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दिव्यांग छात्राओं के सपनों को मिलेगी रफ्तार, 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी ई-ट्राइसाइकिल

लखनऊ योगी सरकार ने दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, उनकी गतिशीलता बढ़ाने और शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों तक आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल वितरण योजना का विस्तार करते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राओं को भी योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया है। योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को अधिकतम 65,000 रुपये तक की बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्राओं के लिए घर से शिक्षण संस्थान तक आने-जाने में सुविधा होगी और आवागमन की बाधा को कम किया जा सकेगा। प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगा योजना का लाभ योजना को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को इसके दायरे में रखा गया है। योजना के तहत प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट से 20-20 पात्र दिव्यांग छात्राओं का चयन होगा। विभिन्न जनपदों में चिन्हांकन एवं सत्यापन के बाद उन्हें निशुल्क बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में कुल 8,060 ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली पात्र दिव्यांग छात्राओं को भी आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके और वे अपनी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बिना किसी परिवहन संबंधी बाधा के जारी रख सकें। 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता पर पात्रता योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राएं लाभ प्राप्त कर सकेंगी। लाभार्थी छात्रा का किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा प्रशिक्षण संस्थान में अध्ययनरत या प्रशिक्षणरत होना आवश्यक होगा। पात्रता का निर्धारण शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार किया जाएगा। छात्रा के पास निर्धारित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र/यूडीआईडी कार्ड तथा योजना के लिए आवश्यक अन्य अभिलेख होना आवश्यक होगा। पात्रता के संबंध में निर्धारित मानकों के अनुसार दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। लाभार्थी की उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य  जनपद स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा पात्र छात्राओं का चिन्हांकन एवं सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र छात्राओं को अधिकतम 65,000 रुपये तक की बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी की उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्राएं जनपद स्तर पर जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अधिकारी या पोर्टल https://hwd.uphq.in/ पर आवेदन कर सकती हैं। शिक्षा जारी रखने में मिलेगी मजबूती योजना का उद्देश्य केवल आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांग छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण को निर्बाध बनाए रखना भी है। परिवहन की समस्या के कारण अनेक दिव्यांग छात्राओं को विद्यालय, महाविद्यालय अथवा प्रशिक्षण संस्थान तक नियमित रूप से पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार आवागमन की समस्या उनकी शिक्षा में बाधा बन जाती है। ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध होने से ऐसी छात्राओं को नियमित रूप से शिक्षण संस्थान तक पहुंचने में सुविधा होगी और उनकी पढ़ाई जारी रखने के अवसर मजबूत होंगे। समान अवसर और सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम योगी सरकार की यह पहल दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल से उनकी गतिशीलता, आत्मनिर्भरता, शिक्षा तक पहुंच और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों तक योजना को पहुंचाने का प्रयास दिव्यांग छात्राओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभाग का प्रयास है कि दिव्यांगजन के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। यह पहल समावेशी शिक्षा, समान अवसर और दिव्यांग छात्राओं के सशक्तीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। पढ़ाई के लिए आसान होगा आवागमन दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए शासन द्वारा बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल वितरण योजना का विस्तार किया गया है। अब 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राओं को भी योजना का लाभ मिलेगा। जनपद स्तर पर आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।

“अमृत हरित महाभियान” के तहत अब तक 51 लाख से अधिक पौधों का रोपण

भोपाल प्रदेश के नगरीय निकायों में हरित आवरण का निरंतर विस्तार करने, रोपे गए पौधों की वैज्ञानिक देखभाल सुनिश्चित करने तथा पार्कों के योजनाबद्ध एवं सौंदर्यबोध आधारित प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगरीय प्रबंधन संस्थान (एसपीएनआईयूएम) में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन हुआ। 1 एवं 2 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में राज्य के सभी 10 संभागों से लगभग 215 से 220 माली कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण सत्रों में नर्सरी प्रबंधन, लैंडस्केपिंग, पार्क डिजाइनिंग तथा पौधारोपण की आधुनिक व प्रामाणिक तकनीकों पर विस्तृत ज्ञान साझा किया गया। इसके साथ ही ‘नमो हरित-नगर योजना’ के अंतर्गत व्यवस्थित पौधारोपण के माध्यम से शहरों को पर्यावरण अनुकूल बनाने के व्यावहारिक उपायों से संभाग स्तरीय प्रतिनिधियों को अभिभूत कराया गया। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने बताया कि प्रदेश में "अमृत हरित महाभियान" के तहत अब तक 51 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो राज्य की एक विशिष्ट उपलब्धि है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि वास्तविक सफलता केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक पौधे को एक स्वस्थ और विशाल वृक्ष के रूप में विकसित करने में समाहित है, जिसमें प्रशिक्षित माली कर्मचारियों का समर्पण सर्वाधिक निर्णायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि ‘नमो हरित-नगर योजना’ एवं 'अमृत हरित महाभियान' के समन्वित प्रयासों से प्रदेश के सभी नगरों में टिकाऊ और पर्यावरण-संवर्धित शहरी स्वरूप विकसित किया जा रहा है। कार्यशाला के समापन पर समस्त संभागों से आए प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में अर्जित वैज्ञानिक ज्ञान को अपने-अपने नगरीय निकायों में निष्ठापूर्वक लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यशाला में सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी  अशोक मिश्रा, एसएमएमयू के टीम लीडर डॉ. उदय रोमन, सेवानिवृत्त उद्यानिकी विशेषज्ञ  सर्वेश तिवारी एवं लैंडस्केप आर्किटेक्ट सु रूपम मिश्रा ने सहभागिता कर कर्मचारियों को पौध पोषण, मृदा प्रबंधन, सिंचाई, कटाई-छंटाई और नियमित रखरखाव की सूक्ष्मताओं का व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इस प्रशिक्षण का मुख्य ध्येय नगरीय निकायों में कार्यरत जनशक्ति का कौशल संवर्धन करना है, जिससे पौधों के जीवित रहने की दर में वृद्धि हो सके। प्रशिक्षित माली कर्मचारियों के माध्यम से शहरों के पार्कों और हरित पट्टियों का रख-रखाव अधिक प्रभावी होगा, जिससे आम नागरिकों को स्वच्छ, निर्मल और हरित वातावरण प्राप्त हो सकेगा।  

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर, 60+ सहायक वन संरक्षकों की नई पदस्थापना

रायपुर. राज्य सरकार ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला सूची जारी की गई है. प्रशासनिक दृष्टिकोण से 60 से अधिक सहायक वन सरंक्षक की नई पदास्थापना जारी हुई है. इस संबंध में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से आदेश जारी किया गया है. आदेश के तहत राम कुमार सिदार को मंडल प्रबंधक, कर्वधा परियोजना मंडल, राज्य वन विकास निगम, कवर्धा पदस्थ किया गया है. विजेन्द्र सिंह ठाकुर को उप वनमंडलाधिकारी बस्तर, वनमंडल बस्तर भेजा गया है. अमिता गुप्ता को उप प्रबंधक, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ मुख्यालय, नया रायपुर पदस्थ किया गया है. इसी तरह  मनोज कुमार विश्वकर्मा को उप वनमंडलाधिकारी बिरगुड़ी, वनमंडल धमतरी पदस्थ किया गया है. मोना महेश्वरी को संलाग्नाधिकारी, वृत्त कार्यालय दुर्ग भेजा गया है. जसवीर सिंह मरावी को उप वनमंडलाधिकारी कांकेर, वनमंडल कांकेर पदस्थ किया गया है. कुमार सिंह कंवर को उप वनमंडलाधिकारी बैकुंठपुर, वनमंडल कोरिया भेजा गया है. वहीं, एम. एल. सिदार कोउप प्रबंध संचालक, जिला यूनियन रायगढ़ पदस्थ किया गया है. शिवशंकर नाविक को उप मंडलाधिकारी धमतरी, वनमंडल धमतरी पदस्थ किया गया है. जबकि अवधेश सिंह को उप प्रबंध संचालक, जिला यूनियन, सूरजपुर पदस्थ किया गया है.

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से अन्नू तिवारी को मिला मातृत्व के दौरान आर्थिक संबल

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मातृत्व के दौरान आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं को गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। अम्बिकापुर निवासी मती अन्नू तिवारी भी योजना से लाभान्वित होकर अपने मातृत्व काल को सुरक्षित और बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं। अन्नू तिवारी ने बताया कि पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मार्गदर्शन में उन्होंने आवश्यक प्रपत्र भरकर योजना का लाभ लिया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके बाद दो हजार रुपये की सहायता मिली। प्रसव के बाद शिशु को निर्धारित तीन टीके लगने के पश्चात उन्हें पुनः दो हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने गर्भावस्था और प्रसव के बाद अपने खान-पान तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया। पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में मिली मदद अन्नू तिवारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने खान-पान और स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखने में मदद की। प्रसव के बाद भी इस राशि से शिशु के पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली। उन्होंने कहा कि योजना से प्राप्त सहायता उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हुई। आर्थिक सहयोग मिलने से मातृत्व के दौरान जरूरी पोषण और देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना आसान हुआ। वर्तमान में वे और उनका शिशु दोनों स्वस्थ हैं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार अन्नू तिवारी ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपयोगी पहल है। मातृत्व के महत्वपूर्ण दौर में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार को अतिरिक्त संबल मिलता है और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य तथा बच्चे के पोषण पर बेहतर ध्यान देने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि ने उनके मातृत्व अनुभव को और सुरक्षित बनाने में सहयोग दिया। अन्नू तिवारी ने अन्य पात्र महिलाओं से भी योजना का लाभ लेने और गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने श्योपुर में बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों को सतत् रूप से सुविधाएं देने का कार्य किया जा रहा है, अब किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे वे दिन के समय में भी अपनी फसलों में पानी दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उपज मंडी परिसर श्योपुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने श्योपुर के किसानों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि उपज मंडी श्योपुर में किसानों के लिए नवीन विश्राम गृह निर्माण के लिये 60 लाख रूपये की घोषणा की। ग्वालियर एयरपोर्ट से कार्यक्रम से वर्चुअली जुडने के दौरान श्योपुर जिले के प्रभारी मंत्री एवं नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, कृषि मंत्री  एदल सिंह कंषाना, वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत और अपेक्स बैंक अध्यक्ष  महेन्द्र सिंह यादव उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्योपुर कहा कि प्रदेश में इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। किसानों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा दी जा रही है। इसके तहत खरीफ एवं रबी फसलों के लिए 6-6 माह की अवधि ऋण चुकाने के लिए निर्धारित थी, जिसे बढाकर अब एक वर्ष कर दिया गया है, अर्थात किसान द्वारा जिस दिनांक से ऋण लिया जायेगा, उसे चुकाने की अवधि उस दिनांक से एक वर्ष तक की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढाने के लिए पशुपालन को भी बढावा दिया जा रहा है। दुग्ध सहकारी समितियों का और अधिक संख्या में गठन किया जाये और दुग्ध उत्पादन को बढाया जायें। उन्होंने कहा कि श्योपुर जिले में धान और गेहूं का बम्पर उत्पादन तो होता ही है, बल्कि जिले के किसान मोटे अनाज का उत्पादन भी कर रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर 12वी कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गत दिवस मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रूपये की राशि प्रदाय की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की कि बच्चों को पढ़ायें तथा फिजूलखर्ची को रोकें, समाज में ऐसी परम्परा डाले, जिससे शादी-विवाह सहित अन्य सामाजिक आयोजनों में अधिक खर्च न हों। सामूहिक विवाह सम्मेलनों के माध्यम से विवाह संपन्न करायें। इस अवसर पर उन्होंने सभी को जन्माष्टमी की बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर किसानों से संवाद किया। इस दौरान ग्राम राडेप के किसान  मुकुट चौधरी ने बताया कि शासन की योजना में कृषि अभियांत्रिकी के माध्यम से उन्हें पराली प्रबंधन के लिये कृषि यंत्र सब्सिडी पर प्राप्त हुए हैं, पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर खरीदा था, जिस पर 1 लाख 20 हजार रूपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले में आये किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खेती-किसानी की नवीन तकनीकी और फसलों के संबंध में लाभदायक जानकारी प्रदान की गई है। बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले के दौरान पशुपालन, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्यपालन, एनआरएलएम द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान  नरेन्द्र चौधरी,  भरत जाट,  शिशुपाल मीणा,  सोनू शर्मा,  बनवारी मीणा,  भुवनेश मीणा,  पूरण प्रजापति,  गोविद पटेलिया और  मान सिंह पटेलिया को शॉल एवं प्रशस्ती पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कक्षा 12वी में उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों के लिए मेधावी विद्यार्थियों में अंकुश मेहर, भूमिका माहौर, आशा गुर्जर, अनमोल मीणा, अभय गुर्जर, पूनम जाट, वैष्णवी जाट, दीनबंधु मीणा, करण मीणा और मयंक शर्मा को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष  गुड्डी बाई, विधायक  बाबू जंडेल, नगरपालिका अध्यक्ष  रेणु सुजीत गर्ग, पूर्व विधायक  बृजराज सिंह चौहान, जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत कृषि स्थाई समिति के सभापति  गिरधारी बैरवा, सांसद प्रतिनिधि  सुजीत गर्ग, कलेक्टर सु शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक  मोती उर रहमान, जनप्रतिनिधि तथा बडी संख्या में किसानबंधु उपस्थित रहें।  

BC सर्टिफिकेट के लिए बदले नियम, पंजाब में अब माता-पिता की नौकरी और पद भी होगा अहम

चंडीगढ़. पंजाब भवन में बुधवार को सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र बनवाने में आ रही दिक्कतों का जल्द समाधान किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि अब प्रमाणपत्र केवल परिवार की आय के आधार पर नहीं बनेगा। प्रमाणपत्र जारी करते समय माता-पिता की सरकारी नौकरी, पद, सामाजिक स्थिति, पिछले तीन वर्षों की आय और परिवार की संपत्ति सहित विभिन्न पहलुओं को देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवा केंद्रों और पटवारियों को भी पात्रता संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। जल्द ही सभी सेवा केंद्रों के बाहर सूचना पट लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि किन परिस्थितियों में पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र बनाया जा सकता है। अधिक वार्षिक आय वाले परिवार क्रीमी लेयर श्रेणी में  मंत्री ने बताया कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों, उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों तथा निश्चित आय से अधिक वाले परिवारों के बच्चों को प्रमाणपत्र का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चों के साथ-साथ चिकित्सक, अभियंता और अन्य बड़े पेशेवर पदों पर कार्यरत माता-पिता के बच्चों की पात्रता भी निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगी। आठ लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को क्रीमी लेयर  में माना जाएगा। प्रमाणपत्र के लिए परिवार की शहरी और ग्रामीण संपत्ति की स्थिति भी देखी जाएगी। शादी के बाद भी बदल जाएगा सर्टिफिकेट उन्होंने एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी लड़की की शादी हो जाती है तो उसका पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र उसके विवाह के बाद के परिवार की स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की सामाजिक स्थिति को देखते हुए बनाया जाएगा। इसी तरह माता-पिता का प्रमाणपत्र पहले से नहीं बना होने का अर्थ यह नहीं है कि बच्चे का प्रमाणपत्र नहीं बन सकता। रिश्तेदार के प्रमाणपत्र के आधार पर भी बच्चे की पात्रता तय नहीं होगी। 391 करोड़ की राशि जारी डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद आशीर्वाद योजना के तहत करीब 76 हजार लाभार्थियों को लाभ दिया गया है और सरकार करीब 391 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति का लाभ भी दिया जा रहा है। वर्तमान में बी श्रेणी के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को 20 हजार रुपये का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग की गई है। प्रमाणपत्र बनने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल रहा है। 12 यूनिवर्सिटीज में 210 सीटों पर दाखिला पंजाबी विश्वविद्यालय में पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जल्द दो छात्रावास शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के 12 प्रमुख व्यावसायिक महाविद्यालयों में प्रमाणपत्र के आधार पर 210 सीटों पर दाखिला दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि पंजाब के करीब छह हजार विद्यालयों में भी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। नवमीं-दसवीं के विद्यार्थियों को सालाना 75 हजार रुपये और ग्यारहवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों को 1.25 लाख रुपये तक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र धारकों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और दाखिले में 12 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का देश के विकास और लोकतंत्र को सशक्त करने में अब तक योगदान रहा है अविस्मरणीय

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल सत्ता के नहीं बल्कि निरंतर सेवा और राष्ट्र निर्माण के 25 वर्ष हैं। सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह संवैधानिक यात्रा आज एक ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंची है। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक उन्होंने जन सेवा को अपना ध्येय माना और आज भी संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के विकास और लोकतंत्र को सशक्त करने में अविस्मरणीय योगदान दिया है। इस गौरवपूर्ण यात्रा को जन-जन तक पंहुचाने के लिए प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, एक माह तक सेवा-संकल्प अभियान चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता सेवा का संस्कार है। यही संस्कार आज 'सेवा-संकल्प अभियान' के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प है। प्रधानमंत्री  मोदी के 25 वर्ष के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को हम जनता के बीच ले जाएंगे। इस अभियान से जनकल्याण के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। अभियान को जन सहभागिता से जन संवाद का माध्यम बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा-संकल्प अभियान के संबंध में मंत्रालय में आयोजित बैठक में निर्देश दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मती कृष्णा गौर, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। जिलों की विकास पुस्तिकाएं जन-जन तक पहुंचाना किया जाए सुनिश्चित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जारी जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों को सेवा-संकल्प अभियान में सम्मिलित करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। सेवा-संकल्प अभियान की अवधि में आने वाले प्रत्येक शुक्रवार को सभी जिलों में जनकल्याण और जन संवाद की विशेष गतिविधियां संचालित की जाएं। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के नवाचारों को प्रमुख रूप से प्रदर्शित और प्रोत्साहित किया जाए। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में संकलित विकास पुस्तिकाएं जन-जन तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंत्री अपने-अपने विभाग और प्रभार के जिलों में इस अभियान की नियमित समीक्षा करें। हर जिले में तिथिवार कार्य योजना तय की जाए। जिन कार्यक्रमों में लाभार्थी संपर्क में है, वहां शासन द्वारा योजनावार लाभार्थी सूची संबंधित को उपलब्ध कराई जाए। जिला स्तर पर विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। मध्यप्रदेश इस अभियान में ऐसा मॉडल प्रस्तुत करे, जिसे देश में सुशासन, सेवा और जन सहभागिता के उदाहरण के रूप में देखा जाए। प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस पर महाकाल महालोक में बड़ी संख्या में होंगे दीप प्रज्ज्वलित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर को उज्जैन स्थित महाकाल महालोक में बड़ी संख्या में दीप प्रज्ज्वलित करने का कार्यक्रम आयोजित किया जाए। प्रधानमंत्री  मोदी ने प्रदेश में जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं और कार्यों का लोकार्पण या भूमि-पूजन किया है अथवा अन्य कोई महत्वपूर्ण सौगात दी है, उन सभी स्थानों पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति अहमदाबाद अथवा वडनगर में की जाए। प्रधानमंत्री  मोदी की पहल पर नर्मदा परियोजना और सरदार सरोवर बांध से जिन जिलों के सामाजिक-आर्थिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है, उन जिलों में नर्मदा परियोजना पर केन्द्रित गतिविधियां संचालित की जाएं। इसी प्रकार केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में प्रधानमंत्री  मोदी की इस पहल से जन-जन को अवगत कराया जाए। प्रदेश में विकसित प्रमुख सड़क परियोजनाओं से सुगम हुए यातायात और बढ़ी आर्थिक गतिविधियों की जानकारी का भी प्रचार-प्रसार किया जाए। सेवा-संकल्प अभियान के अंतर्गत होंगे 13 कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में सेवा-संकल्प अभियान की तैयारियों के संबंध में हुई बैठक में बताया गया कि अभियान के अंतर्गत 13 कार्यक्रम होंगे। इनमें आशीर्वाद का दीया, 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत, नमो सेवा गाथा, आंगन का उत्सव, कहानी बदलाव की, विकसित भारत संकल्प यात्रा, सेवा ज्योति यात्रा, वड़नगर से वाराणसी, सेवा मेरा योगदान, सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार, रंगोली राष्ट्र, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज और जनसेवक महाकुंभ पंचायत से पार्लियामेंट तक शामिल हैं। आशीर्वाद के दीया के अंतर्गत हर एक दीया, प्रधानमंत्री  मोदी के 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार तथा विकसित भारत 2047 के सामूहिक संकल्प का प्रतीक होगा। प्रत्येक परिवार दीप प्रज्ज्वलित करके इस संकल्प का सहभागी बनेगा। सभी स्थानों पर जिला प्रशासन द्वारा पर्याप्त संख्या में दीयों (दीपक) की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक समन्वय किया जाएगा। हितग्राही मूलक योजनाओं के लाभार्थी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत के अंतर्गत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच राष्टव्यापी ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता आयोजित होगी। स्कूल शिक्षा विभाग नोडल होगा तथा उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। इसके अंतर्गत सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा किए गए सेवा कार्यों और विकसित भारत की संकल्पना पर ड्राइंग प्रतियोगिता और भाषण प्रतियोगिता आयोजित होंगी। नमो सेवा गाथा के अंतर्गत पिछले 25 वर्षों के सेवा कार्य, प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं और देश में आए बदलावों की कहानी को सरल, भावनात्मक और संगीतमय नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। इस गतिविधि में नोडल संस्कृति विभाग होगा और सामाजिक न्याय विभाग आवश्यक सहयोग करेगा। यह कार्यक्रम समस्त स्कूलों, कॉलेजों, पंचायत, सामुदायिक केंद्र एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित होंगे। आंगन का उत्सव के अंतर्गत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर की अवधि में स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए। उत्सव में पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण और सामुदायिक सेवा को सरल कहानियों में प्रस्तुत दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, महिला कल्याण, बाल विकास एवं कुपोषण से जुड़ी समस्त नीतियों एवं योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। लाभार्थी महिलाएं योजनाओं से उनके जीवन में आए बदलाव के छोटे अनुभव साझा करेंगी। आंगन का उत्सव के अंतर्गत आंगनवाड़ी सम्मान एवं मातृ संवाद कार्यक्रम … Read more

लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल

लखनऊ सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। जहां दिन भर तरह-तरह की खबरें प्रसारित और प्रचारित होती रहती हैं। देखने और पढऩे में सामान्य सी लगने वाले कई समाचार सच से कोसों दूर होते हैं। यह खबरें केवल न्यूज पेपर कटिंग तक सीमित नहीं है घटना-दुर्घटना के वीडियो भी एआई से बनाकर व्यूज बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। खबरों से प्रभावित होने वाले जब उसकी पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि वह समाचार एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बना है।  तकनीक के हमेशा से ही दो पहलू रहे हैं। एक वह जो मानव सभ्यता के लिए लाभदायक होता है तो दूसरा आम आदमी का जीवन खतरे में डाल सकता है। इसी तकनीक का ताजा उदाहरण है एआई। आज के समय में हर कोई एआई का मास्टर बनना चाहता है। एआई आपकी तस्वीर को सुन्दर बनाने से लेकर कपड़े और लोकेशन तक बदल सकता है। इतना ही नहीं आप एआई की मदद से कोई भी वीडियो बना सकते हैं। आज इसी तकनीक का सहारा लेकर कई लोग फेक न्यूज़ और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर व्यूज बढ़ा रहे हैं। यही लोग समाचार पत्र की कटिंग सी लगने वाली खबर भी एआई से बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। कई समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों के फैक्ट जांचे बगैर ही उन्हें अखबार में जगह दे देते हैं। जो लोगों की परेशानी का सबब बन जाता ह है। फर्जी खबरों की कड़ी में एक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जुड़ी थी । जिसमें NMC द्वारा डमी फैकल्टी की लिस्ट तैयार किये जाने की जानकारी दी गयी थी। लिस्ट उन डॉक्टरों की जो तैनात तो हैं पर कॉलेज नहीं जाते। अब प्रभावित लोगों ने इसकी पड़ताल की हकीकत सामने आई कि समाचार फर्जी और एआई जनित है। लोगों का कहना है कि इससे होने वाली परेशानी से मानसिक दबाव बनाता है। कभी किसी दुर्घटना की फर्जी खबर आ जाती है तो कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है। यहां तक की एआई से लोग अफसरों के नियुक्ति और आदेश पत्र बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। और ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जो बगैर सच को जाने समझे उस पत्र को शेयर करते चले जाते हैं। आए दिन ऐसी दर्जनों पोस्ट वायरल होती हैं जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। किसी कोई भी जागरूक नागरिक इसकी पड़ताल करता है तब यह पता चला है कि समाचार पत्र या वीडियो एआई से जेनरेट किया गया है।

यूपी में आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी राहत, समय पर पूरी सैलरी के साथ सामाजिक सुरक्षा की गारंटी

यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक शुरुआत : समय पर मिलेगा पूरा वेतन, सामाजिक सुरक्षा की भी गारंटी – आउटसोर्स कर्मियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'यूपीकोस' का किया विधिवत शुभारंभ, पोर्टल और वेबसाइट लॉन्च – आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बिचौलियों का खेल खत्म, अब हर महीने की 5 तारीख तक सीधे खाते में आएगा वेतन – एजेंसियां अब मनमाने ढंग से नहीं कर सकेंगी छंटनी, नई एजेंसी आने पर भी बरकरार रहेगी पुराने कर्मियों की नौकरी – आउटसोर्स पद चार श्रेणियों में बंटे, डॉक्टरों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मियों तक का मानदेय हुआ निर्धारित – एमबीबीएस डॉक्टर, इंजीनियर को न्यूनतम 40 हजार और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को 20 हजार रुपये मानदेय मिलेगा – सभी आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा ईपीएफ और ईएसआई का पक्का कानूनी सुरक्षा कवच – ईएसआई के तहत मुफ्त इलाज, दवाएं और महिला कर्मियों को मिलेगा पूरा सवेतन मातृत्व अवकाश – दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता पर बिना किसी प्रीमियम के बैंक खाते से मिलेगा 40 लाख रुपये तक का कवर – चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के बच्चों का उच्च शिक्षा या सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में चयन होने पर 1 लाख रुपये की मदद – आउटसोर्स भर्तियों में लागू होगा संवैधानिक आरक्षण, जेम पोर्टल के जरिए पारदर्शी ढंग से चुनी जाएंगी एजेंसियां लखनऊ,   उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन में उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम यानी ‘यूपीकोस’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने निगम का आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और पोर्टल जनता को समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान आउटसोर्स कर्मियों को पारिश्रमिक के चेक भी वितरित किए गए। प्रदेश के सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों, नगर निकायों और शिक्षण संस्थानों में करीब 3.5 लाख युवा वर्षों से सेवा दे रहे हैं। काम पूरी तरह सरकारी था लेकिन उनकी आजीविका की सुरक्षा निजी एजेंसियों के भरोसे छोड़ दी गई थी। यूपीकोस का गठन इसी बड़ी खाई को पाटने का एक ऐतिहासिक प्रयास बनकर उभरा है। बिचौलियों के चंगुल में फंसी थी पुरानी व्यवस्था पुरानी व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारी हमेशा खुद को असहाय महसूस करता था। कर्मचारी काम तो सरकारी विभाग का करता था, लेकिन उसका वेतन निजी एजेंसी के माध्यम से आता था। सरकार इस पूरे लेन-देन से एकदम अलग-थलग दिखाई पड़ती थी। किसी भी समस्या के समाधान के लिए कर्मचारी को तीन दरवाजों के चक्कर काटने पड़ते थे। विभाग उसे एजेंसी के पास भेजता था और एजेंसी उसे टरका देती थी। कागज पर दर्ज वेतन और हाथ में आने वाली रकम में जमीन-आसमान का अंतर होता था। बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहीं ये एजेंसियां कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई में से भी हिस्सा काट लेती थीं। इसके अलावा कई जगह महीनों तक वेतन न मिलना एक सामान्य बात बन चुकी थी। शोषण, कटौती और भय के अंतहीन दौर का अंत पहले के दौर में आउटसोर्सिंग का दायरा मनमानी और शोषण का पर्याय बन चुका था। एजेंसियां कर्मचारियों के पारिश्रमिक से मनमाने ढंग से अवैध कटौती करती थीं। नौकरी पर रखने और अनुबंध के नवीनीकरण के नाम पर गरीब अभ्यर्थियों से धन उगाही की शिकायतें आम थीं। चयन की कोई पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था न होने से मेधावी युवा पिछड़ जाते थे। ईपीएफ और ईएसआई की सुविधाएं सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई थीं। कई कर्मचारियों के खाते तक नहीं खोले जाते थे। यदि खाते खुल भी गए तो उनमें पैसा समय पर जमा नहीं होता था। एजेंसी बदलते ही पुराना जमा पैसा फंस जाता था। नतीजतन बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों को कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पाती थी। त्रिपक्षीय व्यवस्था से पारदर्शी समाधान की व्यवस्था इस गंभीर और पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक मजबूत निगम की नींव रखी है। यूपीकोस के माध्यम से अब शोषण के सारे रास्ते बंद किए जा रहे हैं। नई नीति के तहत विभाग, यूपीकोस निगम और सेवा प्रदाता एजेंसी एक कानूनी त्रिपक्षीय समझौते से बंधेंगे। संबंधित सरकारी विभाग अपनी आवश्यकता सीधे निगम को भेजेगा। निगम तय नियमों के तहत एजेंसी के जरिए कुशल कर्मचारी उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था से कर्मचारी अब अकेला नहीं रहेगा और सरकार उसकी सुरक्षा की सीधी गारंटर बनेगी। व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एजेंसियों का चयन जेम पोर्टल के जरिए होगा। सभी कर्मचारियों की भर्ती, उपस्थिति और भुगतान का पूरा ब्योरा एक ही पोर्टल पर दर्ज रहेगा। नियम तोड़ने वाली एजेंसियों को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। हर महीने की पांच तारीख पर आ जाएगी तनख्वाह नई व्यवस्था का सबसे क्रांतिकारी और राहत देने वाला पहलू समय पर पूरा भुगतान सुनिश्चित करना है। अब हर महीने की पांच तारीख को कर्मचारी के बैंक खाते में पूरा पारिश्रमिक सीधे पहुंचेगा। काम का आकलन हर महीने की इक्कीस तारीख से लेकर अगले महीने की बीस तारीख तक किया जाएगा। व्यवस्था ऐसी बनाई गई है कि एजेंसी को पहले कर्मचारी के खाते में पूरा वेतन जमा करना होगा। जब कर्मचारी का वेतन सुरक्षित हो जाएगा, उसके बाद ही निगम एजेंसी को उसका तय कमीशन जारी करेगा। यदि किसी विभाग में समय पर बजट उपलब्ध नहीं होगा, तो भी कर्मचारी का वेतन नहीं रुकेगा। ऐसे हालात में वित्त विभाग से अग्रिम बजट लेकर कर्मचारियों को समय पर पैसा दिया जाएगा और विभाग बाद में यह राशि लौटाएगा। छंटनी की मनमानी पर लगेगी पूरी तरह से रोक आउटसोर्स कर्मचारियों के मन में हर वक्त छंटनी की तलवार लटकती रहती थी। एजेंसियां अपनी मर्जी से किसी को भी बाहर का रास्ता दिखा देती थीं। यूपीकोस ने इस डर को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। अब कोई भी एजेंसी अपनी मर्जी से किसी कर्मचारी को हटा नहीं सकेगी। अनुशासनहीनता या गंभीर शिकायत की स्थिति में भी विभाग और निगम दोनों की लिखित मंजूरी अनिवार्य होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि तीन या चार साल बाद जब पुरानी एजेंसी की जगह नई एजेंसी आएगी, तब भी कार्यरत कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा। नई एजेंसी को अनिवार्य रूप से वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को ही अपने साथ बनाए रखना होगा। एजेंसी का कार्यकाल अधिकतम … Read more

जनविश्वास पोर्टल अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में होगा प्रभावी, बोले CM मोहन यादव

जनविश्वास पोर्टल, अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में होगा प्रभावी और लाभकारी सिद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पोर्टल पर नियमित रूप से जानकारियां की जाएं अपलोड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय से की मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान पोर्टल की लांचिंग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 7 अगस्त से आरंभ मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अब तक चार सप्ताह सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। कम समय में ही अभियान का अत्यधिक सकारात्मक प्रभाव रहा है। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सभी सप्ताह में एक दिन फील्ड पर जाकर जनता की समस्याओं का तुरंत निराकरण कर रहे हैं। जनविश्वास पोर्टल, अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में प्रभावी और लाभकारी सिद्ध होगा। प्रत्येक स्तर पर अधिकारी इस पोर्टल में यूजर मैनुअल के अनुसार नियमित रूप से जानकारियां अपलोड करना सुनिश्चित करें। इसके समेकित उपयोग से मैदानी स्तर पर जनसामान्य को बहुत लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन विश्वास पोर्टल की आज मंत्रालय में लाँच कर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन विश्वास अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यो की संपूर्ण जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के लिए मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान पोर्टल बनाया गया है। पोर्टल पर अभियान के अंतर्गत किए गए भ्रमण, निरीक्षण, जन संवाद, उद्यम संवाद, जिला स्तरीय समीक्षा बैठक, नीतिगत विषय, अभियान के दौरान दिए गए महत्वपूर्ण निर्देशों, जिले के प्रमुख नवाचारों और जिले की ओर से भेजे जाने वाले सुझावों को दर्ज किया जाएगा। प्रति सप्ताह दर्ज की जाने वाली जानकारी की उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी और राज्य स्तरीय मामलों के निराकरण के लिए आवश्यक समन्वय भी होगा।