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यूपी के कुकरैल में घड़ियाल संरक्षण की सफलता, 1970 से अब तक बड़ी उपलब्धि

लखनऊ यूपी में कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल आज सफल संरक्षण का घंटा बजा रहे हैं। लखनऊ स्थित कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी गूंज अब देश ही नहीं, विदेश के कई चिड़ियाघरों तक सुनाई दे रही है। कुकरैल के वैज्ञानिक कैप्टिव ब्रीडिंग (बंदी प्रजनन) मॉडल को नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने भारत के सबसे सफल संरक्षण प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है। यही वजह है कि यहां जन्मे घड़ियाल आज भूटान, पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका (न्यूयॉर्क) और जापान के चिड़ियाघरों में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये देश भी इस मॉडल को अपनाने की पहल कर रहे हैं। 1970 के दशक में स्थिति बेहद गंभीर थी, जब पूरे देश में केवल 250 से 300 घड़ियाल ही बचे थे। इस संकट को देखते हुए 1975 में कुकरैल पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। शुरुआत में चंबल नदी (इटावा) से अंडे लाकर वैज्ञानिक तरीके से हैचिंग की गई और घड़ियाल संरक्षण की नींव रखी गई। 1988 से यहां नियमित प्रजनन शुरू हुआ और आज स्थिति यह है कि केंद्र में 466 घड़ियाल मौजूद हैं। हर वर्ष लगभग 140 से 160 नए घड़ियाल यहां जन्म ले रहे हैं। इस वर्ष नमामि गंगे परियोजना के तहत 500 अंडों को हैच करने का लक्ष्य तय किया गया है। नदियों को मिल रहा नया जीवन कुकरैल में जन्म लेने वाले घड़ियालों को ढाई वर्ष तक विशेष देखरेख में रखा जाता है, जिसके बाद उन्हें गंगा, घाघरा, चंबल, गेरुआ और गंडक जैसी नदियों में छोड़ा जाता है। इससे नदियों का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो रहा है और जैव विविधता को नई ऊर्जा मिल रही है। इसके अलावा दुधवा, कतर्नियाघाट, हस्तिनापुर और महाराजगंज की नदियों में भी घड़ियाल फल-फूल रहे हैं। राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है और दुर्लभ घड़ियालों को देखने देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। कुकरैल केंद्र में म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जहां हर साल लगभग दो लाख घरेलू और सैकड़ों विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं। सनातन परंपरा में देवी गंगा के वाहन मकर के रूप में पूजनीय यह जीव आज उत्तर प्रदेश के प्रयासों से वैश्विक पटल पर नई जिंदगी पा चुका है।  

अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला गैंग पकड़ा गया, चंडीगढ़ पुलिस ने 3 को दबोचा

चंडीगढ़. चंडीगढ़ में ऑपरेशन सेल टीम ने एक इंटरस्टेट आर्म्स नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 3 ऐसे अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 2 देसी कट्टे, एक पिस्तौल और 2 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मौलीजागर के अभिषेक (23), डड्डूमाजरा के विकास उर्फ ​​भट्टी (20) और मनीमाजरा के तैयब उर्फ ​​चेतन (20) के रूप में हुई है। ऑपरेशन सेल के अनुसार, सबसे पहले 8 जून को पुलिस टीम ने अभिषेक को फेज-2 के पास से एक देसी पिस्तौल और 2 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था और उसे कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया गया था। रिमांड के दौरान पूछताछ के बाद 10 जून को ऑपरेशन सेल टीम ने डड्डूमाजरा के रहने वाले विकास को सेक्टर-43 में CTU वर्कशॉप के पीछे से गिरफ्तार किया। उसके पास से एक देसी कट्टा भी बरामद हुआ। अभिषेक की टिप-ऑफ पर ऑपरेशन सेल ने 15 जून को किशनगढ़ चौकी के पास स्लिप रोड से तैयब उर्फ ​​चेतन को एक देसी कट्टे के साथ गिरफ्तार किया। जांच दौरान सामने आया है कि आरोपी अभिषेक के खिलाफ 19 क्रिमिनल केस दर्ज हैं।

गोरखपुर पंचायत की पहल, सरपंच ने दान की जमीन पर बनाई आधुनिक चौपाल

 फतेहाबाद  बदलते दौर के साथ हरियाणा के ग्रामीण आंचल की तस्वीर तेजी से बदल रही है। विकास की इस बयार में अब गांवों की पारंपरिक चौपालें भी आधुनिक और हाईटेक रूप अख्तियार करने लगी हैं। कभी केवल पेड़ की छांव या साधारण कमरों तक सीमित रहने वाली ये चौपालें अब वातानुकूलित और इंटरनेट जैसी शहरी सुविधाओं से जगमगा रही हैं। जिले के कई गांवों में पंचायतों ने इन सामाजिक सरोकार के केंद्रों को शानदार तरीके से विकसित किया है, जो न केवल ग्रामीणों के बैठने का स्थान हैं, बल्कि उनके मनोरंजन और आपसी भाईचारे का मुख्य आधार बन चुकी हैं। इसी कड़ी में जिले के ऐतिहासिक गांव गोरखपुर की पंचायत ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। गांव के सरपंच मंदीप योगी ने बताया कि उनके गांव में कई चौपालें हैं, जिनमें से मुख्य चौपाल को पूरी तरह से आधुनिक रंग-रूप में ढाल दिया गया है। इस चौपाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के लिए सरपंच ने अपनी निजी जमीन पंचायत को दान में दी है। इस नवनिर्मित चौपाल में ग्रामीणों के लिए इंटरनेट से लेकर एसी तक की वीआईपी व्यवस्था की गई है। यहां गांव के बुजुर्ग नियमित रूप से बैठते हैं। सरपंच का मानना है कि इस चौपाल में आकर आपसी चर्चा करने और ताश खेलने से बुजुर्गों का मानसिक तनाव दूर होता है और वे अकेलापन महसूस नहीं करते। सरपंच ने दान की जमीन, गोरखपुर में तैयार की हाईटेक चौपाल गांव गोरखपुर के सरपंच मंदीप योगी ने ग्रामीण विकास में व्यक्तिगत योगदान देते हुए खुद की जमीन पंचायत को दान कर दी, जिस पर अब सर्वसुविधायुक्त चौपाल खड़ी है। पंचायत अब गांव की अन्य चौपालों का कायाकल्प करने की योजना पर भी तेजी से काम कर रही है ताकि हर वर्ग को इसका लाभ मिले। ग्रामीण परिवेश में चौपाल केवल एक भवन नहीं, बल्कि गांव का वह सार्वजनिक और लोकतांत्रिक मंच है जहां ग्रामीण संस्कृति धड़कती है। गांव पीलीमंदोरी में भी पंचायत ने इस दिशा में सराहनीय कार्य किया है। पीलीमंदोरी में चौपाल के साथ बना शानदार विश्राम गृह गांव पीलीमंदोरी के सरपंच धर्मवीर गोरछिया ने बताया कि पंचायत ने न सिर्फ चौपाल को आधुनिक बनाया है, बल्कि इसके साथ एक सर्वसुविधायुक्त विश्राम गृह का भी निर्माण करवाया है। चौपाल में जहां हवादार पंखे और बैठने की उत्तम व्यवस्था है, वहीं विश्राम गृह में तमाम आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं, जिससे गांव में आने वाले आगंतुकों को ठहराने में आसानी होती है। सरपंच धर्मवीर गोरछिया का कहना है कि चौपाल गांव का ऐसा मुख्य केंद्र है जहां राजनीति की बिसात बिछती है, सामाजिक नुक्कड़ सभाएं होती हैं और पंचायती फैसले लिए जाते हैं। अब इन चौपालों के हाईटेक होने से ग्रामीण बेहद खुश हैं।  

मुख्यमंत्री साय नवनिर्मित नगर पंचायत शिवनंदनपुर के शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज अपने सूरजपुर प्रवास के दौरान नवनिर्मित नगर पंचायत शिवनंदनपुर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष  रितेश जायसवाल सहित सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए जनसेवा और विकास के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने नगर पंचायत शिवनंदनपुर के वार्ड क्रमांक 06 में सुसज्जित मंगल भवन निर्माण की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को महत्वपूर्ण सौगात दी। मुख्यमंत्री की घोषणा पर उपस्थित नागरिकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शिवनंदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिलना क्षेत्र की वर्षों पुरानी आकांक्षा की पूर्ति है। इससे क्षेत्र में सुनियोजित नगरीय विकास का मार्ग प्रशस्त होगा तथा नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ अपने प्रतिनिधियों का चयन किया है, उस विश्वास पर खरा उतरना अब उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनप्रतिनिधि जनता और शासन के बीच सेतु बनकर जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री  साय ने शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने तथा अपने अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं मुख्यमंत्री कॉल सेंटर के माध्यम से नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। सरकार जनता की समस्याओं के समयबद्ध और प्रभावी निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सभा को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि शिवनंदनपुर के नगर पंचायत बनने से क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में शिवनंदनपुर में विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। उन्होंने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने तथा क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने का आह्वान किया। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रयासों और दूरदर्शी सोच के कारण शिवनंदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ है। यह क्षेत्र के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जिससे नागरिकों को बेहतर नगरीय सुविधाएं और विकास कार्यों का लाभ मिलेगा। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टॉलों का किया अवलोकन शपथ ग्रहण समारोह के पश्चात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी एवं जागरूकता स्टॉलों का अवलोकन किया। समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में दो दिव्यांग हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल प्रदान की गई तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को उनके नवीन आवास की चाबियां सौंपी गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में बच्चों के पोषण हेतु तैयार किए जाने वाले खिचड़ी, हलवा, खुरमा, बर्फी, कटुआ, गुलगुला तथा रेडी-टू-ईट पोषण आहार का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री ने पोषण आहार का अवलोकन कर इसकी सराहना की। इस दौरान तीन गर्भवती महिलाओं की गोदभराई तथा दो बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं से संवाद कर योजना से प्राप्त लाभों की जानकारी ली। इसके अलावा आदिवासी विकास विभाग, कृषि विभाग, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जल संसाधन विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग के स्टॉल में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करवां के विद्यार्थियों द्वारा सोलर सैनिटेशन किट सहित विभिन्न नवाचारों एवं वैज्ञानिक मॉडलों का प्रदर्शन किया गया, जिसकी मुख्यमंत्री ने सराहना की। विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को किया गया लाभान्वित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं लाभ का वितरण किया। मत्स्य पालन प्रसार योजना के अंतर्गत फुटकर मत्स्य विक्रय उपकरण प्रदाय योजना के तहत कुंजनगर निवासी मती भारती केवट एवं मती तपेश्वरी राजवाड़े को आइस बॉक्स के साथ 6-6 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य योजनाओं के तहत शिवनंदनपुर निवासी  अमरूत को वय वंदन कार्ड प्रदान किया गया। वहीं आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत शिवनंदनपुर एवं कुरूवां के पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित कर योजना का लाभ प्रदान किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री  दयाल दास बघेल, सांसद  चिंतामणि महाराज, प्रेमनगर विधायक  भूलन सिंह मरावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, सरगुजा संभाग के आयुक्त  नरेंद्र दुग्गा, आईजी  दीपक झा, कलेक्टर मती रेना जमील सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

हिसार में मुफ्त साइकिल योजना पर सवाल, 8 साल में 54% बढ़ी कीमत

हिसार  आठ साल पहले हरियाणा के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 6 के अनुसूचित वर्ग के बच्चों के लिए निशुल्क साइकिल योजना शुरू की। ताकि जिन बच्चों का घर से स्कूल की दूरी 2 या इससे अधिक किलोमीटर दूर है तो साइकिल चलाकर वह बच्चा स्कूल पहुंच सकें, जिससे वह पढ़ाई से वंचित न रह जाए। लेकिन उपरोक्त निशुल्क योजना अभिभावकों की जेबें खाली कर रही है। कारण है कि शिक्षा निदेशालय ने 8 साल से प्रदेश के बाजारों का कोई रिव्यू नहीं किया। जिस कारण 2018 से लेकर 2026 तक 20 व 22 इंची साइकिलों की कीमत 54 प्रतिशत बढ़कर 6 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। जोकि अभिभावकों को भरना पड़ता है। जबकि सरकार अभी तक पुराने नियमानुसार केवल 46 प्रतिशत पैसा ही अभिभावकों को दे रही है। जिस कारण अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ता है। बता दें कि निशुल्क साइकिल योजना के तहत सरकार 20 इंच की साइकिल के 2800 रुपये व 22 इंच की साइकिल के तीन हजार रुपये ही दे रही है। बच्चों को पसंद आती है 4500 रुपये की साइकिलें हर साल सरकारी स्कूलों में लगने वाले निशुल्क साइकिल मेले में बच्चों को 4500 रुपये व इससे अधिक कीमत की साइकिलें पसंद आती है। जोकि लंबे समय तक चलने वाली भी होती है और गुणवत्तायुक्त भी होती है। लेकिन सरकार की ओर तय कीमत की साइकिलें न तो गुणवक्तायुक्त होती है और न ही लंबे समय तक चलने वाली होती है। जिस कारण न बच्चे और न ही अभिभावक तय कीमत की साइकिलों में रूचि दिखाते हैं। शिक्षा निदेशालय ने निशुल्क साइकिल योजना के तहत प्रदेश के समस्त डीईओ को कुल एक करोड़ रुपये अलाट कर दिए है। कुछ दिन में समस्त डीईओ को 5-5 लाख रुपये मिल जाएंगे। ताकि मेले के सफल आयोजना में तय राशि को खर्चा जा सकें। इसके लिए डीईओ को आदेश दिए है कि वे विज्ञापन सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू कर दें। ताकि समय रहते मेला लगाया जा सकें। मेले में खाने-पीने का खर्चा कौन उठाएगा निशुल्क साइकिल योजना के तहत लगने वाले मेले में दूर-दराज से आए बच्चों व शिक्षकों के लिए रिफ्रेशमेंट उपलब्ध करवाया जाता है।जिसका पैसा सरकार बाद में जारी करती है। जिस कारण बड़ा सवाल रहेगा कि बीते साल की तरह इस साल भी रिफ्रेशमेंट का खर्चा कौन उठाएगा। हिसार के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र शर्मा ने कहा कि मैंने अभी डीईईओ पद पर ज्वाइन किया है। मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।  

अवैध कब्जों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, बलरामपुर में 23 मकान हटाकर 7 एकड़ भूमि खाली कराई

बलरामपुर. बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर में प्रशासन ने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 मकानों पर बुलडोजर चलाकर लगभग 7 एकड़ 75 डिसमिल जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध कब्जों पर प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है। सुनियोजित तैयारी के साथ की गई कार्रवाई प्रशासन की ओर से अतिक्रमण मुक्ति के लिए सुनियोजित तैयारी की गई। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आनंद राम नेताम के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने संबंधित भूमि का अभिलेखीय परीक्षण किया, सीमांकन कराया तथा अतिक्रमण की स्थिति का विस्तृत सर्वेक्षण किया। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों को नियमानुसार नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने लोगों को समझाइश देते हुए स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने का अवसर भी प्रदान किया। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सुनिश्चित किया गया कि कार्रवाई पूरी तरह कानून सम्मत एवं पारदर्शी तरीके से हो। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम नागरिकों की सुविधाओं और संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जाए। निर्देशों के अनुरूप अनुविभागीय अधिकारी (रा.) आनंद राम नेताम के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के बाद निर्धारित तिथि को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। प्रशासनिक अमले की उपस्थिति में 23 मकानों से अतिक्रमण हटाया गया और लगभग 7 एकड़ 75 डिसमिल भूमि को मुक्त कराया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण, व्यवस्थित रूप से संपन्न हुई तथा कहीं भी अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई। अतिक्रमण हटने के बाद मुक्त कराई गई भूमि को पुनः शासकीय अभिलेखों के अनुरूप सुरक्षित किया गया। इस भूमि का उपयोग भविष्य में जनहित एवं विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को लाभ मिलेगा। कलेक्टर का सख्त संदेश कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिले में शासकीय भूमि की नियमित निगरानी की जाए तथा अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी भूमि को सुरक्षित रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस दिशा में आगे भी प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित की जाएंगी गोशालाएं

गो संरक्षण विशेष-मेगा कैंपेन चलाकर घर-घर पहुंचाया जाएगा ‘जहर मुक्त भोजन’ शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित की जाएंगी गोशालाएं सीएम योगी के निर्देश पर गो संरक्षण से रोजगार, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी ऊर्जा मॉडल तैयार गोशालाओं के आसपास रहने वाले परिवारों तक पहुंचेंगे जहरमुक्त सब्जियां, अनाज और फल गोशालाओं के पांच किलोमीटर दायरे में रहने वाले परिवारों को उत्पाद पहुंचाकर होगी शुरुआत   लखनऊ प्रदेश में ‘जहर मुक्त भोजन’ का मेगा कैंपेन शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अब लोगों की थाली तक सीधे खेतों से निकला शुद्ध और जहरमुक्त भोजन पहुंचाया जाएगा। इस पूरे महाभियान का केंद्रबिंदु उत्तर प्रदेश की गोशालाएं होंगी, जिन्हें अब सिर्फ गोसंरक्षण ही नहीं, बल्कि शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में चयनित गोशालाओं के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले परिवारों को इस महा अभियान से जोड़ा जाएगा। इन परिवारों तक प्राकृतिक खेती से उपजे खाद्यान्न, ताजी सब्जियां, फल और पंचगव्य आधारित उत्पाद सीधे पहुंचाए जाएंगे। गो सेवा आयोग ने इसके लिए ‘फार्म टू कंज्यूमर’ (खेत से सीधे उपभोक्ता तक) मॉडल तैयार किया है। इससे उपभोक्ताओं को सही कीमत पर और किसानों को उनकी उपज का और बेहतर मूल्य मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य हर नागरिक को बीमारियों से बचाना और उन्हें ‘जहर मुक्त भोजन’ उपलब्ध कराना है। सबसे पहले चयनित गोशालाओं के आसपास के परिवारों से इसकी शुरुआत होगी। यह मॉडल गोशालाओं को ग्रामीण समृद्धि और सेहत का नया केंद्र बनाएगा। ‘जहर मुक्त भोजन’ मिशन की विशेषताएं  जैविक खाद्य: गोशालाओं के सहयोग से तैयार होने वाली 100% जैविक सब्जियां, फल और अनाज सीधे घरों तक पहुंचेंगे।  पहला टारगेट रेडियस: शुरुआती फेज में गोशाला के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।  मल्टी-प्रोडक्ट बास्केट: अनाज-सब्जियों के अलावा औषधीय उत्पाद, पंचगव्य घी, और शुद्ध दूध भी इस चेन का हिस्सा होंगे।  स्थायी बाजार: केमिकल-फ्री उत्पाद तैयार करने वाले स्थानीय किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, गोशालाएं ही उनका बाजार बनेंगी। ग्रामीण स्तर पर पैदा होंगे बंपर रोजगार गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ‘जहर मुक्त भोजन’ के इस पूरे चक्र को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय युवाओं को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर बंपर रोजगार पैदा होंगे। प्रदेश में यह प्रयोग देश के सामने 'सेहत और समृद्धि' का एक अनूठा उदाहरण बनने जा रहा है।

Bhopal Metro Update: जुलाई से दोनों ट्रैक पर शुरू होगा संचालन, CMRS निरीक्षण की तैयारी

भोपाल  अपनी धीमी रफ्तार को लेकर सुर्खियों में आई भोपाल मेट्रो जल्द ही नए कलेवर में नजर आएगी। इसकी न सिर्फ स्पीड बढ़ेगी, बल्कि फेरे भी बढ़ जाएंगे। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया है, जो अगले सप्ताह आ सकती है। यही टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। असिस्टेंट कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम पहले ही निरीक्षण कर चुकी है। बता दें कि सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑरेंज-येलो लाइन के 2 रूट 30 किलोमीटर लंबे हैं। फिलहाल 12 किमी में ही मेट्रो दौड़ रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से सवाल उठने लगे हैं। भोपाल मेट्रो तो साइकिल से भी धीमी रफ्तार से दौड़ रही है। भोपाल मेट्रो की सुस्त रफ्तार भोपाल में मेट्रो संचालन की सुस्त रफ्तार को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया। करीब 30 किमी के लिए हुए करीब 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। सिस्टम नहीं होने से एक ही ट्रैक पर दौड़ रही जानकारी के अनुसार, भोपाल और इंदौर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो दौड़ रही है। जिस ट्रैक पर दौड़ती, उसी पर वापसी सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही हैं। यानी जो जा रही है, वह उसी ट्रैक पर लौट रही है। जबकि अप ट्रैक (एम्स से सुभाष नगर) पर ट्रेन नहीं दौड़ती। नए सिस्टम के बाद दोनों तरफ से ट्रेन चलेगी। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लगेगी भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी। नए सिस्टम से यह फायदा नए सिस्टम के शुरू होने के बाद मेट्रो दोनों ओर से चलेगी। इससे 75 मिनट की टाइमिंग कम होगी। इससे लोगों को आसानी से मेट्रो मिल सकेगी। फेरे भी बढ़ जाएंगे। ऐसे में सुबह और शाम को ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो मिल सकेगी।

महिदपुर को मिला सामाकोटा बैराज और 13 उप स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्र को मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा का आशीर्वाद प्राप्त है। माँ क्षिप्रा इस क्षेत्र के किसानों को अन्न उत्पादन के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराकर आशीर्वाद प्रदान करती है। महिदपुर भाग्यशाली है कि क्षिप्रा नदी पर बने लगभग सभी बांध और जलाशय महिदपुर में ही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ: 2028 के भव्य आयोजन के लिए इन दिनों उज्जैन और इसके आसपास हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य जारी हैं। डोंगला से गुजरने वाला नया फोरलेन महिदपुर की नई तकदीर लिखेगा। महिदपुर शहर ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में भी अपनी अलग पहचान रखता है, इसमें भी और गति आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को उज्जैन के महिदपुर में विकास कार्यों के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से कुल 207 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत के 19 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें करीब 188 करोड़ 42 लाख रुपए की लागत के सामाकोटा बैराज के लोकार्पण सहित क्षेत्र के 13 उप-स्वास्थ्य केंद्र के नए भवनों, महाविद्यालय एवं स्कूलों के नवीन भवनों तथा नवीन विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाकोटा बैराज उज्जैन जिले में जल संरक्षण को नई ऊर्जा देगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जिससे हमारे अन्नदाता किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल और खेतों को नई संजीवनी मिलेगी। इतना ही नहीं, पानी की हरेक बूंद को सहेजने का यह भागीरथ प्रयास आने वाले सिंहस्थ और उज्जैन के भविष्य के लिए कवच का कार्य करेगा।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिदपुर की मावा-बाटी और गुलाटी दोनों ही प्रसिद्ध है। यहां आने का अलग ही आनंद है। भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्थान महिदपुर में है। काल गणना में भी यहां के डोंगला का योगदान अतुलनीय है। राजा जयसिंह ने 300 साल पहले उज्जैन, बनारस, जयपुर, मथुरा और दिल्ली में वेधशालाओं (जंतर-मंतर) का निर्माण कराया। सम्राट विक्रमादित्य और आर्यभट्ट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने डोंगला में आधुनिक ऑब्जर्वेटरी का निर्माण कराया है। दुनिया अपनी घड़ी में डोंगला से स्टैंडर्ड टाइम तय करे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में विश्व में भारत ने अपनी अलग छवि बनाई है। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक लगातार सरकार चलाने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने देशवासियों को नि:शुल्क आवास, गरीबों को रसोई गैस और 5 लाख तक के नि:शुल्क इलाज की बड़ी सौगातें दी हैं। राज्य सरकार ने भी नवाचार करते हुए एयर एंबुलेंस की शुरुआत की है। सरकार राहवीर योजना अंतर्गत सड़क पर घायलों की मदद करने वालों को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है। हमारी सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सम्मान निधि और लाड़ली बहनों को निरंतर राशि दी जा रही है। अब तक लाड़ली बहनों को 60 हजार करोड़ की राशि अंतरित कर चुकी है। हमारी सरकार प्रदेश के अन्नदाताओं और बहनों के सम्मान के लिए कृत संकल्पित होकर आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने पिछला वर्ष उद्योग और रोजगार को और यह वर्ष किसान कल्याण को समर्पित किया है। पहले सिंचित रकबा मात्र 7.5 लाख हेक्टेयर था। वर्ष 2002-03 से प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की शुरुआत हुई। वर्ष 2023 में हमारी सरकार बनने तक प्रदेश की 44 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित थी। अब ढाई साल में ही यह आंकड़ा बढ़कर 65 लाख हैक्टेयर हो गया है। राज्य सरकार ने आगामी ढाई वर्ष में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिया जा रहा है। किसानों को एमएसपी की गारंटी देकर सरकार ने 2652 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा है। सोयाबीन पर भी किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया है। प्रदेश में किसानों के लिए सड़क, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। किसानों को सिंचाई के लिए अब दिन में भी बिजली प्रदाय की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुराने जमाने में जब उज्जैन में परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, तब लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के वंशज और तत्कालीन महाराज ने महिदपुर में सिंहस्थ का आयोजन कराया था। महिदपुर में महारानी गंगाबाई के नाम पर एक घाट भी बना है। उनकी वीरता और 1857 की क्रांति के सूर्यवीरों के अदम्य साहस, पुरुषार्थ एवं पराक्रम का गौरवशाली संग्राम महिदपुर की ऐतिहासिक धरा पर लड़ा गया, जिसने स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी थी। कार्यक्रम को जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, स्थानीय सांसद  अनिल फिरोजिया, महिदपुर विधायक  दिनेश जैन (बोस) सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक  बहादुर सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।  

रांची में चावल महंगा, थोक-खुदरा में 4–6 रुपये तक अंतर

रांची  झारखंड की राजधानी रांची के खुदरा और थोक बाजार में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) पंडरा की ओर से 17 जून 2026 को रिपोर्ट जारी की गई है. एपीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की अधिकांश वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, खुदरा और थोक बाजार में कई उत्पादों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला. खुदरा बाजार में लखीभोग चावल सबसे महंगा पीएमसी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में लखीभोग चावल की कीमत 55 रुपये प्रति किलो रही. वहीं परिमल चावल 38 रुपये और मंसूरी चावल 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है. तीनों किस्मों का औसत खुदरा मूल्य 42.67 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. इसके मुकाबले थोक बाजार में लखीभोग चावल 49.50 रुपये प्रति किलो, परिमल 34 रुपये और मंसूरी 31 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. थोक बाजार में चावल का औसत मूल्य 38.17 रुपये प्रति किलो रहा. दालों के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं दैनिक आवश्यक वस्तुओं की रिपोर्ट के अनुसार चना दाल, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग दाल और मसूर दाल के दाम सामान्य स्तर पर बने हुए हैं. बाजार में इन वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त होने के कारण कीमतों में कोई उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने से दालों के दाम नियंत्रित हैं. हालांकि मानसून की स्थिति और परिवहन लागत आने वाले दिनों में कीमतों को प्रभावित कर सकती है. खाद्य तेलों की कीमतें भी स्थिर रिपोर्ट में मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति तेल, सोया तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल के मूल्य भी शामिल किए गए हैं. इन उत्पादों के दाम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है. खुदरा और थोक बाजार में तेलों की कीमतों में कुछ अंतर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता बनी हुई है. यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात मानी जा रही है. सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बरकरार एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार आलू, प्याज और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. मंडी में सब्जियों की आवक नियमित रूप से हो रही है, जिससे कीमतों पर दबाव नहीं बढ़ा है. व्यापारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने और आपूर्ति श्रृंखला सुचारु होने के कारण बाजार में फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है. इसी वजह से उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सामान्य कीमतों पर उपलब्ध हो रही हैं. खुदरा और थोक बाजार में कीमतों का अंतर स्वाभाविक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया कि थोक बाजार की तुलना में खुदरा बाजार में कीमतें अधिक हैं. इसका कारण परिवहन खर्च, भंडारण, पैकेजिंग और खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन माना जाता है. विशेष रूप से चावल की तीन प्रमुख किस्मों में खुदरा और थोक बाजार के बीच चार से छह रुपये प्रति किलो तक का अंतर दर्ज किया गया. इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में खरीद करने वाले व्यापारियों को कम कीमत का लाभ मिलता है, जबकि अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते वही उत्पाद महंगा हो जाता है. नियंत्रण में हैं कीमतें रिपोर्ट के अनुसार, रांची और आसपास के इलाकों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं. चावल, दाल, खाद्य तेल और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. यदि आने वाले दिनों में मौसम और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहती है, तो बाजार में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम दिखाई देती है. फिलहाल रसोई का बजट किसी आपदा प्रबंधन योजना जैसा नहीं लग रहा, जो अपने आप में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है.