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पंजाब में बोर्ड छात्रों के लिए नया नियम, डिजिटल बर्थ सर्टिफिकेट जरूरी होते ही सेवा केंद्रों पर लंबी कतारें

लुधियाना. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा बोर्ड क्लासों के लिए डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट को अनिवार्य किया गया है, परंतु सेवा केंद्रों में यह सर्टीफिकेट न बन पाने के कारण विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूल संचालकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। परीक्षा फॉर्म और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए यह दस्तावेज अति आवश्यक है लेकिन सेवा केंद्रों में जारी भारी रश के कारण इसे समय पर बनवाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वर्तमान में पंजाब सरकार की ‘मुख्य मंत्री धीयां-भैणा सत्कार स्कीम’ के तहत लाभ लेने के लिए जाति सर्टीफिकेट और अन्य दस्तावेज बनवाने वाले आवेदकों की सेवा केंद्रों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस योजना के कारण हर छोटे-बड़े सेवा केंद्र पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इस भारी भीड़ के कारण सेवा केंद्रों का पूरा स्टाफ और डिजिटल सिस्टम केवल स्कीम के दस्तावेज तैयार करने में व्यस्त है, जिसके चलते बोर्ड क्लासों के विद्यार्थियों के डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट नहीं बन पा रहे हैं। दिहाड़ी छोड़कर चक्कर काटने को मजबूर हैं अभिभावक डिजिटल सर्टीफिकेट न बनने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को झेलनी पड़ रही है। दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी रोजाना की दिहाड़ी छोड़कर सुबह से ही सेवा केंद्रों के बाहर लंबी लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं। दिनभर इंतजार करने के बाद भी जब काऊंटरों पर उनका नंबर आता है, तो भारी रश या सर्वर डाऊन होने का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है, जिससे विद्यार्थी और उनके अभिभावक लगातार मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। स्कूल संचालकों और अध्यापकों के सामने खड़ी हुई बड़ी समस्या शिक्षा बोर्ड के नियमों के मुताबिक बिना डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट के विद्यार्थियों के बोर्ड परीक्षाओं के रजिस्ट्रेशन फॉर्म और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन सबमिट नहीं किए जा सकते। स्कूल संचालकों और अध्यापकों का कहना है कि वे लगातार विद्यार्थियों को सर्टीफिकेट जमा करने के लिए कह रहे हैं लेकिन सेवा केंद्रों में सर्टीफिकेट न बनने के कारण वे भी बेबस नजर आ रहे हैं। यदि समय रहते ये डिजिटल सर्टीफिकेट बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए, तो रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ी समस्या आ सकती है।

नोएडा में मिली ‘लापता’ बेटी, पिता के दावे की खुली पोल; सामने आया बाल विवाह का मामला

ग्वालियर. 15 दिन पहले लापता हुई युवती को पुलिस ने नोएडा से ढूंढ निकाला। जब उसे बरामद कर कोर्ट में पेश किया, तब खुलासा हुआ-वह नाबालिग है। उसका बाल विवाह करा दिया गया। इस मामले में हाइकोर्ट द्वारा बाल विवाह कराने वालों पर एफआईआर कर गिरफ्तार करने के आदेश पुलिस को दिए हैं। 12 जून को दर्ज कराई थी गुमशुदगी बहोड़ापुर स्थित सागरताल स्थित सरकारी मल्टी निवासी एक पुरुष ने 12 जून को शिकायत की थी कि उसकी 19 वर्षीय बेटी लापता हो गई है। जिस पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश की और दो दिन पहले उसे उप्र स्थित गौतमबुद्ध नगर से बरामद किया था। उसे किशन खटीक अपने साथ ले गया था। पुलिस ने किशन को भी पकड़ा है। उसे कोर्ट में पेश किया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पिता ने ही लगाई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका इस मामले में जब उसे बरामद किया तब मामला खुला कि वह नाबालिग है। उसकी शादी नाबालिग होने पर भी कर दी थी। अब पुलिस शादी में सहयोग करने वालों के बारे में भी पता लगा रही है। जब पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी। तब पुलिस सक्रिय हुई और उसे बरामद कर लिया। उसकी मार्कशीट व अन्य दस्तावेजों के साथ जब कोर्ट में पेश किया। तब खुलासा हुआ कि वह नाबालिग है। पुलिस को भी पहले नहीं पता था। अब इस मामले में कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आरोपित को गिरफ्तार कर भेज दिया जेल – पिता ने युवती के लापता होने की जानकारी दी थी। इस आधार पर गुमशुदगी दर्ज की थी। जब कोर्ट में पेश किया, तब सामने आया कि वह नाबालिग है। जो आरोपित किशोरी को ले गया था, उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बाल विवाह भी कराया गया है। पिता ने ही ऐसा किया था। – आलोक सिंह परिहार, थाना प्रभारी, बहोड़ापुर

‘पैट्रियट पासपोर्ट’ पर ट्रंप की फोटो, अमेरिका में नई परंपरा की शुरुआत पर बहस

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब पासपोर्ट पर अपनी तस्वीर छपवाने का फैसला किया है। अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमेरिकी सरकार ने एक लिमिटेड एडिशन पासपोर्ट जारी करने का फैसला लिया है। इस पासपोर्ट के एक तरफ गंभीर मुद्रा में खड़े ट्रंप की तस्वीर होगी। दूसरी तरफ 1776 में अमेरिका की आजादी के समय साइन किए गए घोषणा पत्र और उस समय की एक प्रतीकात्मक तस्वीर होगी। ट्रंप ने पासपोर्ट की डिजाइन को अपने सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नए अमेरिकी पासपोर्ट की डिजाइन को शेयर किया। इसके कैप्शन में ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका का नया पासपोर्ट, जिस पर लिखा है, आपका स्वागत है, लेकिन अच्छे से रहिए।" ट्रंप द्वारा शेयर किए गए इस डिजाइन में उनकी तस्वीर लगी हुई है, जिसमें वह गंभीर मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा दूसरी तरफ 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका 250' लिखा हुआ है। ट्रंप के अलावा वाइट हाउस ने भी इसी पासपोर्ट डिजाइन को साझा किया है, जिस पर पैट्रियट पासपोर्ट लिखा हुआ है। बता दें, अमेरिकी विदेश विभाग पहले यह घोषणा कर चुका है कि 6 जुलाई के बाद नए कस्टम डिजाइन वाले पासपोर्ट ऑर्डर किए जा सकेंगे। ट्रंप की तस्वीर वाले पासपोर्ट को लेकर कहा गया था कि यह पासपोर्ट केवल वाशिंगटन में व्यक्तिगत मांग के दौरान दिए जाएंगे। इसके अलावा सरकार इन्हें सीमित मात्रा में ही उपलब्ध करवाएगी। ऐसे में एक बार यह खत्म हुए, उसके बाद इनको जारी नहीं किया जाएगा। अमेरिका में अपनी नई लेगेसी बना रहे ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाइट हाउस में आने से पहले से ही अपनी लग्जरी लाइफ और हर तरीके से एक छाप छोड़ने के लिए जाने जाते हैं। पहले कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने काफी बदलाव करने की कोशिश की थी, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली थी। दूसरे कार्यकाल में आए ट्रंप ने शुरुआत से ही अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी। उन्होंने अमेरिका की सरकारी इमारतों के बाहर बड़े-बड़े बैनर लगवाए। इसके अलावा जॉन एफ. कैनेजी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स के साथ भी अपना नाम जोड़ दिया। हालांकि, बाद में कोर्ट ने इसे हटवा दिया। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि जल्दी ही एक डॉलर के नोट पर ट्रंप के हस्ताक्षर दिखाई देंगे। इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिकी की पुरानी मुनरो डॉक्टरीन को भी अपने नाम पर डॉनरो डॉक्ट्रीन करने की बात कही थी। बता दें, अगर ट्रंप की तस्वीर वाले यह पासपोर्ट जारी होते हैं। तो ट्रंप वाइट हाउस में बैठे ऐसे पहले अमेरिकी नागरिक होंगे, जिनकी तस्वीर पासपोर्ट पर होगी।

भाजपा नेता पर हमले के बाद रज्जाक पर चला बुलडोजर, कोरबा में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

कोरबा. भाजपा नेता पर हुए जानलेवा हमले के बाद प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष रज्जाक अली के कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पिछले दिनों पर भाजपा नेता शिव बालक तोमर पर जिला पंचायत सदस्य राजकली एवं उसके साथियों ने हमला कर दिया था घटना में शिव बालक एवं रूप से घायल हो गया था। मामले में पुलिस ने पहले ही रज्जाक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और अब पुलिस एवं प्रशासन ने उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मामले की जांच के दौरान रज्जाक अली के नाम से दर्ज निर्माण के दस्तावेजों और वैधानिक अनुमतियों की भी पड़ताल की गई। जांच में निर्माण में कथित तौर पर कई अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन सामने आया। इसके बाद जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण हटाने का निर्णय लिया। एसडीएम, तहसीलदार, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम जेसीबी लेकर सीतामणी पहुंची और तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। भारी पुलिस बल तैनात, भीड़ जुटी कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र मैं बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की निगरानी करते रहे। बुलडोजर कार्रवाई देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। प्रशासन ने अवैध रूप से बने हिस्से को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों में नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही कदम उठाए जा रहे हैं। तरह-तरह की हो रही चर्चाएं इस कार्रवाई के बाद शहर का सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीतिक गलियारों में मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्ष ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए हैं, वहीं प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही है। कई मामले दर्ज है रज्जाक के विरुद्ध जिला पंचायत सदस्य राजा के विरुद्ध मारपीट सुमित के मामले दर्ज हैं । पुलिस ने पिछले दिनों रासुका के तहत कार्यवाही करने की प्रक्रिया शुरू की थी , हालांकि मामला अभी प्रक्रिया में है।

महंत अवैद्यनाथ के संकल्प से बदला शहजादपुर मंदिर, आज बना भव्य सिद्धपीठ

अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में स्थित शहजादपुर मोहल्ले में श्रीराम जानकी सिद्धपीठ एक ऐसा मंदिर है जो 120 साल की आस्था,संघर्ष और पुनर्जागरण की जीवंत कहानी कहता है। आज यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। वर्ष 1904 में देश में अंग्रेजों का राज था। लेकिन, यहां के जमींदारों के मन में राम भक्ति की लौ जल रही थी। शहजादपुर के जमींदारों ने लगभग पांच बिस्वा जमीन भगवान राम को समर्पित की। उस जमीन पर एक मंदिर बनाया गया। वह मंदिर मिट्टी और गारे से बना था। उसकी दीवारें मोटी और मजबूत थीं। मंदिर सादा था लेकिन भक्ति से भरा हुआ था। श्रीराम-जानकी मंदिर का किया था निर्माण मंदिर में भगवान श्रीराम माता जानकी, लक्ष्मण जी और बजरंगबली के विग्रह स्थापित किए गए। हर रोज पूजा, भोग और आरती होती थी। यह सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा। जमींदार परिवार के वंशज अवधेश कुमार मेहरोत्रा ने इस जिम्मेदारी को पूरी लगन से निभाया। मंदिर की इमारत जर्जर हो गई समय बीतता गया, मंदिर में पूजा तो होती रही लेकिन इमारत कमजोर होने लगी। मिट्टी और गारे की दीवारों में दरारें आ गईं। छत से पानी टपकने लगा। जो मंदिर कभी मोहल्ले की शान था वह अब जर्जर हो चला था। भक्तों के मन में दुख था। पैसे नहीं थे और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी एक बड़ा बदलाव आया जिसने इस मंदिर की किस्मत पलट दी। महंत अवैद्यनाथ का आना और एक बड़ा संकल्प वर्ष 1992 में पूरे देश में राम जन्मभूमि का आंदोलन चल रहा था। अयोध्या में राम मंदिर का सपना करोड़ों लोगों के दिल में था इस आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे गोरक्षा पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी महाराज। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु भी थे। अपनी धर्म यात्रा के दौरान वे शहजादपुर के इस मंदिर में आए। मंदिर को जर्जर हालत देखकर उनका मन दुखी हो गया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राम भक्ति में लगाई थी। उनसे यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि यह मंदिर भव्य बनेगा। उनका यह संकल्प एक दिव्य आशीर्वाद बन गया। मंदिर का नया अध्याय हुआ शुरू महंत अवैद्यनाथ के आशीर्वाद से 23 फरवरी 2015 को मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। यह दिन इस मंदिर के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। स्थानीय भक्तों, दानदाताओं और ट्रस्ट के लोगों ने मिलकर यह काम शुरू किया। करीब तीन साल तक निर्माण चलता रहा। हर ईंट में भक्ति और मेहनत की छाप थी। धीरे धीरे एक टूटा हुआ मंदिर एक भव्य सिद्धपीठ में बदल गया। आज का भव्य मंदिर आज यह मंदिर लगभग 7000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। यह दो मंजिला बन चुका है। मंदिर में कदम रखते ही एक अलग शांति और ऊर्जा का अहसास होता है। यहां कुल पांच दरबार हैं। पहला है श्रीराम दरबार जहां भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के विग्रह हैं। यह मंदिर का मुख्य दरबार है। दूसरा है माता जगदंबा दरबार जहां माँ की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तीसरा है संकटमोचन बजरंगबली दरबार जहां हनुमान जी भक्तों को शक्ति और साहस देते हैं। चौथा है भगवान शिव दरबार जहां शिव भक्त अपनी पूजा करते हैं। पांचवां है श्री राधा-कृष्ण दरबार जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। धार्मिक यात्रियों के लिए खास जगह श्रीराम जानकी मंदिर ट्रस्ट हर रोज सभी पांचों दरबारों में पूजा, भोग और आरती कराता है। सुबह मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक मंदिर में भक्ति का माहौल रहता है। पूरे साल यहां कई धार्मिक आयोजन होते हैं। रामनवमी पर शोभायात्रा और अखंड रामायण पाठ होता है। हनुमान जयंती पर सुंदरकांड पाठ और भंडारा होता है। जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण दरबार में सुंदर झांकियां सजती हैं। नवरात्रि में माता दरबार में नौ दिन का महोत्सव मनाया जाता है। सावन में शिव दरबार में खास अभिषेक होता है। अगर आप उत्तर प्रदेश की धार्मिक यात्रा पर हैं तो इस मंदिर जरूर आएं। अयोध्या, वाराणसी या प्रयागराज के दर्शन के साथ यहां भी दर्शन करें। यह मंदिर आपकी यात्रा को और पवित्र बना देगा। यहां आकर आप पांचों दरबारों में पूजा कर सकते हैं। एक महान संत के संकल्प की शक्ति को महसूस कर सकते हैं। 120 साल की यह यात्रा आज एक नए मोड़ पर है। शहजादपुर का यह सिद्धपीठ अब सिर्फ एक मंदिर नहीं है। यह सनातन धर्म की ताकत का, एक महान गुरु के संकल्प का और लाखों भक्तों की आस्था का जीवंत प्रमाण है।

कोविड-19 प्रभावित TET का हवाला देकर अनुकंपा नियुक्ति पर रोक नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

बिलासपुर. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एन के चन्द्रवंशी की एकलपीठ ने कहा है, कि कोरोना महामारी के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) समय पर आयोजित नहीं होने का नुकसान अनुकंपा नियुक्ति के आवेदक को नहीं भुगतना पड़ेगा. कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है. दरअसल, धमतरी निवासी वासुदेव साहू के पिता, जो सहायक शिक्षक थे, का वर्ष 2017 में सेवा के दौरान निधन हो गया था. इसके बाद वासुदेव ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया. आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के लिए उन्हें तीन वर्ष का समय दिया गया था. उन्होंने डी.एल.एड. की परीक्षा समय पर उत्तीर्ण कर ली, लेकिन मार्च 2020 में होने वाली टेट परीक्षा कोविड-19 के कारण निरस्त हो गई. बाद में जनवरी 2022 में आयोजित परीक्षा में उन्होंने सफलता प्राप्त की. इसके बावजूद पंचायत विभाग ने निर्धारित समय में योग्यता प्राप्त न करने का हवाला देकर उनकी अनुकंपा नियुक्ति का दावा अस्वीकार कर दिया. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि, टेट परीक्षा समय पर आयोजित न होना अभ्यर्थी के नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति थी. इसलिए उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा, कि कोविड अवधि में समय-सीमा संबंधी राहत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश इस मामले में भी लागू होंगे. हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2022 का अयोग्यता आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को वासुदेव साहू के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है.

अयोध्या प्रकरण में नया मोड़: इस्तीफों की पुष्टि के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता पर विवाद गहराया

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे सवाल यही है कि सबूत सुरक्षित हैं या नहीं? शनिवार को तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र की पुष्टि के बाद घटनाक्रम की समयरेखा को देखें तो कई ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिन पर जवाब अब भी बाकी हैं। एफआईआर होने तक सभी आठ आरोपी भी मंदिर में पहले जैसे ही आते-जाते रहे। अंदर उनसे काम लिया जा रहा था या नहीं, इसकी भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सवाल उठता है कि मंदिर के अंदर किसी की निगरानी थी या नहीं या जो कठघरे में हैं उन्हीं के हवाले छोड़कर सभी मौन हैं। चंपत राय ने क्यों कहा- कुछ उल्लेखनीय नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने या जांच की पहल करने में देरी क्यों हुई। अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय ने वीडियो जारी कर यहां तक कहा था कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट होता है। कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। मगर अब रुपयों की बरामदगी और गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि गड़बड़ी तो थी। जांच के दौरान भी आरोपी कार्य करते रहे ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर सब कुछ सामान्य था तो एसआईटी जांच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि एसआईटी गठन से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक जिन आठ कर्मचारियों पर आरोप लगे, वे अपने पदों पर कार्यरत रहे। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। 23 जून को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी संबंधित पदाधिकारी व्यवस्थाओं की कमान संभालते दिखाई दिए। राम भक्तों का विश्वास बनाए रखने की चुनौती यहीं से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है-क्या जांच शुरू होने और एफआईआर दर्ज होने के बीच संबंधित लोगों की संस्थान तक निरंतर पहुंच से संभावित साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही एसआईटी या सरकार ने ऐसा कोई निष्कर्ष जारी किया है। अब इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि कथित हेराफेरी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और क्या जांच के दौरान साक्ष्यों की सुरक्षा तथा ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवालों के संतोषजनक उत्तर मिल पाते हैं। 24 घंटे में बदली तस्वीर, पहले इनकार, फिर इकरार राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अगले 24 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि अयोध्या से लेकर देशभर में इसकी चर्चा होने लगी। शुक्रवार दोपहर अचानक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, लेकिन शुरुआत में ट्रस्ट से जुड़े लगभग हर व्यक्ति ने इससे इनकार किया। गोपाल राव का प्रचार माध्यम पर निशाना कारसेवकपुरम से लेकर कार्यशाला तक मौजूद सेवादारों का कहना था कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह भी बताया गया कि चंपत राय पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास 'भरत कुटी' से बाहर नहीं निकले। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल राव ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ‘प्रचार माध्यमों को देखकर लगता है कि ये लोग चंपत राय जी का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।’ उनके इस बयान के बाद भी अटकलों का दौर थमा नहीं। उधर सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा लगातार तेज होती गई। अयोध्या में लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश करते रहे। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया। नासिक से सबसे पहले इस्तीफे की पुष्टि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने इसे बड़े स्तर की कार्रवाई की शुरुआत बताते हुए दावा किया कि अब ‘बड़ी मछलियों’ पर भी कार्रवाई तय है। इसके बावजूद न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। करीब 24 घंटे बाद शनिवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। नासिक में मौजूद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने कुछ पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र की पुष्टि कर दी। इस्तीफे के बाद सोना-चांदी के सुरक्षित होने का दावा इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में केवल इस्तीफों की पुष्टि ही नहीं की गई, बल्कि पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलला को समर्पित चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान समर्पण सुरक्षित हैं तथा उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है। इस तरह महज 24 घंटे में इनकार से आधिकारिक पुष्टि तक का घटनाक्रम पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी पर विवाद, नागा नेताओं की बैठक को लेकर विपक्ष का हमला

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने शनिवार को मणिपुर के नागा समुदाय के विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठख में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद थे, लेकिन इस बैठक के बाद अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने सवाल उठाया कि आखिर विधायकों और गृहमंत्री की बैठक के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह मौजूद क्यों नहीं थे? कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर मणिपुर के नागा विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच में बैठक मणिपुर सीएम के बिना कैसे आयोजित हो सकती है? इस बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मणिपुर कांग्रेस ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक दल के नेता केशम मेघचंद्र सिंह ने कहा कि इस बैठख के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच की बैठक से मुख्यमंत्री को अलग रखना यह पद की गरिमा और उसके अधिकार को कम करता है। इसके साथ ही उन्होंने विधायकों के साथ केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने के लिए पहुंचे उप मुख्यमंत्री लोसी दीखो पर भी सवाल उठाया। विधायकों को अपने मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं- कांग्रेस मेघचंद्र ने कहा, "यह बैठक दिखाती है कि उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो और नागा विधायकों को अपने ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है। इसलिए तो वह बिना मुख्यमंत्री के सीधे नागा विधायकों से मिलने के लिए पहुंचे हैं।" इसके अलावा उन्होंने बैठक में मौजूद नागालैंड के मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रशासन राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से होना चाहिए न कि पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के द्वारा आखिर मणिपुर के विधायकों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नागालैंड के सीएम ने क्यों किया? दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर कटाक्ष करते हुए मेघचंद्र ने कहा कि राज्य में पर्याप्त सुरक्षा होने के कबाद भी डिप्टी सीएम का दिल्ली में रहना यह दिखाता है कि उनकी प्राथमिकता क्या है। वह राज्य की नहीं केंद्र की राजनीति करना चाहते हैं। इतना ही नहीं मेघचंद्र ने सीएम को कागजी शेर करार देते हुए कहा कि राज्य के शासन पर उनका प्रभाव खत्म हो गया है। कांग्रेस की तरफ से उठाए गए इन सवालों का अभी तक भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

NEET UG Re-Exam में 8 बोनस मार्क्स का ऐलान, आज ही दर्ज करें आपत्ति, फिर नहीं मिलेगा मौका

लुधियाना. नेशनल टेस्टिंग एजैंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित की गई नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट आने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है और परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों के 4 नंबर एडवांस में पक्के हो गए हैं। 21 जून को हुए री-एग्जाम की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई है जिसमें फिजिक्स के एक सवाल को 'ड्रॉप' यानी हटा दिया गया है। इस हटाए गए सवाल के बदले परीक्षा में बैठने वाले सभी विद्यार्थियों को पूरे 4 बोनस नंबर दिए जाएंगे, भले ही किसी विद्यार्थी ने उस सवाल को हल करने की कोशिश की हो या नहीं। चूंकि यह परीक्षा एक ही शिफ्ट में हुई थी इसलिए देशभर के सभी 20 लाख विद्यार्थियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा फिजिक्स के ही एक अन्य सवाल के 2 जवाब सही पाए गए हैं। जिन विद्यार्थियों ने उन दोनों विकल्पों में से किसी एक को भी चुना होगा, उन्हें भी पूरे 4 नंबर मिलेंगे। इलैक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स और वर्नियर कैलिपर्स से जुड़े सवालों को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई गई थी। विशेषज्ञ अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि उच्च स्तरीय तैयारियों के बावजूद री-एग्जाम के प्रश्नपत्र में भी ऐसी नौबत क्यों आई और क्या प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कोई बड़ी कमी रह गई थी। आपत्तियां दर्ज कराने का मौका एन.टी.ए. द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर-की में यदि किसी विद्यार्थी को किसी सवाल के जवाब को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह उसे 28 जून तक चैलेंज कर सकता है। एक सवाल को चैलेंज करने की फीस 200 रुपए तय की गई है। अगर आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस वापस कर दी जाएगी। फाइनल आंसर-की आने के बाद ही साफ होगा कि क्या कोई और सवाल भी हटाया गया है। फिजिक्स के साथ-साथ कैमिस्ट्री, बायोलॉजी और जूलॉजी में भी कुछ सवालों के गलत होने की आशंका जताई जा रही है।

CG में कच्ची दीवार बनी काल, दो मासूमों की मौत, महिला की हालत नाजुक

बेमेतरा. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां दीवार ढहने से दो बच्चियों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना से गांव में कोहराम मच गया है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। यह पूरा मामला नवागढ़ विधानसभा के ग्राम राउरपुर का है। बच्चियों की पहचान वंशिका (11) और राधिका (7) पिता ओमप्रकाश कोशले के रूप में हुई है और घायल महिला की पहचान शशिकला के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि आज दोनों बच्चे घर के आंगन में बर्तन धो रहे थे। इसी दौरान दीवार भरभरा कर गिर गई, जिसकी चपेट में दोनों बच्चे और महिला आ गई। दोनों बच्चों की मौत, महिला घायल चीख पुकार मचते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आनन फानन में 108 के जरिए सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मौत हो चुकी थी। वहीं महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे रायपुर रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच में जुट गई।