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लंबे बिजली कट पर अब भरपाई करेगी कंपनी, 4 घंटे से अधिक बाधित रही सप्लाई तो मिलेगा हर्जाना

भोपाल  मध्य प्रदेश विद्युत विभाग ने जबलपुर में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। शहर में 4 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों का पता लगाने के बाद बिजली विभाग मुआवजे की राशि निर्धारित करेगा। प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है। अब खुद मिलेगा मुआवजा सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा। अभी ऐसी स्थिति अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है। इस संशोधन से स्मार्ट मीटर दिलाएगा मुआवजा नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा। ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी। बिजली गुल हो तो ये रखें ध्यान बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है। बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम? विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा। खराबी का प्रकार  शहर के लिए समय सीमा  ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा  सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे 4 घंटे ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना 12 घंटे 12 घंटे बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना 2 घंटे 4 घंटे यदि आपके इलाके में बिना किसी पहली सूचना के 4 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति  बंद रहती है, तो आप अभी भी उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं। बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें। बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें। अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता, उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा। नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।

बिजली संकट से परेशान ग्रामीण सड़क पर उतरे, सीहोर में विरोध प्रदर्शन से यातायात प्रभावित

अमलाहा. बीते 15 दिनों से लगातार रात्रि में की जा रही बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अमलाहा डीसी पहुंचे, जहां उन्होंने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली काटे जाने से आमजन, किसान और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और तत्काल रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में नई और पुरानी चंदेरी के ग्रामीणों ने यह अनोखा प्रदर्शन किया। हाथों में मशालें थामे लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पटाखे फोड़कर अपना विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच रात में 2 से 3 घंटे तक लगातार दो से तीन बार बिजली काटी जा रही है। पेयजल संकट और मच्छरों का बढ़ा प्रकोप रात के समय बिजली गुल रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, बिजली के अभाव में पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं। इस कारण गांवों में पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहरों को 24 घंटे बिजली, गांवों में अंधेरा प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन शहरों को 24 घंटे बिजली देकर 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दे रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को अंधेरे में रखा जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि प्रदेश में बिजली का कोई बड़ा संकट है, तो सरकार को औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की बिजली काटनी चाहिए। बिजली संकट का खामियाजा गरीब किसानों और ग्रामीणों को नहीं भुगतना चाहिए। सीएम से हस्तक्षेप की मांग, आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रात्रिकालीन बिजली कटौती तुरंत बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं। यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

Punjab में बिजली संकट पर काबू, पावर कट्स खत्म करने के आदेश जारी

जालंधर. पंजाब में बीते कई दिनों से बिजली के कट लग रहे हैं। विभाग द्वारा मेंटेनेंस कार्यों को लेकर कई शहरों में बिजली कटों का ऐलान किया गया था। वहीं इसी बीच बड़ी खबर सामने आई है कि बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस को लेकर घोषित किए गए पावट कटों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जारी नए आदेशों में कहा गया है कि 11 kV और इससे ऊपर के किसी भी काम (PTW) की इजाजत बिना जोनल दफ्तर की लिखित मंजूरी के 30 अप्रैल तक नहीं दी जाएगी। सूत्रों से जानकारी मिली है कि विभान ने पहले से तय सभी शटडाउन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। विभाग ने इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश देते हुए कहा कि मेंटेनेंस के काम को तुरंत रोका जाए और जल्द से जल्द बिजली सप्लाई बहाल की जाए। बता दें कि इससे पहले विभाग द्वारा जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला सहित अन्य कई शहरों में बिजली कटौती के आदेश जारी किए थे।

हरियाणा में पावर कट पर जीरो टॉलरेंस, 4 घंटे से अधिक कटौती पर अफसरों पर गिरेगी गाज

चंडीगढ़. हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने गत छह माह के दौरान बिजली आपूर्ति में आए व्यवधान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बिजली आपूर्ति की समय सीमा में बांध दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में अधिकतम दो घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में संबंधित बिजली अधिकारियों विशेष रूप से अधीक्षण अभियंता (एसई) जिम्मेदार होंगे, जिनके विरुद्ध निलंबन तक की कार्रवाई संभव होगी। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत डिफॉल्टर बिजली उपभोक्ताओं से वसूली में ढिलाई बरतने पर विज ने कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और यमुनानगर के बिजली अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। चंडीगढ़ में बिजली अधिकारियों की बैठक लेते हुए अनिल विज ने कहा कि राज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है, इसलिए प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी भवनों में सोलर सिस्टम तथा पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले सर्कल को अवॉर्ड दिया जाएगा। बैठक में ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ तथा उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक बिक्रम सिंह की मौजूदगी में अनिल विज ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद लंबे समय से रिक्त रहने के बावजूद विभागीय कार्यों में कोई बड़ी बाधा नहीं आई है, इसके लिए अधिकारी सराहना के पात्र हैं। बिजली मंत्री ने ट्रांसफार्मरों के त्वरित प्रतिस्थापन पर बल देते हुए निर्देश दिया कि मरम्मत कार्यों के दौरान मेंटीनेंस स्टाफ के पास आवश्यक उपकरण, सुरक्षा साधन एवं ट्रांसफार्मर ट्राली उपलब्ध होनी चाहिए। आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड ने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएंगे। विज ने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में स्थापित होने वाले सभी बिजली सबस्टेशन जलभराव वाले क्षेत्रों में न बनाए जाएं अथवा उन्हें संभावित जलस्तर से कम से कम दो फुट ऊंचाई पर स्थापित किया जाए। इसके लिए संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। सबस्टेशनों के रखरखाव एवं अपग्रेडेशन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। वर्षा ऋतु से पूर्व बिजली लाइनों के समीप स्थित पेड़ों की छंटाई सुनिश्चित करने के आदेश देते हुए विज ने कहा कि आंधी-तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसकी सभी अधिकारियों को चिंता करनी होगी। बिजली उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाने के लिए विज ने एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। इस पोर्टल पर पूरे राज्य में उपयोग होने वाले उपकरणों का विवरण उपलब्ध रहेगा। बिजली चोरी के सभी मामले तीन माह में न्यायालय में होंगे पेश बिजली चोरी के मामलों की समीक्षा करते हुए अनिल विज ने निर्देश दिए कि अगले तीन माह में सभी लंबित मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। चालू वर्ष में 179 लोगों को बिजली चोरी के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2024-25 में 39 हजार 529 तथा 2025-26 में 56 हजार 953 एफआईआर दर्ज की गई हैं। विजिलेंस विंग ने आश्वासन दिया कि सभी मामलों को शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

गर्मी में पावर कट से बचने की बिजली कंपनियों ने की खास तैयारी

पटना. बिहार में इस बार लोगों को गर्मी के दौरान बिजली से जुड़ी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी. बढ़ती गर्मी और संभावित बिजली की मांग को देखते हुए ऊर्जा विभाग ने आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त रखने की खास रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की संचालन और रखरखाव समीक्षा बैठक हुई. ऊर्जा सचिव ने क्या आदेश दिया? जानकारी के मुताबिक, बैठक में गर्मियों के लिए बिजली प्रबंधन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए. बैठक में ऊर्जा सचिव ने कहा कि पीक लोड के दौरान भी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिले, इसके लिए ट्रांसफॉर्मरों, फीडरों और ग्रिड उपकेंद्रों की पूर्व-रखरखाव योजना पर सख्ती से अमल किया जाए. हॉट-लाइन मेंटेनेंस की गति तेज करने, कमजोर और दोषपूर्ण लाइनों की पहचान कर तत्काल मरम्मत और स्टैंडर्ड संचालन प्रक्रिया के शत-प्रतिशत पालन करने का आदेश दिया गया. इन्हें किया गया अलर्ट इसके साथ ही उन्होंने यह क्लियर किया कि गर्मी में फॉल्ट और ब्रेकडाउन की स्थिति न्यूनतम रखने के लिए फील्ड लेवल पर टीमें अलर्ट मोड में रहें. ऊर्जा सचिव ने बिजली लाइनों पर कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों के अनिवार्य उपयोग पर भी जोर दिया. बैठक में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने गर्मियों के लिए तैयारियों की जानकारी दी. बढ़ सकता है बिजली का बोझ जानकारी के मुताबिक, बिहार में लोगों पर बिजली बिल का बोझ बढ़ सकता है. 1 अप्रैल 2026 से बिजली की नई दरें लागू हो सकती हैं. बिहार विद्युत विनियामक आयोग को राज्य की दोनों बिजली कंपनियों (साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन) की तरफ से टैरिफ प्रस्ताव भेजा गया है. इसके साथ ही बिजली के रेट में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं.

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में बिजली संकट: चार दिन से हजारों घरों में अंधेरा

बर्लिन   जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हजारों घरों में बिजली गुल हो गई है। ग्रिड पर हमले के बाद दक्षिण-पश्चिम बर्लिन में हजारों घरों के साथ-साथ सुपरमार्केट, दुकानें, रेस्टोरेंट और दूसरे बिजनेस क्षेत्रों में बिजली ना होने की वजह से अंधेरा छा गया। हालांकि, बिजली मरम्मत का काम जारी है, लेकिन कई इलाकों में तमाम घर बिना बिजली के ही रहे। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, जर्मन राजधानी के कुछ हिस्से लगातार चौथे दिन अंधेरे में रहे। स्ट्रोमनेट्ज बर्लिन ने कहा कि स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:45 बजे तक, निकोलासी, जेहलेंडोर्फ, वानसी और लिक्टरफेल्ड के इलाकों में करीब 24,700 घर और 1,120 कारोबार अभी भी प्रभावित थे। ऑपरेटरों ने अनुमान लगाया था कि गुरुवार दोपहर तक पूरी ग्रिड को पूरी तरह से ठीक करके बिजली सेवा फिर से शुरू कर दी जाएगी। लेकिन ग्रिड को ठीक करने में काफी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।  सुबह एक पावर स्टेशन तक जाने वाले केबल में आग लगने के बाद करीब 45,000 घरों और 2,200 से ज्यादा कारोबारियों की बिजली चली गई। स्ट्रोमनेट्ज बर्लिन ने कहा कि प्रभावित जिलों के पांच अस्पतालों में सभी सेवाएं रविवार सुबह से फिर से शुरू कर दी गई हैं। दूसरी ओर, राजधानी बर्लिन में बर्फबारी और कम तापमान की वजह से लोगों को घरों के अंदर जमा देने वाली ठंड का सामना करना पड़ रहा है। निकोलासी की रहने वाली निवासी क्रिस्टियन ने कहा कि उनके अपार्टमेंट का थर्मामीटर 11.5 डिग्री सेल्सियस दिखा रहा था। उन्होंने कहा, "यह तो सब जानते हैं कि आपको थोड़ी ठंडी जगह पर सोना चाहिए। लेकिन इतनी ठंड?" खुद को वल्कनग्रुप कहने वाले एक समूह ने ऑनलाइन पोस्ट करके हमले की जिम्मेदारी ली और कहा कि उसने लिक्टरफेल्ड में एक गैस पावर स्टेशन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को "सफलतापूर्वक नुकसान पहुंचाया।" बर्लिन के मेयर, काई वेगनर ने मंगलवार को एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में इस घटना को एक आतंकवादी हमला बताया। वेगनर ने कहा, "हमने इस शहर में एक आतंकी हमला देखा है। एक वामपंथी आतंकी हमला। मैं दोहराना चाहता हूं: यह कोई मामूली आगजनी का हमला नहीं था, न ही यह तोड़फोड़ थी। यह एक आतंकी हरकत थी।" जर्मन न्यूज एजेंसी डीपीए ने बताया कि जर्मनी का फेडरल प्रॉसिक्यूटर ऑफिस आतंकी हमले के शक में ही इस मामले की जांच कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें आतंकी संगठनों में मेंबरशिप, तोड़फोड़, आगजनी और पब्लिक सेवा में रुकावट जैसे अपराधों का शक है। बर्लिन के इंटीरियर सेनेटर आइरिस स्प्रेंगर ने कहा, "हम अपने पावर ग्रिड पर एक वामपंथी आतंकी हमले के बारे में बात कर रहे हैं, जिसे बहुत ध्यान से प्लान किया गया था और पूरी तरह आपराधिक मंशा से किया गया था।"