samacharsecretary.com

दीपोत्सव से सजेगी रामनगरी, 5 से 8 नवंबर तक होंगे भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

अयोध्या योगी सरकार में अपनी विशेष पहचान बना चुका अयोध्या का 10वां दीपोत्सव इस बार और भव्य होगा। दीपोत्सव और कार्तिंक पूर्णिमा मेला को भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दोनों आयोजनों की विभागवार तैयारियों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पांच से आठ नवंबर तक होंगे दीपोत्सव के प्रमुख आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पांच नवंबर को गोवत्स द्वादशी, छह नवंबर को धनत्रयोदशी, सात नवंबर को मास शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली एवं हनुमान जयंती और आठ नवंबर को दीपावली के अवसर पर रामनगरी में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम होंगे। दीपोत्सव के दौरान साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा और झांकियां निकाली जाएंगी। इसके लिए ट्रॉली-ट्रक, मंच समेत अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। रामकथा पार्क के निकट हेलीपैड की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। रामकथा पार्क से राम की पैड़ी तक दिखेगी दीपोत्सव की छटा रामकथा पार्क में श्रीराम-सीता स्वरूप की वंदना, प्रदर्शनी, लोकार्पण कार्यक्रम, रामलीला एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। सरयू आरती स्थल पर मंच, सजावट, पुष्प एवं अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। राम की पैड़ी समेत प्रमुख स्थलों को दीपोत्सव की थीम पर सजाया जाएगा। स्वर्ग द्वार की पुताई, राम की पैड़ी की विशेष सफाई, धार्मिक स्थलों पर दीप सज्जा, फूलों की चेन, गमले, घाटों की रैलिंग और लाइटिंग की मरम्मत समेत विभिन्न कार्य कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष जोर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए परिवहन, विश्राम स्थल, चिकित्सा, पेयजल, शौचालय, सफाई और प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए फ्लोटिंग जोन, बैरियर, सीसीटीवी और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। मीडिया सेंटर और प्रेस पास की व्यवस्था भी की जाएगी। 18 नवंबर को चौदहकोसी, 20 को पंचकोसी परिक्रमा परिक्रमा एवं कार्तिक पूर्णिमा मेले के लिए भी तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 नवंबर 2026 को चौदहकोसी परिक्रमा एवं अक्षय नवमी होगी। परिक्रमा 17/18 नवंबर की रात 1:10 बजे से शुरू होकर 18/19 नवंबर की रात 2:55 बजे तक चलेगी। 20 नवंबर को पंचकोसी परिक्रमा एवं एकादशी होगी। यह 20 नवंबर की रात 3:01 बजे से शुरू होकर 21 नवंबर की रात 2:37 बजे तक चलेगी।‌24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा स्नान एवं गुरु नानक जयंती का आयोजन होगा। स्नान का निर्धारित समय 23 नवंबर की रात 10:48 बजे से 24 नवंबर की रात 8:52 बजे तक रहेगा। अतिरिक्त बसें और विशेष ट्रेनें चलाने की तैयारी श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसों, अस्थायी बस स्टैंड और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था के लिए कार्रवाई की जाएगी। रेलवे स्टेशन पर सफाई, पेयजल, प्रकाश और बैरियर की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। पार्किंग स्थलों का चयन कर यातायात और भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। पुलिस विभाग पर्याप्त बल के साथ जल पुलिस, मोटर बोट, अग्निशमन दल और ट्रैफिक व्यवस्था संभालेगा। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा कि दीपोत्सव और परिक्रमा-कार्तिक पूर्णिमा मेला अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रमुख आयोजन हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुगम वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित कार्य समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एमपी के खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन

भोपाल पंजाब के लुधियाना स्थित गुरु नानक स्टेडियम में 01 से 03 सितंबर 2026 तक आयोजित की जा रही 21वीं राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 में मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिता में अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक अपने नाम किए हैं। इनमें कृष्ण चंद्र ने जैवलिन थ्रो में नया मीट रिकॉर्ड कायम कर स्वर्ण पदक जीतकर विशेष उपलब्धि हासिल की। जैवलिन थ्रो में कृष्ण चंद्र का नया मीट रिकॉर्ड प्रतियोगिता के बुधवार शाम आयोजित मुकाबलों में बॉयज जैवलिन थ्रो स्पर्धा में मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ी कृष्ण चंद्र ने 79.92 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रतियोगिता का नया मीट रिकॉर्ड भी कायम किया। कृष्ण चंद्र के शानदार प्रदर्शन से पहले इस स्पर्धा का मीट रिकॉर्ड 77.41 मीटर था, जो रोहित यादव ने वर्ष 2018 में बनाया था। कृष्ण चंद्र ने 79.92 मीटर का प्रदर्शन कर पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। हेप्टाथलॉन में नागर सिंह कनेश ने जीता स्वर्ण हेप्टाथलॉन स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी नागर सिंह कनेश ने 4812 अंकों के शानदार प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। नागर सिंह ने स्पर्धा के विभिन्न इवेंट्स में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया और मध्यप्रदेश को स्वर्णिम सफलता दिलाई। 1000 मीटर में रंगलाल डोडिया ने जीता कांस्य वहीं 1000 मीटर स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी रंगलाल डोडिया ने 2 मिनट 26.83 सेकंड के शानदार समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। रंगलाल ने अपनी गति और दमदार प्रदर्शन के साथ स्पर्धा में तीसरा स्थान प्राप्त किया। राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा ने छोड़ी छाप 21वीं राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन उनकी मेहनत, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है। विशेष रूप से जैवलिन थ्रो में नया मीट रिकॉर्ड कायम करना प्रदेश की उभरती एथलेटिक्स प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों द्वारा हासिल की जा रही यह सफलता मध्यप्रदेश में विकसित हो रही खेल संस्कृति और अकादमियों में खिलाड़ियों को मिल रहे उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है। खेल मंत्री  सारंग ने दी बधाई सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण एवं कांस्य पदक जीतने वाले नागर सिंह कनेश, कृष्ण चंद्र एवं रंगलाल डोडिया को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और कृष्ण चंद्र द्वारा नया मीट रिकॉर्ड कायम किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की यह उपलब्धि प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।  

मुख्यमंत्री ने स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह समेत 1051 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

मथुरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रज की धरा से प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन में स्वामी  हरिदास प्रेक्षागृह समेत 1051 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इसमें 540 करोड़ से अधिक की 62 परियोजनाओं का लोकार्पण, 437 करोड़ से अधिक लागत की 167 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। साथ ही आवास योजना के लाभार्थियों के खाते में 72 करोड़ से अधिक की धनराशि स्थानांतरित की गई। सीएम ने ब्रज, अयोध्या, काशी आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भले ही मंदिरों को तोड़ा, लेकिन वे हमारी भक्ति को कभी नहीं डिगा पाए।  हरिदास जी ने साधना को समाज की चेतना से जोड़ा मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी हरिदास जी महाराज ने भक्ति को संगीत का स्वरूप दिया। संगीत को साधना बनाया और इसे समाज की चेतना से जोड़ा। उनकी साधना ने एक सम्राट को भी भक्ति रस के साथ जोड़ने का अद्भुत कार्य किया। महान संगीतज्ञ तानसेन स्वामी हरिदास जी के शिष्य थे। विकास को केवल सड़क, बिजली, पानी के चश्मे से देखा गया सीएम ने कहा कि हम लोगों ने लंबे समय तक विकास को केवल सड़क, बिजली, पानी, भवन और उद्योग के चश्मे से देखने की कोशिश की। विकास के नाम पर विरासत का अपमान होता रहा। इतिहास के नायकों को भारतीय स्मृति से मिटाने की कोशिश हुई। पहले विदेशी आक्रांताओं, फिर अंग्रेजों ने हमारे इतिहास और ऐतिहासिक चिन्हों को नष्ट किया, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने तो हमारी विरासत की उपेक्षा व अपमान की हद पार कर दी।  2017 से पहले उत्सव नहीं, उपद्रव होता था सीएम ने कहा कि अब मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन, बलदेव क्षेत्र जिस विरासत और उत्सव के लिए जाना जा रहा है, वह 2017 के पहले संभव नहीं था। सीएम ने जून 2016 के जवाहर बांग कांड के उपद्रव और इसमें 29 लोगों के मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें हमारे दो पुलिस अधिकारी भी बलिदान हुए थे। ऐसे उपद्रव प्रदेश में उत्सव, विकास, सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण की कल्पना कौन कर सकता था। एक राष्ट्र अपनी स्मृति, संस्कृति, जड़ों को ढूंढने से महान बनता है। जिस समाज को विरासत का बोध होता है, वह दुनिया से सीखता और दुनिया को सिखाता भी है। संघर्ष, संरक्षण, पुनर्निर्माण, सनातन की निरंतरता का इतिहास सीएम ने कहा कि भारत का इतिहास केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि संघर्ष, संरक्षण, पुनर्निर्माण, सनातन की निरंतरता का इतिहास है। मथुरा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कृष्ण जन्मभूमि स्थित केशव देव मंदिर ने कई आक्रमण सहे हैं। विदेशी आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े, लेकिन वे कृष्ण, राधारानी की स्मृति को नहीं मिटा पाए। न जन्माष्टमी का आयोजन रुका और न ही वृंदावन की भक्ति। न बरसाना की होली थमी और न गोवर्धन की परिक्रमा। यही है सनातन और ब्रज की शक्ति।  निरंतर बढ़ती रही सनातन की आभा मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में मंदिरों पर प्रहार के प्रसंग मिलते हैं, किंतु उसी कालखंड में ब्रज की धरती पर स्वामी हरिदास जैसे संत साधना से संगीत की ऐसी धारा विकसित करते हैं, जिसकी गूंज सदियों से चली आ रही है। यह अनंत काल तक हर संगीतज्ञ को आकर्षित करती रहेगी। काशी विश्वनाथ का मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा, लेकिन परंपरा कभी समाप्त नहीं हुई। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने मंदिर के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज काशी विश्वनाथ धाम भव्यता और आधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जा रहा है। अयोध्या में बाबर ने 1528 में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर को तोड़ कर गुलामी का ढांचा बनवा दिया, लेकिन इससे रामनवमी, पंचकोसी, 14 कोसी और 84 कोसी परिक्रमा, सावन का झूला मेला नहीं रुका। सनातन की आभा निरंतर बढ़ती रही और संघर्ष का जज्बा पैदा करती रही। इसी का परिणाम है कि अयोध्या में प्रभु राम का भव्य मंदिर बन गया है।  लोक कल्याण के लिए संतों ने समर्पित किया जीवन  सीएम ने कहा कि भारत को समझने के लिए संतों और कलाकारों की लोक विधा की कला को समझना पड़ेगा। क्रांतिकारियों और उन करोड़ों भारतीयों को पढ़ना होगा, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी इस सभ्यता को जीवित रखा। महाराज सुहेलदेव, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, महारानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य से लेकर एक लंबी परंपरा चली आई है। पूज्य संतों ने लोक कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।  मंदिरों, भाषाओं, साहित्य, संगीत, कला समेत हर क्षेत्र में है विरासत  मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत केवल किसी भौतिक वस्तु में नहीं होती। यह हमारे मंदिरों, भाषाओं, साहित्य, संगीत, कला, दर्शन, गणित, विज्ञान, चिकित्सा, खगोल ज्ञान, लोक व ज्ञान परंपराओं में भी है। डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में इसमें नए आयाम (विरासत, विकास, आस्था, आर्थिकी, परंपरा और परिवर्तन भी) और आधुनिकता को भी जोड़ा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन, नंदगांव, बलदेव, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली, नैमिषारण्य, सारनाथ, कुशीनगर जैसे तीर्थ स्थलों का विकास कर हम वर्तमान और भावी पीढ़ी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नयन को बढ़ा रहे हैं। बदलते उत्तर प्रदेश, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत कानून व्यवस्था और विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रमाण है कि गत वर्ष 156 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए। विरासत से जुड़कर ही विकसित व आत्मनिर्भर राष्ट्र बनेगा भारत सीएम ने ब्रज की धरा से स्पष्ट संदेश दिया कि भारत विरासत से जुड़कर ही विकसित व आत्मनिर्भर राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करेगा। इसके लिए महिला, युवा, किसान, उद्यमी, कारीगर, हस्तशिल्पी समेत हर तबके का उन्नयन होना चाहिए। कानून का राज इसकी पहली शर्त है। श्रद्धालु, पर्यटक, निवेशक तभी आएंगे, जब उन्हें सुरक्षा पर भरोसा होगा। मां-बेटी तभी निर्भय होकर बाहर निकलेंगी, जब उसका शासन पर विश्वास होगा। सावन में गाजियाबाद से लेकर हरिद्वार के बीच 5 करोड़ कांवड़ यात्री निकले। अन्य मार्गों पर भी यह संख्या करोड़ों में रही।  2017 से पहले उपद्रव होता था, अब उत्सव से पहले तैयारियां सीएम ने कहा कि बरेली में महीनों दंगे होते थे। दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर सम्मानित किया जाता था। मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मेरठ, लखनऊ में दंगे होते थे, लेकिन साढ़े 9 वर्ष में यूपी कर्फ्यू व दंगा मुक्त है। अब उत्सव हमारी पहचान है। अब मथुरा-वृंदावन में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आते हैं। रंगोत्सव, वैष्णव कुंभ, दुर्गा पूजा, … Read more

मुख्य सचिव ने विभागों में रिक्त पदों और भर्तियों की स्थिति की ली उच्च स्तरीय बैठक

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के सभी विभागों के भारसाधक सचिवों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न प्रशासकीय विभागों में स्वीकृत, भरे और रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत विभागवार समीक्षा की गई।  बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित की जा रही भर्ती परीक्षाओं और भेजे गए इंडेंट (मांग पत्र) की प्रगति की जानकारी ली। इसके साथ ही, विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति हेतु वित्त विभाग से मिली सहमति, पूर्व में विज्ञापित पदों की स्थिति तथा अब तक की गई नियुक्तियों का ब्योरा तलब किया गया। बैठक में वर्ष 2027 के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले संभावित पदों और सभी विभागों में अद्यतन (अपडेटेड) भर्ती नियमों की स्थिति पर भी गहनता से चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं को गति देना, नियमों को अद्यतन करना और आने वाले वर्षों के लिए नियोजन की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना था। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभिन्न प्रमुख विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़ चयन मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।  बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव मती निहारिका बारिक सिंह, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव मती शहला निगार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चम्पावत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव  पी.दयानंद, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, परिवहन विभाग के सचिव  एस.प्रकाश सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ चयन मंडल के अधिकारी मौजूद थे।

जनवरी 2026 से अब तक 83 अस्पतालों पर कार्रवाई

भोपाल  आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन तथा पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश में योजना से संबद्ध अस्पतालों की निरंतर निगरानी एवं जांच की जा रही है। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा रही है। जनवरी 2026 से अब तक प्रदेश में 83 अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इनमें 18 अस्पतालों का डी-एम्पेनेलमेंट, 15 अस्पतालों पर स्टॉप पेमेंट तथा 50 अस्पतालों पर कुल 3 करोड़ 13 लाख 79 हजार 311 रुपये की पेनल्टी अधिरोपित की गई है। भोपाल के अस्पतालों पर भी नियमानुसार कार्रवाई भोपाल में प्राप्त शिकायतों एवं जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। सिद्धांता रेडक्रॉस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना से निलंबित किया गया है तथा स्टॉप पेमेंट की कार्रवाई की गई है। वहीं, मल्टी केयर अस्पताल, भोपाल के संबंध में कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त दो अन्य अस्पतालों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों के संबंध में आयुष्मान भारत जांच दल द्वारा निरीक्षण किया गया है। उपलब्ध अभिलेखों एवं जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अरविंद शाह ने कहा कि आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योजना का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण, सुगम एवं पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की नियमित जांच, क्लेम की समीक्षा, उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण तथा संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। प्राप्त अन्य शिकायतों का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।  

मध्यप्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग का पायलट परीक्षण शुरू : मंत्री सिंह

भोपाल  मध्यप्रदेश में टोल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुगम और निर्बाध बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण नवाचार की शुरुआत की गई है। भोपाल–देवास मार्ग के फंदा टोल प्लाजा पर प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (SLFF) का पायलट परीक्षण शुरू किया गया है। इस व्यवस्था में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और पारंपरिक बूम बैरियर के कारण होने वाली अनावश्यक ब्रेकिंग एवं समय की बर्बादी से भी यात्रियों को राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अधिकारियों ने इस नवाचार और इसके क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया का लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुतीकरण के बाद मंत्री  सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि पायलट परीक्षण के दौरान प्राप्त परिणामों का विधिवत मूल्यांकन किया जाए और इसके आधार पर इसे प्रदेश में वृहद स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। मंत्री  सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में सड़क अधोसंरचना के विकास के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था का उद्देश्य केवल बेहतर सड़क उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और समय की बचत वाली यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना भी है। बैरियर-लेस टोलिंग इसी सोच के अनुरूप किया जा रहा एक महत्वपूर्ण नवाचार है। मंत्री  सिंह ने कहा कि जनता की सुविधा की दृष्टि से यह एक उपयोगी पहल है। वर्तमान व्यवस्था में टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के कारण रुकना पड़ता है, जिससे कई बार वाहनों की कतार और अनावश्यक यातायात दबाव की स्थिति बनती है। नई व्यवस्था में वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होगी तथा टोल प्लाजा पर लगने वाली अनावश्यक भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी। चलते वाहन से स्वतः होगा टोल संग्रह नई तकनीक में चलते हुए वाहन की स्वतः पहचान, वर्गीकरण और फास्टेग के विवरण के आधार पर टोल राशि का संग्रह किया जाएगा। वाहन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजरते हुए भी टोल प्लाजा को पार कर सकेगा। इससे बूम बैरियर के कारण होने वाली ब्रेकिंग और समय की बर्बादी समाप्त होगी। SLFF लेन में फास्टेग/RFID रीडर, हाई-रिजॉल्यूशन ANPR कैमरे, वाहन डिटेक्शन एवं क्लासिफिकेशन सेंसर, लेन कंट्रोलर तथा ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। वाहन के लेन से गुजरते ही सिस्टम फास्टेग को स्वतः रीड कर वाहन की पहचान करता है, वाहन की श्रेणी के अनुसार टोल राशि की गणना करता है और फास्टेग खाते से राशि काटने की प्रक्रिया पूरी करता है। फास्टेग में समस्या होने पर ई-चालान नई व्यवस्था में फास्टेग से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान की व्यवस्था भी की गई है। यदि फास्टेग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, वाहन का पंजीकरण नंबर गलत दर्ज है अथवा किसी अन्य तकनीकी कारण से टोल राशि तत्काल प्राप्त नहीं हो पाती है, तो संबंधित वाहन को ई-चालान के माध्यम से टोल राशि की सूचना दी जाएगी। निर्धारित तीन दिवस में राशि जमा नहीं करने पर नियमानुसार पेनल्टी सहित वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल परीक्षण के बाद होगा व्यापक विस्तार वर्तमान में फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में इस व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के परिणामों का विधिवत मूल्यांकन करने के बाद सफल पाए जाने पर 1 जनवरी 2027 से भोपाल–देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इसे लागू करने की योजना है। मंत्री  सिंह ने निर्देश दिये कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर इस तकनीक की उपयोगिता, कार्यक्षमता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधा का आकलन किया जाए। इसके बाद प्रदेश के अन्य उपयुक्त टोल प्लाजा पर भी बैरियर-लेस टोलिंग लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा शुरू किया गया यह नवाचार प्रदेश में टोलिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास है कि सड़क पर नागरिकों को कम से कम रुकना पड़े, यात्रा में कम समय लगे और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उन्हें अधिकतम सुविधा मिले। बैरियर-लेस टोलिंग जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाएं भविष्य में प्रदेश की सड़क यात्रा को और अधिक सुगम एवं निर्बाध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।  

मरीजों की अनदेखी पर बड़ा एक्शन, 26 डॉक्टर बर्खास्त

लखनऊ  सरकारी अस्पतालों में मरीजों की अनदेखी और ड्यूटी में लापरवाही भारी पड़ी। लगातार ड्यूटी से गैरहाजिर रहने और चिकित्सीय दायित्वों का पालन नहीं करने वाले 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही के मामले में नौ अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।  डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने लंबे समय से अनुपस्थित और लापरवाही के आरोपों से जुड़े मामलों की समीक्षा की। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों को समय पर, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। ड्यूटी से गायब रहने या चिकित्सीय दायित्वों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति, ओपीडी-आईपीडी सेवाओं और मरीजों को मिल रहे उपचार की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई बर्खास्त किए गए 26 डॉक्टर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात थे। इनमें फिरोजाबाद, अलीगढ़, गाजीपुर, हरदोई, महोबा, बुलंदशहर, लखनऊ, बलरामपुर, मथुरा, मीरजापुर, झांसी, बरेली, गोरखपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, चंदौली, मैनपुरी, मऊ, सुलतानपुर और मुजफ्फरनगर समेत कई जिले शामिल हैं। वहीं इटावा, रामपुर, मेरठ, बदायूं, भदोही, बलरामपुर और गौतमबुद्ध नगर में तैनात नौ डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। फिरोजाबाद के कायमगंज सीएचीस के डॉ. स्वदेश कुमार, अलीगढ़ डॉ. वीरेंद्र सिंह, गाजीपुर में स्त्री रोग विभाग डॉ. स्वाती विश्वकर्मा, हरदोई में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. बृजेश यादव, महोबा में ईएनटी सर्जन डॉ. ईशान दीक्षित, बुलंदशहर की डॉ. स्वाती आनंद, लखनऊ सिविल हॉस्पिटल डॉ. मनोज कुमार चौरसिया, हरदोई बावन पीएचसी के डॉ. मो. उताउर रहमान, भटपुर पीएचसी डॉ. मनीष खन्ना, बलरामपुर डॉ. अक्षय लेले, मथुरा गोवर्धन सीएचसी जनरल सर्जन डॉ. राकेश फौजदार, मीरजापुर  जरनल सर्जन डॉ. नरेंद्र कुमार जायसवाल, झांसी बबीना सीएचसी की डॉ. निशा बुंदेला, गाजीपुर डॉ. अचल सिंह, बरेली के डॉ.शशांक वर्मा, गोरखपुर ब्रहम्हपुर पीएचसी डॉ. विशाल कुमार सिंह, सहारनपुर गंगोह सीएचसी डॉ. इन्द्रजीत सिंह, मुरादाबाद डॉ. मोहम्मद शबाब खान, चन्दौली से डॉ. राजेश कुमार सिंह, मुरादाबाद के डॉ. मुजफर अली, मैनपुरी डॉ. कृष्ण मुरारी द्विवेदी, मुरादाबाद डॉ. फरयाद हुसैन, मऊ डॉ. तनवीर फरीदी, सुलतानपुर लोकनाथपुर पीएचसी के डॉ. आशुतोष शुक्ला, अमनाईकपुर पीएचसी डॉ. सुशील कुमार खरवार, मुजफ्फरनगर डॉ. कुंवर विक्रांत को बर्खास्त किया गया है। विभागीय कार्रवाई के निर्देश उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही नौ डॉक्टरों पर भारी पड़ी। डिप्टी सीएम ने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य को विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनमें इटावा के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीनिवास यादव, रामपुर के डॉ. केक चहल,  मेरठ की डॉ. संगीता चोपड़ा, बदायूं के कादरचौक सीएचसी के डॉ. अवधेश राठौर, भदोही के डॉ. संतोष चक, बलरामपुर के डॉ. सुमित कुमार, भदोही के डॉ.धीरज प्रकाश, गौतमबुद्ध नगर के अरविन्द मलिक और डॉ. असद शामिल हैं।

अवैध खनन एवं परिवहन पर साय सरकार की सख्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रेत एवं मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है। कलेक्टर  विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी दौरान विभागीय टीम ने सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 3 ट्रैक्टर वाहनों तथा ज्योतिपुर तिराहा में ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का अवैध परिवहन करते हुए 1 ट्रैक्टर वाहन को पकड़ा। सभी 4 वाहनों को जब्त कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें 3 ट्रैक्टर वाहनों को अमरपुर थाना परिसर तथा 1 ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(क) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता कलेक्टर  विजय दयाराम के. ने जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले के प्राकृतिक संसाधन जनता की सामूहिक संपत्ति हैं और इनके अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा खनिज संपदा के संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन एवं परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। सुशासन की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल राज्य सरकार की सुशासन नीति के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और अवैध गतिविधियों पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी अंकुश लगाना, शासन के राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी है। लगातार जारी रहेगी निगरानी और कार्रवाई खनिज विभाग ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं खनिजों के अनधिकृत उपयोग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अमला विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जांच एवं कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक  सुजीत कंवर,  शिवकुमार लहरे,  सतीश साहू एवं सैनिक  साहिब गनी शामिल रहे।

डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय डिलीवरी करें सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ई-एचएमआईएस (e-HMIS) की प्रगति एवं क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रबंधन का सशक्त डिजिटल माध्यम बनाया जाए, जिससे मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलें और विभागीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस. ने ई-एचएमआईएस के वर्तमान क्रियान्वयन, विभिन्न मॉड्यूल्स की प्रगति, डिजिटल सेवाओं के एकीकरण और आगामी कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। मरीजों की डिजिटल केस हिस्ट्री हो उपलब्ध उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस में प्रत्येक मरीज का समुचित डिजिटल डेटाबेस और केस हिस्ट्री तैयार हो। मरीज के पूर्व उपचार, जांच, दवाओं और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में सुविधा होगी और मरीज को बार-बार अपनी पिछली चिकित्सा जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को इस प्रकार विकसित किया जाए कि मरीज के उपचार की निरंतरता बनी रहे और आवश्यकता के अनुसार अधिकृत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं को संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके। लैब सेवाओं को ई-एचएमआईएस से जोड़ा जाए उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध लैब सेवाओं एवं जांच प्रक्रियाओं को ई-एचएमआईएस से इंटरकनेक्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीज की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार होने की प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली से जुड़ी हो, जिससे जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध हो और चिकित्सक उसे उपचार के दौरान तत्काल देख सकें।उन्होंने जांच रिपोर्ट की समयबद्धता, शुद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी डिजिटल माध्यम से प्रभावी रूप से प्रबंधित की जा सके। दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की रियल टाइम निगरानी उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा के लिए ई-एचएमआईएस को दवा वितरण एवं स्टॉक प्रबंधन प्रणाली से प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, वितरण, खपत और स्टॉक की स्थिति की नियमित एवं रियल टाइम निगरानी हो, ताकि किसी भी स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक दवाओं की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि दवा स्टॉक की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड एवं आवश्यक अलर्ट आधारित व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक जानकारी समय पर प्राप्त हो सके और आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जा सके। डेटा संकलन से आगे बढ़कर बने प्रबंधन का प्रभावी माध्यम उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि ई-एचएमआईएस का उद्देश्य केवल डेटा संकलन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं की योजना, निगरानी, विश्लेषण और बेहतर प्रबंधन के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली, मरीजों को उपलब्ध सेवाओं, जांच, दवा वितरण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम स्थिति की जानकारी प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं समय पर उपलब्ध हों, इसके लिए डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। उपलब्ध डेटा के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो। स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच डिजिटल इंटरकनेक्टिविटी पर जोर उपमुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि ई-एचएमआईएस के विभिन्न मॉड्यूल्स के बीच बेहतर इंटरकनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। मरीज का पंजीयन, उपचार, जांच, रिपोर्ट, दवा एवं अन्य संबंधित सेवाओं का डेटा एकीकृत डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध होने से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस के क्रियान्वयन में आने वाली तकनीकी एवं व्यावहारिक कठिनाइयों की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान किया जाए तथा स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए। रियल टाइम मॉनिटरिंग से बेहतर होगी जवाबदेही उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि डिजिटल प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण लाभ रियल टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य संस्थाओं से प्राप्त डिजिटल जानकारी के आधार पर अधिकारियों को सेवाओं की स्थिति का नियमित आकलन करने में सुविधा होनी चाहिए। इससे समस्याओं की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया अधिक तेज होगी। उन्होंने कहा कि ई-एचएमआईएस के माध्यम से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं एवं नीतिगत निर्णयों के लिए भी किया जाए, ताकि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि ई-एचएमआईएस को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल रीढ़ के रूप में विकसित किया जाए, ताकि तकनीक के माध्यम से मरीजों को तेज, पारदर्शी, सुगम और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।  

घर में अचानक भड़क रही आग से दहशत! डबरा में 3 दिन से कपड़े-बिस्तर जलने का सिलसिला

डबरा भितरवार अनुविभाग की ग्राम पंचायत पुरा बनवार में पिछले तीन दिनों से एक परिवार के घर में अचानक आग लगने की घटनाओं ने ग्रामीणों को हैरान कर दिया है। घर में रखे कपड़े, बिस्तर, बक्से, साड़ियां और अन्य सामान अचानक आग की चपेट में आ रहे हैं। परिवार का कहना है कि रोजाना पहनने वाले कपड़ों से लेकर घर में रखे सामान तक में अचानक आग लग रही है। चार माह पहले हुई बेटे की शादी के बाद घर में आई नई बहू की साड़ी भी अचानक आग की चपेट में आ चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं से परिवार भय और चिंता के माहौल में है। परिवार को उठाना पड़ रहा है भारी नुकसान परिवार के अनुसार पुरा बनवार निवासी इंदर कुशवाह के घर में मंगलवार से आग लगने का सिलसिला शुरू हुआ। मंगलवार को अलग-अलग स्थानों पर करीब चार से पांच बार आग लगी। इसके बाद बुधवार को दो बार और गुरुवार को भी तीन से चार बार आग लगने की घटना बताई गई है। खास बात यह है कि आग घर में रखे अलग-अलग सामान में लग रही है, जिससे परिवार के सदस्य लगातार सतर्क रहकर सामान को सुरक्षित करने और आग बुझाने में जुटे हुए हैं। हालांकि इस रहस्यमई आग की घटना में संबंधित परिवार का भारी नुकसान हो चुका है। ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं लगातार आग लगने की जानकारी गांव में फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंच रहे हैं। लोग अपनी आंखों से घटनाक्रम को देखने का प्रयास कर रहे हैं। आग लगने का कारण सामने नहीं आने से ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। घटना की जानकारी मिलने पर ग्राम पंचायत सरपंच नीतू परिहार, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा जिला ग्रामीण अध्यक्ष बनवारी सिंह परिहार और पंचायत सचिव भरोसी कुशवाहा, ग्राम पटवारी के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार के सदस्यों से घटनाओं की जानकारी ली और स्थिति का जायजा लिया। साथ ही मामले से प्रशासन को अवगत कराया गया है, ताकि आग लगने के वास्तविक कारण की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सके।