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ऑटो सेक्टर में बड़ी हलचल! Volkswagen बंद करेगी 4 प्लांट, 1 लाख नौकरियों पर संकट

 नई दिल्‍ली ऑडी और पोर्श जैसी लग्‍जरी कार बनाने वाली यूरोप की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी अब ग्‍लोबल स्‍तर पर लोगों को नौकरी से निकालने की तैयारी कर रही है. फॉक्सवैगन एजी को लग्‍जरी और स्‍पोर्ट्स कार बनाने के बारे में जाना जाता है. लैम्बोर्गिनी (Lamborghini), स्कोडा (Skoda) और डुकाटी (Ducati) को भी इसी कंपनी ने बनाया है।  यह कंपनी करीब 1 लाख लोगों को नौकरी से निकालने पर विचार कर रही है और कई कारखानों को भी बंद किया जा सकता है. मैनेजर मैगजिन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी ज्‍यादा कम्‍प्‍टेटिव बनाने के लिए एक्‍स्‍ट्रा जॉब्‍स में कटौती की योजना बना रही है. छंटनी का ये प्‍लान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम के प्रयासों का हिस्‍सा है।  एक लाख की जाएगी नौकरी ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट कहा गया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में मैनेजिंग बोर्ड की बैठक के दौरान CEO ने एक प्रस्‍ताव पेश किया था, जिसके तहत कर्मचारियों की संख्या में दोगुनी कटौती करके 100,000 तक की छंटनी शामिल है. पोर्श और ऑडी की मालिक कंपनी फॉक्सवैगन ग्रुप में मौजूदा समय में लगभग 657,000 लोग काम करते हैं. सीईओ के इस नए प्रस्ताव को अगले महीने बोर्ड के सामने रखा जाएगा. ऐसे में फैसला अब सिर्फ बोर्ड के ऊपर है कि वह कितने लोगों की छंटनी पर मोहर लगाता है या फिर कोई अन्‍य रास्‍ता तलाश लेता है।  4 प्‍लांट बंद करेगी कंपनी  रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी रणनीति में इस दशक के अंत तक सामान्य खर्चों में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) की कटौती करना है, जिस कारण इतने बड़े स्‍तर पर छंटनी की तैयारी चल रही है. वहीं मिड टर्म में जर्मनी में चार कारखाने बंद करना भी शामिल है. इनमें नेकरसुलम में ऑडी का एक कारखाना और हनोवर, ज़्विकाऊ और एम्डेन में वीडब्ल्यू के प्‍लांट शामिल हैं।  क्‍यों कंपनी पर आया संकट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्‍सवैगन समूह को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए कंपोनेंट प्‍लांटों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वीडब्ल्यू ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं. यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहा है. कंपनी पर यह संकट तक आया है जब कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोर सेल और यूरोप में BYD और स्टेलेंटिस एनवी समेत कई कम्‍प्‍टेटिव प्‍लेयर आ गए हैं. जिस कारण कंपनी फाइनेंशियल दिक्‍कतों से जूझ रही है।  कंपनी ने अभी तक ये कदम उठाए हैं  अपने फाइनेंशियल कंडीशन को सुधारने के लिए ग्रुप ने कुछ खास कदम उठाए हैं. ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश जुटाने के लिए कंपनी ने अपनी एवरलेंस समुद्री इंजन इकाई में 51% हिस्सेदारी बेचा है. करीब 28,000 कर्मचारियों ने वीडब्ल्यू छोड़ने पर सहमति जताई है, जो 2030 तक पूरे समूह में 50,000 कर्मचारियों की छंटनी करने के पहले ही हुआ है. कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता को भी हर साल 12 मिलियन वाहनों से घटाकर 9 मिलियन कर दिया है।  आसान नहीं होगी छंटनी की राह श्रमिक नेताओं ने नई योजनाओं का तुरंत विरोध किया है. कंपनी की श्रमिक परिषद और आईजी मेटाल यूनियन के संयुक्त बयान के अनुसार, ये योजनाएं कर्मचारियों और उन क्षेत्रों में अशांति पैदा करती हैं जहां हम काम करते हैं. अगर ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाता है, तो हम उनका पूरी ताकत से विरोध करेंगे।  खैर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्सवैगन में छंटनी करना मुश्किल है. कार निर्माता कंपनी के बोर्ड में आधी सीटें श्रमिक प्रतिनिधियों के पास हैं और जर्मनी के लोअर सैक्सोनी राज्य (जो आमतौर पर श्रमिक संघों का पक्ष लेता है ) के पास दो और सीटें हैं। 

क्या फोन को नियमित Restart करना जरूरी है? जानें RESTART फीचर क्यों दिया जाता है

 नई दिल्ली आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं।  सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है।  एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती।  हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है।  रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है।  रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है।  अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है।  रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है।  सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है।  Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता।  किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।  जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है।  क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है। अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है।  ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है। 

कृषि विभाग की सख्त कार्रवाईःवैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाले उर्वरक की 11 बोरियां जब्त,

रायपुर  किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाली पीआरओएम (PROM) उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की हैं। महासमुंद जिले के कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में सालेपाली, पाइकमाल, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) प्रिंट वाली उर्वरक की 11 बोरियां मिलीं, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उर्वरकों की गुणवत्ता एवं वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में यह निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

केरल में मानसून की रफ्तार धीमी, अल-नीनो के असर से 33 फीसदी कम बारिश; खेती पर संकट के आसार

नई दिल्ली केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है।  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं।  IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे 'बारिश की कमी' (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।  खेती पर कम बारिश का असर बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है।  मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर? सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है।  पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप 'तिरुवाथिरा नजट्टुवेला' कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है।  IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 

भाजपा महानगर इकाई की तरफ से आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के उद्घाटन सत्र में बोले सीएम योगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मूल्यों और आदर्शों की राजनीति अपनाकर शून्य से शिखर तक की यात्रा की है। 1985 में मात्र दो लोकसभा सीट हासिल करने वाली इस पार्टी की आज केंद्र सहित देश के 21 राज्यों में सरकार है। दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की यात्रा सत्ता प्राप्त की यात्रा नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, सुशासन, समृद्धि और समन्वय की बेहतरीन यात्रा है। सीएम योगी शनिवार को गोरखपुर के गुलरिहा स्थित एक रिजॉर्ट में भाजपा महानगर के प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के अंतर्गत पार्टी की महानगर इकाई की तरफ से आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रतिभागियों को ‘दल से पहले देश’ और ‘व्यक्ति से पहले समाज’ के भाव से अनवरत आगे बढ़ते रहने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा आज दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास का प्रतीक बनी है तो इसके पीछे भारतीय जनसंघ के समय से पार्टी के संस्थापकों के आदर्शों और संस्कारों से मिली प्रेरणा है। सीएम योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उद्धरण, ‘बिना मूल्यों और आदर्शों वाली राजनीति मौत का फंदा है’ का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए संस्थापकों के मूल्य और आदर्श सदैव सर्वोपरि हैं।  वाह्य और आंतरिक सुरक्षा का मॉडल दिया भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने देश में वाह्य और आंतरिक सुरक्षा का मॉडल दिया है। 2014 के पहले दुश्मन देश सैनिकों से क्रूरता करते थे। सरकारें तब बोलती नहीं थी, उन्हें देश की कीमत पर संबंध की चिंता रहती थी। 2014 के बाद सरकार ने दुश्मन की आंख में आंख मिलाने का सामर्थ्य दिया है। एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये दुनिया के सामने अपने सामर्थ्य और ताकत का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के पहले कश्मीर जल रहा था, पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद चरम पर था, देश के 120 जिलों में नक्सलवाद हावी था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद को कुचल दिया है। पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद समाप्त हो चुका है। नक्सलवाद एक-दो जिलों तक सीमित है और बहुत शीघ्र वहां भी खत्म हो जाएगा।  सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास संभव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास संभव होता है। सुरक्षा का वातावरण बनने के कारण ही आज इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड कनेक्टिविटी, हाईवे एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इनलैंड वाटरवे, मेट्रो, रोपवे और लॉजिस्टिक के कार्य बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास की प्राथमिक आवश्यकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर जितना मजबूत होगा, विकास भी उतनी ही तेजी से होगा।  अंत्योदय का सपना साकार कर रही मोदी सरकार सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में शामिल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सपने को साकार कर रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया ने बीते 12 वर्षों में बदलते भारत को देखा है। कल्याणकारी योजनाओं का केंद्र समाज के अंतिम पायदान का व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि आज देश में 12 करोड़ लोगों के घर शौचालय बनाए गए हैं, 4 करोड़ गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्की छत मिली है। करोड़ों लोगों को नल से जल की सुविधा मिल रही है। 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त हो रही है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की सुविधा मिली। लोगों को पीएम जीवन ज्योति, पीएम स्टार्टअप, स्टैंडअप, डिजिटल इंडिया, पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मिल रहा है। गांव में गरीबों को घरौनी की सुविधा मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से उबरकर देश के विकास में सहभागी बन रहे हैं।  भाजपा सरकार ने बदली लोगों की धारणा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जो बातें सिर्फ कल्पना में थीं, भाजपा सरकार ने उन्हें हकीकत में बदला है। सरकार ने लोगों की धारणा बदली है। उन्होंने कहा कि कोई कल्पना भी नहीं करता था कि श्रीराम जन्मभूमि का विवाद समाप्त होगा। आज विवाद समाप्त होने के साथ ही श्रीराम मंदिर का निर्माण भी हो चुका है। काशी में विश्वनाथ धाम और विंध्याचल में विंध्य धाम का निर्माण हो चुका है। कुंभ की परंपरा हजारों वर्षों की है लेकिन दिव्य, भव्य, स्वच्छ और स्मार्ट कुंभ का आयोजन पहली बार भाजपा सरकार में ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने कुंभ को भगदड़, अराजकता और गंदगी का पर्याय बना दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत वर्ष में डबल इंजन सरकार ने देश की विरासतों को सम्मान से जोड़ा। पीएम मोदी ने दल से ऊपर देश की भावना से हर घर पर कमल का फूल वाला झंडा फहराने की बजाय देश की आन, बान, शान का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराने का आह्वान किया। सीएम योगी ने कहा कि अन्य दलों को भी दल से ऊपर देश के मंत्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। कहा कि यह राष्ट्र को आतंकवाद से मुक्त कर विकास की बुलंदियों पर ले जाने का मंत्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्वार्थ की संकीर्णताओं में डूबने पर देश की सुरक्षा में सेंध लग जाती है।  भावी पीढ़ी के लिए जज्बा पैदा कर गया डॉ. मुखर्जी का बलिदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की वर्तमान यात्रा के विकास पर विस्तार से अपनी बात रखी और संस्थापकों के व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि 1951 में कांग्रेस की तुष्टिकरण पोषक नीतियों से देश को बचाने की आवश्यकता को देखते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई। डॉ. मुखर्जी आजादी के बाद बनी देश की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। सत्ता को तिलांजलि देकर उन्होंने कांग्रेस सरकार की कश्मीर के खिलाफ नीतियों पर आंदोलन शुरू किया। तब उन्होंने कश्मीर को लेकर उद्घोष किया था, एक देश में दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेगा। इसी आंदोलन के चलते … Read more

अरहर की इस खास किस्म से होगी तगड़ी कमाई, शहडोल की रॉयल वेरायटी की बढ़ी मांग

शहडोल   खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के कई जिलों में धान की खेती जमकर की जाती है पर इन दिनों किसानों का झुकाव अरहर की फसल की ओर भी बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण है अरहर दाल की डिमांड. अरहर दाल खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, यही वजह है कि इस दाल को नगद वाली फसल या खटाखट पैसे दिलाने वाली फसल भी कहा जाता है. इस आर्टिकल में जानें कि कैसे इस दाल को उगाकर आप भी जमकर कमाई कर सकते हैं।  कैसे करें अरहर दाल की खेती? शहडोल के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, '' अगर आप अरहर की खेती करना चाहते हैं, तो यह प्रमुख तौर पर खरीफ के सीजन में इसे बोया जाता है. अरहर की फसल ऐसे क्षेत्र में बोई जाती है, जहां उचहन वाली जमीन हो, जल निकासी की खेत में अच्छी व्यवस्था हो और जल जमाव बिल्कुल भी न हो रहा हो, क्योंकि ज्यादा जल जमाव से फसल खराब हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इस फसल के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए।  वे आगे कहते हैं, '' अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, हालांकि, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उपजाऊ जमीन हो वहां इसकी खेती की जा सकती है. अरहर की खेती के लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच में उपयुक्त समय माना जाता है।  अरहर की खेती के लिए सबसे पहले ये करें कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' सबसे पहले कल्टीवेटर से अच्छी तरह से खेतों की जुताई कर लें, और फिर उसके बाद रोटावेटर चला दें, जिससे खेत में जो खरपतवार हैं पूरी तरह से कट जाएगा, नष्ट हो जाएगा, और मिट्टी एकदम समतल हो जाएगी. इसके बाद 10 से 15 किलोग्राम के लगभग प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई के लिए जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से अच्छी तरह से उपचारित कर लें, और कतार से 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें, जिससे फायदा होगा।  खाद, खरपतवार और कीट प्रबंधन वे आगे बताते हैं कि अरहर दाल एक ऐसी किस्म की फसल है, जिसमें ज्यादा देख रेख की जरूरत नहीं पड़ती, ना ही ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की कम ही जरूरत पड़ती है. इसके लिए सड़ा हुआ गोबर खाद हो तो अच्छी मात्रा में खेतों में डाल दें. इसके अलावा इसको ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है।  खरीफ के सीजन में बोई जाती है अरहर दाल की फसल  ये कम पानी में पकने वाली फसल है, लेकिन एक बात का जरूर ध्यान रखें कि फूल आने और फली बनने के समय नमी जरूर बनाए रखें. इस फसल में खरपतवार पर भी बहुत ज्यादा नियंत्रण नहीं करना पड़ता. जहां तक कीट और रोग प्रबंधन की बात करें तो अरहर में उकठा रोग की समस्या आती है, और फली भेदक कीट की समस्या आती है, जिससे कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से संपर्क करके जो भी रोग लगे उसके हिसाब से समाधान कर लें।  इतनी होती है अरहर की पैदावार कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' जहां तक उपज की बात करते हैं तो फसल की कटाई के बाद 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इसमें पैदावार मिल सकती है. अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से खेती कर रहे हैं और कितना ध्यान दे रहे हैं.और उस समय मौसम का बर्ताव कैसा रहा। 

Malwa Weather: बारिश नहीं होने से सोयाबीन की बोवनी प्रभावित, महंगे बीजों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

नागदा   अब तक दो इंच बरसात हुई है। हालांकि कृषि विज्ञानियों का कहना है कि सोयाबीन फसल की बोवनी के लिए अभी और वर्षा की दरकार है। 6 से 7 इंच वर्षा के बाद बोवनी अच्छी रहेगी। इस बीच दावा किया जा रहा है कि इस बार किसानों को खाद के लिए दुकानदारों के यहां लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। किसान द्वारा घर बैठे खाद बुक करने पर तीन दिन में खाद मिल जाएगी। दुकानदार गड़बड़ करता है तो उसके लायसेंस निरस्त करने व पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। नागदा क्षेत्र में दो बार हुई झमाझम बरसात में अभी तक 56.2 एमएम लगभग 2 इंच से कुछ ज्यादा बरसात हुई है। पिछले वर्ष अभी तक लगभग 5 इंच बरसात हो गई थी। क्षेत्र के किसानों द्वारा बोवनी की पूरी तैयारी की जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पर्याप्त बरसात हो गई है, वहां बोवनी हो सकती है। नागदा-खाचरौद क्षेत्र में अभी बरसात का इंतजार है। सोयाबीन बीज के भाव 10 से 12 हजार रुपये तक सोयाबीन बीज के भाव इस बार 10 से 12 हजार रुपये तक हैं। ऐसे में दुकानदार तो ठीक, कई किसान भी पिछले वर्ष की रखी सोयाबीन को ग्रेडिंग कराकर बीज के नाम पर बेचने रहे हैं। कृषि अधिकारी द्वारा दुकानों से सोयाबीन के 52 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। उनकी रिपोर्ट आना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार किसान घर से बेचता है तो इस पर कार्रवाई करना आसान नहीं है। अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन की बीज कंपनी का टैग देखकर ही खरीदें। बिना टैग के सोयाबीन बीज के लिए नहीं खरीदें। दुकानदार बिना टैग के बीज बेचता है तो उसकी शिकायत विभाग के अधिकारी से करें। किसानों को खाद के लिए नहीं होगी परेशानी प्रतिवर्ष किसानों को खाद के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। किसानों को दो-तीन गुना भाव में खाद की बोरी लेना पड़ती थी। इस बार शासन ने ऑनलाइन सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई है, घर बैठकर ही ऑनलाइन खाद बुक करवा सकते हैं और जिस दुकान से खाद लेना है, वहां से तीन दिन में खाद मिल जाएगा। दुकानदार देने में आना-कानी करता है तो इसकी शिकायत कृषि विभाग अधिकारी से करने पर दुकानदार के खिलाफ लायसेंस निलंबित व निरस्त करने के अलावा पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ा छत्तीसगढ़, गोवा-उत्तराखंड मॉडल के आधार पर बनेगी रूपरेखा

 रायपुर  राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी। इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है। आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा। उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ''रूढ़िवादी प्रथाओं'' द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ''अपवाद'' या ''छूट'' का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी। गोवा के यूसीसी में लिंग समानता गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता 'सामुदायिक संपत्ति'' है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है। उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है। सक्रिय है राज्य सरकार     संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।     – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़  

वैवाहिक प्रताड़ना का सनसनीखेज मामला, महिला बोली- पति पोर्न दिखाने के बाद करता था जबरदस्ती

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में एक महिला को ससुराल में ऐसी यातनाएं मिलीं, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं. महिला ने पति पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, उसका कहना है कि पति उसे पोर्न दिखाता था. मारपीट करता था और अप्राकृतिक कृत्य करता था. पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में पति, सास और देवर के खिलाफ शिकायत की है।  ये पूरी कहानी शहर के शाहीबाग इलाके की है. पीड़ित महिला ने शिकायत में कहा है कि उसका पति उसे जबरन पोर्न फिल्में दिखाता था. विकृत तरीके से जबरन संबंध बनाता था. साथ ही, प्रेग्नेंसी के दौरान लात मारकर अबॉर्शन कराने का दबाव भी डालता था।  ससुराल वालों द्वारा लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना किया गया. जान से मारने की धमकी दी गई. इससे तंग आकर महिला अहमदाबाद महिला पुलिस स्टेशन में पहुंची और आपबीती सुनाई. महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  शिकायत के अनुसार, महिला की शादी साल 2011 में हुई थी, लेकिन शादी के 15 दिन बाद ही उसकी ससुराल में उसके साथ गलत व्यवहार शुरू हो गया. शादी के समय ससुराल वालों ने महिला से यह बात छिपाई थी कि पति की पहले भी शादी हो चुकी थी और उसका एक बच्चा भी है।  शादी के तुरंत बाद सास और देवर ने दहेज को लेकर ताने मारने शुरू कर दिए थे. महिला के प्रेग्नेंट होने के बावजूद उसे पर्याप्त आराम नहीं करने दिया गया. घर के भारी-भरकम काम कराए जाते थे. बेटी के जन्म के बाद भी पति का दुर्व्यवहार कम नहीं हुआ. पति अक्सर देर रात घर आता, पार्टियों में जाता और पत्नी की इच्छा के बिना उससे जबरन संबंध बनाता था।  अगर पत्नी बीमार होती, तो भी उसे उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाएं देकर संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता और मना करने पर बुरी तरह पीटा जाता था. कुछ समय बाद जब पत्नी दोबारा प्रेग्नेंट हुई, तो पति ने अबॉर्शन कराने का दबाव डाला और धमकी दी कि अगर उसने बात नहीं मानी तो वह तलाक दे देगा।  इन सब बातों से तंग आकर पत्नी मायके चली गई, लेकिन पति वहां पहुंच गया और उसे जबरदस्ती ससुराल ले आया. सास और देवर भी लगातार ताने मारते थे कि तुम हमारे बेटे को पसंद नहीं हो, तुम्हें तो बस समाज की वजह से रखना पड़ रहा है. तुमने हमारा घर बर्बाद कर दिया. तुम तलाक लेकर अलग हो जाओ।  'रात में दूसरे देशों की युवतियों को कर रहा था वीडियो कॉल' पत्नी ने आधी रात को अपने पति को दूसरे देशों की युवतियों के साथ वीडियो कॉल पर बात करते हुए पकड़ा था. पति उसे उन युवतियों के साथ के आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर उसी तरह संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था. तीसरी बेटी को जन्म देने के बाद भी ससुराल वालों का रवैया नहीं बदला. जब पत्नी ने पति के अफेयर की बात सास को बताई, तो सास भड़क गईं और झगड़ा करके पत्नी को घर से निकाल दिया।  पांच महीने मायके में रहने के बाद जब वह वापस आई, तब भी पति ने अश्लील वीडियो दिखाकर अप्राकृतिक संबंध बनाने का दबाव डाला. फिर महिला और उसकी तीनों बेटियों को दूसरे घर पर भेज दिया और पति अलग रहने लगा. पति ने पत्नी को गंभीर धमकियां दीं. उसने कहा कि अगर तुमने हमारे खिलाफ कोई अर्जी या शिकायत की तो जान से मार देंगे. फिलहाल पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत की है. पुलिस ने पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 

रिश्ते में खटास की अफवाहों से परेशान हुईं मौनी रॉय, पोस्ट शेयर कर कही दिल की बात

मुंबई   अभिनेत्री मौनी रॉय इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में छाई हैं। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके और पति सूरज नांबियार के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बुधवार को अभिनेत्री ने अफवाहों के बीच पोस्ट किया है। अभिनेत्री ने बुधवार को गंभीर रुख अपनाते हुए इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक नोट जारी किया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से आग्रह किया कि वे उनकी निजी जिंदगी के बारे में गलत खबरें न फैलाएं। अभिनेत्री ने लिखा, "सभी मीडिया हाउस से विनम्र निवेदन है कि कृपया गलत खबरें और अफवाहें फैलाने से बचें। हमें थोड़ा समय और प्राइवेसी दें। हर कहानी के पीछे असली भावनाएं और लोग होते हैं।  कृपया संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पेश आएं।" बता दें कि मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार के बीच अनबन की खबरें तब तेज हुईं, जब अभिनेत्री ने पति को इंस्टाग्राम से अनफॉलो करने के साथ-साथ उनके साथ पोस्ट की गई तस्वीरें डिलीट कर दी थीं, जब सोशल मीडिया पर दोनों के अलग होने की खबरें तेज हुईं, तो सूरज ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया था। वहीं, मौनी की सबसे करीबी दोस्त दिशा पाटनी ने भी सूरज के सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट होने से पहले ही उसे अनफॉलो कर दिया था। दिशा, सूरज और मौनी कई जगहों पर साथ में घूमने, पार्टियों और सोशल प्रोग्राम में साथ जाया करते थे और कृति की बहन नूपुर सेनन की शादी में तीनों को साथ में देखा गया था। मौनी रॉय ने तीन साल तक डेट करने के बाद 22 जनवरी 2022 को बिजनेसमैन सूरज नांबियार से गोवा में शादी की थी। इस जोड़े ने मलयाली और बंगाली दोनों रीति-रिवाजों का पालन करते हुए शादी की, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार के सदस्य शामिल हुए। यह शादी गोवा के हिल्टन गोवा रिसॉर्ट में हुई थी। सुबह मलयाली रीति-रिवाजों से और शाम को बंगाली रीति-रिवाजों से शादी संपन्न हुई थी।