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Gill-Bumrah का डाउनफॉल, Padikkal का उछाल; ICC Ranking के बाद शुभमन गिल के T20 भविष्य पर सवाल

नई दिल्ली भारतीय कप्तान शुभमन गिल और स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को ताजा ICC टेस्ट रैंकिंग में झटका लगा है. गिल बल्लेबाजों की रैंकिंग में दो पायदान फिसलकर 9वें स्थान पर पहुंच गए, जबकि बुमराह गेंदबाजों की रैंकिंग में दूसरे से तीसरे नंबर पर खिसक गए. दूसरी ओर, देवदत्त पडिक्कल ने 5 स्थान की छलांग लगाकर 54वां स्थान हासिल किया है।  श्रीलंका दौरे पर तीन पारियों में गिल के बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला था. वह अब भी भारत के दूसरे सबसे ऊंची रैंकिंग वाले बल्लेबाज हैं, जबकि ऋषभ पंत 7वें स्थान पर कायम हैं. यशस्वी जायसवाल 11वें नंबर पर बरकरार हैं।  पडिक्कल के लिए श्रीलंका दौरा शानदार रहा. दो टेस्ट में 328 रन और दो शतक के साथ वह भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, जिसका फायदा उन्हें रैंकिंग में भी मिला।  वहीं बुमराह श्रीलंका दौरे पर घुटने की चोट के कारण नहीं खेल सके थे. वह अब गेंदबाजों की रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं, जहां ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क और न्यूजीलैंड के मैट हेनरी उनसे आगे हैं।  श्रीलंका के सोनल दिनुषा ने भी रैंकिंग में जबरदस्त छलांग लगाई है. भारत के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में शानदार शतक के बाद वह 29 पायदान ऊपर चढ़कर बल्लेबाजों की रैंकिंग में 25वें स्थान पर पहुंच गए हैं।  2028 वर्ल्ड कप प्लान से बाहर हो चुका है ‘प्रिंस’? वर्ल्ड कप 2026 जीतने से ठीक पहले जो बल्लेबाज तीनों फॉर्मेट का कप्तान माना जा रहा था वो आज फटाफट क्रिकेट में हाशिए पर चढ़ाया जा चुका है. वैसे भारतीय क्रिकेट टीम जब भी किसी नए दौर में कदम रखती है, तो कुछ फैसले प्रशंसकों और विश्लेषकों को हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक चौंकाने वाला फैसला हाल ही में देखने को मिला, जब अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए घोषित भारतीय टीम से सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल का पत्ता फिर से कट गया।  शुभमन गिल को तीनों फॉर्मेट में भारत का अगला बल्लेबाजी स्तंभ माना जा रहा था. वनडे और टेस्ट में उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी देकर ‘भविष्य का कप्तान’ घोषित किया जा चुका है. ऐसे में टी20 टीम से उनका बाहर होना महज एक आराम देना नहीं, बल्कि भारतीय चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के एक बड़े रणनीतिक बदलाव का सीधा संकेत है. यह फैसला साफ करता है कि टी20 इंटरनेशनल में अब गिल की जगह पक्की नहीं है और टीम मैनेजमेंट आगामी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए नए विकल्पों को आजमा रहा है।  4 ओपनर्स की मौजूदगी: 2028 वर्ल्ड कप प्लान से गिल बाहर? भारतीय चयनकर्ताओं ने अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ सीरीज में चार बेहतरीन सलामी बल्लेबाजों को टीम में शामिल किया है. इनमें वैभव सूर्यवंशी , ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे आक्रामक नाम शामिल हैं. टीम में इन चार ओपनर्स की मौजूदगी सीधा इशारा करती है कि 2028 टी20 वर्ल्ड कप के शुरुआती खाके से शुभमन गिल फिलहाल बाहर हो चुके हैं. चयनकर्ताओं की इस रणनीति के पीछे मुख्य वजहों को समझने की कोशिश करते हैं. आज का टी20 क्रिकेट पहली ही गेंद से प्रहार करने वाले बल्लेबाजों की मांग करता है. टीम मैनेजमेंट शीर्ष क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों जैसे वैभव और अभिषेक को प्राथमिकता दे रहा है, जो पावरप्ले का भरपूर फायदा उठा सकें. रोहित शर्मा और विराट कोहली के युग के बाद, टीम अब ‘एंकर’ (पारी संभालने वाले) बल्लेबाजों के बजाय ‘इम्पैक्ट’ (तेज रन बनाने वाले) खिलाड़ियों पर दांव लगा रही है. गिल की शैली पारी को बुनने की है, जो इस नए एप्रोच में फिट नहीं बैठ रही।  दो फॉर्मेट के कप्तान का टी20 स्ट्राइक रेट कमजोर कड़ी शुभमन गिल को टेस्ट और वनडे क्रिकेट का कप्तान (या उप-कप्तान) बनाकर बोर्ड ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है। लेकिन टी20 इंटरनेशनल में उनका प्रदर्शन और विशेषकर उनका स्ट्राइक रेट उनके लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है. वैभव, संजू और अभिषेक के मुकाबले गिल का टी20 इंटरनेशनल में करियर स्ट्राइक रेट लगभग 135 से 139 के बीच झूलता रहा है. आज के दौर में जहां ओपनर्स 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हैं, वहां गिल का यह आंकड़ा काफी साधारण नजर आता है.शुरुआती ओवर्स में गिल को क्रीज पर सेट होने के लिए गेंदे चाहिए होती हैं. इससे पावरप्ले में टीम का रन रेट धीमा हो जाता है, जिसका दबाव आने वाले बल्लेबाजों पर पड़ता है. हलांकि आईपीएल में गिल ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत गेंदबाजी आक्रमण और कड़े हालात में वे लगातार तेज गति से रन बनाने में संघर्ष करते दिखे हैं।  क्या गिल के लिए रास्ते बंद हो चुके हैं? अफ़ग़ानिस्तान सीरीज से बाहर होने का मतलब यह कतई नहीं है कि शुभमन गिल का टी20 करियर खत्म हो गया है. हालांकि, इसने उनके लिए खतरे की घंटी जरूर बजा दी है यदि उन्हें टी20 टीम में दोबारा वापसी करनी है और 2028 वर्ल्ड कप की योजना का हिस्सा बनना है, तो उन्हें अपने खेल के तरीके में बड़ा बदलाव करना होगा. उन्हें आईपीएल और घरेलू टी20 मैचों में खुद को एक आक्रामक और निडर बल्लेबाज के रूप में साबित करना होगा, जो पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हावी हो सके. फिलहाल के लिए, ‘प्रिंस’ को यह समझना होगा कि टी20 क्रिकेट में सिर्फ क्लास नहीं, बल्कि ‘इम्पैक्ट’ और ‘स्पीड’ ही राज करती है। 

बीज से बाजार तक और खेत से निर्यात तक हर कदम पर राज्य सरकार किसानों के साथ किसानों को देंगे दिन में दस घंटे बिजली

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिसके हाथ में हल है, वही इस देश का असली बल है। उन्होंने किसानों के पसीने को मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का “फ्यूल” बताते हुए कहा कि सरकार खेत से लेकर खातों तक और बीज से लेकर बाजार तक हर कदम पर प्रदेश के किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बलराम, बल के देवता ही नहीं, श्रम के सम्मान और कृषि गौरव के जीवंत प्रतीक हैं। हलधर के रूप में उन्होंने देश में खेती-किसानी को विस्तार दिया और इसे लोककल्याण का माध्यम भी बनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को हल षष्ठी के अवसर पर ग्वालियर में हुए बलराम जयंती महोत्सव एवं सहकारी किसान समागम कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां बड़ी संख्या में मौजूद किसानों और अन्नदाताओं को बलराम जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बलराम जयंती हमारे खेतों की हरियाली और किसानों की समृद्धि का पुनीत उत्सव है। आयोजकों ने मुख्यमंत्री को खेती-किसानी के पुण्य प्रतीक के रूप में हल भेंट किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक शिवपुरी को अपनी वर्तमान अवस्था से उबरने के लिए राज्य शासन की ओर से जरूरी मदद देने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण से जुड़े चार महत्वपूर्ण कार्यों का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल से किसान अब घर बैठे आवेदन कर सकेंगे। इस अवसर पर शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण योजना के सरलीकरण का भी शुभारंभ हुआ। इसके तहत खरीफ और रबी कृषि ऋण की अलग-अलग अदायगी की बाध्यता समाप्त करते हुए किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार 12 माह में ऋण चुकाने की सुविधा दी गई है। मुख्यमंत्री ने किसान कृषक कवच योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना में ऐसे किसानों को भी ऋण और शासकीय योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिनके खातों की जांच लंबित होने से वे अब तक शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित थे। मुख्यमंत्री ने गांवों में सहकारिता गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 200 नई पैक्स संस्थाओं के कार्यालयों का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपेक्स बैंक की ग्वालियर में संभागीय शाखा का शुभारंभ भी इस अवसर पर किया। किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बीज से बाजार तक और खेत से निर्यात तक किसान की पूरी यात्रा को मजबूत कर रही है। उन्होंने मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की मंशा व्यक्त करते हुए कहा कि हम प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनायेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है और चारा अनुदान 20 से बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि हमारी विरासत है, एग्री-टेक और एग्री-बिजनेस हमारा भविष्य है। प्रदेश में तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार के माध्यम से नई कृषि क्रांति लाई जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, जैविक खेती, मत्स्य पालन और नई फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों से पानी की हर बूंद का सदुपयोग करने, प्राकृतिक खेती अपनाने, उत्पादन की ग्रेडिंग-प्रोसेसिंग-पैकेजिंग कर सीधे बाजार से जुड़ने, फसल विविधीकरण अपनाने और युवाओं को कृषि उद्यमिता से जोड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि में ही मध्यप्रदेश की समृद्धि है। उन्होंने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि इससे शासकीय योजनाओं, समर्थन मूल्य के भुगतान तथा सब्सिडी पर खाद-बीज की सुविधा आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान  बलराम ने कृषि को प्रकृति के साथ जोड़कर स्वावलंबन का नया अध्याय शुरू किया था। भारतीय संस्कृति में खेती को सर्वोत्तम माना गया है। खेती से प्रकृति समृद्ध होती है और मनुष्य को अनाज मिलता है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने चार श्रेणियों- गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण का संकल्प लिया है। हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर सम्मान रखते हैं। अन्नदाता अपने अथक परिश्रम से देश को समृद्ध बनाता है। राज्य सरकार खेतों से लेकर खातों तक किसानों के कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को पैक्स समितियों के माध्यम से लाभ दिया जा रहा है। किसान कवच योजना के माध्यम से हमारी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली मिल रही है। अब दिन में भी बिजली मिलेगी। मध्यप्रदेश बिजली उत्पादन में अब देश का अग्रणी राज्य बना है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा अभी 60 लाख हेक्टेयर से अधिक है, जिसे अगले ढाई वर्ष में 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने की सुविधा दी है। अब उन्हें 6-6 माह में खाता पलटने की जरूरत नहीं है। नई व्यवस्था के मुताबिक, अब किसान वर्ष में किसी भी समय कर्ज की राशि भर सकते हैं। किसान अनाज के साथ उद्यानिकी फसलों से लाभ कमाएं। इसके लिए "एक बगिया मां के नाम'' योजना की शुरुआत की गई है। प्रदेश सरकार पशुपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए नई गौपालन योजना की शुरुआत की है। इस योजना में पशुपालकों को 40 लाख के ऋण पर 10 लाख का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और बकरी पालन जैसी योजनाओं से भी जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में युवा कल्याण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटे गए है। हमारे बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर बनें। लेकिन खेती से रिश्ता बनाए रखें। कृषि हमारी समृद्ध संस्कृति की गौरवशाली विरासत है। शासकीय स्कूलों के बच्चों को किताबें, ड्रेस, साइकिलें बांटी जा रही हैं। प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बन रहे हैं। युवाओं को उद्योग और रोजगार से जोड़ा जा रहा है। हम समृद्ध मध्यप्रदेश में रोजगार देने वाले युवा तैयार करने पर काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर सबसे पहले केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। मध्यप्रदेश … Read more

यूपी सरकार व जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के बीच एमओयू

लखनऊ योगी सरकार उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग तथा जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए तैयार करना है। यह सहयोग गैर-वित्तीय, गैर-बाध्यकारी और गैर-अनन्य स्वरूप का है। प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के लिए ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। प्रदेश में विनिर्माण इकाइयों और निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई का मजबूत आधार है, जिनमें यूरोपीय बाजार में विस्तार की बड़ी क्षमता है। उन्होंने इस कार्यक्रम को 12 महीने के संरचित रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें उद्यम मूल्यांकन, बाजार सत्यापन, स्थापना और प्रवेश के बाद सहायता जैसे चरण शामिल होंगे। जर्मनी के राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडेल ने कहा कि इस साझेदारी को कागजी कार्रवाई से मुक्त और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। इसकी सफलता कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि नए व्यावसायिक समझौतों, भारतीय कंपनियों द्वारा जर्मनी में उपस्थिति और जर्मन कंपनियों द्वारा उत्तर प्रदेश में परियोजनाएं शुरू करने जैसे ठोस परिणामों से मापी जानी चाहिए। उन्होंने इनोवेशन हब राइन-मेन को जर्मनी में संस्थागत आधार और जीआईबीए को भारतीय पक्ष में समन्वयक के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, पात्र उद्यमों को कार्यक्रम की जानकारी देना, राज्य सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय और उद्यमों की तैयारी में सहायता जैसे कार्यों पर फोकस होगा। इसके साथ ही गाजियाबाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) के आधुनिकीकरण में जर्मन तकनीक, गुणवत्ता, परीक्षण एवं प्रमाणन संबंधी मार्गदर्शन और जर्मन प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ संपर्क बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। जर्मन आयात मानकों, यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों, टैरिफ और निर्यात दस्तावेजीकरण जैसे विषयों पर संयुक्त कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। यह एमओयू तीन वर्ष तक प्रभावी रहेगा। कार्यक्रम में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद, उद्योग आयुक्त के.वी. पंडियन, सहायक महाप्रबंधक रितेश सक्सेना, यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन के एमडी हिमांशु कौशिक, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड और जीआईबीए के चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 अगस्त 2026 तक लक्षित निर्माण कार्यों में से शेष कार्यों को आगामी 15 दिवस में पूर्ण किया जाए। बैठक में बताया गया कि 15 अगस्त तक कुल 53 स्वास्थ्य संस्थाओं को संचालन के लिए तैयार किया गया है। इनमें 37 उप स्वास्थ्य केंद्र (SHC), 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), 4 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) तथा 3 क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCHB) शामिल हैं। संभागवार इनमें जबलपुर 30, रीवा 8, इंदौर 6, भोपाल 3, उज्जैन 3, ग्वालियर 2 तथा सागर की 1 संस्था शामिल है। बैठक में बताया गया कि आगामी 15 दिवसों में 220 स्वास्थ्य संस्थाओं तैयार किया जाएगा। इनमें 167 SHC, 42 PHC, 6 BPHU, 2 BPHU/PHU, 2 CCHB तथा 1 MCH/DH शामिल है। प्रस्तावित संस्थानों में से 179 संस्थाओं में मानव संसाधन उपलब्ध है, जबकि 163 संस्थाओं में उपकरण उपलब्ध किए जा चुके हैं। 61 संस्थाओं में उपकरण एवं मानव संसाधन की उपलब्धता के लिये कार्यवाही प्रचलन में है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि शेष कार्यों, विशेष रूप से फर्नीचर, उपकरण एवं मानव संसाधन की उपलब्धता को योजनाबद्ध तरीके से शीघ्र पूर्ण किया जाए ताकि निर्धारित समय सीमा में संस्थाओं का संचालन सुनिश्चित हो सके। बैठक में एमडी एमपीपीएचएससीएल  मयंक अग्रवाल, अपर संचालक स्वास्थ्य  मनोज सरियाम सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

यूपी के यात्रियों के लिए खुशखबरी, 2 अक्टूबर से शुरू होगी गोरखपुर-हैदराबाद Amrit Bharat ट्रेन

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई और झांसी स्टेशनों से हैदराबाद तक जाने और आने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। गोरखपुर से चर्लपल्ली (हैदराबाद) तक अमृतभारत एक्सप्रेस की मंजूरी के साथ ही इसके चलने की तारीख का भी ऐलान हो गया है। बोर्ड से मिले निर्देश के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सीपीआरओ सुमित कुमार ने बताया कि नई अमृतभारत ट्रेन चर्लपल्ली से गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से हर शुक्रवार और गोरखपुर से 04 अक्टूबर से हर रविवार को 22075/22076 चर्लपल्ली-गोरखपुर-अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस के रूप में चलेगी। रेलवे बोर्ड ने प्रयोग के तौर पर अभी इसे सप्ताह में एक दिन चलाने की मंजूरी दी है। डिमांड बढ़ने पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं। हैदराबाद के लिए गोरखपुर से पहली रेगुलर ट्रेन होगी। यह ट्रेन गोरखपुर से हैदराबाद चर्लपल्ली के अलावा गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई, झांसी, बीना, भोपाल,इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंदरपुर, बल्लारशाह, काजीपेट स्टेशनों पर भी रुकेगी। 22075 चर्लपल्ली-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस 02 अक्टूबर से प्रत्येक शुक्रवार को चर्लपल्ली से रात 9.45 बजे प्रस्थान कर तीसरे दिन सुबह 6.25 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, 22076 गोरखपुर-चर्लपल्ली अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस 04 अक्टूबर से प्रत्येक रविवार को गोरखपुर से सुबह 08.30 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन शाम 5 बजे चर्लपल्ली पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे। यात्रियों को ये सुविधाएं मिलेंगी बिना एसी वाली अमृत भारत एक्सप्रेस आम यात्रियों के लिए डिजाइन की गई है। नई ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगे रहेंगे। टॉक-बैक सिस्टम से यात्री आपात स्थिति में सीधे लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर से संपर्क कर सकेंगे। वैक्यूम बायो टॉयलेट, आरामदायक सीटों की सुविधा मिलेगी। 130 किमी की रफ्तार से दौड़ने वाली 22 बोगियों वाली अमृत भारत एक्स में 1834 यात्री सफर कर सकेंगे। गोरखपुर के रास्ते अभी चल रहीं 4 अमृतभारत एक्सप्रेस दिल्ली और बांद्रा अमृतभारत के बाद अब गोरखपुर से हैदराबाद (चेरापल्ली) तक चलने वाली इस अमृतभारत की सौगात मिली है। बिहार से चलकर गोरखपुर के रास्ते अभी चार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो रहा है। इसमें लखनऊ के रास्ते आनंदविहार से दरभंगा के लिए एक अमृत भारत एक्सप्रेस है। वहीं हाल ही में गोरखपुर दिल्ली और बांद्रा के लिए अमृतभारत ट्रेन की मंजूरी बोर्ड ने दी है। भविष्य में रेलवे बोर्ड 24 और अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पटरी पर उतारने जा रहा है। जानें शेड्यूल हैदराबा से गोरखपुर अमृतभारत(22075) -प्रस्थान का दिन-शुक्रवार -प्रस्थान -रात 9.45 बजे -आगमन-तीसरे दिन सुबह 6.25 बजे गोरखपुर से हैदराबाद अमृतभारत(22076) -प्रस्थान का दिन-रविवार -प्रस्थान -सुबह 8 बजे

सीएम युवा योजना से मिली नई पहचान, साधना ने खड़ा किया सफल वाटर प्लांट व्यवसाय

लखनऊ/इटावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पहल है, जो लोगों को रोजगार तलाशने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने का कार्य कर रही है। इटावा जनपद के महेवा क्षेत्र की रहने वाली साधना इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘जय भोले वाटर प्लांट’ की स्थापना की और आज सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं। समाचार पत्र से मिली योजना की जानकारी साधना बताती हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) की जानकारी एक समाचार पत्र के माध्यम से मिली। उस समय उनके पास कोई स्वयं का व्यवसाय नहीं था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया और अपना उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, सरकार की इस पहल ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान किया। वित्तीय सहायता से शुरू हुआ कारोबार अप्रैल 2025 में साधना को योजना के तहत 3.20 लाख रुपये का ऋण तथा 87 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘जय भोले वाटर प्लांट’ की स्थापना की। साधना बताती हैं कि व्यवसाय शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की व्यवस्था थी। पर्याप्त संसाधन न होने के कारण कारोबार शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन योजना से मिली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी। इसके बाद उन्होंने शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे ग्राहकों का विश्वास अर्जित किया। आज लाखों का कारोबार, कई परिवारों को मिला सहारा लगातार मेहनत और बेहतर सेवाओं के बल पर आज उनका वाटर प्लांट क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका है। वर्तमान में उनके उद्यम का वार्षिक टर्नओवर लगभग 4.20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। साधना का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण सेवा और ग्राहकों का भरोसा ही उनकी सफलता का आधार है। उनके इस उद्यम से 6 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला हुआ है, जिससे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। कारोबार को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य साधना का कहना है कि वह भविष्य में अपने वाटर प्लांट के कारोबार को और आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अधिक लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। उनका मानना है कि यदि मेहनत और सरकार की योजनाओं का सहयोग मिले तो आत्मनिर्भर बनने का सपना आसानी से साकार किया जा सकता है। साधना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।

भारत में SIR से 11.83 करोड़ नाम हटे, ब्राजील में पड़े थे 11.18 करोड़ वोट; क्या कहते हैं आंकड़े?

नई दिल्ली भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान यानी विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर नया बहस खड़ा हो गया है। अब तक की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 11.83 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिशत में यह आंकड़ा 12.1 है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 के ब्राजील आम चुनाव में कुल 11.18 करोड़ वोट पड़े थे। वहीं दुनिया में भारत और चीन के अलावा केवल 14 देश ही ऐसे हैं जिनकी कुल आबादी ही 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े पैमाने पर हटाए गए नाम ने देश में राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है। सरकार के आलोचकों का तर्क है कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों वैध और वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। दूसरी ओर सरकार के समर्थकों का दावा है कि केवल मृत, किसी दूसरे जगह पर चले गए और फर्जी मतदाताओं को ही सूची से बाहर किया गया है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि सच्चाई इन दोनों राजनीतिक दावों के बीच स्थित है। बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में संशोधन के बाद चुनाव हो चुके हैं। यहां एसआईआर के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात जैसे 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहां पूर्व सूची की तुलना में 10.7% नाम कम हुए हैं। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां अभी केवल ड्राफ्ट रोल जारी हुआ है वहां यह दर 17% तक देखी गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शुरुआत में नाम हटने की दर बहुत अधिक होती है, लेकिन दावे और आपत्तियां दर्ज होने के बाद अंतिम सूची में कई नाम वापस जुड़ जाते हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? आपको बता दें कि 17 राज्यों में चुनाव एसआईआर का ड्राफ्ट चरण पूरा हो चुका है। यहां एसआईआर से पहले 36.09 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल के बाद 29.94 करोड़ बचे। यहां अभी फाइनल वोटर लिस्ट आना बाकी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 8 ऐसे राज्य हैं जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई चुनाव नहीं हुआ है। ऐसे राज्यों में 34.01 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल में 29.25 करोड़ रह गए। फाइनल लिस्ट आने के बाद 30.36 करोड़ मतदाता बचे। मताधिकार से वंचित हो रहे हैं लोग? इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बावजूद अब तक के आंकड़े एक दिलचस्प पैटर्न दिखाते हैं। जिन राज्यों में संशोधन के बाद चुनाव हुए हैं, वहां कुल मतदान में बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। इसके विपरीत मतदाता सूची में कुल नाम कम होने के कारण मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियां नहीं हुई हैं। जमीनी स्तर पर और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वास्तविक मतदान संख्या घटी है। कई जगहों पर कागजी औपचारिकताओं के भारी बोझ के कारण नागरिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

28 लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, परिवार की आर्थिक मजबूती का बनीं आधार

‘लखपति दीदी’ बन प्रदेश की 28 लाख से अधिक महिलाएं बनीं परिवार की आर्थिक धुरी योगी सरकार के आजीविका मिशन से बदल रही ग्रामीण समृद्धि की तस्वीर 65 हजार से ज्यादा ग्राम संगठनों और 3,200 से अधिक संकुल स्तरीय संघों ने तैयार किया मजबूत आर्थिक तंत्र गरीब ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर उद्यमों से जोड़ रही योगी सरकार लखनऊ,  उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहीं हैं। कभी घर की चारदीवारी और खेती-किसानी में सहयोग तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब बचतकर्ता से उद्यमी और परिवार की सहयोगी से उसकी आर्थिक ताकत बन रही हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को व्यापक आधार दिया है। प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बने हैं और इनमें से 28 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण समृद्धि का नया चेहरा बन गई हैं। यह बदलाव केवल महिलाओं की आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पूंजी, उत्पादन, बाजार और रोजगार का नया चक्र भी खड़ा कर रहा है। आजीविका मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका विशाल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि गांवों में विकसित हो रहा सामुदायिक आर्थिक तंत्र है। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ महिलाओं का सफर अब बैंकिंग, ऋण, उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता तक पहुंच गया है।  योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की पहली सीढ़ी बनाया है। समूहों से आगे 65,544 ग्राम संगठनों और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का ढांचा खड़ा कर महिलाओं को ऐसा संस्थागत आधार दिया गया है, जो उनकी आजीविका को स्थायित्व और कारोबार को विस्तार दे रहा है। बचत की छोटी पूंजी बनी बड़े बदलाव का आधार ग्रामीण आजीविका मिशन की बुनियाद सामूहिकता की उस ताकत पर टिकी है, जिसमें महिलाएं संगठित होकर अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाती हैं। स्वयं सहायता समूह में नियमित छोटी बचत से शुरुआत होती है। यही बचत वित्तीय अनुशासन पैदा करती है और आगे बैंक ऋण तथा दूसरे संस्थागत वित्त तक पहुंच का रास्ता खोलती है। मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था ने उस ग्रामीण महिला के लिए भी उद्यमिता के द्वार खोले हैं, जिसके पास न बड़ी पूंजी थी और न बाजार तक सीधी पहुंच। खेती से जुड़ी गतिविधियों से लेकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और सेवा क्षेत्र तक महिलाएं आय के नए स्रोत विकसित कर रही हैं। इससे उनकी भूमिका परिवार की अतिरिक्त कमाई करने वाली सदस्य से आगे बढ़कर आर्थिक फैसलों में भागीदार की बन रही है। 28.16 लाख लखपति दीदियां बदलाव की सबसे बड़ी पहचान इस परिवर्तन की सबसे सशक्त तस्वीर प्रदेश की 28.16 लाख ‘लखपति दीदियां’ हैं। इन महिलाओं का लखपति बनना महज आय का एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संरचना में आ रहे बदलाव का संकेत है। नियमित और टिकाऊ आमदनी ने महिलाओं को परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए पूंजी तैयार करने की क्षमता भी दी है। महिला की आय बढ़ने का प्रभाव परिवार और गांव दोनों पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर खर्च की क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय बाजार में मांग भी पैदा होती है। यही वजह है कि लखपति दीदी अभियान को केवल महिला सशक्तीकरण के दायरे में देखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नीचे से ऊपर की ओर समृद्धि पैदा करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। गांव-गांव तक पहुंचा आर्थिक स्वावलंबन का नेटवर्क उत्तर प्रदेश में साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से सवा करोड़ परिवारों का जुड़ना मिशन के विस्तार की व्यापकता का बड़ा उदाहरण है। इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण परिवारों को संगठित करने से गांवों में महिलाओं की सामूहिक आर्थिक शक्ति तैयार हुई है। छोटे स्तर पर पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार की जिन चुनौतियों का सामना अकेली महिला के लिए कठिन होता था, योगी सरकार के सहयोग और सामूहिक शक्ति ने उनका समाधान आसान किया है। इस मॉडल की विशेषता यह भी है कि गरीब परिवार की आजीविका को चरणबद्ध ढंग से मजबूत किया जाता है। पहले महिला को समूह से जोड़ना, फिर बचत और वित्तीय अनुशासन विकसित करना और उसके बाद ऋण, कौशल, उत्पादन तथा बाजार से जोड़ना, यही क्रम आत्मनिर्भरता की बुनियाद तैयार कर रहा है। 65,544 ग्राम संगठन बने समूहों की ताकत स्वयं सहायता समूहों को दीर्घकालिक और संस्थागत मजबूती देने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का नेटवर्क खड़ा किया गया है। इस व्यवस्था ने गांव की महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के संचालन और आर्थिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी भागीदार बनाया है। मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्राम संगठन स्थानीय स्तर पर समूहों के बीच समन्वय, वित्तीय अनुशासन और आजीविका गतिविधियों को मजबूती देते हैं, जबकि संकुल स्तरीय संघ उन्हें बड़े बाजार, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। इसी मजबूत ढांचे के सहारे मिशन की ‘आत्मनिर्भर महिला, आदर्श परिवार और समृद्ध संस्था’ की अवधारणा गांवों में मूर्त रूप ले रही है।

जीआईएस आधारित नवाचार के लिए मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर ‘अचीवमेंट इन जीआईएस अवार्ड’

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सशक्त नेतृत्व और मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश नगरीय विकास, सूचना प्रौद्योगिकी तथा आधुनिक तकनीकों के समन्वय से प्रशासनिक दक्षता के नए मानदंड स्थापित कर रहा है। इसी श्रृंखला में राज्य के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा विकसित एकीकृत जीआईएस आधारित प्लेटफॉर्म 'गरुड़' (जीआईएस आधारित अर्बन डेटा एनालिटिक्स सेंटर) के उत्कृष्ट और नवोन्मेषी उपयोग के लिए मध्यप्रदेश को प्रतिष्ठित ‘अचीवमेंट इन जीआईएस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के समारोह में एसरी इंडिया निदेशक  अजेन्द्र कुमार ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त  संकेत भोंडवे को यह सम्मान प्रदान किया।  नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप राज्य में तकनीक-आधारित सुशासन और पारदर्शी नगरीय प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे ठोस प्रयासों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 'गरुड़' के माध्यम से डेटा को निर्णय लेने का मुख्य आधार बनाया गया है, जिससे नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति, प्रशासनिक दक्षता और नागरिक सेवा वितरण प्रणाली में व्यापक सुधार आ रहा है। 'गरुड़' एक अत्याधुनिक एकीकृत जीआईएस आधारित डेटा एनालिटिक्स सेंटर है, जो नगरीय निकायों के विभिन्न शहरी और राजस्व संबंधी आंकड़ों को एक मंच पर लाकर उनका स्थानिक विश्लेषण करता है। इस डिजिटल नवाचार के माध्यम से राज्य के नगरीय निकायों में संपत्ति एवं राजस्व का मानचित्र-आधारित विश्लेषण, अपंजीकृत तथा संभावित नई संपत्तियों की सटीक पहचान और राजस्व संवर्धन के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, जलापूर्ति एवं सीवरेज नेटवर्क, भूमि उपयोग, अतिक्रमण नियंत्रण, भवन अनुज्ञा और नगरीय अधोसंरचना की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी को अत्यंत सुदृढ़ और पारदर्शी बनाया गया है।  गरुड़ प्रणाली के अंतर्गत विकसित पर्यवेक्षण मॉडल के माध्यम से नागरिक सुविधाओं और परिसंपत्तियों की वर्तमान स्थिति का सटीक डेटा-संचालित विश्लेषण संभव हो रहा है। यह प्रणाली शहरी निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने, बुनियादी ढांचे के रख-रखाव और जन-सुविधाओं के सुगम प्रबंधन में निर्णायक भूमिका निभा रही है।  

सहायक आचार्य भर्ती में B.Ed धारकों को राहत, झारखंड HC ने नियुक्ति पर पुनर्विचार के दिए आदेश

रांची. हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति बीएड की डिग्री को लेकर उम्मीदवारी खारिज किए गए अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अदालत ने शिल्पा कुमारी एवं अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए जेएसएससी को उनकी उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप दोबारा विचार करने और नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामले में याचिकाकर्ताओं को जेएसएससी की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि उनके द्वारा प्राप्त बीएड की डिग्री विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की शर्तों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता ज्ञानदेव राज ने अदालत को बताया कि प्रार्थी ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के प्रविधानों के अनुरूप बीएड की डिग्री हासिल की है। उनके पास झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) का प्रमाणपत्र भी है। ऐसे में वे विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि केवल बीएड की अवधि या उसकी प्रकृति के आधार पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विप्लव दत्ता एवं अन्य के मामले में पारित आदेश के आलोक में याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने जेएसएससी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुसार विचार करे और उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के संबंध में उचित निर्णय ले। माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका निष्पादित झारखंड हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी। सुनवाई के दौरान जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा कर दी गई है। 204 पदों के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल सके हैं। वहीं, 292 अभ्यर्थियों के दस्तावेज के सत्यापन के दौरान कुछ त्रुटियां पाई गई हैं। इन अभ्यर्थियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग की ओर से अदालत को नियुक्ति प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत से माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया गया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्परीक्षा कराए जाने को गलत माना है। एकल पीठ ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया है। जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि खंडपीठ और एकल पीठ के आदेश के बाद मामले की परिस्थितियां अलग हो गई हैं। इस पर खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है। जेएसएससी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी।