल प्रासंगिक धाराएं बढ़ाई जाएंगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस जघन्य अपराध में आरोपी के साथ कोई और मददगार तो शामिल नहीं था।' – वैशाली करहालिया, एसडीओपी बैरसिया पुलिस संभाग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जर्मनी के काउंसलेट जनरल हालियर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में जर्मनी के काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  हालियर का पुष्प-गुच्छ और विश्व धरोहर स्मारक सांची की फ्रेम युक्त तस्वीर भेंट कर स्वागत किया। हालियर ने भोपाल की सुंदरता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी जर्मनी की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी जर्मनी यात्रा सुखद रही थी। भारत और जर्मनी के प्राचीन काल से संबंध हैं जिन्हें प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में अब नया आयाम मिल रहा है। उद्योग और व्यवसाय जगत में दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं। ये संबंध अब अधिक प्रगाढ़ हो रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से ठोस कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी और अन्य भाषाओं में अनुवाद किया था। वे संस्कृत के भी विद्वान थे और स्वामी विवेकानंद की नैसर्गिक प्रतिभा के कायल थे। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो, इस दृष्टि से नवम्बर 2024 में म्यूनिख जर्मनी में इण्टरैक्टिव सेशन भी आयोजित किया गया था। मध्यप्रदेश जर्मनी के साथ दोतरफा सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जर्मन प्रतिष्ठानों द्वारा निवेश के साथ ही जर्मन भाषा के प्रशिक्षण के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जर्मन भाषा के शिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश की दृष्टि से जर्मन के औद्योगिक संस्थानों का मध्यप्रदेश में स्वागत है। गत 2 वर्ष में निवेश के कई प्रस्तावों को क्रियान्वित किया गया है। उन्होंने अब फिर से वह समय आया है जब विश्व की प्रमुख भाषाओं का अध्ययन किसी भी देश में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में जर्मन के शिक्षण- प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं अनेक उच्च शिक्षा संस्थाओं में की गई हैं। हमारे युवा भी भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाएं सीखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन कॉउंसलेट द्वारा पुन: जर्मनी आने के आमंत्रण पर कहा कि वे एक बार नहीं इससे अधिक बार जर्मनी आएंगे। निश्चित ही दोतरफा सहयोग का यह क्रम जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सतत विकास के क्षेत्रों में जर्मनी के साथ साझेदारी को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर स्थित इंडो-जर्मन टूल रूम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सफल औद्योगिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। बैठक में जर्मन ड्यूल एजुकेशन मॉडल के माध्यम से युवाओं के कौशल उन्नयन, मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और जर्मनी के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों एवं पेशेवरों के लिए नए अवसर विकसित करने के विषय में भी सार्थक चर्चा हुई। जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश आना अच्छा लगता है। वे यहां आकर प्रसन्न हैं। इंदौर और भोपाल में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से भेंट की है।  हालियर ने जानकारी दी कि इसी वर्ष जनवरी माह में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री  मोदी से जर्मन के फेडरल चान्सलर  फ्रेडरिक मर्ज ने भेंट की है।  मर्ज की भारत यात्रा का उद्देश्य भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना था। भारत की संस्कृति से जर्मन चांसलर प्रभावित हुए थे और उन्होंने अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने जर्मनी की ओर से विशेष स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।  हालियर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान और आत्मीयता के लिए आभार माना। इस अवसर पर जर्मन काउंसलेट सेंटर इंडिया के पदाधिकारी  अविनाश कश्यप ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर रहता है। हाल ही में नागदा में जर्मन सहयोग से संचालित संस्थान की समस्या का अविलंब समाधान किया गया है। उद्योग संचालन में आने वाली किसी भी कठिनाई को मध्यप्रदेश शासन की ओर से तत्काल दूर किया जाता है। इस अवसर पर एमपी औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड में प्रबंध निदेशक  चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे।  

“हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से AI आधारित सत्यापन और जियो-फेंसिंग तकनीक से सुनिश्चित हो रही वास्तविक उपस्थिति

भोपाल  स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकसित "हमारे शिक्षक" ऐप प्रदेश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम बना रहा है। ऐप के माध्यम से संचालित रियल-टाइम ई-अटेंडेंस प्रणाली एजुकेशन पोर्टल 3.0 से एकीकृत है, जिससे उपस्थिति संबंधी जानकारी तत्काल उपलब्ध होती है और प्रशासनिक निगरानी अधिक प्रभावी बनती है। विभाग की यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रशासनिक दक्षता तथा डेटा आधारित प्रबंधन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीकी नवाचार के माध्यम से विभाग शिक्षा प्रशासन को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ई-अटेंडेंस प्रणाली में AI आधारित Liveness Authentication तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके तहत कर्मचारी को उपस्थिति दर्ज करते समय पलक झपकाने अथवा मुस्कुराने जैसी लाइव गतिविधि करनी होती है। इससे प्रॉक्सी अथवा फर्जी उपस्थिति की संभावना समाप्त होती है और यह सुनिश्चित होता है कि उपस्थिति वास्तविक व्यक्ति द्वारा ही दर्ज की गई है। साथ ही, जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से कर्मचारी केवल अपने निर्धारित विद्यालय, कार्यालय अथवा प्रशिक्षण केंद्र की निर्धारित सीमा के भीतर से ही उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। इससे कार्यस्थल पर वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित होती है। इससे उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता और सुदृढ़ हुई है। यह सुविधा नियमित कार्यदिवसों के अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य विभागीय गतिविधियों के लिए भी उपलब्ध है। विभागीय अधिकारियों को जिला, विकासखंड, संकुल तथा विद्यालय स्तर तक उपस्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, विश्लेषण एवं रिपोर्ट प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनी है।  

बिजली कार्मिक करेंगे शिकायतों का तत्काल समाधान

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने बिजली उपभोक्‍ताओं की सुविधा को देखते हुए फ्यूज ऑफ कॉल (विद्युत अवरोध को दूर करना) समय पर अटेण्ड करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी के समस्त मैदानी अधिकारी अथवा कार्मिक अपने मोबाइल फोन को 24 घंटे चालू रखें एवं उपभोक्‍ताओं के कॉल अटेंड करें। इसके साथ ही क्षेत्रीय मुख्‍य महाप्रबंधक, संभागीय उप महाप्रबंधक एवं सभी मैदानी अधिकारी कॉल सेन्‍टर 1912, व्‍हाट्सऐप चैटबोट तथा स्‍थानीय वाट्सऐप ग्रुप एवं अन्‍य माध्‍यम से प्राप्‍त होने वाली विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्‍काल समाधान करना सुनिश्चित करें। सभी मैदानी अधिकारियों से कहा है कि वे सीआरएम पोर्टल पर सतत निगरानी रखें और जनप्रतिनिधि तथा उपभोक्‍ताओं से संवाद बनाये रखें। कंपनी ने कहा है कि ऑंधी, बारिश के दौरान एवं अन्य व्यवधान के कारण हुए बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज कराने के लिए कंपनी ने उपभोक्ताओं को अनेक विकल्प प्रदान किये हैं। अब उपभोक्ताओं के पास विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए कॉल सेन्टर के टोल फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 0755-2551222, मोबाइल ऐप ‘उपाय (UPAY) अथवा कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in का विकल्प मौजूद है। उपभोक्ता इन विकल्पों में से किसी भी एक विकल्प का उपयोग कर अपनी विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतें दर्ज कर आसानी से निराकरण करा सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए अपने मोबाइल में कंपनी के व्हाटसऐप नंबर 07552551222 को सेव कर मैसेज “Hi” लिखकर भेजें एवं आगामी संदेशों का पालन करें। इसी प्रकार प्ले स्टोर एवं ऐप स्टोर के माध्यम से उपाय ऐप को डाउनलोड कर एवं उसके उपयोग से भी अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकते है। कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर जाकर एलटी सर्विसेज पर क्लिक करें उसके उपरांत कंपलेंट पर क्लिक करें तथा आगामी निर्देशों का पालन करें अथवा 1912 पर कॉल कर आईवीआरएस के माध्यम से त्वरित शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा है कि बिजली कार्मिक विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें तथा कोई कार्मिक बिना परमीशन के अवकाश पर न जाए। यदि अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। आंधी, तूफान और बारिश के दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमेनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखें। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन/पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाए रखें। 

रायसेन के डायल-112 हीरोज खेलते-खेलते घर से निकले 03 वर्षीय गुम बालक को खोजकर परिजनों से मिलाया

भोपाल रायसेन जिले के थाना सुल्तानगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से गुम हुए 03 वर्षीय बालक को खोजकर सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई तलाश एवं सहायता से बालक सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका और परिजनों की चिंता दूर हुई। 08 जूनको राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सुल्तानगंज क्षेत्र अंतर्गत एक 03 वर्षीय बालक गुम हो गया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ सैनिक 227  द्वारका प्रसाद एवं पायलट  सुनील कुमार मौके पर पहुँचे और परिजनों से बालक के संबंध में जानकारी प्राप्त की। डायल-112 जवानों ने बालक का फोटो लेकर आसपास क्षेत्र में उसकी तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। लगातार प्रयासों के दौरान बालक तालाब के पास मिला, जहाँ से उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। डायल-112 टीम द्वारा आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालक खेलते-खेलते घर से निकल गया था और भटकते हुए तालाब के पास पहुँच गया था।अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।  

यूपीकॉस के माध्यम से एकीकृत और तकनीक आधारित होगी आउटसोर्स प्रणाली

लखनऊ  प्रदेश में आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और एकरूप बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) की भूमिका को और प्रभावी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को यूपीकॉस की कार्यप्रणाली एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए इसके माध्यम से आउटसोर्स व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, प्रक्रियाओं और मानदेय व्यवस्था में एकरूपता एवं पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि कर्मचारियों के हितों का संरक्षण हो और विभागों को भी सुव्यवस्थित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों से संबंधित एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के विकास कार्य की समीक्षा करते हुए इसे समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति, सत्यापन, अनुश्रवण तथा अन्य प्रक्रियाओं का केंद्रीकृत संचालन किया जाए, जिससे व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सके। बैठक में आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि एजेंसियों के चयन एवं संचालन से संबंधित सभी मानकों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट, मानकीकृत और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। इसके लिए तैयार की जा रही व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए, ताकि सभी विभागों को एक समान और सुव्यवस्थित प्रणाली उपलब्ध हो सके।