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लोकतंत्र सेनानियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने की बनेगी व्यवस्था

लखनऊ आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र को बचाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसके साथ ही सीएम ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों के लिए जल्द ही 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। सीएम ने लोकतंत्र सेनानियों के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। सीएम योगी ने कहा कि आज लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए गौरव की अनुभूति हुई। उनकी अपनी पीड़ा है। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल की यातनाएं सहीं। इसलिए प्रदेश में जब लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार आई तो लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 3,780 लोकतंत्र सेनानी तथा 1,461 उनके आश्रित हैं। सरकार वर्ष 2018 से लोकतंत्र सेनानियों व मरणोपरांत उनके आश्रितों को प्रत्येक माह 20 हजार रूपये की सम्मान राशि दे रही है। साथ ही लोकतंत्र सेनानी या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ पूरे प्रदेश में परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। लोकतंत्र सेनानियों को राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध कराई जा रही है।  पांच लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जल्द सीएम योगी ने कहा कि अब सरकार लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सुविधा भी उलब्ध कराने जा रही है। इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा बनाई जा रही है। आने वाली पीढ़ी हमेशा इस बात को ध्यान में रखेगी कि जो भी देश व लोकतंत्र के हित में काम करेगा, सरकारें उन्हें सम्मानित करेंगी।  सीएम योगी ने किया लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसमें 6 महीने तक जेल में यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्या राम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) व ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) शामिल रहे।  लोकतंत्र सेनानियों ने सुनाई आपबीती इस दौरान लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने बताया कि आपातकाल लगाने का कोई कारण नहीं था। कांग्रेस बस किसी भी तरह सत्ता में रहना चाहती थी। आपातकाल के दौरान हमारी गिरफ्तारी के समय कपड़े फाड़ दिए गए। हम लोगों ने इसके बाद भी सत्याग्रह में भाग लिया, तब बहुत ज्यादा अत्याचार किए गए। लोकतंत्र सेनानी विद्या राम वर्मा ने बताया कि इतने साल बीत जाने के बाद भी आपातकाल के बारे में सोचता हूं तो मन भावुक हो जाता है। सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी दलों के साथ अत्याचार किया गया। मेरा घर रात में घेरा गया, जैसे किसी डकैत को पकड़ने आए हों। जेल में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी की गई। उस समय की सरकार ने कैसे अत्याचार किए गए, आज कोई अहसास भी नहीं कर सकता।

राज्य पुलिस सेवा से IPS बनने का रास्ता साफ, 8 अधिकारियों के नामों को मिली मंजूरी

भोपाल मध्य प्रदेश राज्य पुलिस सेवा के आठ अधिकारियों को IPS संवर्ग में पदोन्नति दी जाएगी। गुरुवार को मंत्रालय में हुई विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में इन अधिकारियों के नाम तय किए गए। करीब दो माह में अधिसूचना जारी होने के बाद इन्हें IPS संवर्ग आवंटित किया जाएगा। नौ पदों के लिए हुई थी DPC वर्ष 2025 के लिए आयोजित इस DPC में कुल नौ पदों पर विचार किया गया था। 1997 बैच के अमृत लाल मीणा का नाम भी बैठक में शामिल किया गया, लेकिन उनके संबंध में निर्णय घोषित नहीं किया गया। मीणा का जाति प्रमाण पत्र मामला छानबीन समिति में लंबित है। वहीं, राजेश मिश्रा और संदीप मिश्रा के नामों पर विचार नहीं किया गया। राजेश मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, जबकि संदीप मिश्रा की एसीआर अनुकूल नहीं होने के कारण उन्हें प्रक्रिया से बाहर रखा गया। DPC में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद बैठक में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य संजय वर्मा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दो वरिष्ठ IPS अधिकारी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, DGP कैलाश मकवाणा और ACS Home संजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे। पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को 2017 बैच आवंटित किया जाएगा। करीब 27 से 28 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद इन्हें यह पदोन्नति मिलने जा रही है। MP में सबसे देरी से हो रही पदोन्नति राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की IPS में पदोन्नति को लेकर मध्य प्रदेश में देरी की स्थिति बनी हुई है। बड़े राज्यों में सबसे देरी से पदोन्नति मध्य प्रदेश में ही हो रही है। तेलंगाना सहित कुछ राज्यों में 2010 से 2012 बैच तक के पुलिस अधिकारी पदोन्नत होकर IPS बन चुके हैं। इस वजह से राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पदोन्नति के मामले में राज्य प्रशासनिक सेवा से करीब 10 वर्ष पीछे चल रहे हैं। जल्द होगी IAS पदोन्नति के लिए DPC राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS संवर्ग में 13 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए भी जल्द DPC बैठक होने वाली है। इसमें वर्ष 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जा रहा है। ये अधिकारी होंगे पदोन्नत IPS संवर्ग में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में 1997 बैच के सीताराम सस्त्या और 1998 बैच की निमिषा पांडेय, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, सब्यसाची सराफ और समर वर्मा शामिल हैं।  

कम पानी, कम जगह और अधिक उत्पादन की आधुनिक खेती

रायपुर भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच खेती की नई और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में एक अभिनव और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यह ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती और पौधों को पानी में घुले पोषक तत्वों के माध्यम से उगाया जाता है। क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक?            हाइड्रोपोनिक्स एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है। इस तकनीक में मिट्टी के स्थान पर विशेष माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषण सीधे प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है। कम संसाधनों में अधिक उत्पादन          हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि वाले किसान, शहरी क्षेत्रों के निवासी तथा छोटे उद्यमी भी इस तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने के कारण मौसम का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है। पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक            विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम पानी की खपत, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और भूमि पर कम दबाव के कारण यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल किया जा रहा है। युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर            हाइड्रोपोनिक्स तकनीक केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान करती है। कम स्थान में व्यावसायिक स्तर पर सब्जियां, हरी पत्तेदार फसलें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगाकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू करने का अवसर मिल रहा है। सरकार दे रही आधुनिक कृषि को बढ़ावा           केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग तथा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं। भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम             हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग खोल रही है। यह तकनीक कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह पद्धति किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।          आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ हाइड्रोपोनिक्स खेती न केवल कृषि को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जल आत्मनिर्भरता का भाव ही बचा सकेगा पर्यावरण संकट से :नागर

भोपाल  मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं ख्यातिलब्ध पर्यावरणविदमोहन नागर को राष्ट्रपति से पद्मश्री अलंकरण मिलने पर परिषद के राज्य कार्यालय में में भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। अलंकरण को राष्ट्रसेवा में किये गये प्रयासों का प्रतिफल निरूपित करते हुएनागर ने भाव विभोर होकर कहा कि यह सम्मान हर उस कार्यकर्ता का है जो निरंतर मां भारती की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित कर रहे हैं।नागर ने पद्मश्री अलंकरण मिलने के बाद भोपाल में राज्यपालमंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड ने अपने अभिनंदन उदबोधन में कहा किनागर के सम्मान ने परिषद को न केवल समाज सेवा के क्षेत्र में प्रतिष्ठा प्रदान की है बल्कि उनके अलंकरण से परिषद से अपेक्षाओं में भी वृद्धि हुई है। अभिनंदन समारोह में राज्य, संभाग एवं जिला कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारियों सहित नेटवर्क से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने सहभागिता की। 

स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगीकरण पर फोकस करें कलेक्टर : मुख्य सचिवजैन

भोपाल  मुख्य सचिवअनुराग जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश को विकसित किए जाने के लिए बुनियादी रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगीकरण और मानवसंसाधन को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन से जुड़़ी योजनाओं और लक्ष्य आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए आसान प्रक्रिया अपनाएं। उन्होंने सुशासन के अनेक बिंदुओं की नियमित समीक्षा से आए बदलाव के लिए कलेक्टर्स की तारीफ की। मुख्य सचिवजैन ने गुरूवार को मंत्रालय से वी.सी के माध्यम से कलेक्टर, कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के साथ कलेक्टर्स कांफ्रेंस में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। पुलिस महानिदेशकैलाश मकवाना भी इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्य सचिवजैन ने कलेक्टर्स से कहा कि शहरीकरण के तहत मास्टर प्लान तैयार करने के साथ औद्योगीकरण के लिए निवेश आकर्षित करने पर भी काम किया जाए। उन्होंने मध्यप्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवसंसाधन के कौशल विकास पर भी काम करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि पी.एम गतिशक्ति पर निर्माण कार्यों और संपत्ति की मेपिंग चल रही है, कलेक्टर्स सी.एम गतिशक्ति पर भी प्रदेश के निर्माण कार्यों और समस्त प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी अपडेट करें जिससे नियमित समीक्षा हों सके। उन्होंने शासकीय संपत्ति का उपयोग अन्य विभागों द्वारा किए जाने पर भी बल दिया।जैन ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय भवन के निर्माण के बाद रिक्त हुए स्कूल भवनों में आयुष बेलनेस सेंटर, उप-स्वास्थ्य केंद्र,आगंनवाड़ी आदि संचालित किए जा सकते है। कानून व्यवस्था पर समन्वित प्रयास करने के निर्देश बैठक की शुरूआत में कानून व्यवस्था की समीक्षा की गयी। मुख्य सचिवजैन ने निर्देश दिए कि अनुभाग स्तर पर एस.डी.एम और एस.डी.ओपी तथा जिला स्तर पर डी.एम और एस.पी संयुक्त रूप से भ्रमण आदि कर कानून व्यवस्था उत्कृष्ट बनाएं। उन्होंने एनकार्ड की नियमित बैठक करने और साइबर फ्राड जैसी घटनाएं रोकने के लिए गम्भीरता से कार्यवाही करने को कहा है। डीजीपीकैलाश मकवाना ने सभी शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास के क्षेत्र को ड्रग फ्री जोन बनाने और साइबर धोखाधडी को रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पाक्सो एक्ट के तहत एक माह में चार्ज सीट प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखने के लिए कहा है। विस्फोटक अधिनियम की शर्तों का शतप्रतिशत पालन कराने के लिए लाइसेंसी संस्थानों का संयुक्त पुलिस और प्रशासन को निरीक्षण करने के निर्देश दिए है। बैठक में नवीन न्याय संहिता के क्रियान्वयन के लिए न्यू क्रिमीनल लॉ और ई-साक्ष्य में गम्भीरता से कार्य करने और समय सीमा में चालान पेश करने को कहा है। डीजीपी ने कहा कि रियल टाइम में संवाद हो जिससे अपराधों को रोका जा सके। इस दौरान अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर कार्यवाही के लिए विशेष कार्यवाही सतत् रूप से करने के निर्देश दिए गए है। बेसिक सुशासन आवश्यक सुशासन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिवजैन लोक सेवा गांरटी और सीएम हेल्पलाइन के समय-सीमा से बाहर के लंबित प्रकरणों के निराकरण में सुधार होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा से स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्य सचिव ने भू-अधिग्रहण मामलों में समय पर अवार्ड आदि पारित करने के कलेक्टर को निर्देश दिए जिससे नागरिक अनावश्यक रूप से परेशान न हों और परियोजनाएं समय से पूरी हो सकें। इस दौरान नामातरण, सीमांकन, बटवारा और शासकीय विभागों को भूमि आवंटन के प्रकरणों की भी समीक्षा की गयी। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि लोकसेवा गारंटी और सीएम हेल्पलाइन से आमजन को बेसिक सुशासन दिया जा सकता है। स्वास्थ्य एवं पोषण की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कलेक्टर से कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अधिकाधिक समय दें और स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास के अमले का संयुक्त भ्रमण कराकर स्वास्थ्य कार्यक्रम में मध्यप्रदेश को बेहतर स्थिति में लाएं। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमीं लाने के लिए सतत् प्रयास करने की जरूतर बताई और प्रसव पूर्व होने वाली जाँच तथा संस्थागत प्रसव कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा है। उन्होंने अनमोल 2.0 कार्यक्रम में सही डाटा एंट्री करने पर बल दिया। मुख्य सचिव ने कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को पोषण के साथ ही उचित उपचार उपलब्ध कराने को कहा है। अगले माह होने वाले दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान के लिए अभी से योजना बनाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सुनिश्चित किया जाए कि पेयजल स्त्रोतों की जाँच हो और उनका शुद्धीकरण किया जाए। मुख्य सचिव ने निक्षयमित्र टी.बी मुक्त भारत अभियान को प्रधानमंत्री की प्राथमिकता का अभियान बताते हुए कहा है कि क्षय रोग के मरीजों को उपचार के साथ ही पोषण किट उपलब्ध कराने के लिए जनप्रतिनिधियों का भी योगदान लिया जाए। बैठक में 1075 पीएससी से चयनित डाक्टर्स के अस्पतालों में पदभार ग्रहण करने के जानकारी दी गयी है। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि स्वास्थ्य विभाग की नियमित समीक्षा करें और स्वास्थ्य संस्थाओं के निर्माण कार्यों की निगरानी करें। मुख्य सचिवजैन ने जिलों में एकल नल-जल योजना के संचालन की समीक्षा की और निर्देश दिए कि इन योजनाओं के संचालन के लिए मापदंड अनुसार संचालन समिति बनाएं। उन्होंने पेयजल स्त्रोतों की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा है। मुख्य सचिव ने कुछ जिलों में मानसून की देरी के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता निरंतर बनाएं रखने के निर्देश दिए। जनजातीय मामलों की समीक्षा में मुख्य सचिव ने सामुदायिक वन संसाधन के संरक्षण एवं प्रबंधन की समीक्षा करते हुए समुदाय से अभी तक प्राप्त वन अधिकार अधिनियम के तहत नवीन दावों और निरस्त दावों के प्रकरणों की समीक्षा की और निर्देश दिए कि वन,राजस्व और जनजातीय कार्य विभाग इस दिशा में संयुक्त पहल करें। विशेष ग्राम सभाओं में दावों पर चर्चा करें जिससे गुणवत्ता बेहतर हों। 100 प्रतिशत बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करें मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए स्कूल जाने योग्य बच्चों के प्रवेश और ड्रॉप आउट बच्चों के पुन:प्रवेश की स्थिति पर संतोष्व्यक्त किया। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में आस-पास के बसाहटों के बच्चों का सौ फीसदी नामांकन हो। उन्होंने आगंनबाड़ी की स्कूल से मैपिंग के कार्य की भी समीक्षा की। इस दौरान उल्लास नवभारत साक्षारता कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए असाक्षर व्यक्तियों को चिह्न्ति करने के निर्देश दिए। उन्होंने हर विद्यार्थी की अपार आइडी बनाने … Read more

ध व्यापारिक उपभोक्ताओं को राहत, गैर-घरेलू पैक्ड LPG पर लगी पाबंदियां समाप्त

 नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में पैदा हुए ऊर्जा संकट के कम होने के संकेतों के बीच केंद्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हालिया संकट के दौरान लागू किए गए अधिकांश सेक्टर-विशिष्ट प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि घरेलू उत्पादन में सुधार और आयातित एलपीजी कार्गो की उपलब्धता बढ़ने से आपूर्ति स्थिति बेहतर हुई है। इसी के मद्देनजर गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं। उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद मंत्रालय के अनुसार, संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोकी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल करते हुए पूर्व खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक अनुमति दे दी गई है। इससे औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए लगाए गए थे प्रतिबंध दरअसल, ईरान संघर्ष के बाद वेस्ट एशिया से एलपीजी आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई थी। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में सरकार ने घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी थी। बाद में स्थिति में कुछ सुधार होने पर सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया, लेकिन कई क्षेत्रों में आवंटन सामान्य स्तर से काफी कम रखा गया था। पेट्रोकेमिकल सेक्टर से LPG उत्पादन की ओर मोड़ा गया कच्चा माल संकट के दौरान एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विशेष निर्देश जारी किए थे। इसके तहत सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल उत्पादन से हटाकर एलपीजी निर्माण में इस्तेमाल किया गया। इस फैसले से पेट्रोकेमिकल कंपनियों, विशेष रूप से रिफाइनिंग सेक्टर की कंपनियों को उत्पादन समायोजन करना पड़ा। अब आपूर्ति स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने इन स्ट्रीम्स का आवंटन धीरे-धीरे फिर से पेट्रोकेमिकल और अन्य उद्योगों के लिए बहाल करने का फैसला किया है। हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि देश में एलपीजी उत्पादन प्रतिदिन 40,000 टन से नीचे न जाए। कच्चे तेल की कीमतें भी लौटीं सामान्य स्तर पर सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। यही वजह है कि आपातकालीन राशनिंग उपायों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। PNG पर शिफ्ट करने की योजना को मिलेगी रफ्तार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट एलपीजी उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। इसके साथ ही कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जोड़ने की योजना को भी तेज किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सिटी गैस नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पात्र एलपीजी उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से PNG पर स्थानांतरित किया जाएगा। एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने का दिया निर्देश सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं का एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने तथा आपूर्ति प्रबंधन को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संशोधित व्यवस्था के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।  

स्कूल पाठ्यक्रम में इमरजेंसी की एंट्री, NCERT ने कक्षा 9 की किताब में जोड़ा नया चैप्टर

नई दिल्ली भारत में इमरजेंसी लागू होने के लगभग पांच दशक बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने पहली बार कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है. इसमें इसे 'प्रमुख चुनौतियों में से एक' के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज़्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे।  यह जिक्र हाल ही में तैयार की गई सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में मिलता है, जिसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों का विश्लेषण करने वाले एक अध्याय में इमरजेंसी को शामिल किया गया है।  एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि यह पहली बार है जब कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में 'आपातकाल' (Emergency) पर एक सेक्शन जोड़ा गया है. स्कूल के पाठ्यक्रम में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, खासकर तब जब देश ने हाल ही में 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 साल पूरे होने का समय देखा है।  इस सेक्शन में लिखा गया, 'भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में आपातकाल लगाया गया. 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति जनता में असंतोष बढ़ रहा था. बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।  'Emergency' टाइटल से से जोड़ा गया खंड नई किताब के चैप्टर 6 में लोकतंत्र और उसके सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में बताया गया है. इसी चैप्टर में 'Emergency' टाइटल से एक खंड जोड़ा गया है, जिसमें 1975–77 के आपातकाल को भारत में लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।  किताब के मुताबिक, जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बढ़ते जन-असंतोष, बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रशासन के आरोपों के बीच आपातकाल लगाया गया था. इसमें कहा गया है कि इस दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई. इसके साथ ही कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।  चैप्टर में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जनआंदोलनों का भी जिक्र है. इसमें बताया गया है कि बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में छात्रों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही. 1977 में आपातकाल हटाया गया, जिसके बाद आम चुनाव हुए और लोगों को मतदान के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला।  अब तक कक्षा 12 के पाठ्यक्रम तक सीमित था विषय अब तक आपातकाल का विषय कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की किताबों में पढ़ाया जाता था, जहां आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र के विकास और उसके सामने आई चुनौतियों के संदर्भ में इस दौर को विस्तार से समझाया जाता था।  कक्षा 9 में इस विषय को शामिल किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि NCERT अब स्टूडेंट्स को भारतीय लोकतंत्र, संविधान और राजनीतिक इतिहास से जुड़े अहम मौकों को स्कूली शिक्षा के शुरुआती चरण में ही रुबरू कराना चाहता है।  'Democracy and You' सेक्शन भी पहली बार जोड़ा गया नई किताब में पहली बार 'Democracy and You' नाम से एक अलग खंड भी जोड़ा गया है. NCERT का कहना है कि इस खंड का मकसद किताब के कंटेंट और छात्रों के असल सामाजिक-राजनीतिक अनुभवों के बीच की दूरी को कम करना है. इसके जरिए छात्रों को ये समझाने की कोशिश की गई है कि वो भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं और उसमें योगदान दे सकते हैं।  आपातकाल जैसे ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से अहम चैप्टर के साथ इस नए खंड को जोड़कर NCERT ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के इतिहास और नागरिक भागीदारी को एक ही शैक्षणिक ढांचे में रखने की कोशिश की है।  इसमें आगे कहा गया,'जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर देश में आपातकाल लागू किया. इस दौरान, ज़्यादातर मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया. लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।  किताब में आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया. 'जयप्रकाश नारायण – जो एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें 'लोकनायक' के नाम से जाना जाता है – के नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, ख़ासकर बिहार और गुजरात में, बड़े पैमाने पर लामबंद किया. 1977 में आपातकाल हटा लिया गया और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला. सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।  'आपातकाल' (Emergency) वाला हिस्सा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर हो रही व्यापक चर्चा का एक हिस्सा है. आपातकाल के अलावा यह पाठ्यपुस्तक लोकतांत्रिक कामकाज के लिए चुनौतियों के तौर पर फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सार्वजनिक नियमों के उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।  इस अध्याय में 'लोकतंत्र और आप' (Democracy and You) नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है. एनसीईआरटी का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें।  आपातकाल के अलावा, संशोधित पाठ्यपुस्तक में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है. इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास हिस्सा है, जिसमें मीडिया को 'लोकतंत्र का चौथा स्तंभ' बताया गया है और लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है।  भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए इस किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं. इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और देश भर में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का जिक्र किया गया है।  यह चैप्टर शासन-व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों … Read more

अमरनाथ यात्रा में हाईटेक सुरक्षा कवच, ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ से हर गतिविधि पर रहेगी नजर

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में सालाना श्री अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए अनंतनाग ज़िले की पुलिस ने ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ शुरू किया है, जो एक व्यापक निगरानी और सुरक्षा पहल है, जिसे पूरे यात्रा मार्ग पर ज़मीन से आसमान तक चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है। गौरतलब है कि श्री अमरनाथ यात्रा अगले हफ़्ते अनंतनाग में पहलगाम और गांदरबल में बालटाल दोनों रास्तों से शुरू हो रही है। इसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किये गये हैं। सरकार ने जम्मू से गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों यात्रा मार्गों को ‘नो-फ़्लाई ज़ोन’ घोषित किया है। पवित्र गुफा मंदिर तक जाने वाले दो पारंपरिक रास्तों में से एक पहलगाम वाला रास्ता चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुज़रता है और दक्षिण कश्मीर हिमालय में लगभग 12,756 फ़ुट की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर पर समाप्त होता है। ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के तहत अनंतनाग पुलिस ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक रूप से जवानों की तैनाती के ज़रिए कई स्तरों वाला सुरक्षा और निगरानी तंत्र तैयार किया है। पुलिस के एक बयान में कहा गया, “ हवाई निगरानी के लिए अहम जगहों पर पांंच ड्रोन तैनात किये जा रहे हैं, जो रियल-टाइम (सही समय पर) निगरानी और हालात की बेहतर जानकारी देंगे। हवाई निगरानी नेटवर्क किसी भी उभरती हुई स्थिति का तुरंत आकलन करने और ज़मीनी इकाइयों द्वारा त्वरित कार्रवाई करने में मदद करता है।” पुलिस के अनुसार ज़मीन पर निगरानी क्षमता को मज़बूत करने और इलाके पर बेहतर नियंत्रण रखने के लिए संवेदनशील जगहों पर 28 रणनीतिक ‘मचान मोर्चे’ (ऊंचे निगरानी पोस्ट) बनाये गये हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने और प्रभावी कार्रवाई की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए तय जगहों पर 22 विशेष रूप से प्रशिक्षित निशानेबाज टीमें भी तैनात की गयी हैं। निगरानी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए, यात्रा मार्ग पर अहम जगहों पर 416 हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे और चेहरा पहचानने वाली प्रणाली (ईआरएस) स्थापित की गयी है।  पुलिस ने कहा, “यह प्रणाली लगातार रियल-टाइम निगरानी करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों या हरकतों की समय पर पहचान करने में मदद करते हैं, जिससे सुरक्षा के एहतियाती उपाय मज़बूत होते हैं।” ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के ज़रिए, अनंतनाग पुलिस ने आसमान और ज़मीन पर अपनी नज़रें प्रभावी ढंग से जमा ली हैं और एक ऐसा बेहतरीन निगरानी नेटवर्क बनाया है, जो यात्रा मार्ग की पूरी निगरानी सुनिश्चित करता है। पुलिस ने कहा, “यह पहल सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित माहौल देने के लिए आधुनिक तकनीक और पेशेवर पुलिसिंग के तरीकों का इस्तेमाल करने के प्रति अनंतनाग पुलिस की प्रतिबद्धता को दिखाती है।”

आपातकाल की 51वीं बरसी ‘संविधान हत्या दिवस’ पर लखनऊ में आयोजित ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में बने रहने के लिए आपातकाल लगाने का पाप किया था। आज पूरा देश 25 जून 1975 का काला दिन याद कर रहा है, जब कांग्रेस ने देश के लोकतंत्र का गला घोटने का काम किया था। सत्ता में बने रहने और न्यायालय के आदेश लागू न होने देने के लिए इंदिरा गांधी ने नागरिकों के अधिकार छीनने का प्रयास किया। कांग्रेस का यह पाप लोकतंत्र और बाबा साहेब के सपनों पर सीधा प्रहार था। लालू प्रसाद व मुलायम सिंह यादव की वर्तमान पीढ़ी कांग्रेस का चाबुक भूलकर उसी के साये में राजनीति कर रही है। मुख्यमंत्री गुरुवार को आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' पर लखनऊ में आयोजित 'लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान भी किया। लोकतंत्र समर्थकों की आवाज को दबाया सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र के समर्थक राजनीतिक दलों, जनसामान्य व मीडिया से जुड़े सभी लोगों की आवाज को दबाया। ऐसा क्या था कि कांग्रेस को आपातकाल थोपना पड़ा, एक ही निष्कर्ष निकलता है कि कांग्रेस ने सिर्फ अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए यह पाप किया और इस पाप को छिपाए रखने के लिए नौजवानों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व सामाजिक संगठनों की आवाज को दबाने की चेष्टा की। कांग्रेस के युवराज देशवासियों की आंख में झोंक रहे धूल मुख्यमंत्री ने कहा, आपातकाल के दौरान न्यायपालिका के अधिकार सीमित कर दिए गए। मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया। यही नहीं, रात के अंधेरे में भारत के संविधान की प्रस्तावना भी बदल दी गई। यह काम उसी कांग्रेस ने किया, जिसके युवराज संविधान की प्रति लेकर देशवासियों की आंख में धूल झोंक रहे हैं। इनका दोहरा चरित्र वर्तमान पीढ़ी को पता होना चाहिए। इसीलिए 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ आयोजित कर पूरे देश व नौजवान पीढ़ी को इससे अवगत कराने का प्रयास हो रहा है। मुलायम करते थे कांग्रेस से गठबंधन का विरोध सीएम ने कहा कि इंदिरा गांधी के अत्याचार से आमजन व राजनीतिक दलों के नेता कराह रहे थे। लोकतंत्र के समर्थन में जेल जा रहे थे। ऐसे ही नेताओं लालू प्रसाद व स्वर्गीय मुलयाम सिंह यादव की वर्तमान पीढ़ी आज उसी कांग्रेस के साये में अपनी राजनीति करती दिखाई दे रही है। कांग्रेस जब भी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का प्रयास करती थी, मुलायम उसका विरोध करते थे। वह कहते थे कि कुछ भी हो, कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होना चाहिए। लेकिन उनके उत्तराधिकारी कांग्रेस के डूबते जहाज पर सवार होकर मुलायम सिंह की विरासत भी डुबोने पर उतारू हैं। ये लोग आज भी एक साथ होकर लोकतंत्र को कमजोर करने और परिवारवाद की राजनीति को प्रोत्साहित करने के लिए संवैधानिक मान्यताओं के विपरीत आचरण करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। भारत लोकतंत्र की जननी भी मुख्यमंत्री ने कहा कि जी-20 की बैठक में पीएम मोदी जी ने बताया था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा ही नहीं, सबसे प्राचीन लोकतंत्र भी है। भारत लोकतंत्र की जननी भी है। जब दुनिया लोकतंत्र के बारे में नहीं जानती थी, तब भारत के तमाम गांवों व क्षेत्रों में लोकतंत्र स्थापित था। यह भारत के डीएनए में है। समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के लिए शासन की योजनाओं का बनना ही लोकतंत्र का आधार है। पीएम मोदी ने कोविड महामारी के दौरान आमजन के लिए वैक्सीन, टेस्ट, उपचार व राशन की फ्री सेवाएं सुनिश्चित कराईं। उन्होंने अहसास कराया कि हमारी जवाबदेही अंतत: जनता के प्रति है। सबका साथ-सबका विकास का भाव भी लोकतंत्र की पुष्टि करता है। मोदी जी की सभी योजनाएं आमजन को समर्पित हैं। जाति, मत, महजब, क्षेत्र व भाषा देखे बगैर पात्रता की श्रेणी में आने वाले हर व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।   लोकतंत्र के प्रति हमारी जवावदेही सीएम ने कहा कि 4 करोड़ गरीबों को आवास, 12 करोड़ गरीबों के घर में शौचालय, 10 करोड़ गरीबों के घर में रसोई गैस, 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन, 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत की सुविधा, 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से उभरना, ये सभी कार्य भारत के पुष्ट लोकतंत्र को प्रदर्शित करते हैं। एक तरफ मोदी जी के नेतृत्व में लोकतंत्र पुष्ट हो रहा है तो दूसरी तरफ स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने वाली कांग्रेस, जिसके द्वारा आज भी उसी प्रकार के प्रयास किए जाते हैं। हम सबको इसके प्रति सजग रहना चाहिए। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा, विद्याराम वर्मा, अजय सिंह व ओमप्रकाश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी, विधायकगण, संयोजक बृज बहादुर, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विजय मौर्य व प्रबुद्धजन आदि उपस्थित रहे।

राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया गया आयोजन

भोपाल  प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा गुरुवार को राज्य स्तरीय कार्याशाला का आयोजन किया गया। पलाश रेसी‍डेन्‍सी भोपाल में आयोजित इस कार्यशाला में योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में नई दिल्‍ली से आए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इसमें राज्य शिक्षा केंद्र के संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और सभी जिलों के नोडल अधिकारी तथा उनके सहायक शामिल हुए। कार्यशाला का शुभारंभ स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार के सीनियर कन्‍सलटेंटराघवेन्‍द्र खरे, छात्रवृति प्रकोष्ठ के उपसंचालक डॉ. मुकेश शर्मा एवं राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र के संयुक्‍त संचालकप्राचीश जैन ने किया। कार्यशाला में राष्‍ट्रीय मेरिट कम मीन्‍स छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल NSP पर नवीन/ नवीनीकरण पंजीयन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया के संबंध में विस्‍तृत चर्चा की गई। साथ ही योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रदेश के जिला नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। तकनीकी समन्‍वयकश्‍याम मनोहर शर्मा तथा स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, नई दिल्‍ली की प्रतिनिधि सुश्री सोनल नागर एवं श्रीमती रीता ने प्रतिभागयिों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस अवसर राज्‍य नोडल अधिकारीआनंद शर्मा, श्रीमती अनुराधा यादव, राज्‍य समन्‍वयक श्रीमती ज्‍योति श्रीवास्‍तव सहित कार्यशाला में प्रत्‍येक जिले के नोडल अधिकारी सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे। आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित है राष्ट्रीय मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना राष्ट्रीय मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं नगरीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 8वीं के आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नई दिल्‍ली द्वारा चयन परीक्षा में पात्र छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। भारत सरकार द्वारा छात्रवृत्ति की राशि सीधे हितग्राही विद्यार्थी के खाते में भेजी जाती है। योजना का लाभ पाने के लिए छात्र को विगत वर्ष कक्षा 7वीं में न्यूनतम ‘सी’ ग्रेड से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही, अभिभावक की सकल वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्‍य के लिए निर्धारित कोटा में मेरिट सूची के अनुसार प्रतिवर्ष मध्‍यप्रदेश के 6 हजार 446 विद्यार्थियों का चयन इस छात्रवृत्ति के लिए किया जाता है।