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Oracle कर्मचारियों के लिए बुरी खबर! हजारों नौकरियों पर मंडराया खतरा, भारत में भी पड़ सकता है असर

 नई दिल्ली Oracle एक बार फिर से एक बड़ी छंटनी करने की तैयारी कर रहा है, जिसका असर भारत समेत दुनियाभर के कर्मचारियों पर देखने को मिलेगा. हालांकि अभी तक कंपनी ने इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में बताया है कि कंपनी अपनी लागत में कमी लाना चाहती है।   Oracle में इससे पहले जो छंटनी की गई थी, उसकी काफी ज्यादा चर्चा हुई थी. इतना ही नहीं कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर अपना एक्सपीरियंस भी शेयर किया था।  लेटेस्ट जानकारी के मुताबिक, Oracle ने अपनी टीम्स को बजट कम करने की बात कही है, जिससे लोगों में हलचल मच गई है. इससे पहले कई लोगों की टीम और रोल आदि में बदलाव किया था, लेकिन इस बार कुछ बड़ा हो सकता है।  करीब 10 हजार लोगों की होगी छंटनी  Oracle कितने लोगों की छंटनी करेगा, उसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की गई है. लेकिन कई रिपोर्ट्स में दावा किया है कि दुनियाभर से कंपनी करीब 7 हजार से 10 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है. Oracle की छंटनी का असर कितने भारतीयों पर पड़ेगा, उसको लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है।  मई में एक बार हो चुकी है छंटनी  31 मई को कंपनी ने अपने टोटल कर्मचारियों की संख्या में से करीब 13 परसेंट कर्माचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था. कंपनी के टोटल कर्मचारियों की संख्या करीब 1,41,000 है और 31 मई को करीब 21 हजार लोगों की छंटनी की गई थी।  ओरैकल कंपनी क्या करती है? ओरैकल कॉर्पोरेशन, असल में अमेरिका बेस्ड इंटरनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी है, जिसका मुख्य काम दूसरी कंपनियों और बड़े-बड़े संस्थानों को क्लाउंड, डेटाबेस और बिजनेस सॉफ्टवेयर प्रोवाइड कराना है. भारत में ओरैकल कंपनी काम करती है और कई हजार की संख्या में यहां भी कर्मचारी है। 

E20 vs E100: क्या है Flex Fuel टेक्नोलॉजी और कौन-सा ईंधन है अलग? समझें पूरी बात

मुंबई  भारत में EV कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं लेकिन दूसरी तरफ पेट्रोल इंजन के लिए भी नए ऑप्शन तलाशे जा रहे हैं. कई कंपनियां अब भारत में E100 Flex Fuel वाहन लाने की तैयारी कर रही हैं. Maruti Suzuki Wagon R से लेकर Hyundai Creta तक Flex Fuel वर्जन में आ चुकी हैं।  अभी देश में पेट्रोल में Ethanol ब्लेंडिंग तेजी से बढ़ाई जा रही है. जहां एक तरफ लोग पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार और वाहन कंपनियां अब ऐसे इंजन तैयार करने की दिशा में बढ़ रही हैं, जो ज्यादा मात्रा में एथेनॉल वाले फ्यूल पर भी चल सकें. लेकिन आखिर Flex Fuel क्या है और E100 वाहन सामान्य पेट्रोल वाहन से कितने अलग होंगे? क्या होता है Flex Fuel? आसान भाषा में समझें तो Flex Fuel व्हीकल ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिक्स्चर वाले फ्यूल पर चल सकते हैं. ऐसे वाहन नॉर्मल पेट्रोल, E20, E85 और कुछ मामलों में E100 तक इस्तेमाल कर सकते हैं. फ्यूल में मौजूद एथेनॉल की मात्रा को E नंबर से बताया जाता है. उदाहरण के लिए E20 में 20 प्रतिशत Ethanol और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. E85 में 85 प्रतिशत Ethanol होता है. इसी तरह E100 लगभग पूरी तरह एथेनॉल फ्यूल होता है।  हालांकि, E20 के लिए तैयार वाहन और E100 Flex Fuel वाहन एक जैसे नहीं होते हैं. E20 व्हीकल को एक निश्चित मात्रा में Ethanol वाले पेट्रोल के लिए तैयार किया जाता है, जबकि Flex Fuel वाहन को फ्यूल में Ethanol की अलग-अलग मात्रा के साथ काम करने के लिए डिजाइन करना पड़ता है. इसके लिए फ्यूल लाइन, सील्स, इंजेक्टर, फ्यूल पंप, सेंसर्स, इंजन मैपिंग और कैलिब्रेशन जैसे कई हिस्सों में बदलाव करने पड़ते हैं. वजह ये है कि Ethanol का बिहेव पेट्रोल से अलग होता है. ये अलग तरीके से जलता है और इसकी एनर्जी एफिशियंसी भी पेट्रोल से कम होती है।  E100 में सबसे बड़ा फायदा Ethanol का एक बड़ा फायदा इसका हाई ऑक्टेन रेटिंग है. हाई ऑक्टेन फ्यूल इंजन में नॉकिंग को बेहतर तरीके से रोकता है. इससे इंजीनियर ज्यादा प्रभावी इंग्निशन टाइमिंग और कुछ मामलों में ज्यादा कंप्रेशन रेश्यो का इस्तेमाल कर सकते हैं. यानी अगर इंजन को Ethanol के हिसाब से अच्छी तरह तैयार किया जाए, तो परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है. टर्बो चार्ज इंजन और परफॉर्मेंस कार में भी लंबे समय से Ethanol Blends के फायदे देखे जाते रहे हैं. लेकिन यहां एक बड़ी कमी भी है।  E100 वाहन के माइलेज पर हो सकता है असर Ethanol की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होती है. आसान भाषा में कहें तो एक लीटर Ethanol में एक लीटर पेट्रोल की तुलना में कम एनर्जी होती है. इसका मतलब है कि E100 वाहन को समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल की जरूरत पड़ सकती है. इस वजह से केवल यह देखना काफी नहीं होगा कि Ethanol पेट्रोल से सस्ता है या नहीं. असली सवाल ये होगा कि प्रति किलोमीटर वाहन चलाने में कितना खर्च आता है।  अगर Ethanol की कीमत पेट्रोल से काफी कम रखी जाती है, तो ज्यादा फ्यूल कंजप्शन के बावजूद वाहन चलाना सस्ता पड़ सकता है. लेकिन अगर दोनों फ्यूल की कीमत में ज्यादा अंतर नहीं हुआ तो कम माइलेज के कारण ग्राहक को बार-बार तेल भरवाना पड़ सकता है।  E100 गाड़ी चलाने में कैसा लगेगा? रोजमर्रा की ड्राइविंग में E100 Flex Fuel वाहन सामान्य पेट्रोल वाहन से बहुत अलग महसूस नहीं होगा. मॉडर्न Flex Fuel वाहन में सेंसर्स और ECU मैपिंग फ्यूल में मौजूद Ethanol की मात्रा को पहचानकर फ्यूल सप्लाई और Ignition को अपने आप बदल सकते हैं. यानी ड्राइवर को हर बार फ्यूल भरवाते समय कोई अलग मोड चुनने या इंजन की सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं होगी. एक्सलेरेशन सामान्य पेट्रोल वाहन जैसा हो सकता है.  लेकिन High-Ethanol फ्यूल पर माइलेज कम होना लगभग तय माना जा रहा है. इसलिए इसका असर सबसे ज्यादा फ्यूल कंजम्प्शन और हर महीने के खर्च में दिखाई देगा।  ठंड में स्टार्ट करना हो सकती है चुनौती Ethanol पेट्रोल की तरह आसानी से वेपोरॉइज नहीं होता है. ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल में ठंड के मौसम में इंजन स्टार्ट करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. भारत ठंडा देश नहीं है लेकिन उत्तर भारत के सर्द इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में यह वाहन की कैलिब्रेशन के लिए चुनौती बन सकता है. कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि अलग-अलग मौसम में वाहन आसानी से स्टार्ट हो। 

PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! EPFO 3.0 में ATM-UPI से जोड़ने का प्लान

 नई दिल्ली प्रोविडेंट फंड (PF) से पैसे निकालने वाले करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड कर EPFO 3.0 लाने की तैयारी में है. इसके तहत एडवांस क्लेम की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने पर फोकस किया जा रहा है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीमारी, शादी या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम 3 से 4 दिन में सेटल किए जा सकते हैं. हालांकि, इस प्रस्तावित सुविधा को लेकर EPFO की ओर से अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. इसलिए फिलहाल इसे संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।  क्या है EPFO 3.0? EPFO 3.0 को मौजूदा आईटी सिस्टम का ज्यादा आधुनिक और सेंट्रलाइज्ड वर्जन माना जा रहा है. इसका मकसद PF से जुड़े कामकाज को ज्यादा तेज, आसान और सुविधाजनक बनाना है. मौजूदा व्यवस्था में EPFO का डेटा अलग-अलग रीजनल ऑफिस के सर्वर से जुड़ा हुआ है. इसकी वजह से कई बार पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें और सर्वर डाउन जैसी समस्याएं सामने आती हैं. नए सिस्टम में डेटा और प्रोसेसिंग को ज्यादा सेंट्रलाइज्ड और आधुनिक बनाने की योजना है. सीधे शब्दों में कहें तो EPFO चाहता है कि PF खाते से जुड़े काम बैंकिंग सेवाओं की तरह ज्यादा आसान और डिजिटल तरीके से किए जा सकें।  ऑटो सेटल होंगे ₹5 लाख तक के क्लेम? EPFO 3.0 में ऑटो-सेटलमेंट को और व्यापक बनाने की योजना बताई जा रही है. इसके तहत एडवांस क्लेम को सिस्टम खुद प्रोसेस कर सकता है. बीमारी, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों से जुड़े क्लेम में अगर सभी जरूरी जानकारी और शर्तें पूरी होती हैं, तो कंप्यूटराइज्ड सिस्टम डेटा का वेरिफिकेशन कर सकता है. ऐसे मामलों में हर क्लेम को मैनुअली अप्रूव करने के लिए अधिकारी के हस्तक्षेप की जरूरत कम हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम को करीब 3 से 4 दिन में सेटल करने का लक्ष्य हो सकता है. क्लेम मंजूर होने के बाद पैसे सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे।  क्लाउड-बेस्ड होगा नया EPFO सिस्टम EPFO 3.0 को क्लाउड-बेस्ड सिस्टम में अपग्रेड करने की तैयारी है. इसका मकसद मौजूदा तकनीकी समस्याओं को कम करना और पोर्टल की क्षमता व स्थिरता बढ़ाना है. अभी कई बार कर्मचारी PF से जुड़ा काम करने के लिए पोर्टल पर लॉगिन करते हैं, लेकिन सर्वर या वेबसाइट की तकनीकी समस्या के कारण उन्हें परेशानी होती है. नए सिस्टम से ऐसी दिक्कतों को कम करने और ऑनलाइन सेवाओं को ज्यादा सुचारू बनाने की उम्मीद है।  ATM और UPI से PF विड्रॉल की सुविधा? EPFO के डिजिटल बदलाव की चर्चा सिर्फ ऑनलाइन क्लेम तक सीमित नहीं है. भविष्य में PF खाते को आधुनिक बैंकिंग सिस्टम और UPI जैसे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी काम होने की बात सामने आई है. इसके तहत छोटे एडवांस या इमरजेंसी जरूरतों के लिए कर्मचारियों को लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है. मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में तय सीमा तक ATM या UPI के जरिए PF से पैसे निकालने की सुविधा देने के विकल्प पर भी विचार किए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, यह सुविधा अभी लागू नहीं हुई है और इसके लिए आधिकारिक नियम व प्रक्रिया का इंतजार करना होगा।  EPFO 3.0 के लॉन्च में क्यों हो रही देरी? EPFO 3.0 की कुछ सुविधाओं को पहले जुलाई में लॉन्च किए जाने की चर्चा थी. हालांकि, वेबसाइट और सिस्टम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण लॉन्च टल गया. इसके बाद अगस्त में लॉन्च होने की संभावना जताई गई, लेकिन यह भी नहीं हो सका. अब सितंबर में इसके कुछ फीचर्स शुरू किए जाने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, जब तक EPFO की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक लॉन्च की तारीख और सुविधाओं को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती। 

दुबई शिफ्ट होने के बाद भी नहीं मिला पीछा! मंदाना करीमी के दोस्तों को भेजे जा रहे फर्जी ईमेल

मुंबई  ‘बिग बॉस’ फेम मंदाना करीमी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी एक परेशान करने वाली बात है. मंदाना ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि पिछले करीब 6 साल से साइबर बुलिंग और स्टॉकिंग का सामना कर रही हैं और भारत छोड़कर दुबई शिफ्ट होने के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है।  मंदाना ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर कई वीडियो शेयर किए, जिनमें उन्होंने बताया कि उनके अलग होने के बाद से ही उन्हें ऑनलाइन परेशान किया जा रहा है. उनका कहना है कि उनकी जिंदगी पर नजर रखने वाला कोई अनजान शख्स उनके जानने वाले लोगों, प्रोड्यूसर्स और को-स्टार्स तक को ईमेल भेज रहा है. इतना ही नहीं, उनके मुताबिक इन ईमेल्स में कभी उनके बारे में बदनाम करने वाली बातें लिखी होती हैं तो कभी पैसे की मांग की जाती है।  ‘6 साल से साइबर बुलिंग और स्टॉकर का सामना कर रही हूं’ मंदाना ने वीडियो में अपनी परेशानी बताते हुए कहा- मैं छुट्टी पर हूं और फिर से वही हुआ है. पिछले 6 साल से, जब से मैं अलग हुई हूं, तब से मैं साइबर बुलिंग और एक स्टॉकर का सामना कर रही हूं. एक अकाउंट ने मेरे प्रोड्यूसर और को-स्टार्स को मैसेज किया, ताकि उन्हें मेरे बारे में बताया जा सके और उनसे पैसे भी मांगे गए. यह अब भी हो रहा है।  मंदाना ने आगे कहा- मुझे समझ नहीं आता कि आखिर कौन मुझसे इतनी नफरत करता है और क्यों चाहता है कि मेरे पास कोई काम, पैसा या दोस्त न रहें. मैंने चार साल पहले इस मामले की तह तक जाने की कोशिश की थी. मैंने यह पता लगाने के लिए किसी व्यक्ति को काम पर रखा था कि आखिर यह कौन है. मुझे बताया गया कि किसी ने एक प्रोफेशनल हैकर को पैसे दिए हैं, ताकि वह मेरे पोस्ट पर लगातार नजर रख सके।  एक्ट्रेस ने यह भी दावा किया कि जो भी शख्स मशहूर होता है, उसे ‘मीनाक्षी’ के नाम से ईमेल भेजा जाता है. मंदाना ने कहा- मैं इस समय भारत छोड़ चुकी हूं, लेकिन मेरे दोस्तों को अब भी ईमेल मिल रहे हैं. सच कहूं तो जो लोग मुझे जानते हैं, उन्होंने मुझे वे ईमेल भेजे हैं. वह एक फर्जी अकाउंट है. भारत की पुलिस भी इस मामले में कुछ नहीं कर सकी. कोई बस मेरा नाम और मेरी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।  ईमेल के स्क्रीनशॉट शेयर कर बोलीं- अब चुप नहीं बैठूंगी मंदाना ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में उन ईमेल्स के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं. उन्होंने कैप्शन में लिखा कि अब बहुत हो चुका है. उन्होंने कहा- काफी हो चुका है. कई सालों से मैं एक अनजान व्यक्ति की लगातार साइबर बुलिंग, उत्पीड़न और स्टॉकिंग का सामना कर रही हूं. वह मेरी जिंदगी पर करीब से नजर रखता है और उन लोगों को दुर्भावनापूर्ण ईमेल भेजता है, जिनके साथ मैं अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें साझा करती हूं या जिनके संपर्क में रहती हूं. भारत से दुबई जाने के बाद भी यह जारी है।  मंदाना ने आगे बताया कि वह पहले भी कई साइबर क्राइम शिकायतें दर्ज करा चुकी हैं और अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बारे में बोलने और सबूत शेयर करने का फैसला किया है।  उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा- अगर आपको मेरे बारे में कोई ईमेल मिलता है तो उससे संपर्क न करें, पैसे न भेजें और उसमें लिखी बातों पर भरोसा न करें. उसे सुरक्षित रखें, स्क्रीनशॉट लें और मुझे भेजें. यह उत्पीड़न है और अब मैं चुप नहीं रहूंगी।  मंदाना के शेयर किए स्क्रीनशॉट में स्टॉकर की ओर से किए मेल में कई भद्दी बातें लिखी हैं. उसने एक्ट्रेस वेश्यावृत्ति का आरोप लगाया है. 12 करोड़ की डिमांड करते हुए स्टॉकर ने लिखा कि- अब कुल जुर्माना 12 करोड़ रुपये है. तुम इंतजार करते रहो और वेश्यावृत्ति से कमाए पैसे जमा करती रहो. जितना ज्यादा तुम इस तरह सस्ता पैसा कमाने की कोशिश करोगी, उतना ही जुर्माना बढ़ता जाएगा।  'यह मत समझना कि मैं मजाक कर रहा हूं. जब तक तुम पैसे नहीं दोगी, मैं स्पॉन्सरशिप फॉर्म पर साइन नहीं करूंगा. अगर तुम्हें बच्चा चाहिए, तो मेरी बात माननी होगी. गंदगी से पैसे कमाना बंद करो. नहीं तो UAE का पासपोर्ट होने की वजह से सिर्फ प्रॉपर्टी खरीदकर बच्चा पैदा करने की कोशिश करना तुम्हारी सबसे बड़ी गलती होगी. तुम्हारा पासपोर्ट तुम्हें EU में रहने की इजाजत देता है, 90 दिनों के लिए वीजा-फ्री, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुम्हें किसी भी तरह की प्रेग्नेंसी की इजाजत है।  मई में भारत छोड़ दुबई शिफ्ट हुई थीं मंदाना मंदाना करीमी ने मई में भारत छोड़कर दुबई को अपना नया ठिकाना बनाया था. उस वक्त उन्होंने इसकी वजह सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को बताया था. हालांकि, एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ किया था कि उनका फैसला किसी एक देश या किसी एक घटना को लेकर नहीं था, बल्कि जिंदगी के नए दौर की शुरुआत से जुड़ा था।  भारत छोड़ने को लेकर मंदाना ने अपनी भावनाएं भी खुलकर जाहिर की थीं. उन्होंने कहा था- भारत छोड़ना मेरे लिए भावुक कर देने वाला है. भारत ने मेरी जिंदगी के सबसे बड़े अध्यायों में से एक को आकार दिया है. मैं वहां सिर्फ एक एक्ट्रेस के तौर पर नहीं, बल्कि एक महिला, एक कलाकार और अपने घर से दूर अपनी आवाज तलाशने वाली इंसान के तौर पर बड़ी हुई हूं।  मॉडलिंग से शुरू हुआ था सफर, ‘बिग बॉस 9’ से घर-घर पहुंचीं मंदाना करीमी ईरान की एक्ट्रेस और मॉडल हैं. उन्होंने 2010 में मॉडलिंग प्रोजेक्ट्स के जरिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखा था. साल 2015 में उन्होंने रणबीर कपूर की फिल्म ‘रॉय’ में कैमियो किया. इसी साल वह ‘बिग बॉस 9’ में भी नजर आईं और शो की सेकेंड रनर-अप रहीं. इसके बाद उन्होंने ‘भाग जॉनी’, ‘मैं और चार्ल्स’ और ‘क्या कूल हैं हम 3’ जैसी फिल्मों में काम किया. उनकी आखिरी बॉलीवुड फिल्म ‘थार’ थी, जो 2022 में रिलीज हुई थी। 

Apple Event 2026: 9 सितंबर को होगा बड़ा धमाका, iPhone 18 Pro समेत Foldable Ultra पर नजर

 नई दिल्ली Apple का इस महीने एक बड़ा इवेंट आयोजित होने जा रहा है, जिसका नाम सर्प्राइस एंड साइन है. कंपनी ऑफिशियली कंफर्म कर चुकी है कि यह इवेंट 9 सितंबर होगा और भारतीय समयनुसार इसकी टाइमिंग रात 10:30 बजे की होगी. इस इवेंट में कंपनी अपना पावरफुल स्मार्टफोन iPhone 18 Pro सीरीज को लॉन्च करेगी।  iPhone 18 Pro सीरीज के तहत दो हैंडसेट को लॉन्च किया जा सकता है, जिनके नाम 18 Pro और 18 Pro Max होगा. दोनों ही हैंडसेट में पावरफुल चिपसेट का यूज किया जाएगा. अपग्रेड कैमरा और बेहतर बैटरी बैकअप मिलेगा. इसको लेकर अब तक कई लीक्स सामने आ चुके हैं।  ऐपल इस बार अपना फोल्ड हैंडसेट भी लॉन्च करेगी, जिसका नाम (आईफोन फोल्ड अल्ट्रा) iPhone Fold Ultra होगा. ऐपल पहली बार अपना फोल्ड हैंडसेट लेकर आ रही है, जबकि बाकी ब्रांड पहली ही अपना फोल्ड हैंडसेट लॉन्च कर चुकी है, जिसमें सैमसंग, वनप्लस, शाओमी, हुवावे आदि के नाम शामिल हैं।  iPhone 18 Pro का डिजाइन  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro का डिजाइन iPhone 17 Pro की तुलना में बहुत ज्यादा अलग नहीं है. बैक पैनल पर दिए जाने वाले कैमरा एलाइनमेंट में भी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. हालांकि बैक पैनल के कैमरा सेंसर में बदलाव किया जाएगा।  मिलेगा बड़ा डिस्प्ले का एक्सपीरियंस  iPhone 18 Pro के डिस्प्ले में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देगा, लेकिन डाइनमिक आइलैंड के साइज को छोटा जरूर किया जाएगा. ऐसे में यूजर्स को बड़ी स्क्रीन का फायदा मिलेगा।  A20 Pro चिपसेट का यूज किया जाएगा iPhone 18 Pro और 18 Pro Max के अंदर ऐपल का A20 Pro चिपसेट का यूज किया जाएगा. रिपोर्ट्स में बताया है कि यह 2nm प्रोसेस पर मैन्युफैक्चर्ड किया गया है।  आईफोन फोल्ड अल्ट्रा को बुक स्टाइल फोल्डेबल डिजाइन में पेश किया जाएगा, जैसा Samsung Galaxy Z Fold 8 को लॉन्च किया जा चुका है. अफवाहों के मुताबिक, आउटर डिस्प्ले 5.3-5.5 इंच साइज आएगा. वहीं अनफोल्ड होने के बाद  करीब 7.8 इंच का डिस्प्ले मिलेगा. दोनों में 120Hz का प्रोमोशन सपोर्ट मिलेगा। 

हेरिटेज ट्रेन के रूप में भी नहीं लौटेगी नैरोगेज, ग्वालियर से बानमोर तक ट्रैक हटेगा

 ग्वालियर  एक शताब्दी तक ग्वालियर की पहचान रही पुरानी नैरोगेज अब हेरिटेज ट्रेन के रूप में भी पटरियों पर लौटती नजर नहीं आएगी। यह कोरोनाकाल में 6 साल पहले बंद हो गई थी, लेकिन अब 2 फीट चौड़ी पटरी वाले इस ट्रेन को हेरिटेज के रूप में सहेजने की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। रेलवे ने हेरिटेज ट्रेन का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इसके अलावा ग्वालियर से बानमोर तक करीब 20 किमी नैरोगेज ट्रैक को पूरी तरह उखाड़ने की तैयारी है। इसके लिए जल्द टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। ग्वालियर परिवहन का अहम हिस्सा रही नैरोगेज सिंधिया रियासतकाल में शुरू हुई नैरोगेज ग्वालियर के परिवहन इतिहास का अहम हिस्सा रही है। ट्रेन बंद होने के बाद उम्मीद थी कि कम से कम इसका कुछ हिस्सा हेरिटेज ट्रेन के रूप में बच जाएगा। लंबे समय से इसे हेरिटेज के रूप में देखने की संभावना जताई जा रही थी। घोसीपुरा से बानमोर गांव के बीच दो कोच की हेरिटेज ट्रेन चलाने की योजना भी बनी। लेकिन, पिछले साल रेलवे बोर्ड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (हेरिटेज) आशिमा मेहरोत्रा और डिप्टी डायरेक्टर राजेश कुमार ने मौके पर इसका सर्वे किया था। तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की पड़ताल के बाद रेलवे ने इसे हेरिटेज ट्रेन के रूप में चलाने से इनकार कर दिया। अब पूरी तरह बदलेगा जमीन का स्वरूप बता दें कि, ट्रैक हटने के बाद जमीन के पुनर्विकास की जिम्मेदारी रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) को दी गई है। टीम ग्वालियर से बानमोर तक जमीन का सर्वे कर रही है। कुछ हिस्सों को ग्रीन बेल्ट बनाने के लिए वन विभाग से चर्चा चल रही है। यहां पौधारोपण किया जाएगा। ट्रैक पूरी तरह हटने के बाद जमीन का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा।  

RSS की बड़ी बैठक इंदौर में, मालवा प्रांत के होंगे दो हिस्से; इंदौर और उज्जैन संभाग में होगा विभाजन

 इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दूसरी सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल 30 अक्टूबर से चार नवंबर तक इंदौर में होगी। बैठक का संभावित स्थान डेली कॉलेज है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी सहित केंद्रीय कार्यकारिणी, क्षेत्र और सभी प्रांतों के प्रचारक शामिल होंगे। बैठक में 46 प्रांतों के 450 कार्यकर्ता आएंगे। छह दिन की बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष में हुए कार्यों की समीक्षा होगी। साथ ही वर्ष 2027 से प्रांत संरचना समाप्त कर संभाग संरचना लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसी महत्वपूर्ण बैठक में इस विषय पर अंतिम विचार किया जाना है। बैठक से पहले शहर में पथ संचलन भी निकाला जाएगा। राष्ट्रीय पदाधिकारी तीन दिन तक इंदौर में रहेंगे। नई व्यवस्था में मालवा प्रांत इंदौर-उज्जैन में बंटेगा प्रांतीय संरचना में बदलाव के बाद मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभाग में विभाजित किया जाएगा। मालवा प्रांत की रचना 2009 में हुई थी। इसमें इंदौर और उज्जैन जिले आते थे। अब संभागों की संरचना प्रांत की तरह ही होगी और हर संभाग की जिम्मेदारी अलग प्रचारक को दी जाएगी। वर्तमान प्रांत में 3292 स्थानों पर 5029 शाखाएं और 527 विद्यार्थी-महाविद्यालयीन शाखाएं लग रही हैं। संघ की साल में दो बड़ी बैठकें होती हैं। मार्च में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और अक्टूबर-नवंबर में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल।

ट्रेन की देरी बनी करोड़ों का आइडिया! एक ऐप बनाया और Google ने ₹280 करोड़ में खरीद लिया

 नई दिल्ली कई बार रोजमर्रा की छोटी-सी परेशानी ही किसी बड़े आइडिया की शुरुआत बन जाती है. Where is My Train ऐप की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. ट्रेन के लेट होने और उसकी सही लोकेशन पता नहीं चलने की परेशानी से एक ऐसा ऐप बनाने का आइडिया आया, जो आज लाखों यात्रियों के काम आता है. आइए जानते हैं इसके बारे में।   जानिए कैसे बनाया गया ऐप अहमद निजाम और उनकी टीम ने ट्रेन से सफर करने वाले लोगों की इसी परेशानी को समझा. रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अक्सर यह पता नहीं होता था कि ट्रेन कहां पहुंची है और स्टेशन पर आने में उसे कितना समय लगेगा. ट्रेन लेट होने पर यह परेशानी और भी बढ़ जाती थी।  इसी समस्या को हल करने के लिए टीम ने व्हेयर इज़ माई ट्रेन ऐप तैयार किया. इसे साल 2015 में लॉन्च किया गया था. ऐप का मकसद काफी आसान था. यात्रियों को उनकी ट्रेन की सही लोकेशन और दूसरी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके।  ऐप का सबसे खास फीचर इस ऐप की सबसे खास बात इसका ऑफलाइन ट्रेन ट्रैकिंग फीचर था. यानी कई मामलों में यूजर बिना इंटरनेट और GPS के भी ट्रेन की लोकेशन पता कर सकता था. इसके लिए ऐप मोबाइल टावर से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करता था. भारत में ऐसे कई इलाके हैं, जहां इंटरनेट कनेक्शन कमजोर रहता है. ऐसे में यह फीचर यात्रियों के लिए काफी काम का साबित हुआ।  ऐप में सिर्फ ट्रेन की लोकेशन ही नहीं, बल्कि कई दूसरी सर्विस भी दी गईं. इसमें लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन का टाइमटेबल, PNR स्टेटस, प्लेटफॉर्म की जानकारी और कोच की स्थिति जैसी सुविधाएं शामिल थीं. यही वजह रही कि धीरे-धीरे यह ऐप यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया।  जानिए गूगल ने कैसे खरीदा ऐप की बढ़ती पॉपुलैरिटी ने Google का ध्यान अपनी तरफ खींचा. साल 2018 में गूगल ने व्हेयर इज़ माई ट्रेन बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs को खरीद लिया. इस डील की ऑफिशियल कीमत गूगल की तरफ से सार्वजनिक नहीं की गई थी. हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस डील की कीमत करीब 280 करोड़ रुपये बताई गई।  इस पूरी कहानी की खास बात यह है कि शुरुआत किसी बड़ी कंपनी या बड़े निवेश से नहीं, बल्कि एक आम समस्या को हल करने के आइडिया से हुई थी. ट्रेन के लेट होने जैसी छोटी परेशानी से शुरू हुआ यह आइडिया आगे चलकर करोड़ों रुपये की डील तक पहुंच गया।  व्हेयर इज़ माई ट्रेन की कहानी यह बताती है कि अगर किसी रोजमर्रा की समस्या का आसान और काम का समाधान तैयार किया जाए, तो वह बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी आसान कर सकता है. यही वजह है कि यह ऐप ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ। 

अगस्त बना 125 साल का सबसे गर्म महीना, सितंबर में भी कम बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली मॉनसून की सुस्ती के साथ अल नीनो हावी होता जा रहा है. इसी का असर अगस्त में देखा गया, जब कम बारिश के कारण देश में अगस्त महीने की गर्मी 125 सालों में सबसे ज्यादा रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक अगस्त महीने के दौरान औसत अधिकतम तापमान 1901 के बाद चौथा सबसे अधिक है, जो पिछले 125 साल में अगस्त का चौथा सबसे अधिक टेंपरेचर है. खासकर रात का तापमान ज्यादा परेशान कर रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आमतौर पर अगस्त मानसून का सबसे भीगा और ठंडा महीना होता है, लेकिन इस बार औसत तापमान 28.01 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 0.67 डिग्री अधिक है।  रात का तापमान बना सबसे बड़ा कारण अगस्त 2026 के इतना गर्म होने का कारण दोपहर की धूप नहीं बल्कि सूरज ढलने के बाद का मौसम रहा है. अगस्त में रात में औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री दर्ज किया गया. यह 1901 के बाद अगस्त का सबसे अधिक रात का तापमान है.जबकि दिन का औसत अधिकतम तापमान 31.66 डिग्री रहा, जो रिकॉर्ड में चौथा सबसे अधिक रहा.पूर्व में बंगाल, झारखंड और पूर्वोत्तर इलाकों में रातों का तापमान रिकॉर्ड हाईलेवल पर पहुंच गया है।  सितंबर में भी मॉनसून सुस्त भारत मौसम विभाग का कहना है कि जून, जुलाई और अगस्त का ट्रेंड सितंबर में भी बना रहेगा.पूरे देश में औसत से कम बारिश का पूर्वानुमान है.सितंबर 2026 के दौरान पूरे देश में मासिक वर्षा सामान्य से कम (LPA 91%) के करीब रहने की संभावना है.इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान देशभर में मॉनसून कमजोर रहने से 4 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच औसत से 14% कम बारिश हुई है।  मॉनसून की बारिश में भी असमानता अगस्त महीने में देश भर में मॉनसूनी बारिश की 16 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई. बारिश की कमी, कहीं कम और कहीं ज्यादा बारिश के कारण और असमान वितरण भी देखा गया. उत्तर प्रदेश में भी नोएडा, गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुकाबले अवध (लखनऊ-कानपुर आदि) और पूर्वांचल में अच्छी बारिश हुई. दिल्ली में अगस्त में ठीकठाक बारिश हुआ. हरियाणा में गुरुग्राम के आसपास इलाकों को छोड़कर कम बारिश हुई. राजस्थान में कम बारिश चिंता का सबब रही है।  प्रशांत महासागर में अल नीनो का असर प्रशांत महासागर अल नीनो को लेकर हालात लगातार मजबूत रहे हैं. प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान 3 डिग्री तक बढ़ने का खतरा है. ग्लोबल वार्मिंग और मजबूत अल नीनो के मॉनसून के दौरान तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।  सितंबर में बारिश का अनुमान गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी तटीय ओडिशा और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र की वजह से भारत मौसम विभाग ने कई राज्यों में अगले कुछ दिन के दौरान भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. छत्तीसगढ़ में सितंबर को ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ-साथ कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी बारिश होने की संभावना है।  2 और 3 सितंबर, 2026 को कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है.पश्चिम बंगाल में भी ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है.ओडिशा, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार में भी अगले 2 दिन अच्छी बारिश के आसार हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 से 6 सितंबर के दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। 

वंदे भारत से भी तेज रफ्तार! दिल्ली-पटना बुलेट ट्रेन से बदलेगा बिहार-UP का सफर

पटना / नई दिल्ली देश के कई हिस्‍सों में हाई-स्‍पीड यानी बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी अपने चरम पर है. साल 2027 में इस रूट के कुछ हिस्‍सों पर हाई-स्‍पीड ट्रेन ऑपरेट करने का प्रयास है. भारत सरकार ने बिहार और उत्‍तर प्रदेश में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. अब दिवाली-छठ से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसपर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि दिल्‍ली से पटना का रेल रूट सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इस सेक्‍शन में बुलेट ट्रेन चलने से हजारों-लाखों लोगों को काफी राहत मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि हाई-स्‍पीड ट्रेन से दिल्‍ली से पटना महज 4.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. फिलहाल यह सफर 12 घंटों का है. इस तरह जो काम राजधानी, वंदे भारत और दुरंतो जैसी प्रीमियम सुपरफास्‍ट ट्रेनें नहीं कर सकीं वो बुलेट ट्रेन से संभव हो सकेगा. साथ ही बिहार-यूपी वालों का सपना भी पूरा होगा।  बिहार-यूपी वालों का सपना साकार करने की दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है. आने वाले कुछ सालों में दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन के दौड़ने का सपना साकार होने वाला है. देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है. इस हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे और राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा महज साढ़े चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. दिल्‍ली से पटना की दूरी 1000 किलोमीटर है. इस तरह बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।  बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कौन से बड़े शहर रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इससे दिल्ली और इन शहरों के बीच मौजूदा रेल यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है. वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के तहत दिल्ली से आगरा की करीब 200 किलोमीटर दूरी केवल 58 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं 455 किलोमीटर दूर कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटे 50 मिनट लगेंगे. दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी 2 घंटे 12 मिनट में पूरी होने का अनुमान है. इसी तरह 750 किलोमीटर दूर प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे और 945 किलोमीटर दूर वाराणसी तक करीब 3 घंटे 33 मिनट लग सकते हैं. दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर की दूरी लगभग 4.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य होगा।  हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क का बढ़ता दायरा बुलेट ट्रेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना के साकार होने पर यह मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अगला बड़ा चरण होगा. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला पहला व्यापक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बन सकता है. इससे दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बेल्ट में रहने वाले लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है. आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्रों तक तेज कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कारोबार, निवेश और रीजनल इकोनोमिक एक्टिविटीज में भी तेजी आने की उम्मीद है।  180 किलोमीटर वाली सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन फिलहाल भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड वाली सेमी हाई स्पीड सर्विसेज ऑपरेट हो रही हैं. इसके मुकाबले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है. इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है. देश की पहली हाई स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती चरण में सूरत-वापी सेक्शन खोले जाने की योजना है।