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छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

रायपुर      ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0श् लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।          मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।        वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है। अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना          पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है। उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी       यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है। रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता       वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है। जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर       वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन       वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी। वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल    छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतलुज के पानी से हरियाणा में आई हरित क्रांति, 14,800 किमी नहर नेटवर्क ने बदली तस्वीर

 भिवानी आठ जुलाई 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाखड़ा-नांगल परियोजना की सबसे बड़ी नहर का उद्घाटन किया था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि सतलुज का यह पानी आने वाले दशकों में हरियाणा की तकदीर बदल देगा। वर्ष 1966 में राज्य गठन के समय जहां खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर था, वहीं आज हरियाणा देश के सबसे अधिक सिंचित और सर्वाधिक उत्पादक कृषि राज्यों में शामिल है। इस बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी भाखड़ा नहर प्रणाली, पश्चिमी यमुना नहर और दक्षिण हरियाणा तक पहुंची जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट कैनाल बनी हैं। हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25, स्टेट स्टैटिस्टिकल एब्स्ट्रैक्ट, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) के अनुसार प्रदेश में अब करीब 14,800 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क है। इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी जैसे राजस्थान सीमा से लगे जिले हों या महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और चरखी दादरी का दक्षिणी शुष्क क्षेत्र, यहां नहरों ने खेती, पेयजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। वर्ष 1966 के बाद सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने हरित क्रांति को गति दी। गेहूं और धान उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई, फसल सघनता बढ़ी, बागवानी और डेयरी को बढ़ावा मिला तथा ग्रामीण आय में लगातार सुधार हुआ। भले ही आजकल नहरों में पानी कम आ रहा है पर आज हरियाणा देश के केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल देने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में है। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विनोद फौगाट ने कहा कि हरियाणा की हरित क्रांति की असली ताकत भरोसेमंद सिंचाई रही और इसका सबसे बड़ा आधार भाखड़ा नहर प्रणाली है।भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की भाखड़ा परियोजना उत्तर भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि समृद्धि की आधारशिला कही जा सकती है।  

“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 को

रायपुर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मा…h

बिहार राजस्व अदालतों में नई व्यवस्था लागू, ऑनलाइन दस्तावेजों से ही होगी सुनवाई

पटना. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व न्यायालयों में लंबित और नए मामलों के निष्पादन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब राजस्व न्यायालयों में किसी भी वाद की सुनवाई के दौरान आवेदक या विपक्षी पक्ष से किसी भी प्रकार का भौतिक साक्ष्य या दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेज और साक्ष्य ही मान्य होंगे। विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं (डीसीएलआर) और अंचल अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शुरू से अंत तक की प्रक्र‍िया ऑनलाइन उन्होंने कहा है कि राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत वाद दायर करने से लेकर अंतिम आदेश पारित करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जानी है। विभाग को जानकारी मिली थी कि कई स्थानों पर सुनवाई के दौरान पक्षकारों से भौतिक रूप से दस्तावेज लिए जा रहे हैं, जो निर्धारित व्यवस्था के विपरीत है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने इस पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया है। पोर्टल पर ही अपलोड होंगे अतिरिक्त दस्तावेज नए निर्देश के अनुसार, यदि किसी मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होती है, तो संबंधित पक्षकारों को केवल RCMS पोर्टल पर ही दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। राजस्व न्यायालय भी केवल पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही मामलों का निष्पादन करेंगे। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी होगी। दस्तावेजों से छेड़छाड़ या विवाद की आशंका समाप्त होगी और सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। साथ ही लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने या कागजी दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। सचिव जय सिंह ने सभी जिला और अंचल स्तरीय अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि राज्य में राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू हो सके।

पंजाब में वकीलों की हड़ताल से न्यायिक कामकाज प्रभावित, अदालतों में ठप पड़े काम

बरनाला. लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के विरोध में जॉइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर पंजाब भर के वकील समुदाय ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके तहत कोर्ट का काम पूरी तरह से ठप्प रहा। वकीलों का आरोप है कि सरकार इस पॉलिसी से क्राइम और क्रिमिनल्स को बढ़ावा दे रही है, जिससे लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इस मौके पर बोलते हुए एडवोकेट धीरज कुमार ने मौजूदा सिस्टम पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के तहत अपराध करने वाले व्यक्ति को सरकार की तरफ से फ्री वकील दिया जाता है, जिससे क्रिमिनल का कोर्ट में एक भी रुपया खर्च नहीं होता। हद तो तब हो जाती है जब कई मामलों में क्रिमिनल्स को बेल देने की भी जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ सरकार गांव के पंचों और सरपंचों से ड्रग स्मगलर्स को बेल न देने के लिए कह रही है, वहीं दूसरी तरफ ड्रग स्मगलर्स इस सिस्टम के जरिए बिना बेल के फ्री रिहाई पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम की वजह से लूटपाट और ड्रग ट्रैफिकिंग जैसे अपराध दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं। जिला बार एसोसिएशन बरनाला की एडहॉक कमेटी के चेयरमैन हरिंदरपाल सिंह रानू ने कहा कि यह हड़ताल किसी एक जिले की नहीं बल्कि पूरे पंजाब की बार एसोसिएशनों ने मिलकर की है। उन्होंने कहा कि फ्री कानूनी मदद गरीब और जरूरतमंद लोगों को मिलनी चाहिए, प्रोफेशनल क्रिमिनल्स को नहीं। उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी में कमियों की वजह से चोरी करने वाले और ड्रग बेचने वाले क्रिमिनल्स जेल से बाहर आने के बाद फिर वही काम करते हैं। संघर्ष के अगले फेज के बारे में बोलते हुए चेयरमैन रानू ने कहा कि इससे पहले जॉइंट एक्शन कमेटी और बार काउंसिल के मेंबर्स ने माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से बातचीत की थी और इस मसले को सुलझाने के लिए उनकी तरफ से एक कमेटी भी बनाई गई थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद कोई सही फैसला नहीं हुआ है। वकील नेताओं ने साफ किया कि जब तक सरकार इस पॉलिसी को रद्द नहीं करती या इसमें सुधार नहीं करती, तब तक लीगल कम्युनिटी कंधे से कंधा मिलाकर अनिश्चित समय के लिए हड़ताल जारी रखेगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के साझा प्रयासों को और सशक्त बनाने पर दिया गया जोर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री  राधाकृष्ण किशोर ने सौजन्य भेंट की।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य ही नहीं हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जशपुर क्षेत्र का झारखंड से वर्षों पुराना आत्मीय जुड़ाव रहा है, जिसने दोनों राज्यों के लोगों के बीच विश्वास और निकटता को निरंतर मजबूत किया है। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा परस्पर अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।

बांकीपुर सीट पर सियासी मुकाबला दिलचस्प, प्रशांत किशोर के साथ आए शत्रुघ्न सिन्हा; BJP के टिकट पर नजर

पटना. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई हाईप्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब तक अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल और अन्य पार्टियां उम्मीदवारों का एलान कर चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। भाजपा की ओर से कई नामों पर चर्चा तेज है। इनमें पार्टी नेता अजीत कुमार लाली और नील रतन घोष प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व फिलहाल उम्मीदवार के चयन को लेकर मंथन में जुटा है। ऐसे में भाजपा के फैसले पर सभी राजनीतिक दलों और चुनावी विश्लेषकों की नजर टिकी हुई है। उधर, राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर रेखा कुमारी पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जन सुराज से प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। 11 जुलाई को नामांकन भरेंगे प्रशांत किशोर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर लगातार बांकीपुर क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। वे मोहल्लों, बाजारों और विभिन्न सामाजिक समूहों से मुलाकात कर समर्थन जुटा रहे हैं। पार्टी की ओर से जानकारी दी गई है कि 11 जुलाई को वह अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पीके का खुला समर्थन किया है। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर 'बिहारी बाबू' ने इसे बिहार की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बताया। शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा कि PK के चुनाव मैदान में उतरने से बिहार ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में नई हलचल पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि आज समय की सबसे बड़ी जरूरत एकता है और आम जनता, विशेषकर युवाओं से जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर का समर्थन करने की अपील की। भाजपा के फैसले पर टिकी निगाहें बांकीपुर उपचुनाव में अब तक राजद, जन सुराज और जनशक्ति जनता दल अपने प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं। ऐसे में सबसे अधिक उत्सुकता भाजपा के उम्मीदवार को लेकर है। पार्टी प्रत्याशी घोषित होने के बाद इस हाईप्रोफाइल सीट पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। जानकारों का मानना है कि भाजपा का उम्मीदवार तय होने के साथ ही राजनीतक गरमाहट और तेज होगी।

गैर-मुस्लिम महिला से शादी के लिए वक्फ बोर्ड रजिस्ट्रेशन जरूरी? नियमों को लेकर बड़ा अपडेट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में फर्जी निकाह रोकने छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने नए नियम बनाए हैं. गैर मुस्लिम महिला से निकाह के लिए अब वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलाना पर कार्रवाई हो सकती है. वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा, नए नियम के तहत अब वक्फ बोर्ड से रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा पाएंगे. अगर कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है तो पहले वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा. इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. डॉ. सलीम राज ने कहा, बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. केवल रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा सकेंगे. वक्फ बोर्ड का कहना है कि इससे फर्जी पहचान, दस्तावेज छिपाकर विवाह कराने और विवादित मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी. हर निकाह का पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा. निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड के माध्यम से जारी किया जाएगा. वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली हैं, इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है.

परियोजना 20 एकड़ क्षेत्र में होगी विकसित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 8 जुलाई को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लियुगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नए विनिर्माण संयंत्र का भूमि-पूजन करेंगे। चीन की अग्रणी बहुराष्ट्रीय निर्माण उपकरण निर्माता कंपनी गुआंग्शी लियुगोंग मशीनरी कंपनी लिमिटेड की भारतीय इकाई द्वारा किया जा रहा यह विस्तार मध्यप्रदेश को निर्माण उपकरण विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। पीथमपुर में स्थापित होने वाला नया संयंत्र लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 272 करोड़ रूपये का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र में प्रारंभिक चरण में प्रतिवर्ष 6,500 निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से एक्सकेवेटर का निर्माण किया जाएगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम होगी तथा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। लियुगोंग विश्व की अग्रणी निर्माण उपकरण निर्माता कंपनियों में शामिल है तथा व्हील लोडर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी पहचान रखती है। कंपनी व्हील लोडर, एक्सकेवेटर, मोटर ग्रेडर, माइनिंग डंप ट्रक, बुलडोजर, स्किड-स्टियर लोडर, फोर्कलिफ्ट, कोल्ड प्लेनर तथा अन्य आधुनिक निर्माण एवं खनन उपकरणों का निर्माण करती है। कंपनी वर्ष 2008 से पीथमपुर में अपनी विनिर्माण इकाई का संचालन कर रही है। 44 एकड़ से अधिक क्षेत्र में स्थापित इस संयंत्र में प्रतिवर्ष 3 हजार व्हील लोडर एवं मोटर ग्रेडर के निर्माण की क्षमता है। वर्ष 2009 में इसी इकाई से पहला मेड इन इंडिया व्हील लोडर तैयार किया गया था। पीथमपुर स्थित इकाई में अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित हैं, जहां 500 से अधिक भारतीय युवा पेशेवर कार्यरत हैं। यह इकाई मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। देशभर में सड़क निर्माण, खनन, जलविद्युत एवं पाइपलाइन परियोजनाओं सहित विभिन्न आधारभूत संरचना कार्यों में कंपनी के 4 हजार से अधिक निर्माण उपकरण उपयोग में लाए जा रहे हैं। पीथमपुर में प्रस्तावित नया संयंत्र इस बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, उत्कृष्ट औद्योगिक अधोसंरचना, सरल प्रक्रियाओं तथा निवेशक हितैषी नीतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक निवेश केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लियुगोंग इंडिया का यह विस्तार राज्य में बढ़ते वैश्विक निवेशकों के विश्वास की एक और बड़ी मिसाल बनेगा।  

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई खिलाड़ियों से टीटी नगर स्टेडियम में मिले मंत्री सारंग, बढ़ाया हौसला

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों से टी.टी. नगर स्टेडियम में मिले मंत्री सारंग खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन कहा – मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रचेंगे नया इतिहास सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को टी.टी. नगर स्टेडियम में आगामी एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद कर उनकी तैयारियों, प्रशिक्षण, फिटनेस और आगामी प्रतियोगिताओं को लेकर विस्तार से चर्चा की तथा उन्हें शुभकामनाएं देते हुए पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का आह्वान किया। मंत्री सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के लिए मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का बड़ी संख्या में चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। यह उपलब्धि खिलाड़ियों के अथक परिश्रम, प्रशिक्षकों के समर्पण तथा प्रदेश सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और यहां के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। खिलाड़ियों को आधुनिक खेल अधोसंरचना, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक कोचिंग, खेल विज्ञान, पोषण, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को हर स्तर पर आवश्यक सहयोग और अवसर प्राप्त हों। मंत्री सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश के लिए गौरव अर्जित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्हें पूरा विश्वास है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ अपनी तैयारियां जारी रखें। पूरे प्रदेश की शुभकामनाएं और विश्वास उनके साथ हैं। उन्होंने प्रशिक्षकों और खेल विभाग के अधिकारियों की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्पण का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि आगामी एशियन गेम्स के लिए मध्यप्रदेश के 22 खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल विधाओं में क्वालिफाई किया है। इनमें एथलेटिक्स, शूटिंग, रायफल, कैनो स्लालम, कैनोइंग, कायाक, शॉटगन, क्लाउड जुडो, घुड़सवारी सहित विभिन्न खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से प्रदेश को उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने की बड़ी उम्मीदें हैं। इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव संजीव सिंह, संचालक अंशुमन यादव, उपसचिव अजय श्रीवास्तव, खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षक, खेल अकादमियों के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। मंत्री सारंग ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनके साथ खड़ा है और उन्हें विश्वास है कि वे अपने प्रदर्शन से देश और प्रदेश को गौरवान्वित करेंगे।