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सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बड़ा फैसला संभव, जानें ताजा अपडेट

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है।  जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।  क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद?  दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है।  अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा।  नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है?  आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है।  फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई।  कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है।  अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है?  केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।   अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा?  जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

Health Alert: छोटी बच्चियों में समय से पहले पीरियड्स बढ़ने के मामले, डॉक्टर बोले- इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

 नई दिल्ली कई दशकों तक लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआत की उम्र आमतौर पर 11 से 13 साल की उम्र के बीच देखी जाती रही है लेकिन आज डॉक्टर्स इस पैटर्न में एक बड़ा बदलाव महसूस कर रहे हैं जिसमें लड़कियों में प्यूबर्टी (यौवन) के लक्षण बहुत कम उम्र में ही दिखने लगे हैं. अब कई लड़कियों को 8 या 9 साल की उम्र या उससे भी पहले पीरियड्स शुरू हो रहे हैं जो बेहद चिंता वाली बात है. कई बार माता-पिता अक्सर इसे सामान्य मानकर यह सोच लेते हैं कि उनका बच्चा दूसरों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस शारीरिक बदलाव को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।  कुछ मामलों में यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्यूबर्टी बहुत जल्दी शुरू हो गई है. इस कंडीशन को प्रीकोशियस (Precocious Puberty) प्यूबर्टी कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि समय से पहले प्यूबर्टी आने से न केवल बच्चे का शारीरिक और कद-काठी बढ़ने से रुक सकती है बल्कि यह कंडीशन उनकी इमोशनल और मेंटल हेल्थ को भी बुरी तरह प्रभावित करती है. इसके अलावा यह कंडीशन आगे चलकर लंबे समय तक रहने वाली कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।  अगर माता-पिता को अपनी बच्ची में तय उम्र से बहुत पहले ही प्यूबर्टी के लक्षण दिखने लगें तो उन्हें इस पर खास ध्यान देना चाहिए. ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. समय पर डॉक्टर से जांच कराने से न सिर्फ इसके सही कारणों का पता लगाया जा सकता है बल्कि यह भी पक्का किया जा सकता है कि बच्ची को सही समय पर सही इलाज, देखभाल और मानसिक सहायता मिल सके।  क्यों बच्चियां हो रहीं जल्दी जवान? भारत और कई अन्य देशों के शोधकर्ताओं ने देखा है कि पिछले कुछ दशकों में प्यूबर्टी की औसत उम्र धीरे-धीरे कम हो गई है. हालांकि इस प्रवृत्ति के पीछे कोई एक कारण नहीं है लेकिन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कई जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक इसमें योगदान दे सकते हैं।  भारत और दुनिया के कई देशों के रिसर्चर्स ने यह देखा है कि पिछले कुछ दशकों में लड़कियों में प्यूबर्टी की औसत उम्र धीरे-धीरे काफी कम हुई है. हालांकि, इस बदलाव के पीछे कोई एक इकलौता कारण नहीं है बल्कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारी बदलती लाइफस्टाइल और पर्यावरण से जुड़े कई फैक्टर्स इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  समय से पहले प्यूबर्टी आने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है बचपन में बढ़ता मोटापा. शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी (फैट्स) एस्ट्रोजेन हार्मोन के प्रोडक्शन को बढ़ा देती है जो लड़कियों के शारीरिक और यौन विकास के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है. शरीर में एस्ट्रोजेन का यह हाई लेवल तय समय से काफी पहले ही प्यूबर्टी की प्रक्रिया को ट्रिगर करता है।  अलर्टी प्यूबर्टी के कई और कारण भी हैं रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी की कमी स्क्रीन टाइम बढ़ाना नींद की खराब आदतें प्रोसेस्ड फूड और मीठे ड्रिंक्स का बार-बार इस्तेमाल प्लास्टिक, कॉस्मेटिक्स और कुछ घरेलू प्रोडक्ट्स में पाए जाने वाले एंडोक्राइन को खराब करने वाले केमिकल्स के संपर्क में आना फैमिली हिस्ट्री या जेनेटिक कारण हालांकि इन कारणों से जल्दी प्यूबर्टी होने की संभावना बढ़ सकती है लेकिन हर बच्चा अलग होता है और जल्दी प्यूबर्टी वाली सभी लड़कियों को कोई अंदरूनी मेडिकल प्रॉब्लम नहीं होती है।  इन संकेतों पर ध्यान दें माता-पिता जल्दी प्यूबर्टी अक्सर 8 साल की उम्र से पहले दिखने वाले शारीरिक बदलावों से शुरू होती है. इनमें कुछ आम चेतावनी संकेत शामिल हैं।  8 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट का विकास हाइट में तेजी से बढ़ोतरी शरीर में टीनएजर्स जैसी बॉडी महक आना मुंहासें प्यूबिक या अंडरआर्म बालों का बढ़ना मूड स्विंग या इमोशनल बदलाव पीरियड्स का नॉर्मल उम्र से पहले शुरू होना डॉक्टरों का कहना है कि कुछ बच्चे दूसरों की तुलना में नैचुरली जल्दी मैच्योर हो जाते हैं लेकिन इन संकेतों की हमेशा एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल से जांच करवानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वो नॉर्मल रेंज में हैं या नहीं।  जल्दी पीरियड्स का मतलब सिर्फ पीरियड्स जल्दी आना नहीं है. रिसर्च से पता चलता है कि जिन लड़कियों को बहुत कम उम्र में पीरियड्स आते हैं, उन्हें आगे चलकर कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं. जैसे- मोटापा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) टाइप 2 डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी कुछ हॉर्मोन से जुड़े कैंसर बचपन में इमोशनल और साइकोलॉजिकल चुनौतियां जल्दी प्यूबर्टी एक लड़की की आखिरी एडल्ट हाइट पर भी असर डाल सकती है. एक बार पीरियड्स शुरू होने पर हड्डियां ज्यादा तेजी से मैच्योर होती हैं जिससे ग्रोथ प्लेट्स वक्त से पहले बंद हो जाती हैं. इस वजह से कुछ लड़कियों का लंबाई बढ़ना जल्दी रुक सकता है और उनकी कद-काठी अपनी जेनेटिक क्षमता से भी छोटी रह सकती है।  बहुत जल्दी बड़े होने की इमोशनल चुनौतियां शारीरिक बदलाव कहानी का सिर्फ एक हिस्सा हैं जो लड़कियां अपनी क्लासमेट्स से पहले प्यूबर्टी का अनुभव करती हैं, उन्हें इमोशनली भी परेशानी हो सकती है।  उन्हें अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर शर्मिंदगी महसूस हो सकती है, स्कूल में दूसरे बच्चों द्वारा उनका मजाक उड़ाने या चिढ़ाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, उन्हें कन्फ्यूजन और एंग्जायटी हो सकती है क्योंकि वे पीरियड्स के लिए इमोशनली तैयार नहीं होती हैं।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर पर खुलकर बातचीत करना जरूरी है. माता-पिता को उम्र के हिसाब से सही भाषा में प्यूबर्टी के बारे में समझाना चाहिए. सवालों का ईमानदारी से जवाब देना चाहिए और बच्चों को भरोसा दिलाना चाहिए कि उनकी भावनाएं नॉर्मल हैं।  स्कूल भी पीरियड्स के बारे में जल्दी जानकारी देकर एक जरूरी भूमिका निभाते हैं ताकि लड़कियां अपने पहले पीरियड्स से पहले समझ सकें कि क्या उम्मीद करनी है।  क्या जल्दी प्यूबर्टी को रोका जा सकता है? जल्दी पीरियड्स आने के हर मामले को रोका नहीं जा सकता. खासकर जब जेनेटिक्स शामिल हों. हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें नॉर्मल ग्रोथ और पूरी सेहत को सपोर्ट कर सकती हैं। 

गौतम बुद्ध नगर में 8200 करोड़ रुपये के निवेश से एसएईएल के सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

जेवर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रिन्यूएबल व ग्रीन एनर्जी आज की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश ने 20 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और जेवर क्षेत्र जल्द ही भारत का सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। इससे चीन आदि देशों पर निर्भरता कम होगी। पीएम सूर्यघर योजना से प्रदेश के 6 लाख परिवारों का बिजली बिल 60 प्रतिशत तक घटा है, यह यूपी में बढ़ती सौर ऊर्जा शक्ति का प्रमाण है। मुख्यमंत्री शनिवार को गौतम बुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में 8200 करोड़ रुपये के निवेश से एसएईएल के इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश बनाने में एसएईएल की बड़ी भूमिका होगी। मुझे विश्वास है कि हम जल्द ही यूपी को सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने का काम करेंगे। पीएम मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 12 वर्ष में भारत ने दुनिया में एक नई सशक्त पहचान बनाई है। लोग सबसे तेज अर्थवस्थवस्था के रूप में भारत को बढ़ता देख रहे हैं। हमारा लक्ष्य अगले दो-तीन वर्षों में यूपी में 20 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी पैदा करना है। 6 लाख परिवारों को बिजली बिल 60 प्रतिशत तक कम सीएम ने कहा कि मोदी जी ने दुनिया के देशों को प्रदूषण मुक्त वातावरण देने के लिए प्रेरित किया। रिन्यूएबल व ग्रीन एनर्जी के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई। उसी का परिणाम है कि यूपी जैसे राज्य में 6 लाख से अधिक परिवार पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगाकर ऊर्जा की आत्मनिर्भरता प्राप्त कर रहे है। इनके बिजली बिलों में भी लगभग 50-60 प्रतिशत की कमी आई है। आज यूपी 2 हजार मेगावाट से अधिक बिजली सोलर पैनल से उत्पन्न कर रहा है।  20 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य   मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी योजना अगले दो-तीन वर्षों के अंदर यूपी में 20 हजार मेगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य प्राप्त करना है। फिलहाल हम 6 हजार मेगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी से प्राप्त कर रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का स्रोत सोलर के अलावा पराली भी है। किसान पराली को जलाकर प्रदूषण न करें, बल्कि उसे सीबीजी प्लांट तक पहुंचा दें  तो वहां इससे सीएनजी, कंप्रेस्ड बायोगैस और इथेनॉल बन सकता है। किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी। देश का 55 प्रतिशत एथेनॉल उत्पादन यूपी में सीएम ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी लागू होने के बाद यूपी सबसे ज्यादा एथेनॉल उत्पादन वाले राज्य के रूप में स्थापित हुआ है। इसने हमारी शुगर इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बना दिया है। करीब एक दशक पहले हताशा-निराशा से जूझ रहे किसानों को हमने पिछले 9 वर्ष के अंदर 3.22 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया। हम गन्ने से चीनी व एथेनॉल भी बना रहे हैं। देश का लगभग 55 फीसदी एथेनॉल उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश कर रहा है। सबसे ज्यादा सीबीजी प्लांट यूपी में लगे हैं। हमारा लक्ष्य अगले एक वर्ष में 100 सीबीजी प्लांट स्थापित करना है। भारत की निर्यात क्षमता बढ़ाएगा सोलर प्लांट सीएम योगी ने कहा कि एसएईएल ने नई तकनीक के साथ सोलर मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है। इस प्लांट से 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। यह सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। अभी तक जिन कार्यों के लिए हमें चीन या दुनिया के अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता था,  अब वह टेक्नोलॉजी इसी जेवर में तैयार होगी। इसके माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन भी होने वाला है। एमएसएमई, लॉजिस्टिक और सहायक उद्योगों के साथ-साथ इंजीनियरों व टेक्नीशियनों को भी एक नए फील्ड में कार्य करने के अवसर प्राप्त होंगे। उत्तर प्रदेश के युवाओं को ग्रीन इकोनॉमी का नेतृत्व करने का भी अवसर इसके माध्यम से प्राप्त होने वाला है। भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की नई यूनिट का शिलान्यास करके आए हैं, जिसे भारत का अंबर ग्रुप व कोरिया सर्किट मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। यहां फिल्म सिटी व अपैरल सिटी भी बन रही है। विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय भी आ रहे हैं। टॉय पार्क भी बनने जा रहा है। भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में यह क्षेत्र विकसित होने जा रहा है। हमें पीएम मोदी जी के विजन को पूरे प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना है।   इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह, एसएईएल के डायरेक्टर सुखबीर सिंह, एसएईएल के सीईओ एवं कार्यकारी निदेशक लक्षित आवला, एसएईएल के फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर जसवीर सिंह और यीडा समेत अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। 20 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार जेवर। एसएईएल कंपनी के मुताबिक इस परियोजना से 20 हजार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे औद्योगिक गतिविधियों, सहायक उद्योगों और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। निर्माण पूरा होने पर यहां अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उच्च दक्षता वाले सोलर सेल और टॉपकॉन सोलर मॉड्यूल्स का निर्माण किया जाएगा, जिससे भारत में तेजी से बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। 20 हजार करोड़ रुपये तक निवेश बढाएगी कंपनी एसएईएल के सह-संस्थापक एवं निदेशक सुखबीर सिंह ने कहा कि कंपनी 8,200 करोड़ रुपये के प्रारंभिक निवेश से 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल निर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। यह केवल बुनियादी ढांचे में निवेश नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है। राज्य वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कंपनी 2029-30 तक अपना निवेश बढ़ाकर 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाएगी।

Fatty Liver Alert: AIIMS डॉक्टर बोले- तुरंत छोड़ दें ये 4 चीजें, शराब जितना पहुंचाती हैं लिवर को नुकसान

 नई दिल्ली शराब पीने से लिवर खराब होता है ये बात तो अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन खाने की कुछ ऐसी चीजें भी हैं जो लिवर को शराब की तरह ही नुकसान करती हैं. इनके कारण लिवर खराब हो सकता है. फैटी लिवर जैसी बीमारी भी हो रही है. शराब न पीने से लिवर के खराब होने को नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहते हैं. देश में बीते कुछ सालों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसका प्रमुख कारण कुछ फूड हैं।  मेडिकल जर्नल द लैंसेट की स्टडी बताती हैं कि भारत में हर 10 में से लगभग 4 वयस्क नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से पीड़ित हैं . द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित इस रिसर्च में  7,764 वयस्कों का फैटी लिवर का टेस्ट किया गया. इसमें से 39 प्रतिशत को नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) थी. रिसर्च में कहा गया है कि अगर फैटी लिवर के बढ़ते मरीजों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सिरोसिस, लिवर कैंसर के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।  शराब न पीने वालों का लिवर क्यों हो रहा खराब इस बारे में डिटेल में जानने के लिए आजतक.इन ने दिल्ली AIIMS में  Department of Gastroenterology and Human Nutrition विभाग में प्रोफेसर डॉ. शालीमार से बातचीत की है. वह कहते हैं कि जब लिवर में 5 फीसदी से अधिक फैट जमा हो जाता है तो उसको फैटी लिवर कहते हैं. फैटी लिवर की बीमारी इस अंग के खराब होने की शुरुआत है. फैटी लिवर दो प्रकार का होता है. एक है अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज ( शराब पीने से लिवर का फैटी होना) और दूसरी है नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज. अब देखा जा रहा है कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भी तेजी से बढ़ रही है. यह वह लोग हैं जो शराब नहीं पी रहे हैं, लेकिन फिर भी लिवर खराब हो रहा है. इसका प्रमुख कारण गलत खानपान है।  कौन से ऐसे फूड हैं जो लिवर को नुकसान कर रहे हैं अगर कोई व्यक्ति खाने में बहुत अधिक तेल का इस्तेमाल करता है और मीठा जरूरत से ज्यादा खाता है तो उसको फैटी लिवर के होने का खतरा होता है. भले ही वह शराब नहीं पीता है तो भी उसको यह हो सकता है. आजकल एक और बड़ी समस्या यह भी देखी जा रही है कि लोग कई तरह की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के खा रहे हैं. कुछ लोग ऐसा सालों से कर रहे हैं. इससे लिवर पर गंभीर असर हो रहा है. बिना जरूरत के दवाएं खाना लिवर को खराब करता है .सिर्फ फैटी लिवर ही नहीं ये लिवर की कई बीमारियों का कारण बन सकता है।  डॉ. शालीमार कहते हैं कि अब कई लोग फास्ट फूड भी ज्यादा खाते हैं. जैसे बर्गर, पिज्जा और दूसरी ऐसी चीजें. ये आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं. जब इन बैक्टीरिया को नुकसान होता है तो फिर इसका असर लिवर पर भी होता है. कुल मिलाकर ज्यादा तेल, मीठा, फास्ट फूड और बिना वजह दवाएं खाने की आदत लिवर को शराब जितना नुकसान कर सकती हैं।  पतले लोगों को भी क्यों हो रहा फैटी लिवर अगर किसी व्यक्ति का खानपान ठीक नहीं है तो भले ही वह पतला है तो भी उसको लिवर की बीमारी हो सकती है. ऐसा गलत खानपान से होता है. बीते कुछ सालों में इस तरह के मामले सामने आ भी रहे है. लोग कहते हैं कि वह पतले हैं और शराब भी नहीं पीते हैं फिर भी उनको लिवर की बीमारी क्यों हो रही है. इसका जवाब यही है कि ये लोग खानपान का ध्यान नहीं रख रहे हैं. फास्ट फूड, तेल और चीनी को जरूरत से ज्यादा खा रहे हैं।  लिवर को फिट रखना है तो इन बातों का रखें ध्यान तेल, मैदा, चीनी का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें  लंबे समय तक भूखा न रहें.  शराब का सेवन न करें.  डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से कोई दवाएं न खाएं 

ऑटो सेक्टर में बड़ी हलचल! Volkswagen बंद करेगी 4 प्लांट, 1 लाख नौकरियों पर संकट

 नई दिल्‍ली ऑडी और पोर्श जैसी लग्‍जरी कार बनाने वाली यूरोप की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी अब ग्‍लोबल स्‍तर पर लोगों को नौकरी से निकालने की तैयारी कर रही है. फॉक्सवैगन एजी को लग्‍जरी और स्‍पोर्ट्स कार बनाने के बारे में जाना जाता है. लैम्बोर्गिनी (Lamborghini), स्कोडा (Skoda) और डुकाटी (Ducati) को भी इसी कंपनी ने बनाया है।  यह कंपनी करीब 1 लाख लोगों को नौकरी से निकालने पर विचार कर रही है और कई कारखानों को भी बंद किया जा सकता है. मैनेजर मैगजिन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी ज्‍यादा कम्‍प्‍टेटिव बनाने के लिए एक्‍स्‍ट्रा जॉब्‍स में कटौती की योजना बना रही है. छंटनी का ये प्‍लान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम के प्रयासों का हिस्‍सा है।  एक लाख की जाएगी नौकरी ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट कहा गया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में मैनेजिंग बोर्ड की बैठक के दौरान CEO ने एक प्रस्‍ताव पेश किया था, जिसके तहत कर्मचारियों की संख्या में दोगुनी कटौती करके 100,000 तक की छंटनी शामिल है. पोर्श और ऑडी की मालिक कंपनी फॉक्सवैगन ग्रुप में मौजूदा समय में लगभग 657,000 लोग काम करते हैं. सीईओ के इस नए प्रस्ताव को अगले महीने बोर्ड के सामने रखा जाएगा. ऐसे में फैसला अब सिर्फ बोर्ड के ऊपर है कि वह कितने लोगों की छंटनी पर मोहर लगाता है या फिर कोई अन्‍य रास्‍ता तलाश लेता है।  4 प्‍लांट बंद करेगी कंपनी  रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी रणनीति में इस दशक के अंत तक सामान्य खर्चों में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) की कटौती करना है, जिस कारण इतने बड़े स्‍तर पर छंटनी की तैयारी चल रही है. वहीं मिड टर्म में जर्मनी में चार कारखाने बंद करना भी शामिल है. इनमें नेकरसुलम में ऑडी का एक कारखाना और हनोवर, ज़्विकाऊ और एम्डेन में वीडब्ल्यू के प्‍लांट शामिल हैं।  क्‍यों कंपनी पर आया संकट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्‍सवैगन समूह को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए कंपोनेंट प्‍लांटों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वीडब्ल्यू ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं. यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहा है. कंपनी पर यह संकट तक आया है जब कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोर सेल और यूरोप में BYD और स्टेलेंटिस एनवी समेत कई कम्‍प्‍टेटिव प्‍लेयर आ गए हैं. जिस कारण कंपनी फाइनेंशियल दिक्‍कतों से जूझ रही है।  कंपनी ने अभी तक ये कदम उठाए हैं  अपने फाइनेंशियल कंडीशन को सुधारने के लिए ग्रुप ने कुछ खास कदम उठाए हैं. ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश जुटाने के लिए कंपनी ने अपनी एवरलेंस समुद्री इंजन इकाई में 51% हिस्सेदारी बेचा है. करीब 28,000 कर्मचारियों ने वीडब्ल्यू छोड़ने पर सहमति जताई है, जो 2030 तक पूरे समूह में 50,000 कर्मचारियों की छंटनी करने के पहले ही हुआ है. कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता को भी हर साल 12 मिलियन वाहनों से घटाकर 9 मिलियन कर दिया है।  आसान नहीं होगी छंटनी की राह श्रमिक नेताओं ने नई योजनाओं का तुरंत विरोध किया है. कंपनी की श्रमिक परिषद और आईजी मेटाल यूनियन के संयुक्त बयान के अनुसार, ये योजनाएं कर्मचारियों और उन क्षेत्रों में अशांति पैदा करती हैं जहां हम काम करते हैं. अगर ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाता है, तो हम उनका पूरी ताकत से विरोध करेंगे।  खैर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्सवैगन में छंटनी करना मुश्किल है. कार निर्माता कंपनी के बोर्ड में आधी सीटें श्रमिक प्रतिनिधियों के पास हैं और जर्मनी के लोअर सैक्सोनी राज्य (जो आमतौर पर श्रमिक संघों का पक्ष लेता है ) के पास दो और सीटें हैं। 

क्या फोन को नियमित Restart करना जरूरी है? जानें RESTART फीचर क्यों दिया जाता है

 नई दिल्ली आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं।  सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है।  एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती।  हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है।  रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है।  रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है।  अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है।  रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है।  सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है।  Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता।  किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।  जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है।  क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है। अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है।  ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है। 

कृषि विभाग की सख्त कार्रवाईःवैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाले उर्वरक की 11 बोरियां जब्त,

रायपुर  किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाली पीआरओएम (PROM) उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की हैं। महासमुंद जिले के कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में सालेपाली, पाइकमाल, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) प्रिंट वाली उर्वरक की 11 बोरियां मिलीं, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उर्वरकों की गुणवत्ता एवं वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में यह निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

केरल में मानसून की रफ्तार धीमी, अल-नीनो के असर से 33 फीसदी कम बारिश; खेती पर संकट के आसार

नई दिल्ली केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है।  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं।  IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे 'बारिश की कमी' (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।  खेती पर कम बारिश का असर बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है।  मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर? सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है।  पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप 'तिरुवाथिरा नजट्टुवेला' कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है।  IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 

भाजपा महानगर इकाई की तरफ से आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के उद्घाटन सत्र में बोले सीएम योगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मूल्यों और आदर्शों की राजनीति अपनाकर शून्य से शिखर तक की यात्रा की है। 1985 में मात्र दो लोकसभा सीट हासिल करने वाली इस पार्टी की आज केंद्र सहित देश के 21 राज्यों में सरकार है। दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की यात्रा सत्ता प्राप्त की यात्रा नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, सुशासन, समृद्धि और समन्वय की बेहतरीन यात्रा है। सीएम योगी शनिवार को गोरखपुर के गुलरिहा स्थित एक रिजॉर्ट में भाजपा महानगर के प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के अंतर्गत पार्टी की महानगर इकाई की तरफ से आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रतिभागियों को ‘दल से पहले देश’ और ‘व्यक्ति से पहले समाज’ के भाव से अनवरत आगे बढ़ते रहने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा आज दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास का प्रतीक बनी है तो इसके पीछे भारतीय जनसंघ के समय से पार्टी के संस्थापकों के आदर्शों और संस्कारों से मिली प्रेरणा है। सीएम योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उद्धरण, ‘बिना मूल्यों और आदर्शों वाली राजनीति मौत का फंदा है’ का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए संस्थापकों के मूल्य और आदर्श सदैव सर्वोपरि हैं।  वाह्य और आंतरिक सुरक्षा का मॉडल दिया भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने देश में वाह्य और आंतरिक सुरक्षा का मॉडल दिया है। 2014 के पहले दुश्मन देश सैनिकों से क्रूरता करते थे। सरकारें तब बोलती नहीं थी, उन्हें देश की कीमत पर संबंध की चिंता रहती थी। 2014 के बाद सरकार ने दुश्मन की आंख में आंख मिलाने का सामर्थ्य दिया है। एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये दुनिया के सामने अपने सामर्थ्य और ताकत का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के पहले कश्मीर जल रहा था, पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद चरम पर था, देश के 120 जिलों में नक्सलवाद हावी था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद को कुचल दिया है। पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद समाप्त हो चुका है। नक्सलवाद एक-दो जिलों तक सीमित है और बहुत शीघ्र वहां भी खत्म हो जाएगा।  सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास संभव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास संभव होता है। सुरक्षा का वातावरण बनने के कारण ही आज इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड कनेक्टिविटी, हाईवे एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इनलैंड वाटरवे, मेट्रो, रोपवे और लॉजिस्टिक के कार्य बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास की प्राथमिक आवश्यकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर जितना मजबूत होगा, विकास भी उतनी ही तेजी से होगा।  अंत्योदय का सपना साकार कर रही मोदी सरकार सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में शामिल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सपने को साकार कर रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया ने बीते 12 वर्षों में बदलते भारत को देखा है। कल्याणकारी योजनाओं का केंद्र समाज के अंतिम पायदान का व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि आज देश में 12 करोड़ लोगों के घर शौचालय बनाए गए हैं, 4 करोड़ गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्की छत मिली है। करोड़ों लोगों को नल से जल की सुविधा मिल रही है। 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त हो रही है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की सुविधा मिली। लोगों को पीएम जीवन ज्योति, पीएम स्टार्टअप, स्टैंडअप, डिजिटल इंडिया, पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मिल रहा है। गांव में गरीबों को घरौनी की सुविधा मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से उबरकर देश के विकास में सहभागी बन रहे हैं।  भाजपा सरकार ने बदली लोगों की धारणा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जो बातें सिर्फ कल्पना में थीं, भाजपा सरकार ने उन्हें हकीकत में बदला है। सरकार ने लोगों की धारणा बदली है। उन्होंने कहा कि कोई कल्पना भी नहीं करता था कि श्रीराम जन्मभूमि का विवाद समाप्त होगा। आज विवाद समाप्त होने के साथ ही श्रीराम मंदिर का निर्माण भी हो चुका है। काशी में विश्वनाथ धाम और विंध्याचल में विंध्य धाम का निर्माण हो चुका है। कुंभ की परंपरा हजारों वर्षों की है लेकिन दिव्य, भव्य, स्वच्छ और स्मार्ट कुंभ का आयोजन पहली बार भाजपा सरकार में ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने कुंभ को भगदड़, अराजकता और गंदगी का पर्याय बना दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत वर्ष में डबल इंजन सरकार ने देश की विरासतों को सम्मान से जोड़ा। पीएम मोदी ने दल से ऊपर देश की भावना से हर घर पर कमल का फूल वाला झंडा फहराने की बजाय देश की आन, बान, शान का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराने का आह्वान किया। सीएम योगी ने कहा कि अन्य दलों को भी दल से ऊपर देश के मंत्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। कहा कि यह राष्ट्र को आतंकवाद से मुक्त कर विकास की बुलंदियों पर ले जाने का मंत्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्वार्थ की संकीर्णताओं में डूबने पर देश की सुरक्षा में सेंध लग जाती है।  भावी पीढ़ी के लिए जज्बा पैदा कर गया डॉ. मुखर्जी का बलिदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की वर्तमान यात्रा के विकास पर विस्तार से अपनी बात रखी और संस्थापकों के व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि 1951 में कांग्रेस की तुष्टिकरण पोषक नीतियों से देश को बचाने की आवश्यकता को देखते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई। डॉ. मुखर्जी आजादी के बाद बनी देश की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। सत्ता को तिलांजलि देकर उन्होंने कांग्रेस सरकार की कश्मीर के खिलाफ नीतियों पर आंदोलन शुरू किया। तब उन्होंने कश्मीर को लेकर उद्घोष किया था, एक देश में दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेगा। इसी आंदोलन के चलते … Read more

अरहर की इस खास किस्म से होगी तगड़ी कमाई, शहडोल की रॉयल वेरायटी की बढ़ी मांग

शहडोल   खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के कई जिलों में धान की खेती जमकर की जाती है पर इन दिनों किसानों का झुकाव अरहर की फसल की ओर भी बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण है अरहर दाल की डिमांड. अरहर दाल खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, यही वजह है कि इस दाल को नगद वाली फसल या खटाखट पैसे दिलाने वाली फसल भी कहा जाता है. इस आर्टिकल में जानें कि कैसे इस दाल को उगाकर आप भी जमकर कमाई कर सकते हैं।  कैसे करें अरहर दाल की खेती? शहडोल के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, '' अगर आप अरहर की खेती करना चाहते हैं, तो यह प्रमुख तौर पर खरीफ के सीजन में इसे बोया जाता है. अरहर की फसल ऐसे क्षेत्र में बोई जाती है, जहां उचहन वाली जमीन हो, जल निकासी की खेत में अच्छी व्यवस्था हो और जल जमाव बिल्कुल भी न हो रहा हो, क्योंकि ज्यादा जल जमाव से फसल खराब हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इस फसल के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए।  वे आगे कहते हैं, '' अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, हालांकि, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उपजाऊ जमीन हो वहां इसकी खेती की जा सकती है. अरहर की खेती के लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच में उपयुक्त समय माना जाता है।  अरहर की खेती के लिए सबसे पहले ये करें कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' सबसे पहले कल्टीवेटर से अच्छी तरह से खेतों की जुताई कर लें, और फिर उसके बाद रोटावेटर चला दें, जिससे खेत में जो खरपतवार हैं पूरी तरह से कट जाएगा, नष्ट हो जाएगा, और मिट्टी एकदम समतल हो जाएगी. इसके बाद 10 से 15 किलोग्राम के लगभग प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई के लिए जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से अच्छी तरह से उपचारित कर लें, और कतार से 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें, जिससे फायदा होगा।  खाद, खरपतवार और कीट प्रबंधन वे आगे बताते हैं कि अरहर दाल एक ऐसी किस्म की फसल है, जिसमें ज्यादा देख रेख की जरूरत नहीं पड़ती, ना ही ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की कम ही जरूरत पड़ती है. इसके लिए सड़ा हुआ गोबर खाद हो तो अच्छी मात्रा में खेतों में डाल दें. इसके अलावा इसको ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है।  खरीफ के सीजन में बोई जाती है अरहर दाल की फसल  ये कम पानी में पकने वाली फसल है, लेकिन एक बात का जरूर ध्यान रखें कि फूल आने और फली बनने के समय नमी जरूर बनाए रखें. इस फसल में खरपतवार पर भी बहुत ज्यादा नियंत्रण नहीं करना पड़ता. जहां तक कीट और रोग प्रबंधन की बात करें तो अरहर में उकठा रोग की समस्या आती है, और फली भेदक कीट की समस्या आती है, जिससे कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से संपर्क करके जो भी रोग लगे उसके हिसाब से समाधान कर लें।  इतनी होती है अरहर की पैदावार कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' जहां तक उपज की बात करते हैं तो फसल की कटाई के बाद 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इसमें पैदावार मिल सकती है. अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से खेती कर रहे हैं और कितना ध्यान दे रहे हैं.और उस समय मौसम का बर्ताव कैसा रहा।