samacharsecretary.com

विशेषज्ञों ने साइबर एवं फॉरेंसिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी

लखनऊ  योगी सरकार अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। इसी लिए अपराधों के खुलासे के लिए वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा दे रही है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ (यूपीएसआईएफएस) में मंगलवार को 48 प्रशिक्षु अधिकारियों ने परिभ्रमण किया। ये सभी डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में प्रान्तीय सिविल सेवा (स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, राज्य कर विभाग तथा कोषागार विभाग) के प्रशिक्षणरत अधिकारी हैं। इन्हें संस्थान के विषय विशेषज्ञों द्वारा साइबर एवं फॉरेंसिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गयी। प्रशिक्षु अधिकारियों ने ड्रोन तथा डीएनए लैब के कार्य और उनकी बारीकियों को समझा।  इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी ने सभागार में उपस्थित अधिकारियो को संबोधित करते हुए कहा कि यह संस्थान वर्तमान में साइबर सुरक्षा तथा फॉरेंसिक विषय में विभिन्न संस्थानों को तकनीकी दक्षता आज निपुण कर रहा है। उन्होंने साक्ष्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी केस में साक्ष्य ही अपराधी को सजा तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अभी आप लोगों का प्रशिक्षण का काल है जितना जिज्ञासु होगें उतना ही नई-नई चीजों को सीख पायेगें। उन्होंने कहा कि साइबर युग में अपराध के आयाम बदल रहे हैं। पहले फिजिकल अपराध होते थे लेकिन अब डिजिटल दुनिया में अपराध हो रहे है ऐसे में तकनीक के बारे मे हम सभी को अधिक से अधिक जानकारी रखनी होगी।   कार्यक्रम के अंत में उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने सभागार में उपस्थित समस्त अधिकारियों का अभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया। इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना, उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, फेकल्टी डॉ. मनीष राय, डॉ पलक,  उप निरीक्षक आर शैलेन्द्र सिंह एवं कार्तिकेय सहित अन्य उपस्थित रहे।

योगी सरकार की सख्ती से नकल माफिया और सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने वालों पर कार्रवाई तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा के दूसरे दिन मंगलवार को भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी जारी रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और नकलविहीन बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार नजर रखी गई। इसी क्रम में विभिन्न जिलों और सोशल मीडिया माध्यमों पर भ्रामक प्रचार, प्रतिरूपण और अन्य आपराधिक गतिविधियों के मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर संचालित "टारगेट सेलेक्शन" चैनल द्वारा भर्ती परीक्षा को लेकर भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित किए जाने को गंभीरता से लिया है। इस मामले में लखनऊ कमिश्नरेट के हुसैनगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, अलीगढ़ के रतनप्रेम डीएवी बालिका इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी फर्जी आधार कार्ड के सहारे दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा देता हुआ पकड़ा गया। जांच में पता चला कि विकास कुमार नामक युवक हरिओम कुमार के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। संदेह होने पर की गई जांच में मामला उजागर हुआ, जिसके बाद उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। भर्ती बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9454457951 पर प्राप्त शिकायत के आधार पर फेसबुक पर उपनिरीक्षक सीधी भर्ती-2025 को लेकर भ्रामक और तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने वाले यूजर "तनिष्क चौधरी" के खिलाफ भी हुसैनगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसके अतिरिक्त इंस्टाग्राम आईडी "inderjeet_gautam_007" से भर्ती परीक्षा के संबंध में भ्रामक वीडियो पोस्ट किए जाने का मामला भी सामने आया है। इस संबंध में आजमगढ़ के कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नकल, फर्जीवाड़ा, प्रतिरूपण तथा सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। पुलिस भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक संदेश, अफवाह या अवैध गतिविधि से दूर रहें और पूरी निष्ठा के साथ परीक्षा की तैयारी करें।

हर जिले तक पहुंचेगा एकीकृत रोजगार मॉडल, युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक मिलेगी सुविधा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (एसवीबीपीईआईजेड) परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति का प्रदेश है। तेजी से बढ़ते निवेश, विस्तार ले रहे उद्योगों और बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य को ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से सीधे जोड़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की व्यवस्था उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि युवाओं को कौशल प्राप्त करने के बाद रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना को केवल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग और उद्यमिता के समेकित इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एवं एम्प्लायमेंट जोन की अवधारणा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। बैठक में नौ क्षेत्रीय जोनों की प्रस्तावित हब एवं स्पोक संरचना प्रस्तुत की गई। प्रत्येक जोन में एक उत्कृष्टता केंद्र (हब) तथा उससे जुड़े क्षेत्रीय कौशल विकास केंद्र (स्पोक) विकसित किए जाएंगे। हब स्तर पर उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और कैरियर सेवाओं का संचालन होगा, जबकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम स्पोक केंद्रों के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। परियोजना के तहत कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक सुविधाएं, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता तंत्र, व्यावसायिक सेवाएं, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम तथा उद्यमिता सहायता सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी। इससे युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार प्राप्त करने और स्वयं का उद्यम स्थापित करने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध होगी। बैठक में बताया गया कि परियोजना के प्रथम चरण के लिए मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ तथा कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध है। अन्य जिलों के लिए भी भूमि की उपलब्धता हो रही है।  बैठक में बताया गया कि परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण एवं प्रमाणन उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक रोजगार मिलान (जॉब मैचिंग) का लक्ष्य रखा गया है, जबकि प्रशिक्षित युवाओं के लिए 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक नए एमएसएमई उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने तथा लगभग 50 हजार गिग वर्कर्स को औपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में बताया गया कि सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ITE) और उसकी नॉलेज पार्टनर संस्था ITEES के अनुभवों का उपयोग किया जाएगा। यह संस्था विश्व के अनेक देशों में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रणालियों के विकास में सहयोग कर चुकी है। पाठ्यक्रम विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यांकन, नेतृत्व विकास और प्रशिक्षण अवसंरचना के निर्माण में उसकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि उपलब्धता, संस्थागत संरचना, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा क्रियान्वयन मॉडल से संबंधित प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए परियोजना को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए।

प्रगतिशील किसान पुरेंद्र कुमार यादव ने अपनाई आधुनिक तकनीक, धान की खेती में मिले उत्साहजनक परिणाम

रायपुर कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का बढ़ता उपयोग किसानों की आय और उत्पादकता में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। दुर्ग जिले के ग्राम डूंडेरा के प्रगतिशील किसान  पुरेंद्र कुमार यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने धान की खेती में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर न केवल उत्पादन में सुधार हासिल किया, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। पौधों की वृद्धि और उत्पादन की गुणवत्ता में हुए सकारात्मक सुधार           यादव ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी फसल में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप फसल को संतुलित एवं प्रभावी पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला। उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल अधिक स्वस्थ और मजबूत दिखाई दी, जिसका सीधा लाभ उपज पर भी पड़ा। नैनो डीएपी और यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक और किफायती          उन्होंने बताया कि पारंपरिक बोरा बंद उर्वरकों की तुलना में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक और किफायती साबित हुआ। अत्यंत कम मात्रा में उपयोग किए जाने वाले इन उर्वरकों से फसल को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से प्राप्त हुए, जिससे उर्वरक लागत में कमी आई। साथ ही परिवहन, भंडारण और श्रम संबंधी खर्चों में भी बचत हुई। नैनो उर्वरक खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण          धान की फसल में अपेक्षा से बेहतर परिणाम मिलने पर  यादव बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि नैनो उर्वरक खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे अन्य किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाने और खेती में नवाचार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। किसानों के लिए भरोसेमंद साथी साबित होंगे           पुरेंद्र कुमार यादव कहते हैं, “नैनो डीएपी और नैनो यूरिया आने वाले समय में किसानों के लिए भरोसेमंद साथी साबित होंगे। इससे खेती की लागत कम होती है, फसल को बेहतर पोषण मिलता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। मैं सभी किसान भाइयों से आग्रह करता हूं कि वे भी इन उन्नत उर्वरकों का उपयोग कर इसके लाभ प्राप्त करें।” किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ          उल्लेखनीय है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। जिले में बढ़ते उपयोग के साथ किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। यह पहल खेती को पर्यावरण अनुकूल, संसाधन-संरक्षण आधारित और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक हुई

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने संस्थान के शैक्षणिक, शोध, छात्र कल्याण एवं अधोसंरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने जापान सहित भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों वाले देशों की भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा वे विदेशों में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान को इस दिशा में नवाचारपूर्ण पहल करने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के लिए स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्याप्त शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया तथा कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त परिसर भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री  परमार ने संस्थान परिसर में वृहद स्तर पर नीम, बरगद, पीपल, जामुन एवं आम जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान के हरित वसुंधरा क्लब द्वारा लुप्तप्राय वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण एवं रोपण के संकल्प की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया। मंत्री  परमार ने संस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत शोधपत्रों के संकलन एवं संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन भी किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक में संस्थान के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार 503 रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही संस्थान के प्रत्येक संकाय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संचालक पदक प्रदान किए जाने तथा सामान्य परिषद के अध्यक्ष के नाम से विशेष पदक स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया। परिषद ने प्रत्येक संकाय के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक शुल्क में राहत प्रदान करने के प्रस्ताव को भी सहर्ष स्वीकृति दी। बैठक में उच्च स्तरीय शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फोरियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोप (FTIR) उपकरण के क्रय के लिये 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। साथ ही विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा सामान्य परिषद को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026 में भारतीय वाणिज्य परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में संस्थान द्वारा सेज विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर परिषद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी सहमति प्रदान की। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा  अनिल पाठक, डॉ दिवा मिश्रा, माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, सीए  संजय वास्तव, डॉ. शैलजा दुबे, डॉ. महिपाल सिंह यादव, डॉ. ज्योति सक्सेना, डॉ. रामकृष्ण वास्तव, डॉ. सभाकांत द्विवेदी, डॉ. स्वामी स्वरूप वास्तव, डॉ. अमित जैन, डॉ. निधि चौहान, डॉ. रचना सिंह ठाकुर एवं डॉ. अमित मांडले सहित सामान्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार, महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू किया गया 'प्रोजेक्ट गंगा' उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति का नया अध्याय साबित होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गांव-गांव तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करना और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है। स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी।  योजना में महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक पदों पर दी जाएगी प्राथमिकता  स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि, आज के दौर में हाई स्पीड इंटरनेट सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट गंगा आगे चलकर न्याय पंचायतों और फिर ग्राम पंचायतों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी। इस योजना के तहत प्रदेश में 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) तैयार किए जाएंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार योजना में महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक पदों पर प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित युवाओं को प्रशिक्षण देकर डिजिटल उद्यमी के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिससे वे अपने गांव में रहकर ही रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि डिजिटल सेवा प्रदाताओं के लिए यह योजना आय का बड़ा माध्यम बन सकती है। अनुमान है कि 350 से 390 रुपये प्रतिमाह इंटरनेट कनेक्शन लेने वाले लोग जुड़ते जाएंगे तो 7 से 8 महीने में एक डिजिटल उद्यमी की मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। कनेक्शनों की संख्या बढ़ने पर यही आय 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। ग्राम पंचायत स्तर की परियोजना की लागत 5.53 लाख रुपये होगी, जिसमें 5 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत मिलेगा, उन्होंने कहा कि इसके लिए एक व्यक्ति को सिर्फ 50 हजार रुपए मार्जिन मनी के तौर पर लगाना होगा।

गांव-गांव तक हाई स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने किया प्रोजेक्ट गंगा का शुभारंभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के गांवों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, डिजिटल समावेशन को नई गति देने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'प्रोजेक्ट गंगा' का शुभारंभ किया। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, कौशल विकास और तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसरों का विस्तार करेगी। प्रोजेक्ट गंगा के तहत प्रदेश में डिजिटल सेवा प्रदाताओं (डीएसपी) का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के प्रथम चरण में 21 जनपदों में इसका संचालन प्रारंभ किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज के दौर में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। इंटरनेट की गति जितनी तेज होगी, विकास की रफ्तार भी उतनी ही तेज होगी। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गंगोत्री से गंगासागर तक मां गंगा का प्रवाह अपने मार्ग में आने वाले क्षेत्रों के विकास, समृद्धि और जीवन का आधार रहा है, उसी प्रकार प्रोजेक्ट गंगा भी उत्तर प्रदेश की डिजिटल समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। यह पहल गांवों तक डिजिटल अवसर पहुंचाकर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नई संभावनाएं सृजित करेगी। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में ई-ऑफिस, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), बीसी सखी, ग्राम सचिवालय सहित अनेक तकनीक आधारित पहलों के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी कम हुई है। इन प्रयासों ने डिजिटल सशक्तिकरण को नई गति दी है और आम नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है। प्रोजेक्ट गंगा इसी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में 21 जनपदों में प्रारंभ हो रही इस परियोजना को आगे चलकर प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और लगभग 8 हजार न्याय पंचायतों तक पहुंचाना होगा। इससे लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी की परिकल्पना साकार होगी और गांव स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 8 हजार डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। प्रोजेक्ट गंगा इस लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का प्रयास केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह परियोजना युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने हिंदुजा समूह को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार 'सीएम युवा' योजना के माध्यम से युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करा रही है। प्रोजेक्ट गंगा के अंतर्गत चयनित युवा भी इस सुविधा का लाभ उठाकर डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में अपना उद्यम स्थापित कर सकेंगे। चयन और प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना की सफलता प्रशिक्षित और सक्षम डिजिटल सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित युवाओं को तकनीकी, प्रबंधकीय और व्यावसायिक दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का प्रभावी नेटवर्क विकसित कर सकें। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तकनीक तक व्यापक पहुंच सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का आधार बनती है। मोबाइल फोन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ने उन लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया है, जो कभी इससे दूर थे। आज सामान्य नागरिक डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है और देश-दुनिया से सीधे जुड़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट गंगा डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाकर इस परिवर्तन को और गति देगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव है। यह पहल प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी तथा आने वाले वर्षों में व्यापक बदलाव का माध्यम बनेगी। हिंदुजा समूह की ओर से ग्रुप प्रेसिडेंट कॉरपोरेट अफेयर्स सुनील कुमार चड्ढा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अभिनव मॉडल अपनाने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। हिंदुजा समूह इस परियोजना में ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप परियोजना में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और लाभार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट गंगा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी विस्तार की परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल उद्यमिता का एक नया मॉडल है। इसके अंतर्गत स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अपने क्षेत्रों में फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित कर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक वाई-फाई, स्मार्ट कृषि और आईटी आधारित रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत चयनित युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, नेटवर्क निर्माण और व्यवसाय संचालन में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में टिकाऊ डिजिटल उद्यम स्थापित कर सकें।

75 जिलों के 1183 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई परीक्षा, पांच मामलों में गिरफ्तारी और एफआईआर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराने के लिए किए गए व्यापक प्रबंधों का असर दूसरे दिन भी देखने को मिला। मंगलवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के डीजी एसबी शिरडकर के अनुसार दोनों पालियों में कुल 9,62,833 अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए बुलाया गया था, जिनमें से 7,32,731 अभ्यर्थी उपस्थित हुए। कुल उपस्थिति 76.10 प्रतिशत दर्ज की गई। योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, फ्रिस्किंग, पहचान सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। इसी का परिणाम रहा कि दूसरे दिन भी विभिन्न जिलों में नकल, प्रतिरूपण और भ्रामक प्रचार के मामलों का तत्काल पता लगाकर संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। हरदोई में मोबाइल और प्रश्नपत्र के साथ अभ्यर्थी गिरफ्तार हरदोई के वेणी माधव विद्यापीठ इंटर कॉलेज में परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी रोहित पथौरी को नकल के उद्देश्य से छिपाकर लाए गए मोबाइल फोन और पूर्व प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्रों के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर में फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए अलीगढ़ में धर्म समाज महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर एक व्यक्ति फर्जी आधार कार्ड के सहारे दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। जांच में मामला उजागर होने पर आरोपी सहित उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी प्रकार मुजफ्फरनगर के डीएवी इंटर कॉलेज में भी एक व्यक्ति कूटरचित आधार कार्ड के जरिए दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देता पकड़ा गया। दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कानपुर में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के साथ अभ्यर्थी पकड़ा गया कानपुर के सिद्दीकी फैज-ए-आम इंटर कॉलेज मखनिया में द्वितीय पाली की परीक्षा शुरू होने से पहले फ्रिस्किंग के दौरान एक अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने का प्रयास करता पकड़ा गया। उससे पूछताछ की जा रही है तथा विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले पर कार्रवाई परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक और तथ्यहीन वीडियो पोस्ट करने के मामले में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। इंस्टाग्राम आईडी से फर्जी वीडियो प्रसारित करने वाले अमरोहा निवासी इन्द्रजीत को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नकल माफिया और फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के डीजी ने कहा है कि नकल, प्रतिरूपण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग अथवा सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने जैसे कृत्यों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

वन्य-जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूकता बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर चरवाहा सम्मेलन का आयोजन किया जाये

भोपाल मध्यप्रदेश टाइगर फाउण्डेशन समिति की 22वीं शासी निकाय की बैठक प्रमुख सचिव वन  संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। बैठक में टाइगर फाउण्डेशन समिति की 21वीं बैठक का अनुमोदन किया गया। बैठक में वन्य एवं वन्य-जीव संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं प्रस्तावों की समीक्षा की गई। संरक्षित क्षेत्रों, वन मण्डलों में वन्य-जीव संरक्षण, आवास विकास, मानव वन्य-जीव संघर्ष न्यूनीकरण, अनुसंधान, अध्ययन, जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन के साथ ब्लैकबक कैप्चर ऑपरेशन से संबंधित कार्यों के लिये लगभग 22.79 करोड़ की राशि के प्रस्ताव स्वीकृत किये गये। समिति के वर्ष 2026-27 के वार्षिक कार्य-योजना (एपीओ) का भी अनुमोदन किया गया। साथ ही टाइगर फाउण्डेशन समिति की 22वीं बैठक की कार्यसूची के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रमुख सचिव  यादव ने कहा कि टाइगर फाउण्डेशन समिति की बैठक हर 3 माह में आयोजित की जाये। उन्होंने कहा कि इससे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता आयेगी।  यादव ने कहा कि वन्य-जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूकता बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर चरवाहा सम्मेलन आयोजित करने पर बल दिया गया। बैठक में जिन कार्यों की स्वीकृति दी गई है, उन्हें नियमानुसार गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव डॉ. समीता राजौरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव)  एल. कृष्णमूर्ति एवं संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान बैठक में उपस्थित रहे। अपर पुलिस महानिदेशक एवं अध्यक्ष टाइगर सेल, सदस्य सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं संचालक माधव राष्ट्रीय उद्यान, मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त सागर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, क्षेत्र संचालक कान्हा, बाँधवगढ़, पेंच और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व वर्चुअली शामिल हुए।  

PM स्वनिधि योजना को घर-घर पहुंचाने की तैयारी, 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान

प्रदेश में पीएम स्वनिधि योजना की पहुँच को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिये 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान जिला स्तर पर स्वनिधि महोत्सव और नगरीय निकायों में लगेंगे लोक कल्याण मेले प्रदेश में 10 लाख से अधिक पथ विक्रेता हुए लाभान्वित भोपाल  प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने देश में एक गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की है। राज्य शासन, नगरीय निकायों तथा ऋणदाता संस्थाओं के समर्पित प्रयासों एवं सक्रिय सहयोग से प्रदेश में अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को सफलतापूर्वक लाभान्वित कर उनके स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया जा चुका है। इस योजना की पहुँच को अंतिम छोर तक और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के समस्त क्षेत्रों में 01 जून 2026 से विशेष अभियान संचालित किया जा रह है, जो 30 जून तक चलेगा। जिला स्तर होंगे 'स्वनिधि महोत्सव' अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालयों पर “स्वनिधि महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा।महोत्सव में पीएम स्वनिधि योजना के सफल लाभार्थियों तथा उनके परिवारजनों की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों, उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियों का उत्सव मनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफल वेंडर्स को सम्मानित करना तथा योजना से जुड़े सभी संबंधित हितधारकों के मध्य इसके प्रति और अधिक व्यापक जागरूकता का संचार करना है। नगरीय निकायों में सजेंगे 'लोक कल्याण मेले' नगरीय निकाय स्तर पर “लोक कल्याण मेलों” के माध्यम से 'पथ विक्रेताओं के लिए सेवाएँ आपके द्वार' की पावन संकल्पना का क्रियान्वयन किया जाएगा। इन मेलों के माध्यम से जरूरतमंद वेंडर्स को वित्तीय, सामाजिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिये बिना गारंटी के 15 हजार रूपये तक की आसान ऋण सुविधा, न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता, क्रेडिट कार्ड एवं डिजिटल लेनदेन के लिए प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही बैंकर्स एवं पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित कर अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच सुलभ कराई जाएगी तथा 'नगरीय निकाय सहायता केंद्रों' के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। सेन्सस टाउन में 'स्वनिधि कैंप' से अंत्योदय की परिकल्पना अभियान में सेन्सस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” का आयोजन कर दूरस्थ व अर्द्धें-शहरी क्षेत्रों में निवासरत पथ विक्रेताओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विशेष शिविरों के माध्यम से छूटे हुए और नए पथ विक्रेताओं की पहचान कर उन्हें योजना की जानकारी दी जाएगी। ऋण स्वीकृति के लिए उनके पंजीयन की त्वरित कार्यवाही पूरी की जाएगी जिससे कोई भी पात्र वेंडर लाभ से वंचित न रहे।