samacharsecretary.com

13 जून से अब तक तकनीकी सहायता एवं CEIR पोर्टल के माध्यम से मिली सफलता

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में "सेफ क्लिक 2.0" अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। 24 जून 2026 से प्रारंभ इस विशेष अभियान का उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक कर सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में स्कूलों, महाविद्यालयों, बैंकों, अस्पतालों, शासकीय एवं निजी संस्थानों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आमजन को संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, डिजिटल भुगतान के दौरान सतर्कता बरतने, ओटीपी एवं बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करने तथा साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन 1930 एवं राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साइबर अपराधों की रोकथाम के साथ-साथ मध्यप्रदेश पुलिस आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग के माध्यम से गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है। CEIR पोर्टल, तकनीकी विश्लेषण तथा विभिन्न जिलों की साइबर टीमों के समन्वित प्रयासों से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को लौटाए जा रहे हैं, जिससे आमजन का पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।13 जूनसे अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं जीआरपी इकाइयों द्वारा कुल 2,094 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोनबरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए हैं। इनमें "सेफ क्लिक 2.0" अभियान प्रारंभ होने के बाद अब तक प्रदेश के 12 जिलों एवं 02 जीआरपी में कुल 1461 गुम मोबाइल फोनउनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए गए हैं। इनमें भिंड ने 325, देवास ने 210,शाजापुर ने 179, नरसिंहपुर ने 175, छतरपुर ने 149,रायसेन ने 149,बड़वानी ने 129, भोपाल जीआरपी ने 124, खंडवा ने 123, खरगोन ने 100, बुरहानपुर ने 100,झाबुआ ने 80,सिंगरौली ने 70, गुना ने 65,भोपाल ग्रामीण ने 53, उज्जैन ने 40,कटनी ने 10,जबलपुर जीआरपी ने 7, इंदौर जीआरपी ने 5, सिवनी ने 1 तथा छतरपुर ने 1 मोबाइलशामिल है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून 2026 से संचालित "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, बैंकों, अस्पतालों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, ओटीपी एवं बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करने तथा साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन 1930 एवं राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीक आधारित कार्यप्रणाली, साइबर अपराधों के प्रति संवेदनशीलता तथा नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। एक ओर "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गुम एवं चोरी हुए मोबाइलों की त्वरित बरामदगी कर उन्हें उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाकर पुलिस आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत कर रही है। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने की स्थिति में तत्काल CEIR पोर्टलअथवा निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी, बैंकिंग जानकारी अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें तथा किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।  

जवाहर बाल भवन के स्थापना दिवस समारोह का हुआ गरिमामय समापन

भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि सरकार बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें एक सुरक्षित, सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को सही मंच देना समाज और सरकार दोनों की साझी जिम्मेदारी है। मंत्री भूरिया मंगलवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित 'जवाहर बाल भवन, भोपाल' के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक प्रतियोगिताओं के गरिमामय समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने विभिन्न रचनात्मक विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। दशकों से प्रतिभाओं को निखार रहा है जवाहर बाल भवन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री भूरिया ने बच्चों की अद्भुत और बहुमुखी प्रतिभा की जमकर सराहना की। जवाहर बाल भवन वर्ष 1987 (स्थापना 3 जुलाई 1987) से ही लगातार 5 से 16 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों की रचनात्मकता और उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को बाहर लाने का एक सशक्त और विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है। इस वर्ष आयोजित 'समर कैम्प 2026' के अंतर्गत बच्चों के कौशल विकास के लिए विशेष और अत्याधुनिक कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं, जिससे बच्चों को अपनी कला को नया आयाम देने का मौका मिला। 10 से अधिक विधाओं में बच्चों ने दिखाया हुनर स्थापना दिवस के उपलक्ष में 3 जुलाई से लगातार संगीत, नृत्य, चित्रकला, नाटक, गृह-विज्ञान, मूर्तिकला, हस्तकला, कम्प्यूटर, खेलकूद और आधुनिक अभिनय कला जैसी 10 से अधिक विभिन्न विधाओं के अंतर्गत साप्ताहिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा था। इन प्रतियोगिताओं में शहर के सैकड़ों बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। समारोह में प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभावान बच्चों को मंच पर सम्मानित किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, विभाग की आयुक्त श्रीमती निधि निवेदिता तथा जवाहर बाल भवन भोपाल की संचालक श्रीमती उषा सोलंकी ने संयुक्त रूप से सभी विजेता बच्चों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में रविंद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर, अभिजीत सोलंकी भी उपस्थित रहे। मंत्री भूरिया ने सभी पुरस्कार विजेताओं और सहभागियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  

उरला फैक्ट्री हादसे में 2 से 3 मजदूरों की मौत की आशंका

रायपुर राजधानी के उरला थाना क्षेत्र के बेंद्री स्थित 3डी फैक्ट्री में मंगलवार शाम ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से भीषण विस्फोट हो गया। हादसे में दो मजदूरों की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कई अन्य मजदूरों के लापता होने की आशंका है। मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, 108 एंबुलेंस और बचाव दल राहत एवं सर्च ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। फैक्ट्री के भीतर अचानक हुआ तेज धमाका प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक फैक्ट्री के भीतर अचानक तेज धमाका हुआ, जिससे पूरे परिसर में अफरातफरी मच गई। धमाके के बाद कई मजदूर बाहर निकल आए, जबकि कुछ के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया है और लापता मजदूरों की तलाश जारी है। परिजनों में भारी आक्रोश का माहौल घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उरला स्थित फैक्ट्री पहुंच गए और राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं। हादसे के बाद फैक्ट्री के बाहर बड़ी संख्या में मजदूरों के परिजन पहुंच गए, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। मौके पर परिजनों में भारी आक्रोश का माहौल है। यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में जंगल के बीच चलती बस में गूंजी किलकारी, यात्रियों ने कराया प्रसव, चंदा देकर की मदद हादसे के कारणों की जांच शुरू प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के काफी देर बाद तक फैक्ट्री प्रबंधन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे परिजनों का गुस्सा और बढ़ गया। पुलिस ने पूरे परिसर को घेर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।  

सीतापुरम टाउनशिप के लिए बड़ा फैसला, 30 जून 2027 तक निर्माण कार्य बंद

 सीतामढ़ी  ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए अधिसूचित विस्तारित क्षेत्र में भी जमीन की खरीद बिक्री व नए भवन निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। यह रोक 30 जून 2027 तक रहेगी। मालूम हो कि इसके तहत पूर्व से अधिसूचित सीतामढ़ी आयोजना क्षेत्र का क्षेत्रफल 99.23 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में जमीन की खरीद बिक्री एवं नए निर्माण पर रोक लगाई गई थी। वहीं, विस्तारित क्षेत्रफल 200.09 वर्ग कि.मी. अर्थात् कुल क्षेत्रफल 200.32 वर्ग किमी. हो गया है। जिसमें शहरी क्षेत्र का क्षेत्रफल 55.84 वर्ग कि.मी. एवं शेष ग्रामीण क्षेत्र का क्षेत्रफल 243.48 वर्ग कि.मी. है। इस आयोजना क्षेत्र के अंतर्गत एक शहरी प्रशासनिक इकाई (नगर निगम, सीतामढ़ी) तथा 98 राजस्व ग्राम को शामिल किया गया है। शामिल किए गए नए क्षेत्रों में भी जमीन की खरीद बिक्री व नए निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इनमें डुमरा सीडी ब्लॉक के 58, रीगा सीडी ब्लॉक के 17. परसौनी सीडी ब्लॉक के 14, बथनाहा सीडी ब्लॉक के 02 राजस्व ग्राम एवं रुन्नीसैदपुर सीडी ब्लॉक के 07 राजस्व ग्राम शामिल हैं। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने सीतामढ़ी में प्रस्तावित सीतापुरम ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए मास्टर प्लान तैयार होने तक इस क्षेत्र में जमीन के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण और भवनों के निर्माण पर रोक लगा दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना के अनुसार, सीतापुरम ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विशेष क्षेत्र और कोर क्षेत्र सहित पूरे आयोजन क्षेत्र में 30 जून 2027 तक सभी तरह के भूमि विकास और निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। यह रोक बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा-9(7) के तहत लगाई गई है। विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। प्लान बनने तक अवैध प्लाटिंग और बेतरतीब निर्माण को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। रोक हटने के बाद ही सुनियोजित तरीके से टाउनशिप का विकास किया जाएगा। नगर आयुक्त डॉ. गजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि नगर विकास विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। रोक के कारण अब टाउनशिप क्षेत्र में न तो कोई नई जमीन की रजिस्ट्री हो सकेगी और न ही कोई नया मकान या व्यावसायिक भवन बनाया जा सकेगा। 30 जून 2027 के बाद मास्टर प्लान के अनुसार ही विकास की अनुमति मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर दी बधाई

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री  मोदी जी का नहीं, बल्कि पूरे 140 करोड़ भारतवासियों का सम्मान, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्व मंच पर सशक्त होती उसकी भूमिका का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी कूटनीति ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है तथा मित्र देशों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व समुदाय में अपनी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ वैश्विक शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए निरंतर योगदान देता रहेगा।

यूपी बनेगा स्टार्टअप हब, नई नीति से 50 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा नवाचार और स्टार्टअप हब बनाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को स्वीकृति दे दी गई। नई नीति के तहत 1000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड, 400 करोड़ रुपये का एकेटीयू कार्पस फंड और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेश में नवाचार आधारित उद्योगों को गति मिलेगी, 50 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनेंगे और ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। कैबिनेट में 28 प्रस्तावों में से 27 को स्वीकृति मिली, जबकि मदरसा शिक्षकों की ग्रेच्युटी से संबंधित प्रस्ताव वापस ले लिया गया कैबिनेट के बाद आइटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। नई नीति में स्टार्टअप्स को आइडिया से लेकर विस्तार तक हर चरण में वित्तीय और संस्थागत सहायता मिलेगी। भरण पोषण भत्ता (सस्टेनेंस अलाउंस) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। प्रोटोटाइप अनुदान पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये, जबकि सीड फंडिंग 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक दी जा सकेगी। स्टार्टअप्स के लिए पांच करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, दो करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ईपीएफ एवं ईएसआइ अंशदान की प्रतिपूर्ति, क्लाउड सेवाओं पर दो लाख रुपये तक सहायता व पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए दो करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति का प्रविधान किया गया है। इसके साथ ही फंड आफ फंड्स, बैंक फंडिंग और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलाजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक सहित अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष पैकेज मिलेगा। ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल व अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। 20 नए सेंटर आफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए जाएंगे। इनकी सहायता राशि 10 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब स्थापित होगा, जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, उद्योग सहयोग, निवेश, मेंटरशिप और अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इन्क्यूबेटर्स के लिए पूंजीगत अनुदान एक करोड़ से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये व पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। परिचालन अनुदान 30 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। प्रदेश में एंजेल निवेशकों, वेंचर कैपिटल फंड, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) और हाई नेटवर्थ फैमिली (एचएनएफ) को जोड़कर राज्य स्तरीय निवेशक नेटवर्क बनाया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 100 करोड़ रुपये की निजी पूंजी स्टार्टअप्स तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। एकेटीयू इनोवेशन हब को सुदृढ़ करने, ओडीओपी को स्टार्टअप्स से जोड़ने तथा एनआरआई कनेक्ट के जरिये निवेश और वैश्विक नेटवर्किंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। स्टार्टअप वीक, स्टार्टअप सिंपोजियम, ग्रैंड चैलेंज, बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, स्टार्टअप मेले, हैकाथान और नवाचार जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्टार्टअप संस्कृति गांवों और छोटे शहरों तक पहुंच सके। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चार स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। स्टीयरिंग कमेटी नीति को दिशा देगी, सशक्त समिति वित्तीय एवं नीतिगत निर्णय लेगी, पालिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) अनुदान वितरण और निगरानी करेगी व स्टार्टअप रिव्यू कमेटी आफ एक्सपर्ट्स (एसआरसीई) तकनीकी मूल्यांकन करेगी। इसके अलावा सलाहकार समिति और स्टार्टअप मिशन निदेशालय का गठन भी होगा। अधिसूचना जारी होने के बाद नीति लागू कर दी जाएगी। स्टार्टअप मिशन होगा नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा। आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करने वाला यह मिशन स्टार्टअप नीति के क्रियान्वयन, स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स और सेंटर आफ एक्सीलेंस के समन्वय, अनुदान वितरण, स्टार्टइनयूपी पोर्टल, एमआईएस व डिजिटल प्लेटफार्म के संचालन, निवेश आकर्षित करने, उद्योग और शिक्षण संस्थानों से साझेदारी, शिकायत निवारण तथा नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण का कार्य करेगा। मिशन के प्रशासनिक ढांचे में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाला गवर्निंग बोर्ड, कार्यकारी समिति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), महाप्रबंधक, प्रशासनिक टीम और परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद, विधायकगण होंगे शामिल

रायपुर  पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. मती तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच में आयोजित होगा।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्म एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित   सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की  सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. मती तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा। पद्मविभूषण मती तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया। 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण मती तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया। प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं। पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है। उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्म (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजस्व विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, तकनीक आधारित नवाचारों तथा नागरिकों एवं किसानों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नागरिकों को बिना अनावश्यक कार्यालयीन आवागमन के गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बैठक में डिजिटल किसान किताब एवं भूमि संबंधी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें तहसील अथवा पटवारी कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन एवं किसानों के जीवन से जुड़ा विभाग है, इसलिए शासन के सभी सुधारों एवं नवाचारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों का त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरबीसी 6-4 की ऑनलाइन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसके लागू होने पर आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध होगी। उन्होंने अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से संपादित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष बल देते हुए सीमांकन प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने तथा समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों की जिला-वार नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नकल शाखा को पूर्णतः ऑनलाइन करने के लिए इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया जाएगा। इससे प्रमाणित अभिलेखों का निर्गमन कुछ ही मिनटों में संभव होगा तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित ग्रामों, विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राजस्व अभिलेख तैयार हो सकें, भूमि अभिलेख अद्यतन हों तथा स्थानीय नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि एवं नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री एवं एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह एवं विश्वासपूर्ण राजस्व व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और इसे और अधिक प्रभावी बनाना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व सेवाएं केंद्रीकृत एवं पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर नागरिक हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए। बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली, रेवेन्यू बोर्ड एवं संभागीय आयुक्त कार्यालयों में ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था, नक्शा डिजिटाइजेशन, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन तथा भू-अर्जन से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धमतरी, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में नक्शा परियोजना का पायलट कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक एवं अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, तहसीलों के अधोसंरचना विकास तथा तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक, राजस्व विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, विशेष सचिव मती इफ़्फत आरा, संचालक भू-अभिलेख  विनीत नंदनवार, संयुक्त सचिव  अरविन्द एक्का सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नवनियुक्त इंजीनियरों को आधुनिक तकनीकों और पावर प्लांट निर्माण का विशेष प्रशिक्षण

नवनियुक्त इंजीनियरों को आधुनिक तकनीकों और पॉवर प्लांट निर्माण का मिला प्रशिक्षण भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के नवनियुक्त 10 कनिष्ठ अभियंताओं (सिविल) का छह सप्ताह का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान, नागपुर में आयोजित किया गया। अभियंताओं को ताप एवं जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण, संधारण तथा आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीकों का गहन सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। छह सप्ताह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नवनियुक्त अभियंताओं को विद्युत उत्पादन परियोजनाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराते हुए उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना था। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों जैसे कंक्रीट टेक्नोलॉजी, मटेरियल टेस्टिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, कार्य मापन, निर्माण पर्यवेक्षण तथा नवीनतम इंजीनियरिंग तकनीकों के अनुप्रयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र के चंद्रपुर और कोराडी स्थित 2×600 मेगावाट सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत इकाइयों का औद्योगिक भ्रमण रहा। इस दौरान प्रशिक्षु अभियंताओं ने निर्माणाधीन विद्युत परियोजनाओं में फाउंडेशन, संरचनात्मक निर्माण एवं परियोजना निष्पादन की प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।  

अयोध्या मामले में योगी बोले, सपा-कांग्रेस के मुंह पर फेविकोल क्यों

लखनऊ मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अयोध्‍या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सवाल उठाने पर सपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। प्रतापगढ़ में राम मंदिर को लेकर सपा और कांग्रेस पर सीएम योगी खूब बरसे। योगी ने कहा कि कांग्रेस और सपा ने एक घटना को बढ़ाकर हिंदुओं को अपमानित कर आस्था के साथ खिलवाड़ किया। योगी ने कहा कि वक्फ के नाम पर देश-प्रदेश में हजारों हेक्टेयर जमीन बेची गई, एक भी बार सपा-कांग्रेस नहीं बोली। अयोध्या में एसआईटी ने जांच की, प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने कार्रवाई की। लेकिन वक्फ के नाम पर सपा-कांग्रेस के लोगों के मुंह पर फेविकोल क्यों लग जाता है। मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ जिले के सदर और विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्रों में 384 करोड़ की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में सपा और कांग्रेस की तीखी आलोचना करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने कहा कि अयोध्या के मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है, मगर वक्फ के मुद्दे पर सपा और कांग्रेस के लोगों के मुंह पर 'फेविकोल' क्यों लग जाता है। आदित्यनाथ ने कहा कि राम के अस्तित्व को नकारने वाले, अयोध्या में राम भक्तों पर गोली चलाने वाले और हिंदू विरासत से जुड़े धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार से संबंधित रकम को कब्रिस्तान की चहारदीवारी पर खर्च करने वाले लोग अयोध्या के प्रति कब से आस्थावान हो गए? उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों के लोगों को राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि अब तो इन सपाइयों से और कांग्रेसियों से गिरगिट भी शरमा रहा होगा कि भाई देखो कम से कम एक नई प्रजाति आ गई है जो हमसे ज्यादा तेजी से रंग बदलती है। हर जागरूक नागरिक को सपा और कांग्रेस से यह प्रश्न करने चाहिए उन्होंने कहा कि जब सपा और कांग्रेस के लोग अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां और लाठी चलवाते थे, भगवान राम और कृष्ण को काल्पनिक कहते थे, कांवड़ यात्रा को प्रतिबंधित करते थे, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन पर रोक लगाते थे, दुर्गा पूर्जा पंडालों पर रोक लगाते थे और अवैध बूचड़खानों में गौमाता की हत्या करवाते थे, क्या तब हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जागरूक नागरिक को सपा और कांग्रेस से यह प्रश्न करने चाहिये। राम का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर खड़ा है, यही समाजवादी पार्टी की पीड़ा योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जहां पर वे बाबरी का 'गुलामी का ढांचा' (स्पष्ट रूप से मुगल शासन के संदर्भ में)देखना चाहते थे, आज आप सबके पुरुषार्थ से वहां भगवान राम का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर खड़ा है, यही समाजवादी पार्टी की पीड़ा है।