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लोनी में प्रशासन का बुलडोजर ऐक्शन: 70 लाख की सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने का सिलसिला लगातार जारी है. इसी कड़ी में गाजियाबाद के लोनी इलाके के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. जिला प्रशासन ने ट्रॉनिका सिटी के सेक्टर सी-8 में सरकारी भूमि पर बनी करीब 25 से 30 वर्ष पुरानी पीर बाबा की मजार को ध्वस्त कर दिया है. भारी सुरक्षा घेरे के बीच हुई इस कार्रवाई से प्रशासन ने लाखों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया है. मिली जानकारी के मुताबिक, यह मजार पिछले लगभग तीन दशकों (30 साल) से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गई थी. यहां एक खादिम (मुल्तवी) बैठकर मजार की देखरेख करता था. स्थानीय लोगों के अनुसार, मजार पर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान-दक्षिणा से ही उसका घर चलता था. इसके साथ ही वहां टोने-टोटके और झाड़-फूंक का काम भी किया जाता था. चौंकाने वाली बात यह है कि इस मजार पर आस्था जताने वालों में सबसे बड़ी संख्या हिंदू समाज के लोगों की थी, जो यहां मन्नत मांगने आते थे. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई शांतिपूर्ण कार्रवाई अवैध मजार को हटाने की इस संवेनदशील कार्रवाई के दौरान जिला प्रशासन पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था. डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी और स्थानीय एसडीएम की सीधी निगरानी में पूरी ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. मौके पर किसी भी तरह के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था. प्रशासन की मुस्तैदी के चलते पूरी कार्रवाई बिना किसी विरोध के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई. 70 लाख की जमीन मुक्त, आगे भी जारी रहेगा अभियान प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई के जरिए करीब 70 लाख रुपये मूल्य की बेशकीमती सरकारी भूमि को भू-माफियाओं और अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है. जिला प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा. यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण या अतिक्रमण करने की कोशिश की गई, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में जहां-जहां भी सरकारी जमीनों पर अवैध धार्मिक स्थल या अन्य अतिक्रमण किए गए हैं, उन्हें चिन्हित कर लगातार हटाने की कार्रवाई की जा रही है.  

महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक समेत कई बड़े राज्यों को बिजली आपूर्ति में छोड़ा पीछे

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बेहतरीन बिजली व्यवस्था लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। भीषण गर्मी, बढ़ती बिजली मांग और प्राकृतिक बाधाओं के बावजूद उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रहा है। इसे योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वही मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और यूपीपीसीएल के कुशल प्रबंधन से यूपी देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति करने वाले राज्यों में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। विशेष बात यह है कि उत्तर प्रदेश लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए बिजली आपूर्ति के नए मानक स्थापित कर रहा है। 19 जून से उत्तर प्रदेश लगातार डिमांड बिजली आपूर्ति में देश का नंबर-1 राज्य बना हुआ है। उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र, गुजरात जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से भी आगे निकलकर अपनी क्षमता साबित की है। इस तरह बिजली मांग के मामले में यूपी ने देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। 24 जून को रिकॉर्ड 32,673 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई अगर डिमांड बिजली आपूर्ति पर नजर डालें तो 27 जून को उत्तर प्रदेश में 31949 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह 26 जून को 31,839 मेगावाट और 25 जून को 31,852 मेगावाट की आपूर्ति दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, 24 जून को उत्तर प्रदेश ने नया इतिहास रचते हुए रात करीब 9:51 बजे 32,673 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति की थी। यह अब तक की सर्वाधिक पीक डिमांड आपूर्ति थी। इसके पहले 23 जून की रात 10:26 बजे 32,405 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इसी तरह 22 जून को 31,841 मेगावाट, 21 जून को 32,348 मेगावाट, 20 जून को 31,549 मेगावाट और 19 जून को 30,968 मेगावाट बिजली आपूर्ति दर्ज की गई।  महानगर से लेकर गांव तक मिल रही लगातार बिजली योगी सरकार में प्रदेश के शहरों से लेकर गांव तक निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और वाराणसी जैसे महानगरों में लगातार 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 24 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है। इस तरह जो प्रदेश 2017 से पहले बिजली कटौती और खराब आपूर्ति व्यवस्था के लिए चर्चा में रहता था, वही आज रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति और मजबूत ऊर्जा प्रबंधन के लिए देशभर में मिसाल बन गया है।  उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए यूपीपीसीएल कृत संकल्पित उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में लगे हुए कार्मिक दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं। उच्च अधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा ही है। यूपीपीसीएल उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए कृत संकल्पित है। निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने जिस तरह रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति की है, वह हमारी मजबूत विद्युत अवसंरचना, बेहतर प्रबंधन और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी और रिकॉर्ड स्तर की बिजली मांग के बावजूद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है।

ICJS के समस्त पिलर को एक जुट करते हुए राज्य स्तरीय ICJS कार्यशाला का कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में आयोजन

भोपाल  राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB), पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा दिनांक 28 जून 2026 (रविवार) को “ICJS Implementation and Digital Integration” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का भव्य एवं सफल आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल), भोपाल में किया गया। यह कार्यशाला अपने स्वरूप और उद्देश्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय आयोजन साबित हुई, जिसमें Interoperable Criminal Justice System (ICJS) के अंतर्गत समस्त स्तंभ – पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक एवं स्वास्थ्य –एक ही मंच पर एकत्रित हुए। कार्यशाला में इन विभिन्न स्तंभो के प्रतिनिधियों ने आपसी अनुभवों, व्यावहारिक चुनौतियों तथा समाधान-आधारित विचारों को साझा करते हुए ICJS के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु समन्वित रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया। उक्त कार्यशाला का आयोजन माननीय न्यायमूर्ति  संजीव एस. कालगांवकर , मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य आतिथ्य एवं पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, SCRB  जयदीप प्रसाद के नेतृत्व तथा पुलिस महानिरीक्षक  हरिनारायणचारी मिश्र के समन्वय में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति  संजीव एस. कालगांवकर, न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, म.प्र., पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा एवं मंचासीन अतिथि गणों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य ICJS के अंतर्गत पुलिस, अभियोजन, न्यायालय, जेल, फॉरेंसिक व स्वास्थ्य विभागों के मध्य डिजिटल समन्वय को सशक्त बनाना तथा क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों और कमियों पर संवाद कर उनके समाधान की रूपरेखा तैयार करना था। कार्यशाला में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जिला न्यायाधीश, पुलिस अधीक्षक, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। स्वागत उद्बोधन में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, SCRB  जयदीप प्रसाद ने कहा कि ICJS केवल एक सॉफ्टवेयर परियोजना नहीं, बल्कि देश की संपूर्ण आपराधिक न्याय प्रणाली को डिजिटल रूप से जोड़ने वाला राष्ट्रीय मिशन है। उन्होंने कहा कि पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक एवं स्वास्थ्य विभागों के बीच निर्बाध डिजिटल समन्वय स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों, राज्य की वर्तमान प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति  संजीव एस. कालगांवकर ने कहा कि इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) केवल एक तकनीकी मंच नहीं, बल्कि पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, फॉरेंसिक एवं अन्य विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने वाला एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में तकनीक को विधिक मान्यता दी गई है और भविष्य की न्याय व्यवस्था डिजिटल साक्ष्यों, रियल-टाइम सूचना आदान-प्रदान तथा तकनीक आधारित प्रक्रियाओं पर आधारित होगी। मध्यप्रदेश द्वारा ई-समन, ई-वारंट, CCTNS आधारित समन्वय एवं डिजिटल संचार जैसी पहलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था की सफलता का वास्तविक पैमाना आम नागरिक को मिलने वाला लाभ है। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों के सुरक्षित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण डेटा, तकनीकी नवाचारों के उपयोग तथा सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि CCTNS 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, त्वरित एवं स्मार्ट बनाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीक का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा। उन्होंने ई-कोर्ट, ई-पेमेंट, भूमि अभिलेखों के एकीकरण तथा ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं जैसी डिजिटल पहलों की सराहना करते हुए डिजिटल चार्जशीट, सुरक्षित डिजिटल स्टोरेज, दस्तावेजों की सुव्यवस्थित इंडेक्सिंग एवं विभिन्न एजेंसियों के बीच निर्बाध डेटा साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही आरोपियों एवं गवाहों के डिजिटल संपर्क विवरणों का अद्यतन रिकॉर्ड तैयार कर ई-समन सेवा तथा पुलिस, न्यायालय एवं जेल प्रणालियों के बेहतर एकीकरण को भविष्य की आवश्यकता बताया। अपर मुख्य सचिव (गृह)  संजय शुक्ला ने कहा कि प्रशासनिक सुधार तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं, जबकि ऑपरेशनल एफिशिएंसी, विभागों के बीच डिजिटल इंटीग्रेशन एवं ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने सभी संबंधित विभागों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है तथा भारत सरकार, NIC एवं अन्य एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तकनीकी चुनौतियों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने उपस्थित विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य केवल रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य शासन प्रत्येक स्तर पर संसाधन, बजट एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध एवं वित्तीय धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तकनीक आधारित पुलिसिंग एवं ICJS समय की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन में डिजिटल इंटीग्रेशन, वैज्ञानिक विवेचना एवं विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीजीपी ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस डिजिटल पुलिसिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। विवेचना अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं तथा e-Sakshya, NAFIS, CCTNS एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जा रहा है। उन्होंने सभी विभागों से डेटा की गुणवत्ता बनाए रखने, तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा समन्वय को और मजबूत करने का आह्वान किया। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि ICJS 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड एनालिटिक्स एवं रियल-टाइम डिजिटल इंटीग्रेशन भविष्य की पुलिसिंग को नई दिशा देंगे और नागरिकों को अधिक प्रभावी न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराएंगे। कार्यशाला के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा वर्ष जून 2025 से मई 2026 की अवधि में CCTNS डेटा गुणवत्ता एवं डेटा एंट्री के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को "बेस्ट परफॉर्मर अवार्ड" प्रदान किए गए। CCTNS डेटा रैंकिंग में रतलाम जिले ने प्रथम, अशोकनगर एवं गुना ने संयुक्त रूप से द्वितीय तथा राजगढ़ जिले ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त फिंगरप्रिंट प्रबंधन एवं पहचान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु भोपाल कमिश्नरेट, देवास एवं इंदौर को भी सम्मानित किया गया। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यशाला के तकनीकी सत्र में देशभर के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। एनसीआरबी, नई दिल्ली के उप निदेशक  प्रसून गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) एवं CCTNS के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में … Read more

मुंगेर से बड़ा ऐलान: पंचायत विकास दिवस पर सम्राट चौधरी का प्रशासनिक अल्टीमेटम

पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बार फिर काम में लापरवाही बरतने वाले अफसरों को सख्त लहजे में चेताया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुंगेर पहुंचे और मौका था पंचायत विकास दिवस का। इस कार्यक्रम में सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर अफसर 30 दिनों में जनता काम पूरा नहीं करेंगे तो कोई भी आगे उन्हें बचा नहीं पाएगा। बिहार के गांवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए रविवार को मुंगेर का टेटिया बंबर एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना। जगन्नाथ उच्च विद्यालय के मैदान में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे राज्य के लिए महत्वाकांक्षी 'पंचायत विकास दिवस' और 'जनसहयोग शिविर' अभियान का शंखनाद किया। उन्होंने करोड़ों की विकास योजनाओं की सौगात देते हुए बिहार को अग्रणी राज्य बनाने का ब्लूप्रिंट पेश किया। लापरवाही पर कड़ा प्रहार, 31वें दिन निलंबन ​भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर कड़ा प्रहार करते हुए सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'अगर जनता के काम को 30 दिनों के भीतर निष्पादित नहीं किया गया, तो दोषी पदाधिकारी को 31वें दिन सस्पेंड होने से कोई नहीं बचा पाएगा।' इसकी मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर पर की जा रही है। ​ हर महीने का आखिरी रविवार पंचायत दिवस ​घोषणा के मुताबिक, अब हर महीने के आखिरी रविवार को राज्य की सभी 8.5 हजार पंचायतों में 'पंचायत विकास दिवस' मनेगा। इसमें सांसद, विधायक और त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधि एक साथ बैठकर गरीबी मुक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेंशन जैसे मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई करेंगे। ​ बजट ढाई गुना बढ़ा, सोलर और रोजगार क्रांति ​17वें वित्त आयोग के माध्यम से बिहार की पंचायतों का बजट 20,000 करोड़ से बढ़ाकर 52,000 करोड़ कर दिया गया है। मनरेगा की जगह 'विकसित भारत जी-राम-जी' अभियान से बिहार को 70,000 करोड़ तक मिलेंगे। बिजली क्षेत्र में नई नीति के तहत, सोलर पैनल से 125 यूनिट से अधिक उत्पादन करने वाले गरीबों के खाते में सरकार सीधे पैसे भेजेगी। महिला सशक्तिकरण के तहत जीविका दीदियों को गौ-पालन के लिए मुफ्त गाय दी जाएगी और दूध सरकार खुद खरीदेगी। ​ अंगिका में पूछा- 'तोय सब ठीक छो न?' ​भाषण के अंत में उन्होंने तारापुर की जनता का आभार जताया और स्थानीय अंगिका लहजे में पूछा— "तो तोय सब ठीक छो न? ठीक छो न कि?…" तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस मौके पर मुख्य सचिव, डीजीपी सहित कई आला अधिकारी और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

अब मिलेगी वैश्विक पहचान

भोपाल प्रदेश में कृषि कल्याण वर्ष के चलते जब किसानों की समृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है मध्य प्रदेश को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। मध्यप्रदेश की चार कृषि उपजों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर एवं छत्रिय धान को जीआई टैग मिल गया है। महाकौशल के किसानों ने प्रसन्नता जाहिर की है। इन कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आर्थिक समृद्धि बढ़ाने के लिए संकल्पित है। उनकी आय दोगुनी करने के लिए विशेष कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं। जैविक, प्राकृतिक एवं परंपरागत खेती के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के मार्गदर्शन एवं मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के सहयोग तथा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रयासों से प्रदेश की चार विशिष्ट कृषि उपजों—सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर एवं छत्रिय धान—को भोगौलिक संकेतक मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। अब इन उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी । जीआई टैग मिलने से इन कृषि उपजों को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। उनकी ब्रांड वैल्यू एवं बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी तथा किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ये चारों कृषि उपजें प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से संबंधित हैं। इससे विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र के किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा। इन उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी, क्षेत्र की पारंपरिक कृषि पद्धतियों एवं जैव-विविधता का संरक्षण होगा तथा कृषि आधारित प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात को गति मिलेगी। पूर्व सीहोर शरबती गेहूं एवं रीवा सुन्दरजा आम को जीआई टैग दिलाने में किसान कल्याण विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह उपलब्धि प्रदेश की कृषि विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्रीऐन्दल सिंह कंसाना ने प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अन्य उपजों को भी जी आई टैग दिलवाने की पहल की जायेगी। भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के जीआई पंजीयन के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। श्री निशांत वरवड़े, सचिव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने कहा कि जीआई टैग प्राप्त होने से विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र के किसानों को नए बाजार, बेहतर मूल्य एवं निर्यात के अवसर प्राप्त होंगे। मंडी बोर्ड भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के जीआई पंजीयन एवं विपणन संवर्धन के लिए सक्रिय सहयोग प्रदान करता रहेगा।“ , राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालककुमार पुरुषोत्तम ने कहा कि मंडी बोर्ड ऐसे रचनात्मक और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने वाले कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग करता रहेगा। सिताही कुटकी सिताही कुटकी एक कम अवधि (60 दिन) वाली 'लिटिल मिलेट' (छोटी बाजरा) की देशी किस्म है। यह वर्षा-आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है। यह सूखे की मार, नमी की कमी, और प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), 'ग्रेन स्मट' व 'ब्राउन स्पॉट' जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है। इस प्रकार, यह किसानों को एक स्थिर पैदावार दिलाने में मददगार साबित होती है। सिताही कुटकी की मध्यम ऊँचाई और मोटे तने के कारण फसल के गिरने की समस्या नहीं रहती। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ तथा कमज़ोर मिट्टी वाली स्थितियों में भी उगाया जा सकता है। डिण्डोरी के 'बैगा' तथा 'गोंड' जनजातियों के किसानों के लिए अच्छी आय दे सकती है। डिंडोरी में 'सिताही कुटकी' की खेती की 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी और 10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की स्थिर पैदावार से इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका, भोजन और पोषण सुरक्षा में मदद मिली है। जनजातीय ज़िलों के लगभग 60,000 आदिवासी किसान—खासकर डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया, बालाघाट और जबलपुर के कुछ हिस्सों के किसान पैदावार बढ़ाकर आर्थिक ले सकते हैं। डिंडोरी के पहाड़ी और मुश्किल इलाकों के 54 गाँवों के किसानों को मुनाफ़ा हुआ है। इन इलाकों में दूसरी रबी फ़सलों की खेती नहीं होती। नागदमन कुटकी नागदमन कुटकी डिंडोरी जिले में उगाई जाने वाली कुटकी की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है। यह अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। बैंगनी अरहर दरअसल अरहर की विशेष किस्म है। इसमें पौधे या फलियों पर बेंगनी रंग की झलक हेती है। इसमें भरपूर प्रोटीन होता है। रोगों से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है। अच्छी देखभाल होने पर 15 से 20 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है।  

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का लखनपुर से शुभारंभ, अभिभावकों से किया आह्वान—‘दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार’

रायपुर प्रदेश में चल रहे राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज अंबिकापुर जिले के लखनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंद पिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है। पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक अभियान में हर बच्चे को समय पर पोलियो की खुराक पिलाना अत्यंत आवश्यक है। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि भारत ने वर्षों के सतत प्रयास, जनभागीदारी और स्वास्थ्यकर्मियों की अथक मेहनत से पोलियो पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। अब इस उपलब्धि को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने परिवार, मोहल्ले और आसपास के 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं, ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि "दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार" केवल एक संदेश नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आजीवन स्वस्थ रखने का राष्ट्रीय संकल्प है। यदि कोई बच्चा बूथ तक नहीं पहुंच पाता है तो अभिभावक घर-घर आने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम को अवश्य जानकारी दें और सुनिश्चित करें कि बच्चे को पोलियो की खुराक मिल जाए।  राजेश अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पित प्रयासों से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता और जागरूकता के बल पर छत्तीसगढ़ भविष्य में भी अपनी पोलियोमुक्त पहचान को सुदृढ़ बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। स्वस्थ बचपन ही सशक्त भारत की आधारशिला है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह अपने आसपास किसी भी बच्चे को पोलियो की खुराक से वंचित न रहने दे तथा अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करे। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। बच्चों को उत्साहपूर्वक पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाई गई तथा अभिभावकों को नियमित टीकाकरण, स्वच्छता और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक किया गया। छत्तीसगढ़ में 36 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य प्रदेश में 28 से 30 जून 2026 तक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत राज्य के लगभग 35 लाख 98 हजार 904 (करीब 36 लाख) बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पूरे प्रदेश में 14 हजार 396 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं, जहां 28 जून को बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। अभियान को सफल बनाने के लिए 28 हजार 791 टीमें तथा 57 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। बूथ दिवस के बाद 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके। विशेष क्षेत्रों पर रहेगा फोकस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के सभी 33 जिलों में अभियान की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों, शहरी मलिन बस्तियों, ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों पर रहने वाले श्रमिक परिवारों, प्रवासी एवं घुमंतू समुदायों के बच्चों तक विशेष रूप से पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की सुरक्षा से वंचित न रहे। देशभर में लगभग 17 करोड़ बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य वर्तमान राष्ट्रव्यापी पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत देशभर में लगभग 17 करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि बच्चे को हाल ही में कोई अन्य टीका लगाया गया हो, तब भी पोलियो की खुराक पूरी तरह सुरक्षित है और अवश्य दी जानी चाहिए। हल्की सर्दी, खांसी या सामान्य बुखार होने पर भी बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जा सकती हैं। "दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार" पोलियोमुक्त भारत और पोलियोमुक्त छत्तीसगढ़ की पहचान बनाए रखने के लिए प्रत्येक परिवार की सहभागिता आवश्यक है।  हम सभी संकल्प लें कि हमारे आसपास का कोई भी बच्चा पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंद से वंचित न रहे। यही स्वस्थ बचपन, सुरक्षित भविष्य और सशक्त राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव है।

कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर किया शुभारंभ, अभिभावकों से की सहयोग की अपील

रायपुर  जीपीएम जिले में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ रविवार को जिला चिकित्सालय में कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को समय पर पोलियो की खुराक दिलाना केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी अभिभावकों से आग्रह किया कि वे शून्य से पाँच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं, ताकि पोलियो मुक्त भारत का संकल्प और अधिक सशक्त हो सके। उन्होंने कहा कि "दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत रहे बरकरार" केवल एक संदेश नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. के.के. सोनी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। अभियान के शुभारंभ के साथ ही जिले के सभी निर्धारित पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का कार्य प्रारंभ किया गया। बूथों पर सुबह से ही अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंचे और उत्साहपूर्वक अभियान में भागीदारी निभाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बताया कि इस वर्ष जिले में 53 हजार 490 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के प्रथम चरण में 28 जून को सभी पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई गई, जबकि दूसरे एवं तीसरे चरण में 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके। इसके लिए जिले भर में विशेष स्वास्थ्य दलों का गठन किया गया है, जिन्हें प्रत्येक गांव, मोहल्ले और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है तथा पोलियो की दवा, परिवहन और अन्य व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर ली गई हैं। दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी विशेष दल तैनात किए गए हैं ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि यदि उनके घर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचे तो उसका पूरा सहयोग करें और सुनिश्चित करें कि परिवार के शून्य से पाँच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद दवा अवश्य पिलाई जाए। विभाग ने स्पष्ट किया कि पोलियो की नियमित खुराक ही इस गंभीर बीमारी से बच्चों को स्थायी सुरक्षा प्रदान करती है। जनसहभागिता और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से ही पोलियो मुक्त समाज का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है।

बड़वानी में तेज बहाव बना जानलेवा, नाला पार करते बहा ट्रैक्टर, चालक का सुराग नहीं

ओझर/नागलवाड़ी (बड़वानी)  क्षेत्र में हो रही तेज वर्षा के कारण पहाड़ी नाले उफान पर हैं। इसी बीच रविवार शाम को एक बड़ी घटना में उफनते नाले को पार करने के प्रयास में एक ट्रैक्टर तेज बहाव में बह गया। हादसे में ट्रैक्टर के साथ चालक भी पानी के तेज बहाव में बह गया, जिसका रात तक कोई पता नहीं चल सका। पीपरखेड़ा गांव के समीप हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, ट्रैक्टर नागलवाड़ी निवासी प्रकाश बर्फा का है। ट्रैक्टर चला रहे बंसी पुत्र धूलिया, निवासी पीपरखेड़ा, गांव के समीप उफनते नाले को ट्रैक्टर सहित पार करने की कोशिश में बह गया। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। पुलिस द्वारा आसपास के नालों और संभावित स्थानों पर सघन तलाश अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीण भी खोजबीन में सहयोग कर रहे हैं। घटनास्थल से कुछ दूरी पर ट्रैक्टर तो मिल गया, लेकिन चालक अब भी लापता है। डेब और देवनली नदियों में सर्च ऑपरेशन चालक की तलाश जारी है। नागलवाड़ी थाने के सब इंस्पेक्टर कमल किशोर चौहान ने बताया कि घटना रविवार शाम 4 से 5 बजे की है। चालक की तलाश डेब व देवनली नदियों में की जा रही है। क्षेत्र के नालों का पानी उक्त नदियों में आता है। प्रशासन ने लोगों से आह्वान किया है कि वर्षा के दौरान किसी भी उफनते नाले या नदी को पार करने का प्रयास न करें, क्योंकि तेज बहाव जानलेवा साबित हो सकता है।  

हाथरस में योगी का बड़ा ऐलान: ₹548 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, विकास पर जोर

लखनऊ उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (28 जून) को हाथरस में 548 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित किया. उन्होंने खासतौर पर मुहर्रम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में करीब 12 हजार मोहर्रम जुलूस निकले, लेकिन कहीं भी दंगा, पथराव या कर्फ्यू जैसे हालात नहीं बने. उन्होंने कहा कि पहले कुछ लोग दूसरों के घरों के सामने ढोल-ताशे बजाकर माहौल बिगाड़ते थे, लेकिन अब यह सब बंद हो गया है और सभी धार्मिक आयोजन शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो रहे हैं. सीएम ने कहा कि 2017 के पहले राज्य के हर जिले में दंगे होते थे, महीनों महीनों कर्फ्यू होता था जिससे आमजन त्रस्त होता था. लेकिन आज हालात बदल गए हैं. उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश दंगों और कर्फ्यू के कारण बदनाम था, लेकिन पिछले 9 सालों में प्रदेश में न कोई दंगा हुआ, न कर्फ्यू लगा और न ही गुंडागर्दी होने दी गई. ‘मोहर्रम का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ’ उन्होंने कहा कि हाल ही में मोहर्रम का आयोजन भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि पहले मोहर्रम के नाम पर सड़कों पर हथियारों का प्रदर्शन होता था, तलवारबाजी के दौरान राहगीरों पर हमले हो जाते थे. ताजिया निकालने के नाम पर गरीबों की झोपड़ियां हटाई जाती थीं, मकानों के छज्जे तोड़े जाते थे और हाईटेंशन बिजली की लाइनों को हटाने का दबाव बनाया जाता था. सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने स्पष्ट व्यवस्था बनाई है कि किसी गरीब की झोपड़ी या मकान नहीं हटेगा और न ही हाईटेंशन लाइनें हटाई जाएंगी. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ताजिया की ऊंचाई कम करनी होगी. उन्होंने कहा कि अगर ताजिया ज्यादा ऊंचा होगा तो हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने का खतरा रहेगा, इसलिए सुरक्षा सर्वोपरि है. ‘ताजिए की ऊंचाई सीमित रखनी होगी’ उन्होंने कहा कि मुहर्रम के नाम पर अब राज्य में कोई हंगामा नहीं होता. अब न किसी की झोपड़ी तोड़ी जाती है और न ही किसी को किसी तरह की परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि आप ताजिए को सजाइए, लेकिन किसी गरीब का घर तोड़ने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि ताजिए की ऊंचाई सीमित रखनी होगी. अगर ताजिया बहुत ऊंचा होगा, तो बिजली के तारों की चपेट में आने का खतरा रहेगा . विकास तभी संभव है, जब सुरक्षा का बेहतर माहौल हो’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हाथरस की तीनों विधानसभा क्षेत्रों—हाथरस, सादाबाद और सिकंदराराऊ—के लिए करीब 550 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उपहार देने के लिए विशेष रूप से आए हैं. उन्होंने इसके लिए हाथरस जनपद के सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि विकास तभी संभव है, जब सुरक्षा का बेहतर माहौल हो. उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण में ही विकास की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जहां सुरक्षा नहीं होती, जहां दंगे और अराजकता का माहौल होता है, वहां विकास और उज्ज्वल भविष्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती. ‘पहले प्रदेश के हर जिले में दंगे होते थे’ उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले प्रदेश का ऐसा कौन-सा जिला था, जो दंगों से अछूता रहा हो. उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग की घटना, कोसीकलां के दंगे, मेरठ और अलीगढ़ के दंगे तथा मुजफ्फरनगर की हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय आए दिन कर्फ्यू लगते थे. इससे आम जनता का व्यापार चौपट हो जाता था, नौजवानों की नौकरियां प्रभावित होती थीं, जनजीवन अस्त-व्यस्त रहता था और प्रदेश की छवि पूरे देश में खराब होती थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में व्यापारी, किसान और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करते थे. जगह-जगह लूटपाट होती थी और बेटियों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता था. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने अपराधियों और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है एवं देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है. समाजवादी पार्टी पर बोला हमला अपने संबोधन में सीएम ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अखिलेश यादव का बयान पढ़ा, जिसमें अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि आप क्या अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाएंगे, पहले आप अपना इतिहास देखिए. उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली आपकी ही सरकार ने चलवाई थी. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या आज अपनी गौरवशाली पहचान वापस प्राप्त कर रही है. योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजनों को भी रोका गया और कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था. उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार धार्मिक परंपराओं और आस्था के आयोजनों को सम्मान के साथ आगे बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि हाथरस में 22 से अधिक मंदिरों का सुंदरीकरण कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले जो धनराशि कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल के निर्माण पर खर्च की जाती थी, उसी धन का उपयोग अब मंदिरों के विकास और सुंदरीकरण के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बिना भेदभाव विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और प्रदेश में सुशासन एवं सुरक्षा का वातावरण स्थापित किया गया है. कांग्रेस पर भी जमकर बरसे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हमेशा जनता को गुमराह करने का काम करती रही हैं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दल संविधान बचाने की बात कर रहे थे, जबकि 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर संविधान की हत्या कांग्रेस ने ही की . उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का सबसे बड़ा अपमान कांग्रेस ने किया.

गिरिबाला के घर चोरों का धावा, पुलिस की मौजूदगी भांपकर मौके से भागे आरोपी

भोपाल  त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के बहुचर्चित मामले में आरोपित सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला के घर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात चोरी की वारदात हुई। बदमाशों ने पीछे के रास्ते घर में घुसकर सोने के जेवरात और गिरिबाला व समर्थ सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की एक फाइल चुरा ली। वे लेकर भागने की कोशिश ही कर रहे थे। इसी दौरान क्षेत्र में गश्त कर रही चार्ली पुलिस की सतर्कता से उनकी योजना विफल हो गई। क्या है पूरा मामला पुलिस की मौजूदगी का एहसास होते ही बदमाश चोरी किया गया सामान मौके पर छोड़कर भाग निकले। कटाराहिल्सा थाना पुलिस के अनुसार, घटना के समय गिरिबाला के भाई उनके बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित घर के भीतर मौजूद थे। बदमाश मकान के पिछले हिस्से से अंदर दाखिल हुए, जिससे किसी को उनकी आहट तक नहीं लगी। इसी बीच चार्ली पुलिस की टीम गश्त करते हुए घर के बाहर पहुंची और सायरन बजाया। सायरन की आवाज सुनते ही बदमाश घबरा गए और जेवरात व महत्वपूर्ण दस्तावेजों से भरी फाइल वहीं छोड़कर भागने लगे। मौके से सोने के जेवरात और दस्तावेजों वाली फाइल जब्त पुलिसकर्मियों ने उनका पीछा भी किया, लेकिन आरोपित अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे। वारदात के बाद पुलिस ने मौके से सोने के जेवरात और दस्तावेजों वाली फाइल जब्त कर ली है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। हर पहलू की गहन जांच की जा रही है पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि चोरी का उद्देश्य केवल जेवरात हासिल करना था या फिर ट्विषा शर्मा मौत मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंचने की कोई सुनियोजित कोशिश की गई थी। फोरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।