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मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण की पहल जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय : जन स्वास्थ्य अभियान म. प्र.

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर करने के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को निजी संस्थाओं के हाथों सौंपने की पहल एक बार फिर से एक ऐसे मॉडल को लागू करने का प्रयास है जो देश और दुनिया में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में विफल साबित हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों शुरुआती चरण में निजी संस्थाओं को देने जा रह है और प्रयोग सफल होने पर इस पूरे प्रदेश में लागू करने का विचार है।  ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में यह पहली बार नहीं है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को निजी हाथों में देने का प्रयास किया गया है। इससे पहले 3 नवंबर 2015 को अलीराजपुर जिला अस्पताल और जोबट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को राज्य स्वास्थ्य समिति ने दीपक फ़ाउंडेशन के साथ नियमो की अनदेखी करते हुये अनुबंध किया था, जिसमे चिकित्सकों की नियुक्ति संबन्धित संस्था द्वारा कि जाना थी, लेकिन यह मॉडल सफल नहीं हो पाया और क्षेत्र के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं देखा गया नतीजतन सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था।   वर्ष 2020-21 में नीति आयोग द्वारा जिला अस्पतालों को निजी संस्थाओं को देने का सुझाव दिया गया था, जिसे तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने विरोध करते हुये मानने से इंकार कर दिया था।  लेकिन 2024-25 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 13 जिला अस्पतालों को निजी क्षेत्र को सौंपने का फिर से प्रयास किया जिसके खिलाफ मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्ताशसी चिकित्सा अधिकारी संघ, एमपी मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्ताशसी चिकित्सा महासंघ, ईएसआई चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा शिक्षा,  मद्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, मनोरमा, मध्यप्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन, संविदा चिकित्सक संघ, आशा / आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ, जन स्वास्थ्य अभियान (JSAI), अस्पताल बचाओ-जीव बचाओ” नेटवर्क, वकीलों और आम नागरिकों ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरन के खिलाफ एकजुट आवाज उठाई थी। इसके बाद सरकार ने जिला अस्पतालों के निजीकरण की योजना से पीछे हटने की घोषणा की थी। परंतु बाद में सार्वजनिक निजी भागीदारी के नाम पर प्रदेश सरकार ने नाममात्र की दर से निजी संस्थानो को जमीन आवंटित करने की बात कही थी।  अब पुनः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की पहल राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी से पीछे हटने का संकेत है। निजी स्वास्थ्य संस्थानो का मात्र एक ही उद्देश्य होता है मुनाफा कमाना और हम सभी ने कोविड महामारी के दौरान निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की मुनाफाखोरी के अनुभवों को बहुत नजदीक से देखा है। पिछले कुछ सालों से प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थाओं के निजीकरण का प्रयास कर रही है, जिससे सरकार की मंशा और प्राथमिकताएँ स्पष्ट होती है ।  हम सभी का यह मानना है कि  कल्याणकारी राज्य होने के नाते जनता को मौलिक अधिकारों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, भोजन, आवास के अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी और कर्तव्य है। सरकार का यह कदम जनता के मौलिक अधिकार "राइट टू लाइफ के अनुच्छेद 21" का उल्लंघन हैं और संविधान के नीति निदेशक सिद्धांतों और अनुच्छेद 47 का उल्लंघन भी है।  अभियान के राष्ट्रीय कन्वेनर अमूल्य निधि ने कहा कि हाल की SRS रिपोर्ट सहित विभिन्न स्वास्थ्य आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, जवाबदेही और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि सरकारी संस्थानों को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा देने की। ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 4134 उप स्वास्थ्य केंद्र, 1045 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 245 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो की कमी है इसी प्रकार की कमी आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में भी है। साथ ही इन स्वास्थ्य केन्द्रो में चिकित्सक और अन्य मेडिकल और पेरा मेडिकल स्टाफ की कमी भी है। जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश का मानना है कि सरकार का प्रयास प्राथमिक स्वास्थ्य…

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से अतिक्रमण हटाया, अवैध सड़क निर्माण पर मंडल की कार्रवाई

रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रायपुर के सेजबहार फेस-1 कॉलोनी क्षेत्र में अपनी आवंटित भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनाई जा रही सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। मंडल की ओर से यह कार्रवाई सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद की गई। जानकारी के अनुसार दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के आदेश दिनांक 3 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार और दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए गृह निर्माण मंडल को आबंटित की गई थी। इस परियोजना के लिए 17 मई 2006 को विकास अनुज्ञा भी स्वीकृत की गई थी। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि 1327 आवास स्वीकृत योजना के अनुसार बनाए गए, जबकि 39 आवास निर्धारित ले-आउट से अलग निर्मित किए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण हुआ। भूमि विवाद की स्थिति के कारण भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। हाल ही में मंडल ने अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया। इस दौरान पता चला कि एक निजी बिल्डर ने मंडल की भूमि के हिस्से पर अवैध कब्जा कर बिना अनुमति सड़क निर्माण शुरू कर दिया है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई की। कार्यपालन अभियंता नितेश कश्यप के नेतृत्व में गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध सड़क को हटाया और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कार्रवाई में मंडल के कई अधिकारी और अभियंता शामिल रहे। मंडल के अधिकारियों ने बताया कि यह भूमि उनकी महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडल अपनी भूमि और परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

भजनलाल सरकार ने नागरिक सुरक्षा कोर गठन और NIA कोर्ट को दी मंजूरी

जयपुर मुख्‍यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्‍थान में रेयर अर्थ एल‍िमेंट्स के एक्‍सप्‍लोरेशन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए माइनिंग लीज के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृत दे दी है. बाड़मेर की पचपदरा और शेरगढ़ के नवातला और देवीगढ़ में 207.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रेयर अर्थ एलिमेंट्स खनिज ब्लॉक के एक्सप्लोरेशन को मंजूरी दी है. मैसर्स सेन्ट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट को एक्सप्लोरेशन लाइसेंस म‍िला है. नागरिक सुरक्षा कोर का गठन सीएम भजनलाल शर्मा ने 8 ज‍िलों में नागर‍िक सुरक्षा कोर का गठन क‍िया है. बालोतरा, डीडवाना-कुचामन, फलौदी, सलूंबर, खैरथल-तिजारा, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और ब्यावर में ‘नागरिक सुरक्षा कोर' का गठन करने की हरी झंडी म‍िल गई है. जिले में आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी. NIA कोर्ट की स्थापना होगी एनआईए मामलों के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना की मंजूरी दी है. सीएम ने राज्य में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) मामलों की सुनवाई के ल‍िए विशेष न्यायालय की स्थापना करने की अनुमत‍ि दी है. इससे राज्य में न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और प्रभावी होगी. मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता मिलेगी. इन निर्णयों से खनन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सहभागिता सुनिश्चित होगी. मुख्यमंत्री ने समय से लागू करने के न‍िर्देश द‍ि‍ए, ज‍िससे लोगों को लाभ म‍िल सके.  

बीएमएचआरसी में योग सप्ताह के तीसरे दिन मरीजों और विद्यार्थियों के लिए योग सत्र आयोजित

भोपाल आईसीएमआर-भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित योग सप्ताह के तीसरे दिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम पल्मोनरी मेडिसिन वॉर्ड तथा नेत्र रोग विभाग के मरीजों और उनके परिजनों को उनकी बीमारियों के अनुरूप उपयोगी योग क्रियाओं एवं प्राणायाम के बारे में जानकारी दी गई। इसके पश्चात संस्थान के नर्सिंग स्टूडेंट्स, पैरामेडिकल स्टूडेंट्स तथा पीजी मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। योग प्रशिक्षक  सुशील सिंह ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया तथा स्वस्थ जीवनशैली में योग के महत्व से अवगत कराया।  बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा वास्तव ने बताया कि नियमित योग अभ्यास शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है। साथ ही, रोग की प्रकृति के अनुसार अपनाई जाने वाली योग क्रियाएं उपचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान कर सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकती हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में 21 जून तक योग सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न वर्गों के लिए योग एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों, विद्यार्थियों और मरीजों तक योग के लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

हल्दीघाटी इतिहास पर सवाल, मोहन भागवत बोले महाराणा प्रताप विजयी रहे

उदयपुर  महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उदयपुर के गांधी ग्राउंड में आयोजित 'राष्ट्र चेतना संकल्प सभा' में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इतिहास को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में जीत महाराणा प्रताप की ही हुई थी. इतिहासरों की व्याख्या पर सवाल डॉ. भागवत ने इतिहासकारों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर वर्षों से जो तथ्य परोसे गए हैं, वे वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि जब मुगलकालीन इतिहासकार स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि युद्ध में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था, तो फिर जीत किसकी हुई, इसका उत्तर स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप की जयंती पूरे विश्व में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई जाती है. यह इस बात का प्रमाण है कि जनता सही इतिहास को भली-भांति जानती है. स्वाभिमान का प्रतीक है भारत का इतिहास सरसंघचालक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास कभी भी गुलामी का इतिहास नहीं रहा है बल्कि यह आक्रमणकारियों के विरुद्ध निरंतर संघर्ष और स्वाभिमान का इतिहास है. महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल उनकी सेना का नहीं, बल्कि पूरे समाज का था. उस समय अकबर के पास संसाधनों और शस्त्रों की विशाल शक्ति थी, फिर भी महाराणा प्रताप ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया. महापुरुषों से सुरक्षित है अस्मिता सभा के दौरान उन्होंने बप्पा रावल और ललितादित्य जैसे महान नायकों को नमन करते हुए कहा कि इन्हीं महापुरुषों के त्याग और बलिदान के कारण आज भारत की संस्कृति और अस्मिता सुरक्षित है. डॉ. भागवत ने कहा कि प्रताप का अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने बल देकर कहा कि वास्तविक इतिहास को सामने लाना आवश्यक है ताकि देश का युवा अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ सके

सिपेट के विद्यार्थियों ने किया आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स फैक्ट्री का औद्योगिक भ्रमण

भोपाल सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का औद्योगिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उत्पादन इकाइयों का अवलोकन कर पाइप निर्माण की आधुनिक प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा औद्योगिक संचालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, उत्पादन प्रबंधन एवं उद्योगों में कौशल आधारित कार्य संस्कृति के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों ने उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझते हुए उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव प्राप्त किया। औद्योगिक भ्रमण के उपरांत सिपेट के विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं बलशाली बलशाली पाइप आईसेक्ट इंडिया की टीम द्वारा संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं सतत भविष्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। इस पहल पर आईसेक्ट इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा, “शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान एवं वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर देते हैं और उन्हें उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करते हैं। हमें प्रसन्नता है कि सिपेट के विद्यार्थियों ने हमारे बलशाली पाइप्स संयंत्र का भ्रमण कर उत्पादन प्रक्रियाओं को समझा। साथ ही वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया द्वारा संचालित औद्योगिक गतिविधियों की सराहना की तथा इस भ्रमण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी अनुभव बताया।

जमीन की नापी अब पड़ेगी महंगी, बिहार सरकार ने मापी शुल्क में की बड़ी बढ़ोतरी

सुपौल. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा रैयती जमीन की मापी शुल्क में हाल ही में की गई वृद्धि का असर अब आम भू-धारकों की जेब पर पड़ने लगा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की मापी कराने के लिए लोगों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। विभाग ने मापी शुल्क की नई दरें निर्धारित कर दी हैं, जिसके तहत सामान्य और तत्काल मापी दोनों के लिए शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जानकारी के अनुसार, पहले रैयत अपेक्षाकृत कम शुल्क देकर अपनी जमीन की मापी करा लेते थे, लेकिन अब उन्हें लगभग दोगुना शुल्क अदा करना पड़ेगा। विभाग का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था से भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नई दरों के तहत शहरी क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क 8000 रुपये रखा गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क तय किया है तथा अधिकतम शुल्क 4000 रुपये निर्धारित किया गया है। विभाग ने तत्काल मापी की सुविधा के लिए भी अलग शुल्क निर्धारित किया है। नई व्यवस्था के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी कराने के लिए प्रति खेसरा 4000 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि अधिकतम शुल्क 16 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क देय होगा और इसके लिए अधिकतम शुल्क 8000 रुपये तय किया गया है। स्थानीय स्तर पर नई शुल्क दरों को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई भू-धारकों का कहना है कि भूमि विवादों के निपटारे, दाखिल-खारिज, बंटवारे एवं अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए मापी आवश्यक होती है। ऐसे में शुल्क बढ़ने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यदि बढ़े हुए शुल्क के बदले समय पर और पारदर्शी तरीके से मापी कार्य पूरा होता है तो इससे लोगों को लाभ भी मिलेगा। नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू – विभाग द्वारा निर्धारित नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू की गई हैं। शुल्क संशोधन का उद्देश्य भूमि मापी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। भू-धारकों से अपील की कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ऑनलाइन आवेदन करें तथा किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर संबंधित राजस्व कार्यालय से संपर्क करें। – राकेश कुमार, राजस्व पदाधिकारी

प्री-मानसून मेंटेनेंस पूरा करने पर जोर, बिजली हादसों से बचाव की तैयारी

जयपुर मानसून के दौरान विद्युत अभियंताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के साथ ही विद्युत हादसे रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। चेयरमैन डिस्कॉम्स एवं जयपुर विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक सुश्री आरती डोगरा ने बुधवार को विद्युत भवन में अभियंताओं से कहा कि प्री-मानसून मेंटिनेंस के सभी कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिए जाएं। बैठक में चेयरमैन डिस्कॉम्स ने कहा कि किसी भी प्रकार के शॉर्ट सर्किट अथवा करंट लीकेज से जनहानि एवं पशुधन के जान की रक्षा करना सभी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में विद्युत तंत्र का समुचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। डिस्कॉम्स चेयरमैन ने कहा कि भारी बारिश या तेज हवा से बिजली की लाइनें प्रभावित न हों। इसके लिए लाइनों के समीप से पेड़ों की टहनियों की छंटाई की जाए। टेढ़े एवं जर्जर पोल अविलम्ब बदलें और झूलते तारों को तुरंत कसा जाए। विद्युत पोल एवं वितरण ट्रांसफार्मर की अर्थिंग की जांच करने के साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर्स के आसपास फेंसिंग की जाए ताकि किसी प्रकार के हादसों की गुंजाइश न रहे। उन्होंने ग्रिड सब स्टेशनों में ट्रांसफॉर्मरों के ऑयल लेवल मेंटेन करने और उसमें नमी को रोकने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी इंतजाम सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। रहें 24 घंटे एक्टिव, फॉल्ट रिपेयरिंग टीम रहें तैनात डिस्कॉम्स चेयरमैन ने कहा कि फॉल्ट या ट्रिपिंग की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सब-डिवीजन स्तर पर फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम एक्टिव रहें। आवश्यक मैटेरियल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। बैठक में निदेशक तकनीकी श्री आरके शर्मा, जयपुर शहर वृत्त उत्तर एवं दक्षिण के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, ओएंडएम तथा एचटीएम के सहायक अभियंता मौजूद रहे।

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, आदमपुर एयरपोर्ट के नामकरण का नोटिफिकेशन जारी

जालंधर. केंद्र सरकार ने पंजाब के दोआबा क्षेत्र को एक बड़ी सौगात देते हुए जालंधर स्थित आदमपुर हवाई अड्डे का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा कर दिया है। इस संबंध में 12 जून को केंद्र सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दी गई, जिसके साथ ही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई। इस ऐतिहासिक नामकरण का डिजिटल उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान समाज सुधारक श्री गुरु रविदास महाराज के 649वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर किया। इस मौके पर उन्होंने नई नामपट्टिका का अनावरण कर गुरु रविदास जी के सामाजिक योगदान को नमन किया। केंद्र सरकार का यह फैसला दोआबा क्षेत्र की धार्मिक भावनाओं और समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जालंधर और होशियारपुर समेत पूरे दोआबा क्षेत्र के लिए आदमपुर हवाई अड्डा लंबे समय से हवाई सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। अब यह हवाई अड्डा संत गुरु रविदास महाराज जी के नाम से जाना जाएगा, जो सामाजिक समानता और मानवता के संदेश के प्रतीक हैं। सरकारी नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इस निर्णय पर अंतिम मुहर लग गई है। नाम परिवर्तन की घोषणा के बाद पंजाब ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले गुरु रविदास जी के अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों (NRI) ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और सम्मानजनक कदम बताया है। विशेष रूप से दोआबा क्षेत्र में इस निर्णय को सांस्कृतिक पहचान और गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि आदमपुर हवाई अड्डा का नया नाम आने वाली पीढ़ियों को गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सेजबहार फेस-1 में अवैध निर्माण पर कार्रवाई, मंडल ने हटाया अतिक्रमण

रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित अपनी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अनधिकृत रूप से निर्मित सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। दीनदयाल आवास योजना के अंतर्गत कलेक्टर रायपुर के आदेश से दिनांक 03 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने हेतु आबंटित की गई थी। इसमें ग्राम सेजबहार के खसरा क्रमांक 162/1 का भाग तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा क्रमांक 341/1 एवं 341/3 की भूमि शामिल है। उक्त भूमि पर आवासीय विकास हेतु विकास अनुज्ञा दिनांक 17 मई 2006 को स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी भवनों के निर्माण की थी योजना  स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। स्थल निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि स्वीकृत ले-आउट के अनुसार 1435 भवनों में से 1327 भवनों का निर्माण किया गया था। इसके अतिरिक्त 39 भवन स्वीकृत अभिन्यास से अलग निर्मित पाए गए। इस प्रकार कुल 1366 भवन निर्मित हुए। भूमि विवाद के कारण नहीं बन सके 79 आवास  मंडल द्वारा किए गए निरीक्षण, अभिलेख परीक्षण तथा पूर्व अधिकारियों एवं अभियंताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्य अवधि के दौरान भूमि विवाद की स्थिति उत्पन्न होने के कारण स्वीकृत ले-आउट में दर्शाए गए भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के अंतर्गत अनुबंध क्रमांक 41, दिनांक 07 अगस्त 2006 के तहत 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत कुल 193 एलआईजी भवनों का निर्माण किया गया। हालांकि विवादित क्षेत्र में स्थित 79 भवनों का निर्माण न तो किया जा सका और न ही उनका विक्रय किया गया। सीमांकन में सामने आया अतिक्रमण  हाल ही में मंडल द्वारा अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक निजी बिल्डर द्वारा मंडल की भूमि के एक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर बिना अनुमति सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की।  मंडल ने हटाई अवैध सड़क  नितेश कश्यप कार्यपालन अभियंता संभाग क्रमांक 3  सेजबहार, रायपुर  के नेतृत्व में मंडल की टीम जिसमें श्री अमृत लाल बरमन सपंदा अधिकारी, श्री हेमंत निषाद सहायक अभियंता, श्रीमती निकिता मिश्रा उपअभियंता, श्री अनुपम राठौर उप अभियंता, श्री पेमेन्द्र ध्रुव, श्री अमय विक्रम तथा श्री कमलेश दास ने मौके पर पहुंचकर अनधिकृत सड़क को हटाया और भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की। भविष्य में विकसित होगी नई आवासीय परियोजना  मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है तथा भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है।  मंडल अपनी भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।