samacharsecretary.com

पहले एक दिन की देरी पर लगता था पूरे महीने का चार्ज

रायपुर  छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने इस संबंध में तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था वास्तव में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत देने के लिए तैयार की गई है। छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए लेट पेमेंट सरचार्ज (विलंब अधिभार) को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में चल रही दोहरा झटका या रोज़ाना ब्याज जैसी खबरें पूरी तरह भ्रामक और गलत हैं। क्या थी पुरानी व्यवस्था और क्यों था नुकसान?      पावर कंपनी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुरानी व्यवस्था में यदि कोई उपभोक्ता नियत तिथि के बाद महज एक या दो दिन की देरी से भी बिजली बिल का भुगतान करता था, तो उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत सरचार्ज वसूल लिया जाता था। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह थी। नई व्यवस्था से ऐसे होगा उपभोक्ताओं का फायदा          संशोधित नियमों के बाद अब लेट फीस की गणना पूरी तरह पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी कर दी गई है। अब विलंब अधिभार 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लिया जाएगा। इसका मतलब है कि उपभोक्ता जितने दिन बिल पटाने में देरी करेगा, उसे केवल उतने ही दिनों का शुल्क देना होगा। एक दिन की देरी पर मामूली शुल्क         यदि किसी कारणवश उपभेक्ता बिल के भुगतान में केवल एक दिन का विलंब होता है, तो अब पूरे महीने का सरचार्ज नहीं, बल्कि मात्र 0.04 प्रतिशत अधिभार ही देय होगा। महीने भर की देरी पर भी कम ब्याज         यदि कोई उपभोक्ता पूरे 30 दिन का भी विलंब करता है, तब भी कुल अधिभार केवल 1.2 प्रतिशत (0.04 प्रतिशत × 30 दिन) ही बनेगा, जो कि पुरानी व्यवस्था के 1.5 प्रतिशत से काफी कम है। भ्रामक खबरों से दूर रहने की अपील        पावर कंपनी ने साफ किया है कि नई व्यवस्था में अधिभार की दरें कम हुई हैं, बढ़ी नहीं हैं। इसे रोजाना ब्याज लगने या झटके के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत है। कंपनी ने सभी समाचार माध्यमों और आमजन से अनुरोध किया है कि वे इस सही और स्पष्ट जानकारी को ही साझा करें ताकि उपभोक्ताओं के बीच फैला अनावश्यक भ्रम दूर हो सके।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के तहत 25 किसानों को वितरित किए गए गुणवत्तायुक्त बीज, आधुनिक खेती की तकनीकों का भी दिया गया प्रशिक्षण

रायपुर  किसानों की आय बढ़ाने, तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने और देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जीपीएम जिले के पेंड्रा विकासखंड के ग्राम कोटमीकला में भारत सरकार की राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ) योजना के अंतर्गत चयनित किसानों को उन्नत किस्म के मूंगफली बीज वितरित किए गए। यह पहल किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक सशक्त, आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। कृषि विभाग किसानों तक उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम से तिलहनी फसलों के रकबे और उत्पादकता में वृद्धि कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम कोटमीकला में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अमित कुमार तंवर, कृषि विकास अधिकारी मधुसूदन, क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा ग्राम पंचायत के सरपंच भंवर सिंह अर्मो की उपस्थिति में योजना के अंतर्गत 10 हेक्टेयर प्रदर्शन रकबे के लिए चयनित 25 किसानों को उन्नत गुणवत्ता के मूंगफली बीज वितरित किए गए। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि प्रमाणित एवं उन्नत बीजों के उपयोग से उत्पादन बढ़ने के साथ फसल की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बीज उपचार, समय पर बुआई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण तथा फसल की वैज्ञानिक देखभाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, मृदा परीक्षण के आधार पर खेती करने तथा विभागीय सलाह का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया गया, जिससे उत्पादन लागत कम हो और अधिक लाभ प्राप्त हो सके। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम से किसानों को केवल बीज उपलब्ध कराना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक खेती की नवीनतम तकनीकों से जोड़कर तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाना और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करना भी प्राथमिकता है। प्रदर्शन आधारित खेती से अन्य किसान भी प्रेरित होंगे और क्षेत्र में मूंगफली सहित तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ेगा। कार्यक्रम में किसानों ने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तायुक्त बीज और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से खेती अधिक लाभकारी बनेगी। कृषि विभाग ने सभी किसानों से शासन की कृषि हितैषी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने, उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि कर अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया। राज्य सरकार और कृषि विभाग की ऐसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ किसानों के जीवन में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।

इंदौर के डायल-112 हीरोज रास्ता भटके 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित दादा के सुपुर्द किया

भोपाल इंदौर जिले के थाना खजराना क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से घर से निकलकर रास्ता भटक गए 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुँचाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालक को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका। 27 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना खजराना क्षेत्र अंतर्गत सेरेटन होटल के सामने एक 10 वर्षीय बालक अकेला मिला है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही खजराना थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक  महेंद्र सिंह तोमर, आरक्षक  महेश कुशवाह एवं पायलट  अंकित बंसल ने मौके पर पहुँचकर बालक को सुरक्षित संरक्षण में लिया। इसके पश्चात डायल-112 टीम ने तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ आसपास क्षेत्र में पूछताछ कर उसके परिजनों की तलाश प्रारंभ की। पूछताछ के दौरान बालक के दादा का पता चला। बालक द्वारा पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसे सुरक्षित उसके दादा के सुपुर्द किया गया।डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालक को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।    

साय सरकार की जनकल्याणकारी पहल से सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन की नई शुरुआत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रयासों से आदिवासी परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रायपुर किसी भी परिवार के लिए अपना सुरक्षित और पक्का घर केवल चार दीवारों का निर्माण नहीं होता, बल्कि वह सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार होता है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत पंडरीपानी के निवासी  कृष्णा बैगा के जीवन में भी ऐसा ही सुखद परिवर्तन आया है। वर्षों तक कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले कृष्णा बैगा का पक्के घर का सपना अब साकार हो चुका है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का आवास मिलने से उनके परिवार के जीवन में खुशियों का नया सवेरा आया है।  कृष्णा बैगा लंबे समय तक अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहने को विवश थे। बरसात आते ही घर की दीवारों में सीलन भर जाती थी, छत से पानी टपकने लगता था और घर में सांप-बिच्छुओं के प्रवेश का खतरा बना रहता था। ऐसे हालात में परिवार की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य को लेकर वे हमेशा चिंतित रहते थे। सीमित संसाधनों के कारण स्वयं पक्का घर बनाना उनके लिए संभव नहीं था। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब उनके गांव तक पहुंचा, तब उनके जीवन में परिवर्तन की नई शुरुआत हुई। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत उनका आवास स्वीकृत हुआ और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन तथा सतत निगरानी में उनका पक्का घर तैयार हो गया। आज उनका परिवार एक सुरक्षित, स्वच्छ, मजबूत और सम्मानजनक आवास में जीवन व्यतीत कर रहा है।  कृष्णा बैगा बताते हैं कि अब बरसात का मौसम उनके लिए चिंता का कारण नहीं रहा। न छत से पानी टपकने की परेशानी है और न ही दीवारों में सीलन की समस्या। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब परिवार को सांप-बिच्छुओं और अन्य खतरों का भय नहीं सताता। पक्का घर मिलने से उनके परिवार के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है और उनमें भविष्य के प्रति नया आत्मविश्वास जागा है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पक्का घर मिलने से हमारे परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। अब हम बिना किसी डर और परेशानी के अपने घर में सुकून और सम्मान के साथ रह रहे हैं। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी और सरकार का हृदय से धन्यवाद करता हूँ। राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) तथा विशेष रूप से प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों सहित पात्र ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जिला प्रशासन, जनपद पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों के समन्वित प्रयासों से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। साय सरकार का लक्ष्य केवल आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करना है। इसी उद्देश्य से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध निर्माण, पारदर्शिता और सतत निगरानी पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि प्रत्येक पात्र परिवार अपने पक्के घर का सपना साकार कर सके। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को तेजी से लाभान्वित किया जा रहा है। इन योजनाओं ने हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हुए उन्हें सुरक्षित आवास, सम्मान और बेहतर भविष्य का विश्वास दिया है। कृष्णा बैगा की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से धरातल पर पहुंचती हैं, तो वे केवल घर नहीं बनातीं, बल्कि लोगों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और नई उम्मीदों की मजबूत नींव भी रखती हैं।  

मंत्री भूरिया ने किया राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ

भोपाल  देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने रविवार को झाबुआ जिले में तीन दिवसीय 'राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान' का शुभारंभ किया। जिला चिकित्सालय झाबुआ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्री  भूरिया ने फीता काटकर इस राष्ट्रव्यापी अभियान के जिला स्तरीय चरण की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं बच्चों को पोलियो रोधक दवा की दो बूंद पिलाकर आम जनता को जागरूकता का संदेश दिया। महिला एवं बाल विकास मंत्री  भूरिया ने पोलियो उन्मूलन की दिशा में भारत की ऐतिहासिक सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पोलियो उन्मूलन की दिशा में हमारे देश ने दुनिया के सामने एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम की है, लेकिन इस बड़ी सफलता और सुरक्षा चक्र को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि हर पीढ़ी के प्रत्येक बच्चे को समय पर पोलियो रोधक दवा की खुराक मिले। मंत्री  भूरिया ने बल देकर कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य और उनका सुरक्षित भविष्य हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी नागरिकों और अभिभावकों से भावुक अपील की कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो बूथ पर ले जाकर दवा अवश्य पिलवाएं और इस जनहितकारी अभियान को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं। मंत्री  भूरिया द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के तहत झाबुआ जिले में 0 से 5 वर्ष तक के कुल 2,13,504 बच्चों को दवा पिलाने का शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) श्री एम.एल. चोपड़ा ने बताया कि जमीनी स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिसके तहत जिले में कुल 1,185 टीमें मुस्तैद की गई हैं। इन टीमों में निर्धारित केंद्रों पर दवा पिलाने के लिए 424 बूथ टीमें, छूटे हुए बच्चों को कवर करने के लिए 610 घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं मुख्य चौराहों पर सक्रिय रहने वाली 44 ट्रांजिट टीमें तथा सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों के लिए 07 मोबाइल टीमें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पूरे अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए विशेष सुपरवाइजरी टीमों का भी गठन किया गया है।  

अगले बिजली बिलों में मिलेगा क्रेडिट

रायपुर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त (सरप्लस) सोलर बिजली की खरीदी दर (बायबैक रेट) तय की है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने इस दर को अपनाने की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।  छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ से मिली जानकारी के अनुसार, निर्धारित दर को अंतिम अनुमोदन और मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) के पास भेज दिया गया है। आयोग से हरी झंडी मिलते ही उपभोक्ताओं को उनकी अतिरिक्त बिजली की राशि अगले बिजली बिलों में क्रेडिट (छूट) के रूप में दिखाई देने लगेगी। ऐसे काम करती है नेट मीटरिंग और बायबैक व्यवस्था           पावर कंपनी ने इसकी पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत, सोलर संयंत्र से जितनी बिजली बनती है, उसका सबसे पहले उपभोक्ता की मासिक बिजली खपत में समायोजन (अडजस्टमेंट) किया जाता है। यदि उपभोक्ता की जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है और वह ग्रिड में वापस जाती है, तो उसकी बची हुई यूनिट हर महीने उपभोक्ता के खाते में जुड़ती चली जाती है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर खाते में बची हुई इन सभी अतिरिक्त यूनिटों का नियमानुसार पावर कंपनी द्वारा बायबैक (खरीद) किया जाता है। तय दर के हिसाब से बनने वाली कुल राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर दी जाती है। नए वित्तीय वर्ष में शून्य से शुरू होता है लेखा-जोखा       उपभोक्ताओं के बीच भ्रम को दूर करते हुए कंपनी ने साफ किया है कि प्रत्येक नए वित्तीय वर्ष में यूनिट का लेखा-जोखा नए सिरे से (शून्य से) शुरू होता है। यही कारण है कि पिछले वित्तीय वर्ष की बची हुई अतिरिक्त यूनिट नए बिजली बिल में यूनिट के रूप में दिखाई नहीं देती हैं। हालांकि, उनका मौद्रिक मूल्य (पैसा) उपभोक्ता के खाते में पूरी तरह सुरक्षित रहता है और आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में घटा दिया जाता है।       प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अधिशेष बिजली के समायोजन और बायबैक की यह पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के प्रचलित नियमों के तहत बेहद पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है, जिससे राज्य के हजारों सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

जीपीएम के पर्यटन विकास मॉडल की सराहना, स्थानीय जनसहभागिता और प्राकृतिक धरोहरों को बताया पर्यटन संवर्धन की सशक्त आधारशिला

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रवास के दौरान जिले की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया तथा जिले की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को समेटे जीपीएम पर्यटन कॉफी टेबल बुक भेंट कर जिले की पर्यटन उपलब्धियों और संभावनाओं से अवगत कराया गया। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के विकास, पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाओं तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर आधारित पर्यटन मॉडल की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। अधिकारियों ने बताया कि जिले के पर्यटन स्थलों को स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जोड़कर विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिल रही है। प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने जीपीएम जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल राजमेरगढ़  का  भ्रमण किया।  उन्होंने पर्यटन समितियों द्वारा संचालित गतिविधियों, पर्यटकों के लिए उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों का अवलोकन किया। इस दौरान स्थानीय पर्यटन समितियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि जनसहभागिता के माध्यम से पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है। भ्रमण के दौरान पर्यटन समितियों ने स्थानीय युवाओं की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। अधिकारियों ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यटन के विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी हैं। प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य ने कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। यहां पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से प्रभावी रूप से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता आधारित पर्यटन मॉडल न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करता है। उन्होंने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यटन समितियां जिस समर्पण और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने समितियों से भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण, पर्यटक-अनुकूल, स्वच्छ, सुरक्षित एवं जनसहभागिता आधारित गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही राज्य के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सके। इस अवसर पर पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी, पर्यटन समितियों के प्रतिनिधि तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

लखनऊ हादसे के बाद बड़ा फैसला, 200 स्कूलों में होगी फायर सेफ्टी जांच और प्रशिक्षण

लखनऊ  लखनऊ में पिछले सोमवार को कोचिंग सेंटर में लगी आग की घटना के बाद सभी जिलों में स्कूलों की अग्निसुरक्षा के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति में एडीएम, पुलिस आयुक्त या एसएसपी द्वारा नामित पुलिस अधिकारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, मुख्य कोषाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, राज्य आपदा मोचन बल द्वारा नामित अधिकारी के अलावा एनसीसी द्वारा नामित अधिकारी को समिति का सदस्य बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गठित की जाने वाली समिति अपने-अपने जिलों में 200-200 स्कूलों को चिह्नित करेगी। इनमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के 100 विद्यालय, 60 निजी विद्यालय व 40 सरकारी व गैर सरकारी महाविद्यालय शामिल होंगे। चिह्नित स्कूलों में अग्निसुरक्षा के उपायों की जांच की जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों को अग्निसुरक्षा व आपदा से बचाव को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। आपदा की स्थिति में सुरक्षा को लेकर होंगे काम इसके लिए एसडीआरएफ, पीएसी, एनडीआरएफ, अग्निसुरक्षा विभाग, एनसीसी, एनएसएस, सीआइएसएफ, सिविल डिफेंस विभागों के साथ समन्वय बनाकर विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर के जरिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस संदर्भ में जारी आदेश के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों व स्कूलों के स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे आपदा की स्थिति में सभी मिलकर सुरक्षा के उपायों पर काम कर सकें। मास्टर ट्रेनर विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार, अग्निशमन यंत्रों का उपयोग, आपदा को लेकर विद्यालय या महाविद्यालय में सुरक्षित स्थल की पहचान, प्रवेश व निकासी की जानकारी देंगे। साथ ही बाढ़, आंधी, तूफान व बज्रपात से बचाव की भी जानकारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हर जिले में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश आपदा प्राधिकरण ने दिए हैं। इस योजना के क्रिन्यावयन की जिम्मेदारी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी गई है।

मनरेगा की जगह लागू होगी ‘वीबीजीराम-जी’ योजना, जिलों को एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश

भोपाल मनरेगा की जगह 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण' (वीबीजीराम-जी) योजना एक जुलाई से स्थान लेने जा रही है। मध्य प्रदेश में इसकी तैयारी हो गई है। सभी जिलों को एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा गया है। इसके पहले मनरेगा के अंतर्गत उन कार्यों को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो नई योजना में नहीं हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इस अवधि तक काम पूरे नहीं हुए तो बचे कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का बोझ राज्य सरकार पर आएगा। इनमें गैर-अनुमत कार्य जैसे तालाबों में पानी का कटाव रोकने के लिए पत्थर का बंधान बनाना आदि शामिल हैं। 100 की जगह मिलेंगे 125 दिन रोजगार योजना लागू होने के बाद कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा यह कि मनरेगा में 266 तरह के कार्य थे, जबकि नई योजना में 318 तरह के सम्मिलित किए गए हैं। वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी रहेगी, जबकि मनरेगा में सौ दिन की थी। वर्ष में 60 दिन का ड्राई पीरियड रहेगा, यानी इस अवधि में काम नहीं होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। हालांकि, खेती की कटाई का समय इसके लिए रखा जा सकता है। कारण, इस समय मजदूर कटाई में व्यस्त रहते हैं। बनाए जाएंगे नए जॉब कार्ड, तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें मजदूरों के नए जॉब कार्ड बनाए जाएंगे, लेकिन जब तक नहीं बनते पुराने कार्ड के आधार पर ही उन्हें रोजगार दिया जाएगा। पंचायतों को तीन श्रेणी में बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे। पिछड़ी, जिला मुख्यालय से दूर और अधिक एससी-एसटी आबादी वाली पंचायतों को 'सी' श्रेणी में रखा जाएगा। यानी, यहां ज्यादा काम कराए जाएंगे। इसके बाद 'बी' श्रेणी की पंचायतों में इससे कम और 'ए' श्रेणी वाली में सबसे कम काम होंगे। वर्गीकरण का आधार अभी तक हुए विकास कार्य होंगे।  

पंजीयन एवं प्री-रजिस्टर्ड हितग्राहियों के निराकरण में हासिल किया प्रथम स्थान

रायपुर   प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के पंजीयन के लिए 15 जून से 15 जुलाई तक संचालित विशेष अभियान में छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य ने अभियान के शुरुआती मात्र 9 दिनों में ही निर्धारित लक्ष्य का 72 प्रतिशत पूरा कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। प्रदेश ने न केवल हितग्राहियों के पंजीयन में देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है, बल्कि प्री-रजिस्टर्ड हितग्राहियों के निराकरण में भी सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए सर्वाधिक उपलब्धि अर्जित की है। यह उपलब्धि महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों, मैदानी अमले तथा सभी संबंधित हितधारकों के समन्वित और समर्पित प्रयासों का परिणाम है। विशेष अभियान के अंतर्गत जिला जांजगीर-चांपा ने 96 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि मातृ एवं शिशु कल्याण के प्रति जिले की संवेदनशीलता, सक्रियता और प्रभावी कार्यप्रणाली को प्रतिबिंबित करती है।  मातृ वंदना योजना (PMMVY) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण मातृ कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षित मातृत्व के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करना है। योजना के तहत प्रथम जीवित संतान के जन्म पर पात्र महिलाओं को 5,000 रूपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है, जबकि दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6,000 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने तथा शिशुओं के बेहतर पोषण और समग्र विकास सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम, मैदानी अमले और सभी सहयोगी संस्थाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व प्रदान करने के साथ-साथ शिशुओं के स्वस्थ भविष्य की मजबूत आधारशिला तैयार कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ आगामी दिनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सभी हितधारकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रतिबद्धता, सतत निगरानी और जनकल्याण के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक पात्र गर्भवती एवं शिशुवती माता प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ प्राप्त कर सके। उन्होंने प्रदेश की सभी पात्र महिलाओं से अपील की कि वे 15 जुलाई तक संचालित विशेष अभियान का लाभ उठाते हुए अपना पंजीयन अवश्य कराएं, ताकि मातृत्व के इस महत्वपूर्ण चरण में उन्हें शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।