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कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 8वें वेतन आयोग को लेकर 14 लाख रुपये एरियर की अटकलें तेज

नई दिल्ली 8th Pay Commission: 8वें पे कमीशन ने एक बार फिर से लोगों को सुझाव देने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है। अब 15 जून तक सभी स्टेकहोल्डर्स अपना सुझाव 8वें वित्त आयोग को दे सकते है। पहले यह डेडलाइन 5 मार्च 2026 थी। उसके बाद डेडलाइन को बढ़ाकर 30 अप्रैल किया गया। फिर इसे आगे बढ़ाते हुए 31 मई कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में लगातार आगे बढ़ा जा रहे डेडलाइन की वजह से लग रहा है कि पे कमीशन अपनी रिपोर्ट जमा करने में अभी समय लेगा। ऐसे में कर्मचारियों के बीच देरी वजह से एरियर को लेकर भी खूब चर्चाएं हो रही हैं। 14 लाख रुपये तक मिलेगा एरियर? रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को 5 लाख रुपये से 14 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल पर होता है। 7वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसे में 8वां वित्त आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है। लेकिन पे कमीशन की रिपोर्ट तैयार ना होने की वजह से अभी भी कर्मचारियों को 7वें पे कमीशन के हिसाब से ही सैलरी मिल रही है। एक बार आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाए उसके बाद कर्मचारियों को 8वें पे कमीशन के हिसाब से सैलरी मिलेगी। क्योंकि पे कमीशन 1 जनवरी से प्रभावी है। इसलिए एक बड़ा अमाउंट एरियर के तौर पर कर्मचारियों को मिलेगा। कैसे तय होगा एरियर का भुगतान सबकुछ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा। 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है उसी के आधार पर आगे का फैसला होगा। 7वें वित्त आयोग के दौरान 2.57 फिटमेंट फैक्टर रखा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 8वें पे कमीशन के दौरान 3.68 फिटमेंट फैक्टर रह सकता है। अगर यह फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर 66240 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। मंथली सैलरी में सरकारी कर्मचारियों के 48240 रुपये की बढ़ोतरी होगी। अगर 10 महीने का एरियर देखें तो यह 482400 रुपये के स्तर पर पहुंचता है। कैबिनेट सचिव के पोस्ट के अधिकारी का बेसिक पे इस समय 7वें पे कमीशन के अनुसार 482400 रुपये है। अगर 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तब की स्थिति में बेसिक पे बढ़कर 920000 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। मंथली सैलरी 670000 रुपये बढ़ जाएगी। ऐसे में महज 2 महीने का ही एरियर 1340,000 रुपये हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.28 से 2.86 फिटमेंट फैक्टर रखा जा सकता है।

BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा इंदौर, कृषि क्षेत्र के मुद्दों पर जुटेंगे 20 देशों के प्रतिनिधि

इंदौर  मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक बेहद बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन का मुख्य केंद्र बनने जा रही है। जी-20 शिखर सम्मेलन और प्रवासी भारतीय दिवस की शानदार सफलता के बाद अब इस साफ-सुथरे शहर को 'ब्रिक्स' (BRICS) देशों की बेहद महत्वपूर्ण कृषि बैठक की मेजबानी करने का गौरव मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय समागम में भारत सहित दुनिया के 11 प्रमुख सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और केंद्रीय मंत्री शामिल होने जा रहे हैं। आपको बता दें कि यह आयोजन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि ब्रिक्स देशों के पास पूरी दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि मौजूद है। ऐसे में यह शक्तिशाली समूह खेती-किसानी से जुड़ी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श करेगा। सोमवार से ही विदेशी मेहमानों और राजनयिकों का इंदौर आगमन शुरू हो जाएगा। बैठक के साथ-साथ इन विदेशी प्रतिनिधियों को मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से रूबरू कराने की भी विशेष तैयारी की गई है। इसके तहत उनके भ्रमण कार्यक्रम में इंदौर के मशहूर खान-पान केंद्र 'छप्पन दुकान', ऐतिहासिक 'राजवाड़ा पैलेस' और पारंपरिक 'ग्रामीण हाट-बाजार' जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया है। यह महा-मंथन एक ऐसे नाजुक समय में होने जा रहा है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज), वैश्विक खाद्य संकट और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए कृषि उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर व सीमित उपयोग पर जो भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे, वे आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि रणनीतियों और नीतियों को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। तकनीक, डिजिटल खेती और किसानों की आय पर रहेगा मुख्य फोकस आगामीआज 9 जून से शुरू होने जा रही ब्रिक्स कृषि कार्य समूह (AWG) की इस तीन दिवसीय बैठक में कई तकनीकी और नीतिगत विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना, बदलते मौसम का फसलों पर पड़ने वाला असर, कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का विस्तार और किसानों की आर्थिक स्थिति व आय को मजबूत करने के उपाय इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेंगे। बदलते दौर को देखते हुए इस बैठक में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक विषयों पर विशेष मंथन किया जाएगा। इसके तहत डिजिटल कृषि (डिजिटल एग्रीकल्चर), प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा आधारित फसल प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर बात होगी। वैज्ञानिक और नीति-निर्धारक यह साझा रणनीति तैयार करेंगे कि किस तरह इन तकनीकों के दम पर कम से कम संसाधनों, कम पानी और कम लागत में अधिक से अधिक पैदावार हासिल की जा सके। इसके अलावा, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान के बीच खेती को टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और घाटे से उबारकर लाभकारी बनाने के लिए सभी सदस्य देश अपने-अपने सफल अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। ब्रिक्स समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं  1. खाद्य सुरक्षा, पोषण-किसानों की आजीविका 2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग 3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि 4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी  42 फीसदी खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा- ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन गया है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68  प्रतिशत कृषि और करीब 42 फीसदी खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है। अधिकारियों ने अब तक आठ बैठकें की संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी हर नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी। चार वर्गों पर मुख्य फोकस छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों-खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है। भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका इस मंच पर होने वाला सहयोग पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है । भारत इससे पहले भी साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है, जिसके दौरान 2016 में 'ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच' जैसी बड़ी पहल शुरू की गई थी। 'हमारी नीति में छोटे जोत वाले किसान' शिवराज सिंह चौहान ने कहा अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी प्रत्येक नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इस बार इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत … Read more

लंबे बिजली कट पर अब भरपाई करेगी कंपनी, 4 घंटे से अधिक बाधित रही सप्लाई तो मिलेगा हर्जाना

भोपाल  मध्य प्रदेश विद्युत विभाग ने जबलपुर में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। शहर में 4 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों का पता लगाने के बाद बिजली विभाग मुआवजे की राशि निर्धारित करेगा। प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है। अब खुद मिलेगा मुआवजा सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा। अभी ऐसी स्थिति अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है। इस संशोधन से स्मार्ट मीटर दिलाएगा मुआवजा नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा। ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी। बिजली गुल हो तो ये रखें ध्यान बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है। बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम? विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा। खराबी का प्रकार  शहर के लिए समय सीमा  ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा  सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे 4 घंटे ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना 12 घंटे 12 घंटे बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना 2 घंटे 4 घंटे यदि आपके इलाके में बिना किसी पहली सूचना के 4 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति  बंद रहती है, तो आप अभी भी उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं। बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें। बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें। अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता, उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा। नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।

बारिश ने बढ़ाई रफ्तार, 12 राज्यों में मेहरबान हुआ मॉनसून; यूपी-बिहार में भी बदलेगा मौसम

नई दिल्ली दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों तक पहुंच चुका है। केरल से प्रवेश करने के बाद कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में भी मॉनसून का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में इन दिनों हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हलाांकि मौसम विभाग ने एक राहत की खबर सुनाई है। 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी पश्चिमी विक्षोभ ऐक्टिव हो सकता है। ऐसे में दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में भी बारिश का अनुमान है। राजस्थान में गिरे ओले राजस्थान के श्रीगंगानगर में धूलभरी आंधी के बाद बारिश शुरू हुई और फिर ओलावृष्टि होने लगी। मौसम विभाग के मुताबिक 8 जून को भी कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई है। करवट लेने वाला है मौसम दिल्ली एनसीआर में फिलहाल 9 और 10 जून को हीटवेव जारी रहने का अनुमान है। 10 जून से मौसम करवट ले सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो दिनों में ही दिल्ली एनसीआर का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। इन राज्यों में मूसलाधार बारिश मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की वजह से कर्नाटक और केरल में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर में भी झमाझम बारिश हो रही है। मॉनसून त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड, मिजोरम तक पहुंच चुका है। यहां कई जगहों पर भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर कर लेगा। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में बारिश जारी रहेगी। वहीं ओडिशा, बिहास, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी आंधी के साथ बारिश हो सकती है। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 10 जून को केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार में भी तूफान के साथ बारिश का अनुमान है। यूपी में कब होगी बारिश उत्तर प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हीटवेव का असर देखा जा रहा है। यहां 9 और 10 जून को भी लू जारी रहेगी। वहीं 10 जून के बाद बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी में आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 8 और 9 जून को हल्की बारिश हो सकती है। 11 जून को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद उत्तराखंड में बारिश की गितिविधियां तेज होंगी। बिहार का मौसम बिहार में भी 10 जून के बाद ही बारिश का अनुमान लागाय गया है। 11 जून को भी कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। गर्मी की लिहाज से फिलहाल दो दिन भारी बताए गए हैं। झारखंडा में 8 जून को भी 40 से 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। साथ ही हल्की बारिश हो सकती है।

वोट प्रतिशत के विश्लेषण ने बदली तस्वीर! AAP की सीटें घटने के संकेत, कांग्रेस और BJP को बढ़त की उम्मीद

चंडीगढ़  पंजाब में हाल ही में हुए 8 नगर निगमों और 75 नगर कौंसिलों के चुनाव के पार्टीवाइज वोटिंग के आंकड़े सामने आ गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा वोट % सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को मिला है। मगर, यह 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम है।  वोटिंग से ये भी स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस अभी भी AAP के मुकाबले वोटरों के बीच मजबूत विकल्प है। जिन क्षेत्रों में निगम और कौंसिल के चुनाव हुए, उनमें 68 विधानसभा सीटें आती हैं। अगर कांग्रेस को इन निकाय चुनावों में मिले वोट % को देखें तो उन्हें फायदा हो सकता है। इसी तरह भाजपा को भी शहरों में बढ़त मिलती नजर आ रही है। वहीं अकाली दल फिर फिसड्‌डी साबित हुआ है। इसके बीच चौंकाने वाली बात ये है कि अगर अकाली दल और भाजपा आपस में गठजोड़ कर लें तो 2027 के चुनाव में कांग्रेस की जगह वह AAP को टक्कर दे सकती है। निकाय चुनाव में मिले वोट % से 2027 के लिए क्या संकेत:- एंटी-इन्कम्बेंसी भी बिगाड़ेगी आप का गणित 2022 में AAP ने 42% से ज्यादा वोट शेयर के साथ एकतरफा चुनाव जीता था। 117 में से 92 सीटें AAP को मिलीं थीं। वहीं इन चुनाव वाले क्षेत्रों में आप ने 68 में से 54 सीटें जीती थीं। अब 2026 के स्थानीय चुनावों में AAP का वोट शेयर बड़े शहरों में 36.80% और छोटे शहरों में 35.24% पर आ गया है। वोट शेयर का यह 6% से 7% का नुकसान करीब 20 से 25 सीटों का नुकसान कर सकता है। 2022 में कांग्रेस सत्ता में थी और कांग्रेस के खिलाफ जो एंटी-इन्कम्बेंसी थी, उसका फायदा AAP को मिला था, वह अब 2027 में AAP के खिलाफ जा सकता है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप का कहना है कि शहरी और अर्ध-शहरी सीटों पर जहां त्रिकोणीय मुकाबला है, वहां विपक्ष का वोट बढ़ना AAP के जीत के मार्जिन को खत्म कर सकता है। निकाय चुनाव में सत्ता पक्ष को हमेशा ज्यादा वोट मिलते हैं जबकि विधानसभा चुनाव में एंटी इन्कम्बेंसी भी आप को झेलनी पड़ेगी। ऐसे में आप की सीटें इससे भी कम हो सकती है। आप का वोट शेयर खिसकने से कांग्रेस का फायदा पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि नगर कौंसिल के चुनावों में कांग्रेस का 21.89% वोट शेयर यह दिखाता है कि उसका कैडर और पारंपरिक वोटर अभी भी जमीन पर मौजूद है। अकाली दल के कमजोर होने का सीधा फायदा ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कांग्रेस को मिल रहा है। जो लोग AAP सरकार से नाराज होंगे, उनके लिए कांग्रेस अभी भी सबसे बड़ा मुख्य विकल्प बनकर उभर रही है। इसके अलावा सरकार की एंटी इन्कम्बेंसी का फायदा भी कहीं न कहीं कांग्रेस को मिलेगा। ऐसे में कांग्रेस की सीटें 20 से ज्यादा हो सकती हैं। भाजपा शहरी क्षेत्रों में लगातार कर रही ग्रोथ पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि नगर निगमों यानि बड़े शहरों में भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिन आठ नगर निगमों में चुनाव हुआ है, वहां पर 2021 के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर लगभग दो गुना हो गया। नगर निगमों में वोट शेयर 9 फीसदी से बढ़कर 17.58 फीसदी हो गया। इन 8 नगर निगम सीटों में से भाजपा 5-6 सीटें सीधे जीत सकती है, और नगर कौंसिल के दायरे में आने वाली 60 सीटों में से भी 3-5 सीटों पर चौंकाने वाले नतीजे दे सकती है। कुल मिलकार कर 68 सीटों में से 8 से 11 सीटें जीत सकती है। वहीं सरकार की एंटी इन्कंबेंसी का फायदा भी भाजपा को मिल सकता है। इसके अलावा भाजपा ने छोटे शहरों में बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल करना शुरू कर दिया है। इन चुनावों में भी बड़े चेहरों का फायदा भाजपा को मिला है। भाजपा ने पहली बार अबोहर नगर निगम जीता है। शहरी क्षेत्रों में शिरोमणि अकाली दल ग्राफ डाउन अकाली दल का वोट शेयर शहरों में 9% और कस्बों में 11% पर आ गया है। इस वोट शेयर के साथ विधानसभा सीट जीतना बेहद मुश्किल होता है। शिअद केवल उन 1 या 2 पारंपरिक सीटों पर ही सिमट कर रह जाएगी। शिअद का कोर वोटर पंथक वोट माना जाता रहा है अब वो भी पार्टी से कटता नजर आ रहा है। ऐसे में शहरी क्षेत्रों में अकाली दल का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। SAD-BJP से गठबंधन हुआ तो मिलेगी मजबूती शिअद और भाजपा गठबंधन होता है तो आंकड़े कुछ और हो जाएंगे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि इन निकाय चुनावों में भाजपा और अकाली दल का वोट प्रतिशत जोड़ दिया जाए तो इनकी स्थिति और बेहतर हो जाती है। उनका कहना है कि शिअद को नगर निगम में 8.98 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा को 17.58 प्रतिशत वोट मिले। दोनों का वोट प्रतिशत जोड़ा जाए तो यह 26.5 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है। जो कि कांग्रेस के वोट प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह नगर काैंसिल में भी है। शिअद को 11.80% और भाजपा को 9.46% वोट मिले हैं जो कि मिलाकर 21.5 प्रतिशत के आसपास हो जाता है जो कि कांग्रेस के लगभग बराबर है।