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हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी एवं एक नामित डायट मेंटर मिलकर संभालेंगे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की जिम्मेदारी

बुनियादी शिक्षा को नई गति, योगी सरकार ने एआरपी व्यवस्था का किया पुनर्गठन – हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी एवं एक नामित डायट मेंटर मिलकर संभालेंगे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की जिम्मेदारी – सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष होने पर भी पात्र, किसी भी विषय के शिक्षक कर सकेंगे आवेदन – माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन हटाकर चयन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया – पारदर्शी चयन, वार्षिक मूल्यांकन और क्षमता संवर्धन की नई व्यवस्था लागू – निपुण भारत मिशन और सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को नई गति देने के लिए अकादमिक नेतृत्व व्यवस्था को और मजबूत बना रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) की अकादमिक व्यवस्था को नई संरचना देते हुए अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन किया गया है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा के हस्ताक्षर से जारी शासनादेश में एआरपी के चयन, कार्यदायित्व, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और जवाबदेही संबंधी विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। शासनादेश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जुलाई तक रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में ब्लॉक स्तर का अकादमिक सहयोग तंत्र पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके। विद्यालयों तक पहुंचेगा मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी और एक नामित डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह अकादमिक टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को सतत शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने, कक्षा-कक्ष की चुनौतियों के समाधान तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की दिशा में कार्य करेगी। पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया एआरपी का चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। नई व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक योग्य और अनुभवी शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व से जोड़ा जा सके। अब सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष रहने वाले शिक्षक भी एआरपी पद के लिए पात्र होंगे, जबकि पहले यह सीमा 10 वर्ष थी। अब किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जबकि पहले केवल चयनित विषयों के शिक्षकों को ही पात्रता प्राप्त थी। चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए माइक्रो टीचिंग का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। अब चयन केवल लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा। जिला स्तर पर गठित चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी। निपुण भारत मिशन को मिलेगा जमीनी आधार निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित करने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी। एआरपी विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-रिच वातावरण तथा बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही वे शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी सहयोग करेंगे, जिससे ब्लॉक स्तर पर सतत शैक्षणिक सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी। प्रदर्शन आधारित जवाबदेही से बढ़ेगी गुणवत्ता नई व्यवस्था में एआरपी का कार्यकाल प्रदर्शन आधारित होगा। नियमित मूल्यांकन के आधार पर ही कार्यकाल का विस्तार किया जाएगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। शासनादेश में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण तथा क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है। शिक्षा सुधारों को मिलेगा नया बल प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, बालवाटिका, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। नई एआरपी व्यवस्था इन सभी प्रयासों को विद्यालय स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाने का माध्यम बनेगी। ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा, अधिगम परिणामों में सुधार आएगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

इन्वेस्ट यूपी-टीमलीज की बड़ी साझेदारी, GCC के लिए तैयार होगा स्किल्ड टैलेंट का विशाल पूल

जीसीसी के लिए प्रचुर टैलेंट उपलब्ध कराएगा इन्वेस्ट यूपी व टीमलीज का समझौता नए जीसीसी के लिए 90 दिन का मुफ्त वर्कफोर्स और एआई एडवाइजरी पैकेज मुहैया कराएगी टीमलीज   नोएडा-ग्रेटर नोएडा से आगे लखनऊ, कानपुर जैसे टियर-2/3 शहरों तक फैलेगा टैलेंट नेटवर्क लखनऊ/बेंगलुरु उत्तर प्रदेश में स्थापित किए जा रहे नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) को कुशल वर्कफोर्स उपलब्ध कराने के लिए 'इन्वेस्ट यूपी' ने टीमलीज ग्रुप के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। बेंगलुरु में गत दिवस “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026” आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद तथा टीमलीज सर्विसेज की एमडी एवं ग्रुप सीईओ सुपर्णा मित्रा व टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को जीसीसी सेक्टर में निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी और भरपूर टैलेंट की उपलब्धता वाला हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब ग्लोबल कंपनियां पारंपरिक मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर नए शहरों में जीसीसी स्थापित कर रही हैं। उभरते जीसीसी शहरों में नौकरियों की वृद्धि 40-45% है, जबकि मेट्रो हब में यह 19% ही है। ऐसे में इन्वेस्ट यूपी व टीमलीज का यह समझौता नए जीसीसी के लिए नियुक्तियों में लगने वाला समय कम करेगा और शुरुआती चरण की टैलेंट भर्ती को आसान बनाएगा। यूपी का जीसीसी विजन 2031   जीसीसी पॉलिसी-2024 के तहत यूपी ने वर्ष 2031 तक 500 ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा से आगे बढ़कर लखनऊ, कानपुर जैसे टियर-2 व टियर-3 शहरों पर फोकस किया जा रहा है। इस साझेदारी के तहत टीमलीज ग्रुप नए जीसीसी के लिए 'स्टार्टर पैकेज' देगा। इसमें किसी भी जीसीसी को सेटअप के लिए 90 दिनों तक वर्कफोर्स और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) परामर्श निःशुल्क मिलेगा। गौरतलब है कि हर चरण की भर्तियों, इंडक्शन/ऑनबोर्डिंग, एआई/मशीन लर्निंग जैसी विशिष्ट जरूरतों वाली नियुक्तियों, एआई रणनीति व उसके क्रियान्वयन में टीमलीज को विशेषज्ञता हासिल है। इस असर पर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने कहा कि हम यूपी को भारत के अग्रणी जीसीसी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की नींव रख रहे हैं। जब कंपनियां पारंपरिक स्थानों से आगे बढ़ रही हैं, तो यह जरूरी है कि टैलेंट के अवसर भी राज्य के उभरते केंद्रों तक पहुंचें। टीमलीज के साथ यह साझेदारी वर्कफोर्स की तैयारी मजबूत करेगी तथा उद्योग व कौशल विकास के संबंधों को नई गति देगी। नए उभरते क्षेत्रों में स्किल्ड मैनपावर से राज्य की विकास यात्रा तेजी से आगे बढ़ेगी। टीमलीज की एमडी एवं ग्रुप सीईओ सुपर्णा मित्रा ने कहा कि किसी नए जीसीसी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कुशल मैनपावर कितनी जल्दी और कितनी बड़ी संख्या में उपलब्ध होता है। देशभर में 110 से अधिक जीसीसी पार्टनरशिप और यूपी में 1,470 से अधिक सक्रिय जीसीसी कर्मियों के साथ हम योजना स्तर पर ही कंपनियों को स्किल्ड वर्कफोर्स समेत तमाम तकनीकी आवश्यकताओं में मदद देने की स्थिति में हैं। इन्वेस्ट यूपी के साथ यह साझेदारी से यूपी में टैलेंट व स्किलिंग इकोसिस्टम और मजबूत होगा। टीमलीज ग्रुप 4,000 से अधिक नियोक्ताओं को हायरिंग, उत्पादकता और एंड-टू-एंड वर्कफोर्स समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी ने 25 साल में 24 लाख से अधिक पेशेवरों की प्लेसमेंट की है और दुबई व सिंगापुर तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।

आवास मेला-2025: 26 जून को लकी ड्रॉ विजेताओं को मिलेंगे आकर्षक उपहार, समारोह की तैयारियां पूरी

आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ विजेताओं को 26 जून को वितरित होंगे उपहार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे नवीन लोगो का विमोचन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी करेंगे प्रेस वार्ता को संबोधित रायपुर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 के अंतर्गत लक्की ड्रॉ में चयनित हितग्राहियों को उपहार वितरण समारोह 26 जून 2026 को न्यू सर्किट हाउस परिसर, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जाएगा। इसी अवसर पर मंडल के नवीन लोगो का भी विमोचन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 तथा 23 नवम्बर 2025 से 31 दिसम्बर 2025 तक विभिन्न आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों के लिए 22 जून 2026 को विशेष लक्की ड्रॉ आयोजित किया गया था। इस ड्रॉ में विजेताओं का चयन मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन मोटरसाइकिल, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन सहित अनेक आकर्षक उपहारों के लिए किया गया है।

शेफाली वर्मा के दम पर भारत की बांग्लादेश पर शानदार जीत, सेमीफाइनल की उम्मीद मजबूत

मैनचेस्टर  महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम ने बांग्लादेश को आसानी से हरा दिया है। ग्रुप ए का यह मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेला गया। टॉस जीतने के बाद पहले बैटिंग करते हुए बांग्लादेश ने 8 विकेट पर 136 रन बनाए। भारतीय टीम ने 17वें ओवर में मैच को 5 विकेट से जीत लिया। यह महिला टी20 विश्व कप में भारत का दूसरा सबसे बड़ा रन चेज है। चार मैचों में हरमनप्रीत कौर की टीम ने तीसरी जीत हासिल की है। 6 पॉइंट के साथ ग्रुप ए में भारत दूसरे नंबर पर है। बांग्लादेश की चार मैचों में दूसरी हार है। डेथ ओवर्स में जूझी बांग्लादेश की बैटिंग इस मैच में बांग्लादेश की शुरुआत खराब रही थी और 8 के स्कोर पर टीम को पहला झटका लगा था। दिलारा अख्तर 4 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद जुरैया फिरदौस और सोभना मोस्तरी ने दूसरे विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की। यह साझेदारी 41 गेंदों पर आई थी। फिरदौस 59 के स्कोर पर दूसरे विकेट के रूप में आउट हुईं। फिरदौस ने 31 गेंदों पर 33 रन बनाए। मोस्तरी तीसरे विकेट के रूप में 79 के स्कोर पर आउट हुईं। उन्होंने 26 गेंदों पर 22 रन बनाए। इन दोनों को भारतीय फील्डर्स ने चार जीवनदान दिए। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया रवाना इसके बाद कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज निगार सुल्ताना ने पारी को संभालने की कोशिश की। सुल्ताना ने 27 गेंदों पर 32 रन बनाए। सुल्ताना चौथे विकेट के रूप में 106 के स्कोर पर आउट हुईं। पारी के आखिर में बांग्लादेश ने लगातार विकेट भी गंवाए जिससे स्कोर 20 ओवर में 8 विकेट पर 136 तक पहुंच सका। बांग्लादेश ने अपने आखिरी 4 विकेट पारी की आखिरी 13 गेंदों पर गंवाए। राधा यादव ने भारत की तरफ से शानदार गेंदबाजी की। राधा ने 4 ओवर में 28 रन देकर 3 विकेट लिए। श्री चरणी ने 2 विकेट लिए। शेफाली वर्मा प्लेयर ऑफ द मैच रहीं भारतीय टीम को शेफाली वर्मा ने विस्फोटक शुरुआत दिलाई लेकिन स्मृति मंधाना सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गईं। पावरप्ले में शेफाली की तेज पारी से भारतीय टीम 63 रनों तक पहुंच गई। 29 गेंदों पर शेफाली ने अपनी फिफ्टी पूरी की। वह 53 रन बनाकर आउट हुईं। 34 गेंदों की पारी में शेफाली ने 8 चौके और एक छक्का लगाया। यास्तिका भाटिया ने 23 और ऋचा घोष ने 10 रन बनाए। जेमिमा रोड्रिग्स ने सिर्फ 15 गेंदों पर 26 रन बनाकर टीम को जीत के करीब पहुंचा दिया। दीप्ति शर्मा ने 19 गेंद रहते चौका मारकर भारत को जीत दिला दी।  

मुख्यमंत्री ने दी खुशखबरी- यूपी के 6.18 लाख नए परिवारों को मिलेगा पीएम आवास (ग्रामीण) योजना का लाभ

तामेश्वरनाथ धाम बनेगा भव्य कॉरिडोर: मुख्यमंत्री योगी  सीएम योगी ने किया संत कबीर नगर व गोरखपुर की 475 करोड़ रुपये से अधिक की 139 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास मुख्यमंत्री ने दी खुशखबरी- यूपी के 6.18 लाख नए परिवारों को मिलेगा पीएम आवास (ग्रामीण) योजना का लाभ बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म केंद्र: सीएम योगी संत कबीर नगर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबा तामेश्वरनाथ धाम, बाबा बैजूनाथ धाम सहित क्षेत्र के धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण केवल आस्था का सम्मान नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता है जिन्होंने इन धरोहरों की स्थापना की थी। सरकार बाबा तामेश्वरनाथ धाम को नई पहचान देने के लिए भव्य कॉरिडोर निर्माण की योजना पर कार्य कर रही है। कॉरिडोर बनने से क्षेत्र का विकास तीव्र गति से होगा और इसे काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम तथा मां विंध्यवासिनी धाम की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री गुरुवार को कुआनो नदी तट स्थित बैजूनाथ धाम में संत कबीर नगर व गोरखपुर की 475 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 139 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण/स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। इन परियोजनाओं में धनघटा विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये तथा खजनी विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 251 करोड़ रुपये के विकास कार्य शामिल हैं।  6.18 लाख नए ग्रामीण परिवारों को आवास स्वीकृत मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 6 लाख 18 हजार नए पात्र परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत किए गए। डबल इंजन सरकार का यह निर्णय गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने बदली तस्वीर सीएम ने कहा कि कभी सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाने वाले धनघटा और खजनी आज पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से राजधानी लखनऊ से सीधे जुड़ रहे हैं। पहले जहां इन क्षेत्रों को उपेक्षित माना जाता था, अब ये विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं। बेलघाट, खजनी और धनघटा के लोगों को अब लखनऊ पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए दो घंटे में राजधानी तक पहुंचना संभव है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय एवं ग्रामीण सड़कों का विस्तार, नए पुलों और संपर्क मार्गों का निर्माण क्षेत्र की तस्वीर बदल रहा है। धुरियापार क्षेत्र में ग्रेटर गीडा की स्थापना से नए उद्योग लग रहे हैं और धनघटा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। मगहर में संत कबीर एकेडमी, ऑडिटोरियम और महापरिनिर्वाण स्थली के विकास के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार से हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म केंद्र मुख्यमंत्री ने मेहन्दावल विधानसभा क्षेत्र की बखिरा झील का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब रामसर साइट और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े कार्य कर रही है। जहां उच्च शिक्षण संस्थान नहीं थे, वहां डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक व आईटीआई खोले जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार, अटल आवासीय विद्यालय और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गरीबों, किसानों और युवाओं को अधिकार दिलाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना है। डबल इंजन सरकार गरीब, किसान, नौजवान व महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय मुख्यमंत्री ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटा, नागरिक अधिकारों को निलंबित किया और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल लोकतंत्र व संविधान की बात करते हैं, वही संविधान के सबसे बड़े अपमान के लिए जिम्मेदार रहे हैं। उत्तर प्रदेश बना देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश पहचान का मोहताज नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं को उनका अधिकार देने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने किया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से विकास व सुशासन की इस यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर क्षेत्र व प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। 2024 के चुनाव में विपक्ष ने किया गुमराह विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी जनता की आंख में धूल झोंकने का काम करती हैं। जब देश लोकतंत्र की हत्या के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा था, तब ये दोनों दल देश की जनता के साथ झूठे वायदे कर रहे थे। इन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता जनार्दन को गुमराह किया था। ये लोग संविधान की प्रति लेकर घूम रहे थे। राहुल गांधी व अखिलेश यादव किस मुंह से जनता के बीच जाकर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, किस मुंह से संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं?  संविधान का जितना बड़ा अपमान कांग्रेस व सपा ने किया, किसी ने भी नहीं किया। डबल इंजन सरकार ने बाबा साहेब का सपना साकार करने, संविधान, विरासत व समाज के हर तबके को सम्मान देने का काम किया है। इन लाभार्थियों को सीएम योगी ने दिए स्वीकृति पत्र  राधिका (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना) शबनम कुमारी (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना) रीता उपाध्याय (स्वंय सहायता समूह, 5,71,50,000 रुपये का चेक) अभिज्ञान राय (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास, 5 लाख का चेक)  राम शरण विश्वकर्मा (श्रम सम्मान योजना से लाभान्वित)  यशुवर्धन पांडेय (अनुदान पत्र)  इस अवसर पर मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक गणेश चंद्र चौहान, विधायक श्रीराम चौहान, विधायक अंकुर राज तिवारी, विधायक अनिल त्रिपाठी, विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, सुभाष यदुवंशी, … Read more

ईरान के ड्रोन अटैक से दहला होर्मुज जलडमरूमध्य, 11,000 नाविक फंसे, वैश्विक शिपिंग पर मंडराया बड़ा खतरा

 नई दिल्ली होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. यह हमला तब हुआ जब यूनाइटेड नेशन की टीम इस क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान में जुटी थी. ओमान के तट के पास एक कार्गो शिप पर हुए हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने इस रेस्क्यू अभियान को रोक दिया है. इस फैसले से करीब 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जो अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों पर मौजूद हैं।  पिछले कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों की मदद से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चला रहा था. इस मिशन का मकसद उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार कराना था, जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों की वजह से कई दिनों से फंसे हुए थे।  इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप एवर लवली पर ड्रोन हमला हो गया. हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा. हालांकि किसी नाविक की मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है. इसके तुरंत बाद IMO ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पूरे रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया।  UN ने रेस्क्यू क्यों रोक दिया? IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि जब तक इवैक्युएशन लिस्ट में शामिल जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. हालांकि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह UN के रेस्क्यू मिशन का हिस्सा नहीं था. लेकिन घटना ने यह साफ कर दिया कि समुद्री रास्ता अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।  IMO के मुताबिक इस पूरे इलाके में करीब 20 हजार से ज्यादा नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं. इनमें से लगभग 11 हजार नाविकों को निकालने के लिए विशेष इवैक्युएशन प्लान तैयार किया गया था. अब रेस्क्यू अभियान रुकने के बाद ये नाविक फिर से बीच समंदर में फंस गए हैं. उन्हें नहीं पता कि वे कब सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर पाएंगे।  यूनाइटेड नेशन ने पहले ही जहाजों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि बिना इजाजत किसी भी तरह की आवाजाही न करें. इसके साथ ही IMO ने भी चेतावनी दी थी कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. जहाजों की आवाजाही तभी शुरू की जानी थी, जब IMO, UKMTO और MICA सेंटर के कोऑर्डिनेटेड सिस्टम के जरिए सभी वेसल्स से संपर्क स्थापित हो जाए. इसके बाद संबंधित कोस्टल लाइन्स से बातचीत के बाद ही आगे बढ़ने की इजाजत थी।  ईरान ने हमला क्यों किया? ईरान ने कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि उसकी इजाजत के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा तैयार किए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल न करे. ड्रोन हमले के कुछ घंटों बाद ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने बयान जारी कर कहा कि जो जहाज ईरान द्वारा तय किए गए आधिकारिक रास्ते के बजाय दूसरे मार्ग का इस्तेमाल करेंगे, उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी।  होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए ईरान की तरफ से एक समुद्री कॉरिडोर तय किया गया है. जहाजों को सिर्फ लारक आईलैंड (Larak Island) के पास बनाए गए आधिकारिक मार्ग से ही गुजरने की इजाजत दी गई है. इस रूट के अलावा किसी भी रूट से गुजरने पर सख्त चेतावनी दी गई थी. ईरान ने एक नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा था कि, किसी भी उल्लंघन की स्थिति में होने वाले नुकसान, जुर्माने या दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जहाज के मालिक और कप्तान (मास्टर) की होगी।  यानी ईरान साफ संदेश देना चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को उसके नियम मानने होंगे. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ओमान की तरफ से दक्षिणी रास्ते को खतरनाक बताकर खारिज कर दिया था और जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे सिर्फ तेहरान से मंजूर रास्तों का ही इस्तेमाल करें।  आखिर विवाद किस रास्ते को लेकर है? इस समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए दो अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर मौजूद हैं. पहला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इस मार्ग पर जहाजों को ईरान की नई एजेंसी PGSA से पहले इजाजत लेनी होती है. बिना परमिट किसी जहाज को प्रवेश नहीं दिया जाता. ईरान का कहना है कि सिर्फ एक यही रूट ही जिससे जहाज को सुरक्षित पासेज दिया जाएगा।  दूसरा रास्ता ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसी मार्ग को संयुक्त राष्ट्र और ओमान मिलकर सुरक्षित निकासी के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. दर्जनों जहाजों को इस रास्ते से पार भी कराया गया है. 24 जून को ही 60 से ज्यादा विमानों को पार कराया गया था. ईरान का कहना है कि उसके तय रास्ते को छोड़कर दूसरे कॉरिडोर का इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है।  होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा कॉरिडोर माना जाता है. दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी-एलपीजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं. अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।  अब आगे क्या होगा? फिलहाल IMO, ओमान, ईरान और अन्य सदस्य देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू की जा सके. IMO ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक हजारों नाविक समुद्र में फंसे रह सकते हैं. यानी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हुए ड्रोन हमले ने पूरी वैश्विक शिपिंग व्यवस्था और हजारों नाविकों की सुरक्षा को फिर से संकट में डाल दिया है. अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो इसका असर सिर्फ समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई और कीमतों पर भी पड़ सकता है। 

रिटायरमेंट से पहले खुद जान सकेंगे लीव इनकैशमेंट की राशि, 4.50 लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव इनकैशमेंट राशि को लेकर आदेश जारी किया है। अब कर्मचारी रिटायरमेंट या ड्यूटी के दौरान मौत की स्थिति में मिलने वाली छुट्टी लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान खुद लगा सकेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों, कार्यालयों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। सरकार के फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से अवकाश नकदीकरण की गणना को लेकर अलग-अलग विभागों में भ्रम और विवाद की स्थिति बनती रही है। नए निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया लागू होगी। अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड रखने के निर्देश वित्त विभाग के आदेश में सभी विभागों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अवकाश नकदीकरण की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए। भुगतान के समय एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को भुगतान में देरी न हो और गणना में गलतियां न हों। अधिकतम 300 दिन के अवकाश का मिलेगा भुगतान राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण लाभ दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी के खाते में 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश मौजूद है, तब भी भुगतान केवल 300 दिनों तक ही सीमित रहेगा। पहले लाभ लिया है तो घटेंगे उतने दिन वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी पहले किसी अवसर पर अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ ले चुका है, तो जितने दिनों का लाभ पहले लिया गया है, उसे 300 दिनों की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा। कर्मचारी को कुल मिलाकर 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ नहीं मिल सकेगा। कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?     नए आदेश के बाद सरकारी कर्मचारियों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है।     कर्मचारी पहले से अपनी संभावित लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान लगा सकेंगे।     विभागों में गणना को लेकर होने वाली गलतियों में कमी आएगी।     भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे।     सभी विभागों में एक समान नियम और प्रक्रिया लागू होगी।     रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की पारदर्शिता बढ़ेगी। ईएल इनकैशमेंट पर पारदर्शी लाना राज्य सरकार का कहना है कि इस आदेश का मुख्य उद्देश्य अर्जित अवकाश नकदीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और एकरूप बनाना है। अलग-अलग विभागों में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण कई बार कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब वित्त विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद सभी विभागों में एक जैसी व्यवस्था लागू होगी। क्या होता है लीव इनकैशमेंट सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारियों के खाते में अर्जित अवकाश (ईएल) जमा होते रहते हैं। कई कर्मचारी अपने पूरे अर्जित अवकाश का उपयोग नहीं कर पाते, जिसके कारण उनके खाते में बड़ी संख्या में छुट्टी बचे रह जाते हैं। जब कर्मचारी रिटायर होता है या सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है, तब उसके खाते में बचे हुए ईएल के बदले सरकार नकद भुगतान करती है। इसी भुगतान को अवकाश नकदीकरण या लीव इनकैशमेंट कहा जाता है। यह राशि कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कई मामलों में यह लाखों रुपए तक पहुंच सकती है।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव, 1 जुलाई से बढ़ सकता है मासिक खर्च; लेट फीस को लेकर राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने बिजली बिल भुगतान और टैरिफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब बिजली बिल देर से जमा करने पर पूरे महीने का जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि जितने दिन की देरी होगी, उसी हिसाब से लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाएगा। अब तक उपभोक्ताओं को बिजली बिल की निर्धारित तिथि निकलने के बाद डेढ़ प्रतिशत प्रतिमाह की दर से सरचार्ज देना पड़ता था। ऐसे में एक-दो दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था। लेकिन 1 जुलाई से लागू होने वाले नए नियम के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के अनुसार बिजली बिल देर से जमा करने पर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाएगा। इससे उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी जो ड्यू डेट के कुछ दिन बाद बिल जमा करते हैं। बिजली दरों में भी बढ़ोतरी एक तरफ जहां लेट पेमेंट नियम में राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। नए टैरिफ के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। इसके चलते मासिक बिजली बिल में लगभग 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। कमर्शियल उपभोक्ताओं पर भी असर नए टैरिफ के तहत कमर्शियल श्रेणी में भी 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही स्थानीय निकायों और सरकारी कार्यालयों को घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है। गैर-सब्सिडी कृषि पंपों को ऊर्जा प्रभार में 40 प्रतिशत तक की छूट दी गई है। राहत भी, बढ़ा खर्च भी नई व्यवस्था से देर से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बिजली दरों में बढ़ोतरी के कारण नियमित बिलों का खर्च बढ़ सकता है। विभाग का दावा है कि यह बदलाव बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए अहम अपडेट, 30 दिनों की डेडलाइन से पहले निपटाएं काम

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते देशभर में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ते हुए नजर आया. इस बीच सरकार ने कई बड़े फैसले लिए जिसका सीधा असर एलपीजी उपभोक्ताओं पर पड़ा है. देश में एलपीजी सप्लाई को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. अब जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता PNG कनेक्शन ले चुके हैं, उन्हें निर्धारित समय के अंदर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. सरकार का मानना है कि इससे गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस अधिक ट्रांसपरेंट बनेगा, डुप्लिकेट कनेक्शनों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद परिवारों तक LPG की पहुंच बेहतर हो सकेगी।  हाल के सालों में कई शहरों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. इसके बावजूद कई ऐसे परिवार हैं जो PNG और LPG दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि इससे रिसोर्स और सब्सिडी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं।  क्या है नया 30 दिन वाला नियम? सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों के अनुसार, अगर किसी घरेलू उपभोक्ता ने अपने घर में PNG कनेक्शन ले लिया है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. यह नियम इंडेन, भारतगैस और एचपी गैस समेत सभी प्रमुख घरेलू LPG कनेक्शनों पर लागू होगा. जैसे- अगर किसी उपभोक्ता को 10 जून को PNG कनेक्शन मिला है, तो उसे अगले 30 दिनों के भीतर LPG कनेक्शन वापस करना होगा. फिक्स्ड अवधि के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को LPG रिफिल या संबंधित सुविधाएं मिलने में दिक्कत आ सकती है. सरकार का फोकस है कि एक परिवार में एक ही घरेलू गैस व्यवस्था को बढ़ावा देना है।  सरकार ने क्यों उठाया यह कदम? सरकार की ‘वन हाउसहोल्ड, वन गैस कनेक्शन’ सोच के तहत यह कदम उठाया गया है. अधिकारियों का मानना है कि कई शहरी क्षेत्रों में PNG उपलब्ध होने के बावजूद लोग LPG कनेक्शन बनाए रखते हैं, जिससे गैस डिस्ट्रिबुशन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. नए नियम के जरिए डुप्लिकेट कनेक्शनों को कम करने, सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने और उन इलाकों में LPG की सप्लाई बढ़ाने को कोशिश की जा रही है जहां अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंचा है. इससे गैस डिस्ट्रिबुशन अधिक बेहतर और संतुलित बनने की उम्मीद है।  PNG अपनाने वालों के लिए क्या हैं सुविधाएं? सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत भी दी है. यदि कोई परिवार भविष्य में ऐसे क्षेत्र में ट्रांसफर होता है जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसके लिए LPG कनेक्शन दोबारा हासिल करना आसान बनाया गया है. LPG कनेक्शन सरेंडर करते समय उपभोक्ता ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं. इस डॉक्यूमेंट की मदद से वे नए स्थान पर आसान प्रोसेस के जरिए LPG कनेक्शन दोबारा शुरू करा सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन के लिए लंबे प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा।  OTP और e-KYC से बढ़ी निगरानी गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस को और सुरक्षित तथा ट्रांसपरेंट बनाने के लिए सरकार पहले ही OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू कर चुकी है. अब सिलेंडर की डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाता है, जिसे वेरिफाई करने के लिए डिलीवरी एजेंट को बताना होता है. इसके अलावा, उज्ज्वला योजना समेत अलग-अलग लाभार्थियों के लिए e-KYC प्रोसेस भी जरूरी हो गई है. सरकार चाहती है कि सभी उपभोक्ताओं का डेटा अपडेट और वेरिफाइड रहे ताकि फायदा सही लोगों तक पहुंच सके और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाई जा सके। 

1977 से 2026 तक भारतीय तटरक्षक बल का दम, 11,099 किमी तट की सुरक्षा से तस्करी पर कड़ा पहरा

मुंबई  भारत का समुद्री क्षेत्र देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. 11,099 किलोमीटर लंबे समुद्री तट, विशाल समुद्री क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी और सुरक्षा आज भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. लेकिन इस संगठन की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई थी।  आज भारतीय तटरक्षक बल के पास 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट हैं, लेकिन 1977 में इसकी शुरुआत महज सात जहाजों के साथ हुई थी. यह सफर भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लगातार विस्तार और बदलती जरूरतों को दर्शाता है।  भारतीय नौसेना ने क्यों उठाई अलग समुद्री बल की मांग? 1960 के दशक से ही भारतीय नौसेना सरकार से एक ऐसे अलग समुद्री बल के गठन की मांग कर रही थी जो समुद्री कानून लागू करने और भारतीय जलक्षेत्र में सुरक्षा संबंधी कार्यों को संभाल सके. नौसेना का मानना था कि इन कार्यों के लिए अत्याधुनिक और महंगे युद्धपोतों का उपयोग सबसे उपयुक्त विकल्प नहीं है. समय के साथ सरकार ने भी इस तर्क को स्वीकार किया।  1970 के दशक की शुरुआत तक कई ऐसे कारण सामने आए जिन्होंने अलग तटरक्षक बल की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया।  तस्करी बनी बड़ी चुनौती उस दौर में समुद्री मार्गों से तस्करी तेजी से बढ़ रही थी और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन चुकी थी. उस समय मौजूद समुद्री एजेंसियां, जैसे सीमा शुल्क विभाग और मत्स्य विभाग, बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी को रोकने में सक्षम नहीं थीं।  इसी पृष्ठभूमि में 1970 में नाग समिति का गठन किया गया. समिति ने अपनी रिपोर्ट में समुद्री तस्करी से निपटने के लिए एक अलग समुद्री बल की आवश्यकता बताई।  बॉम्बे हाई में तेल मिलने से बढ़ी जरूरत मुंबई हाई क्षेत्र में तेल की खोज और वहां स्थापित महत्वपूर्ण अपतटीय संरचनाओं की सुरक्षा भी एक बड़ी आवश्यकता बन गई थी. इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा और किसी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मजबूत समुद्री सुरक्षा तंत्र की जरूरत महसूस की गई।  रुस्तमजी समिति की सिफारिश सितंबर 1974 में सरकार ने पूर्व बीएसएफ महानिदेशक के.एफ. रुस्तमजी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया. समिति को समुद्री तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों से निपटने के मौजूदा तंत्र की समीक्षा करने और सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई. 1975 में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट रूप से ‘कोस्ट गार्ड’ जैसी संस्था स्थापित करने की सिफारिश की।  सिर्फ सात जहाजों के साथ हुई शुरुआत वर्ष 1977 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना को मंजूरी दी. इसके लिए भारतीय नौसेना से दो फ्रिगेट और पांच गश्ती नौकाएं स्थानांतरित की गईं. 1 फरवरी 1977 को भारतीय तटरक्षक बल अस्तित्व में आया. उस समय भारतीय जलक्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए उसके पास केवल सात जहाज थे।  बाद में 19 अगस्त 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भारतीय तटरक्षक बल का औपचारिक उद्घाटन किया।  ICGS Kuthar बना पहला तटरक्षक जहाज 1978 में भारतीय नौसेना के INS Kuthar को भारतीय तटरक्षक बल को सौंपा गया और उसका नाम ICGS Kuthar रखा गया. उद्घाटन समारोह के दौरान जहाज से नौसेना का ध्वज उतारा गया और तटरक्षक बल का ध्वज फहराया गया. इसी के साथ यह भारतीय तटरक्षक बल का पहला जहाज बना।  जहाजों के साथ बढ़ी हवाई क्षमता तटरक्षक बल की क्षमता बढ़ाने के लिए 1978 में निर्माणाधीन दो नौसैनिक सीवर्ड डिफेंस बोट्स को भी तटरक्षक बल को देने का निर्णय लिया गया. इन्हें क्रमशः 1980 और 1981 में सेवा में शामिल किया गया था. इसके बाद 1982 में तटरक्षक बल ने चेतक हेलीकॉप्टरों को खोज और बचाव अभियानों के लिए शामिल किया. इन्हें सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर मानक सर्च एंड रेस्क्यू हेलीकॉप्टर के रूप में चुना गया।  22 मई 1982 को गोवा के डाबोलिम एयरफील्ड में भारतीय तटरक्षक बल के पहले एयर स्क्वाड्रन 800 स्क्वाड्रन (CG) को भी कमीशन किया गया।  सात जहाजों से 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट तक भारतीय तटरक्षक बल की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी जब उसके पास केवल सात जहाज थे. उसका मुख्य उद्देश्य समुद्री तस्करी पर नियंत्रण, कानून प्रवर्तन और समुद्री क्षेत्रों की निगरानी था. समय के साथ भारत के समुद्री हितों, व्यापारिक गतिविधियों और सुरक्षा आवश्यकताओं का दायरा बढ़ता गया. इसके अनुरूप तटरक्षक बल का भी विस्तार हुआ।  आज भारतीय तटरक्षक बल 11,099 किलोमीटर लंबे भारतीय समुद्री तट की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उसके पास 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट हैं, जो निगरानी, गश्त, खोज एवं बचाव और समुद्री सुरक्षा संबंधी विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।  भारत की समुद्री सुरक्षा का अहम स्तंभ भारतीय तटरक्षक बल का इतिहास दिखाता है कि कैसे एक छोटे समुद्री बल ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और धीरे-धीरे देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया. सात जहाजों से शुरू हुआ यह सफर आज 154 जहाजों और 82 एयरक्राफ्ट तक पहुंच चुका है, जो भारत के समुद्री हितों की रक्षा में लगातार सक्रिय हैं।