samacharsecretary.com

61 लाख बच्चों को पोलियो खुराक देने का लक्ष्य, झारखंड में तीन दिन चलेगा विशेष अभियान

 रांची  राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ रविवार को सदर अस्पताल, रांची में महापौर रोशनी खलखो ने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर किया। इस अवसर पर विधायक सीपी सिंह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार समेत कई स्वास्थ्य अधिकारी एवं चिकित्सक मौजूद थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि पिछले 14 वर्षों से भारत में पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत और लोगों की जागरूकता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अब भी पोलियो के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों का समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है। महापौर रोशनी खलखो ने कहा कि भारत को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण की सराहना करते हुए अभिभावकों से अपील की कि वे अपने पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की गई है। विधायक सीपी सिंह ने कहा कि देश को पोलियो मुक्त बनाने में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने सदर अस्पताल में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि अस्पताल को और सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि झारखंड में इस वर्ष लगभग 61 लाख बच्चों को 24,507 बूथों पर पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि 28 जून यानी आज बूथ दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, जबकि 29 और 30 जून को स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को दवा पिलाएंगे। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी विशेष टीमें तैनात की गई हैं। राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. विजय किशोर रजक ने कहा कि पोलियो उन्मूलन की सफलता को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण और सतर्कता आवश्यक है। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 28 से 30 जून तक चलेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाकर अभियान को सफल बनाएं।  

प्रधानमंत्री ने ब्यावरा की बहनों द्वारा किए जा रहे अनुकरणीय प्रयासों का किया उल्लेख

भोपाल प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम "मन की बात" के 135वें संस्करण का रविवार को रेडियो से प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के हिल स्टेशन ग्राम कुकरू में ग्रामीणों एवं जन प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्रीमोदी के "मन की बात" कार्यक्रम को सुना। इस अवसर पर जनजातीय मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्रीदुर्गादास उइके, वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्षहेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही के विधायकमहेन्द्र केशर सिंह चौहान, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन नागर एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणजन उपस्थित थे। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर के लिए रविवार को तब गौरव और सम्मान क्षण रहा, जब प्रधानमंत्रीमोदी ने 'मन की बात' में ब्यावरा में चल रहे 'प्लास्टिक मुक्त अभियान' का उल्लेख किया। प्रधानमंत्रीमोदी ने ब्यावरा की बहनों एवं पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं द्वारा सामाजिक सरोकार से जुड़े इस अनुकरणीय प्रयास के लिए मुक्त कंठ से सभी की सराहना की। प्रधानमंत्रीमोदी ने अभियान को 'जनभागीदारी से सामाजिक परिवर्तन' और 'वेस्ट टू वेल्थ' का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए इसे पूरे देश के लिए प्रेरणादायी बताया। प्रधानमंत्रीमोदी ने 'मन की बात' में कहा कि उन्हें राजगढ़ जिले के ब्यावरा की कुछ बहनों के बारे में जानने का अवसर मिला, जिन्होंने अपने आसपास फैले प्लास्टिक कचरे को हटाने का संकल्प लिया। उन्होंने किसी और के साथ देने और किसी बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर पूरे शहर से प्लास्टिक कचरा और खाली बोतलों को एकत्र करना शुरू किया। देखते ही देखते यह पहल एक जन-आंदोलन बन गई। एकत्रित प्लास्टिक्स का पुनर्चक्रण (रि-सायकिल) कर उसका उपयोग शहर के सार्वजनिक स्थानों को और भी सुंदर बनाने में किया जा रहा है। बीते कुछ महीनों के दौरान यहां सैकड़ों किलो प्लास्टिक का पुनर्चक्रण कर उसका बेहतर उपयोग किया गया है , जो प्लास्टिक कभी शहर में प्रदूषण फैलाता था, वही आज इन बहनों के प्रयासों से शहर की सुंदरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्रीमोदी ने ब्यावरा की सभी बहनों तथा इस अभियान से जुड़े सभी साथियों को उनके सामाजिक और प्रेरणादायक कार्य के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री द्वारा 'मन की बात' जैसे राष्ट्रीय मंच पर ब्यावरा में चल रहे अभियान का उल्लेख पूरे राजगढ़ जिले और मध्यप्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि बताती है कि जब समाज स्वयं परिवर्तन का संकल्प लेता है, तब एक छोटा-सा प्रयास भी राष्ट्रीय पहचान बन जाता है और पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी ने अपने उद्बोधन में मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की उन सभी बहनों की सराहना की, जो प्लास्टिक कचरे को Recycle कर इको-ब्रिक्स तैयार कर रही हैं। यह सराहनीय पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ही महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी ने आगामी गणेश महोत्सव में देशवासियों से मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं लेने का आग्रह भी किया है, जिससे हमारी आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी और सशक्त हो। आखिर क्या है यह अभियान ब्यावरा की पर्यावरण प्रेमी संस्था के संयोजकअनिल कुशवाहा के नेतृत्व में पिछले कई महीनों से नगर में घर-घर से निकलने वाली सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पॉलीथीन को एकत्र कर इको ब्रिक्स तैयार किए जा रहे हैं। इन इको ब्रिक्स से पार्कों एवं सार्वजनिक स्थलों के लिए बेंच, सजावटी संरचनाएं, गार्डन फर्नीचर तथा अन्य उपयोगी सामग्री निर्मित की जा रही है। यह पहल 'वेस्ट टू वैल्यू' की अवधारणा को साकार कर 'प्लास्टिक कचरे को बहुपयोगी संसाधन' में बदल रही है। उन्होंने बताया कि अभियान की सबसे बड़ी ताकत जन सहभागिता है। यहां शहर की सभी गृहिणियां अपने घरों से निकलने वाली पॉलीथीन अलग से एकत्र कर रही हैं, व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों का प्लास्टिक इस संस्था को सौंप रहे हैं और शहर के युवा समय निकालकर प्रतिदिन पर्यावरण संरक्षण के इस मिशन से जुड़ रहे हैं। संस्था द्वारा नगर में प्लास्टिक बैंक एवं बोतल बैंक स्थापित किए गए हैं, जहां नागरिक आसानी से प्लास्टिक्स जमा करा सकते हैं। शहर के विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम करके नई पीढ़ी को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। संस्था के सदस्यतरुण सेन बताते हैं कि वर्तमान में 40 से 50 युवाओं एवं महिलाओं की टीम रोजाना स्वैच्छिक रूप से अभियान में काम कर रही है। अब तक 2 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक को इको ब्रिक्स में बदल कर नगर के विभिन्न स्थानों में इनका उपयोग किया जा चुका है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का सहयोग भी दिनों-दिन बढ़ रहा है, इससे अभियान एक व्यापक जन-आंदोलन बनता जा रहा है। नगरपालिका ब्यावरा ने भी इस अभिनव पहल से जुड़कर भविष्य में इको ब्रिक्स से निर्मित उत्पादों का सार्वजनिक स्थलों पर अधिकाधिक उपयोग करने की मंशा जाहिर की है।  

बारिश के इंतजार में पंजाब, बढ़ी उमस ने बढ़ाई मुश्किलें, कूलर-पंखे हुए बेअसर

अमृतसर. शहर में भीषण गर्मी एवं उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह से ही वातावरण में नमी अधिक होने के कारण लोग पसीने से तरबतर रहे। उमस के चलते घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की अपेक्षा कम रही। दिनभर गर्म हवाओं के साथ उमस ने लोगों को बेहाल रखा। कूलर और पंखे भी राहत देने में नाकाम नजर आए, जबकि एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की मांग में भी इजाफा हुआ। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओ.आर.एस. और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने, हल्के सूती कपड़े पहनने तथा धूप और उमस से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अत्यधिक उमस के कारण शरीर में पानी की कमी, थकान और हीट स्ट्रैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार 39 डिग्री तापमान नोट किया गया। वहीं अगले कुछ दिनों तक उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। मजदूर वर्ग के लिए इस समय काम करना बड़ा मुश्किल है।

अपनी संस्कृति और मूल्यों से समाज को जोड़कर देश – दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है भारत :इंद्रेश कुमार

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए। गरिमामयी समारोह में उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया तथा आपातकाल पर आधारित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।             कार्यक्रम के मुख्य वक्ताइंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जिसे समझने और निभाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा का काल था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को स्मरण करते हुए कहा कि उन लोगों ने जेल, यातनाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा।                   मुख्य वक्ताकुमार ने कहा कि इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं है, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करें तथा नशामुक्त और स्वच्छ समाज के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश – दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है। उन्होंने युवाओं से “राष्ट्र प्रथम” की भावना को जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र, ज्ञान और धर्म प्रथम की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या सृष्टि का वह स्थान है जो सदैव पूजनीय रहेगा और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलते हुए हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।               मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह कालखंड है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, त्याग और जेल जीवन की कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया।साय ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सचेत करना है ताकि वे समझ सकें कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से संघर्ष, संस्कृति और परंपरा की भूमि रही है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराने के लिए इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करना प्रशंसनीय पहल है।                          मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने अपने पारिवारिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में अनेक परिवारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि मेरे बड़े पिताजी स्वर्गीयनरहरि साय 19 महीनों तक जेल में रहे और इन परिवारों की पीड़ा को करीब से देखा है। उस दौर में जब घर के मुखिया को जेल में डाल दिया जाता था, तब लोकतंत्र सेनानियों के परिवार पर जीवन निर्वाह का संकट आ गया था।साय ने कहा कि इस कठिन समय में स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवार को अनाज पहुंचाने का काम करते थे ताकि कोई भूखा न रहे। उन्होंने उस दौर से जुड़ी कई और स्मृतियां भी साझा की और सभी लोकतंत्र सेनानियों का पुण्य स्मरण किया।           विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय लोकतंत्र की मजबूती और जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया। आपातकाल हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।           कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्रीतोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघकैलाश सोनी, विधायकमोतीलाल साहू, विधायक श्रीमती गोमती साय, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्षसंजय श्रीवास्तव, सीजीएमएससी के चेयरमैनदीपक म्हस्के, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, महामण्डलेश्वरअजय रामदास,अखिलेश सोनी, लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्षदिवाकर तिवारी, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्षसच्चिदानंद उपासने समेत अनेक प्रबुद्धजन तथा लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन मौजूद रहे।                 कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय स्तर पर "आपातकाल कभी विस्मृत न हो" विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा केसूरज तांडिया को द्वितीय तथा अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग केअंश देशमुख तृतीय स्थान पर रहे। वहीं महाविद्यालय स्तर पर "25 जून : संविधान हत्या दिवस" विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में रायपुर की सुश्री कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय तथा दुर्ग की सुश्री खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

जबलपुर में 76 लाख की जमीन घोटाला, मृत महिला के नाम पर फर्जीवाड़ा, दो फरार आरोपियों पर इनाम

जबलपुर. मृत महिला को कागजों में जीवित दर्शाकर उसकी जमीन का फर्जी सौदा करने और 76 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो फरार आरोपियों पर चार-चार हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। एसपी सम्पत उपाध्याय ने इसके आदेश जारी किए। इनामी आरोपियों में गोहलपुर शांति नगर निवासी राकेश गुप्ता और माढ़ोताल निवासी लखन नायक शामिल हैं। मामले में शाहपुरा किरसौद निवासी कमला सेन के खिलाफ भी माढ़ोताल थाने में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज है। व्यापारी से 76 लाख रुपये ऐंठे जवाहरगंज बड़ा फुहारा निवासी व्यापारी दीपक कुमार टिबरेवाला (57) का संपर्क राकेश गुप्ता और लखन नायक से हुआ था। दोनों ने अधारताल के ग्राम ओरिया स्थित फूलमती के नाम दर्ज 37,660 वर्गफीट जमीन का सौदा कराने की बात कही। आरोपियों ने कमला सेन को ही फूलमती बताकर उसकी फर्जी पहचान प्रस्तुत की और व्यापारी से 76 लाख रुपये ऐंठ लिए। उसके बाद में जांच करने पर पता चला कि वास्तविक फूलमती की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अन्य फरार आरोपियों पर भी घोषित हुआ इनाम इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक ने अन्य फरार आरोपियों पर भी इनाम घोषित किया है। बेलखेड़ा थाने के मामले में फरार पिपरियाकला निवासी हेमराज लोधी उर्फ लक्खू और चरण सिंह लोधी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। मदन महल थाने के मामले में फरार आरोपी हर्ष यादव (परसवाड़ा) व श्रीकांत राय (शास्त्री नगर) पर पांच-पांच हजार और हनुमानताल थाने के आरोपित विक्की बंशकार, शिवा सोनकर व बेलबाग थाने के फरार सत्यम कुशवाहा पर भी चार-चार हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ है।

कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को मिलाकर बनेगा एकीकृत टूरिज्म सर्किट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के हिल स्टेशन कुकरू को प्रदेश के बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि कुकरू में पर्यटन विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को बैतूल के पर्यटन स्थल कुकरू के भ्रमण के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को बैतूल जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकुरू के रेस्ट हाउस परिसर में योगाभ्यास कर दिन की शुरूआत की। उन्होंने योग कर प्रदेशवासियों को अपनी दैनिक जीवनशैली में योग को शामिल करने का संदेश दिया। प्राकृतिक वादियों के बीच आयोजित योग सत्र में मुख्यमंत्री ने योग साधक की भांति विभिन्न योगासन कर सभी को नियमित योग के प्रति प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगाभ्यास के दौरान मयूरासन, शीर्षासन सहित अन्य आसनों का भी सहजता एवं पारंगत रूप से प्रदर्शन किया। उन्होंने ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वक्रासन, भुजंगासन एवं शलभासन सहित अनेक योगासनों का स्थानीय ग्रामीणों के साथ सामूहिक अभ्यास किया। साथ ही नाड़ी शोधन, तितली एवं भ्रामरी प्राणायाम भी किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुकरू से पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ कर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। साथ ही कुकरू में पर्यटन विकास की कार्ययोजना का प्रेजेंटेशन भी देखा। ईको टूरिज्म, सनराइज-सनसेट प्वाइंट और पर्यटन सुविधाओं का होगा विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुकरू में ईको टूरिज्म, सनराइज एवं सनसेट प्वाइंट सहित अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों का विकास किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसोर्ट एवं अन्य पर्यटन अधोसंरचना विकसित की जाएगी। साथ ही ट्रैकिंग सहित विभिन्न एडवेंचर स्पोर्ट्स और रोमांचक गतिविधियां प्रारंभ की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कुकरू के पर्यटन विकास के लिए बजट में और वृद्धि भी की जाएगी। जनजातीय समूहों के लिए बनेंगे होमस्टे, एमपी टूरिज्म करेगा बुकिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय जनजातीय ग्रामीण समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के लिए कुकरू में होमस्टे विकसित किए जाएंगे। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) के होटलों की तर्ज पर व्यवस्थित रूप से किया जाएगा तथा इनकी बुकिंग की व्यवस्था मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा की जाएगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। 'कुकरू नेचुरल' के तहत होगा स्थानीय उत्पादों का विपणन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुकरू अपनी उत्कृष्ट कॉफी के साथ-साथ कोदो कुटकी, आंवला, हनी, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली, भिलवा एवं अन्य प्राकृतिक उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं तथा वन विभाग के सहयोग से "कुकरू नेचुर" के नाम से इकाइयां स्थापित की जाएंगी। साथ ही इन उत्पादों के विपणन के लिए वन विभाग द्वारा शहरों में आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। दुग्ध उत्पादों के विक्रय केंद्र होंगे स्थापित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुकरू क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए रबड़ी, मावा, दही सहित अन्य दुग्ध उत्पादों के विक्रय केंद्र भी वन विभाग द्वारा स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को पर्यटन संबंधी रोजगार से जोड़ने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से टूरिस्ट गाइड, ड्राइविंग एवं होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कुकरू में रोबुस्टा एवं अरेबिका कॉफी के ग्रोइंग, कल्टीवेशन एवं प्रोसेसिंग उत्पादन के लिए एक करोड़ रुपये की लागत से परियोजना स्थापित की जाएगी। कॉफी बोर्ड एवं वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को कॉफी उत्पादन के लिए तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा। पशुपालन और जल संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम कुकरू में पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने तथा पशु शेड निर्माण की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र में पानी की समस्या के स्थायी समाधान और पर्यटन विकास को गति देने के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से तालाब का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार ग्राम कसई में भी तालाब निर्माण के लिए सर्वे कराया जाएगा। क्षेत्र में सड़क, शिक्षा और आधारभूत अधोसंरचना का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनेक अधोसंरचनात्मक कार्यों की भी घोषणा की। इनमें आयुष विभाग अंतर्गत वेलनेस सेंटर की स्थापना, ग्राम जामुखेड़ा में 70 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण, ग्राम लोकलदरी में 40 लाख रुपये की लागत से पुलिया निर्माण, ग्राम कसई से भोडियाकुंड तक 85 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण, ग्राम कसई फाटा से भोडियाकुंड तक 65 लाख रुपये तथा जामुखेड़ा से इमलीढाना तक 65 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ग्राम खामला में 1.20 करोड़ रुपये की लागत से बालिका छात्रावास तथा ग्राम कसई में 25 लाख रुपये की लागत से शासकीय उचित मूल्य दुकान का निर्माण भी किया जाएगा। अन्य विकास संभावनाओं के संबंध में विस्तृत सर्वे भी कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुकरू में खेत में चलाया हल, किसानों का किया उत्साहवर्धन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुकरू के प्रसिद्ध हिल स्टेशन में ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति से आत्मीय जुड़ाव का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने किसान सहादेव गायनी के खेत में पहुंचकर स्वयं हल चलाया और मक्का की बोवनी कर किसानों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को किसानसहादेव गायनी ने बताया कि उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वर्तमान में मक्का की बोवनी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने खेती-किसानी की जानकारी लेते हुए कृषि कार्यों में रुचि दिखाई तथा किसानों से आत्मीय संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने खरीफ की बुवाई और उपज विक्रय के संबंध में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह सहज और आत्मीय अंदाज ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। खेत में हल चलाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के अन्नदाताओं के परिश्रम का सम्मान किया और कृषि को राज्य की समृद्धि का आधार बताया। इसी दौरान ग्राम के 21 वर्षीय युवक हेमंत गायनी ने मुख्यमंत्री के समक्ष पारंपरिक लाठी घुमाने की कला का प्रदर्शन किया। युवक की प्रतिभा से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने उसकी सराहना की तथा स्वयं … Read more

प्रॉपर्टी टैक्स में छूट का फायदा, रायपुर नगर निगम ने 27 दिन में वसूले 22 करोड़ रुपये

रायपुर. जून माह में संपत्तिकर का भुगतान करने वालों को नगर निगम 6.25 फीसदी छूट का लाभ दे रही है। इसी के तहत इस महीने अब तक 2732 रहवासियों (संपत्तियों) से 22 करोड़ 19 लाख रुपए की वसूली की गई है। इस छूट का लाभ लेने के लिए अब महज दो दिन ही शेष है. निगम ने इस वित्तीय वर्ष में 425 करोड़ रुपए राजस्व की वसूली का लक्ष्य रखा है। ऐसे में हर महीने बड़ी वसूली की जा रही है। निगम क्षेत्र में 3.60 हजार प्रापर्टी है, जिसमें से 3.46 लाख प्रापर्टी टैक्सेबल हैं। इन संपत्तियों का इस वित्तीय वर्ष के राजस्व के साथ हजारों संपत्तियों का सालों से टैक्स भुगतान नहीं किया गया। इसलिए हर दिन सभी 10 जोन से मिलाकर 1 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट सेट किया गया है। छूट का लाभ लेने बचे सिर्फ 2 दिन बता दें कि संपत्तिकर में 6.25 फीसदी का छूट सिर्फ जून माह में ही मिलेगा। यदि इसका लाभ लेना है तो करदाताओं के पास सिर्फ 2 दिन हैं। सोमवार और मंगलवार को संपत्तिकर के भुगतान में ही यह छूट लागू होगा। इसके बाद 1 जुलाई से संपत्ति कर शत-प्रतिशत लगाया जाएगा। इसलिए लोग ऑनलाइन व जोन कार्यालयों में जाकर संपत्तिकर अदा कर सकते हैं। लोग आ रहे हैं सामने नगर निगम राजस्व उपायुक्त डॉ. अंजली शर्मा ने मीडिया को बताया कि जून माह में बड़ी संख्या में प्रापर्टी होल्डर्स ने छूट का लाभ लिया है। इस महीने 2732 संपत्तियों का करीब 22 करोड़ रुपए की वसूली हुई है। साथ ही कई जोन क्षेत्र में 20 से अधिक बड़े बकाएदारों की संपत्तियों को भी सील किया गया है। छूट का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने से भी लोग सामने आ रहे हैं. जोनवार राजस्व की स्थिति जोन    प्रॉपर्टी    राशि जोन 1    1156    1.70 करोड़ जोन 2    1246    3.15 करोड़ जोन 3    1020    1.41 करोड़ जोन 4    1182    2.22 करोड़ जोन 5    1303    2.02 करोड़ जोन 6    1360    1.45 करोड़ जोन 7    880    1.85 करोड़ जोन 8    1739    2.03 करोड़ जोन 9    2555    2.75 करोड़ जोन 10    2421    3 करोड़ कुल    14862    21.63 करोड़

सवा लाख कर्मचारियों को फायदा, हरियाणा सरकार ने सत्यापन की अंतिम तारीख तय की

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने करीब सवा लाख संविदा कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा का लाभ दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी कर कहा है कि हरियाणा कांट्रेक्चुअल एंप्लाइज (सिक्योरिटी आफ सर्विस) एक्ट, 2024 के तहत प्राप्त सभी लंबित आवेदनों का सत्यापन 15 अगस्त 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। सरकार को जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में आवेदन विभागाध्यक्ष स्तर पर लंबित हैं, जिससे पात्र कर्मचारियों को कानून का लाभ मिलने में देरी हो रही है। करीब पौने दो वर्ष पहले नायब सिंह सैनी सरकार ने संविदा कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह कानून विधानसभा में पारित कराया था। इसके तहत हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) सहित पात्र संविदा कर्मचारियों को पहली बार कानूनी रूप से सेवा सुरक्षा का अधिकार मिला। सरकार का अनुमान है कि इस व्यवस्था से करीब सवा लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और पात्र कर्मचारी निर्धारित शर्तें पूरी होने पर 58 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रह सकेंगे। मानव संसाधन विभाग की समीक्षा में पाया गया कि छह मई 2026 को जारी कार्यक्रम के बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन विभागाध्यक्ष स्तर पर लंबित हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अंतिम सत्यापन की समय-सीमा बढ़ाकर 15 अगस्त 2026 तय की है। सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पात्र कर्मचारी का मामला अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और तय समय के भीतर निर्णय सुनिश्चित किया जाए। कानून के तहत वे संविदा, आउटसोर्स अथवा एचकेआरएन के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी पात्र होंगे, जो निर्धारित तिथि पर सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम अथवा प्राधिकरण में कार्यरत थे, जिनका मासिक पारिश्रमिक निर्धारित सीमा के भीतर था तथा जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली है। ऐसे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सेवा सुरक्षा के साथ कई अन्य सुविधाएं भी इस कानून के तहत पात्र कर्मचारियों को केवल नौकरी की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि प्रवेश वेतन के अनुरूप समेकित वेतन, सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त पारिश्रमिक, चिरायु योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधा, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ तथा अनुकंपा सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्य सचिव कार्यालय ने कहा है कि डीडीओ और विभागाध्यक्षों के लिए विस्तृत यूजर मैनुअल पहले से पोर्टल पर उपलब्ध है। यदि किसी अधिकारी को लॉगिन या पोर्टल संचालन में तकनीकी समस्या आती है तो वह तत्काल एचआरडी अथवा एचकेसीएल से संपर्क कर आवश्यक विवरण अपडेट कराए, ताकि सत्यापन प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी हो सके।

राजस्थान में जल संरक्षण अभियान तेज: वरुण सागर से लेकर नदियों तक डीसिल्टिंग कार्य का शुभारंभ

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने ऎतिहासिक अजमेर जिले में वरुण सागर झील के डीसिल्टिंग कार्य का शुभारम्भ किया। लगभग 100 वर्षों बाद पहली बार झील की खुदाई का कार्य प्रारम्भ होने जा रहा है, इससे झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, भराव क्षेत्र का विस्तार होगा तथा अतिक्रमण हटाकर झील को उसका मूल स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह अजमेर के लिए ऎतिहासिक क्षण है। झील के निर्माण के बाद पहली बार इसकी खुदाई की जा रही है। इससे झील अधिक गहरी होगी, जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी और वर्षा के दौरान अतिरिक्त पानी का बेहतर प्रबंधन होने से शहर को जलभराव की समस्या से भी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटने से झील की प्राकृतिक सुंदरता में भी अभूतपूर्व निखार आएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में अजमेर को विकास की अनेक महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। तारागढ़ किला विकास, लैपर्ड सफारी, साइंस पार्क, आनासागर विकास, वरुण सागर विकास तथा चौरसियावास तालाब के सौन्दर्यीकरण जैसे कार्य अजमेर को पर्यटन के नए केन्द्र के रूप में स्थापित करेंगे। इन परियोजनाओं से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। देवनानी ने बताया कि वरुण सागर झील पर भगवान वरुण देव की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी तथा आसपास के उद्यान का भी व्यापक कायाकल्प किया जाएगा, इससे यह क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनेगा। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के विकास के प्रति पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेशभर में लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से झीलों, तालाबों एवं जल आवक मार्गों की डीसिल्टिंग एवं सफाई का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अजमेर जिले में भी जल संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ष्वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियानष् अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर चुका है। प्रदेश में जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता एवं सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं, इससे राजस्थान जल प्रबंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान वरुण सागर झील एवं अन्य विकास कार्यों का शिलान्यास एवं अवलोकन भी किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी, मंडल अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, सीताराम शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। वरुण सागर की भराव क्षमता बढ़ाने के लिए डीसिल्टिंग का कार्य किया जाएगा। इसके अंतर्गत वरुण सागर से गाद लगभग 188400 सीयूएम निकाली जाएगी। यह कार्य से वरुण सागर की भरात क्षमता में 6.65 एमसीएफटी वृद्धि होगी। मुहामी से रूप नदी लगभग 62 किलोमीटर लंबाई में जंगल सफाई व डीसील्टिंग का कार्य करवाया जाएगा। इसके अंतर्गत रूप नदी में वर्षों से वर्षाकाल में बहकर आ रहे सिल्ट, मिट्टी को निकाला जाएगा। इससे नदी अपनी वास्तविक रूप में आ सकेगी व निर्बाध प्रवाह हो सकेगा। यह कार्य की लागत राशि 12.04 करोड़ रूपए आएगी। डाई नदी, सागरमती नदी व इसकी वितरिकाओं के साथ फूलसागर कायड व बीर के प्राकृतिक नालो, कल्याणीपुरा चैनल की डीसील्टिंग का कार्य करवाया जाएगा। इसके अंतर्गत नदी नालों में पहाड़ों व शहर से आ रहे गाद, मिट्टी व सिल्ट को निकालने का कार्य करवाया जाएगा। डाई नदी, सागरमती नदी में लगातार वर्षों से जमा हो रहे गाद व सिल्ट के कारण नदी प्रवाह में कमी आई है तथा नदी क्षमता भी कम हुई है। इससे किसानों के तटबंधों की जमीन का वर्षा के दौरान लगातार कटाव होता है तथा बाढ़ की परिस्थितियों बनती है। इन परिस्थितियों के निस्तारण के लिए नदीं को अपने वास्तविक रूप में लाने का कार्य करवाया जाएंगे। इस कार्य की लागत राशि 3 करोड़ रूपए आएगी। परियोजना के अंतर्गत सहोदरा नदी (देवरिया बाँध से मुण्डोती बाँध) के लगभग 4.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 15.00 मीटर (बंथली से मुण्डोती बाँध) के लगभग 7.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 25.00 मीटर चौड़ाई एव मुण्डोती बाँध के डाउनस्ट्रीम भाग से मनोहरपुरा ग्राम तक सहोदरा नदी के लगभग 1.35 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 40 मीटर चौड़ाई वाले भाग का डी-सिल्टिंग एवं अवांछित वनस्पतियों की सफाई कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य के अंतर्गत वर्षों से संचित गाद, सिल्ट एवं अन्य अवसादों का निष्कासन कर नदी की जल वहन क्षमता में वृद्धि की जाएगी तथा मुण्डोती बाँध तक जल की उपलब्धता में सुधार होगा। यह कार्य से नदी की डाउनस्ट्रीम जल निकासी क्षमता में वृद्धि होगी। मानसून अवधि में जलभराव एवं बाढ़ की समस्या में प्रभावी कमी आएगी। इसके अंतर्गत सहोदरा नदी से गाद लगभग 364200 सीयूएम निकाली जाएगी। इसकी लागत राशि 5.44 करोड रूपए आएगी। परियोजना के अंतर्गत माशी नदी में गागून्दा एनीकट से गोली एनीकट तक लगभग 4.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 20 मीटर चौड़ाई वाले भाग सुख सागर जलाशय के फीडर चैनल की लगभग 1.80 किलोमीटर लम्बाई में डीसिल्टिंग अवांछित वनस्पतियों की सफाई एव पुलिया मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य के अंतर्गत नदी में वर्षों से संचित गाद, सिल्ट एवं अन्य अवसादों का निष्कासन कर नदी की मूल जल वहन क्षमता पुनस्र्थापित की जाएगी। इससे वर्षा ऋतु के दौरान जल प्रवाह सुचारु होगा तथा तटीय क्षेत्रों में कटाव एवं बाढ़ की संभावनाओं में कमी आएगी। इसके अंतर्गत माशी नदी से गाद लगभग 247200 सीयूएम निकाली जाएगी। इसकी लागत राशि 3.69 करोड रूपए आएगी।  

बिहार में ऊर्जा विस्तार की योजना: एनटीपीसी लगाएगी आधुनिक तकनीक वाली नई बिजली उत्पादन इकाई

पटना  बरौनी में आठ सौ मेगावाट क्षमता की नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक वाली थर्मल बिजली उत्पादन इकाई लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम हो रहा है। ऊर्जा मंत्रालय की अनुमति के बाद यह काम रफ्तार पकड़ेगा। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार नई यूनिट की स्थापना के लिए जमीन का कोई संकट नहीं है। जहां अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक वाली थर्मल यूनिट लगाए जाने की योजना है वहां पुरानी थर्मल पावर यूनिट जो अब बंद हो चुकी है, उसकी जमीन का इस्तेमाल होगा। साथ में बैट्री स्टोरेज यूनिट पर भी काम नई थर्मल पावर यूनिट के साथ-साथ बैट्री स्टोरेज यूनिट भी बरौनी में लगाई जाएगी। इसके माध्यम से बिजली को इस तकनीक के माध्यम से पीक आवर की मांग के लिए रखा जा सकेगा। एनटीपीसी बिहार में पहली बार बैट्री स्टोरेज सिस्टम पर काम करेगी। बिहार में अभी एनटीपीसी की आठ सौ मेगावाट क्षमता की केवल एक यूनिट है। यह यूनिट औरंगाबाद के नवीनगर में बीआरबीसीएल की स्टेज-2 यूनिट है। अल्ट्रा क्रिटिकल यूनिट का फायदा अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट का फायदा यह है कि इसमें कोयले की खपत कम होती है। मोटे तौर पर प्रति यूनिट बिजली उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत कम कोयला लगता है। इस वजह से कार्बन डाइआक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन आक्साइड जैसे हानिकार गैसों का उत्सर्जन कम होता है। पानी की भी बचत हाेती है। कहलगांव और कांटी स्थित थर्मल यूनिट पर भी विचार एनटीपीसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कहलगांव और कांटी स्थित थर्मल यूनिट परिसर में भी 800 मेगावाट क्षमता वाली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट की स्थापना संभव है। वैसे अभी इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम आरंभ नहीं हुआ है। कहलगांव में तीसरे चरण के तहत 800 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट की स्थापना के लिए साइट सर्वे का काम पूरा हो चुका है। यहां भी जमीन उपलब्ध है। बिहार में एनटीपीसी की थर्मल पावर उत्पादन इकाई बिहार में अभी एनटीपीसी की छह थर्मल पावर यूनिट काम कर रही। इनकी कुल वाणिज्यिक क्षमता 9500 मेगावाट है। एनटीपीस की थर्मल पावर यूनिट बाढ़, औरंगाबाद, बरौनी, कांटी व कहलगांव में है।