samacharsecretary.com

NCERT विवाद में सरकार की एंट्री: विशेषज्ञ समिति गठित, सुप्रीम कोर्ट ने पूरी की सुनवाई

नई दिल्ली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका से जुड़े चेप्टर को फिर से लिखने के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन हुआ है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और जस्टिस अनिरुद्ध बोस को शामिल किया गया है। सरकार ने ये फैसला एनसीईआरटी की किताब के उस हिस्से पर हुए विवाद के बाद उठाया है, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' का जिक्र था। कमेटी के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी तरफ से शुरू की गई सुनवाई को खत्म कर दिया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की पुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटीः इंडिया एंड बियॉन्ड" (भाग-2) प्रकाशित की थी। इस पुस्तक में "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका" शीर्षक से एक पाठ शामिल था। इसमें न्याय व्यवस्था पर विवादित पाठ्य सामग्री थी। यही कारण रहा कि इस अध्याय को लेकर विभिन्न पक्षों से आपत्तियां सामने आईं। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद एनसीईआरटी ने गलती मानते हुए चैप्टर को वापस ले लिया था। एनसीईआरटी के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस अध्याय के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए वे बिना किसी शर्त और बिना किसी स्पष्टीकरण के सार्वजनिक रूप से क्षमा चाहते हैं। एनसीईआरटी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पुस्तक को वापस ले लिया गया है। यह पुस्तक कहीं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। परिषद ने कहा कि अध्याय के कारण उत्पन्न असुविधा के लिए उन्हें खेद है और वे सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोबारा लिखा गया चैप्टर तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा, जब तक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी इसकी समीक्षा नहीं कर लेती। इसके बाद, कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को डोमेन एक्सपर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया था।

विवादित चैप्टर पर मचा बवाल, सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार—NCERT के पूरे सिलेबस की होगी समीक्षा

नई दिल्ली एनसीईआरटी की कक्षा 8वीं की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों को लेकर एक अध्याय दिया गया था। यह अध्याय नए तैयार हुए सिलेबस का हिस्सा था, जिस पर खूब विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने ऐतराज जताया था। इस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सरकार ने कहा कि हम NCERT के पूरे सिलेबस की ही समीक्षा कराएंगे। इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं बेंच ने केंद्र, राज्यों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पुस्तक में विवादास्पद अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीन विशेषज्ञों से दूरी बनाएं। अदालत ने कहा कि उसके आदेशों का उद्देश्य न्यायपालिका के संस्थागत कार्यों की किसी भी स्वस्थ एवं वस्तुनिष्ठ आलोचना को रोकना नहीं है। इसके साथ ही बेंच ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह विधि अध्ययन पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल एक सप्ताह के भीतर गठित करे। इस पर सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमने एनसीईआरटी में व्यवस्थागत बदलाव शुरू किए हैं। विषय विशेषज्ञों द्वारा जांच-पड़ताल किए बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर केंद्र एनसीईआरटी को पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए कहने के बजाय इसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करे तो यह बेहतर होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि केंद्र ने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। बता दें कि मंगलवार को ही NCERT ने विवादित चैप्टर को लेकर माफी मांगी थी। संस्था के निदेशक और सदस्यों ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक 'समाज की खोज: भारत और उससे आगे' के एक विवादित अध्याय को लेकर मंगलवार को बिना शर्त और बिना किसी योग्यता के सार्वजनिक माफी मांगी है। विवाद पुस्तक के अध्याय-4 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' को लेकर हुआ था। इसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भों का उल्लेख किया गया था। एनसीईआरटी ने कहा है कि यह पूरी पुस्तक अब वापस ले ली गई है और फिलहाल उपलब्ध नहीं है। एनसीईआरटी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘असुविधा के लिए हमें गहरा खेद है और हम सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना करते हैं। एनसीईआरटी शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’ सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया था पुस्तक पर बैन इस मामले में पहले ही उच्चतम न्यायालय ने इस पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत , न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पुस्तक की सभी भौतिक तथा डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह भी पूछा था कि विवादित अध्याय के साथ पुस्तक प्रकाशित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।  

NCERT ने न्याय पालिका में Corruption वाले चैप्टर पर मांगी माफी

पटना. न्याय पालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट से लगी फटकार के बाद NCERT ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है. संस्था ने कहा कि पूरी किताब वापस ले ली गई है और अब यह आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है. NCERT ने इस संबंध में ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी. संस्था ने कहा, “हाल ही में क्लास 8 की सोशल साइंस की पुस्तक में Exploring Society: India and Beyond (भाग-2) प्रकाशित की थी, जिसमें चैप्टर-4 का शीर्षक था, हमारे समाज में न्याय पालिका की भूमिका. एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्यों ने इस अध्याय को लेकर बिना किसी शर्त के सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी है. साथ ही बताया गया है कि पूरी किताब को वापस ले लिया गया है और अब यह उपलब्ध नहीं है.” 𝐏𝐫𝐞𝐬𝐬 𝐑𝐞𝐥𝐞𝐚𝐬𝐞: 𝐏𝐮𝐛𝐥𝐢𝐜 𝐀𝐩𝐨𝐥𝐨𝐠𝐲 The National Council of Educational Research and Training [NCERT] has recently published a social science textbook, “Exploring Society: India and Beyond," Grade 8 (Part II), which contained Chapter IV titled “The Role of… — NCERT (@ncert) March 10, 2026 इसी के साथ NCERT ने आगे कहा कि हम इस कारण हुई असुविधा के लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करते हैं और सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं. NCERT शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. कहां से शुरू हुआ पूरा मामला? सुप्रीम कोर्ट NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले टॉपिक के उल्लेख को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था. ये नोटिस 26 फरवरी को NCERT के निदेशक और शिक्षा मंत्रारलय के सचिव के लिए जारी किया गया. कोर्ट ने किताब की सभी कॉपियों को तुरंत बैन कर दिया. साथ ही पूछा कि इस मामले में आपराधिक अवमानना कार्रवाई क्यों न की जाए. यहीं से ये पूरा विवाद शुरू हुआ. क्या था सुप्रीम कोर्ट का कहना? सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इसमें न्यायपालिका की गलत या एकतरफा तस्वीर पेश की गई है. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि इस उम्र में बच्चे जीवन की बारीकियों को समझना शुरू ही करते हैं, ऐसे में उन्हें गलत जानकारी देना उचित नहीं है. कोर्ट का साफ कहना था कि किताब के माध्यम से ये जानकारी स्टूडेंट्स, शिक्षक और माता पिता तक पहुंचेगी. इससे समाज पर प्रभाव पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट में NCERT मुद्दे पर केंद्र झुका, माफी के बावजूद CJI बोले—‘जवाबदेही तय होगी’

नई दिल्ली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी है। आपको बता दें कि यह विवाद 24 फरवरी, 2026 को जारी की गई नई सिलेबस के बाद शुरू हुआ, जिसने न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने वाले अंशों के कारण कोर्ट को नाराज कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया। न्यूज के अनुसार, सीजेआई ने कहा, "ऐसा लगता है कि न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए यह एक गहरी और सुनियोजित साजिश रची गई है।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए शिक्षा सचिव और NCERT के निदेशक से जवाब तलब किया है कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही केंद्र सरकार से ऑनउलब्ध पीडीएफ फाइल को जल्द से जल्द हटाने का आदेश दिया है। क्या था विवादित अध्याय? विवाद की जड़ कक्षा 8वीं की पुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II" का अध्याय नंबर 4 है। जिसका शीर्षक है 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका'। इस अध्याय में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार पर कुछ ऐसी बातें शामिल की गई थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक और अनुचित पाया। चौतरफा आलोचना और कानूनी दबाव के बाद NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी है। परिषद ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का वे सर्वोच्च सम्मान करते हैं और उसे संविधान का रक्षक मानते हैं। 38 बिकी हुई कॉपियों को ढूंढ रहा है मंत्रालय मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस विवादित पुस्तक की कुल 2.25 लाख प्रतियां छपी थीं। गनीमत यह रही कि भारी संख्या में वितरण से पहले ही विवाद सामने आ गया। कुल 2,24,962 प्रतियां अभी भी गोदामों में सुरक्षित हैं जिन्हें वापस मंगा लिया गया है। सिर्फ 38 प्रतियां बाजार में बिक चुकी हैं। शिक्षा मंत्रालय और NCERT अब उन्हें ट्रैक करके वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया है कि अगली सूचना तक इन पुस्तकों का वितरण पूरी तरह से बंद रहेगा। सरकार अब इस बात की जांच कर रही है कि संवेदनशील विषयों पर पाठ्यसामग्री तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।  

शिक्षा सुधार पर मंथन: मंत्री मदन दिलावर ने NCERT की राज्य स्तरीय बैठक का किया शुभारंभ

जयपुर  शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विद्यालयों मे तनाव मुक्त शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूलों को सीखने के आनंद का केंद्र बनने का आह्वान किया है! शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी, सीकर मे आयोजित मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम संबंधित राज्य स्तरीय विमर्श बैठक के उद्घाटन सत्र को मुख्यअथिति के रूप मे संबोधित कर रहे थे! शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने वीडिओ कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपना सम्बोधन देते हुए कहा कि शिक्षा को तनाव मुक्त बनाने के लिए हमें ग्रेड्स और अंको की दौड़ से बाहर निकलकर "सीखने के आनंद" पर ध्यान देना होगा! मनोदर्पण पहल भारत सरकार की इसी दिशा मे एक बड़ा कदम है, जो छात्रों को उनके कठिन समय मे संबल प्रदान करती है! शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला माध्यम नहीं, बल्कि वह छात्र के मानसिक स्वास्थ्य का प्रथम सजग प्रहरी है! मंत्री दिलावर ने कहा कि शिक्षकों को छात्रों के व्यवहार मे आने वाले शुक्ष्म बदलावो को पहचानना होगा! यदि कोई छात्र अचानक चुप रहने लगे या उसके व्यवहार मे चिड़चिड़ापन आये, तो उसे डांटने के बजाय सहानुभूति के साथ सुनने की अवश्यकता है! एक मानसिक रूप से स्वस्थ शिक्षक ही एक स्वस्थ कक्षा का निर्माण कर सकता है! इसलिए शिक्षकों को भी अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा! हम सब मिलकर ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार करें जहाँ हमारे बच्चे न केवल अच्छे डॉक्टर या इंजीनियर बने, बल्कि एक स्वस्थ और संस्कारवान व्यक्तित्व वाले इंसान भी बने! शिक्षा मंत्री कहा कि एक समृद्धि राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब उसके नागरिक मानसिक रूप से सशक्त और खुशहाल हो!  उन्होंने आशा व्यक्त कि की प्रदेश मे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की दिशा मे यह बैठक महत्वपूर्ण साबित होंगी! बैठक मे एन सी ई आर टी, दिल्ली के निदेशक प्रोफ़ेसर दिनेश प्रसाद सकलानी, मनोदर्पण प्रकोष्ठ, एन सी ई आर टी दिल्ली के प्रोफ़ेसर विनोद कुमार सानवाल, शिक्षा विभाग राजस्थान के निदेशक सीताराम जाट, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय बीकानेर के समन्वयक डी पी सिंह उपस्थित थे! सीकर मे आयोजित हो रही इस दो दिवसीय बैठक मे कुल 210 प्रतिभागी भाग ले रहे है! जिनमे से 50% शिक्षक माध्यमिक /उच्च माध्यमिक के! 25% स्कूल कॉउंसलर /विशेष शिक्षक तथा 25% शैक्षिक प्रशासकीय अधिकारी शामिल है! कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों वह हित धारकों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना! प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान वह अंत: क्षेप हेतु आवश्यक कौशलों से परिचित कराना! प्रतिभागियों को मनोदर्पण टेली- हेल्पलाइन व टेली – मानस जैसी राष्ट्रीय पहलो से परिचित करना तथा श्रेष्ठ प्रार्थओ का आदान-प्रदान बढ़ाना व मास्टर ट्रेन तैयार करना है!