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छत्तीसगढ़ में हजारों वनकर्मियों को बड़ी राहत! 3630 दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ

 रायपुर  छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत 3,630 कार्यभारित और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें 966 तृतीय श्रेणी और 2,664 चतुर्थ श्रेणी के पद शामिल हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की सहमति मिलने के बाद सेवा शर्तों और भर्ती नियमों का प्रारूप तैयार करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद शासन स्तर पर नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वन विभाग ने कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए भर्ती तथा सेवा शर्तें नियम, 2024 लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। प्रस्ताव को जीएडी की सहमति मिल चुकी है। इसके बाद अब नियमों को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू की गई है। विभागीय स्तर पर इसे नियमितीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। चार सदस्यीय समिति करेगी परीक्षण अधिसूचना प्रारूप तैयार करने के लिए जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव अमिताभ बाजपेयी की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। मुख्य वन संरक्षक, रायपुर वृत्त मणिवासगन एस. और वनमंडलाधिकारी, गरियाबंद मयंक पाण्डेय को सदस्य बनाया गया है जबकि उप वन संरक्षक रौनक गोयल समिति के सदस्य सचिव बनाए गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के आदेश के अनुसार समिति को कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और संबंधित नियमों के सभी पहलुओं का परीक्षण करना होगा। इसके बाद अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करना होगा। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वर्षों से अस्थायी व्यवस्था में कर रहे काम वन विभाग में बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से दैनिक वेतन या अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत सेवाएं दे रहे हैं। वर्षों की सेवा के बावजूद नियमित कर्मचारी जैसी सेवा सुरक्षा और स्थायित्व नहीं मिलने का मुद्दा लंबे समय से बना हुआ है। अब 3,630 पदों को नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू होने से कर्मचारियों में नियमितीकरण की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि अंतिम लाभ नियम अधिसूचित होने और शासन की आगामी कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

Central Employees के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन आयोग से DA तक इन फैसलों का है इंतजार

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अगले दो महीने काफी अहम रहने वाले हैं। दरअसल, इन दो महीनों में ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) पर फैसला होगा बल्कि आठवें वेतन आयोग की कई अहम बैठकें भी होने वाली हैं। इन बैठकों के बाद वेतन आयोग कुछ अहम फैसले ले सकता है। आइए डिटेल में जान लेते हैं। कब होगा डीए पर फैसला? केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी जुलाई 2026 के महंगाई भत्ते (DA) में बदलाव पर सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो सरकार दशहरे तक इसका ऐलान कर सकती है। इस बार दशहरा 20 अक्टूबर को है। इसका मतलब है कि 20 अक्टूबर तक डीए का ऐलान हो सकता है। बता दें कि डीए की दर साल में दो बार एक तय फॉर्मूले के आधार पर बदली जाती है, जो 'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स' (AICPI-IW) से जुड़ा होता है। सरकार ने 1 जनवरी 2026 से DA को 2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 58% से 60% कर दिया था। पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत यानी डीआर को भी बढ़ाकर 60% कर दिया गया था। अब 3 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई से दिसंबर तक के लिए डीए बढ़कर 63% हो जाएगा। 8वें वेतन आयोग की ताबड़तोड़ बैठकें आठवें वेतन आयोग के गठन को 10 महीने पूरे होने वाले हैं। गठन के 10 महीने बाद अब वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट को बनाने की तैयारी में है। जानकार बताते हैं कि वेतन आयोग की कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकों का अंतिम दौर चल रहा है। 8वें वेतन आयोग की आने वाली बैठकें -9 सितंबर को पुडुचेरी में बातचीत -16 से 18 सितंबर तक चंडीगढ़ में बातचीत -7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बातचीत यह संभव है कि वेतन आयोग अब अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और जनवरी तक अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वां वेतन आयोग बनाया था। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को स्थापित किया गया था। यह अस्थायी संस्था संबंधित सरकारी निकायों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत के बाद सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी। इसके दायरे में वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा में सुधार जैसे विषय शामिल हैं। उम्मीद है कि वेतन आयोग की फाइनल रिपोर्ट मई-जून 2027 तक पेश की जाएगी। अगर सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते या पेंशन में कोई बदलाव किया जाता है, तो यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा। छठे और सातवें वेतन आयोग के दौरान, फिटमेंट फैक्टर क्रमशः 1.86 और 2.57 तय किए गए थे। 8वें वेतन आयोग के लिए, BPMS, NC(JCM) और AIDEF जैसे यूनियन और संगठन 3 से 4 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

खनन से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस, छत्तीसगढ़ बदल रहा औद्योगिक तस्वीर

रायपुर माइनिंग से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग तक, छत्तीसगढ़ लगा रहा दांव छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण पर आधारित रही है। अब राज्य इस पहचान को बदलते हुए कच्चे संसाधनों की बजाय वैल्यू एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंगका केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की औद्योगिक रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है। राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में इस बदलाव का आधार तैयार किया गया है। इस नीति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, रक्षा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिजों का आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों का केंद्र बनाना है। *करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव* औद्योगिक नीति लागू होने के बाद से राज्य में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावप्राप्त हुए हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों से आगे बढ़कर एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों से जुड़ा है। नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं। इसी क्रम में राजनांदगांव मेंइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0)को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और करीब 9,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार आने की उम्मीद है। *स्टील से आगे ग्रीन स्टील की ओर* स्टील उत्पादन में मजबूत आधार रखने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के उत्पादन पर जोर दे रहा है। देश में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने के बीचग्रीन स्टीलराज्य के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरा है। पिछले महीने आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओंने इस क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत किया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधन, मौजूदा स्टील उद्योग और ऊर्जा आधार का इस्तेमाल उच्च मूल्य वाले स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है। *फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में नई संभावनाएं* फार्मास्यूटिकल्स भी राज्य की नई औद्योगिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में करीब992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावआए हैं, जबकि 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत देशभर में 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ में EMC 2.0 जैसी पहल इस राष्ट्रीय सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर देती है। *संसाधन से उत्पाद तक* बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास की रणनीति केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं। निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, SIPB और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है। छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब लक्ष्य इन संसाधनों से आगे बढ़करउच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्माणकरना है। इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रीन स्टील और फार्मा से एआई तक नए क्षेत्रों में बढ़ता निवेश संकेत दे रहा है कि राज्य अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी पॉवर की नई इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर का करेंगे रोल-आउट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी (क्रॉम्पटन एंड ग्रीव्स) पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर के रोल-आउट का शुभारंभ करेंगे। करीब 50 एकड़ में स्थापित यह इकाई एक ही स्थान पर स्थित भारत की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगस्त 2025 में इस संयंत्र का भूमि-पूजन किया था और अब करीब 13 से 14 महीने में यहां उत्पादन प्रारंभ हो गया है। सीहोर में स्थापित यह आधुनिक इकाई देश में बढ़ती विद्युत जरूरतों को देखते हुए उच्च क्षमता वाले पॉवर ट्रांसफॉर्मर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यहां 220 केवी से लेकर 1200 केवी श्रेणी के पॉवर ट्रांसफॉर्मर बनाए जाएंगे। इकाई की उत्पादन क्षमता हर माह 35 पॉवर ट्रांसफॉर्मर तैयार करने की होगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली इकाई एक ही स्थान पर स्थापित होने से देश में उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन उपकरणों के निर्माण को मजबूती मिलेगी। सीहोर में तैयार होने वाले उच्च क्षमता के ट्रांसफॉर्मर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ वैश्विक बाजारों तक भी पहुंचेंगे। इकाई में तैयार होने वाले ट्रांसफॉर्मर विद्युत क्षेत्र के साथ डेटा सेंटर, रेलवे, नवकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस तथा ट्रांसमिशन अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं में उपयोग किए जाएंगे। सीजी की इस इकाई से सीहोर में 2000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।  

प्रसव के लिए छह हजार रुपये मांगने के आरोप पर डॉक्टर हटाई, ओटी अटेंडेंट बर्खास्त

लखनऊ बीकेटी के राम सागर मिश्र हॉस्पिटल में ऑपरेशन से प्रसव के नाम पर छह हजार रुपये मांगने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। आरोपी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा सिंह को अस्पताल से हटाकर माल सीएचसी भेज दिया गया, जबकि ओटी अटेंडेंट देवेंद्र कुमार सिंह को बर्खास्त कर दिया गया है।  आरोप है कि भवानीपुर निवासी लल्ला बुधवार सुबह अपनी गर्भवती पत्नी धर्मी को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी और ओटी में ले जाने के बाद परिजनों से छह हजार रुपये मांगे गए। रुपये देने में असमर्थता जताने पर ऑपरेशन टालने और मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग हरकत में आया। इस पूरे प्रकरण की जांच मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. उमेश सचान करेंगे। डिप्टी सीएम ने एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच में दोषी पाए जाने वालों पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राम सागर मिश्र हॉस्पिटल का अतिरिक्त कार्यभार इटौंजा सीएचसी की डॉ. शबा आफरीन को सौंपा गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि मरीजों और तीमारदारों को परेशान करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

MP में आफत की बारिश! दमोह-टीकमगढ़ रेड अलर्ट पर, 30 जिलों में बरसेंगे बादल

भोपाल पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर बने स्पष्ट निम्न दबाव के क्षेत्र और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से आ रही ट्रफ लाइनों के कारण पूरे प्रदेश में मानसूनी हलचल तेज कर दी है। गुरुवार को प्रदेश के कई अंचलों में झमाझम वर्षा हुई। शाम 5:30 बजे तक सबसे ज्यादा 33 मिलीमीटर पानी नरसिंहपुर और छतरपुर के नौगांव में बरसा। इसके अलावा ग्वालियर और टीकमगढ़ में 27 मिलीमीटर, रायसेन में 15 मिलीमीटर, दतिया में 13 मिलीमीटर और शिवपुरी में 10 मिलीमीटर वर्षा हुई। राजधानी भोपाल में दिनभर काले घने बादल छाए रहे, सिटी क्षेत्र में जहां फुहारें पड़ीं, वहीं बैरागढ़ इलाके में 2.0 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार स्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र दक्षिण की ओर झुका हुआ है और अगले 24 घंटों में दक्षिण उत्तर प्रदेश व उससे लगे उत्तर मप्र से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर आगे बढ़ेगा। इसके चलते मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए दमोह और टीकमगढ़ में अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है। ग्वालियर-सागर समेत 13 जिलों में ऑरेंज, 17 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने रायसेन, गुना, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, सागर, छतरपुर, निवाड़ी और पांढुर्णा में अति भारी वर्षा का आरेंज अलर्ट जारी किया है। विदिशा, सीहोर और राजगढ़ समेत 17 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। राजधानी भोपाल, हरदा और बुरहानपुर समेत अन्य 17 जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा के आसार जताए हैं। शाम साढ़े बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा (मिलीमीटर में) छिंदवाड़ा — 1.0, गुना — 2.0, नर्मदापुरम — 6.0, जबलपुर — 2.0, मंडला — 9.0, राजगढ़ — 1.0, रीवा — 0.3, सागर — 2.0, सिवनी — 3.0, श्योपुर — 9.0। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में) भोपाल — अधिकतम: 27.0, न्यूनतम: 22.8। इंदौर — अधिकतम: 27.9, न्यूनतम: 21.9। ग्वालियर — अधिकतम: 28.0, न्यूनतम: 25.9। जबलपुर — अधिकतम: 24.5, न्यूनतम: 22.6।

Bandhavgarh Tiger Reserve: टाइगर सफारी होगी और खास, गाइड्स को मिला विशेष प्रशिक्षण; जल्द खुलेगा कोर जोन

उमरिया  उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों कोर जोन में पर्यटन पूरी तरह से बंद है. इसी बीच मानसून सीजन के दौरान गाइड्स की स्पेशल ट्रेनिंग चल रही है. यह ट्रेनिंग इसलिए दी जा रही है जिससे कि नए सीजन की शुरुआत के साथ ही वे पर्यटकों को और बेहतर तरीके से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का भ्रमण करा सकें. पहले बैच में 29 गाइड ने दो दिवसीय ट्रेनिंग में हिस्सा लिया।  गाइड्स के लिए दो दिवसीय ट्रेनिंग बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया "बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले बैच की दो दिवसीय ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई. ट्रेनिंग में 29 गाइड्स ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के दौरान गाइड्स को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की जैव विविधता, वन्यजीव, सरीसृपों, पक्षियों, वनस्पतियों, कीटों तथा वन्यजीवों के विभिन्न अनुकूलनों से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने जानकारी दी गई।  साथ ही गाइडों के व्यक्तित्व विकास, ग्रूमिंग, भूमिका एवं दायित्व और ईको-टूरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सत्र आयोजित किए गए. प्रशिक्षण के दूसरे दिन ताला पर्यटन क्षेत्र में फील्ड विजिट आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवास का मैदानी स्तर पर अवलोकन कराया गया. साथ ही प्रकृति व्याख्या के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया गया।  ट्रेनिंग में 29 गाइड्स ने लिया हिस्सा दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान सभी निर्धारित सत्र एवं व्याख्यान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए. प्रशिक्षण में शामिल 29 गाइड्स ने कार्यक्रम की तारीफ करते हुए इसे अपने ज्ञान एवं व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने की दिशा में उपयोगी पहल बताया. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के गाइड के इस विशेष ट्रेनिंग का मकसद गाइड्स को केवल पर्यटकों को वन्यजीव दिखाने तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता के प्रभावी व्याख्याकार के रूप में और अधिक सक्षम बनाना रहा। 

सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट को सुमन रोडमैप 2030 में मिली जगह

भोपाल  मध्यप्रदेश की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए संचालित नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा विकसित सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस एवं अन्य राज्यों में लागू किए जाने वाले स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में मान्यता मिली है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ समुदाय की भागीदारी, डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट जैसे नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन पहलों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने में सहायता मिल रही है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की इन पहलों का राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में स्वीकार किया जाना प्रदेश में किए जा रहे नवाचारों की प्रभावशीलता का प्रमाण है। लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यशाला में हुआ प्रदर्शन 2 एवं 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में मध्यप्रदेश की सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट पहलों को प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला में इन पहलों को समुदाय से जुड़ाव मजबूत करने, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक पहुंच आसान बनाने तथा महिलाओं एवं उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं को समझने और प्राप्त करने में सहायता देने के लिए सराहा गया। राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के समक्ष मध्यप्रदेश की इन पहलों की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता को प्रस्तुत किया गया। इनके प्रभावी मॉडल को देखते हुए इन्हें अन्य राज्यों में भी स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में अपनाया जाएगा। मध्यप्रदेश के दल में एमडी एनएचएम डॉ सलोनी सिडाना, वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ अर्चना मिश्रा सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। सुमन रोडमैप 2030 में मध्यप्रदेश की पहलें शामिल मध्यप्रदेश की इन दोनों पहलों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सुमन रोडमैप 2030 गाइडलाइंस में भी शामिल किया गया है। इससे मध्यप्रदेश के सफल मॉडलों को राज्य की सीमाओं से बाहर ले जाने और अन्य राज्यों में आवश्यकता एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का अवसर मिलेगा। सुमन पंचायत—समुदाय को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की पहल सुमन पंचायत का उद्देश्य पंचायत स्तर पर समुदाय की भागीदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित मातृत्व एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं, उनके परिवारों और समुदाय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा और सामुदायिक सहभागिता बढ़ने से गर्भवती महिलाओं की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच, समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल तथा नवजात की देखभाल के प्रति जागरूकता को मजबूत करने में सहायता मिलती है। सुमन पंचायत का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी न मानकर समुदाय और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया जाता है। सुमन पंचायत' (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पंचायत) पहल के अंतर्गत, यदि कोई ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में लगातार एक साल तक मातृ और शिशु मृत्यु दर को शून्य (जीरो) बनाए रखती है, तो सरकार द्वारा उसे ₹1 लाख (एक लाख रुपये) की प्रोत्साहन/पुरस्कार राशि दी जाती है। सुमन सखी चैटबॉट—डिजिटल माध्यम से जानकारी तक आसान पहुंच सुमन सखी चैटबॉट डिजिटल तकनीक के माध्यम से महिलाओं एवं परिवारों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अभिनव पहल है। चैटबॉट के माध्यम से गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी तक आसान पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं एवं परिवारों को सही समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए सक्षम बनाना है। डिजिटल माध्यम के उपयोग से जानकारी को अधिक सुलभ एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल तरीके से उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। यह पहल विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय के बीच सूचना के अंतर को कम करने की दिशा में उपयोगी है। अनमोल 2.0 डैशबोर्ड भी रहा कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय कार्यशाला में अनमोल 2.0 डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया गया। यह डैशबोर्ड हाई-रिस्क प्रेग्नेंट वोमेन (एचआरपी) की पहचान, ट्रैकिंग एवं फॉलोअप को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इससे स्वास्थ्य तंत्र के मैदानी एवं पर्यवेक्षण स्तर के अधिकारियों को ऐसी महिलाओं की पहचान करने, उनकी नियमित निगरानी करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से समय पर जोड़ने में सहायता मिलती है। अनमोल 2.0 में विशेष रूप से संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर फोकस किया गया है। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और निरंतर फॉलोअप से प्रसव के दौरान संभावित जोखिमों को कम करने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्था में रेफरल सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।  

अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

भोपाल  अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक एवं पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), द्वारा आयोजित 03 दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रभावी उपयोग, साक्ष्यों के संकलन एवं उनके न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान किया गया। समापन अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी)  पंकज वास्‍तव ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही है, ऐसे में विवेचना को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।  वास्तव ने बताया कि किसी विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में अनुसंधान अधिकारी को किस प्रकार दक्षतापूर्वक कार्य संपादित करना चाहिए तथा विभाग द्वारा प्रदाय अत्याधुनिक उपकरणों का अधिक से अधिक व्यावहारिक उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने डीएनए एवं डिजिटल साक्ष्य संकलन के संबंध में विस्तृत एवं इंटरेक्टिव सत्र भी लिया, जिसमें उन्होंने स्वयं प्रशिक्षणार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद किया।  वास्तव ने सीआईडी में पदस्थापना के दौरान समस्त कर्मचारियों को अपना व्यावसायिक स्तर औरों की तुलना में ऊँचा बनाए रखने हेतु प्रेरित किया, जिससे उनकी व्यावसायिक दक्षता में वृद्धि हो और वे पीड़ितों को त्वरित एवं सटीक न्याय दिलाने में अपनी सही भूमिका निभा सकें। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता का अपने-अपने क्षेत्राधिकार में समुचित उपयोग करें, जिससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार हो तथा प्रकरणों में न्यायालयीन साक्ष्य अधिक सुदृढ़ एवं प्रामाणिक बन सकें। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए समस्त आयोजक टीम, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यशाला में उप पुलिस अधीक्षक (फोटो), अपराध अनुसंधान विभाग, भोपाल  अमिताभ तिवारी एवं निरीक्षक  जाम सिंह ने अपराध घटनास्थल फोटोग्राफी के तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल की फोटोग्राफी विवेचना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील हिस्सा है, जिसमें साक्ष्यों को उनकी मूल स्थिति में, व्यवस्थित क्रम (Overall, Mid-range एवं Close-up Photography) में तथा बिना किसी छेड़छाड़ के दस्तावेजीकृत किया जाना आवश्यक है। सत्र में घटनास्थल की वीडियोग्राफी, मृत शरीर, अस्त्र-शस्त्र, रक्त के धब्बे, पद-चिन्ह एवं अन्य भौतिक साक्ष्यों के फोटोग्राफिक साक्ष्यीकरण की मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) पर चर्चा की।  तिवारी ने फोटोग्राफिक साक्ष्यों के न्यायालयीन प्रमाणीकरण (Court Authentication) की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया, जिसमें फोटोग्राफ की चेन ऑफ कस्टडी (Chain of Custody) बनाए रखना, समय-दिनांक एवं जियो-लोकेशन का उल्लेख तथा न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुतीकरण के दौरान बरती जाने वाली विधिक सावधानियाँ शामिल हैं। उन्होंने डिजिटल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी में साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने के तकनीकी उपायों पर भी प्रकाश डाला, जिससे विवेचना अधिकारी न्यायालय में मजबूती से साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें। कार्यशाला के अंतिम सत्र में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों, विषय-वस्तु एवं व्यावहारिक उपयोगिता के संबंध में फीडबैक लिया गया। समापन कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय एवं  प्रशांत खरे, सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के अतिरिक्त FSL, डॉक्यूमेंट, फिंगरप्रिंट, कम्प्यूटर्स एवं फोटो शाखा के विषय-विशेषज्ञ तथा समस्त प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रभावी पुलिसिंग का आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पुलिसिंग एवं अपराध अनुसंधान से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी एवं व्यावहारिक दक्षता को बढ़ाना तथा अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक साक्ष्यों के अधिक प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यशाला के सफल समापन के साथ प्रतिभागियों को अपराध घटना स्थल के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफिक साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक, तकनीक आधारित एवं साक्ष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिसिंग की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की प्रभावशीलता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।    

~SKM प्रधानमंत्री से मिलने का समय दिये जाने का इंतज़ार कर रहा है ताकि उन्हें ज्ञापन सौंपा जा सके और SKM प्रतिनिधिमंडल के साथ खेती-किसानी से जुड़े संकट पर चर्चा की जा सके

 दिल्ली आज हुई एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में, SKM के नेताओं ने बताया कि उन्होंने PMO को एक पत्र भेजकर प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है, ताकि वे भारत के किसानों की मांगों का ज्ञापन सौंप सकें। हालांकि PMO को SKM का पत्र मिल गया है, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से अभी तक मिलने का कोई समय नहीं दिया गया है। इसलिए SKM का मानना है कि प्रधानमंत्री तक भारत के उन किसानों का पहुँच पाना मुश्किल हैं जो देश की आबादी का 65% हिस्सा हैं। यह हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री भारत के लोगों के एक बहुत बड़े हिस्से के प्रतिनिधियों से मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं; इससे पता चलता है कि RSS-BJP गठबंधन को भारत के किसानों की कितनी कम परवाह है। SKM को उम्मीद है कि समझदारी से काम लिया जाएगा और प्रधानमंत्री, संसदीय प्रणाली और भारत के संविधान की लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए, SKM के नेतृत्व वाले किसान प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे। साथ ही, वे केंद्र सरकार द्वारा 9 दिसंबर, 2021 को SKM को दिए गए लिखित आश्वासन को लागू न किए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे। याद दिला दें कि जो ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा जाना है, वही ज्ञापन पूरे भारत में सभी चुने हुए प्रतिनिधियों – यानी मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विधायकों – को भी सौंपा जा रहा है। इस ज्ञापन में संसद और विधानसभाओं से मांग की गई है कि वे MSP@C2+50% के लिए कानून बनाएं, 42,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दें, यह सुनिश्चित करें कि लोगों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कोई भी FTA (मुक्त व्यापार समझौते) न हों, किसानों का पूरा कर्ज माफ करने के लिए कदम उठाएं, और कृषि संकट, बेरोजगारी, मजबूरी में पलायन तथा किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्याओं को खत्म करने के लिए नीतियां बनाएं। साथ ही, इसमें 4 लेबर कोड को रद्द करने, मनरेगा (MGNREGA) को बहाल करने और राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने और विभाजित किये जाने वाले पूल (जिससे सेस व सरचार्ज षामिल हैं।) में 50 प्रतिषत की हिस्सेदारी के राज्यों के अधिकार की रक्षा की जाये। SKM ने केंद्र सरकार का ध्यान कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली मनमानी नीतियों के खिलाफ किसानों में बढ़ते गुस्से की ओर दिलाया है। प्राप्त जानकारी  के मुताबिक, SKM की ओर से 10 अगस्त को बुलाए गए विरोध प्रदर्शन में 480 से ज़्यादा ज़िलों में लगभग दस लाख लोगों ने हिस्सा लिया। यह पूरे देश में हुआ एक अहम विरोध प्रदर्शन था, जिसमें मोदी सरकार के खिलाफ आम लोगों का बढ़ता गुस्सा साफ दिखा। इसमें छात्र, युवा और महिलाओं के वर्गों ने भी हिस्सा लिया। SKM ने 3 अक्टूबर 2026 – यानी लखीमपुर खीरी शहीद दिवस – को 1 लाख गांवों में महापंचायतें करने का ऐलान किया है। 26 नवंबर 2026 से किसानों के संघर्ष को फिर से शुरू करने के लिए 10 लाख किसान वॉलंटियर्स (जिनमें 2.5 लाख महिला किसान शामिल हैं) की सूची  जारी की जाएगी। महापंचायतों में इन मुद्दों पर प्रस्ताव पास किए जाएंगे: 1. केंद्र सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2021 को SKM को दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू करना; 2. दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर 736 शहीद किसानों के सम्मान में शहीद स्मारक बनाना; 3. भारत के लोगों पर जन-विरोधी FTA थोपने के लिए अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने झुकने वाली कॉर्पोरेट-सांप्रदायिक मोदी सरकार से लड़ने के लिए मज़दूर-किसान एकता बनाना। अगर मोदी सरकार किसानों की अहम मांगों को नज़रअंदाज़ करती रही, तो SKM की नेशनल काउंसिल और जनरल बॉडी 12 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में बैठक करेगी। इस बैठक में 26 नवंबर, 2026 से किसानों के आंदोलन को फिर से शुरू करने के तरीके, जगहों और दूसरी ज़रूरी बातों पर फ़ैसला लिया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को एसकेएम राष्ट्रीय समन्वय समिति के सदस्य डॉ. अशोक धावले, अविक साहा, डॉ. सुनीलम, राजन क्षीरसागर, सत्यवान और पी कृष्णप्रसाद ने संबोधित किया।