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गोरक्षपीठ में परंपरा, भव्यता और उल्लास से मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

गोरखपुर  गोरक्षपीठ में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) 4 सितंबर, शुक्रवार को परंपरा, भव्यता और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मिलित होंगे। गोरखनाथ मंदिर में भजनों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद, गोरक्षपीठाधीश्वर उनके बालरूप को पालने में झुलाएंगे। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में गोरखनाथ मंदिर में भजन संध्या के साथ बच्चों के लिए श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजय नाथ स्मृति भवन में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह के कार्यक्रम शाम 5 बजे से ही प्रारंभ हो जाएंगे। बच्चों के लिए श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता के बाद भजन संध्या का आयोजन होगा। गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि स्मृति भवन में भजनों की प्रस्तुति रात 11:30 बजे तक अनवरत जारी रहेगी। भजन संध्या के दौरान ही गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में सम्मिलित होंगे। यहां भजन सुनने के साथ ही वह वह बच्चों को खिलौना और चॉकलेट भी देंगे।  रात 11.30 बजे गोरक्षपीठाधीश्वर गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने पहुंचेंगे। रात 12 बजते ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वह मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। इसके बाद वह श्रीकृष्ण के बालरूप को पालने में झुलाएंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जुटने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। दो वर्गों में होगी श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता शुक्रवार (4 सितंबर) को गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में सायंकाल 5 बजे से 7 बजे तक श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता दो वर्गों में होगी। कान्हा वर्ग में 1 से 5 वर्ष तक तथा गोपाल वर्ग में 6 से 8 वर्ष तक के बच्चे प्रतिभाग कर सकेंगे। प्रतिभागियों का पंजीकरण कार्यक्रम स्थल पर ही किया जाएगा। प्रतियोगिता में न सिर्फ विजेताओं बल्कि इसमें शामिल सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इस प्रतियोगिता के बाद रात्रि 8 बजे से भजन संध्या का आयोजन होगा। स्मृति भवन में सुपरिचित लोक गायक राकेश श्रीवास्तव की टीम भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देगी। जबकि मुख्य मंदिर में हनुमंत सांस्कृतिक संस्थान द्वारा भजनों की प्रस्तुति की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में किया पूर्व विधायक स्व. रघुवीर सिंह बाबूजी की प्रतिमा का अनावरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल ने सभी के जीवन का समय निश्चित किया है। प्रत्येक मनुष्य के कार्यों का मूल्यांकन आने वाली पीढ़ियां करती हैं। जननेता और समाजसेवी स्व. रघुवीर सिंह बाबूजी ने देश की आजादी के कालखंड में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चलते हुए अपना अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने युवा अवस्था में स्वतंत्रता के समर में सहभागिता के लिए अपने साथियों को प्रेरित किया। स्व. बाबूजी ने स्व. मावधराव सिंधिया के साथ नगर निगम से लेकर विधानसभा तक की यात्रा तय की। वे जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष में सदैव आगे रहते थे। स्व. बाबूजी ने ग्वालियर क्षेत्र के लिए कार्य करते हुए समाजसेवा की मिसाल पेश की। स्व. बाबूजी ने विद्यार्थी काल में दूसरे बच्चों को कुश्ती खेलने के लिए प्रेरित किया। ग्वालियर में स्थापित बाबूजी की प्रतिमा सभी को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को ग्वालियर के आकाशवाणी तिराहे पर पूर्व विधायक एवं नगर निगम परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्व. बाबू रघुवीर सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने इस आकाशवाणी तिराहे का नाम बदलकर अब स्व. बाबू रघुवीर सिंह के नाम पर करने की घोषणा की। केंद्रीय दूरसंचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए अत्यंत भावुक है। स्व. रघुवीर सिंह बाबूजी ने ग्वालियर विधायक के रूप में मेरे पिता के साथ काम किया। बाबूजी ने सदैव दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम किया। बाल्यकाल से ही उनका सानिध्य मिलता रहा। उन्होंने 14 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता सेनानियों की सेवा की। स्व. बाबूजी ने कृषि संकाय की पढ़ाई करने के बाद किसान कल्याण और समाज कल्याण के लिए उत्कृष्ट कार्य किए। वे मन के बड़े कोमल थे, लेकिन अपने उसूलों पर अडिग रहते थे। बाबूजी एक सच्चे समाजसेवक थे और ग्वालियर के लोगों के लिए सदैव प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों से आज यह दिन आया है कि ग्वालियर में स्व. रघुवीर सिंह बाबूजी की प्रतिमा स्थापित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सदैव सत्य के साथ खड़े रहते हैं। म.प्र. विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि स्व. रघुवीर सिंह बाबूजी ने अपने जीवनकाल में मजदूरों के कल्याण के लिए बड़ा संघर्ष किया। उनके साथ निगम पार्षद के रूप में कार्य करना अविस्मरणीय है।  राम सुंदर यादव ने कहा कि आज मेरे और परिवार के लिए यह बहुत भावुक अवसर है, मेरे पिता स्व. बाबू रघुवीर सिंह की प्रतिमा का आज अनावरण किया गया। उन्होंने कहा कि हमारी तीसरी पीढ़ी पूरी तरह जनसेवा को समर्पित है। इस अवसर पर पूर्व विधायक स्व. बाबू रघुवीर सिंह के व्यक्तित्व से सभी को परिचित भी कराया गया। स्व. बाबू रघुवीर सिंह महात्मा गांधी से प्रभावित थे और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बाल सेनानी के रूप में योगदान दिया। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने किसानों और गरीबों सहित हर वर्ग की आवाज बुलंद की। प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, ग्वालियर सांसद  भारत सिंह कुशवाहा, राज्यसभा सदस्य  अशोक सिंह, विधायक  प्रीतम सिंह लोधी, विधायक  महेंद्र सिंह यादव, मप्र राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने बरसात के समाप्त होते ही निर्माणाधीन पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी निर्माणाधीन कार्यों का एक सप्ताह के भीतर ठेकेदारों के साथ स्थल निरीक्षण कर काम आगे बढ़ाने की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करते हुए बरसात के तुरंत बाद निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में सभी निर्माण स्थलों पर काम होते हुए दिखना चाहिए।  श्री बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025-26 और 2026-27 के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्राक्कलन 20 सितम्बर तक जमा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत के साथ रेलिंग और दीवारों की पेंटिंग का काम 30 नवम्बर तक पूरा करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में सेतु परिक्षेत्र के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंताओं को अपने-अपने संभागों में भ्रमण कर पुल-पुलियों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर लोगों की जरूरतों के अनुरूप नए पुल-पुलियों के निर्माण के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने और क्षतिग्रस्त पुलों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखने और जहां आवश्यकता हो, वहां नए पुलों के निर्माण के प्रस्ताव भेजने को कहा।  सप्ताह में दो दिन साइट पर जाएं श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को सप्ताह में दो दिन अनिवार्य रूप से निर्माण स्थलों पर जाकर कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने काम में लापरवाही बरतने या कार्य की गति धीमी रखने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को बिना अनुमति कार्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहते हुए निर्माण स्थलों की समस्याओं को तत्परता से निराकृत करने को कहा। नए कार्यों की नवम्बर तक हो निविदा, जनवरी तक शुरू हों काम श्री बंसल ने नए कार्यों की निविदा प्रक्रिया नवम्बर तक पूरी करने और जनवरी तक सभी कार्य हर हाल में शुरू करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को समय पर ले-आउट, ड्राइंग-डिजाइन और कार्यस्थल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों पर आने वाली समस्याओं का तत्परता से समाधान करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की गंभीरता से मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए। हर महीने करें भुगतान, काम पूरा होने के तीन माह में अनुबंध क्लोज करें लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ठेकेदारों को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति प्रभावित न हो। उन्होंने कार्य पूर्ण होने के बाद तीन माह के भीतर सभी दस्तावेजी प्रक्रिया और भुगतान पूरा कर अनुबंध क्लोज करने को कहा। गतिशक्ति पोर्टल पर 10 सितम्बर तक जानकारी अपलोड करें श्री बंसल ने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर प्रदेश के सभी पुल-पुलियों की जानकारी 10 सितम्बर तक अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में जानकारी अपलोड नहीं करने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा। उन्होंने सीपीग्राम्स (CPGRAMS) और सीएम-हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों और मांगों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायालयीन मामलों, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन से जुड़े प्रकरणों के निपटारे की हर महीने समीक्षा करने को कहा। 'एनएचएआई और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में लाएं तेजी" लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों की बैठक लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त कार्यों की निविदा, अनुबंध और कार्यादेश की भी जानकारी ली। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के अधिकारियों को एनएचएआई और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। विभागीय सचिव ने रायपुर में निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग के एमएमआई चौक से शदाणी दरबार खंड , बेमेतरा बायपास, कोंडागांव से नारायणपुर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड और रतनपुर से पेंड्रा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्यों को अगले साल मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एस.के. कोरी और राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री ज्ञानेश्वर कश्यप सहित दोनों परिक्षेत्रों के सभी अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी और एनएचएआई के अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भौतिकी, रसायन, विष विज्ञान, डीएनए, क्राइम सीन किट एवं बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल  अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक और पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित 03 दिवसीय विशेष फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी व वैज्ञानिक सत्रों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव के निर्देशन में तथा पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय,  प्रशांत खरे एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के सतत मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के दूसरे दिन राज्य के क्षेत्रीय एवं राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने अलग-अलग विषयों पर गहन व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। फॉरेंसिक भौतिकी एवं वॉयस साक्ष्य प्रबंधन क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (RFSL), भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने फॉरेंसिक भौतिकी और वॉयस में भौतिक साक्ष्य प्रबंधन तथा FSL की भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि नमूनों, भौतिक अवशेषों के वैज्ञानिक संकलन, उनके संरक्षण एवं प्रयोगशाला अग्रेषण की मानक कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। फॉरेंसिक रसायन एवं विष विज्ञान (Toxicology) आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. राजीव दुआ ने रासायनिक नमूनों, मादक पदार्थों, विषाक्त पदार्थों के संकलन तथा रखरखाव की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विधिक साक्ष्य के रूप में रासायनिक नमूनों की शुद्धता बनाए रखना विवेचना की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। फॉरेंसिक बायोलॉजी, सीरोलॉजी एवं डीएनए (DNA) साक्ष्य प्रबंधन आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कमलेश कैथोलिया ने जैविक साक्ष्यों—जैसे रक्त, वीर्य, बाल, लार व अन्य शारीरिक द्रव्यों के वैज्ञानिक संकलन, पैकेजिंग, चेन ऑफ कस्टडी तथा डीएनए प्रोफाइलिंग में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की भूमिका पर विस्तृत तकनीकी जानकारी दी। अपराध स्थल अन्वेषण, प्रबंधन एवं क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन किट का उपयोग सत्र में जिला सीन क्राइम ऑफ मोबाइल यूनिट, भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड ने क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन (CSI) किट के व्यावहारिक उपयोग, घटनास्थल के प्रबंधन, साक्ष्यों की प्राथमिकता आधारित पहचान और सुरक्षित जब्ती प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने घटनास्थल को दूषित होने से बचाने और संकलित साक्ष्यों के सही प्रलेखन के व्यावहारिक गुर सिखाए। बैलिस्टिक्स शाखा एवं शंका समाधान सत्र अंतिम सत्र में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL), सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी  रामदा कनेश ने बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। इसमें आग्नेयास्त्रों, प्रयुक्त कारतूसों, गोलियों (बुलेट्स), गनशॉट रेजीड्यू (GSR) के संकलन, संरक्षण तथा एफएसएल परीक्षण की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्र के अंत में प्रतिभागियों की व्यावहारिक शंकाओं का भी समाधान किया गया। कार्यशाला का समापन 03 सितंबर को विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग  पंकज वास्‍तव की उपस्थित में होगा। अंतिम दिन सीआईडी फोटोग्राफी शाखा के उप पुलिस अधीक्षक (फोटो)  अमिताभ तिवारी द्वारा अपराध घटना स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुतीकरण और उसके न्यायालयीन प्रमाणीकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।  

महिलाओं के हुनर को मिलेगा मंच, आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई उड़ान

रायपुर  नारी सशक्तीकरण के संकल्प के साथ सुशासन की सरकार प्रदेश की माताओं-बहनों के सम्मान, स्वाभिमान, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के सशक्त नेतृत्व में प्रदेशभर में महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। इसी क्रम में आज अंबिकापुर के ग्राम खम्हरिया और ग्राम उदयपुर में महतारी सदन निर्माण कार्य का भूमिपूजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि महतारी सदन हमारी माताओं-बहनों के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का केंद्र होगा। यह महिलाओं को एक ऐसा सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा, जहां वे बैठकें, प्रशिक्षण तथा विभिन्न सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। महिलाओं को संगठित कर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाएगा महतारी सदन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि महतारी सदन गांव की मातृशक्ति को संगठित करने और उनकी प्रतिभा एवं हुनर को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में अनेक पारंपरिक कौशल और प्रतिभाएं मौजूद हैं। उन्हें उचित मंच और अवसर मिलने पर वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी सदन में महिलाओं के लिए बैठक, प्रशिक्षण, कौशल विकास तथा विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों के संचालन की सुविधा मिलेगी। इससे महिलाओं के बीच आपसी सहभागिता और समन्वय बढ़ेगा तथा उन्हें सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। महिला सशक्तीकरण से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना परिवार और समाज की मजबूती का आधार है। जब महिलाएं अपने हुनर और क्षमता के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। महतारी सदन महिलाओं के सामाजिक सशक्तीकरण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बनेगा। इसके जरिए मातृशक्ति को अपनी क्षमताओं को पहचानने, उन्हें निखारने और नए अवसरों से जुड़ने का मंच मिलेगा। नारी सम्मान और सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता  राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नारी सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तीकरण को विकास की प्राथमिकता से जोड़कर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी विकास के समान अवसर मिलें और वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महतारी सदनों का निर्माण इसी सोच का हिस्सा है। यह पहल महिलाओं को एकजुट करने, उनके कौशल को प्रोत्साहित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। खम्हरिया और उदयपुर की मातृशक्ति को मिली सौगात अंबिकापुर क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया और ग्राम उदयपुर में महतारी सदन के निर्माण का भूमिपूजन क्षेत्र की मातृशक्ति के लिए महत्वपूर्ण सौगात है। इन सदनों के निर्माण से स्थानीय महिलाओं को अपनी गतिविधियों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा और वे सामूहिक रूप से सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगी। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने इस अवसर पर दोनों ग्रामों के समस्त क्षेत्रवासियों एवं मातृशक्ति को महतारी सदन की महत्वपूर्ण सौगात के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खम्हरिया और उदयपुर के महतारी सदन आने वाले समय में महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, सशक्तीकरण, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित होंगे।  

मंत्री सिंह ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के साथ किया सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल का भ्रमण मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में सीएसआईआर-एम्प्री के साथ एमओयू पर होंगे

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बुधवार को सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल का भ्रमण किया। उन्होंने संस्थान में अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से विकसित आधुनिक तकनीकों एवं नवीन निर्माण सामग्रियों का अवलोकन किया तथा उनकी उपयोगिता एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली। मंत्री  सिंह ने लोक निर्माण विभाग की सड़क, पुल एवं भवन निर्माण परियोजनाओं में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ एवं लागत-किफायती निर्माण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर इन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। भ्रमण के दौरान जिओपॉलीमर कंक्रीट की तकनीक को विशेष रूप से समझा। जिओपॉलीमर कंक्रीट से निर्मित सड़क में सामान्य कंक्रीट की तरह पानी से तराई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी की बचत होती है। साथ ही, कम मोटाई में भी एम-40 के अनुरूप मजबूती प्राप्त की जा सकती है। इस तकनीक का एम्स भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उपयोग किया जा चुका है। मंत्री  सिंह ने इस तकनीक को मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। मंत्री  सिंह ने फ्लाई ऐश और रेड मड सहित औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्टों से तैयार सड़क निर्माण सामग्री, पेवर ब्लॉक, कर्ब स्टोन तथा ड्रेनेज ब्लॉक जैसे प्रीकास्ट कंपोनेंट्स का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने बताया कि सीएसआईआर-एम्प्री द्वारा लगभग 16 वर्ष पूर्व लगाए गए पेवर ब्लॉक आज भी मजबूत स्थिति में हैं और उन पर काई भी नहीं लगी है। इससे इन सामग्रियों की दीर्घकालिक मजबूती एवं टिकाऊपन का पता चलता है। संस्थान की प्रदर्शनी एवं प्रयोगशालाओं के भ्रमण के दौरान मंत्री  सिंह को बैम्बू कंपोजिट एवं हाइब्रिड वुड, रेड मड आधारित रेडिएशन शील्डिंग टाइल्स, एंटी-कोरोसिव एवं फायर-रेसिस्टेंट कोटिंग्स तथा कृषि अवशेषों से तैयार किए जाने वाले ग्रीन बाइंडर्स जैसी नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्होंने इन तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की। सीएसआईआर-एम्प्री बनेगा पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार मंत्री  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग से मजबूत, टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। सीएसआईआर-एम्प्री में विकसित तकनीकों का लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में अधिक व्यापक रूप से उपयोग करने के लिए संस्थान को पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी इंजीनियर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सीएसआईआर-एम्प्री के साथ एमओयू करने की योजना है। इस एमओयू के माध्यम से आधुनिक निर्माण तकनीकों, नवीन निर्माण सामग्रियों, गुणवत्ता परीक्षण एवं तकनीकी परामर्श के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा। मंत्री  सिंह ने कहा कि जिओपॉलीमर कंक्रीट जैसी तकनीकों से जहां निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन बढ़ाया जा सकता है, वहीं पानी की बचत और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएसआईआर-एम्प्री के साथ समन्वय कर उपयुक्त तकनीकों का तकनीकी परीक्षण किया जाए तथा पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं में उनका उपयोग प्रारंभ किया जाए। मंत्री  सिंह ने एम्प्री की मटेरियल कैरेक्टराइजेशन प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया, जहां निर्माण सामग्री की मजबूती, टिकाऊपन एवं गुणवत्ता की जांच के लिए उपलब्ध आधुनिक परीक्षण मशीनों की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव  सुखबीर सिंह, सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक  सी.बी. चक्रवर्ती, प्रमुख अभियंता  आर.एल. वर्मा, प्रमुख अभियंता  एस.आर. बघेल, सड़क विकास निगम के प्रमुख अभियंता  के.पी.एस. राणा, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता  अजय वास्तव, मुख्य अभियंता  एस.सी. वर्मा एवं मुख्य अभियंता  बी.पी. बोरासी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सीएसआईआर-एम्प्री की ओर से अपर निदेशक  शुक्ला, वरिष्ठ वैज्ञानिक  मनीष मुद्गल, वैज्ञानिकगण एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

Hormuz Crisis के बीच Xi Jinping का Egypt दौरा, Suez Canal पर चीन की बढ़ती नजर से बदलेगा समीकरण

वाशिंगटन एक तरफ होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर से तेज हो चुकी है, तो दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिस्र पहुंच गए हैं. यह दौरा देखने में सामान्य कूटनीतिक यात्रा लगता है, लेकिन इसका समय बहुत मायने रखता है. जिस वक्त होर्मुज का समुद्री रास्ता युद्ध की वजह से बुरी तरह प्रभावित है, ठीक उसी वक्त चीन मिस्र के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर रहा है, जिसके हाथ में दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रास्तों में से एक, यानी स्वेज कैनाल है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही तेजी से घटी है. मंगलवार को सिर्फ चार मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि पिछले दस दिनों का औसत करीब तेरह जहाजों का था. सामान्य दिनों में दुनिया का लगभग बीस फीसदी तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है. लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और टैंकरों पर हमलों ने इस रूट को बेहद असुरक्षित बना दिया है।  ठीक इसी समय शी जिनपिंग काहिरा में हैं. चीन के राष्ट्रपति करीब एक दशक बाद मिस्र पहुंचे हैं. यह सिर्फ पुरानी दोस्ती निभाने की यात्रा नहीं है. मिस्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी रणनीतिक साथी रहा है, लेकिन बीते कुछ सालों में काहिरा ने बीजिंग, मॉस्को और दूसरी ताकतों के साथ भी अपने संबंध तेजी से बढ़ाए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक चीन और मिस्र के बीच व्यापार करीब इक्कीस अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, और स्वेज कैनाल आर्थिक क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में चीनी निवेश बढ़ रहा है।  यही इस दौरे की सबसे बड़ी कहानी है. अमेरिका जहां मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत के जरिए ईरान को रोकने में जुटा है, वहीं चीन उसी इलाके में निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, कूटनीति और साझेदारियों के जरिए अपना असर बढ़ा रहा है. मिस्र के पास स्वेज कैनाल है, जो एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ता है. होर्मुज में बाधा के बीच स्वेज ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम विकल्प बनकर उभरा है।  इसी बीच अगस्त में चीन और मिस्र ने पहली बार संयुक्त हवाई अभ्यास भी किया, जिसमें चीनी J-16 और मिस्री राफेल लड़ाकू विमानों ने साथ उड़ान भरी. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह दिखाता है कि अब चीन-मिस्र संबंध सिर्फ सड़कों और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहे।  मिस्र अरब जगत का बड़ा केंद्र है, अफ्रीका का प्रवेश द्वार है और ब्रिक्स का सदस्य भी है. शी जिनपिंग मिस्र को मिडिल ईस्ट और अफ्रीका दोनों में अपना प्रभाव बढ़ाने के आधार के तौर पर देख रहे हैं. इससे पहले बीजिंग ईरान और सऊदी अरब के बीच बातचीत करवाकर भी मध्यस्थ की छवि बनाने की कोशिश कर चुका है।  रॉयटर्स के अनुसार, काहिरा अमेरिकी सैन्य मदद के साथ साथ चीन, रूस और यूरोप के साथ भी अपने विकल्प बढ़ा रहा है. इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका की जगह ले ली है, लेकिन तस्वीर बदल जरूर रही है।  भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है. होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, जबकि स्वेज भारत के यूरोप व्यापार के लिए जरूरी है. अगर ये समुद्री रास्ते लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, माल भाड़े और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए चीन से मुकाबला और रूस के साथ संतुलन बनाना भारत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 

भूजल संकट से जूझते पंजाब के लिए राहत भरी खबर, केंद्र की रिपोर्ट से बढ़ी उम्मीद

चंडीगढ़. पंजाब में दशकों से लगातार गिर रहे भूजल लेवल को लेकर राज्य के लोगों को राहत मिली है। सेंट्रल भूजल बोर्ड के साल 2026 के ताजा आंकड़ों/मूल्यांकन के मुताबिक, दशकों में पहली बार पंजाब में भूजल लेवल में सुधार दर्ज किया गया है। इस बारे में जानकारी पंजाब के जल संसाधन मंत्री ने शेयर की है। केंद्र की इस रिपोर्ट ने भूजल संकट से उभरने की नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा कि भूजल के इस्तेमाल की दर साल 2022 में 164 फीसदी से घटकर साल 2026 में 152.22 फीसदी हो गई है, जबकि ज्यादा इस्तेमाल वाले ब्लॉक की संख्या 117 से घटकर 110 हो गई है और सुरक्षित ब्लॉक की संख्या 17 से बढ़कर 20 हो गई है। कुल 153 मूल्यांकन किए गए ब्लॉक में से 109 में सुधार दर्ज किया गया है। पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जल संसाधन मंत्री ने कहा कि ये सुधार सरकार की नहर का पानी खेतों तक पहुंचाने और भूजल बचाने की कोशिशों का नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि भूजल का सालाना इस्तेमाल साल 2022 में 28.02 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 2026 में 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है। साल 2025 के मुकाबले 14 ब्लॉक बेहतर कैटेगरी में आए हैं, जिनमें से 4 ब्लॉक सेफ कैटेगरी में पहुंच गए हैं। फाजिल्का का अरनीवाला शेख सुभानपुर, फिरोजपुर का मक्खू, होशियारपुर का हाजीपुर और पठानकोट का नरोट जैमल सिंह सेफ कैटेगरी में आ गए हैं। 

एमपीएसईडीसी और आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ इंडस्ट्री राउंडटेबल की आयोजित

भोपाल  मध्यप्रदेश को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा आईआईएसईआर भोपाल एवं ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ उच्चस्तरीय इंडस्ट्री राउंडटेबल आयोजित किया गया। प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेल्वेंद्रन ने चर्चा में सहभागिता करते हुए ड्रोन क्षेत्र के विकास, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन की प्राथमिकताओं को साझा किया। राउंडटेबल में ड्रोन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें गरुड़, डीएफआई, आइडियाफोर्ज, एनएफएसयू, प्रखर और आईजेडआई सहित अनेक कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिभागियों ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के लिए सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में ड्रोन क्षेत्र के लिए आवश्यक अधोसंरचना, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई। मध्यप्रदेश को बनाया जाएगा ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बैठक में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और प्रगतिशील नीतिगत ढांचे का लाभ उठाते हुए मध्यप्रदेश को ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए देश के पसंदीदा गंतव्यों में शामिल करने के रोडमैप की जानकारी दी गई। इसमें ड्रोन निर्माण के लिए अधोसंरचना, साझा परीक्षण सुविधाएं, फ्लाइट टेस्टिंग क्षमताएं, नवाचार प्लेटफॉर्म और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिभा एवं कौशल विकास को शामिल किया गया है। आईआईएसईआर भोपाल में स्थापित होगा ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राउंडटेबल में आईआईएसईआर भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के राज्य शासन के निर्णय को सराहा गया। इसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, उत्पाद विकास, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, प्रौद्योगिकी सत्यापन और नई पीढ़ी के ड्रोन अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। जुलाई 2026 में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने लगभग 85.51 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति दी है। इसमें एआई, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन्स, यूएवी डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य किया जाएगा। साथ ही प्रोटोटाइप परीक्षण, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को भी सहयोग मिलेगा। ग्वालियर में विकसित होगा एकीकृत ड्रोन क्लस्टर ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर में ड्रोन निर्माण, प्रोटोटाइपिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग, प्रमाणन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एकीकृत अधोसंरचना विकसित की जाएगी। हितधारकों ने कॉमन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं, कंपोनेंट टेस्टिंग लैब, फ्लाइट टेस्टिंग अधोसंरचना और उद्योग आधारित कौशल विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कई प्रतिभागियों ने ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, पायलट प्रोजेक्ट्स और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में राज्य के साथ साझेदारी में रुचि व्यक्त की। सुझावों को ड्रोन रोडमैप में किया जाएगा शामिल इंडस्ट्री राउंडटेबल से प्राप्त सुझावों को प्रदेश के ड्रोन इकोसिस्टम के विकास के लिए तैयार किए जा रहे रोडमैप में शामिल किया जाएगा। ये सुझाव ग्वालियर क्लस्टर, आईआईएसईआर भोपाल के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ड्रोन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करने की आगामी पहलों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे। बैठक में मध्यप्रदेश ड्रोन प्रमोशन एंड यूसेज पॉलिसी-2025 के महत्व को भी रेखांकित किया गया। नीति का उद्देश्य निवेश, नवाचार, कौशल विकास, प्रमाणन सहयोग तथा कृषि, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना, सुशासन, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक अनुप्रयोगों में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है।  

यूपी राइज: ‘आत्मनिर्भर यूपी’ की दिशा में युवाओं ने पेश किए शानदार स्टार्टअप आइडिया

आगरा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर यूपी विजन को धरातल पर उतारने के लिए एमजी रोड स्थित सेंट जॉन्स कॉलेज में 'यूपी राइज' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए करीब 1000 से अधिक छात्र- छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' बनाना है। सरकारी योजनाओं की जानकारी और मेंटर्स का मार्गदर्शन कार्यक्रम के दौरान युवाओं को राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक नीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिया और बताया कि आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता व सब्सिडी कैसे प्राप्त की जा सकती है। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए हर्षित देसाई, राहुल सारंगी और साईराज धोंड मेंटर के रूप में शामिल हुए। मेंटर हर्षित देसाई, जो वर्तमान में स्ट्रैटिविटी (एशिया और मिडिल ईस्ट) में मैनेजिंग पार्टनर हैं और पूर्व में आदित्य बिड़ला फाइनेंस व केपीएमजी में शीर्ष पदों पर रह चुके हैं, ने अपने 23 वर्षों के अनुभव से छात्रों को इनोवेशन और स्केलेबल कंज्यूमर इंटरनेट प्रोडक्ट्स बनाने के गुर सिखाए। टॉप-10 इनोवेटिव आइडियाज ने खींचा ध्यान इस आयोजन में कुल 35 स्टार्टअप आइडिया आए, जिनमें से 10 बेहतरीन आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें साइकिल सॉइल (ऑर्गेनिक कॉटन, बांस और खेती के कचरे से बने बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड), द मंडला स्टूडियो (हाथ से बने मंडला आर्ट प्रोडक्ट), बायो फ्रेश (क्यूआर कोड ट्रैकिंग वाला स्मार्ट डेयरी पैकेजिंग सिस्टम), आर्टेरा (कस्टमाइजेबल टैटू और फेस पेंटिंग सर्विस), बायोकोट (बीजों को बचाने वाली बायोडिग्रेडेबल स्लीव), वेस्ट टू वेल्थ (पेठा-इंडस्ट्री के वेस्ट वाटर और चावल के भूसे से बायोएथेनॉल निर्माण), पीयर पॉड्स (एआई-पावर्ड स्टडी पार्टनर प्लेटफॉर्म), प्रोटियोस्कोप (बायोटेक के लिए प्रोटीन सीक्वेंस एनालिसिस व 3D स्ट्रक्चर प्रेडिक्शन) और प्रोजेक्ट अन्विता (एनईपी आधारित इंटर्नशिप प्लेटफॉर्म) जैसे शानदार आइडिया शामिल रहे। विजेताओं को मिली प्रोत्साहन राशि जूरी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सामने अपनी प्रेजेंटेशन देने के बाद महिलाओं के नेतृत्व वाले 'क्रोशे एंटरप्राइज' ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। यह स्टार्टअप पारंपरिक क्रोशिया कौशल को आधुनिक उत्पादों जैसे बैग, फोन कवर, की-चेन, क्रॉप टॉप और हेयर एक्सेसरीज में बदल रहा है। वहीं 'साइकिल सॉइल' और 'आर्टेरा' की टीमों को संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ, जिन्हें 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। 15 सितंबर को आंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा आयोजन यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों को सीधे बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप तथा रोजगार के अवसर मिलेंगे। आगरा में इस पहल का अगला पड़ाव 15 सितम्बर 2026 को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा। इन इनोवेटिव आइडियाज ने यह साबित कर दिया है कि यूपी का युवा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।