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सचिन तेंदुलकर का टेस्ट रिकॉर्ड खतरे में, दूसरे टेस्ट में जो रूट के पास सुनहरा मौका

लंदन  इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड  के बीच खेले जा रहे दूर टेस्ट मैच में एक ऐसा कारनामा होने वाला है जो विश्व क्रिकेट को हैरान कर देगा, जी हां ऐसा इसलिए क्योंकि क्रिकेट के भगवान मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का टेस्ट वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटने वाला है और वो तोड़ने वाला खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि इंग्लैंड के स्टार बैटर जो रुट हैं. इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में एक बहुत बड़ा इतिहास रचने की कगार पर खड़े हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी दूसरे टेस्ट मैच के दौरान जो रूट टेस्ट क्रिकेट में अपने 14,000 रन पूरे करने से महज 2 रन दूर हैं. अगर वो इस मुकाबले में यह 2 रन बना लेते हैं, तो वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में मैचों के लिहाज से सबसे तेज 14,000 रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन जाएंगे।  जो रूट ने अब तक अपने शानदार टेस्ट करियर में कुल 165 मैच खेले हैं, जिसकी 301 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए वे 13,998 रन बना चुके हैं. इस बड़े मुकाम को हासिल करते ही जो रूट पूर्व भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर के एक बड़े रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे. सचिन तेंदुलकर को टेस्ट क्रिकेट में अपने 14,000 रन पूरे करने के लिए 171 टेस्ट मैच और 279 पारियां खेलनी पड़ी थीं, जबकि जो रूट सिर्फ अपने 165वें टेस्ट मैच में ही इस जादुई आंकड़े को छूने जा रहे हैं।  जो रूट पहले ही टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं और विश्व क्रिकेट के इतिहास में वो महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बाद टेस्ट रनों के मामले में दूसरे नंबर पर काबिज हैं. अब पूरी दुनिया की नजरें जो रूट पर होंगी की वो कब इस ऐतिहासिक आंकड़े को पार करते हैं। 

BCCI का बड़ा फैसला, अफगानिस्तान सीरीज के लिए हर्षित राणा की टीम इंडिया में वापसी

 चेन्नई भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज के आख‍िरी  मैच से पहले टीम इंडिया को बड़ी राहत मिली है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने तीसरे और अंतिम वनडे मुकाबले के लिए तेज गेंदबाज हर्षित राणा को टीम में शामिल करने का ऐलान किया है. दोनों टीमों के बीच सीरीज का आखिरी मुकाबला 20 जून को चेन्नई में खेला जाएगा।  शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम फिलहाल सीरीज में 2-0 की बढ़त बनाए हुए है. ऐसे में अंतिम मुकाबले से पहले हर्षित राणा की वापसी टीम के लिए अतिरिक्त मजबूती लेकर आई है।  चोट के कारण लंबे समय से बाहर थे हर्षित हर्षित राणा फरवरी 2026 के बाद से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर थे. उन्हें टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले खेले गए एक वॉर्म-अप मैच के दौरान चोट लग गई थी. चोट इतनी गंभीर थी कि वह पूरे आईपीएल सीजन से भी बाहर हो गए थे।  हालांकि अब उन्होंने बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में अपना रिहैबिलिटेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इसके बाद सेलेक्शन कमेटी ने उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल करने का फैसला किया।  BCCI ने जारी किया आधिकारिक बयान बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मेन्स सेलेक्शन कमेटी ने हर्षित राणा को तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया है. राणा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपना र‍िहैब पूरा कर लिया है और अब वह चेन्नई में टीम के साथ जुड़ चुके हैं।  तीसरे वनडे के लिए भारत का अपडेटेड स्क्वॉड: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर (उपकप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बरार, हर्ष दुबे, यशस्वी जायसवाल और हर्षित राणा।  हर्षित राणा की वापसी भारतीय टीम के लिए अहम मानी जा रही है. युवा तेज गेंदबाज अपनी अतिरिक्त गति और आक्रामक गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं. अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या उन्हें चेन्नई वनडे की प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है या नहीं। 

लियोनेल मेसी के पास वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का मौका, एक गोल से रच देंगे फीफा वर्ल्ड कप में नया इतिहास

नई दिल्ली  फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने पूरे शबाब पर पहुंच चुका है और दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शुमार लियोनेल मेसी ने टूर्नामेंट के अपने पहले ही मैच में तहलका मचा दिया है. अर्जेंटीना के कप्तान मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ मैच में शानदार हैट्रिक गोल दागकर साफ संकेत दे दिए हैं कि वे इस विश्व कप में किस इरादे से उतरे हैं. मेसी के इस जादुई प्रदर्शन ने एक बार फिर फुटबॉल जगत में 'गोट' (GOAT – सर्वकालिक महान खिलाड़ी) की बहस पर विराम लगा दिया है।  200वें मैच में 118वां अंतरराष्ट्रीय गोल विश्व चैंपियन कप्तान लियोनेल मेसी भले ही अपना आखिरी वर्ल्ड कप खेल रहे हैं, लेकिन मैदान पर 38 साल की उम्र में भी उनमें 18 साल के युवा खिलाड़ी जैसा जोश और फुर्ती नजर आ रही है. अल्जीरिया के खिलाफ खेला गया यह मुकाबला मेसी के करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था, जिसे उन्होंने बेहद यादगार बना दिया. मैच के 17वें मिनट में ही विपक्षी डिफेंडर्स और गोलकीपर को छकाते हुए मेसी ने एक पावरफुल शॉट मारा जो सीधे नेट में गया. इस गोल के साथ मेसी ने अपने करियर का 118वां अंतरराष्ट्रीय गोल दर्ज किया. इसके बाद मेसी का जलवा जारी रहा और उन्होंने मैच के 60वें मिनट में अपना दूसरा और फिर 76वें मिनट में तीसरा गोल दागकर अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की।  क्लोजे के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, अब इतिहास रचने से 1 कदम दूर इस धमाकेदार हैट्रिक के साथ ही लियोनेल मेसी ने फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने के जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोजे के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. वर्ल्ड कप में अब मेसी के नाम भी कुल 16 गोल दर्ज हो गए हैं. अगले मैच में मैदान पर उतरते ही मेसी के पास सिर्फ 1 गोल करते ही इस महा-रिकॉर्ड को तोड़ने का सुनहरा मौका होगा, जिसे करते ही वो विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले दुनिया के इकलौते खिलाड़ी बन जाएंगे।  फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले टॉप-5 फुटबॉलर मिरोस्लाव क्लोजे (जर्मनी) – 16 गोल लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना) – 16 गोल रॉनल्डो नाजारियो (ब्राजील) – 15 गोल किलियन एम्बापे (फ्रांस) – 14 गोल गेर्ड मुलर (जर्मनी) – 14 गोल

वन पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर, सीएम डॉ. यादव बोले—पर्यटकों के लिए बढ़ाई जाएं सुविधाएं; आंध्रप्रदेश से होगा वन्यजीव आदान-प्रदान

वन पर्यटन का करें विस्तार, पर्यटकों के लिये बढ़ाएं सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आंध्रप्रदेश को देंगे बाघ और गौर, बदले में उनसे लेंगे वाइल्ड डॉग्स राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ेंगे गांधीसागर में छोड़े जाएंगे नर-मादा 2 चीते संगठित वन अपराधों की रोकथाम के लिए बनेगा राज्य स्तरीय टास्क फोर्स वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए होगी कमाण्ड एवं कन्ट्रोल रूम की स्थापना इस साल हुआ 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण, संग्राहकों को मिलेगा 710.71 करोड़ का बोनस प्रदेश के 5 नेशनल पार्क के समीप बनेंगे रेस्क्यू सेंटर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे घर के रूप में कर रहे विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और समृद्ध वन क्षेत्रों से है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी और दीर्घकालिक पहल सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक एवं वानस्पतिक विविधताओं का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, यह हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी और संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों के विस्तार, पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की उनके रीति-रिवाजों के साथ सहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन विभाग वन्य पर्यटन का तेजी से विस्तार करे। इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। वन पर्यटन बढ़ाने के लिए पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं। उन्हें होम-स्टे जैसे आकर्षणों के बारे में भी बताया जाए। सफारी गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाए। इससे पर्यटक तेजी से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की समृद्ध वन सम्पदा के संरक्षण, संवर्धन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव संरक्षण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश के अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था अपनाई जाए। साथ ही नए वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर प्रदेश की वन सम्पदा को और भी समृद्ध बनाया जाये। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जंगल की सीमा में जनजातीय बंधुओं के देवस्थानों को समुचित तरीके से उनके रीति-रिवाजों के अनुसार ही विकसित करें। बताया गया कि इस साल 300 देवस्थान विकसित किए जाएंगे। इससे पहले 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आंध्रप्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर देने का अनुरोध किया है। उन्हें बाघ और गौर देने के लिए कार्यवाही की जाए, बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्य प्राणी लेने के प्रयास किए जाएं। इसी प्रकार राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिरैया देने पर सहमति व्यक्त की गई है। उनसे सोन चिरैया प्राप्त कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर वनों के संगठित अपराधों के सख्ती से नियंत्रण के लिए 'राज्य स्तरीय टास्क फोर्स' का गठन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसी प्रकार वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन मुख्यालय स्तर पर 'कमॉण्ड एवं कन्ट्रोल रूम' की स्थापना के प्रस्ताव का भी अनुमोदन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज के परिवहन के लिए वन विभाग को 'परिवहन अनुज्ञा शुल्क' में वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानव और वन्य जीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि ऐसे संघर्ष में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल मिलकर ऐसी आपदा का समुचित प्रबंधन कर सकेंगे। बैठक में प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर उन्हें घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 52 चीते मौजूद हैं, इनमें से 32 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्में हैं। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण में नर-मादा (दो) चीते जुलाई 2026 में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या और इनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश में 5 स्थानों यथा कान्हा, बांधवगढ़, पेंच एवं पन्ना नेशनल पार्क के समीप वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए वन विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल गई है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की सीमा में मौजूद 6 हार्थियों रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश में हाथियों के अनुरक्षण के लिए सहायक महावत के पद बढ़ाए जाएंगे। वन राजस्व भूमि सीमा विवाद के निराकरण के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के अनूपपुर एवं डिण्डौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर आपदा देखने को मिली है। यह बीमारी 30 साल में एक बार देखने मे आती है। पिछली बार 1997 में यह बीमारी आई थी। इस आपदा के विमोचन के लिए अतिरिक्त बजट से बीमारीग्रस्त वृक्षों का विदोहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है। तेंदुपत्ता संग्राहकों को इस साल कुल 710.71 करोड़ रुपए की तेंदूपत्ता बोनस राशि वितरित की जाएगी। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने के लिए कार्यवाही की जा रही है। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन सहित वरिष्ठ वन अधिकारी भी उपस्थित थे।  

गुरु अर्जन देव जी के 420वें शहीदी दिवस के अवसर पर पंचकूला में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित

गुरु अर्जन देव जी का बलिदान सत्य, साहस और मानवता की रक्षा का अमर संदेश: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरु अर्जन देव जी के 420वें शहीदी दिवस के अवसर पर पंचकूला में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित गुरु साहिब की शिक्षाएं विकसित भारत के निर्माण में हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा: मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार सिख गुरुओं के इतिहास और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंचम पातशाह गुरु अर्जन देव जी का बलिदान भारतीय इतिहास में सत्य, धर्म, मानवता और आध्यात्मिक शक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उनका जीवन और शहादत हमें अन्याय, अत्याचार और असत्य के सामने कभी न झुकने की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को पंचकूला में गुरु अर्जन देव जी के 420वें शहीदी दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गुरु अर्जन देव जी के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छबील सेवा भी की। कार्यक्रम में हरियाणा व पंजाब से अनेक संत-महापुरुष पहुंचे और हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया। हरियाणा सरकार द्वारा ‘संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना’ के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माता मनसा देवी और नाडा साहिब की पावन धरती पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने गुरु अर्जन देव जी के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान केवल सिख समाज की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास त्याग, तपस्या, बलिदान और आध्यात्मिक पराक्रम की गौरवशाली परंपरा से भरा हुआ है। जब-जब देश, धर्म, संस्कृति और मानवता पर संकट आया, तब-तब हमारे गुरुओं और संतों ने अपने बलिदान से सत्य और धर्म की रक्षा की। गुरु अर्जन देव जी का बलिदान इसी महान परंपरा का सर्वोच्च उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने समाज को जोड़ने और मानवता को एक सूत्र में पिरोने का महान कार्य किया। उन्होंने अमृतसर में हरमंदिर साहिब की स्थापना कर उसके चारों दिशाओं में चार द्वार बनवाए, जो इस बात का प्रतीक हैं कि यह पवित्र स्थान किसी एक जाति, वर्ग या धर्म के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए खुला है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने सदियों पहले ही सामाजिक समरसता, समानता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार रूप दिया। नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर, संत नामदेव, बाबा फरीद और संत रविदास सहित विभिन्न संतों की वाणी को संकलित कर गुरु अर्जन देव जी ने भारत की विविधता को एकता के सूत्र में बांधने का अनुपम कार्य किया। गुरु ग्रंथ साहिब आज भी पूरी मानवता के लिए आध्यात्मिक प्रकाश स्तंभ के रूप में मार्गदर्शन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि जब हम गुरु अर्जन देव जी के बलिदान को याद करते हैं तो गौरव के साथ-साथ उन यातनाओं का स्मरण भी होता है, जिन्हें उन्होंने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए सहन किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुगल शासक जहांगीर की सत्ता गुरु साहिब के बढ़ते प्रभाव और आध्यात्मिक जागरण से भयभीत हो गई थी। उन्हें लाहौर में बंदी बनाकर अमानवीय यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तपती तवी पर बैठाना, शरीर पर गर्म रेत डालना और असहनीय पीड़ा देना अत्याचार की पराकाष्ठा थी, लेकिन गुरु साहिब के चेहरे पर कोई शिकन नहीं आई। उन्होंने ‘तेरा किया मीठा लागे’ का उच्चारण करते हुए परमात्मा की इच्छा को स्वीकार किया। यह घटना केवल शहादत नहीं बल्कि आध्यात्मिक धैर्य, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का बलिदान हमें सिखाता है कि सत्य, न्याय और संस्कृति की रक्षा के लिए कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब गुरु साहिब की शिक्षाएं हमारे लिए मार्गदर्शक शक्ति हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की धरती संतों, गुरुओं और वीरों की भूमि रही है। यहां की मिट्टी में गीता का ज्ञान भी है और गुरुओं के बलिदानों की सुगंध भी। इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सिख गुरुओं के योगदान और बलिदान को सम्मान देने का कार्य किया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व, वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन तथा करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण इसी दिशा में उठाए गए ऐतिहासिक कदम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने भी सिख इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। हरियाणा सरकार ने आठवीं कक्षा के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के इतिहास को शामिल किया है। अब विद्यार्थी सिख गुरुओं के साथ-साथ बाबा बंदा सिंह बहादुर के त्याग, बलिदान और आदर्शों का भी अध्ययन करेंगे। उन्होंने बताया कि हजूर साहिब, नांदेड़ की यात्रा के लिए कुरुक्षेत्र और सिरसा से विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया गया। इसके अलावा वर्ष 1984 के दंगा प्रभावित 121 परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया है। वीर बाल दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंचकूला में इन परिवारों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरसा स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की लगभग नौ एकड़ भूमि बिना किसी शुल्क के गुरुद्वारा साहिब के नाम हस्तांतरित की गई है। उन्होंने स्वयं संगत की उपस्थिति में इसके दस्तावेज सौंपे थे। उन्होंने बताया कि यमुनानगर में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का नाम गुरु तेग बहादुर सिंह जी के नाम पर रखा गया है। इसी प्रकार अंबाला के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज और टोहाना-जींद-धमतान साहिब मार्ग का नामकरण भी गुरु तेग … Read more

जमीन-प्रॉपर्टी विवादों पर अहम निर्णय, हाईकोर्ट बोला- सिर्फ नामांतरण या टैक्स भुगतान से मालिकाना हक साबित नहीं होता

 ग्वालियर जमीन खरीदने से पहले केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स के दस्तावेज देखकर संतुष्ट हो जाना भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक नहीं था, तो उसके द्वारा किया गया पूरा सौदा अवैध माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नगर पालिका में नाम दर्ज होने या टैक्स जमा करने मात्र से किसी व्यक्ति का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। यह टिप्पणी अशोकनगर के लंबरदार मोहल्ले स्थित धनुषधारी बांके देव मंदिर की करीब 98 बीघा भूमि से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान की गई। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन मंदिर के नाम दर्ज है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के पुत्र कमलदास ने स्वयं को जमीन का मालिक बताकर इसके प्लॉट काटकर कई लोगों को बेच दिए। खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और वर्षों तक प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा किया। खंडपीठ ने खरीदारों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का पुजारी या महंत संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केवल उसका प्रबंधक होता है। इसलिए उसके पास संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के पास वैध स्वामित्व नहीं है, वह जमीन का हस्तांतरण नहीं कर सकता। ऐसे में खरीदारों को भी मालिकाना अधिकार नहीं मिलेगा और उन्हें अतिक्रमणकारी माना जाएगा। कोर्ट ने दोहराया कि रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे दस्तावेज स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, बल्कि मूल मालिकाना हक की जांच सबसे महत्वपूर्ण है।  

इंदौरवासियों के लिए खुशखबरी! यशवंत सागर तालाब से बढ़ेगी जलापूर्ति, टंकियां भरने में नहीं होगी दिक्कत

इंदौर इंदौर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर की जल-संग्रहण क्षमता नगर निगम बढ़ाने जा रहा है। देवधरम फिल्टर स्टेशन पर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू होने वाला है। इसके बाद हर दिन यशवंत सागर से अधिक पानी लिया जा सकेगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। अभी छह टंकियों से पानी की सप्लाई होती है।  इस साल शहर में जलसंकट ने शहरवासियों को परेशान किया और निगम अफसरों को भी चिंता में डाल दिया। अगले साल फिर जलसंकट न हो, इसके लिए यशवंत सागर से अधिक पानी लेने की योजना बनाई गई है। पंद्रह साल पहले नगर निगम ने यशवंत सागर तालाब/बांध की ऊंचाई बढ़ाई थी। उसके बाद से तालाब में जून तक पानी रहता है। फिलहाल तालाब से 54 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी लेकर छह टंकियां भरी जाती हैं और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के कुछ संस्थानों को भी पानी दिया जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ने के बाद अधिक मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे शहर के पश्चिमी हिस्से को गर्मी के दिनों में फायदा होगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि जून तक तालाब में बचे पानी का उपयोग सप्लाई के लिए किया जा सके। घरों तक पानी पहुंचाने में यशवंत सागर के पानी की लागत 12 रुपये प्रति हजार लीटर आती है, जबकि नर्मदा जल की लागत 26 रुपये प्रति हजार लीटर है। लिंबोदी तालाब को किया जा रहा है जिंदा नगर निगम लिंबोदी तालाब को भी पुनर्जीवित कर रहा है। तालाब का गहरीकरण और खुदाई का काम किया जा रहा है। इसके बाद तालाब की पाल को मजबूत किया जाएगा। इस काम के लिए नगर निगम पांच करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

कर्मवीर सम्मान–2026 से नवाजे जाएंगे संतोष चौबे, साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान का सम्मान

 संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित भोपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'कर्मवीर सम्मान–2026' से सम्मानित किया जाएगा।  यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ श्री श्रीराम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री नुरूल हसन 'नूर' भी सम्मानित होंगे।  इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक श्री शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

ट्राईसिटी को बड़ी सौगात! अक्टूबर से मोहाली-अंबाला के बीच घटेगा सफर का समय, बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था

मोहाली ट्राईसिटी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला व मोहाली) के यात्रियों को आने वाले महीनों में यातायात जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर तक मोहाली की आईटी सिटी से अंबाला तक का सफर करीब 30 मिनट कम हो जाएगा। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तहत बनने वाला 30 किलोमीटर लंबा अंबाला-आईटी सिटी खंड लगभग 89 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है। इसके चालू होने से यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इससे पहले सितंबर तक मोहाली-सरहिंद कॉरिडोर भी जनता के लिए खोल दिया जाएगा। 27.37 किलोमीटर लंबा यह मार्ग 91 प्रतिशत तैयार हो चुका है और इसके शुरू होने पर यात्रियों का लगभग 30 मिनट का समय बचेगा। इस बीच आईटी सिटी-कुराली सेक्शन पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के शुरू होने से वाहन चालकों को खरड़ और मोहाली एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले जाम से राहत मिली है तथा लगभग 45 मिनट का समय बच रहा है। बठिंडा मार्ग पर सबसे बड़ी राहत का इंतजार NHAI अधिकारियों के अनुसार 106.92 किलोमीटर लंबे सरहिंद-सेहना विस्तार परियोजना को अभी केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद मोहाली/चंडीगढ़ से बठिंडा तक का सफर करीब 90 मिनट कम हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरे रिंग रोड नेटवर्क का सबसे बड़ा समय बचाने वाला हिस्सा होगा। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास को मिली मंजूरी हाल ही में NHAI ने 1,878.31 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाईपास और 1,463.95 करोड़ रुपये की लागत वाले ग्रीनफील्ड स्पर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं। इससे दोनों परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास बनने के बाद यात्रियों को वर्तमान में एनएच-5 और एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले भारी जाम से राहत मिलेगी तथा सफर का समय 30 से 40 मिनट तक कम हो सकता है। वहीं 10.3 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड स्पर अंबाला-चंडीगढ़ एक्सप्रेसवे को जीरकपुर बाईपास से जोड़ेगा। यह एक सीधा और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर होगा, जिससे अंबाला, दिल्ली, चंडीगढ़, जीरकपुर, पंचकूला, बद्दी और शिमला के बीच आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी। गडकरी ने बताई परियोजना की अहमियत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख शहरी चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा तथा हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र तक तेज और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। पूरी रिंग रोड से चार घंटे तक की बचत NHAI के अनुसार पिंजौर बाईपास पहले ही चालू हो चुका है, जबकि पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ खंड के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। कुछ अन्य लिंक अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और व्यवहार्यता अध्ययन के चरण में हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्राईसिटी रिंग रोड का पूरा 244 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार होने के बाद विभिन्न मार्गों पर यात्रा समय 30 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक कम हो जाएगा। पूरे रिंग रोड का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को कुल मिलाकर लगभग चार घंटे की बचत होगी। NHAI का मानना है कि परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद हजारों वाहन प्रतिदिन चंडीगढ़ शहर के अंदरूनी मार्गों के बजाय रिंग रोड का उपयोग करेंगे, जिससे ट्राईसिटी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था काफी बेहतर हो जाएगी।  

ट्रंप की नई चाल का खुलासा! ब्रह्मा चेलानी बोले- भारत के बढ़ते प्रभाव से बदली अमेरिकी रणनीति

नई दिल्ली अमेरिका रंग बदल रहा है. जिस भारत-अमेरिका दोस्ती के कसीदे पढ़े जाते थे, उसका हनीमून पीरियड अब खत्म होता दिख रहा है. अमेरिका ने एक झटके में इंडो-पैसिफिक कमांड से ‘इंडो’ शब्द ही गायब कर दिया है. लेकिन इसमें एक मैसेज भी है. ऐसा लग रहा है क‍ि अमेर‍िका भारत के दबदबे से घबरा रहा है. इसल‍िए डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ चीन से अपनी सेटिंग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत को दबाने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान को खाद-पानी देने की तैयारी में हैं.कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी और पूर्व व‍िदेश सच‍िव न‍िरुपमा राव ने इस मूव को समझाने की कोश‍िश की है।  ब्रह्मा चेलानी ने क्या कहा? ब्रह्मा चेलानी ने एक्‍स पर ल‍िखा, पेंटागन के इंडो शब्द को हटाने और वापस यूएस पैसिफिक कमांड नाम अपनाने के फैसले, साथ ही हाल की यूएस नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भारत का ज‍िक्र न के बराबर होने से साफ नजर आ रहा क‍ि अमेर‍िका भारत को क‍ितनी अहमियत देता है. ऐसा लगता है कि अब यह रिश्ता किसी साझी सोच पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से सौदेबाजी यानी लेन-देन पर टिका है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ट्रंप चीन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोश‍िश कर रहे हैं. इसके साथ ही, इस इलाके में किसी एक ताकत (यानी भारत) का दबदबा न बन पाए, इसे रोकने के लिए ट्रंप को एक बार फिर पाकिस्तान की उपयोगिता याद आ गई है।  पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने क्या कहा? न‍िरुपमा राव ने एक्‍स पर ल‍िखा, मुद्दा यह है कि क्या अमेरिका अब भी भारत को इस इलाके की व्यवस्था बनाने वाला साझीदार मानता है या फिर अमेरिकी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई मोहरों में से सिर्फ एक उपयोगी मोहरा? यह एक बिल्कुल अलग बात है. और यह पीएम मोदी के उस बयान से पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें उन्होंने भरोसे की बात कही थी।  अगर हम हाल के कई इशारों को एक साथ देखें, तो एक बड़ी तस्वीर बनती है. ट्रंप का भारत को डेड इकॉनमी कहना. रायसीना डायलॉग में अमेरिकी अधिकारी लैंडौ की वह चेतावनी कि अमेरिका भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा. भारतीय नाविकों की मौत और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के साथ हुई तीखी बहस. G7 सम्मलेन में दिखा रुखापन और ठंडी तस्वीरें. पीएम मोदी का दुनिया में भरोसे की कमी होने पर जोर देना. और अब इंडो-पैसिफिक के प्रतीक को ही छोटा कर देना. इनमें से कोई भी एक बात अपने आप में रिश्ते टूटने का सबूत नहीं है. लेकिन जब इन सबको मिलाकर देखा जाता है, तो साफ पता चलता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों का सुनहरा और जोशीला दौर अब खत्म हो रहा है. यह रिश्ता अब ज्यादा सामान्य, ज्यादा मतलब का, लेन-देन वाला और शायद काफी ज्यादा मुश्किल होने वाला है।  भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?     एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि भारत को अब यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि अमेरिका उसका पक्का दोस्त है. अमेरिका भारत को सिर्फ तब तक पूछेगा, जब तक उसका फायदा है. जरूरत खत्म, तो दोस्ती खत्म।      सबसे बड़ा खतरा यह है कि अमेरिका इस इलाके में भारत को बॉस नहीं बनने देना चाहता. भारत को उलझाए रखने के लिए अमेरिका फिर से पाकिस्तान को ताकत और समर्थन दे सकता है।      ट्रंप चीन से लड़ने के बजाय उससे अपने व्यापारिक सौदे सेट करने में लगे हैं. अगर चीन के साथ अमेरिका की डील पक्की हो गई, तो अमेरिका को भारत की कोई खास जरूरत नहीं रह जाएगी।      पीएम मोदी ने भरोसे की कमी की जो बात कही थी, वह बिल्कुल सच साबित हो रही है. भारत को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी. अमेरिका के भरोसे बैठकर हम अपनी सुरक्षा खतरे में नहीं डाल सकते।